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	<title>आशियाना &amp;laquo; WordPress.com Tag Feed</title>
	<link>http://wordpress.com/tag/आशियाना/</link>
	<description>Feed of posts on WordPress.com tagged "आशियाना"</description>
	<pubDate>Sun, 12 Oct 2008 23:12:48 +0000</pubDate>

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	<language>en</language>

<item>
<title><![CDATA[पहली नज़र का पहला प्यार]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=859</link>
<pubDate>Thu, 28 Feb 2008 12:07:10 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2008/02/28/pahalii-nazar-ka-pahalaa-pyaar/</guid>
<description><![CDATA[पहली नज़र का पहला प्यार कर गया दीवाना
म]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">पहली नज़र का पहला प्यार कर गया दीवाना<br />
मेरा दिल यह बेचारा हो गया आशिक़ाना<br />
आँखों में बेताबी है, चैन कहाँ है<br />
डरता हूँ कहीं कोई बन जाये ना अफ़साना</font></p>
<p><font color="#000000">फूल हँसें हैं सारे, दिल धड़का है<br />
ठण्डी साँसों में जैसे शोला भड़का है<br />
उसका चेहरा चाँद है, नूर है<br />
लड़की नहीं वह इक हूर है<br />
थाम के दिल मैं राहों में खड़ा हूँ कि<br />
हो जाऊँ उसके तीरे-नज़र का निशाना</font></p>
<p><font color="#000000">पहली नज़र का पहला प्यार कर गया दीवाना<br />
अब मैं दिल में उसके बनाऊँगा आशियाना<br />
वह मेरी अब इक मंज़िल है<br />
उसकी बाँहो के सिवा कहाँ कोई मेरा ठिकाना</font></p>
<p><font color="#000000">उसको देखकर जी नहीं भरता है<br />
कैसे जताये उसे उस पर मरता है<br />
भोली-भाली वह सबसे जुदा है<br />
सबसे निराली उसकी अदा है<br />
आये वह कभी जो मेरी दुनिया में तो<br />
छोड़ दूँ उसके लिए मैं यह सारा ज़माना</font></p>
<p><font color="#000000">पहली नज़र का पहला प्यार कर गया दीवाना<br />
मेरा दिल यह बेचारा हो गया आशिक़ाना</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: ०८ मई २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[तुमको लौट के यहीं आना है]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=821</link>
<pubDate>Sat, 23 Feb 2008 22:22:05 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2008/02/24/tum-ko-laut-ke-yahiin-aana-hai/</guid>
<description><![CDATA[तुमको लौट के यहीं आना है (यहीं आना है)
त]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">तुमको लौट के यहीं आना है (यहीं आना है)<br />
तुम मानो या न मानो<br />
मेरा दिल तेरा आशियाना है (आशियाना है)<br />
तुम मानो या न मानो</font></p>
<p><font color="#000000">एक इल्ज़ाम देकर जा रहे हो ग़ैर की बाँहों में<br />
कभी तो तुम्हें उसको ठुकराना है<br />
तुम मानो या न मानो</font></p>
<p><font color="#000000">हम दोस्त थे तुमने अदू मान लिया जाने दो<br />
मुझे आज रब को भी आज़माना है<br />
तुम मानो या न मानो</font></p>
<p><font color="#000000">देखता हूँ यह रंग यह तेवर कब तलक हैं<br />
तुमको ख़ुद चलके मेरे पास आना है<br />
तुम मानो या न मानो</font></p>
<p><font color="#000000">जो गिरह तुमने ख़ुद डाली हमारे रिश्ते में<br />
उसको तुम्हें दुनिया से छुपाना है<br />
तुम मानो या न मानो</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति 'नज़र'<br />
लेखन वर्ष: १४ अप्रैल २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[बचपन की ख़ुशबू]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/12/16/%e0%a4%ac%e0%a4%9a%e0%a4%aa%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%96%e0%a4%bc%e0%a5%81%e0%a4%b6%e0%a4%ac%e0%a5%82/</link>
