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	<title>आसमाँ &amp;laquo; WordPress.com Tag Feed</title>
	<link>http://wordpress.com/tag/आसमाँ/</link>
	<description>Feed of posts on WordPress.com tagged "आसमाँ"</description>
	<pubDate>Tue, 07 Oct 2008 17:50:42 +0000</pubDate>

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<title><![CDATA[मैं क्यों आज तक उसकी ख़ाहिश करता हूँ]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=1004</link>
<pubDate>Fri, 27 Jun 2008 08:14:00 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2008/06/27/main-kyon-aaj-tak-us-kii-khwaahish-kartaa-hoon/</guid>
<description><![CDATA[मैं क्यों आज तक उसकी ख़ाहिश करता हूँ
ज]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">मैं क्यों आज तक उसकी ख़ाहिश करता हूँ<br />
जो मुझको भीड़ में अकेला छोड़कर गया है<br />
सुबह आज भी उसको आइनों में जोड़ता हूँ<br />
जो मेरे दिल को खिलौने-सा तोड़कर गया है...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">बे-तस्कीनियाँ उजले चेहरों से बढ़ती हैं<br />
हर पल मुझको अक्स की तरह पढ़ती हैं<br />
अंधेरी रात है मैं छत पर तन्हा बैठा हूँ<br />
एक-एक पल दोपहर-सा गुज़र रहा है...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">कोई उठाये मुझको या फिर बैठा रहने दे<br />
ख़ाबों के जंगल जलाये ना, धुँआ उड़ाये ना<br />
ख़ाहिशों का अम्बार है, दिल ज़ार-ज़ार है<br />
आँखों की नदिया सुखाये ना, चाँद जलाये ना</span></p>
<p><span style="color:#000000;">अजीब धुनकी में है दिल और कुछ नहीं है<br />
दर्द का ग़ुबार है दिल और कुछ नहीं है<br />
मुस्कुराहट जब खिली गुलाबी लबों पर<br />
एक हसीन ख़ाब सारी रात जागता रहा है...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">एक नयी परवाज़ दिखायी दी है आसमाँ में<br />
कुछ नये अन्दाज़ भी हैं उसकी ज़बाँ में<br />
बाँट नहीं सकता किसी से लम्हों के टुकड़े<br />
ख़ुदाया मेरा कोई नहीं इतने बड़े जहाँ में</span></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४ </p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[आहिस्ता-आहिस्ता नज़दीकियाँ बढ़ने लगीं]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2008/04/03/aahistaa-aahistaa-nazadiikiyaan-badhhane-lagiin-2/</link>
<pubDate>Wed, 02 Apr 2008 20:43:24 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2008/04/03/aahistaa-aahistaa-nazadiikiyaan-badhhane-lagiin/</guid>
<description><![CDATA[आहिस्ता-आहिस्ता नज़दीकियाँ बढ़ने लगीं]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">आहिस्ता-आहिस्ता नज़दीकियाँ बढ़ने लगीं<br />
आहिस्ता-आहिस्ता तुमसे राहें जुड़ने लगीं<br />
आहिस्ता-आहिस्ता तुमसे प्यार हो गया<br />
आहिस्ता-आहिस्ता दोनों निगाहें लड़ने लगीं</span></p>
<p><span style="color:#000000;">तुमसे कहना था संग तेरे जीना है मुझको<br />
प्यार को तुम्हारी आँखों से पीना है मुझको<br />
ज़िन्दगी क्या है तुमसे मिलके जाना मैंने<br />
सिवा तुम्हारे दिल के' चैन कहीं न है मुझको</span></p>
<p><span style="color:#000000;">वह पहली नज़र और वह दिलकश समाँ<br />
वह हुस्नो-अदा और वह मौसम ख़ुशनुमा<br />
बदला-बदला है सब कुछ आज भी यहाँ<br />
यह दिल, यह धड़कन, यह नीला आसमाँ</span></p>
<p><span style="color:#000000;">तुमने दिल लेकर मेरा क्यों न अपना दिया<br />
हाँ मेरी ज़िन्दगी को इक नया सपना दिया<br />
तेरी चाहत सनम मेरी क़िस्मत बन गयी<br />
जो आशिक़ तुमने मुझको अपना बना दिया</span></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[तुम्हारी ख़ुशबू से महक उठा है मन]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=956</link>
<pubDate>Wed, 02 Apr 2008 17:03:18 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2008/04/02/tumhaarii-khushboo-se-mahak-utha-hai-man/</guid>
<description><![CDATA[तुम्हारी ख़ुशबू से महक उठा है मन
तुम्ह]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">तुम्हारी ख़ुशबू से महक उठा है मन<br />
