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	<title>इन्तिज़ार &amp;laquo; WordPress.com Tag Feed</title>
	<link>http://wordpress.com/tag/इन्तिज़ार/</link>
	<description>Feed of posts on WordPress.com tagged "इन्तिज़ार"</description>
	<pubDate>Sat, 19 Jul 2008 10:00:17 +0000</pubDate>

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<title><![CDATA[मुझे इक जुनूँ है तेरी मोहब्बत का]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=1002</link>
<pubDate>Wed, 25 Jun 2008 14:20:54 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=1002</guid>
<description><![CDATA[मुझको इक जुनूँ है तेरी मोहब्बत का
कि ड]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">मुझको इक जुनूँ है तेरी मोहब्बत का<br />
कि डर नहीं मुझे किसी की नफ़रत का</span></p>
<p><span style="color:#000000;">दिल में दर्द की आग है, चिंगारी है<br />
तेरी ही बे-इन्तिहाँ चाहत है ख़ुमारी है</span></p>
<p><span style="color:#000000;">तुझे देखता रहूँ मैं तुझे ही चाहता रहूँ<br />
कि इन्तिज़ार है मुझे तेरी सोहबत का</span></p>
<p><span style="color:#000000;">मुझे बाँहों का आशियाँ दे आवारा हूँ<br />
बे-दर्द तू कभी आवाज़ दे तुम्हारा हूँ</span></p>
<p><span style="color:#000000;">बता कैसे जियूँ इस सूरज की तरह<br />
मुझे चाँद बना ले अपनी जन्नत का</span></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४ </p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[खिली-खिली महकी बहारें हैं]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=971</link>
<pubDate>Wed, 07 May 2008 02:35:50 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=971</guid>
<description><![CDATA[खिली-खिली महकी बहारें हैं
झीलों पर बहत]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">खिली-खिली महकी बहारें हैं<br />
झीलों पर बहते शिकारें हैं<br />
ठण्डी-ठण्डी सौंधी हवाएँ हैं<br />
गीले पत्तों को खनकाएँ हैं</span></p>
<p><span style="color:#000000;">जाने कैसी तलब जागी है<br />
जाने किसका इन्तिज़ार है<br />
बेज़ार-सा यह दिल मेरा<br />
किसके लिए गुलज़ार है</span></p>
<p><span style="color:#000000;">आज ऐसा क्यों लग रहा है<br />
नये-नये सब नज़ारें हैं<br />
खिली-खिली महकी बहारें हैं<br />
झीलों पर बहते शिकारें हैं</span></p>
<p><span style="color:#000000;">शबनमी रातों का यह चाँद<br />
और उजली-उजली चाँदनी<br />
आइनाए-दिल में कौन यार है<br />
इश्क़ जिससे वजहसार है</span></p>
<p><span style="color:#000000;">बंजर ज़मीने-दिल से आज<br />
उलझे हुए मखमली धारे हैं<br />
खिली-खिली महकी बहारें हैं<br />
झीलों पर बहते शिकारें हैं</span></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति 'नज़र'<br />
लेखन वर्ष: २००४</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[वज़नी साँसों में पिस रहा है दिन सारा]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=955</link>
<pubDate>Tue, 01 Apr 2008 11:47:27 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=955</guid>
<description><![CDATA[वज़नी साँसों में पिस रहा है दिन सारा
मु]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">वज़नी साँसों में पिस रहा है दिन सारा<br />
मुझे आज भी है इन्तिज़ार तुम्हारा</font></p>
<p><font color="#000000">नम है नफ़स-नफ़स मेरे सीने में<br />
क्यों खर्च नहीं होती साँस जीने में</font></p>
<p><font color="#000000">मेरी बाक़ी ज़िन्दगी का तुम ही सहारा<br />
मुझे आज भी है इन्तिज़ार तुम्हारा</font></p>
<p><font color="#000000">नामे-इश्क़ जायेगा मेरा सब-कुछ<br />
क़िस्मत क्यों नहीं कहती आज कुछ</font></p>
<p><font color="#000000">नाख़ुदा कश्ती को कब मिलेगा सहारा<br />
मुझे आज भी है इन्तिज़ार तुम्हारा</font></p>
<p><font color="#000000">'नज़र' को नयी ज़ीस्त दी तुमने शीना<br />
