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	<title>आइना &amp;laquo; WordPress.com Tag Feed</title>
	<link>http://wordpress.com/tag/आइना/</link>
	<description>Feed of posts on WordPress.com tagged "आइना"</description>
	<pubDate>Mon, 07 Jul 2008 10:19:41 +0000</pubDate>

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<item>
<title><![CDATA[मैं क्यों आज तक उसकी ख़ाहिश करता हूँ]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=1004</link>
<pubDate>Fri, 27 Jun 2008 08:14:00 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=1004</guid>
<description><![CDATA[मैं क्यों आज तक उसकी ख़ाहिश करता हूँ
ज]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">मैं क्यों आज तक उसकी ख़ाहिश करता हूँ<br />
जो मुझको भीड़ में अकेला छोड़कर गया है<br />
सुबह आज भी उसको आइनों में जोड़ता हूँ<br />
जो मेरे दिल को खिलौने-सा तोड़कर गया है...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">बे-तस्कीनियाँ उजले चेहरों से बढ़ती हैं<br />
हर पल मुझको अक्स की तरह पढ़ती हैं<br />
अंधेरी रात है मैं छत पर तन्हा बैठा हूँ<br />
एक-एक पल दोपहर-सा गुज़र रहा है...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">कोई उठाये मुझको या फिर बैठा रहने दे<br />
ख़ाबों के जंगल जलाये ना, धुँआ उड़ाये ना<br />
ख़ाहिशों का अम्बार है, दिल ज़ार-ज़ार है<br />
आँखों की नदिया सुखाये ना, चाँद जलाये ना</span></p>
<p><span style="color:#000000;">अजीब धुनकी में है दिल और कुछ नहीं है<br />
दर्द का ग़ुबार है दिल और कुछ नहीं है<br />
मुस्कुराहट जब खिली गुलाबी लबों पर<br />
एक हसीन ख़ाब सारी रात जागता रहा है...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">एक नयी परवाज़ दिखायी दी है आसमाँ में<br />
कुछ नये अन्दाज़ भी हैं उसकी ज़बाँ में<br />
बाँट नहीं सकता किसी से लम्हों के टुकड़े<br />
ख़ुदाया मेरा कोई नहीं इतने बड़े जहाँ में</span></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४ </p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[आइने-आइने ख़ुद को ढूँढ़ा]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=998</link>
<pubDate>Thu, 19 Jun 2008 09:29:56 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=998</guid>
<description><![CDATA[आइने-आइने ख़ुद को ढूँढ़ा
उनमें उतर के ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">आइने-आइने ख़ुद को ढूँढ़ा<br />
उनमें उतर के ख़ुद को ढूँढ़ा</span></p>
<p><span style="color:#000000;">कहीं भी पूरा नहीं था,<br />
मेरे जिस्म पे इश्क़ का चीरा नहीं था<br />
ख़ाली-ख़ाली था सूना-सूना था<br />
दिल मेरा, यह दिल मेरा...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">आइने-आइने ख़ुद को ढूँढ़ा<br />
उनमें उतर के ख़ुद को ढूँढ़ा</span></p>
<p><span style="color:#000000;">क़तरा-क़तरा हर एक क़तरा<br />
ज़हन से कोई न उतरा,<br />
मीठे-मीठे ज़हर के प्याले<br />
मैं भी एक उम्र से गुज़रा...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">आइने-आइने ख़ुद को ढूँढ़ा<br />
उनमें उतर के ख़ुद को ढूँढ़ा</span></p>
<p><span style="color:#000000;">मैंने पहल नहीं की थी<br />
मैं इस सब से परहेज़ रखता हूँ<br />
कितने मीठे होते हैं अय्यार<br />
मैं यह कब चखता हूँ...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">आइने-आइने ख़ुद को ढूँढ़ा<br />
उनमें उतर के ख़ुद को ढूँढ़ा</span></p>
<p><span style="color:#000000;">ऐसे अर्श पे कब था डेरा<br />
उगता है जहाँ, चटखा सवेरा<br />
तकलीफ़ तख़लीक़ होती रही<br />
दिल में नहीं होता बसेरा...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">आइने-आइने ख़ुद को ढूँढ़ा<br />
उनमें उतर के ख़ुद को ढूँढ़ा</span></p>
<p>अय्यार= चालाक, clever; अर्श= आसमाँ, sky; तख़लीक़= उद्भव, creation</p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४ </p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[खिली-खिली महकी बहारें हैं]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=971</link>