तुम्हारे तस्व्वुर से भर आये नयन<br />
बरखा की मखमली फुहार से जी तर है<br />
धीरे-धीरे बुझ रही है दर्द की सूजन</font></p>
<p><font color="#000000">लहू फिर ज़ख़्मे-जिगर से बहा है<br />
दर्द तुम्हारा दिल में मेहमान रहा है<br />
सर्द है बरसों से यह ख़िज़ाँ का मौसम<br />
ज़र्द पत्तों में खो गया है कहीं गुलशन</font></p>
<p><font color="#000000">बहार की नर्म धूप कहीं खो गयी है<br />
मानूस वह चाँदनी किसी छत पे सो गयी है<br />
यह उदास फ़ज़िर भी कितनी तवील है<br />
दिखता नहीं दूर तक उफ़क़ का रोगन</font></p>
<p><font color="#000000">तुमको पहली नज़र से चाहा दिलो-जाँ से<br />
हर दुआ में मैंने तुमको माँगा आसमाँ से<br />
मेरी मंज़िल मेरी मोहब्बत हो तुम<br />
कैसे भी तुम मेरी बनो, जुड़ जाये बन्धन</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[यह बता मुझको! तुझको मुझसे क्या गिला]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=952</link>
<pubDate>Sat, 29 Mar 2008 15:44:03 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2008/03/29/yah-bataa-mujhako-tujhako-mujh-se-kyaa-gilaa/</guid>
<description><![CDATA[यह बता मुझको! तुझको मुझसे क्या गिला
मु]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">यह बता मुझको! तुझको मुझसे क्या गिला<br />
मुझको हर गाम नीचा दिखाके क्या मिला<br />
हर वक़्त इम्तिहान और बस इम्तिहान<br />
मुझको राहे-ख़ुदा में और कुछ भी न मिला</font></p>
<p><font color="#000000">ख़ाली सीने में दर्द ही ज़मीं दर्द ही आसमाँ<br />
दूर तक राहों में दर्द के निशाँ बस निशाँ<br />
बाहर आ गया जिगर फाड़ के क़तराए-लहू<br />
ऐ ख़ुदा तूने दिया मुझको किस बात का सिला</font></p>
<p><font color="#000000">हँसना मुझे रक़ीब का' तीर-सा लगता है<br />
रखे अगर वह बैर मुझसे रखता है<br />
जाने उसकी आँखों में मैं खटकता हूँ कि नहीं<br />
ऐ ख़ुदा हर बार मैं ही क्यों मूँग-सा दला</font></p>
<p><font color="#000000">राहे-इश्क़ में मुझे पत्थर का दिल नहीं<br />
ज़ीस्त यह गँवारा मुझे बिल्कुल नहीं<br />
मैं ख़ुदा को किसका वास्ता देकर कहूँ कि बस!<br />
ख़ुदा-ख़ुदा कहने से हासिल कुछ भी न मिला</font></p>
<p><font color="#000000">अपने ज़ख़्मों पे ख़ुद आप मरहम रखूँ<br />
यह दर्द अगर कहूँ तो आख़िर किससे कहूँ<br />
बात-बात पे ख़ुद से बिगड़ना आदत बन गयी<br />
दरबारे-ख़ुदा से मुझको कुछ भी न मिला</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[शाम है और मैं हूँ, तुम क्यों नहीं]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=948</link>
<pubDate>Tue, 25 Mar 2008 07:49:51 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2008/03/25/shaam-hai-aur-main-hoom-tum-kyon-nahiin/</guid>
<description><![CDATA[शाम है और मैं हूँ, तुम क्यों नहीं, क्यों]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">शाम है और मैं हूँ, तुम क्यों नहीं, क्यों नहीं<br />
डर-सा बैठा है दिल में तुम्हें खो न दूँ कहीं<br />
तिलिस्म यह मेरी आँखों का टूट न जाये कहीं<br />
तुमने जहाँ छोड़ा था मुझे मैं आज भी हूँ वहीं</font></p>
<p><font color="#000000">यह फूल हल्के गुलाबी यह आसमाँ आसमानी<br />
सब उदास हैं इक तेरे न होने से और मैं भी<br />
वह यादें मुस्कुराती हुई आज रोती हैं तन्हा<br />
मेरे साथ हैं सीने से लगकर, बिलखती हुई</font></p>
<p><font color="#000000">मुँहज़ोर तन्हाई है सीने में, आँसुओं के भँवर<br />
मैं अकेला कब तलक जूझता रहूँगा यूँ ही<br />
तुमको पाने का इरादा है पर तुम यहाँ नहीं<br />
फिर आँखों से गिरह लगा दो कर लूँ ख़ुद पे यक़ीं</font></p>
<p><font color="#000000">मेरा दिल किसी ग़मो-अफ़सोस का घर नहीं<br />
यह वक़्तो-ख़ुदा का फ़ैसला है, हम जुदा हैं<br />
सच्चे प्यार की साँसें टूटती नहीं, न टूटेंगी<br />
यह फ़ासला मिटायेगा आप ख़ुदा मुझे है यक़ीं</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[नग़मे खिलने लगे हैं]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=916</link>
<pubDate>Fri, 14 Mar 2008 14:32:25 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2008/03/14/naghamein-khilane-lage-hain/</guid>
