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	<title>इनसे-मिलो &amp;laquo; WordPress.com Tag Feed</title>
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	<description>Feed of posts on WordPress.com tagged "इनसे-मिलो"</description>
	<pubDate>Wed, 14 May 2008 05:25:44 +0000</pubDate>

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<title><![CDATA[मूंह मीठा करें]]></title>
<link>http://shuaibi.wordpress.com/2006/11/10/%e0%a4%ae%e0%a5%82%e0%a4%82%e0%a4%b9-%e0%a4%ae%e0%a5%80%e0%a4%a0%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%82/</link>
<pubDate>Fri, 10 Nov 2006 11:00:48 +0000</pubDate>
<dc:creator>shuaib</dc:creator>
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<description><![CDATA[नीचे तसवीर पर किल्क करना लड्डू खाने जै]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p align="center"><strong>नीचे तसवीर पर किल्क करना लड्डू खाने जैसा है :)</strong></p>
<p align="left">और हां ....... लड्डू खाने के बाद चिट्ठाचर्चा चलें वहां आज <a target="_blank" href="http://chitthacharcha.blogspot.com/2006/11/blog-post_10.html" title="ChitthaCharcha">मज़ेदार चर्चा</a> चल रही है, बहुत दिनों की खामोशी के बाद सबको एक साथ एक जगह बोलते हुए अच्छा लग रहा है ........ लड्डू बाद मे खाना  - <a target="_blank" href="http://chitthacharcha.blogspot.com/2006/11/blog-post_10.html" title="Chittha Charcha">आइये आइये चलते हैं चिट्ठाचर्चा</a></p>
<p align="center"><a href="http://www.shuaib.in/chittha/"><img border="0" width="354" src="http://www.giftmela.com/images/827_thumb.jpg" alt="http://shuaib.in" height="338" style="width:354px;height:338px;" /></a></p>
<p align="center"><a href="http://www.shuaib.in/chittha/"></a><a href="http://www.shuaib.in/chittha/">This blog has been moved on a new location</a></p>
]]></content:encoded>
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<title><![CDATA[ये खुदा है – 38]]></title>
<link>http://shuaibi.wordpress.com/2006/11/06/%e0%a4%af%e0%a5%87-%e0%a4%96%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e2%80%93-38/</link>
<pubDate>Mon, 06 Nov 2006 14:47:43 +0000</pubDate>
<dc:creator>shuaib</dc:creator>
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<description><![CDATA[[  सद्दाम को मौत ]
 
उसामा बिन लादेन को घस]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>[  सद्दाम को मौत ]<br />
</strong> <br />
उसामा बिन लादेन को घसीटते हुए थाना ले आए जब उसके कपडे उतारे तो थाना मे सब की चीखें निकल पडीं और डर के मारे कांप उठे। किसी इमारत की लिफ्ट मे ऊपर नीचे खेलते हुए उसामा के कपडों मे खुदा पकडा गया। दो दिन पहले खबरों मे बताया भी था कि न्यूयार्क के म्यूज़ियम से उसामा के कपडे चोरी हो गए। पता नही क्यों, खुदा को भी शरारत सूझती है आखिर क्या ज़रूरत थी म्यूज़ियम से उसामा के कपडे चुरा कर पहनने की? अब हालत ये है कि अगर उसको समझाएं तो गज़ब मे आकर कहीं भी भूकंप ला सकता है। आज खुदा की नींद हराम, सुबह चार बजे ही जगा दिया कि जनाज़ा मे जाना है, उठते ही बडे गज़बनाक अंदाज़ मे अंगडाई ली शायद ज़िनदगी मे पहली बार किसी की मृत्यु पर जाना है। दांत साफ करते हुए खुदा को खयाल आया कि कल रात डिनर पर अमेरिका ने पूछा थाः क्या आप अर्थी को कंधा देने का तजुर्बा रखते हैं? खुदा ने खिलखिलाते हुए जवाब दियाः हमें तो जनाज़ों मे जाने का तजुर्बा नही अलबत्ता जनाज़े के जुलूस को भी बारात की तरह इनजोए करते हैं। इस पर अमेरिका ने कहाः तब तो आपको रात भर प्रेक्टिस करलेनी चाहिए क्योंकि कल सुबह आपको एक महान हस्ती की अर्थी को कंधा देना है। दांत साफ करने बाद अभी तक नाश्ता नही मिला मगर सद्दाम का खत मिला जिसकी पहली लाइन मे ही खुदा को अमेरिकी चमचा लिखा, आगे लिखाः <img align="right" width="233" src="http://www.pritchettcartoons.com/caricatures/saddam_h.gif" height="325" style="width:233px;height:325px;" />अपनी मौत की खबर सुन कर मैं ने खुदा पर दुबारा ईमान लाया मगर अब क्या फाइदा वो खुद अमेरिका के कब्ज़े मे है। सद्दाम का खुला खत पढ कर खुदा को बहुत रोना आया फिर सीधा वाइट हाऊस मे घुस आयाः किसी भी हाल मे हमें ईराक जाना है, वहां बेचारा सद्दाम को हमारी मदद की ज़रूरत आंपडी है। अमेरिका ने मना किया, इस वक्त आपका वहां जाना मुनासिब नही, पूरे ईराक मे दंगा फसाद और हर तरफ खून की नालियां बह रही हैं - खुदा ना करे अगर खुदा को कुछ हो जाए तो फिर विश्व को कौन चलाए। अमेरिका ने खुदा को समझायाः चुनाव सर पर हैं और ऐसे मौके पर सद्दाम को मौत की सज़ा सुनाना ज़रूरी था - एक ऐसा शक्स जो पच्चीस वर्षों तक अपनी ही जनता पर खुद को खुदा मनवाता रहा वो पेट्रोल की ताकत से पूरे गल्फ पर खुदा बने उडना चाहता था और जब हम ने उसका सारा पेट्रोल चूसा तो वो नीचे आगिरा। इसी दौरान ईराक से खुदा को फोन आने शुरू होएः अगर आप वाकई खुदा हैं तो कृपया अली की मज़ार को सौदी अरब मे शिफ्त करदें बडी मेहरबानी आपकी, यहां हम सुन्नी-शिया आपस मे एक दूसरे के लिए खून के प्यासे हैं। खुदा ने दिलासा दियाः जब वो ईराक आए तो एक साथ मिल बैठ कर मसला हल कर लेंगे। क्या खाख हल करेंगे? सेकडों वर्ष गुज़र चुके आज तक ये मसला हल नही हुआ कि कौन खुदा की औलाद है हद तो ये है कि खुदा खुद नही जानता कि वो किस का पैदा किया है? अगर वो एक बाप का होता तो आज विश्व मे इतने सारे धर्म नही होते और ना ही धर्म के नाम पर ये फसाद। आज ऐसे वक्त जहां पूरे विश्व मे ज़ात और धर्म के नाम पर फसाद और जंग का माहूल है सब ताकत की ज़ोर पर खुदा बनने लगे और दूसरी तरफ खुद खुदा खामोश तमाशा देख रहा - पता नही हम इनसानों को आपस मे लडवा कर खुदा क्या साबित करना चाहता है। सद्दाम ने कभी सोचा तक नही कि खुदा को कभी मौत आए, इतना तो मालूम है कि विश्व पर अपनी तरह के बहुत सारे खुदा आए और उनके आखिरी समय मे बडी शर्मनाक मौत मरे -- जारी</p>
<p>बाकी फिर कभी</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[ये खुदा है – 39]]></title>
<link>http://shuaibi.wordpress.com/2006/11/06/%e0%a4%af%e0%a5%87-%e0%a4%96%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e2%80%93-39/</link>
<pubDate>Mon, 06 Nov 2006 14:42:53 +0000</pubDate>
<dc:creator>shuaib</dc:creator>
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<description><![CDATA[[ सद्दाम को मौत ]
 
उसामा बिन लादेन को घस]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>[ सद्दाम को मौत ]<br />
</strong> <br />
उसामा बिन लादेन को घसीटते हुए थाना ले आए जब उसके कपडे उतारे तो थाना मे सब की चीखें निकल पडीं और डर के मारे कांप उठे। किसी इमारत की लिफ्ट मे ऊपर नीचे खेलते हुए उसामा के कपडों मे खुदा पकडा गया। दो दिन पहले खबरों मे बताया भी था कि न्यूयार्क के म्यूज़ियम से उसामा के कपडे चोरी हो गए। पता नही क्यों, खुदा को भी शरारत सूझती है आखिर क्या ज़रूरत थी म्यूज़ियम से उसामा के कपडे चुरा कर पहनने की? अब हालत ये है कि अगर उसको समझाएं तो गज़ब मे आकर कहीं भी भूकंप ला सकता है। आज खुदा की नींद हराम, सुबह चार बजे ही जगा दिया कि जनाज़ा मे जाना है, उठते ही बडे गज़बनाक अंदाज़ मे अंगडाई ली शायद ज़िनदगी मे पहली बार किसी की मृत्यु पर जाना है। दांत साफ करते हुए खुदा को खयाल आया कि कल रात डिनर पर अमेरिका ने पूछा थाः क्या आप अर्थी को कंधा देने का तजुर्बा रखते हैं? खुदा ने खिलखिलाते हुए जवाब दियाः हमें तो जनाज़ों मे जाने का तजुर्बा नही अलबत्ता जनाज़े के जुलूस को भी बारात की तरह इनजोए करते हैं। इस पर अमेरिका ने कहाः तब तो आपको रात भर प्रेक्टिस करलेनी चाहिए क्योंकि कल सुबह आपको एक महान हस्ती की अर्थी को कंधा देना है। दांत साफ करने बाद अभी तक नाश्ता नही मिला मगर सद्दाम का खत मिला जिसकी पहली लाइन मे ही खुदा को अमेरिकी चमचा लिखा, आगे लिखाः <img align="right" width="233" src="http://www.pritchettcartoons.com/caricatures/saddam_h.gif" height="325" style="width:233px;height:325px;" />अपनी मौत की खबर सुन कर मैं ने खुदा पर दुबारा ईमान लाया मगर अब क्या फाइदा वो खुद अमेरिका के कब्ज़े मे है। सद्दाम का खुला खत पढ कर खुदा को बहुत रोना आया फिर सीधा वाइट हाऊस मे घुस आयाः किसी भी हाल मे हमें ईराक जाना है, वहां बेचारा सद्दाम को हमारी मदद की ज़रूरत आंपडी है। अमेरिका ने मना किया, इस वक्त आपका वहां जाना मुनासिब नही, पूरे ईराक मे दंगा फसाद और हर तरफ खून की नालियां बह रही हैं - खुदा ना करे अगर खुदा को कुछ हो जाए तो फिर विश्व को कौन चलाए। अमेरिका ने खुदा को समझायाः चुनाव सर पर हैं और ऐसे मौके पर सद्दाम को मौत की सज़ा सुनाना ज़रूरी था - एक ऐसा शक्स जो पच्चीस वर्षों तक