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	<title>अरमान &amp;laquo; WordPress.com Tag Feed</title>
	<link>http://wordpress.com/tag/अरमान/</link>
	<description>Feed of posts on WordPress.com tagged "अरमान"</description>
	<pubDate>Sat, 06 Sep 2008 16:22:41 +0000</pubDate>

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	<language>en</language>

<item>
<title><![CDATA[एतराज]]></title>
<link>http://kmuskan.wordpress.com/?p=75</link>
<pubDate>Tue, 15 Jul 2008 12:32:46 +0000</pubDate>
<dc:creator>kmuskan</dc:creator>
<guid>http://kmuskan.wordpress.com/?p=75</guid>
<description><![CDATA[जब आंखो मे सपने थे ,अरमान थे

तो तुम्हे ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<div id="post_num_251246" class="postcolor"><strong><span style="color:orange;"><span style="font-size:14pt;line-height:100%;">जब आंखो मे सपने थे ,अरमान थे</span></span></strong></div>
<div class="postcolor"><strong><span style="color:orange;"><span style="font-size:14pt;line-height:100%;"><br />
तो तुम्हे तब भी एतराज था</span></span></strong></div>
<div class="postcolor"><strong><span style="color:orange;"><span style="font-size:14pt;line-height:100%;"><br />
आज जब हर सपना ,हर अरमान मर चुका है</span></span></strong></div>
<div class="postcolor"><strong><span style="color:orange;"><span style="font-size:14pt;line-height:100%;"><br />
तो तुम्हे अब भी एतराज है</span></span></strong></div>
<div class="postcolor"><strong><span style="color:orange;"><span style="font-size:14pt;line-height:100%;"><br />
तुम्हे ये हक किसने कब दिया</span></span></strong></div>
<div class="postcolor"><strong><span style="color:orange;"><span style="font-size:14pt;line-height:100%;"><br />
आज मुझे तुम्हारे इस हक पे एतराज है </span></span></strong></div>
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]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[तुमको मैंने दिल दिया है]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=1015</link>
<pubDate>Wed, 09 Jul 2008 19:12:52 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=1015</guid>
<description><![CDATA[तुमको मैंने दिल दिया है
यह जाँ भी दे दे]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">तुमको मैंने दिल दिया है<br />
यह जाँ भी दे दें... कह दो...<br />
अरमानों के फूल खिले हैं<br />
तुम पे बरसा दें... कह दो...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">तुमको अजनबी रास्तों में<br />
अपना हमसफ़र बना लें<br />
मेरा जीना मरना तुमसे<br />
ख़ुद को मिटा दें... कह दो...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">चेहरे पर हया रहने दो<br />
चाँद पे बादल उड़ने दो<br />
बेचैन धड़कनें रवाँ-रवाँ<br />
यह शाम बुझा दें... कह दो...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">लोगों के कहने पर मत जा<br />
मुझको और ना तड़पा<br />
यह प्यार ख़त्म न होगा<br />
ख़ुद को भुला दें... कह दो...</span></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[दर्द-ऐ-दिल ने उसे याद किया है...]]></title>
<link>http://meredilne.wordpress.com/?p=4</link>
<pubDate>Fri, 23 May 2008 07:32:58 +0000</pubDate>
<dc:creator>Amarjeet Singh</dc:creator>
<guid>http://meredilne.wordpress.com/?p=4</guid>
<description><![CDATA[दर्द-ऐ-दिल ने उसे याद किया है फिर एक बार]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>दर्द-ऐ-दिल ने उसे याद किया है फिर एक बार,<br />
दिल के अरमानों का खून किया है फिर एक बार,<br />
दर्द-ऐ-दिल ने उसे याद किया है फिर एक बार,</p>
<p>सोचा था बिन देखे उसे चैन से मर न पाएंगे फिर एक बार,<br />
देख कर आज उसे चैन से सो न पाएंगे फिर एक बार,<br />
दर्द-ऐ-दिल ने उसे याद किया है फिर एक बार,</p>