<description><![CDATA[नग़मे खिलने लगे हैं नज़्म महकने लगी है
]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">नग़मे खिलने लगे हैं नज़्म महकने लगी है<br />
तेरे एहसास पे धड़कन ग़ज़ल कहने लगी है<br />
साँवली आँखों में सपनों की ख़ुशबू घुलने लगी है<br />
मुसलसल ख़ाबों की भीड़ पलकों में लगने लगी है</font></p>
<p><font color="#000000">बंजर सूखे मैदान सारे सब्ज़ होने लग गये<br />
फूल अरमानों के मेरे मन में खिलने लग गये<br />
सौंधे आसमाँ पर सतरंगी धनुष खिल गया है<br />
पर्वतों पे घटा झुकने लगी है बरसने लगी है</font></p>
<p><font color="#000000">नग़मे खिलने लगे हैं नज़्म महकने लगी है<br />
तेरे एहसास पे धड़कन ग़ज़ल कहने लगी है</font></p>
<p><font color="#000000">दुआओं की सदा मेरी फ़ुग़ाँ असर कर जायेगी<br />
रहमत ख़ुदा की होगी मेरी ज़ीस्त घर आयेगी<br />
बहारो-फ़िज़ा का रंग हर-सू बदलने लगा है<br />
तेरे तस्व्वुर की मद्धम धूप खिलने लगी है</font></p>
<p><font color="#000000">साँवली आँखों में सपनों की ख़ुशबू घुलने लगी है<br />
मुसलसल ख़ाबों की भीड़ पलकों में लगने लगी है</font></p>
<p>मुसलसल= लगातार, ज़ीस्त= जीवन, हर-सू= चारों तरफ़</p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००२</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[आसमाँ को आज उसका हक़ पहुँचा]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=905</link>
<pubDate>Thu, 13 Mar 2008 05:04:37 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2008/03/13/aasamaan-ko-aaj-usaka-haq-pahuncha/</guid>
<description><![CDATA[आसमाँ को आज उसका हक़ पहुँचा
यह तीर जो मे]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">आसमाँ को आज उसका हक़ पहुँचा<br />
यह तीर जो मेरे दिल तक पहुँचा</font></p>
<p><font color="#000000">ज़ख़्म देकर जो उसका जी न भरा<br />
दिल उसका मेरे दिल तक पहुँचा</font></p>
<p><font color="#000000">ख़ुशी की प्यास बढ़ती गयी जब<br />
मैं भी दर्द के हासिल तक पहुँचा</font></p>
<p><font color="#000000">धुँआ-धुँआ है आँख मेरी अब रोज़<br />
कि मैं अपने ही साहिल तक पहुँचा</font></p>
<p>हक़= truth, righteousness</p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[जब आसमाँ पे यह हिलाल आया]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=898</link>
<pubDate>Wed, 12 Mar 2008 14:53:20 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2008/03/12/jab-aasamaan-pe-yah-hilaal-aaya/</guid>
<description><![CDATA[जब आसमाँ पे यह हिलाल आया
मुझे याद तुमस]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">जब आसमाँ पे यह हिलाल आया<br />
मुझे याद तुमसे विसाल आया</font></p>
<p><font color="#000000">जिस शब तारों की बारात आयी<br />
मुझे तुम्हारा ही ख़्याल आया</font></p>
<p><font color="#000000">हमने कितने सवाब हैं कमाये<br />
जो मेरे हिस्से यह जमाल आया</font></p>
<p><font color="#000000">नाज़ करना ख़ुद पे फ़ितरत है<br />
उम्र पे यह कैसा साल आया</font></p>
<p><font color="#000000">है तेरे इश्क़ को रस्मो-राह<br />
उफ़! निगाह में कैसा गुलाल आया</font></p>
<p><font color="#000000">तुझे देखने के बाद 'नज़र' का<br />
शुरुआती दौरे-वबाल आया</font></p>
<p>हिलाल= दूज का चाँद, सवाब= पुण्य, जमाल= सुन्दरता, दौरे-वबाल= कठिन समय</p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[गिरते सितारे को]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=837</link>
<pubDate>Tue, 26 Feb 2008 03:28:11 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2008/02/26/girate-sitaare-ko/</guid>
<description><![CDATA[हमने आसमाँ से टूटके
गिरते सितारे को
ज़म]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">हमने आसमाँ से टूटके<br />
गिरते सितारे को<br />
ज़मीं पे आते देखा है<br />
आसमाँ पे था तो चमकता था<br />
ज़मीं पे है तो दहकता है</font></p>
<p><font color="#000000">फ़र्क़ है बस थोड़ा-सा<br />
'कितना है?' इतना है!<br />