अपनी ही जनता पर खुद को खुदा मनवाता रहा वो पेट्रोल की <img align="right" src="http://www.airamerica.com/markriley/files/markriley/images/saddam.jpg " />ताकत से पूरे गल्फ पर खुदा बने उडना चाहता था और जब हम ने उसका सारा पेट्रोल चूसा तो वो नीचे आगिरा। इसी दौरान ईराक से खुदा को फोन आने शुरू होएः अगर आप वाकई खुदा हैं तो कृपया अली की मज़ार को सौदी अरब मे शिफ्त करदें बडी मेहरबानी आपकी, यहां हम सुन्नी-शिया आपस मे एक दूसरे के लिए खून के प्यासे हैं। खुदा ने दिलासा दियाः जब वो ईराक आए तो एक साथ मिल बैठ कर मसला हल कर लेंगे। क्या खाख हल करेंगे? सेकडों वर्ष गुज़र चुके आज तक ये मसला हल नही हुआ कि कौन खुदा की औलाद है हद तो ये है कि खुदा खुद नही जानता कि वो किस का पैदा किया है? अगर वो एक बाप का होता तो आज विश्व मे इतने सारे धर्म नही होते और ना ही धर्म के नाम पर ये फसाद। आज ऐसे वक्त जहां पूरे विश्व मे ज़ात और धर्म के नाम पर फसाद और जंग का माहूल है सब ताकत की ज़ोर पर खुदा बनने लगे और दूसरी तरफ खुद खुदा खामोश तमाशा देख रहा - पता नही हम इनसानों को आपस मे लडवा कर खुदा क्या साबित करना चाहता है। सद्दाम ने कभी सोचा तक नही कि खुदा को कभी मौत आए, इतना तो मालूम है कि विश्व पर अपनी तरह के बहुत सारे खुदा आए और उनके आखिरी समय मे बडी शर्मनाक मौत मरे -- जारी</p>
<p>बाकी फिर कभी</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[ये खुदा है – 37]]></title>
<link>http://shuaibi.wordpress.com/2006/10/31/%e0%a4%af%e0%a5%87-%e0%a4%96%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e2%80%93-37/</link>
<pubDate>Tue, 31 Oct 2006 13:49:43 +0000</pubDate>
<dc:creator>shuaib</dc:creator>
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<description><![CDATA[[ पाकिस्तान का पाकिस्तान पर हमला ]
 
बडा ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>[ पाकिस्तान का पाकिस्तान पर हमला ]<br />
</strong> <br />
बडा गज़ब हुआ, सुबह की चाय तो दूर दोपहर के खाने के लिए भी खुदा ने अपना दरवाज़ा नही खोला। ईद और दिपावली को गुज़रे एक सप्ताह हो गया मगर आज भी दरवाज़े के बाहर फकीरों का हजूम एक पर एक खडा है। खुदा से गरीबों का दुःख दर्द देखा नही जाता उसका दिल कमज़ोर है और ये बेचारे गरीब लोग आज भी यही समझते हैं कि खुदा के पास बहुत पैसा है हालांकि नोट छापने की मशीन तो इनसानों के पास है। जब से खुदा ज़मीन पर आया गरीब गरीब ही ठेहरा अमीर और ज़्यादा अमीर बन गया। खुदा को ना तो झोंपड़ों मे रात गुज़ारने का तजुर्बा है और ना ही लोकल ट्रेनों मे लटकने का। गरीब किसानों ने वर्षा के लिए जो दुआ मांगी थी और फिर पानी को ऐसा बरसाया कि पूरे के पूरे खेत ही उजड गए। गरीब की छत से टपकते पानी को भी इन्जोये करने का हुक्म दिया अगर बरदाश्त नही कर सकते तो किसी सिनेमा हाल जाकर नाइट शो देखने का फर्मान जारी कर दिया। गरीबों के पास खाने के लिए दो वक्त की रोटी नही मगर सारे जहां का दर्द <a target="_blank" href="http://starplus.indya.com/" title="STAR PLUS">"स्टार पल्स"</a> दे दिया। खुदा ने चिल्लाते हुए कहाः आखिर विश्व से कब खतम होगी ये गरीबी? जितने गरीबों को मारो उतने ही पैदा होते जा रहे हैं। अमेरिका ने खुदा से वादा भी किया था कि बहुत ज्लद पूरे विश्व को गरीबी से पाक कर दिया जाएगा और गरीबों को फकीरी मे बदलते उलटा वो खुद कंगाल होने को है। जब शाम को चौकीदारी से लौट कर अमेरिका वापस आया तो खुदा ने पूछाः टोटल कितने भिकारियों को मारा? सलूट देते हुए अमेरिका ने खुदा को जवाब दियाः सरकार, रात का समां था और अँधेरे मे यूं <img align="right" width="300" src="http://extras.mnginteractive.com/live/media/site36/2006/1030/20061030_115710_ND31_Pakistani_300.jpg" alt="Pakistani tribesmen on Monday gather around bodies during a funeral ceremony in Khar, the main town in the Bajur district. Missiles fired by Pakistani helicopters destroyed a religious school on the Afghan border Monday that the military said was a front for an al-Qaeda training camp, killing 80 people. The army said those who died were militants, but furious villagers and religious leaders said the predawn missile barrage killed innocent students and teachers at the school, known as a madrassa. (STR, AFP, Getty)" height="197" style="width:300px;height:197px;" />महसूस हुआ जैसे पांच सौ तो ज़रूर मार दिए हैं। खुदा ने अमेरिका को कान के नीचे दो बजाए और <a target="_blank" href="http://www.currentargus.com/ci_4577835" title="http://www.currentargus.com/ci_4577835">आज का अखबार दिखायाः</a> सिर्फ 90 भिकारी मरे हैं और बाकी 410 को क्या ज़मीन खा गई? सर झुका कर अमेरिका ने कहाः हमारा टार्गेट तो पांच सौ के ऊपर था, हमारे हेलीकाप्टर से एक रोटी क्या गिरी सभी <a target="_blank" href="http://news.google.com/news?hl=en&#38;ned=us&#38;ie=UTF-8&#38;q=pakistan" title="Pakistan atack on pakistan - google news">फकीर आपस मे लड पडे</a>। अमेरिका की सफाई सुन कर खुदा ने उसे शाबाशी दी, चलो कम से कम आपस मे तो लडवा दिया जिस से खुदा का खर्च बचा - हर दिन पचास फकीर भी मरें कोई बात नही आपस मे लडवाना ज़रूरी है – जारी</p>
<p>बाकी फिर कभी</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[ये खुदा है - 36]]></title>
<link>http://shuaibi.wordpress.com/2006/10/24/%e0%a4%af%e0%a5%87-%e0%a4%96%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88-36/</link>
<pubDate>Tue, 24 Oct 2006 14:08:21 +0000</pubDate>
<dc:creator>shuaib</dc:creator>
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<description><![CDATA[ [ ईद का भाषण ]
 बिल गेट्स ने जब नया विस्ट]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p> <strong>[ ईद का भाषण ]</strong></p>
<p> बिल गेट्स ने जब नया विस्टा दिखाया तो खुदा की समझ मे कुछ ना आया। आज न्यूयार्क शहर मे सब की नज़रें बुर्खा पोश नारियों पर टिकी रहीं, किसी ने अफवाह फैलादी कि खुदा बुर्खा पहन कर शहर मे घूम रहा है। शाम को सरकारी न्यूज़ चैनल पर अनाऊँस करवायाः अफ़वाहों पर ध्यान ना दें, खुदा बुर्खा मे नहीं बल्कि <a target="_blank" href="http://www1.whdh.com/news/articles/world/BO31999/" title="PANAMA Bumb Blast in Bus">पनामा की एक बस मे</a> पटाखे ले जाते हुए धमाका मचा दिया। दूसरे दिन ईद के मैदान मे खुदा ने अपना भाषण शुरू किया और वही पुरानी बातें दुहराने की कोशिश की जो मुल्ला साहिबान पहले बता चुके थे। ईदगाह से बाहर हज़ारों गरीब और फकीर लोग खुदा की एक झलक देखने के लिए <a target="_blank" href="http://news.google.com/news?hl=en&#38;ned=us&#38;ie=UTF-8&#38;q=G8&#38;btnG=Search+News" title="G8 summit">G8 वालों</a> से झगडा कर रहे थे वहीं परदे के पीछे अफगानी तालिबान डंडे ले कर <a target="_blank" href="http://news.google.com/news?hl=en&#38;ned=us&#38;ie=UTF-8&#38;q=British+soldier+Afghan" title="British soldier dies in Afghan suicide attack">खुदा के फरिश्तों</a> को पीट रहे थे कि उस वक्त मदद को क्यों नही आए जब अमेरिका ने हम पर हमला किया था? तभी ईद के मैदान मे ज़बरदस्त हलचल मच गई जब खुदा ने अपने भाषण मे अचानक अमेरिका की तारीफ करडाली। जापान ने वाक आऊट किया तो इन्डोनेशिया भी गुस्से मे मैदान छोड बाहर निकल आया। खुदा के भाषण की बे हुर्मती, दोनों देशों को <a target="_blank" href="http://news.google.com/news?hl=en&#38;ned=us&#38;ie=UTF-8&#38;q=earthquake+japan" title="Strong quake hits Japan, no concern over tsunamis">एक बार फिर भूकंप से</a> हिलाडा। खुदा का गुस्सा देख <a target="_blank" href="http://news.google.com/news?hl=en&#38;ned=us&#38;ie=UTF-8&#38;q=north+korea" title="The series of talks is expected to cover moves to curb climate change and Muslim extremism, as well as the perceived new threat from North Korea. ... ">उ.कोरिया ने तौबा करली</a> और वादा किया कि आइंदा से सिर्फ छोटे पटाखे जलाएगा। खुदा ने अपना भाषण जारी रखाः भारत मे एक की बजाए दो ईदें अजीब बात है, चंद लोगों को <a target="_blank" href="http://news.google.com/news?hl=en&#38;ned=us&#38;ie=UTF-8&#38;q=Eid+moon+india" title="Most parts of India will celebrate Eid-ul-Fitr on Tuesday, ending the ... In Bihar, the Eid moon was sighted on Monday and Sadar Mufti-cum-Naib Qazi of ... ">आज चांद दिखाई दिया</a> तो बाकीयों को कल दिखाई देता है जब्कि हम ने एक ही चांद बनाया था। सऔदी अरब ने खुदा का शुक्र अदा किया कि हमें चांद तो नज़र ना आया <a target="_blank" href="http://news.google.com/news?hl=en&#38;ned=us&#38;ie=UTF-8&#38;q=Eid+moon+gulf" title="Clerics in the Islamist Muttahida Majlis-e-Amal (MMA)-ruled North West Frontier Province announced Eid celebrations for yesterday, saying that the moon for the ...">मगर ईद करडाली</a> अब तो खुले आम दबाके खाएंगे क्योंकि बगैर चांद देखे रमज़ान की छुट्टी करडाली। मुशर्रफ भी खडे होकर कहने लगेः हम तो <a target="_blank" href="http://www.greaterkashmir.com/full_story.asp?Date=24_10_2006&#38;ItemID=15&#38;cat=1" title="The Ruet-i-Hilal committee of Pakistan announced on Monday that the Shawal moon was not sighted anywhere in Pakistan, thus Eid-ul Fitr will be ... ">चांद देख कर ही ईद मनाएंगे</a> अगर से वो वर्षों बाद भी दिखाई दे। फिर मुशर्रफ ने खुदा को दावत भी दिया कि ईद हमारे साथ पाकिस्तान मे मनाएं तो खुदा ने तौबा करली क्योंकि पाकिस्तान मे उसकी सिक्यूरिटी का कोई इनतेज़ाम ही नही और मुमकिन है खुदा को पाने के चक्कर मे शिया-सुन्नी झगडा कर बैठें। जब आखिर मे इबादत का वक्त आया तो अमेरिका ने बुलंद बांग अज़ाँ कहीः सारे जहां का मालिक खुदा है मगर वो अमेरिका के कब्ज़े मे है -- जारी</p>
