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	<title>अम्बेडकर &amp;laquo; WordPress.com Tag Feed</title>
	<link>http://wordpress.com/tag/अम्बेडकर/</link>
	<description>Feed of posts on WordPress.com tagged "अम्बेडकर"</description>
	<pubDate>Sat, 17 May 2008 02:45:15 +0000</pubDate>

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<title><![CDATA[ गांधी , अम्बेडकर और मिट्टी की पट्टियाँ (३) : अफ़लातून]]></title>
<link>http://samatavadi.wordpress.com/?p=292</link>
<pubDate>Fri, 18 Apr 2008 05:30:16 +0000</pubDate>
<dc:creator>अफ़लातून</dc:creator>
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<description><![CDATA[    लोकनायक जयप्रकाश और महात्मा गांधी ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>    लोकनायक जयप्रकाश और महात्मा गांधी के जीवन और विचार यात्राओं के विकासक्रम को नजरअन्दाज करके विसंगतिपूर्ण उद्धरण प्रस्तुत किए जाँए तो बहुत आसानी से जे.पी को मार्क्सवादी और गांधीजी को जाति - प्रथा का पक्षधर होने के भ्रामक निष्कर्ष निकाले जा सकते हैं । गांधी जी को इस प्रकार की विसंगतियों की परवाह नहीं थी । उनकी हर मौलिक ( किसी अन्य व्यक्ति द्वारा सम्पादित अथवा संकलित नहीं ) पुस्तक में " पाठकों से " निवेदन में यह स्पष्ट कहा जाता है कि <strong>" सत्य की खोज " में मैंने कई विचारों का त्याग किया है और नयी चीजें सीखीं हैं । सुधी पाठक , यदि उन्हें मेरी दिमागी दुरुस्ती पर भरोसा हो तो एक ही विषय पर बाद की तिथि में कही गयी बाद की बात को ही ग्रहण करेंगे । </strong>जे.पी. <strong>मेरी विचार यात्रा</strong>  में इसी प्रकार की सावधानी बरतने का पाठकों से आग्रह करते हैं । वर्णाश्रम का जन्मना - कर्मणा सिद्धान्त , जाति - प्रथा तथा रोटी - बेटी व्यवहार के सन्दर्भ में गांधी जी के विचार - आचार के विकासक्रम को उपर्युक्त सावधानी के साथ ही समझा जाना चाहिए । <strong>वर्तमान समय में बुद्धिवादियों का एक समूह सती - प्रथा और वर्णव्यवस्था का पक्षधर है । कुछ राजनैतिक हल्कों में इस समूह को 'हिन्दू नक्सलाइट' नाम दिया गया है ( धरमपाल ,बनवारी आदि) ।  "गांधी बनाम अम्बेडकर" की बहस के बहाने इन लोगों ने वर्णव्यवस्था के पक्ष में तथा जाति प्रथा को मजबूत करने के हेतु से गांधी जी के कुछ अद्धरण प्रस्तुत किये हैं । ऐसा करना उनकी बौद्धिक बेईमानी का परिचायक है ।</strong></p>
<p>    गांधी जी वर्णव्यवस्था का आधार जन्मना और कर्मणा दोनों मानते थे । पुश्तैनी गुणों के संरक्षण की अपनी परिकल्पना के कारण उन्होंने अपने वर्न में विवाह को कफी समय तक इष्ट माना । हालांकि रोटी-बेटी के प्रतिबन्ध हिन्दू धर्म के अविभाज्य अंग नहीं हैं ऐसा उनका मानना था । अस्पृश्यता के मसले पर कांग्रेस ने हिन्दू महासभा को सहयोगी बनाया था । डॉ. अम्बेडकर ने इसकी आलोचना की है । परन्तु महामनाअ मालवीय द्वारा साम्प्रदायिकता का विरोध तथा काशी विश्वविद्यालय में दलित छात्र-छात्राओं के पठन-पाठन तथा छात्रावासीय जीवन में आनेवाली जातीय-विभेद तहा छूआछूत की कठिनाइयों को दूर करने उनके द्वारा स्वयं पहल करने के उदाहरण से इस 'सहयोग' का सकारात्मक पहलू प्रकट होता है। काशी विश्वविद्यालय के दो चर्चित पूर्व विद्यार्थी श्री रामधन ( अब स्वर्गस्थ)  और स्व. जगजीवनराम के छात्र जीवन के अनुभव इसके प्रमाण हैं । परस्पर सम्मान के बावजूद महामना और गांधी जी के बीच रोटी - बेटी के प्रतिबन्ध के सन्दर्भ में मतभेद था । कलकत्ता की एक महिला कार्यकर्ता ने गांधी जी से इस मतभेद की बात पूछी थी । उसे गांधी जी ने उत्तर दिया - " रोटी - बेटी का प्रतिबन्ध हिन्दू-धर्म का अविभाज्य अंग नहीं है । यह रूढ़ि हो गई है । हरिजनों और दूसरी जातियों के बीच हरगिज भेद नहीं रचा जा सकता है ( <em>महादेव भाई की डायरी , खण्ड दो , पृ. ११७ </em>) । सोनार जाति के एक सज्जन ने अन्तर्जातीय विवाह करने के सन्दर्भ में गांधी जी से व्यक्तिगत सलाह मांगी थी । गांधी जी ने उन्हें लिखा,"जात-पाँत की पाबन्दियों का धर्म के साथ कोई सम्बन्ध नहीं है । यह सही है कि वह हिन्दू धर्म में बहुत समय से चली आ रही रूढ़ि बन गयी है । मगर रूढ़ियां तो समय - समय पर बदलती ही रहती हैं ।" ( <em>महादेव भाई की डायरी , खण्ड दो , पृ. १५५ </em>) । एक आर्यसमाजी श्री धर्मदेव ने वर्णाश्रम के सन्दर्भ में यरवदा जेल में १७ -१-१९३३ को गांधीजी से लम्बी बातचीत हुई थी । वर्णाश्रम पर बोलते हुए गांधी जी ने कहा " मेरी तो आजकल साधना चल रही है ।