<p>न जाने क्यों फिर आज दिल दिया है किसी को फिर एक बार,<br />
फिर जोड़ रहा हूँ टूटे दिल के टुकड़े फिर एक बार,<br />
दिल के अरमानों का खून किया है फिर एक बार,</p>
<p>सोचता हूँ मांग लू खुदा से मौत की दुआ फिर एक बार,<br />
मांग ली खुदा से क्यों उसके लिए दुआ फिर एक बार,<br />
दर्द-ऐ-दिल ने उसे याद किया है फिर एक बार,</p>
<p>भूल के भी न भूल सका दिल उसे फिर एक बार,<br />
दर्द-ऐ-दिल ने उसे याद किया है फिर एक बार,<br />
दिल के अरमानों का खून किया है फिर एक बार,</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[नग़मे खिलने लगे हैं]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=916</link>
<pubDate>Fri, 14 Mar 2008 14:32:25 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=916</guid>
<description><![CDATA[नग़मे खिलने लगे हैं नज़्म महकने लगी है
]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">नग़मे खिलने लगे हैं नज़्म महकने लगी है<br />
तेरे एहसास पे धड़कन ग़ज़ल कहने लगी है<br />
साँवली आँखों में सपनों की ख़ुशबू घुलने लगी है<br />
मुसलसल ख़ाबों की भीड़ पलकों में लगने लगी है</font></p>
<p><font color="#000000">बंजर सूखे मैदान सारे सब्ज़ होने लग गये<br />
फूल अरमानों के मेरे मन में खिलने लग गये<br />
सौंधे आसमाँ पर सतरंगी धनुष खिल गया है<br />
पर्वतों पे घटा झुकने लगी है बरसने लगी है</font></p>
<p><font color="#000000">नग़मे खिलने लगे हैं नज़्म महकने लगी है<br />
तेरे एहसास पे धड़कन ग़ज़ल कहने लगी है</font></p>
<p><font color="#000000">दुआओं की सदा मेरी फ़ुग़ाँ असर कर जायेगी<br />
रहमत ख़ुदा की होगी मेरी ज़ीस्त घर आयेगी<br />
बहारो-फ़िज़ा का रंग हर-सू बदलने लगा है<br />
तेरे तस्व्वुर की मद्धम धूप खिलने लगी है</font></p>
<p><font color="#000000">साँवली आँखों में सपनों की ख़ुशबू घुलने लगी है<br />
मुसलसल ख़ाबों की भीड़ पलकों में लगने लगी है</font></p>
<p>मुसलसल= लगातार, ज़ीस्त= जीवन, हर-सू= चारों तरफ़</p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००२</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[क्या वह तुम थे]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=882</link>
<pubDate>Fri, 07 Mar 2008 09:13:44 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=882</guid>
<description><![CDATA[क्या वह तुम थे
जो आँखों को महका गये
तमन]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">क्या वह तुम थे<br />
जो आँखों को महका गये<br />
तमन्ना दबी-सी<br />
मेरे दिल में सुलगा गये<br />
मैं कितना तन्हा फिर रहा था<br />
जी रहा था यों कि<br />
रोज़ मर रहा था<br />
तुमने जो धड़कनें जवाँ कीं<br />
मुझको ख़्यालों में उलझा गये</font></p>
<p><font color="#000000">शाम के साथ तुमको देखकर<br />
बेक़ाबू हो गया मैं<br />
क्या कहूँ ख़ुद को<br />
अन्जाम-ए-जुस्त-जू हो गया मैं<br />
दूरियों का यह परदा<br />
उठ जाये ज़रा<br />
तुम अरमान मेरे पिघला गये</font></p>
<p><font color="#000000">यह तस्वीरे-नशा<br />
मैं पलकों से उठाऊँ कैसे<br />
डर लगता है<br />
खो जाये न कहीं<br />
इक बार तो गुज़रो<br />
मेरे दर से कि मैं समझूँ<br />
तुम हो यहीं<br />
तुम ढलती शाम<br />
यह कैसे ख़ाब दिखला गये</font></p>
<p><font color="#000000">मेरी साँसों को यह ठण्डक<br />
कैसी पड़ गयी है<br />
एक चाहत के ख़ाब की<br />
शमअ जल गयी है<br />
मैं बदला कहाँ हूँ वही हूँ<br />
तुम जानम मुझे<br />
बीती गलियाँ लौटा गये</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[मेरे दिल की पगडंडियों से गुज़र जा]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=857</link>
<pubDate>Wed, 27 Feb 2008 18:18:55 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=857</guid>
<description><![CDATA[मेरे दिल की पगडंडियों से गुज़र जा एक दफ़]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">मेरे दिल की पगडंडियों से गुज़र जा एक दफ़ा फिर<br />
मेरे जिस्मो-जाँ को जीवन दे जा ओ बेवफ़ा फिर</font></p>