<p>बाकी फिर कभी</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[ये खुदा है - 35]]></title>
<link>http://shuaibi.wordpress.com/2006/10/17/%e0%a4%af%e0%a5%87-%e0%a4%96%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88-35/</link>
<pubDate>Tue, 17 Oct 2006 08:02:17 +0000</pubDate>
<dc:creator>shuaib</dc:creator>
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<description><![CDATA[[ ईद का चांद ]
अमेरिका ने खुदा के आगे चीन ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>[ ईद का चांद ]</strong></p>
<p>अमेरिका ने खुदा के आगे चीन देश पर मुकद्दमा ठोंका कि वो चांद पर खुल्लम खुल्ला फ्लैट बेच रहा है, वो दिन दूर नही जब पूरे चांद पर चीन अपना कब्ज़ा जमाले। फिर पता नही उन लोगों का क्या होगा जो चांद को पूजते हैं, बगैर चांद के रमज़ान कैसे बिताएँ और ईद क्या खसाबों की शकल देख कर मनाएं? अचानक खुदा के आंसू निकल पडे, वो बिलक कर रोने लगा। जब भारत ने अगे बढ कर वजह पूछी तो खुदा ने रोते हुए आज का <img align="right" width="280" src="http://www.signonsandiego.com/news/world/images/061016rebels.jpg" alt="Tamil rebels rammed a truck packed with explosives into a convoy of military buses, killing at least 93 sailors in one of the deadliest insurgent attacks since the 2002 cease-fire. (Associated Press)" height="185" style="width:280px;height:185px;" />अखबार दिखायाः श्रीलंका मे दर्जनों फौजी जवान मारे गए, इन का कसूर क्या है यही के पिछले दिनों इनही फौज ने एलटीटीई वालों को मारा था? आखिर ये कब तक चलेगा, ज़मीन के एक छोटे से टुकडे के लिए इनसान एक-दूसरे के खून का प्यासा – इन को सोनामी से डराया भी मगर ये इनसान सुधरना तो दूर खुद खुदा को ही सुधार देंगे। खुदा को यूं ही नहाने की सूझी, लंका समुद्र किनारे छलांग मारने ही वाला था जिस से एक ज़बरदस्त सोनामी मचलने को थी अचानक मुशर्रफ सर खुजाते सवालों की एक बोरी लाकर खुदा के आगे रख दियाः पचास वर्ष हो गए हमारे देश मे आज भी ईद के चांद पर झगडा खतम नही हुआ - किसी को दिखता है और किसी को नही। ऐसी कोई बात नही के सभी पाकिस्तानी ईद के चांद से लगऊ रखते हैं, बात दरअसल ये है कि ईद का चांद नज़र आजाए तो दो दिन की छुट्टी मिलेगी। सिर्फ पाकिस्तान ही मे नही बल्कि दुनिया भर के मुसलमान आज भी ईद के चांद को ले कर झगडा करते हैं कि ईद आज मनाएं या कल? ब्राए मेहरबानी इसका कोई उपाय बताएं। खुदा ने अपनी सादगी से जवाब दियाः चांद नज़र आए या नही हर दिन ईद मनाएं - खुशी का मतलब ईद है और हर दिन ईद हो ताकि दूसरों पर उंगली उठाने का टाइम ना मिले। उधर जापान के नए प्रधान मन्त्री ने अमेरिका को वारनिंग लिख भेजाः बस बहुत हो गया जब से खुदा ज़मीन पर आया, अभी तक अमेरिका से बाहर नही निकला - अगर अमेरिका ने खुदा को आज़ाद नही किया, वरना हम खुद मुखतलिफ किस्म के खुदा बना कर सब को बेचेंगे। इस बात पर उ.कोरिया, रशय और जर्मनी ने भी जापान की होसलाअफज़ाई करडाली, वो दिन दूर नही जब हर देश का अपना खुदा होगा। जब तक खुदा आसमानों मे उडता रहा, उसे दुनिया की खबर नही और जिस दिन से अमेरिका मे मेहमान बना, उसकी नियत कुछ ठीक नही अब स्वर्ग भी अमेरिका मे बनाने का इरादा कर लिया। बाकी दुनिया बेकरार है कि खुदा की एक झलक देखले, पता नही उसकी शकल किस से मिलती है? मगर अमेरिका खुश है कि सबसे असली खुदा उसकी अपनी कैद मे है, अमेरिका ने खुद कहाः खुदा का शुक्र है कि वो हमारी कैद मे है। जब खुदा ज़मीन पर आया तो उसकी गारंटी लेने वाला अमेरिका के सिवा दूसरा कोई देश आगे नही आया और आज अमेरिका पर उँगलियॉ उठ रही हैं कि वो खुदा की शक्ति का गलत इसतेमाल कर रहा है, अगर यूं ही गरीब देशों को कुचलता फिरे तो एक दिन खुदा की पूरी शक्ति खतम होजाएगी और फिर अमेरिका खुद को खुदा समझ बैठेगा। कई बार खुदा ने खुद कहाः हमें अमेरिका ही मे रहना पसंद है क्योंकि ये हर किस्म के धर्मों से पाक है और हमें दूसरे देशों मे जाने को डर लगता है क्योंकि हमारा कोई धर्म नही, अगर कोई हमसे हमारा धर्म पूछे तो क्या जवाब दें। फिर एक बार खुदा ने बडे गज़बनाक अंदाज़ मे फरमायाः खुदा को खुदा की कसम, लानत है उस पर जो अमेरिका को सुपर पावर नही मानता। जापान ने अपने दोनों हाथ अमेरिका की तरफ उठा कर कहाः खुदा को उसकी शक्ति की कसम, क्यों अपना टाइम अमेरिका मे खराब कर रहा है - काश खुदा अगर जापान का मेहमान होता तो आज अपने हमशकल खुदाऊँ को देख कर बहुत खुशी मनाता -- जारी</p>
<p>बाकी फिर कभी</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[ये खुदा है - 34]]></title>
<link>http://shuaibi.wordpress.com/2006/10/12/%e0%a4%af%e0%a5%87-%e0%a4%96%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88-34/</link>
<pubDate>Thu, 12 Oct 2006 09:12:42 +0000</pubDate>
<dc:creator>shuaib</dc:creator>
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<description><![CDATA[[  9/11 जुनियर ]
 खुदा की नींद हराम, अपना बि]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>[  9/11 जुनियर ]</strong></p>
<p> खुदा की नींद हराम, अपना बिस्तर छोड फोरन महल से बाहर चीखते हुए भागा। आसमान पर कान फाडते अमेरिकी सेना के लडाकू जहाज़, खुदा ने झिल्लाते हुए कहाः लानत है, हमारी नींद खराब करदी। वो तो शुक्र है अमेरिका ने खुदा को तसल्ली दीः <img align="right" width="180" src="http://d.yimg.com/us.yimg.com/p/ap/20061011/capt.eb39fa0b7df5481dbe7950b005c1555c.high_rise_plane_crash_nyma106.jpg?x=180&#38;y=237&#38;sig=SkoiAp5Ej_bo8_CYIHyqQQ--" alt="A high-rise building burns after a small aircraft crashed into the building in New York, October 11, 2006. (Tressa Octave/Reuters)" height="237" style="width:180px;height:237px;" /> ये सब आप ही की सिक्यूरिटी के लिए आए हैं। थंडा पानी पीने के बाद खुदा ने फरमायाः समझ मे नही आता आखिर ये लडाकू जहाज़ कान क्यों फाडते हैं? हम भी जगह जगह भूकम्प और भूचाल लाते हैं मगर मजाल है जिस से कोई आवाज़ निकले। अगर किसी को डराना है तो उसके हाथ पैर तोड देते या फिर उसे जान से ही मार डालते जैसे हम भूकम्प भेज कर सेकडों को एक साथ मारते हैं मगर किसी के कान नही फाडते। अमेरिका ने खुदा के मुंह पर थंडा पानी मारते हुए कहाः अब बस भी करें जब देखो आप अपनी ही तारीफ करते रहते हो जबकि <a target="_blank" href="http://news.google.com/news?hl=en&#38;ned=us&#38;q=Plane+crash+new+york&#38;ie=UTF-8">आज फिर किसी</a> ने 9/11 की याद ताज़ा करदी। अब पता लगाने की कोई जरूरत नही <a target="_blank" href="http://news.google.com/news?hl=en&#38;ned=us&#38;q=Plane+crash+new+york&#38;ie=UTF-8">ये घटना</a> किस ने की, <a target="_blank" href="http://news.google.com/news?hl=en&#38;ned=us&#38;q=Plane+crash+new+york&#38;ie=UTF-8">इस प्लेन</a> को भी ज़रूर उसामा ने ही भेजा है। बातों बातों मे अमेरिका ने खुदा को शर्म भी दिलाईः इतने वर्ष होगए आज तक उसामा को पकड ना सके और बातें बाडी बाडी करते हो जब देखो भूकम्प से डराते हो और खुद नहाने के लिए इन्डोनेशिया के समुद्र मे डुबकी लगाते हो और ऊपर से हमारी बदनामी कि अमेरिका ने क्यों नही बताया खुदा यहां इनडोनेशिया के समुद्र मे डुबकी लगाने वाला है। अमेरिका ने खुदा को समझायाः दुनिया इतनी बडी है और समुद्र दुनिया से बडा है आपको क्या खुजली है हमेशा से नहाने के लिए इनडोनेशिया के किनारे छलांग मारते हो और वहां के बेचारों को हर वर्ष एक नए सुनामी से मुलाकात करवाते हो? सरे आम यूं शर्मिन्दा होना, खुदा को बहुत गुस्सा आया, अमेरिका को तपाने (परेशान) के लिए उत्तर कोरिया को <a target="_blank" href="http://news.google.com/news?hl=en&#38;ned=us&#38;ie=UTF-8&#38;q=north+korea">ईशारा दे दिया</a> -- जारी</p>