इस मामले में मैं आत्मविश्वास से नहीं बोल सकता क्योंकि मेरी साधना थोड़ी है । " ( <em>महादेवभाइ की डायरी खण्ड - ३ ,पृ. ६१ </em>) उसी दिन लेडी टेकरसी ने गांधी जी से मिश्र विवाह की बात छेड़ी औए कहा " ये सनातनी इस मिश्र विवाह से बहुत डर गए हैं। " गांधी जी ने कहा - " अब यह भी मैं समझा दूँ । आज अस्पृश्यता के सिलसिले में मैं इसका प्रचार नहीं करता । पर इसमें कोई शक नहीं कि यह चीज मुझे पसन्द है । इसी चीज के बारे में निरन्तर विचार चलते रहते हैं और मेरे विचार अधिकाधिक स्पष्ट होते जा रहे हैं । मेरे सामने सवाल किया जाए तब जवाब देते-देते भी मेरे विचारों में स्पष्टता बढ़ती रहती है । " ( <em>महादेवभाई की डायरी , भाग - ३ , पृ. ६६-६७ </em>) । सुरेश बनर्जी नामक एक कार्यकर्ता ने लिखा कि बंगाल में जात-पांत टूटे यही अस्पृश्यता निवारण कहलाएगा । उन्हें गांधीजी ने लिखा - " मैं आप से इस बारे में पूरी तरह सहमत हूँ कि जातियों को नष्ट होना ही पड़ेगा । लेकिन यह मेरी जिन्दगी में होगा या नहीं , यह मैं नहीं जानता। इन दोनों मुद्दों को  एक दूसरे से मिलाकर हमें दोनों को बिगाड़ना नहीं चाहिए । अस्पृश्यता आत्मा का हनन करने वाला पाप है । जात-पांत सामाजिक बुराई है । आप अपनी हमेशा की लगन के साथ जात-पांत से भिड़ जाइए । इसमें आपको मेरा अच्छा सहयोग मिलेगा ।" ( <em>महादेवभाई की डायरी ,खण्ड दो , पृ. १०४ ) </em>। इसी दौर में वर्ण व्यवस्था के वर्तमान स्वरूप के बारे में गांधी जी ने १४ - २ - १९३३ को कहा - " हम, सब शूद्र हो गए हैं इस अर्थ में मैं अम्बेडकर से सहमत हूँ ।"( <em>महादेवभाई की डायरी खण्ड तीन , पृ, - १४३ ) </em>। डॉ. अम्बेडकर ने मई १९३६ के एक लेख में गांधी जी के इस विषय पर दृष्टिकोण के सन्दर्भ में लिखा था , " हमें प्रतीक्षा करनी चाहिए कि उन्होंने जिस तरह जाति पर विश्वास करना छोड़ दिया है , उसी तरह वे वर्ण में विश्वास करना छोड़ देंगे । " ( <em>राष्ट्रीय सहारा , २४-४-९४ द्वारा उद्धृत डॉ. अम्बेडकर का मई १९३६ का लेख ) </em>।</p>
<p>    १९४५ से गांधी जी ने घोषित कर दिया था कि वे सिर्फ उन विवाहों में शामिल होंगे जिनमें एक पक्ष हरिजन हो । <strong>इस लेखक के माता-पिता का विवाह अन्तर्जातीय और अन्तरप्रान्तीय था - गांधी जी ने उन्हें आशीर्वाद के पत्र में लिखा कि अन्तरप्रान्तीय विवाह होने के कारण तुम्हें न्यूनतम उत्तीर्ण होने के अंक दूंगा लेकिन प्रथम श्रेणी के अंक तो सवर्ण-अवर्ण विवाह को ही मिलेंगे ।</strong> सवर्ण दलित विवाहों के सन्दर्भ में ७ - ७ - १९४६ के 'हरिजन ' में गांधीजी ने लिखा " ऐसे विवाहों की अन्तिम कसौटी यह है कि वे दोनों पक्षों में सेवाभाव विकसित करें । ऐसे विवाह से जुड़ी रूढ़िजन्य कठिनाइयाँ हर अन्तर्जातीय विवाह द्वारा किसी हद तक दूर होती जाएंगी । अन्तत: एक ही जाति रह जाएगी जिसे हम भंगी के सुन्दर नाम से जानते हैं - भंगी यानी सुधारक अथवा गन्दगी को दूर करनेवाला । हम सब प्रार्थना करें कि ऐसा मंगल-प्रभात शीघ्र होगा ।" ( <em>कलेक्टेड वर्क्स ऑफ़ महात्मा गांधी , खण्ड - ८४ , पृ. ३८८-३८९ ) </em>। जातियों के उन्मूलन के बाद वर्गों का  विभाजन आड़ा ( हॉरिज़ॉन्टल) होगा ,खड़ा (वर्टिकल) नहीं - गांधीजी ने ऐसी कल्पना की है ।</p>
<p><strong>[ जारी ]</strong></p>
<p><strong><a href="http://samatavadi.wordpress.com/2008/04/16/gandhi_ambedkar/" target="_blank">भाग १ </a></strong></p>
<p><strong><a href="http://samatavadi.wordpress.com/2008/04/17/gandhi_ambedkar2/" target="_blank">भाग २</a></strong></p>
<p> </p>