जीने का तुमने सिखाया मुझको क़रीना</font></p>
<p><font color="#000000">तेरे ही साथ मैंने हर लम्हा गुज़ारा<br />
मुझे आज भी है इन्तिज़ार तुम्हारा</font></p>
<p>वज़नी: heavy; नफ़स: breath; नाख़ुदा: boater, sailer;<br />
ज़ीस्त: life; शीना: shine; क़रीना: style</p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[वह सिर्फ़ मेरा है मेरा ही रहेगा]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=932</link>
<pubDate>Sat, 15 Mar 2008 15:21:31 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=932</guid>
<description><![CDATA[वह सिर्फ़ मेरा है मेरा ही रहेगा
जिस दिन ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">वह सिर्फ़ मेरा है मेरा ही रहेगा<br />
जिस दिन भी पुकारा उसने मुझे<br />
मेरे मद्यए-मुक़ाबिल के सर मौत का सेहरा होगा</font></p>
<p><font color="#000000">वह सिर्फ़ मेरा है मेरा ही रहेगा<br />
मैं दूर से ही देखकर उसे ज़िन्दा हूँ<br />
हूँ इन्तिज़ार में वह किस दिन मुझे पुकारेगा</font></p>
<p><font color="#000000">वह सिर्फ़ मेरा है मेरा ही रहेगा<br />
उसके हाथों की लकीरें मैंने देखी नहीं<br />
लेकिन ज़रूर इनमें मेरे चाँद का चेहरा होगा</font></p>
<p><font color="#000000">वह सिर्फ़ मेरा है मेरा ही रहेगा<br />
मेरी आँखों ने देखे हैं जितने भी ख़ाब हसीं<br />
वह सदा उनसे रहा है वाबस्ता, सदा रहेगा</font></p>
<p><font color="#000000">वह सिर्फ़ मेरा है मेरा ही रहेगा<br />
उसका दर्द मुझको जुनूनी कर देता है<br />
जाने कब वह मेरी बाँहों में आके मुस्कुरायेगा</font></p>
<p><font color="#000000">वह सिर्फ़ मेरा है मेरा ही रहेगा<br />
आँखों ने टूटे हुए ख़ाब के टुकड़े भुला दिये<br />
वह इक सच्चे ख़ाब को किस दिन पूरा करेगा</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[आँखों से सुना आँखों ने कहा]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=877</link>
<pubDate>Wed, 05 Mar 2008 10:13:00 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=877</guid>
<description><![CDATA[आँखों से सुना आँखों ने कहा
आँखों ने सु]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">आँखों से सुना आँखों ने कहा<br />
आँखों ने सुना आँखों से कहा</font></p>
<p><font color="#000000">सिलसिला प्यार का चल पड़ा<br />
पत्थर दिल पिघल पड़ा<br />
क्या? कुछ चाहिए प्यार को<br />
बस प्यार चाहिए प्यार को</font></p>
<p><font color="#000000">सितमगर का नाज़ उठाना पड़ा<br />
हौसला उसको दिखाना पड़ा<br />
वक़्त कहाँ इन्तिज़ार को<br />
इम्तिहाँ है मेरे प्यार को</font></p>
<p><font color="#000000">वह शब ख़्यालों में रहा<br />
आँखों ने सुना आँखों ने कहा</font></p>
<p><font color="#000000">जल गया साँस का हर टुकड़ा<br />
रह गया फाँस का टुकड़ा<br />
प्यार को वह झलक चाहिए<br />
रहने को फ़लक़ चाहिए</font></p>
<p><font color="#000000">बाँहों में आये चाँद का टुकड़ा<br />
देखता रहूँ उसका मुखड़ा<br />
जिस्म में वह महक चाहिए<br />
प्यार में वह दहक चाहिए</font></p>
<p><font color="#000000">मेरा दिल आइने में रहा<br />
आँखों से सुना आँखों ने कहा</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[तेरी चुप निगाहें]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=806</link>
<pubDate>Mon, 18 Feb 2008 16:03:34 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=806</guid>
<description><![CDATA[तेरी चुप निगाहें व शर्मायी नज़रें
तेरे ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">तेरी चुप निगाहें व शर्मायी नज़रें<br />
तेरे प्यार का तोहफ़ा हैं, मेरे लिए<br />
एक बार तो कुछ कह दे सनम<br />
तू एक बार तो हाँ कर दे मुझसे<br />
ज़िन्दगी एक झमेला है मेरे लिए</font></p>
<p><font color="#000000">तेरी मुस्कुराहटें तेरी सादी अदाएँ<br />
तेरे प्यार का तोहफ़ा हैं मेरे लिए<br />