जाओ उठा लाओ उसे...</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[टूटे हुए चाँद को]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=827</link>
<pubDate>Mon, 25 Feb 2008 16:26:35 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2008/02/25/tuute-hue-chaand-ko/</guid>
<description><![CDATA[टूटे हुए चाँद को सादे काग़ज़ में लपेटा ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">टूटे हुए चाँद को सादे काग़ज़ में लपेटा मैंने<br />
भीगे हुए सूरज को हथेलियों में समेटा मैंने<br />
तारे बसरने लगे और आसमाँ ख़ाली हो गया<br />
उसने एक आइने की तरह मुझे तोड़ दिया है<br />
...तोड़ दिया है</font></p>
<p><font color="#000000">जला दिये दिल के जज़्बात उसने<br />
बढ़ा दिये मेरे मुश्किलात उसने<br />
जीना मेरा जीना बहुत मुश्किल है<br />
यह ज़हर पीना बहुत मुश्किल है</font></p>
<p><font color="#000000">बहार में भी शाख़ों पर ख़िज़ाँ थी<br />
सूखी-सूखी बंजर हर फ़िज़ा थी<br />
फ़िज़ाएँ रंग बदलने लगी हैं<br />
हवाओं के साथ चलने लगी हैं मगर<br />
उसने निगाहों में खिलना छोड़ दिया है<br />
...छोड़ दिया है</font></p>
<p><font color="#000000">फ़िज़ाएँ मौसम के साथ खिलती हैं<br />
और मौसम बदलते रहते हैं<br />
मौसम बदला है तो फ़िज़ा भी बदलेगी<br />
बदले हुए मौसम ने हज़ार रास्तों को<br />
मेरी तरफ़ मोड़ दिया है, मोड़ दिया है<br />
...मोड़ दिया है</font></p>
<p><font color="#000000">शब्दों की स्याही में रिश्ते हैं<br />
फूलों के अर्क़ में रिश्ते हैं<br />
हर शब्द हर फूल में मिलते हैं<br />
हर जिस्म की शाखों पर खिलते हैं<br />
मिलते हैं बिछुड़ते हैं,<br />
बिछुड़ते हैं मिलते हैं<br />
समंदर की लहर जैसे चलते रहते हैं<br />
खिलते हैं महकते हैं<br />
बनते हैं बुझते हैं<br />
यह धूप-छाँव के जैसे रंग बदलते हैं</font></p>
<p><font color="#000000">उसने एक रिश्ता तोड़ा है इक जोड़ दिया है<br />
जोड़कर उसने रिश्ते को फिर तोड़ दिया है<br />
...तोड़ दिया है</font></p>
<p><font color="#000000">जला दिये दिल के जज़्बात उसने<br />
बढ़ा दिये मेरे मुश्किलात उसने<br />
जीना मेरा जीना बहुत मुश्किल है<br />
यह ज़हर पीना बहुत मुश्किल है</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९ अप्रैल २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[आज फिर आसमाँ पे]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=824</link>
<pubDate>Mon, 25 Feb 2008 15:52:51 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2008/02/25/aaj-phir-aasmaan-pe/</guid>
<description><![CDATA[आज फिर आसमाँ पे देखा चाँद, गुलाबी चाँद
]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">आज फिर आसमाँ पे देखा चाँद, गुलाबी चाँद<br />
आज फिर तेरी आँखों को देख्नने की ख़ाहिश हुई<br />
आज फिर सुलगने लगे मेरी आँखों के आँसू<br />
आज फिर बुझती हुई एक तमन्ना ने अँगड़ाई ली</font></p>
<p><font color="#000000">चाँद हसीन था तेरे जिस्म-सा शामीन था<br />
तेरे ग़म में यह कब मुझसे ग़मगीन था<br />
रोज़ महकता था मगर सुनहरा था<br />
आज कुछ ज़्यादा गुलाबी और गहरा था</font></p>
<p><font color="#000000">आज फिर दिल के जज़्बात बह निकले दिल से<br />
आज फिर उस मकान में तुम्हें देखने की ख़ाहिश हुई<br />
आज फिर कुछ अजीब भँवर थे मेरी धड़कनों में<br />
आज फिर नस-नस में लहू ने चिन्गारी जला दी</font></p>
<p><font color="#000000">तुमसे मेरी मुहब्बत बहुत याद आ रही है<br />
गुलाबी चाँद कह रहा है तू आ रही है<br />
आ लौट आ अब लौट भी आ तू कहाँ है<br />
तुमसे मेरे सपनों का यह हसीं जहाँ है</font></p>
<p><font color="#000000">आज फिर आसमाँ पे देखा चाँद, गुलाबी चाँद<br />
आज फिर तेरी आँखों को देखने की ख़ाहिश हुई<br />
आज फिर कुछ अजीब भँवर थे मेरी धड़कनों में<br />
आज फिर नस-नस में लहू ने चिन्गारी जला दी</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १६ अप्रैल २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[इक चाँद है आसमाँ में]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=817</link>