<pubDate>Wed, 07 May 2008 02:35:50 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=971</guid>
<description><![CDATA[खिली-खिली महकी बहारें हैं
झीलों पर बहत]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">खिली-खिली महकी बहारें हैं<br />
झीलों पर बहते शिकारें हैं<br />
ठण्डी-ठण्डी सौंधी हवाएँ हैं<br />
गीले पत्तों को खनकाएँ हैं</span></p>
<p><span style="color:#000000;">जाने कैसी तलब जागी है<br />
जाने किसका इन्तिज़ार है<br />
बेज़ार-सा यह दिल मेरा<br />
किसके लिए गुलज़ार है</span></p>
<p><span style="color:#000000;">आज ऐसा क्यों लग रहा है<br />
नये-नये सब नज़ारें हैं<br />
खिली-खिली महकी बहारें हैं<br />
झीलों पर बहते शिकारें हैं</span></p>
<p><span style="color:#000000;">शबनमी रातों का यह चाँद<br />
और उजली-उजली चाँदनी<br />
आइनाए-दिल में कौन यार है<br />
इश्क़ जिससे वजहसार है</span></p>
<p><span style="color:#000000;">बंजर ज़मीने-दिल से आज<br />
उलझे हुए मखमली धारे हैं<br />
खिली-खिली महकी बहारें हैं<br />
झीलों पर बहते शिकारें हैं</span></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति 'नज़र'<br />
लेखन वर्ष: २००४</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[तुम जो देखते हो]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=901</link>
<pubDate>Thu, 13 Mar 2008 03:22:53 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=901</guid>
<description><![CDATA[तुम जो देखते हो मैं भी जानता हूँ
यह सब ह]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">तुम जो देखते हो मैं भी जानता हूँ<br />
यह सब हुनर मैं भी जानता हूँ</font></p>
<p><font color="#000000">यह ख़ाब कच्चे तागे-सा है मगर<br />
सुबह टूट जायेगा मैं भी जानता हूँ</font></p>
<p><font color="#000000">रोज़ दरगाह जाके दुआ करते हो<br />
क्या माँगते हो मैं भी जानता हूँ</font></p>
<p><font color="#000000">उम्र गुज़र नहीं सकती साथ में<br />
इसका सबब मैं भी जानता हूँ</font></p>
<p><font color="#000000">ख़ुदा भी अपना ईमान खोता है यहाँ<br />
असूल दुनिया के मैं भी जानता हूँ</font></p>
<p><font color="#000000">इन्सान आइना है तक़दीर का<br />
क्यों टूट जाता है मैं भी जानता हूँ</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[तन्हाई मिटाने दो]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=870</link>
<pubDate>Sun, 02 Mar 2008 12:55:18 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=870</guid>
<description><![CDATA[तन्हाई मिटाने दो
किस्से सुनाने दो
सुब]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">तन्हाई मिटाने दो<br />
किस्से सुनाने दो<br />
सुबह बह जायेगी<br />
रोशनी उगाने दो</font></p>
<p><font color="#000000">तितलियों के परों-सी<br />
बारिश के घरों-सी<br />
छोटी-सी ज़िन्दगी यह<br />
किताब के हर्फ़ों-सी</font></p>
<p><font color="#000000">आइने में अक्स है<br />
वहाँ कौन शख़्स है<br />
मेंहदी धुल गयी सब<br />
मुझमें नक़्स है</font></p>
<p><font color="#000000">बदली और पवन ने<br />
गुल और चमन ने<br />
मुझको बहकाया है<br />
शिकारी और हरन ने</font></p>
<p><font color="#000000">फ़ुर्क़त में क़ुर्बत जैसे<br />
दर्द में मोहब्बत जैसे<br />
वह याद आये मुदाम<br />
दोस्ती में उल्फ़त जैसे</font></p>
<p><font color="#000000">नाराज़ है कौन यहाँ<br />
हमसे यह सारा जहाँ<br />
किस-किसको मनाऊँ<br />
इक यहाँ, इक वहाँ</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: ०५ जून २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[ज़हर पीकर जीने चले]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=854</link>
<pubDate>Wed, 27 Feb 2008 16:52:29 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=854</guid>
<description><![CDATA[ज़हर पीकर जीने चले
कच्चे-पक्के ज़ख़्म सी]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">ज़हर पीकर जीने चले<br />
कच्चे-पक्के ज़ख़्म सीने चले</font></p>
