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	<title>आशीष-पालीवाल &amp;laquo; WordPress.com Tag Feed</title>
	<link>http://wordpress.com/tag/आशीष-पालीवाल/</link>
	<description>Feed of posts on WordPress.com tagged "आशीष-पालीवाल"</description>
	<pubDate>Mon, 07 Jul 2008 10:21:10 +0000</pubDate>

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	<language>en</language>

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<title><![CDATA[मैं मूक कवि ]]></title>
<link>http://iitbkivaani.wordpress.com/2007/11/13/%e0%a4%ae%e0%a5%88%e0%a4%82-%e0%a4%ae%e0%a5%82%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a4%b5%e0%a4%bf/</link>
<pubDate>Tue, 13 Nov 2007 11:44:20 +0000</pubDate>
<dc:creator>vikash</dc:creator>
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<description><![CDATA[मैं मूक कवि हूँ ,मूक कवि
मैं कह नही सकता]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>मैं मूक कवि हूँ ,मूक कवि<br />
मैं कह नही सकता भावो को<br />
इसलिये उकेरता रहता हूँ<br />
कागज़ पर डगमग नावों को &#124;&#124;</p>
<p>मैं सुन सकता हूँ ,सुनता हूँ<br />
तरह-तरह की बातो को<br />
कितने पंछी के कलरव को<br />
आंधी मे डालो-पातो को&#124;&#124;</p>
<p>चुपचाप मैं बस सुनता रहता<br />
जो जगती मुझको सुनाती है<br />
कभी,वीणा की मधुर तान<br />
कभी,घृणित शोर बन जाती है&#124;&#124;</p>
<p>जितने है मुँह उतनी बाते<br />
एक अवसर आने की देरी<br />
और अवसर आते ही देखो<br />
कैसे बजती है रणभेरी &#124;&#124;</p>
<p>एक प्रतिस्पर्धा,समर,युद्ध<br />
छिड़ जाता है लोगो मैं तब<br />
कोई कितना शोर मचाता है<br />
कोई कितनी बात बनाता है&#124;&#124;</p>
<p>कैसी है ये दुनिया तेरी<br />
जीते नही जीने देती है<br />
करती रुख अँधेरी गलियाँ<br />
पीते नही पीने देती है &#124;&#124;</p>
<p>दो ह्रदयों का मेल अगर हो<br />
हानि बता जग तेरी क्या है?<br />
क्यों बांटे है तू ह्रदयों को<br />
बांटे ये बहुतेरी क्या है?</p>
<p>चटखारे लेकर पर-पीड़ा<br />
सुनी -सुनाई जाती है<br />
जिन बातो को ढकना हो<br />
वाही बात बताई जाती है&#124;&#124;</p>
<p>"कैसा जीवन जीते है वे<br />
जिनको वाणी-वरदान मिल<br />
उनसे तो अच्छा मैं गूंगा<br />
जिसको गूंगापन दान मिला "</p>
<p>&#124;&#124;आशीष &#124;&#124;</p>
]]></content:encoded>
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<title><![CDATA[मित्रता ]]></title>
<link>http://iitbkivaani.wordpress.com/2007/10/12/%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a4%be/</link>
<pubDate>Fri, 12 Oct 2007 13:45:47 +0000</pubDate>
<dc:creator>vikash</dc:creator>
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<description><![CDATA[धूप में किसी पेड की
छाया को कहते मित्र]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>धूप में किसी पेड की<br />
छाया को कहते मित्रता,<br />
ईश के हाथो बनी<br />
काया को कहते मित्रता &#124;&#124; </p>
<p>ग़र निराशा आ भी जाए<br />
मित्रता अवलम्ब है<br />
बोझ ले विश्वास पर<br />
यह वह अटल स्तम्भ है &#124;&#124; </p>
<p>स्वार्थ को जाने नही<br />
वह भावना है मित्रता<br />
मित्र के हर स्वप्न की<br />
एक कामना है मित्रता &#124;&#124; </p>
<p>मरीचिका में सत्य का<br />
दर्पन दिखा दे मित्रता<br />
निश्वास में निर्वात में<br />
कम्पन जग दे मित्रता &#124;&#124; </p>
<p>एक अजब संबंध है<br />
एक धीरता है मित्रता,<br />
हास्य से सींची हुई<br />
गम्भीरता है मित्रता &#124;&#124; </p>
<p>ग़र कदम थकते कभी तो<br />
मित्रता तो पास है,<br />
जीत का विश्वास भर दे<br />
एक अनूठी आस है &#124;&#124; </p>
<p>हर ख़ुशी के ओष्ठ पर<br />
जो गीत वह है मित्रता,<br />
प्रेम के सुर में ढला<br />
संगीत ऐसी मित्रता &#124;&#124; </p>
<p>सांस जो रूकती कभी तो<br />
दम अगर साहस भरे ,<br />
हार की उम्मीद हो और<br />
सच हो सपनो से परे,<br />
हाथ थामे जीत का<br />
विश्वास देगी मित्रता<br />
अपने ही सामर्थ्य तक<br />
हर श्वास देगी मित्रता &#124;&#124; </p>
<p>ग़र कही इतना अनोखा<br />
प्रेम मिल जाये कभी,<br />
भूल कर भी खो ना देना<br />
साकार ऐसी मित्रता &#124;&#124; </p>
<p><em>आशीष पालीवाल<br />
प्रथम वर्ष</em></p>
]]></content:encoded>
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