परियों से भी कहीं ज़्यादा हसीं<br />
खिलती कलियों-सी तू माहजबीं<br />
ख़ुदा ने तुझे बनाया है मेरे लिए</font></p>
<p><font color="#000000">तेरे सारे शिकवे वह सभी यादें<br />
तेरे प्यार का तोहफ़ा हैं मेरे लिए<br />
मुझे तेरा इन्तिज़ार था बरसों से<br />
हम एक-दूजे के बने जनमों से<br />
तुमने जनम लिया है मेरे लिए</font></p>
<p><font color="#000000">आँखों में माहताब-सा चमकता है<br />
तेरा चेहरा, तेरा चेहरा, तेरा चेहरा<br />
मैं सहराँ-सहराँ भटकता हूँ तेरे लिए<br />
तू एक बार तो हाँ कर दे मुझसे<br />
ज़िन्दगी एक झमेला है मेरे लिए</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[मेरी राह के मुसाफ़िर]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=782</link>
<pubDate>Fri, 15 Feb 2008 12:51:12 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=782</guid>
<description><![CDATA[मेरी राह के मुसाफ़िर तू कहाँ खो गया है
ज]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">मेरी राह के मुसाफ़िर तू कहाँ खो गया है<br />
जबसे तुझे देखा दिल बेग़ाना हो गया है<br />
मेरी राह के मुसाफ़िर तू कहाँ खो गया है</font></p>
<p><font color="#000000">कब आयेगा तू इन राहों पर मुझको बता<br />
यह दीवाना दिल तेरा हुआ मुझे न सता<br />
मेरी राह के मुसाफ़िर तू कहाँ खो गया है</font></p>
<p><font color="#000000">सूनी-सूनी राहों का इन्तिज़ार बढ़ गया है<br />
आया था कोई तूफ़ाँ दिल से गुज़र गया है<br />
मेरी राह के मुसाफ़िर तू कहाँ खो गया है</font></p>
<p><font color="#000000">है नहीं कोई रास्ता पास तुझसे मिलने का<br />
है नहीं कोई सबब इस तरह छिपने का<br />
मेरी राह के मुसाफ़िर तू कहाँ खो गया है</font></p>
<p><font color="#000000">जबसे तुझे देखा दिल बेग़ाना हो गया है<br />
आया था कोई तूफ़ाँ दिल से गुज़र गया है<br />
मेरी राह के मुसाफ़िर तू कहाँ खो गया है</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[यार तू ज़िन्दगी, यार मैं ज़िन्दगी]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=752</link>
<pubDate>Tue, 12 Feb 2008 11:14:01 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=752</guid>
<description><![CDATA[यार तू ज़िन्दगी, यार मैं ज़िन्दगी
यार तू ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">यार तू ज़िन्दगी, यार मैं ज़िन्दगी<br />
यार तू ज़िन्दगी, यार मैं ज़िन्दगी</font></p>
<p><font color="#000000">हर पल तुमको मैंने प्यार किया<br />
हर लम्हा तेरा इन्तिज़ार किया<br />
चलते तो साथ में...<br />
हम कहीं तुम कहीं, हम कहीं तुम कहीं</font></p>
<p><font color="#000000">यार तू ज़िन्दगी, यार मैं ज़िन्दगी<br />
यार तू ज़िन्दगी, यार मैं ज़िन्दगी</font></p>
<p><font color="#000000">मुझे सपनों में जब तुम मिले<br />
इन बहारों को तब गुल मिले<br />
गया जो भी जाने दो...<br />
हम सही तुम सही, हम सही तुम सही</font></p>
<p><font color="#000000">यार तू ज़िन्दगी, यार मैं ज़िन्दगी<br />
यार तू ज़िन्दगी, यार मैं ज़िन्दगी</font></p>
<p><font color="#000000">हवा सर्द है, जल रहा बदन<br />
तेरे-मेरे मन में लग गयी अगन<br />
कह नहीं पा रहे...<br />
कुछ भी कुछ सही, कुछ भी कुछ सही</font></p>
<p><font color="#000000">यार तू ज़िन्दगी, यार मैं ज़िन्दगी<br />
यार तू ज़िन्दगी, यार मैं ज़िन्दगी</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[राहों में ढूँढ़ता हूँ कभी]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=747</link>
<pubDate>Mon, 11 Feb 2008 15:24:44 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=747</guid>
<description><![CDATA[राहों में ढूँढ़ता हूँ कभी
तुम मिलती नह]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">राहों में ढूँढ़ता हूँ कभी<br />
तुम मिलती नहीं यह भी सही<br />
जानो न जानो प्यार क्या<br />
है यह इक नशा-सा<br />
उतरता नहीं आँखों से पलकों पर भी</font></p>