<p>बाकी फिर कभी</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[ये खुदा है - 33]]></title>
<link>http://shuaibi.wordpress.com/2006/10/08/%e0%a4%af%e0%a5%87-%e0%a4%96%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88-33/</link>
<pubDate>Sun, 08 Oct 2006 06:49:23 +0000</pubDate>
<dc:creator>shuaib</dc:creator>
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<description><![CDATA[[उत्तर कोरिया का मौसम]
पता नही क्यों, आज]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>[उत्तर कोरिया का मौसम]</strong></p>
<p>पता नही क्यों, आज शाम की चाय के बाद खुदा को पान खाने की सूझी और वैसे भी अमेरिका मे कानूनी तौर पर पान खाना जुर्म है। खुदा अपना चमत्कार दिखाने ही वाला था अचानक मुशर्रफ ने आगे बढ कर खुदा की खिदमत मे पान पेश किया। पान चबाते खुदा ने बडे अफसोस के साथ कहना शुरू कियाः अब छोटे देश भी अपनी ताकत आज़माना चाहते हैं, उत्तर कोरिया पर हमारी लानत है जो <a target="_blank" href="http://news.google.com/news?hl=en&#38;ned=us&#38;q=north+korea&#38;ie=UTF-8">अमेरिका को तंग करने</a> पर तुला है। अगर आज के बाद कोई न्युकल्यिर धमाके टेस्ट करने की कोशिश करे, खुदा अमेरिका के साथ है और खबरदार जो कोई अमेरिका को तंग करे तो उस के लिए खुदा हाफिज़। करीब खडे मुशर्रफ पर पिचकारी मारते हुए खुदा ने गुस्से मे कहाः अफगान और ईराक को सुधारते हम कंगाल हो चुके, लेबनान मे हिज़बुल्लाह को ललकार कर अपनी टांग तुडवाली - अब समझ मे नही आता कि अपना लंगडा नाच ईरान मे दिखाए या <a target="_blank" href="http://news.google.com/news?hl=en&#38;ned=us&#38;q=north+korea&#38;ie=UTF-8">उत्तर कोरिया</a> मे? फिर एक बार पान की पिचकारी को मुशर्रफ पर मारते हुए खुदा ने कहाः हम दिल्लगी ही दिल्लगी मे मुशर्रफ को नचाते रहे और वो नाचते हुए डिस्को डांसर बन गए। बायें तरफ खडे अफगान राष्ट्रपति हामिद कर्ज़दार को देखेते हुए खुदा ने मुस्कुरा कर कहाः</p>
<p><img align="absMiddle" width="413" src="http://www.whitehouse.gov/news/releases/2004/09/images/20040921-9_trilat-515h.jpg" height="337" style="width:413px;height:337px;" /></p>
<p>पान खाने के बाद अब हमें नाच देखने को मन कर रहा है, मुशर्रफ और हामिद कर्ज़दार से बिनती है के आप दोनों मिलकर भांगडा डालें और खुदा को खुश करें। <a target="_blank" href="http://news.google.com/news?hl=en&#38;ned=in&#38;q=mangalore">मेंगलौर के ताज़ा</a> दंगा-फसाद पर खुदा ने हँसते हुए फरमायाः अच्छा है कि हम भारत मे नही बल्कि अमेरिका मे रहते हैं, अगर भारत मे होते तो वहां के अजीब लोग हमें अकीदत से चबा डालते। तभी एक भारती ने खुदा के नाम खत लिखाः हमें आपकी कोई ज़रूरत नही क्यों के हमारे देश मे हर क़िस्म के भगवान हैं और हम भारती एक-दूसरे के भगवानों को चबाते रहते हैं  जो कि हमारे कल्चर का एक हिस्सा बन चुका है – जारी</p>
<p>बाकी फिर कभी</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[ये खुदा है - 32]]></title>
<link>http://shuaibi.wordpress.com/2006/10/06/%e0%a4%af%e0%a5%87-%e0%a4%96%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88-32/</link>
<pubDate>Fri, 06 Oct 2006 07:02:17 +0000</pubDate>
<dc:creator>shuaib</dc:creator>
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<description><![CDATA[सुबह जब खुदा की आंख खुली, सीधा भारत की ओ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>सुबह जब खुदा की आंख खुली, सीधा भारत की ओर मुडा और कहाः बडे अजीब किस्म के लोग हैं, जबकि अफज़ल लटकने को तैयार है और दूसरी तरफ चंद लोग उसके लटकाने के खिलाफ पूरे आनंद के साथ आवाज़ लगा रहे हैं जैसे वो बच गया तो बडा नेता बनेगा अगर लटका ही दिया तो दूसरे अफज़लों को मौका मिलेगा। तभी अफज़ल की बेगम खुदा से इलतिजा कर बैठीः बडी मेहरबानी अगर अप मेरे अफज़ल की जगह ले लें वैसे भी खुदा को मौत नही आती - अगर उसे लटका दिया तो मैं दुनिया मे अकेली अपने बच्चे के साथ और अफज़ल जन्नत मे हूरों के साथ जो मुझे बरदाश्त नही। खुदा ने अपनी बात जारी रखीः हर इनसान की ज़िन्दगी और मौत खुदा के हाथ मे है मगर आतंकवादीयों से खुदा खुद खौफ खाता है, क्योंकि वो यकीनन हमारे स्वर्ग तक मिज़ाइल से निशाना बना सकता है। हम ने मुजाहिदीन से जन्नत का वादा किया, मगर वो बेचारे हमेशा से दुनिया ही मे बुरी मौत मारे जाते हैं। माना कि किसी ज़िनदा इनसान को फांसी पर लटकाना अच्छी बात नही, करना तो ये था आतंकवादीयों को देखते ही गोली मार देते तो आज अफज़ल को लटकाने की ज़रूरत ही ना पडती। सुबह नाश्ते के बाद दुआ की मेहफिल सजाई जिसमे खुदा ने थाईलैंड के लिए दुआए खैर मांगी और पूरी दुआ थाई सेना पर छोडी फिर कहाः उम्मीद है थाईलैंड मे पाकिस्तान जैसी हालत ना बने। पीछे से टोनी बलैयर ने भी अपने लिए दुआए खैर मांगी तो खुदा ने जवाब दियाः अब कोई फाइदा नही क्योंकि तुमहारे लिए उलटी गिनती शुरू हो चुकी है। "लगे रहो मुन्ना भाई" को तीसरी बार देखते हुए खुदा मज़े लूट रहा था ऐन गांधीग्री पुस्तकों की सीन पर अमेरिका ने खुदा के कान भरेः मुशर्रफ की नई किताब पर टैक्स लगाना ज़रूरी है जिसमे खयाली पलाऊ की खयाली तरकीबों के सिवा कुछ भी नही। दूसरी तरफ इसाई साधू पोप बेंडिक्ट ने अपने हालिया लेक्चर पर नाराज़ मुसलिम नेताओं से खुलेआम मुलाकात पर खुल कर कहाः <img align="right" width="304" src="http://d.yimg.com/us.yimg.com/p/ap/20060925/capt.0a42f28aa6104cc882f11c109a1314f1.vatican_pope_muslims_oss104.jpg?x=380&#38;y=318&#38;sig=CfzUrO6gTm9C4U4Gb.S9KQ--" height="242" style="width:304px;height:242px;" />  इस मे नाराज़्गी कैसी? हम सब खयालों पर ईमान रखने वाले हैं, एक धर्म दूसरे धर्म के बारे मे जो खयाल रखता है वही खयाल को हम अपने लेक्चर मे ज़ुबानी कह गए गए। अप मुसलमान लोग हम ईसाई खयालों से सहमित नही तो हम कौनसा मुसलिम धर्म से सहमित रहें? बात खयाली है उसे खयालों मे ही रहने दें मगर यूं सडकों पर निकल आना, नारे बाज़ी करना ये सब अच्छी बात नही जिस से हमारे विचार आप मुस्लमानों के बारे मे और पक्का हो जाते हैं। पोप ने नारज़ मुसलमानों को दावत भी दीः आओ हम सब मिल कर अपने विचारों का सम्मेलन करलें, उम्मीद है हम सबके विचार जूठ साबित हों जिसका कोई सबूत भी नही - फिर आखिर मे हम सब मिलकर नए विचारों को जनम देंगे ताकि आने वाली पीढी को पूराने विचारों से पाक रखा जाए। जब <a target="_blank" href="http://www.radiosargam.com/firstlook/lrmb.jpg" title="Lage raho Munna Bhai - Poster">लगे रहो मुन्ना भाई</a> खतम हुई, खुदा ने फिर से चौथी बार देखने की ठानी तो अमेरिका ने याद दिलायाः मेहफिल लग चुकी है और लोग बाग अप के इनतेज़ार मे ऊंघ रहे हैं। मजलिस पहुंच कर खुदा ने दुपहर का भाषण पढना शुरू किया, अचानक पता नही खुदा को क्या सूझी पूरा भाषण घांधीग्री पर सुना दिया -- जारी</p>
<p>बाकी फिर कभी</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[इनसे मिलो - 31]]></title>
<link>http://shuaibi.wordpress.com/2006/09/09/%e0%a4%87%e0%a4%a8%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a5%8b-31/</link>
<pubDate>Sat, 09 Sep 2006 12:47:26 +0000</pubDate>
<dc:creator>shuaib</dc:creator>
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<description><![CDATA[ये खुदा है
आज उसामा बिन लादिन ने अपना त]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>ये खुदा है</strong></p>
<p>आज उसामा बिन लादिन ने अपना ताज़ा वीडियो डाइरेक्ट खुदा के नाम भेज दिया जिसमे वोह बंदूक पकडे अपनी रिवायती खबरदार उंगली को खुदा की तरफ नचाते हुए कहाः</p>