<p><font color="#000000">आँसू सूखे हुए थे<br />
पलकों से बरसते हैं<br />
सितारे सारी रात<br />
चाँद को तरसते हैं</font></p>
<p><font color="#000000">एक पूरा दिन पीने चले<br />
कच्चे-पक्के ज़ख़्म सीने चले</font></p>
<p><font color="#000000">महके-महके लगते हैं<br />
गीले पलाश के पल<br />
उड़ती फिरती रहती है<br />
तेरी प्यास की धूल</font></p>
<p><font color="#000000">काग़ज़ी यह आइने जले<br />
कच्चे-पक्के ज़ख़्म सीने चले</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[टूटे हुए चाँद को]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=827</link>
<pubDate>Mon, 25 Feb 2008 16:26:35 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=827</guid>
<description><![CDATA[टूटे हुए चाँद को सादे काग़ज़ में लपेटा ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">टूटे हुए चाँद को सादे काग़ज़ में लपेटा मैंने<br />
भीगे हुए सूरज को हथेलियों में समेटा मैंने<br />
तारे बसरने लगे और आसमाँ ख़ाली हो गया<br />
उसने एक आइने की तरह मुझे तोड़ दिया है<br />
...तोड़ दिया है</font></p>
<p><font color="#000000">जला दिये दिल के जज़्बात उसने<br />
बढ़ा दिये मेरे मुश्किलात उसने<br />
जीना मेरा जीना बहुत मुश्किल है<br />
यह ज़हर पीना बहुत मुश्किल है</font></p>
<p><font color="#000000">बहार में भी शाख़ों पर ख़िज़ाँ थी<br />
सूखी-सूखी बंजर हर फ़िज़ा थी<br />
फ़िज़ाएँ रंग बदलने लगी हैं<br />
हवाओं के साथ चलने लगी हैं मगर<br />
उसने निगाहों में खिलना छोड़ दिया है<br />
...छोड़ दिया है</font></p>
<p><font color="#000000">फ़िज़ाएँ मौसम के साथ खिलती हैं<br />
और मौसम बदलते रहते हैं<br />
मौसम बदला है तो फ़िज़ा भी बदलेगी<br />
बदले हुए मौसम ने हज़ार रास्तों को<br />
मेरी तरफ़ मोड़ दिया है, मोड़ दिया है<br />
...मोड़ दिया है</font></p>
<p><font color="#000000">शब्दों की स्याही में रिश्ते हैं<br />
फूलों के अर्क़ में रिश्ते हैं<br />
हर शब्द हर फूल में मिलते हैं<br />
हर जिस्म की शाखों पर खिलते हैं<br />
मिलते हैं बिछुड़ते हैं,<br />
बिछुड़ते हैं मिलते हैं<br />
समंदर की लहर जैसे चलते रहते हैं<br />
खिलते हैं महकते हैं<br />
बनते हैं बुझते हैं<br />
यह धूप-छाँव के जैसे रंग बदलते हैं</font></p>
<p><font color="#000000">उसने एक रिश्ता तोड़ा है इक जोड़ दिया है<br />
जोड़कर उसने रिश्ते को फिर तोड़ दिया है<br />
...तोड़ दिया है</font></p>
<p><font color="#000000">जला दिये दिल के जज़्बात उसने<br />
बढ़ा दिये मेरे मुश्किलात उसने<br />
जीना मेरा जीना बहुत मुश्किल है<br />
यह ज़हर पीना बहुत मुश्किल है</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९ अप्रैल २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[मेरी मोहब्बत है तू कहाँ]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=828</link>
<pubDate>Mon, 25 Feb 2008 16:25:52 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=828</guid>
<description><![CDATA[मेरी मोहब्बत, है तू कहाँ, तू कहाँ है
जिस]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">मेरी मोहब्बत, है तू कहाँ, तू कहाँ है<br />
जिस्म यहाँ, जान कहाँ, जान कहाँ है</font></p>
<p><font color="#000000">तड़प-तड़प कर साँसें जिस्म में पलती हैं<br />
दिन-रात दिल की आहों में जलती हैं<br />
यह मेरा नसीब है या वक़्त का क़तरा<br />
थाम लिया है किसने अब तक न गुज़रा</font></p>
<p><font color="#000000">मुझको आवाज़ दे है तू कहाँ, तू कहाँ है<br />
मेरे हमदम, मेरे हमनवाँ, तू कहाँ है...</font></p>
<p><font color="#000000">नीली शाम यह सूरज जब पिघलता है<br />
गुलाबी चाँद दो बोझल आँखों में गलता है<br />
पतझड़ को शाखों पर किसने सजाया है<br />
टूटे हुए आइने में अक्स अपना दिखाया है</font></p>
<p><font color="#000000">आ तू कभी मेरी बाँहों में आ, तू कहाँ है<br />
मेरे हमसफ़र, मेरे हमनवाँ, तू कहाँ है...</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९ अप्रैल २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[रक़ाबी चाँद जला दो]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=816</link>