<p><font color="#000000">चाहता है दिल यह, पास तुम रहो<br />
कोई तस्वीर जो आँखों में<br />
छुपाकर रखी थी<br />
समझता नहीं क्यों मैं<br />
कि वह हक़ीक़त हो नहीं सकती</font></p>
<p><font color="#000000">राहों में ढूँढ़ता हूँ कभी<br />
तुम मिलती नहीं यह भी सही</font></p>
<p><font color="#000000">इक़रार है ज़ुबाँ पर<br />
क्या करूँ दिल राज़ी नहीं<br />
हो रहा जो अभी<br />
पहले ऐसा कभी हुआ नहीं<br />
सपनों पर अपने अब यक़ीं रहा नहीं</font></p>
<p><font color="#000000">क्या करूँ अभी वह मैं जानता नहीं<br />
इक सवाल है दिल में मेरे<br />
जो कभी तुम मिलो<br />
तो पूछ लूँगा तुम्हीं से हमनशीं<br />
क्या तुम मिलोगी मुझसे कभी</font></p>
<p><font color="#000000">राहों में ढूँढ़ता हूँ कभी<br />
तुम मिलती नहीं यह भी सही</font></p>
<p><font color="#000000">आ जाओ यहाँ तुम तोड़कर बन्धन<br />
तेरा इन्तिज़ार करता हूँ<br />
समझता था जो पहले वह था ग़लत<br />
जब तुम नज़रों में समाये<br />
तब जाके जाना क्या ग़लत क्या सही</font></p>
<p><font color="#000000">राहों में ढूँढ़ता हूँ कभी<br />
तुम मिलती नहीं यह भी सही...</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[जैसे ज़िन्दगी वीरान है]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=744</link>
<pubDate>Mon, 11 Feb 2008 13:14:08 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=744</guid>
<description><![CDATA[जैसे ज़िन्दगी वीरान है
जैसे ज़िन्दगी बे]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">जैसे ज़िन्दगी वीरान है<br />
जैसे ज़िन्दगी बेनाम है<br />
तू मेरी बाँहों से दूर है<br />
तू निगाहों का नूर है, मेरे लिए</font></p>
<p><font color="#000000">जैसे चलती है धड़कन<br />
जैसे होती है कम्पन<br />
जैसे आती है यह सुबह<br />
जैसे जाती है हर शाम, मेरे लिए</font></p>
<p><font color="#000000">घड़ी-घड़ी तेरा इन्तिज़ार<br />
घड़ी-घड़ी मैं तेरा राहदार<br />
साँसें ढूँढ़ती हैं तेरी ख़ुशबू<br />
आँखें ढूँढ़ती हैं तेरा ख़ाब, मेरे लिए</font></p>
<p><font color="#000000">आ जाओ तुम या फिर<br />
आने दो अपने पास मुझे<br />
यह दूरियाँ सिमटने दो<br />
यह डोरियाँ उलझने दो, मेरे लिए</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[वह तेरी पहली नज़र का निशाना याद है]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/12/28/%e0%a4%b5%e0%a4%b9-%e0%a4%a4%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a4%b9%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%a8%e0%a5%9b%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%be/</link>
<pubDate>Fri, 28 Dec 2007 14:24:47 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
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<description><![CDATA[वह तेरी पहली नज़र का निशाना याद है
हमको ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">वह तेरी पहली नज़र का निशाना याद है<br />
हमको आज भी तुमसे दिल का लगाना याद है</font></p>
<p><font color="#000000">दोस्तों में कहते थे किसी से प्यार हमें<br />
वह पूछें अगर तो नाम तेरा छुपाना याद है</font></p>
<p><font color="#000000">गरचे तुमने कभी हमको अपना न कहा<br />
मगर तुमसे मिलने का झूठा बहाना याद है</font></p>
<p><font color="#000000">सबब वह जिससे धड़कनें तेज़ हो जाएँ थीं<br />
वह इसी दरवाज़े से तेरा आना-जाना याद है</font></p>
<p><font color="#000000">कुछ कहकर फिर चुप हो जाना यकायक<br />
निगाहें फेर के हमको तेरा उकसाना याद है</font></p>
<p><font color="#000000">न कह पाये हम कभी कि प्यार है तुमसे<br />
पर इज़हार के लिए हौसला जुटाना याद है</font></p>
<p><font color="#000000">किस पल तुम छोड़कर गये मालूम न हुआ<br />
हमको आज भी ज़िन्दगी का अफ़साना याद है</font></p>
<p><font color="#000000">तेरे इन्तिज़ार में जो न कटा एक लम्हा<br />