<p>सभी तारीफें अमेरिका के लिए जो निहायत ही गज़बनाक और दुनिया का चौकिदार है - पहले तो हम हर काम खुदा की तारीफ से शुरू करते थे, अब क्योंकि खुदा कि चाल चलन से साफ ज़ाहिर है के वोह भी अमेरिका का तरफदारी है - हम मुजाहिदीन सिर्फ इनतेज़ार ही करते रहे कि एक ना एक दिन खुदा हमारी मदद को ज़रूर आएग और वोह आया भी तो सीधा अमेरिका मे उतरा। वाह क्या खाख ज़िन्दगी पाई हमने? सोचा था अपने नेक कर्मों की वजह से खुदा खुश होकर जन्नत मे सबसे ऊँचा मुकाम देगा मगर वोह खुद जन्नत छोड यहां अमेरिका मे आ बसा - अफगान, ईराक, चैच्निया मे इनतेज़ार करते ही रहे कि खुदा बचाने ज़रूर आएग मगर खुदा ने अपनी औकात दिखलादी के वोह भी अमेरिका के आगे कुछ नहीं। ए दुनिया के दाता, ज़रा ये तो बता आखिर ये कैसा सिस्टम है तेरा? हम तेरी खातिर मरते-मारते हैं, दुनिया भर मे आतंक मचाते हैं ताकि जन्नत मे एक छोटा सा झोंपडा मिल जाए मगर तूने हमसे पूरे काम लिए फिर दुनिया ही मे खाख चटादी? हमारी समझ मे नही आ रहा कि हम किस के लिए काम कर रहे हैं? अब तू ही बता दे आखिर हमें कौनसा धर्म अपनाना होगा ताकि दूसरों की तरह हम भी सर उठाकर जिएं। माता पिता के वरसे मे जो धर्म मिला, मज़हबी पढाई हम पर फर्ज़ हुई और जब पढलिया तो ज़हन ऐस बन गया कि दूसरे धर्मों के लिए नफरत जगाली, लिबास तबदील किया, गले मे खुजली के बावजूद छाती तक डाढी छोडी फिर जन्नत मे सबसे ऊँचा मुकाम पाने के लिए जिहाद का पेशा अपना लिया इसके बावजूद आज भी हम दुनिया भर मे बेइज़्ज़त ठेहरे? दुनिया के सभी देश एक होकर हमें नाकों चने चबवा रहे हैं। हम तसव्वुर करते ही रहे कि खुदा की मदद करीब है मगर हमेशा मूंह की खानी पडी। दुनिया भर मे हमारे मुजाहिदीन को चुन चुन कर कुत्तों की तरह मारा जा रहा है। उन मरने वाले मुजाहिदीन को शहीद कहते हुए भी शर्म आती है क्योंकि उनके चेहरे पहचानने लायक भी नही छोडते। शहीदों को जन्नत नसीब है मगर खुदा खुद अमेरिका मे ऐश कर रहा है। किस्से कहानियों मे हमेशा जिहाद की विजय लिखा है और हमने जहां कहीं भी जिहाद किया हमेशा मुंह की खानी पडी। काश खुदा भी एक मुजाहिद होता, क्योंकि एक मुजाहिद ही दूसरे मुजाहिद का दर्द समझता है। हम इस वकत बहुत ही कनफ्युज़न का शिकार हैं, पहले तो अपने आप को बहुत बडा मुजाहिद समझा, चंद लोगों ने हौसला क्या बढाया कि खुद को वलीयों मे तस्वुर कर बैठे - हमें क्या मालूम था कि दुनिया वाले हमारे इस पवित्र पेशे को आतंकावी समझते हैं? कुछ समझ नही आरा कि आखिर हमारी ज़िन्दगी का मकसद क्या है? (उसामा के आंसू निकल पडे) हमे इनसानियत के पवित्र मुकाम से निकाल कर मज़हब मे फैंक दिया फिर हमने ऐसा कौनसा गुनाह किया कि जिहादी ग्रुह का लीडर बना दिया जहां रुसवाई, शर्मिन्दगी के बाद फिर आखिर मे बहुत बुरी मौत है - जब हमें मुजाहिद बना ही दिया तो फिर जानवर बनने मे देर नही - काश आप हमें जानवर ही बना देते या फिर इनसानों मे पैदा ही ना करते तो आज अपनी ऐसी बुरी हालत ना होती। (उसामा ने रुमाल से अपने आंसू पुंछे और खुदा की तरफ घूरते हुए कहा) इस वीडियो कैसेट के ज़रिए आज इकरार करता हूं, जिहादी नौकरी छोड कर क्म्प्यूटर इन्जीनियर बनना चाहता हूं और अपनी बाकी ज़िन्दगी इनसानों की तरह जीना चाहता हूं।</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[ये क्या बकवास है?]]></title>
<link>http://shuaibi.wordpress.com/2006/08/31/%e0%a4%af%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%ac%e0%a4%95%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b8-%e0%a4%b9%e0%a5%88/</link>
<pubDate>Thu, 31 Aug 2006 14:25:48 +0000</pubDate>
<dc:creator>shuaib</dc:creator>
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<description><![CDATA[दुनिया भर की खबरें और हाल चाल को ध्यान ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>दुनिया भर की खबरें और हाल चाल को ध्यान मे रखते हुए "खुदा से मिलो" सिरीज़ लिखना शुरू किया और अपने लेख का करदार खुदा को बनाया - वोह इसलिए के खुदा किसी की जागीर नही - खुदा और भगवान दोनों एक नाम हैं - खुदा का शब्द इसलिए इस्तेमाल करता हूं के ये लेख पहले उर्दू मे लिखना शुरू किया था, अब हिन्दी मे भगवान कि बजाए खुदा का ही नाम इस्तेमाल करता हूं। एक खास बात ये है के धर्म से बेज़ारगी और वर्षों से मीडिया मे नौकरी का तजुर्बा की वजह से इन सिरीज़ मे और कडुवापन डालता हूं यानी सीधे शब्दों मे अपनी भडास निकालता हूं। और इन सिरीज़ मे ऐसी वैसी बातें कह जाता हूं के पढने वालों को बहुत कडुवी लगती हैं या फिर बहुत बडी बकवास लगती है। ये सिरीज़ सिर्फ अपना ज़ाती खयाल है ना के किसी को बुरा भला कहने के लिए - बस दुनिया भर की ताज़ा खबर देख कर जो समझ मे आता है उसे  इन सिरीज़ मे लिखता हूं और ये तो अपना ब्लॉग है अपने दिल की बात भी यहीं लिखनी है। इन लेखों मे खुदा को गाली लिखूं या उसकी मां बेहन एक करूं क्योंकि खुदा (भगवान) किसी एक का नही बल्कि वोह हर किसी का है - खास तौर पर इन सिरीज़ मे अपना अंदाज़ ऐसा है के दिल खोल कर अपनी भडास निकालता हूं।</p>
<p>खुदा से मिलो टाइटल और लेख हैरानी की बात है पर उसका मतलब ये नही के इन सिरीज़ मे खुदा का मतलब कोई आसमानी खुदा है? अपनी सिरीज़ मे उस शक्ति को खुदा बनाया है जो ताकतवर देशों के पीछे कारफरमा है। क्योंकि इस वकत अमेरिका सुपरपावर बनने की कोशिश मे है, बाकी देशों मे अपना सिक्का चलाना चाहता है - और ऐसे वकत खुदा दुनिया देखने आया और अमेरिका की रौनक देख कर उसीका हो गया और पीछे रह कर अमेरिका की हर मुमकिन मदद कर रहा है ----- ये सिर्फ "खुदा से मिलो" सिरीज़ का खयाल है ना कि सच मुच ऐसा है। और लिखने का अंदाज़ ऐसा के पढने वाले अगर समझें तो हैरान हों और ना समझे तो परेशान हो कि ये क्या बकवास है? :)<br />
सुन रहे हो <a href="http://amitabhtri.wordpress.com/">अमिताभ त्रिपाठी जी</a></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[इनसे मिलो - 30]]></title>
<link>http://shuaibi.wordpress.com/2006/08/30/%e0%a4%87%e0%a4%a8%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a5%8b-30/</link>
<pubDate>Wed, 30 Aug 2006 13:21:17 +0000</pubDate>
<dc:creator>shuaib</dc:creator>
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<description><![CDATA[ये ख़ुदा है
आज ख़ुदा नींद मे वनदे मातरम् ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>ये ख़ुदा है</strong></p>
<p>आज ख़ुदा नींद मे वनदे मातरम् बडबडाया तो अमेरिका की चीखें निकल पडीं, पिछले दो वर्षों से ख़ुदा हमारी अपनी क़ैद मे है और उसे अभी तक अमेरिका से बाहर जाने नही दिया। जापान ने अमेरिका को वारनिंग लिख भेजाः बस बहुत होगया, अब ख़ुदा को अमेरिका से बाहर निकलना ही होगा सारी दुनिया उसकी झलक देखने बेताब है - अगर अमेरिका ने ख़ुदा को आज़ाद नही किया तो वरना ---- हम भी मुख़तलिफ किसम के ख़ुदा बना कर बेच देंगे। दूसरी तरफ राशिया, कोरिया और सिंगापुर ने भी जापान की हिमायत करदी, वोह दिन दूर नही जब हर देश का अपना ख़ुदा होगा। मगर अमेरिका की खुश-किस्मती सबसे बढिया खुदा उसकी अपनी क़ैद मे है, ख़ुद अमेरिका ने कहाः ख़ुदा का शुक्रिया के ख़ुदा हमारी क़ैद मे है। सबुह उठ कर ख़ुदा ने सबसे पहले अज़ाँ दीः ख़बरदार दुनिया वालों, जो अमेरिका को ताक़तवर नही मानता वोह हम मे नही - और लानत हो उस पर जो अमेरिका का खाए फिर उसी पर उंगली उठाए। आज ख़ुदा ने अमेरिका से भारत यात्रा की इजाज़त चाही, अमेरिका ने मना करदियाः ख़ुदा का भारत यात्रा करना ख़तरनाक है क्योंकि वहां कोई एक धर्म नही बल्कि ऐसे वैसे लोगों का देश है के आपका एक बाल मिल जाए तो मज़ार बनादें, दूध से नेहला कर आपके सर पर नारियल तोड सकते हैं यहां तक के आपके कपडे फाड कर अक़ीदत से खाजएंगे फिर उसके बाद किसी तालाब मे डूबा कर आपको घुला देंगे। अच्छा है आप अमेरिका ही मे रहें, यहां धार्मिक लोग कम इनसान ज़्यादा हैं और यहां किसी किस्म का भेद भाव भी नही। इतना सुनकर ख़ुदा ख़ौफ के मारे भारत यात्रा का प्लान कैनसल करदिया और सरकारी न्यूज़ चैनल पर भारत को पैग़ाम भेजाः दुनिया के महान देश भारत को हमारा यानी ख़ुदा का सलाम, बडी तमन्ना थी भारत यात्रा की पर किसी वजह से टालना पडा। आज भारत मे वनदे मातरम् पर इतना हल्ला क्यों मचाया जारहा है, आख़िर क्या ज़रूरत थी एक से एक धर्मों को जनम देने की? किसी को वनदे मातरम् पढना पसंद है और किसी को नहीं ये अलग बात है - अगर आप अपने देश को खुश हाल और तरक्की दिलाना चाहते हो तो देश भक्त बनो देश के गीत गाओ और अगर कोई देश की शान मे गीत ना गाए तो समझो वोह इस देश का नही -- जारी</p>
<p>बाकी फिर कभी</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[इनसे मिलो -29]]></title>
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<pubDate>Thu, 17 Aug 2006 19:29:50 +0000</pubDate>
<dc:creator>shuaib</dc:creator>
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<description><![CDATA[ये खुदा है
खुदा खुद कनफ्यूज़ है के कौन ज]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>ये खुदा है</strong></p>