<pubDate>Tue, 19 Feb 2008 13:01:58 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=816</guid>
<description><![CDATA[रक़ाबी चाँद जला दो
यह रात चाँदनी हो जाय]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">रक़ाबी चाँद जला दो<br />
यह रात चाँदनी हो जाये<br />
कभी तो पास बुला लो<br />
तेरी नज़दीकियों का<br />
मुझे एहसास हो जाये</font></p>
<p><font color="#000000">गुलाबी शाम ढलती है<br />
रोज़ गुज़रती हो<br />
मेरे घर के सामने से<br />
मैं दिल थाम के बैठा रहता हूँ<br />
आइना जब भी हो हाथों में<br />
उससे तेरी बातें करता हूँ...</font></p>
<p><font color="#000000">रक़ाबी चाँद जला दो<br />
यह रात चाँदनी हो जाये<br />
एक रिश्ता बना लो<br />
मुलाक़ात लाज़मी हो जाये</font></p>
<p><font color="#000000">तेरे सिले हुए लबों पर<br />
क्या इक़रार होगा<br />
मेरा ख़्याल है कि इज़हार होगा<br />
बात कोई नही, बात तुम में है<br />
मैं न हूँ शायद तुझमें<br />
पर तू मुझमें है...</font></p>
<p><font color="#000000">रक़ाबी चाँद जला दो<br />
यह रात चाँदनी हो जाये</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[काश वह कोई गुल होती ]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=698</link>
<pubDate>Tue, 05 Feb 2008 03:29:36 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=698</guid>
<description><![CDATA[काश वह कोई गुल होती
मैं उसे अपने लबों स]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">काश वह कोई गुल होती<br />
मैं उसे अपने लबों से चूम लेता<br />
गर वह कोई आइना होती<br />
मैं ख़ुद को उसमें उतार देता</font></p>
<p><font color="#000000">इश्क़ जला है कितनी रातों तक<br />
कोई समझता दर्द मैं बता देता</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २०००-२००१</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[तुमको न पाया तो खोया भी कुछ नहीं]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/12/28/%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%ae%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%a8-%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%a4%e0%a5%8b-%e0%a4%96%e0%a5%8b%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%ad%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%81%e0%a4%9b/</link>
<pubDate>Fri, 28 Dec 2007 15:39:13 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/12/28/%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%ae%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%a8-%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%a4%e0%a5%8b-%e0%a4%96%e0%a5%8b%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%ad%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%81%e0%a4%9b/</guid>
<description><![CDATA[तुमको न पाया तो खोया भी कुछ नहीं
पत्थर ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">तुमको न पाया तो खोया भी कुछ नहीं<br />
पत्थर है दिल मेरा नहीं सच नहीं</font></p>
<p><font color="#000000">मुझको यक़ीं ख़ुद पे नहीं है सनम<br />
दूर रहके तू मुझसे नहीं ख़ुश नहीं</font></p>
<p><font color="#000000">खोया होता जब मैंने तुझे पाया होता<br />
खोने-पाने पर किसी का कोई वश नहीं</font></p>
<p><font color="#000000">जो इश्क़ बचा हो आइनें में ज़रा भी<br />
हम साथ होंगे दिन वह भी दूर नहीं</font></p>
<p><font color="#000000">ख़फ़ा रहे तू मेरी किसी बात से अब<br />
इस बात में रत्ती भर भी सच नहीं</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[अब 'विनय' तेरे ग़म से ग़ाफ़िल नहीं रहा]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/09/19/%e0%a4%85%e0%a4%ac-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a4%af-%e0%a4%a4%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a5%87-%e0%a5%9a%e0%a4%ae-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a5%9a%e0%a4%be%e0%a5%9e%e0%a4%bf%e0%a4%b2-%e0%a4%a8%e0%a4%b9/</link>