<pubDate>Sun, 16 Dec 2007 22:17:07 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2007/12/16/bachpan-kii-khushboo/</guid>
<description><![CDATA[मेरे बचपन की ख़ुशबू मेरे साथ ही चलती ह]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">मेरे बचपन की ख़ुशबू मेरे साथ ही चलती है<br />
कभी मेरे ख़ाब में कभी किताब में मिलती है</font></p>
<p><font color="#000000">कभी पतंगों के साथ आसमाँ में उड़ती है<br />
कभी मालती की बेलों में महकती खिलती है</font></p>
<p><font color="#000000">रुचि सोनल जूली नीता बिन्नू संजू पवन प्रीति सोना<br />
जैसे नामों की बिखरी तस्वीर जोड़ते मिलती है</font></p>
<p><font color="#000000">कभी स्कूल में अभय राजीव हर्पित को पूछती है<br />
कभी सआदत गंज की गलियों में टहलती है</font></p>
<p><font color="#000000">फाख़्ता और गौरैया के आशियानों से गुज़रते हुए<br />
मेरे बाएँ पाँव का भँवर सहलाती टटोलती है</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र'<br />
लेखन वर्ष: २००२</p>
]]></content:encoded>
</item>
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<title><![CDATA[गरीबों को 10 हजार में घर]]></title>
<link>http://paryavas.wordpress.com/2007/06/13/%e0%a4%97%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%ac%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%8b-10-%e0%a4%b9%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%98%e0%a4%b0/</link>
<pubDate>Wed, 13 Jun 2007 07:03:36 +0000</pubDate>
<dc:creator>paryavas</dc:creator>
<guid>http://paryavas.hi.wordpress.com/2007/06/13/%e0%a4%97%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%ac%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%8b-10-%e0%a4%b9%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%98%e0%a4%b0/</guid>
<description><![CDATA[भारत सरकार के शहरी विकास और गरीबी उन्]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>भारत सरकार के शहरी विकास और गरीबी उन्मूलन  मंत्रालय ने घोषणा की है कि वह ऐसी योजना पर काम रही है जिसके पूरा हो जाने पर शहरी गरीबों को 10 हजार रूपये में घर मिल सकता है. शौचालय, स्नानागार सहित दो कमरों का यह मकान गरीबों को ध्यान में रखकर डिजाईन किया जा रहा है.</p>
<p>पहले चरण में यह योजना दिल्ली, हरियाणा, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल, झारखण्ड, पंजाब, हिमाचल, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में लागू की जाएगी.</p>
<p>दिल्ली सरकार ने पहल कर दी है और उसने 33 हजार फ्लैट बनावाने का निर्णय लिया है. हर फ्लैट पर लगभग एक लाख 45 हजार का खर्च आयेगा लेकिन यह गरीबों को 90 प्रतिशत रियायत पर आवंटित किया जाएगा.</p>
<p>यह योजना सिरे चढ़ेगी इसमें संदेह है. इसके दो कारण हैं. शहर के किसी भी हिस्से की जमीन अब सस्ती नहीं रह गयी है. दूसरा छोटे स्तर पर काम करनेवाले बिचौलिये इसका फायदा गरीब तक पहुंचने नहीं देंगे. मुंबई में लंबे समय से इस बात की कोशिश चल रही है कि झुग्गियों की जगह लोगों को सस्ते फ्लैट उपलब्ध करा दिये जाएं. लेकिन आज तक यह योजना सिरे नहीं चढ़ पायी है.</p>
<p>शहरों में यह आलम है कि घर खरीदना या बनाना हो तो किसी की भी कमाई पूरी नहीं पड़ती. बिल्डर लॉबी ने बहुत सुनियोजित तरीके से आम आदमी को घर  के सुख से मरहूम कर दिया है. एक आम आदमी अब धरती पर अपने एक टुकड़े के लिए तरस रहा है. सरकार की यह योजना सिरे चढ़ती है और कामयाब रहती है तो निश्चित रूप से आम आदमी का भला होगा.  </p>
]]></content:encoded>
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