हमको उस लम्हें का क़िस्सा पुराना याद है</font></p>
<p><font color="#000000">हमको उनका जादू खैंचता रहा बार-बार<br />
तेरी आँखों का सितारों जैसा झिलमिलाना याद है</font></p>
<p><font color="#000000">जब भी कोई पूछता था कैसी दिखती हो तुम<br />
वह सभी से चाँद को तेरे जैसा बताना याद है</font></p>
<p>गरचे= although, सबब= reason</p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[मैं कम-शक़्ल हूँ]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/11/30/%e0%a4%ae%e0%a5%88%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%ae-%e0%a4%b6%e0%a5%98%e0%a5%8d%e0%a4%b2-%e0%a4%b9%e0%a5%82%e0%a4%81-%e0%a4%89%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%87%e0%a4%b8-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%a4-%e0%a4%95/</link>
<pubDate>Fri, 30 Nov 2007 23:30:39 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/11/30/%e0%a4%ae%e0%a5%88%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%ae-%e0%a4%b6%e0%a5%98%e0%a5%8d%e0%a4%b2-%e0%a4%b9%e0%a5%82%e0%a4%81-%e0%a4%89%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%87%e0%a4%b8-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%a4-%e0%a4%95/</guid>
<description><![CDATA[जिसे चाहता हूँ वो कहता है मुझसे प्यार ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">जिसे चाहता हूँ वो कहता है मुझसे प्यार न कर<br />
दर्द सहना पड़ेगा' मेरा इन्तज़ार न कर</font></p>
<p><font color="#000000">मेरा दिल धड़कता है तुम्हारा नाम लेता है ज़ोर-ज़ोर<br />
कहता है दीवाने मुझपे तू इख़्तियार न कर</font></p>
<p><font color="#000000">मेरी दुआ में असर आया है एक मुद्दत के बाद<br />
सर्द आह कहती है मुझको शरार न कर</font></p>
<p><font color="#000000">दुनिया का डर कैसा? क्या उसे नहीं मेरा एतबार<br />
बावजूदे-प्यार वह नहीं देखता है मुझे मुड़कर</font></p>
<p><font color="#000000">मैंने क्या ख़ता की ख़ुदाया मुझे किस बात की<br />
उसकी नज़र क्यों झुक जाती है मुझे देखकर</font></p>
<p><font color="#000000">मैं कम-शक़्ल हूँ उसे इस बात की नहीं परवाह<br />
उसको चाहूँगा मैं सारे रस्मो-रिवाज़ तोड़कर</font></p>
<p><font color="#000000"><br />
</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र'<br />
लेखन वर्ष: २००५</p>
]]></content:encoded>
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<title><![CDATA[उल्टे सूरज की आग जम गयी]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/09/14/%e0%a4%a4%e0%a5%8b-%e0%a4%b8%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a4%9c-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%86%e0%a4%97/</link>
<pubDate>Fri, 14 Sep 2007 20:54:42 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
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<description><![CDATA[सोचा था दिन चढ़ेगा दोपहर तक
तो सूरज की ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">सोचा था दिन चढ़ेगा दोपहर तक<br />
तो सूरज की आग<br />
सर्दियों के सर्द बादलों को ग़ुबार कर देगी<br />
बहने लगेगा बदन में जमा हुआ लहू<br />
और झपकने लगेंगी एक टुक अपलक पलकें<br />
लेकिन ऐसा कुछ भी हुआ नहीं</font></p>
<p><font color="#000000">दिन दोपहर तो चढ़ा पर बादल नहीं छटे<br />
कोहरा नहीं पिघला<br />
उल्टे सूरज की आग जम गयी,<br />
ठिठुर गयी...<br />
सर्द हवा ने बुझा दिया दिन का सूरज<br />
उतरने लगा शाम के आगोश में दिन</font></p>
<p><font color="#000000">आज शफ़क़ न गुलाबी न जाफ़रानी थी<br />
बस नीला स्लेटी आकाश<br />
अजीब उदासियों के साथ बैठा रहा<br />
न जाने किसके इन्तिज़ार में...</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४</p>
]]></content:encoded>
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