<pubDate>Wed, 19 Sep 2007 19:45:51 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
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<description><![CDATA[अब ‘विनय’ तेरे ग़म से ग़ाफ़िल नहीं रहा
दे]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">अब ‘विनय’ तेरे ग़म से ग़ाफ़िल नहीं रहा<br />
देख तो वो मग़रूर वो संगदिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">हमें कोई शिबासी दे हमने तेरा राज़ न खोला<br />
पर जानाँ ये जान लो मैं बातिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">तेरी कही सुनी सब मुझे वक़्त ने भुला दी<br />
ये ग़ैर तेरी दुश्मनी के क़ाबिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">हमें जब नाज़ थे तो ये दर्द किसलिए हैं<br />
तेरे बाद कोई चेहरा मुस्तक़िल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">तुम हमसे पूछो वह शामे-माज़ी की तन्हाई<br />
कभी कोई इतना दिल में दाख़िल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">तुमने ख़ुद मुझे अपना दोस्त बनाया होता<br />
तुम्हें तो कोई काम कभी मुश्किल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">हमसे एक-एक कर सब हाथ छूटते गये<br />
मेरे कूचे में वो माहे-कामिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">सद्-हैफ़ो-अफ़सोस से कलेजा भर आया<br />
हाए मुझे सिवा ग़म कुछ हासिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">हमें कोई देता ताक़ते-नज़्ज़ाराए-हुस्न<br />
सुना  है मेरी राह में कोई हाइल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">साँसों का धुँआ दिल को दर्द देता है बहुत<br />
ज़िन्दगी में बाइसे-मसाइल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">वो गुफ़्त-गू वो मशविरे वो बयान अपने<br />
ख़ुदा के ज़ख़्म देखे तो मैं बिस्मिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">गर्दिशे-अय्याम की रवानी देखकर<br />
मेरा दिले-सौदा मुज़महिल</font><font color="#c0c0c0">1</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">अब इस चमन में फिरती है खुश्क सबा<br />
मस्जूदा कोई जल्वाए-गुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">किसके दिन उम्रभर एक से रहते हैं<br />
मुझमें तो वो हुस्ने-अमल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">मेरी काविश</font><font color="#c0c0c0">2</font> का किसी राह तो हासिल होगा<br />
हैफ़ मेरे ग़म की कोई मंज़िल नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">मैं अहदे-ज़ीस्त करके किससे तोड़ूँ<br />
मुझे तफ़रकाए-नाक़िसो-कामिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">मुझे तुम छोड़कर गये लेकिन क्या बताऊँ<br />
एक अरसा बर्क़े-सोज़े-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">तुमको जाना है तो जाओ कब हमने रोका है<br />
किसी के जाने का ग़म हमें बिल्कुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">इस दरया को ख़्वाहिश है समंदर की<br />
और सहाब का बरसना मुसलसल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">सू-ए-शिर्क सजदे-मस्जूद किये मैंने<br />
क्योंकि मैं तेरे कूचे का माइल</font><font color="#c0c0c0">3</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">अब किससे करूँगा उसकी जफ़ा का शिकवा<br />
आज से कोई दराज़ दस्तिए-क़ातिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">इस ज़र्फ़ कोई आये तो देखे हाल बीमार का<br />
वो पुरसिशे-जराहते-दिल</font><font color="#c0c0c0">4</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">अच्छा हुआ तुमने रोज़े-आख़िर न बोला<br />
रोज़े-विदा से कोई उक़्दाए-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">दु:ख गिनते-गिनते उम्र कट जायेगी<br />
किसी की इनायत किसी का तग़ाफ़ुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">फ़िज़ा क्यों इतनी ख़ामोश है गुलशन में<br />
क्या आशियाँ में नालाए-बुलबुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">था तब मिला नहीं, खोकर मिलता है कौन<br />