<pubDate>Tue, 19 Feb 2008 13:39:57 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2008/02/19/ek-chaand-hai-aasamaan-mein/</guid>
<description><![CDATA[इक चाँद है आसमाँ में रोशन-रोशन
दिल में ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">इक चाँद है आसमाँ में रोशन-रोशन<br />
दिल में है हर पल इक तड़पन<br />
सुन रहा हूँ दीवाने दिल की धड़कन</font></p>
<p><font color="#000000">चाँद जो वह आसमाँ पर है<br />
ख़ाब जो वह ज़मीं पर है<br />
उसकी रोशनी फैली है हर कहीं<br />
लेकिन नज़र में तुम नहीं</font></p>
<p><font color="#000000">तेरी झलक पर यूँ कोहरे क्यों छा गये<br />
तुम नहीं जब तो यह गुल मुरझा गये</font></p>
<p><font color="#000000">इक चाँद है आसमाँ में रोशन-रोशन<br />
दिल में है हर पल इक तड़पन<br />
सुन रहा हूँ दीवाने दिल की धड़कन</font></p>
<p><font color="#000000">नग़मा जो वह ज़ुबाँ पर है<br />
कलमा जो वह दिलो-जाँ पर है<br />
बेवफ़ा, सुनो मेरे दिल की सदा<br />
तेरे लिए ही है मेरी वफ़ा</font></p>
<p><font color="#000000">तुमसे ही मेरा जहाँ, तुम मेरी हमनवाँ<br />
एतबार मेरा कर ले मुझे बाँहों में भर ले</font></p>
<p><font color="#000000">इक चाँद है आसमाँ में रोशन-रोशन<br />
दिल में है हर पल इक तड़पन<br />
सुन रहा हूँ दीवाने दिल की धड़कन</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[है दिल मेरा दीवाना तेरा]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=778</link>
<pubDate>Fri, 15 Feb 2008 06:26:33 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2008/02/15/hai-dil-mera-diiwaana-tera/</guid>
<description><![CDATA[है दिल मेरा दीवाना तेरा
तू शमअ मेरी मै]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">है दिल मेरा दीवाना तेरा<br />
तू शमअ मेरी मैं परवाना तेरा<br />
झूमती हवाएँ नशीली फ़िज़ाएँ<br />
हाँ यह झूमती हवाएँ<br />
और यह नशीली फ़िज़ाएँ<br />
गीत गाकर यह कहती हैं<br />
है दिल मेरा दीवाना तेरा</font></p>
<p><font color="#000000">सच्ची है मोहब्बत मेरी<br />
तुम मुझे आज़माकर देख लो<br />
मंज़ूर हो अगर तुमको<br />
मेरे सनम हाँ बोल दो<br />
है दिल मेरा दीवाना तेरा<br />
तू शमअ मेरी मैं परवाना तेरा</font></p>
<p><font color="#000000">मौसम प्यार का आया है<br />
यह जादू तूने चलाया है<br />
मौसम प्यार का आया है<br />
यह जादू तूने चलाया है<br />
दिल के आसमाँ पर चाँद-सा<br />
चेहरा तेरा नज़र आया है</font></p>
<p><font color="#000000">है दिल मेरा दीवाना तेरा<br />
तू शमअ मेरी मैं परवाना तेरा<br />
झूमती हवाएँ नशीली फ़िज़ाएँ<br />
हाँ यह झूमती हवाएँ<br />
और यह नशीली फ़िज़ाएँ<br />
गीत गाकर यह कहती हैं<br />
है दिल मेरा दीवाना तेरा</font></p>
<p><font color="#000000">सच्ची है मोहब्बत मेरी<br />
तुम मुझे आज़माकर देख लो<br />
मंज़ूर हो अगर तुमको<br />
मेरे सनम हाँ बोल दो<br />
है दिल मेरा दीवाना तेरा<br />
तू शमअ मेरी मैं परवाना तेरा</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[दीप जलाओ रात को पूनम कर दो]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/12/28/%e0%a4%a6%e0%a5%80%e0%a4%aa-%e0%a4%9c%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%93-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%a8%e0%a4%ae-%e0%a4%95%e0%a4%b0-%e0%a4%a6%e0%a5%8b/</link>
<pubDate>Fri, 28 Dec 2007 09:28:06 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2007/12/28/deep-jalaao-raat-ko-poonam-kar-do/</guid>
<description><![CDATA[दीप जलाओ रात को पूनम कर दो
मेहबूब की या]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">दीप जलाओ रात को पूनम कर दो<br />
मेहबूब की यादों से आँखें नम कर दो</font></p>
<p><font color="#000000">तमन्ना को हसरते-विसाल है<br />
ज़हर दे दो मुझे यह करम कर दो</font></p>
<p><font color="#000000">शाम की ख़ाक गिरने लगी है आसमाँ से<br />
मेरे ख़ातिर में सहरे-ग़म कर दो</font></p>
<p><font color="#000000">बर्फ़ की गरमी से आजिज़ आ चुका मैं<br />
बे-तस्कीनियों की धूप गरम कर दो</font></p>