<p>खुदा खुद कनफ्यूज़ है के कौन जीता - हिज़बुल्ला या इज़राइल? जबकि खुदा ने जितना होसका अमेरिका की खातिर लेबनान मे तबाही मचाई और खुश भी था कि इसके बाद ईरान को भी नचाएगा। लेबनानीयों को बेली डांस करवाते खुदा ने खुद अपनी टांग तोडली, ठीक होने पर कुछ नया कारनामा कर दिखाने की उम्मीद है। आज अरब देशों के चेहरे खुशी से खिल उठे, खुदा की सिर्फ टांग टूटी तो हिज़बुल्लाह की कामयाबी समझ बैठे। जिस दिन से खुदा दुनिया मे आया तब से सिर्फ अमेरिका को ही सुन रहा है, उसे डर है कि अगर बाकी देशों मे जाए तो लोग उससे उसका धर्म पूछेंगे अगर वोह मुसलमान है तो हिन्दू क्यों नही अगर ईसाई निकला तो पंजाबी क्यों नही? खुदा खुद नही जानता कि उसका धर्म कौनसा है और वोह परेशान है के उसने सिर्फ इनसान बनाए थे और आज जब दुनिया देखने आया तो सभी इनसान ग्रुपों मे बट चुके हैं। जापान ने अमेरिका को वारनिंग भेजी के खुदा सबके लिए आया है, उसे आसमान से दुनिया मे आए दो वर्ष होने को आए मगर अभी तक अमेरिका से बाहर नही निकला - हम जापानी लोग अगर चाहें तो खुदा जैसे दो-चार खुदा और बना सकते हैं। भारत ने खुदा को <a target="_blank" href="http://www.sancho-asia.com/IMG/jpg/satya_affiche.jpg">सत्य</a> देखने पर उकसाया कि किस तरह बुरे का अनजाम बुरा होता है। खुदा ने दहाडते होए फरमायाः हमने कब किसी का बुरा चाहा? अगर <a target="_blank" href="http://www.sancho-asia.com/IMG/jpg/satya_affiche.jpg">वही</a> अफगानिस्तान के तालिबान को दिखा देते तो हमारे हमले से पहले ही हथियार डाल देते - जैसा के अमेरिका ने उसामा बिन लादिन को <a target="_blank" href="http://www.sikhspectrum.com/092002/images/mohra.jpg">मोहरा</a> दिखाया और आज तक वोह अमेरिका के लिए एक मोहरा का रोल निभा रहे हैं। टांग टूटने के बावजूद खुदा ने बहुत ही गज़बनाक अनदाज़ मे फरमायाः खुदा को खुदा की कसम - जो अमेरिका को नही मानता वोह हमारा नही, लानत है उस पर जो अमेरिका का खाए फिर उसी को बुरा कहे - और हम ने अमेरिका मे रहना इस लिए पसंद फरमाया क्योंकि यहां हम सुरक्षित हैं -- जारी</p>
<p>बाकी फिर कभी</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[इनसे मिलो - 28]]></title>
<link>http://shuaibi.wordpress.com/2006/08/12/%e0%a4%87%e0%a4%a8%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a5%8b-28/</link>
<pubDate>Sat, 12 Aug 2006 12:18:47 +0000</pubDate>
<dc:creator>shuaib</dc:creator>
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<description><![CDATA[ये खुदा है
&#8220;कसम खुदा की, खुदा को नचाते]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>ये खुदा है</strong></p>
<p>"कसम खुदा की, खुदा को नचाते ही रहेंगे।" उसामा के चमचों ने नया वीडियो कैसेट रिलीज़ करदिया। दूसरी तरफ अमेरिका को लनदन से पर्ची मिली, खुदा के लिए नोटिस है "बाहर निकलो तो परदे मे रहे, ज़माना खराब है" - मगर वोह तो बगैर परदे के लेबनान मे अपना जोश और जज़बा दिखा रहा है। अरब और दूसरे देशों मे लेबनान से हमदर्दी अमेरिका पर ज़ोर पड रहा है और ऐसे मौके पर मुशर्रफ के आईडिये किस काम के? इनके अकसर आईडिये अमेरिका के लिए फाईदेमंद रहे। पाकिस्तान के अलावा कई देश के लोगों को ज़बरदस्ती बकरा बनादिया लनदन से लेकर बाकी दुनिया के हवाई अड्डों पर हाई अलर्ट कर दिया। अभी रासता साफ है, सब की तवज्जा हवाई अड्डों की तरफ। अब तो लेबनान पर खुदा खुल कर तबाही मचाये -- जारी</p>
<p>बाकी फिर कभी</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[नई बातें - नई सोच]]></title>
<link>http://shuaibi.wordpress.com/2006/08/04/%e0%a4%a8%e0%a4%88-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%a8%e0%a4%88-%e0%a4%b8%e0%a5%8b%e0%a4%9a/</link>
<pubDate>Fri, 04 Aug 2006 11:08:19 +0000</pubDate>
<dc:creator>shuaib</dc:creator>
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<description><![CDATA[उर्दू ब्लॉगिंग ग्रुप मे एक बार फिर हंग]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>उर्दू <a target="_blank" href="http://urduweb.org/planet">ब्लॉगिंग ग्रुप</a> मे एक बार फिर हंगामा खडा करदिया जैसे अभी दो दिन पहले परिचर्चा मे <a href="http://www.akshargram.com/paricharcha/viewtopic.php?id=480&#38;p=1" title="Pricharcha">कुछ पढने</a> को मिला। बहुत पहले से ही हम<font face="Times New Roman"> </font>ने अपने उर्दू ब्लॉग का फीड बंद कर दिया था क्योंकि वहां <a target="_blank" href="http://www.urduweb.org/planet/" title="Urdu Planet">उर्दू प्लानट</a> पर (<a target="_blank" href="http://www.akshargram.com/narad" title="Narad">नारद</a> जैसा) हमारे लेख पढ कर मज़हबी लोगों की चीखें निकल पडती हैं<font face="Times New Roman">, </font>हमारे लेख ना तो कोई पढ सकता है ना समझ सकता है और हमारा ब्लॉग तो बस अपनी डाईरी की तरह है जिसमे हम खुल कर अपने विचार लिख सकें और मन की भडास भी निकालें।<font face="Times New Roman"> </font></p>
<p>हाल ही मे <a target="_blank" href="http://www.urduweb.org/planet/" title="Urdu Planet">उर्दू प्लानट</a> (नारद जैसा) के एडमिन जो कम्युनिस्ट टाइप के <a target="_blank" href="http://www.zackvision.com/weblog/" title="Zackriya Ajmal - Zack">पाकिस्तानी</a> अमेरिका से हमसे पूछा कि <a href="http://shuaibday.blogspot.com/2006/07/20.html" title="on urdu post comment">आपने अपनी ब्लॉग फीड क्यों बंद करदी और आपका ब्लॉग फाइरफाक्स पर नही खुलता।</a> हम<font face="Times New Roman"> </font>ने उनको जवाब दियाः कृपया आप उर्दू प्लानट का नाम बदल कर "इसलामी प्लानट" रख दें<font face="Times New Roman">, </font>जहां हमारे लेख मुसलमानों के पल्ले नही पडते। एडमिन ने हमसे कहाः <a target="_blank" href="http://shuaibday.blogspot.com/2006/07/20.html" title="on urdu post comment">जब आप जैसे लोग उर्दू प्लानट पर ना होंगे तो ज़ाहिर है वोह इसलामी प्लानट ही बनता रहे गा।</a> एडमिन ने और कहाः आपकी किस्तें "खुदा से मिलो" बहुत खूब जा रही हैं<font face="Times New Roman">, </font>लोगों की राए पर ना जाएं और अपनी ब्लॉग फीड दुबारा उर्दू प्लानट के लिए जारी करें।<font face="Times New Roman"> </font></p>
<p>एडमिन साहब के कहने पर हमने अपना उर्दू ब्लॉग का फीड दुबारा खोल दिया। जैसा कि हम पहले भारती उर्दू ब्लॉगर हैं और बाकी 99% पाकिस्तानी कटटर मजहबी लोग हैं। <a target="_blank" href="http://www.urduweb.org/planet/" title="Urdu Planet">उर्दू प्लानट</a> पर कुछ नए ब्लॉगर्स ने हमारे लेख पढे तो चिल्ला उठे और मुफ्त की ब्लॉगिंग का फाईदा उठाते हुए हमारे खिलाफ पोस्ट पर पोस्ट <a href="http://baazgasht.blogspot.com/2006/07/blog-post_27.html">लिखना</a> शुरू कर दिया - हमने एडमिन से शिकायत की के देखा आपने<font face="Times New Roman">, </font>इसीलिए हम नही चाहते कि उर्दू प्लानट पर हमारे लेख नज़र आएं - और आज उर्दू ब्लॉगर हैं कि सब कुछ छोड कर हमारे खिलाफ बुरा लिख कर पोस्ट करना शुरू करदिया<font face="Times New Roman">, </font>वोह लोग अपने ब्लॉग पर धार्मिक बातें  लिखते लिखते आज हमारी <a href="http://simunaqv.blogspot.com/2006/07/blog-post_30.html" title="comments on other blog">ऊंच नीच</a> की गिनती लिखना शुरू करदी। एडमिन ने उन ब्लॉगर्स को वारनिंग दी कि अगर आईंदा से एक दूसरे के खिलाफ कोई बदतमीज़ी लिखी तो उसे प्लानट से निकला दिया जाएगा।<font face="Times New Roman"> </font></p>
<p>चंद उर्दू ब्लॉगर्स उलटा एडमिन पर ही बरस पडे कि एडमिन तो पाकिसतानी मुसलमान है और उलटा हमें वारनिंग दे<font face="Times New Roman">? </font>ब्लॉगर्स ने एडमिन से पूछा किः एडमिन साहब आप अपना मज़हब बताएं<font face="Times New Roman">? </font>और<font face="Times New Roman"> </font>शुऐब की तरफदारी क्यों कर रहे हो<font face="Times New Roman">? </font>शुऐब तो ना हिन्दू है ना मुसलमान और वोह खुदा के नाम पर बकवास लिखता है आदी - शुऐब को उर्दू प्लानट से निकाल फेंको वोह इस्लाम के खिलाफ लिखता है। एडमिन ने <a target="_blank" href="http://www.urduweb.org/blog/" title="Admin Urdu Blog">उर्दू ब्लॉग</a> पर सबको जवाब दियाः शुऐब ने कभी इस्लाम के खिलाफ नही लिखा बलकि पढने वाले उनके लेख पढ कर गलत समझते हैं - कृपया आप सब एक दूसरे के विचारों को समझें और आपस मे गाली गलोच ना करें।<font face="Times New Roman"> </font></p>
<p>मगर उर्दू ब्लॉगर्स हैं कि हमारे खिलाफ लिखते ही जा रहे जिनके लेख <a href="http://www.urduweb.org/planet/" title="Urdu Planet">उर्दू प्लानट</a> पर हम खामोशी से पढ रहे थे और जब लिखने वालों ने लिखते लिखते भारत और हमारी मां के खिलाफ भी पोस्ट लिखा तो हमसे बरदाश्त ना हुवा - और फोरन उन लोगों को पराईवेट मेल भेज कर उनकी मां बहन एक करदी और बताया कि हम भी अगर चाहते तो आप लोगों के खिलाफ पोस्ट लिखते मगर हम तुमहारी तरह नही कि अपने ब्लॉग को गंदा करे साथ मे उर्दू प्लानट को भी गंदा करे<font face="Times New Roman">, </font>इस लिए ये पराईवेट मेल भेजी है। अगर दुबारा हमारे खिलाफ या भारत के खिलाफ कुछ लिखा तो हम तुमहारा बहुत बुरा हशर करेंगे। ये एक हिन्दुस्तानी के अलफाज़ हैं जो कहे वोह कर दिखाए।<font face="Times New Roman"> </font></p>
<p>कमाल होगया - हमने जो चाहा वही हुवा - उन बेवकूफों ने हमारी पराईवेट मेल को भी अपने ब्लॉग्स पर <a target="_blank" href="http://pakiblog.com/?p=33" title="mail copy in urdu">पोस्ट कर दिया</a> जो <a target="_blank" href="http://www.urduweb.org/planet/" title="Urdu Planet">उर्दू प्लानट</a> पर सब ने देख लिया जहां किसी ने हमारी मेल का <a target="_blank" href="http://pakiblog.com/?p=33" title="mail copy in urdu">कॉपी भी पोस्ट</a> किया था जिसमे हम ने उनकी मां बहन गिनी थी। एडमिन ने जब देखा की प्लानट पर गंदी गालियाँ - फोरन प्लानट को डावन करदिया और वोह पोस्ट लिखने वालों को उर्दू ब्लॉगिंग ग्रुप से निकाल दिया। एडमिन से हमने पराईवेट गुज़ारिश कर के हमारा भी ब्लॉग उर्दू प्लानट से निकाल लिया कि हमारे लेख हमें ही मुबारक<font face="Times New Roman">, </font>हमारे लेख हम अपने लिए ही लिखते हैं और ये आपकी महरबानी के आपको हमारे लेख पसंद आए।<font face="Times New Roman"> </font></p>