दिल मुझे ख़्याले-यारे-वस्ल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">मैं जिसको दोस्त कह नहीं सकता अब<br />
मुझे उसके लिए जज़्बाए-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">किसको खरोंचे हो अपने नाख़ून से तुम<br />
इस सीने में कोई जराहते-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">उर्दी-ओ-दै का अब मैं क्या ख़्याल रखूँ<br />
ये कैसी जलन, मुझे तपिशे-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">अपनी यकताई पर बेहद नाज़ था हमको<br />
आज भी है लेकिन वो मुतक़ाबिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">अब भी खिलती है शुआहाए-ख़ुर-फ़ज़िर <br />
मगर फ़िज़ा में शाहिद-ए-गुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">बहुत ढूँढ़ा हमने उसके जैसा, न पाया एक<br />
वो नमकपाशे-ख़राशे-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">अब ख़ुल्द में रहें या दोज़ख में रहें हम<br />
ऐ सनम मेरा तो आबो-गिल</font><font color="#c0c0c0">5</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">उस फ़ितनाख़ेज़ का नहीं अब डर मुझको<br />
कि मेरे दिल में स’इ-ए-बेहासिल</font><font color="#c0c0c0">6</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">आँखों से निक़ाब उठाओ कि वहम खुल जाये<br />
कि तुझमें वो तर्ज़े-तग़ाफ़ुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">कहने को तो ज़ामिन नहीं मुझसा ज़माने में<br />
पर जाने क्यों मुझे तहम्मुल</font><font color="#c0c0c0">7</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">वो जिसकी चाप से धड़कनें रुक जायें थीं<br />
ज़िन्दगी में वो हौले-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">ऐ लोगों मैं ख़ुद को किस ज़ात का बताऊँ<br />
सुना है तुममें ज़रा भी दीनो-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">दायम अपने बग़ल में पाओगे तुम हमको<br />
चाहो तो कह लो मैं तुझमें मुश्तमिल</font><font color="#c0c0c0">8</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">क्यों है मुझको तेरे रूठ कर जाने का ग़म<br />
जबकि जानते हो मैं कभी तेरा काइल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">कहता तो हूँ बात दिल की मगर क्या करूँ<br />
मेरा कोई भी ख़्याल मानिन्दे-गुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">उसकी ख़ामोश आँखों में अयाँ थीं बातें दिल की<br />
वो चाहकर भी कभी सू-ए-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">किया जो मैंने तुम्हें अपना समझकर किया<br />
ये दिल तेरी जफ़ा से मुनफ़’इल</font><font color="#c0c0c0">9</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">मैंने देखा था उसे जाते ख़ुल्द की ओर<br />
वो हलाके-फ़रेब-वफ़ा-ए-गुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">जो कभी साहिल पर था कभी समंदर में<br />
उसको दाग़े-हसरते-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">जिसपे लिखा करते थे तुम अपना नाम<br />
शख़्स वो आज गर्दे-साहिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">आज फ़ारिग</font><font color="#c0c0c0">10</font> हूँ कि तुम हो मेरे ग़मख़्वार<br />
मैं हरीफ़े-मतलबे-मुश्किल<font color="#c0c0c0">11</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">था तो थोड़ा बहुत मैं ये मानता हूँ लेकिन<br />
आज उतना भी तो सोज़िशे-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">मैं दर्द को दिल से जुदा कर सकता हूँ<br />
पर फ़ुसूने-ख़्वाहिशे-सैक़ल</font><font color="#c0c0c0">12</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">अब मैं किस मुँह से जाऊँ बज़्म में उसकी<br />
ये दिल दरख़ुर-ए-महफ़िल</font><font color="#c0c0c0">13</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">देखिए शाइबाए-ख़ूबिए-तक़दीर</font><font color="#c0c0c0">14</font> उसमें<br />
वो दिन गया कि रोज़े-अजल नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">इश्क़ फिरता था उस रोज़ गलियों-गलियों<br />