<p><font color="#000000">चाँद के छुपने का बाइस मैं कैसे कहूँ<br />
'वफ़ा' आज बरसात का मौसम कर दो</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘वफ़ा’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[बचपन की ख़ुशबू]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/12/16/%e0%a4%ac%e0%a4%9a%e0%a4%aa%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%96%e0%a4%bc%e0%a5%81%e0%a4%b6%e0%a4%ac%e0%a5%82/</link>
<pubDate>Sun, 16 Dec 2007 22:17:07 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2007/12/16/bachpan-kii-khushboo/</guid>
<description><![CDATA[मेरे बचपन की ख़ुशबू मेरे साथ ही चलती ह]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">मेरे बचपन की ख़ुशबू मेरे साथ ही चलती है<br />
कभी मेरे ख़ाब में कभी किताब में मिलती है</font></p>
<p><font color="#000000">कभी पतंगों के साथ आसमाँ में उड़ती है<br />
कभी मालती की बेलों में महकती खिलती है</font></p>
<p><font color="#000000">रुचि सोनल जूली नीता बिन्नू संजू पवन प्रीति सोना<br />
जैसे नामों की बिखरी तस्वीर जोड़ते मिलती है</font></p>
<p><font color="#000000">कभी स्कूल में अभय राजीव हर्पित को पूछती है<br />
कभी सआदत गंज की गलियों में टहलती है</font></p>
<p><font color="#000000">फाख़्ता और गौरैया के आशियानों से गुज़रते हुए<br />
मेरे बाएँ पाँव का भँवर सहलाती टटोलती है</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र'<br />
लेखन वर्ष: २००२</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[अब 'विनय' तेरे ग़म से ग़ाफ़िल नहीं रहा]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/09/19/%e0%a4%85%e0%a4%ac-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a4%af-%e0%a4%a4%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a5%87-%e0%a5%9a%e0%a4%ae-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a5%9a%e0%a4%be%e0%a5%9e%e0%a4%bf%e0%a4%b2-%e0%a4%a8%e0%a4%b9/</link>
<pubDate>Wed, 19 Sep 2007 19:45:51 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2007/09/19/ab-vinay-tere-gham-se-ghafil-nahiin-raha/</guid>
<description><![CDATA[अब ‘विनय’ तेरे ग़म से ग़ाफ़िल नहीं रहा
दे]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">अब ‘विनय’ तेरे ग़म से ग़ाफ़िल नहीं रहा<br />
देख तो वो मग़रूर वो संगदिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">हमें कोई शिबासी दे हमने तेरा राज़ न खोला<br />
पर जानाँ ये जान लो मैं बातिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">तेरी कही सुनी सब मुझे वक़्त ने भुला दी<br />
ये ग़ैर तेरी दुश्मनी के क़ाबिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">हमें जब नाज़ थे तो ये दर्द किसलिए हैं<br />
तेरे बाद कोई चेहरा मुस्तक़िल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">तुम हमसे पूछो वह शामे-माज़ी की तन्हाई<br />
कभी कोई इतना दिल में दाख़िल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">तुमने ख़ुद मुझे अपना दोस्त बनाया होता<br />
तुम्हें तो कोई काम कभी मुश्किल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">हमसे एक-एक कर सब हाथ छूटते गये<br />
मेरे कूचे में वो माहे-कामिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">सद्-हैफ़ो-अफ़सोस से कलेजा भर आया<br />
हाए मुझे सिवा ग़म कुछ हासिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">हमें कोई देता ताक़ते-नज़्ज़ाराए-हुस्न<br />
सुना  है मेरी राह में कोई हाइल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">साँसों का धुँआ दिल को दर्द देता है बहुत<br />
ज़िन्दगी में बाइसे-मसाइल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">वो गुफ़्त-गू वो मशविरे वो बयान अपने<br />
ख़ुदा के ज़ख़्म देखे तो मैं बिस्मिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">गर्दिशे-अय्याम की रवानी देखकर<br />
मेरा दिले-सौदा मुज़महिल</font><font color="#c0c0c0">1</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">अब इस चमन में फिरती है खुश्क सबा<br />