<p>जिन लोगों ने हमारे खिलाफ पोस्ट लिखे और हमारी भेजी हुई पराईवेट गालियों को सरे आम दिखाया - आज वोह बहुत बुरी तरह फंस गए<font face="Times New Roman">, </font>खुद बदनाम हुए और दूसरे उनके साथी ब्लॉगर्स ने भी उन्हें बुरा भला कहा कि आप लोगों को शुऐब की तरफ से जो गालियाँ मिली थी वोह अपने लिए ही रख लेते ना कि सबको दिखाने निकले। खैर हमने जो चाहा वही हुवा<font face="Times New Roman">, </font>हम चाहते थे कि वोह खुद बदनाम हों और होगए और अपने ही पाकिस्तानी लोगों मे इज़्ज़त भी गंवाली।<font face="Times New Roman"> </font></p>
<p>ब्लॉग हमारा अपना है - यहां हम अपने विचार लिखते हैं अपने मन की बातें लिखते हैं - इन्टरनेट पर हमारी ये खुली किताब है - सब ब्लॉगर्स जो लिखते हैं हम वोह लिखना नही चाहते और जो लोग पढना चाहते हैं हम वोह नही लिख सकते - हम तो बस अपनी मरज़ी की लिखेंगे अपने लिए - "<a href="http://shuaibi.wordpress.com/2006/07/20/%e0%a4%85%e0%a4%a8%e0%a5%8b%e0%a4%96%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a5%87%e0%a4%82/" title="New Series in Hindi">खुदा से मिलो</a>" की <a title="Series">किस्तें</a><font face="Times New Roman">, </font>ये भी हमारे अजीब विचार हैं<font face="Times New Roman">, </font>पढ कर समझे तो हैरान हो और ना समझे तो परेशान हो।<font face="Times New Roman"> </font>ऐसा ही कुछ हमारे उर्दू ब्लॉग पर होता है - हम बाकाईदा "खुदा से मिलो" पर लिखते जा रहे हैं जिसकी इस वकत <font face="Times New Roman">26</font> वीं <a title="Series">किस्त</a> पोस्ट करदी है - आज भी इन लेख पर टिप्पणी मे कोई <a target="_blank" href="http://shuaibday.blogspot.com/2006/06/17.html" title="comment on urdu blog">वाह वाह</a> लिखता है और कोई <a href="http://shuaibday.blogspot.com/2006/07/24.html" title="comment on urdu post">गालियाँ</a> लिख जाता है।</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[इनसे मिलो - 24]]></title>
<link>http://shuaibi.wordpress.com/2006/07/23/%e0%a4%87%e0%a4%a8%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a5%8b-24/</link>
<pubDate>Sun, 23 Jul 2006 08:04:00 +0000</pubDate>
<dc:creator>shuaib</dc:creator>
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<description><![CDATA[ये खुदा है
हिज़बुल्लाह आतंकवादीयों ने ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>ये खुदा है</p>
<p>हिज़बुल्लाह आतंकवादीयों ने इज़राईल के सिर्फ दो दांत किया तोडे कि वोह पलट कर लेबनान के मुंह मे अपना पूरा हाथ डाल दिया, खुदा भी इसी इन्तेज़ार मे है कि कब ईरान और सीरिया कुछ बोले तो उनके मुंह मे भी हाथ ठूँसदे। पीछे से सौदी आरब ने भी फुसफुसाया कि शान्ती काइम रखो। खुदा ने आरबियों को डांटाः खामोश वोरना तुमहारी पुल खोलदें और तुम्हें अपना मुंह छुपाने के लिए खुदा का आश्रम भी नसीब ना हो। दूर से नार्थ कोरिया को उंगली नचाते देख कर खुदा ने ठानली मौका मिलते ही उसे भी किस्तें मे नचाना है। G 8 की बैठक मे जहां अमीर देशों ने पूजा की मगर इस बार प्रसाद गरीब देशों मे बांटने कि बजाए इज़राईल पर खर्च करने का फैसला किया है। सभी देशों की तरह आज भारत ने भी लेबनान को अफसोस लिख भेजा क्योंकि लेबनान को मिलने वाली हमदर्दियाँ और अफसोस खुदा की नज़रों से सनसर होकर गुज़र रही हैं। पहली बार खुदा ने नहाने का प्रोग्राम बनाया हालांकि वोह जानता है अगर ना भी नहाए तो पाक है, दुनिया मे आने के बाद यहां की रीत रिवाज और अमेरिका के उकसाने पर आखिरकार खुदा ने नहाने का इरादा करलिया और समुद्र मे इतनी ज़ोर से छलांग मारी कि दो से तीन मीटर ऊंची लहरें खडी होगई और गरीब इनडोनेशिया के कई लोगों ने आखिरी बार नहाया। दुनिया इतनी बडी है और खुदा को इसी गरीब देश के दामन मे डुबकी लगाना था कि जावा शहर मे हलचल मच गई। गरीब इनडोनेशिया के लोग उनके पास पहले से इतनी सारी मुसीबतें और ऊपर से एक और?? नहाने धोने के बाद खुदा वापस काम पर लौटा, इज़राईल पहुंचते ही लेबनान पर दुबारा तोप बाज़ी शुरू करदी। अब तो वोह निशाना बाज़ी मे इतना पक्का होगया सारी दुनिया खुदा के गीत गा रही है इसके बावजूद खुदा को हैरत होई कि अभी तक यूरोपियन युनिन चुप है -- जारी</p>
<p>बाकी फिर कभी</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[इनसे मिलो - 18]]></title>
<link>http://shuaibi.wordpress.com/2006/07/18/%e0%a4%87%e0%a4%a8%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a5%8b-18/</link>
<pubDate>Tue, 18 Jul 2006 03:37:00 +0000</pubDate>
<dc:creator>shuaib</dc:creator>
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<description><![CDATA[ये खुदा है
आज फिर ईराक मे चालीस इनसानो]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>ये खुदा है</p>
<p>आज फिर ईराक मे चालीस इनसानों के सर काट दिये जिस पर खुदा ने शुक्रिया अदा करते होवे अमेरिका से फरमायाः अच्छा किया ईराकियों को आपस मे लडवा दिया वरना कब तक खुदा अपना अज़ाब खर्च करे!? दूसरी तरफ लेबनान मे धमाकों कि वजा से कल रात इनडोनेशिया मे आया भूकंप की आवाज़ खुदा को सुनाई नही दिया क्योंकि वो इस वकत तोप बाज़ी मे बहुत मसरूफ है – जारी</p>
<p>बाकी फिर कभी</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[अनोखी किस्तें]]></title>
<link>http://shuaibi.wordpress.com/2006/07/20/%e0%a4%85%e0%a4%a8%e0%a5%8b%e0%a4%96%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a5%87%e0%a4%82/</link>
<pubDate>Thu, 20 Jul 2006 03:11:00 +0000</pubDate>
<dc:creator>shuaib</dc:creator>
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<description><![CDATA[ध्यान रहे यहां इस चिट्ठे पर एक नई किस्]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>ध्यान रहे यहां इस चिट्ठे पर एक नई किस्तें शुरू की जारही है, इस सिरीज़ की चंद किस्तें इस चिट्ठे पर पोस्ट भी हो चुकी हैं जो कि सिर्फ एक आज़माईश थी कि हिन्दी मे पढने वाले इसे समझेंगे या नहीं? खैर यहां बताना अब ज़रूरी है कि इन सिरीज़ के अब तक 24 किस्तें उर्दू मे पोस्ट हो चुकी हैं जिसे पढने वाले चंद समझदार लोगों ने वाह वाह की और इन लेख को बिलकुल सही कहा मगर जो ना समझा वोह भडक उठा उसकी आत्मा कांप उठी क्योंकि इस सिरीज़ के हीरो का नाम खुदा है, जी हां घबराने वाली बात नहीं क्योंकि खुदा तो खुदा है चाहे उसे भगवान कहे शिव कहे या फिर जीसस आखिर वोह है तो दुनिया का मालिक जिसने ये जहां बनाया फिर हम इनसानों को भी बनाया मगर इन इनसानों मे ऐसे भी लोग हैं जो खुदा बनने की कोशिश कर रहे हैं, सारी दुनिया मे अमन के नाम पर दनदनाते घूम रहे हैं और उन्हें रोकने वाला कोई नहीं। यहां इन सिरीज़ मे खुदा का नाम उस आदमी को दिया है जो ताकतवर देशों के पीछे रिमोट कन्ट्रोल पकडे बैठा है और खुद को खुदा समझ कर पूरी दुनिया पर राज करना चाहता है हर देश के काम मे अपनी टांग अडाता है। इन सिरीज़ को इस अन्दाज़ मे लिखा जाएगा जैसे आजकल के हालात हैं जैसे खबरों पर टिप्पणी - हर नई खबर पर ये सिरीज़ किस्तों मे पोस्ट होती रहेगी और इसे टिप्पणी देने की ज़रूरत नहीं क्योंकि ये खुद एक धमाकेदार टिप्पणी है।</p>
<p>इस लेख को लिखने वाले ने अभी तक ढंग से पूरी तरह हिन्दी शब्द नही सीखे और कोशिश कर रहा है कि जल्दी से शुध हिन्दी सीखले इसीलिए वोह हर एक के हिन्दी चिटठों मे झांकता रहता हैं और इसे दूसरों के लेख पढने की बहुत बुरी आदत है चाहे टिप्पणी दे या ना दे मगर बाकाईदा दूसरों के ब्लॉग पढता रहता है। तो शुरू होने वाला है हिन्दी-उर्दू मिक्स शब्दों मे एक नया अन्दाज़ "इनसे मिलो - ये खुदा है" किस्तों मे।</p>
<p><strong>नोटः</strong> इन सिरीज़ का सिरियल नम्बर वहीं से शुरू होगा जहां तक उर्दू मे लिखा गया था, यानी उर्दू मे पोस्ट होने वाली किस्त का नम्बर 24 है तो हिन्दी मे भी इसी नम्बर से शूरू होगा क्योंकि ये लेख लिखने वाला हिन्दी-उर्दू सिरीज़ एक साथ लिखता है और कोशिश होगी कि उर्दू की पुरानी किस्तों का ट्रांसलेट किया जाए।<br />
धन्यवाद</p>
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<title><![CDATA[इनसे मिलो - 22]]></title>
<link>http://shuaibi.wordpress.com/2006/07/15/%e0%a4%87%e0%a4%a8%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a5%8b-22/</link>
<pubDate>Sat, 15 Jul 2006 09:49:00 +0000</pubDate>
<dc:creator>shuaib</dc:creator>