<p><font color="#000000">इन राहों पर हल्के गुलाबी फूल खिलने लगे हैं<br />
बेज़ुबाँ दिल में मोहब्बत के अरमान जगने लगे हैं<br />
आ निगाहों में आ जा, कर दे धड़कनें रवाँ फिर<br />
मेरे दिल की पगडंडियों से गुज़र जा एक दफ़ा फिर</font></p>
<p><font color="#000000">उदासियाँ, तन्हाइयाँ, मुझसे शिकवे करने लगी हैं<br />
आँखों में, रोज़ ख़ाबों में, तेरी तस्वीरें बनने लगी हैं<br />
आ मेरे सनम कर दे धुँधली-धुँधली यादें जवाँ फिर<br />
मेरे दिल की पगडंडियों से गुज़र जा एक दफ़ा फिर</font></p>
<p><font color="#000000">यह प्यार मुझको दुनिया से गुमराह करने लगा है<br />
तेरा दीवाना हर चेहरे में तेरा चेहरा पढ़ने लगा है<br />
बता तू, मुझसे मिलेगी, कैसे, कब और कहाँ फिर<br />
मेरे दिल की पगडंडियों से गुज़र जा एक दफ़ा फिर</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: ०४ मई २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[वह मौसम इक बार ]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=851</link>
<pubDate>Tue, 26 Feb 2008 17:24:01 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=851</guid>
<description><![CDATA[वह मौसम इक बार फिर सजा दे
प्यार करने की ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">वह मौसम इक बार फिर सजा दे<br />
प्यार करने की मुझको सज़ा दे<br />
दीवानों की तरह तुझको देखे जाऊँ<br />
हाथों की लकीरों में वह क़ज़ा दे</font></p>
<p><font color="#000000">अरमान पिघलकर ख़त्म न हो जायें<br />
दिल में साँसें दफ़्न न हो जायें<br />
अपने सीने से लगा ले मुझे<br />
दिल में अपने मुझको जगह दे</font></p>
<p><font color="#000000">तेरी राहों पर निगाह है मेरी<br />
मेरे दिल में सिर्फ़ चाह है तेरी<br />
मेरे जीवन को अपनी चाहतों में डुबा दे<br />
मेरे सनम जीने की मुझको वजह दे</font></p>
<p><font color="#000000">वह मौसम इक बार फिर सजा दे<br />
प्यार करने की मुझको सज़ा दे...</font></p>
<p><font color="#000000">सूनी-सूनी आँखें रूख़ी-रूख़ी आँखें<br />
ख़ाली-ख़ाली है सीना ख़ुश्क़ हैं साँसें<br />
जुदा रहके जुदाई में जीना मुमकिन नहीं<br />
मेरे प्यार को अपने प्यार की फ़िज़ा दे</font></p>
<p><font color="#000000">दीवानों की तरह तुझको देखे जाऊँ<br />
हाथों की लकीरों में वह क़ज़ा दे...</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: ३० अप्रैल २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[रोते हैं सब से छिपकर ]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=786</link>
<pubDate>Sat, 16 Feb 2008 05:15:13 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=786</guid>
<description><![CDATA[जब-जब सनम तेरी यादें आती हैं
कैसे कहें ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">जब-जब सनम तेरी यादें आती हैं<br />
कैसे कहें कितना तन्हा कर जाती हैं<br />
रोते हैं सब से छिपकर अँधेरों में<br />
ख़ुद से इतना रुसवा कर जाती हैं </font></p>
<p><font color="#000000">अँधेरी राहों-सा दिल सूना हो जाता है<br />
जब आँखों में तेरा सपना टूट जाता है<br />
ख़्यालों की राहों पर मुलाक़ातें होती हैं<br />
मिलते हैं जब पुरानी बातें होती हैं </font></p>
<p><font color="#000000">ख़्याल अरमानों की डोली सजाते हैं<br />
उठता है दिल में धड़कनों का तूफ़ान<br />
ख़ुशबू तेरी बहती है इन फ़िज़ाओं में<br />
ढूँढ़ता हूँ राहों में तेरे पैरों के निशान </font></p>
<p><font color="#000000">जब-जब सनम तेरी यादें आती हैं<br />
कैसे कहें कितना तन्हा कर जाती हैं<br />
रोते हैं सब से छिपकर अँधेरों में<br />
ख़ुद से इतना रुसवा कर जाती हैं </font></p>
<p><font color="#000000">हर आहट तेरा नामो-निशाँ देती है<br />
तू आज भी सखी मुझमें रहती है<br />
सितारों इन नज़ारों में तू दिखती है<br />
अँधेरों से उजालों से तू बनती है</font></p>
<p><font color="#000000">जब-जब सनम तेरी यादें आती हैं<br />
कैसे कहें कितना तन्हा कर जाती हैं<br />
रोते हैं सब से छिपकर अँधेरों में<br />