मस्जूदा कोई जल्वाए-गुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">किसके दिन उम्रभर एक से रहते हैं<br />
मुझमें तो वो हुस्ने-अमल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">मेरी काविश</font><font color="#c0c0c0">2</font> का किसी राह तो हासिल होगा<br />
हैफ़ मेरे ग़म की कोई मंज़िल नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">मैं अहदे-ज़ीस्त करके किससे तोड़ूँ<br />
मुझे तफ़रकाए-नाक़िसो-कामिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">मुझे तुम छोड़कर गये लेकिन क्या बताऊँ<br />
एक अरसा बर्क़े-सोज़े-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">तुमको जाना है तो जाओ कब हमने रोका है<br />
किसी के जाने का ग़म हमें बिल्कुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">इस दरया को ख़्वाहिश है समंदर की<br />
और सहाब का बरसना मुसलसल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">सू-ए-शिर्क सजदे-मस्जूद किये मैंने<br />
क्योंकि मैं तेरे कूचे का माइल</font><font color="#c0c0c0">3</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">अब किससे करूँगा उसकी जफ़ा का शिकवा<br />
आज से कोई दराज़ दस्तिए-क़ातिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">इस ज़र्फ़ कोई आये तो देखे हाल बीमार का<br />
वो पुरसिशे-जराहते-दिल</font><font color="#c0c0c0">4</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">अच्छा हुआ तुमने रोज़े-आख़िर न बोला<br />
रोज़े-विदा से कोई उक़्दाए-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">दु:ख गिनते-गिनते उम्र कट जायेगी<br />
किसी की इनायत किसी का तग़ाफ़ुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">फ़िज़ा क्यों इतनी ख़ामोश है गुलशन में<br />
क्या आशियाँ में नालाए-बुलबुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">था तब मिला नहीं, खोकर मिलता है कौन<br />
दिल मुझे ख़्याले-यारे-वस्ल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">मैं जिसको दोस्त कह नहीं सकता अब<br />
मुझे उसके लिए जज़्बाए-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">किसको खरोंचे हो अपने नाख़ून से तुम<br />
इस सीने में कोई जराहते-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">उर्दी-ओ-दै का अब मैं क्या ख़्याल रखूँ<br />
ये कैसी जलन, मुझे तपिशे-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">अपनी यकताई पर बेहद नाज़ था हमको<br />
आज भी है लेकिन वो मुतक़ाबिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">अब भी खिलती है शुआहाए-ख़ुर-फ़ज़िर <br />
मगर फ़िज़ा में शाहिद-ए-गुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">बहुत ढूँढ़ा हमने उसके जैसा, न पाया एक<br />
वो नमकपाशे-ख़राशे-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">अब ख़ुल्द में रहें या दोज़ख में रहें हम<br />
ऐ सनम मेरा तो आबो-गिल</font><font color="#c0c0c0">5</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">उस फ़ितनाख़ेज़ का नहीं अब डर मुझको<br />
कि मेरे दिल में स’इ-ए-बेहासिल</font><font color="#c0c0c0">6</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">आँखों से निक़ाब उठाओ कि वहम खुल जाये<br />
कि तुझमें वो तर्ज़े-तग़ाफ़ुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">कहने को तो ज़ामिन नहीं मुझसा ज़माने में<br />
पर जाने क्यों मुझे तहम्मुल</font><font color="#c0c0c0">7</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">वो जिसकी चाप से धड़कनें रुक जायें थीं<br />
ज़िन्दगी में वो हौले-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">ऐ लोगों मैं ख़ुद को किस ज़ात का बताऊँ<br />
सुना है तुममें ज़रा भी दीनो-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">दायम अपने बग़ल में पाओगे तुम हमको<br />
चाहो तो कह लो मैं तुझमें मुश्तमिल</font><font color="#c0c0c0">8</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">क्यों है मुझको तेरे रूठ कर जाने का ग़म<br />