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<description><![CDATA[ये खुदा है
सददाम अदालत मे खडे बड बडाने ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>ये खुदा है</p>
<p>सददाम अदालत मे खडे बड बडाने लगेः जब हम ईराक के राष्ट्रपति थे इज़राईल हमारे सामने एक चूहे की तरह था और आज हम पिंजरे मे तो वोह शेर बन गया। <a target="_blank" href="http://news.xinhuanet.com/english/2006-07/13/content_4824232_2.htm"><img border="0" align="right" width="185" src="http://news.xinhuanet.com/english/2006-07/13/xinsrc_2320703151036640144616.jpg" /></a> खुदा ने सददाम की बात सुनी तो उन्हें तसल्ली दीः ऐसी हालत मे बहकी बहकी बातें ना करे, अमेरिका ने अब तक आपको जो ज़िनदा रखा उस पर शुक्र करें। सीरिया से पता नही किस को शरारत सूझी, मिज़ाईल पर उसामा का फोटो लगाया और सीधा इज़राईल पर ठोका। मिज़ाईल तो फटा नही मगर उसामा की फोटो के नीचे अंग्रेज़ी मे लिखा थाः "I am in Syria, Catch me if you can" खुदा को गुस्सा तो बहुत आया पर किया करे? कहां कहां अपनी नज़र रखे? ईरान, ईराक, अफगान - अभी फिलिस्तीन को एक थप्पड लगाया तो पलट कर लेबनान को दिन मे सितारे दिखा दिए। खुदा सिर्फ उन्ही लोगों को पसंद करता है जो अमेरिका पर ईमान रखते हैं वोरना पाकिस्तान को नज़रे रेहमत से देखना खुदा को बिलकुल पसंद नहीं। मुशर्रफ हमेशा से कहते आरहे हैं कि मैं वरदी नही उतारूँगा, मगर उन्हें किया मालूम कि उनकी किस्मत मे कफन भी नही है, खुद पाकिस्तानी लोग हर दिन दुआ कर रहे हैं कि खुदा करे ज़ालिम मुशर्रफ को कफन भी नसीब न हो। सभी देशों की तरह आज भारत भी लेबनान के लिए अपनी तरफ से अफसोस भेजा। दूसरी तरफ सीरिया के राष्ट्रपति बषर अल असद ने अब बाथरूम भी अपने बेड के नीचे बनालिया है और उनका बेड कहां है खुदा को भी नही मालूम। लेबनान पर अचानक ईज़राईल की तोपबाज़ी से अमेरिका ने ये कहते होवे अपना मुंह छुपा लिया कि ये सब खुदा ने किया है जिसमे हमारा कोई हाथ नही, हमने तो बस खुदा से इतनी फ़रियाद की थी कि बेचारा इज़राईल इस वकत मुसीबत मे है उसकी मदद करे। खुदा तो खुदा है, वो जब चाहे किसी के भी कान खींच सकता है उधर फिलिस्तीन को आंख मार कर सुला दिया कि तुम्हें बाद मे देखेंगे क्योंकि अब लेबनान को जगाना है। -- जारी</p>
<p>बाकी फिर कभी</p>
]]></content:encoded>
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<title><![CDATA[इनसे मिलो - 12]]></title>
<link>http://shuaibi.wordpress.com/2006/07/14/%e0%a4%87%e0%a4%a8%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a5%8b-12/</link>
<pubDate>Fri, 14 Jul 2006 09:35:00 +0000</pubDate>
<dc:creator>shuaib</dc:creator>
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<description><![CDATA[ये खुदा है
हिन्दी ब्लॉग जगत मे आज कल आत]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>ये खुदा है</p>
<p>हिन्दी ब्लॉग जगत मे आज कल आतंकवादीयों की टांग खींची जा रही है तो फिर मैं क्यों चुप रहूँ? लेकिन मेरा अन्दाज़ सबसे अलग है, आतंक के मामले मे मैं खुदा को भी नही बखश्ता। तो पेश है <a href="http://shuaibday.blogspot.com/2006/02/12.html">उर्दू से हिन्दी ट्रांसलेट</a> मेरा एक पुराना लेख</p>
<p>मुजाहिदीन के सरदार मुल्ला बखश को ज़नजीरों मे जकडे खुदा के सामने हाज़िर किया, अमेरिका ने इलज़ामात लगाने शुरू किएः ये आदमी खुदा के नाम पर दंगा फसाद करवाता है, नौजवानों को भडका कर उनसे कतल-गारतगीरी करवाता है और फिर इस काम को खुदा खुशी कहता है और तो और अगर इसके चीले (मुजाहिद) पुलिस इनकॉनटर मे मारे जाएं तो उन्हें शहीद का नाम देता है। अमेरिका की बात सुन कर खुदा को हंसी आईः पता नही किस नमूने को उठा लाए? इसका हुलिया देखो ये कहां से मुजाहिद लगता है? चेहरे पर अजीब झुर्रियां, फटे पुराने कपडे, मैल भरे नाखून, सर पर गुंबद जैसी पगडी और छाती तक दाढी ये तो सौ फ़ीसदी फकीरों जैसा है। अमेरीका ने खुदा को याद दिलायाः मुजाहिदीन की यही पहचान है। ये लोग पहाडों, जंगल और खनडरों या फिर मज़ारों के आस पास बसेरा करते हैं। इतना सुनना था कि खुदा गज़ब मे अगयाः मेरी इज़्ज़त और जलाल की कसम! क्यों रे मुल्ला तेरी ये मजाल कि मेरे नाम पर दंगा फसाद और उस पर जिहाद का लेबल ---- अखिर ये कौनसा कारोबार है? अमेरिका ने खुदा से कहाः ये तो कुछ भी नही, उनके सबसे बडे सरदार उसामा आज भी फरार हैं। अचानक मुल्ला चीख पडाः हां मैं मुजाहिद हूँ, कसम खुदा की मुझे छोड दिया जाए वोरना मेरे मुजाहिदीन दुनिया को जला कर राख करदेंगे। मुल्ला की बात सुन कर खुदा खौफज़दा होगयाः अरे ये तो सच मुच मुजाहिद है और इसके अन्दर कूट कूट कर मुजाहिदाना जज़बात हैं फिर खुदा ने मुल्ला को गले लगाया और अपने पास बिठा कर उसके कान मे कहाः अगर उसामा का पता बतादे तो चार बोरी गांजा मुफ्त पाएगा। खुदा की बात सुन कर मुल्ला लालच मे अगया और सब कुछ सच सच बताने लगाः उसामा बेचारे तो अमेरिका के गुलाम और उसी के हुकम पर छुपे होवे हैं -- जारी है</p>
<p>बाकी फिर कभी</p>
]]></content:encoded>
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<title><![CDATA[खुदा से मिलो]]></title>
<link>http://shuaibi.wordpress.com/2006/07/12/%e0%a4%96%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a5%8b/</link>
<pubDate>Wed, 12 Jul 2006 03:08:00 +0000</pubDate>
<dc:creator>shuaib</dc:creator>
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<description><![CDATA[मैं ने अपने उर्दू ब्लॉग पर &#8220;खुदा से म]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>मैं ने अपने <a href="http://shuaibday.blogspot.com"><strong>उर्दू ब्लॉग</strong></a> पर "खुदा से मिलो" नामक अब तक 21 लेख पोस्ट किये हैं, जिसका मतलब है "खुदा अमेरिका का मेहमान" (America, the host of Lord) और उसी पार्ट का <a href="http://shuaibday.blogspot.com/2006/01/8.html"><strong>आठवां लेख</strong></a> यहां हिन्दी मे पोस्ट कर रहा हुँ। हुवा यूँ कि नया वर्ष 1 जनवरी 2006 के दिन दुनिया भर से खुदा के नाम नये वर्ष की मुबारकबाद पत्र भेजे और उसामा बिन लादिन ने भी खुदा के नाम पत्र और साथ ही अपना ताज़ा वीडियो भेजाः</p>
<p>खुदा ने मुबारकबादियोँ का आख़िरी पार्सल खोला तो उसामा का वीडियो पाया जिस मे वो बन्दूक थामे उनकी रिवायती खबरदार उंगली खुदा की तरफ थीः तमाम तारीफें अमेरिका के लिऐ जो बहुत ही गज़बनाक और दुनिया का चौकीदार है, वो इस लिऐ कि हमारा शक यकीन बन गया, खुदा के चाल चलन से साफ ज़ाहिर है वो भी अमेरिकी हामी है। अमेरिका को नज़रे रहमत से देखने वाले खुदा, इतना तो बतादे कि आखिर हमें कौनसा मज़हब इखतियार करना होगा? अपने को माता पिता की विरासत मे मज़हब मिला और मज़हबी तालीम हम पर फर्ज़ होगई और जब फारिग होये तो ज़हनियत ऐसी मनहूस हुई के दूसरे मज़हबी इनसानों से नफरत जगाली। लिबास तबदील किया, गले मे खारिश के बावजूद छाती तक दाढी छोडी फिर जन्नत मे सबसे आला मुकाम पाने के चक्कर मे जिहाद करने का पेशा अपनाया मगर इसके बावजूद आज तक हम बे इज़्ज़त रहे। दुनिया के सभी देश एक होकर हमें नाकों चने चबा रहे है, हम तस्व्वुर करते ही रह गये कि एक ना एक दिन गैबी इमदाद नसीब होगी मगर हमेशा मूँ की खानी पडी। दुनिया भर मे हमारे मुजाहिदीन को चुन चुन कर कुत्तों की तरह मार रहे हैं, इन मरे हुए मुजाहिदीन को शहीद कहते हुए शर्म आती है इनके चेहरे पहचानने लायक भी नहीं छोडते, शहीदों को जन्नत नसीब है मगर खुदा खुद अमेरिका मे जा बसा है। किस्से कहानियों मे हमेशा जिहाद की जीत लिखा है और हम ने जहां कहीं भी जिहाद किया रुसवाई नसीब हुई। काश आप खुदा कि बजाये एक मुजाहिद होते, क्योंकि एक मुजाहिद ही दूसरे मुजाहिद का दर्द समझता है। हम इस वकत बहुत ही कनफियोज़न का शिकार हैं, पहले तो अपने आपको बहुत बडा मुजाहिद समझ लिया, चंद लोगों ने होसला किया बढाया खुद को वालियों मे तस्व्वुर कर बैठे हमे किया मालूम था कि दुनिया वाले हमारे इस पवित्र पेशे को आतंकवाद सम्झते है? बडी मेहरबानी ज़रा बताऐँ कि आखिर ये कौनसा सिसटम है? कुछ समझ मे नहीं आरहा कि आखिर हमारी ज़िनदगी का किया मकसद है ------ (उसामा के आंसू निकल पडे और खुदा से कहने लगे) आपने हमें इनसानियत के अज़ीम मुकाम से निलाक कर मज़हब मे फेंक दिया फिर हम ने ऐसा कौनसा गुनाह किया कि जिहाद जैसे खून खराबा ग्रुप का लीडर बना दिया जहां रुसवाई शर्मिन्दगी और लाचारगी के अलावा आखिर मे बहुत बुरी मौत है ---- जब हमें मुजाहिद बना ही दिया तो जानवर बन्ने मे ज़्यादा देर नहीं, किया खाख ज़िनदगी पाई काश हमें जानवर ही बना देते या फिर इनसानों मे पैदा ही ना होते तो आज हमारी ये दुरगत ना बनती ------- (उसामा ने अपने आंसू पुंछे और खुदा की तरफ घूरते होवे कहा) इस वीडियो कैसेट से आज इकरार करता हूँ अमेरिका पर ईमान लाता हूँ और बाकी ज़िनदगी इनसानों की तरह जीना चाहता हूँ -- आगे और भी</p>
<p>बाकी फिर कभी</p>
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