ख़ुद से इतना रुसवा कर जाती हैं</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[कब कहाँ रुकें, कब तक चलें]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=762</link>
<pubDate>Wed, 13 Feb 2008 07:12:45 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=762</guid>
<description><![CDATA[कब कहाँ रुकें, कब तक चलें
ठहर जायें जहा]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">कब कहाँ रुकें, कब तक चलें<br />
ठहर जायें जहाँ दो पल के लिए<br />
वह मंज़िल है कहाँ? तुम जहाँ<br />
कहानियाँ कहती हों वादियाँ<br />
हर लम्हा रोशन हो प्यार से<br />
जिसको चाहें उसका दीदार मिले</font></p>
<p><font color="#000000">कब कहाँ रुकें, कब तक चलें<br />
ठहर जायें जहाँ दो पल के लिए<br />
वह मंज़िल है कहाँ? तुम जहाँ<br />
ख़ुशियाँ हो दिल में सारे जहाँ की<br />
चाहें जो दिल से वह हमें मिले<br />
पूरे हों सभी अरमान दिल के...</font></p>
<p><font color="#000000">कब कहाँ रुकें, कब तक चलें<br />
ठहर जायें जहाँ दो पल के लिए<br />
वह मंज़िल है कहाँ? तुम जहाँ<br />
जैसे वादे हैं वैसे ही इरादे हैं<br />
यही दुआ है दर्दे-दिल की<br />
जहाँ भी रुकें हम, वहाँ तू मिले</font></p>
<p><font color="#000000">आमीन, आमीन, आमीन, आमीन</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[कुछ-कुछ होता है सनम ]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=754</link>
<pubDate>Tue, 12 Feb 2008 12:27:02 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=754</guid>
<description><![CDATA[कुछ-कुछ होता है सनम
जब-जब तुमसे मिलते ह]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">कुछ-कुछ होता है सनम<br />
जब-जब तुमसे मिलते हैं<br />
कैसे कहें हम सनम<br />
तुमसे मोहब्बत करते हैं...</font></p>
<p><font color="#000000">दिल डरता है लब सीं रखते हैं<br />
ख़ामोशी से आँखों को पढ़ते हैं<br />
हर आहट पर दिल धड़कता है<br />
यह तुमसे अकीदत करता है</font></p>
<p><font color="#000000">कुछ-कुछ होता है सनम<br />
जब-जब तुमसे मिलते हैं<br />
कैसे कहें हम सनम<br />
तुमसे मोहब्बत करते हैं...</font></p>
<p><font color="#000000">मेरे दिल में हज़ारों अरमान<br />
सुबह-शाम जलते-बुझते हैं<br />
कोई तूफ़ान दिल में उठता है<br />
तेरी जोत पर दिल जलता है</font></p>
<p><font color="#000000">कुछ-कुछ होता है सनम<br />
जब-जब तुमसे मिलते हैं<br />
कैसे कहें हम सनम<br />
तुमसे मोहब्बत करते हैं...</font></p>
<p><font color="#000000">तेरे ख़ाब दिल में रखते हैं<br />
मिलो तुम रब से दुआ करते हैं<br />
दिल यह ज़ुबाँ समझता है<br />
कहते नहीं तुम दिल सुनता है</font></p>
<p><font color="#000000">कुछ-कुछ होता है सनम<br />
जब-जब तुमसे मिलते हैं<br />
कैसे कहें हम सनम<br />
तुमसे मोहब्बत करते हैं...</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[दिल में दुआ दिल में पिया]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=722</link>
<pubDate>Thu, 07 Feb 2008 15:30:46 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=722</guid>
<description><![CDATA[दिल में दुआ दिल में पिया
दिल ने चाहा दि]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">दिल में दुआ दिल में पिया<br />
दिल ने चाहा दिल ने किया</font></p>
<p><font color="#000000">इश्क़ पर किसका ज़ोर है<br />
बहती हवाओं में शोर है<br />
दिल में दरकती हैं आहें<br />
उनके बिना सूनी हैं बाँहें<br />
चले आओ, चले आओ<br />
ठहर गयीं हैं सब राहें</font></p>
<p><font color="#000000">दिल में दुआ दिल में पिया<br />
दिल ने चाहा दिल ने किया</font></p>
<p><font color="#000000">दिल की कहानियाँ पुरानी हैं<br />
फिर भी उनको सुनानी हैं<br />
दिल में दर्द जलते-बुझते हैं<br />
यह किस्से कहते न बनते हैं<br />
साँसों में फिर उठा धुँआ<br />
कुछ अरमान सुलगते हैं</font></p>
<p><font color="#000000">दिल में दुआ दिल में पिया<br />
दिल ने चाहा दिल ने किया</font></p>
<p><font color="#000000">उगती बेलें तो दीवानी है<br />