जबकि जानते हो मैं कभी तेरा काइल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">कहता तो हूँ बात दिल की मगर क्या करूँ<br />
मेरा कोई भी ख़्याल मानिन्दे-गुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">उसकी ख़ामोश आँखों में अयाँ थीं बातें दिल की<br />
वो चाहकर भी कभी सू-ए-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">किया जो मैंने तुम्हें अपना समझकर किया<br />
ये दिल तेरी जफ़ा से मुनफ़’इल</font><font color="#c0c0c0">9</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">मैंने देखा था उसे जाते ख़ुल्द की ओर<br />
वो हलाके-फ़रेब-वफ़ा-ए-गुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">जो कभी साहिल पर था कभी समंदर में<br />
उसको दाग़े-हसरते-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">जिसपे लिखा करते थे तुम अपना नाम<br />
शख़्स वो आज गर्दे-साहिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">आज फ़ारिग</font><font color="#c0c0c0">10</font> हूँ कि तुम हो मेरे ग़मख़्वार<br />
मैं हरीफ़े-मतलबे-मुश्किल<font color="#c0c0c0">11</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">था तो थोड़ा बहुत मैं ये मानता हूँ लेकिन<br />
आज उतना भी तो सोज़िशे-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">मैं दर्द को दिल से जुदा कर सकता हूँ<br />
पर फ़ुसूने-ख़्वाहिशे-सैक़ल</font><font color="#c0c0c0">12</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">अब मैं किस मुँह से जाऊँ बज़्म में उसकी<br />
ये दिल दरख़ुर-ए-महफ़िल</font><font color="#c0c0c0">13</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">देखिए शाइबाए-ख़ूबिए-तक़दीर</font><font color="#c0c0c0">14</font> उसमें<br />
वो दिन गया कि रोज़े-अजल नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">इश्क़ फिरता था उस रोज़ गलियों-गलियों<br />
आज किसी में इतना भी ख़लल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">बढ़के आया तो लगा तेरा तीर इस दिल में<br />
चारासाज़ न हुआ पर जाँगुसिल</font><font color="#c0c0c0">15</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">किसपे लिखके भेजूँ मैं तुझे पयाम अपना<br />
पास औराक़े-लख़्ते-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">आस्माँ के पार जाने की तमन्ना थी उसको<br />
पर आइना-ए-बेमेहरि-ए-क़ातिल</font><font color="#c0c0c0">16</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">मेरे मुँह से न सुनो वज्हे-सुखन ईसा<br />
ख़ुद गुलों में रंगे-अदा-ए-गुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">मगर टूटा है किसी का नाज़ुक दिल मुझसे<br />
ये डर कि मैं क़ाबिले-सुम्बुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">अब कोई रहनुमा नहीं रहे-इश्क़ में<br />
तुम ख़ुश रहो तेरी राह में साइल</font><font color="#c0c0c0">17</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#999999">१. </font><font color="#000000">निष्तेज</font> २. <font color="#000000">कोशिश, द्वेष</font> ३. <font color="#000000">अनुरक्त, आसक्त</font> ४. <font color="#000000">दिल के ज़ख़्म का हाल पूछने वाला<br />
</font>५. <font color="#000000">शरीर और आकार</font> ६. <font color="#000000">निष्फल प्रयत्न</font> ७. <font color="#000000">दिल की घबराहट, सहनशक्ति</font> ८.<font color="#000000"> शामिल</font><br />
९. <font color="#000000">लज्जित</font> १०. <font color="#000000">निश्चिंत</font> ११. <font color="#000000">कठिन काम कर लेने वाला</font> १२. <font color="#000000">परिष्कृति की अभिलाषा का जादू</font><br />
१३. <font color="#000000">महफ़िल के योग्य</font> १४. <font color="#000000">सौभाग्य की झलक</font> १५. <font color="#000000">जानलेवा, दुखदायी</font><br />
१६. <font color="#000000">माशूक़ की बेरहमी का सुबूत</font> १७. <font color="#000000">उम्मीदवार, प्रश्नकर्ता</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति 'नज़र'<br />
लेखन वर्ष: २००५</p>
]]></content:encoded>
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