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<title><![CDATA[लाइनक्स उबुँटू का सबसे आधुनिक संसकरण मात्र १५ दिन में]]></title>
<link>http://nopiracy.wordpress.com/?p=28</link>
<pubDate>Wed, 09 Apr 2008 11:21:53 +0000</pubDate>
<dc:creator>oskanpur</dc:creator>
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<description><![CDATA[लाइनक्स उबुँटू के सबसे आधुनिक संसकरण ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>लाइनक्स उबुँटू के सबसे आधुनिक संसकरण में अब मात्र १५ दिन बाकी - २४ अप्रैल को स्वयं <a title="लाइनक्स उबुँटू - डाउनलोड करें" href="http://www.ubuntu.com/getubuntu/download" target="_blank">डाउनलोड करें</a> और अपने नवीन अथवा खटारा कम्प्यूटर में नया जीवन फूँक दें &#124;</p>
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<title><![CDATA[Developer collaboration - Canonical launches Bazaar based on Python]]></title>
<link>http://oslucknow.wordpress.com/2008/01/23/developer-collaboration-canonical-launches-bazaar-based-on-python/</link>
<pubDate>Wed, 23 Jan 2008 13:38:03 +0000</pubDate>
<dc:creator>oskanpur</dc:creator>
<guid>http://oslucknow.wordpress.com/2008/01/23/developer-collaboration-canonical-launches-bazaar-based-on-python/</guid>
<description><![CDATA[Canonical has released the stable version of Bazaar - A Distributed Software Version control system ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>Canonical has released the stable version of Bazaar - A Distributed Software Version control system for distributed teams of innovative and open source, modern community based software development.<br />
Bazaar 1.0 has been written in Python software language - a software language that is much in demand and commands a lot of respect in the Open Software community - which sadly is lacking in India presently even though Indian software majors have garnered immense amounts of profits but for strategic reasons are not very happy to promote the spread of free and open source software among Indian schools, colleges and universities due to fear of disturbing their monopolies and business models.<br />
Among the features of BAZAAR are :<br />
1. Software developers who are familiar with ECLIPSE Software development platform, can begin to be very productive as they can learn and use BAZAAR easily and in short learning curve.<br />
2. It is based on stable Python API and is compatible with Python versions 2.4 and above. It already has a set of about 20 Plugins, available for immediate use by communities of software developers.<br />
3. No need for coordination with central code base as Commits can be made independently.<br />
4. Features and fixes can be developed in independent branches and merged into main development trunk at any time. This feature is ideal for teaching distributed software development to students in remote locations of India.<br />
5. Software development can be done in creative models, whether as creative and intelligent individual developers, who contribute more code than others, or as cooperating software teams.<br />
6. Dual level of support is available for the GNU GPL licensed Bazaar as users can buy commercial support, or if their software developers and teams are really world class, they can use freely available and generous shared community support.<br />
More information : <a href="http://www.ubuntu.com/news/bazaar-v1-release">http://www.ubuntu.com/news/bazaar-v1-release</a></p>
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