जाने कहाँ-कहाँ उगती है<br />
समन्दर किनारों की<br />
चट्टानों-सी यह दुनिया है<br />
फिर भी यहाँ पर जाने<br />
कितनों ने इश्क़ किया है</font></p>
<p><font color="#000000">दिल में दुआ दिल में पिया<br />
दिल ने चाहा दिल ने किया</font></p>
<p><font color="#000000">आग में जलता सूरज रोज़<br />
तपिश देने निकलता है<br />
लेकिन फिर भी यहाँ<br />
चाँद का ही ज़ोर चलता है<br />
इश्क़ में जो मुक़ाम बनते हैं<br />
यहाँ कितनों को मिलते हैं?</font></p>
<p><font color="#000000">दिल में दुआ दिल में किया<br />
दिल ने चाहा दिल ने किया</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[सिवा इससे जो भी हो, करेंगे]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/12/25/%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%be-%e0%a4%87%e0%a4%b8%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%9c%e0%a5%8b-%e0%a4%ad%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a5%8b-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a5%87/</link>
<pubDate>Tue, 25 Dec 2007 13:30:39 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/12/25/%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%be-%e0%a4%87%e0%a4%b8%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%9c%e0%a5%8b-%e0%a4%ad%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a5%8b-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a5%87/</guid>
<description><![CDATA[सिवा इससे जो भी हो, करेंगे
महब्बत तुझ ब]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">सिवा इससे जो भी हो, करेंगे<br />
महब्बत तुझ बिन किसी से न करेंगे</font></p>
<p><font color="#000000">क़ज़ा ने भी हमसे ताक़त आज़माई की<br />
तुझ बिन हम जहाँ से न चलेंगे</font></p>
<p><font color="#000000">ख़ूब-रू कितने ही हुस्न दिखाते हैं<br />
हम उनसे मुँह लगाई न करेंगे</font></p>
<p><font color="#000000">बियाबाँ में ढकेला मुझको ग़मों ने<br />
तू कहे गर यह सफ़र हम करेंगे</font></p>
<p><font color="#000000">अरमान तेरा न जायेगा ख़ातिर से<br />
हम दश्त को भी जाए-चश्म करेंगे</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
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<title><![CDATA[जब बात करते हुए देखता हूँ]]></title>
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<pubDate>Mon, 27 Aug 2007 21:31:01 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
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<description><![CDATA[तमन्ना बेताब रहती है
और खा़हिश परेशाँ
]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">तमन्ना बेताब रहती है<br />
और खा़हिश परेशाँ<br />
उदास आईने-<br />
खु़द-ब-खु़द टूटते रहते हैं<br />
राह चलती रहती है<br />
पाँव थक जाते हैं<br />
उम्र कम होती रहती है<br />
साल बढ़ते रहते हैं</span></p>
<p><span style="color:#000000;">रात जागती है आँखों में<br />
दिन वीरान उजाड़ गुज़रता है<br />
उँगलियों में उँगलियों से<br />
और निगाहों को बदन से<br />
जब बात करते हुए देखता हूँ<br />
तेरी याद खा़मोश रह जाती है<br />
कुछ सुलगता रहता है सीने में</span></p>
<p><span style="color:#000000;">तन्हाई का साया न टलता है<br />
दिल की ख़ला न घटती है<br />
अरमान सूखे हुए पत्तों की तरह<br />
ज़मीन पर पडे़ रहते हैं<br />
आँसुओं में भीगते-भीगते<br />
ज़मीन में जज़्ब हो जाते हैं<br />
दफ़्न हो जाते हैं</span></p>
<p><span style="color:#000000;">दिल के टूटने से<br />
फ़र्क साँस लेने लग जाता है<br />
फ़ज़ा तो नहीं बदलती<br />
लेकिन उसकी छुअन<br />
और एहसास के ज़ख़्म हरे हो जाते हैं<br />
लम्हा-लम्हा मन ग़म में डूबता जाता है<br />
और गीला-गीला जलता रहता है<br />
</span> </p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति 'नज़र'</p>
]]></content:encoded>
</item>

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