आज किसी में इतना भी ख़लल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">बढ़के आया तो लगा तेरा तीर इस दिल में<br />
चारासाज़ न हुआ पर जाँगुसिल</font><font color="#c0c0c0">15</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">किसपे लिखके भेजूँ मैं तुझे पयाम अपना<br />
पास औराक़े-लख़्ते-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">आस्माँ के पार जाने की तमन्ना थी उसको<br />
पर आइना-ए-बेमेहरि-ए-क़ातिल</font><font color="#c0c0c0">16</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">मेरे मुँह से न सुनो वज्हे-सुखन ईसा<br />
ख़ुद गुलों में रंगे-अदा-ए-गुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">मगर टूटा है किसी का नाज़ुक दिल मुझसे<br />
ये डर कि मैं क़ाबिले-सुम्बुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">अब कोई रहनुमा नहीं रहे-इश्क़ में<br />
तुम ख़ुश रहो तेरी राह में साइल</font><font color="#c0c0c0">17</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#999999">१. </font><font color="#000000">निष्तेज</font> २. <font color="#000000">कोशिश, द्वेष</font> ३. <font color="#000000">अनुरक्त, आसक्त</font> ४. <font color="#000000">दिल के ज़ख़्म का हाल पूछने वाला<br />
</font>५. <font color="#000000">शरीर और आकार</font> ६. <font color="#000000">निष्फल प्रयत्न</font> ७. <font color="#000000">दिल की घबराहट, सहनशक्ति</font> ८.<font color="#000000"> शामिल</font><br />
९. <font color="#000000">लज्जित</font> १०. <font color="#000000">निश्चिंत</font> ११. <font color="#000000">कठिन काम कर लेने वाला</font> १२. <font color="#000000">परिष्कृति की अभिलाषा का जादू</font><br />
१३. <font color="#000000">महफ़िल के योग्य</font> १४. <font color="#000000">सौभाग्य की झलक</font> १५. <font color="#000000">जानलेवा, दुखदायी</font><br />
१६. <font color="#000000">माशूक़ की बेरहमी का सुबूत</font> १७. <font color="#000000">उम्मीदवार, प्रश्नकर्ता</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति 'नज़र'<br />
लेखन वर्ष: २००५</p>
]]></content:encoded>
</item>
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<title><![CDATA[ज़िन्दगी के हर्फ़ बदल गये हैं]]></title>
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<pubDate>Mon, 27 Aug 2007 18:32:46 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
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<description><![CDATA[आइने रातभर रोते रहे
तस्वीरें रातभर जा]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">आइने रातभर रोते रहे<br />
तस्वीरें रातभर जागती रहीं<br />
लम्हे उम्रभर सिसकते रहे<br />
ख़ामोशियाँ उम्रभर ख़ाक फाँकती रहीं</span></p>
<p><span style="color:#000000;">यादें धूप में सूख रही हैं<br />
बातें सब मुरझा गयी हैं<br />
आँखों में दरार पड़ रही है<br />
सपने बंजर हो गये हैं</span></p>
<p><span style="color:#000000;">आँसू बर्फ़ बन गये हैं<br />
ख़ाहिशें तिनके चुन रही हैं<br />
आरज़ू के पाँव थक चुके हैं<br />
ख़्याल ज़मीन में दफ़्न हो गये हैं</span></p>
<p><span style="color:#000000;">साँसें सीने में भीग गयी हैं<br />
उदास सावन टपक रहा है<br />
जंगल तन्हाई में सुलगता है<br />
फूल पलकें झुकाये हुए हैं</span></p>
<p><span style="color:#000000;">ख़ुशबू बे-सदा गल रही है<br />
पलाश के फूल हँस रहे हैं<br />
जड़ें मिट्टी सोख रही हैं<br />
पत्ते सूखी बेलों ने डस लिये हैं</span></p>
<p><span style="color:#000000;">उजाले पत्थरों में जज़्ब हो गये हैं<br />
चाँद धुँध हो रहा है<br />
रात रेत हो गयी है<br />
सितारे रेत के दरया में बह रहे हैं</span></p>
<p><span style="color:#000000;">दर्द तेज़ाब हो गया है<br />
और खु़शी मग़रूर रहती है<br />
मैं शब्द उगलता रहता हूँ<br />
ज़िन्दगी के हर्फ़ बदल गये हैं</span></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’</p>
]]></content:encoded>
</item>

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