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	<title>इक़रार &amp;laquo; WordPress.com Tag Feed</title>
	<link>http://wordpress.com/tag/इक़रार/</link>
	<description>Feed of posts on WordPress.com tagged "इक़रार"</description>
	<pubDate>Sun, 12 Oct 2008 17:01:00 +0000</pubDate>

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	<language>en</language>

<item>
<title><![CDATA[मुझ को आज भी तुम्हारा इन्तज़ार है]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=1147</link>
<pubDate>Tue, 30 Sep 2008 13:20:17 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2008/09/30/mujh-ko-aaj-bhii-tumhaara-intazaar-hai/</guid>
<description><![CDATA[मुझ को आज भी तुम्हारा इन्तज़ार है
वही त]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">मुझ को आज भी तुम्हारा इन्तज़ार है<br />
वही तड़प है, दिल उतना ही बेक़रार है</span></p>
<p><span style="color:#000000;">तेरी हँसी और हया के लिए मेरी आँखों में<br />
जानम आज तलक उतना ही प्यार है<br />
वही तड़प है, दिल उतना ही बेक़रार है</span></p>
<p><span style="color:#000000;">तुमसे मिलके पतझड़ में बहार खिल जाती है<br />
तुम बाँहों में हो तो मुझे क़रार है<br />
मुझ को आज भी तुम्हारा इन्तज़ार है</span></p>
<p><span style="color:#000000;">नज़रों के वह सिलसिले ख़ामोशी की आड़ में<br />
उनसे आज भी मुझ को इक़रार है<br />
वही तड़प है, दिल उतना ही बेक़रार है</span></p>
<p><span style="color:#000000;">गुलाबी फूल फिर मुस्कुराने लगे शाख़ों में<br />
इनमें रंग तेरा ही मेरे यार है<br />
मुझ को आज भी तुम्हारा इन्तज़ार है</span></p>
<hr />
शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[किसी राह तुमसे मुलाक़ात होगी]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=917</link>
<pubDate>Fri, 14 Mar 2008 14:46:54 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2008/03/14/kisii-raah-tum-se-mulaaqaat-hogii/</guid>
<description><![CDATA[किसी राह तुमसे मुलाक़ात होगी
फिर हल्की-]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">किसी राह तुमसे मुलाक़ात होगी<br />
फिर हल्की-हल्की बरसात होगी<br />
तुम मुझसे इक़रारे-प्यार करना<br />
ज़िन्दगी की नयी शुरुआत होगी</font></p>
<p><font color="#000000">तेरे पहलू में बैठेंगे दो बातें होंगी<br />
फिर ख़त्म दर्द की रातें होंगी<br />
ग़म भूल जायेंगे प्यार जवाँ होगा<br />
वस्ल की हर शब पहली रात होगी</font></p>
<p><font color="#000000">किसी राह तुमसे मुलाक़ात होगी<br />
फिर हल्की-हल्की बरसात होगी</font></p>
<p><font color="#000000">प्यार की दुनिया सजायेंगे प्यार से<br />
निखर जायेगा घर तेरे सिंगार से<br />
चाँदनी ओढ़ के बैठेंगे सर्द रातों में साथ<br />
कुछ तेरी कुछ मेरी बात होगी</font></p>
<p><font color="#000000">तुम मुझसे इक़रारे-प्यार करना<br />
ज़िन्दगी की नयी शुरुआत होगी</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००२</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[कुछ ऐसा ही होता है]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2008/03/06/kuchh-aisaa-hii-hota-hai/</link>
<pubDate>Thu, 06 Mar 2008 09:51:56 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2008/03/06/kuchh-aisaa-hii-hota-hai/</guid>
<description><![CDATA[ज़ोर से दिल धड़कता है (हाँ धड़कता है)
तूफ़]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">ज़ोर से दिल धड़कता है (हाँ धड़कता है)<br />
तूफ़ान साँसों में चलता है (हाँ चलता है)<br />
आँखें ठहर जाती हैं<br />
तस्वीरें गुज़र जाती हैं<br />
जब प्यार किसी से होता है<br />
कुछ ऐसा ही होता है...</font></p>
<p><font color="#000000">दिल इक़रार करता है (हाँ डरता है)<br />
पर इज़हार से डरता है (हाँ करता है)<br />
बेचैन हो जाता है<br />
सब कुछ बदल जाता है<br />
जब प्यार किसी से होता है<br />
कुछ ऐसा ही होता है...</font></p>
<p><font color="#000000">अफ़सोस करता है (हाँ करता है)<br />
तस्व्वुर को तरसता है (हाँ तरसता है)<br />
वो सपनों में रोज़ मिलता है<br />
जिस पर दिल फिसलता है<br />
जब प्यार किसी से होता है<br />
कुछ ऐसा ही होता है...</font></p>
<p><font color="#000000">दीदार को दीवाना होता है (हाँ होता है)<br />
इश्क़ आशिक़ाना होता है (हाँ होता है)<br />
शमअ का परवाना होता है<br />
तीरे-नज़र का निशाना होता है<br />
जब प्यार किसी से होता है<br />
कुछ ऐसा ही होता है...</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[कभी वैसे होता है]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=878</link>
<pubDate>Wed, 05 Mar 2008 13:11:36 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2008/03/05/kabhii-waise-hota-hai/</guid>
<description><![CDATA[कभी वैसे होता है,
कभी ऐसे होता है
यह प्य]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">कभी वैसे होता है,<br />
कभी ऐसे होता है<br />
यह प्यार जो होता है,<br />
प्यार ही  रहता  है...</font></p>
<p><font color="#000000">तुमको सब पता है<br />
हमको सब पता है<br />
तुम भी दीवाने हो<br />
हम भी दीवाने हैं<br />
यह सबको पता है<br />
कभी वैसे होता है,<br />
कभी ऐसे होता है</font></p>
<p><font color="#000000">मस्ती है तुमको भी<br />
मस्ती है हमको भी<br />
तुमको भी चाहत है<br />
हमको भी चाहत है<br />
यह किसकी ख़ता है<br />
कभी वैसे होता है,<br />
कभी ऐसे होता है</font></p>
<p><font color="#000000">नज़रों का चलना<br />
दिल का मचलना<br />
चलते-चलते फिसलना<br />
गिरते-गिरते संभलना<br />
ऐसा ही कुछ होता है<br />
कभी वैसे होता है,<br />
कभी ऐसे होता है</font></p>
<p><font color="#000000">जब भी मिलते हैं<br />
साथ-साथ चलते हैं<br />
क्या बातें करते हैं<br />
कहने से डरते हैं<br />
चैन कहाँ मिलता है<br />
कभी वैसे होता है,<br />
कभी ऐसे होता है</font></p>
<p><font color="#000000">इक़रार गर हो जाये<br />
इज़हार गर हो जाये<br />
हो जाये इक कमाल<br />
हो जाये इक वबाल<br />
ऐसा ही लगता है<br />
कभी वैसे होता है,<br />
कभी ऐसे होता है</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[रक़ाबी चाँद जला दो]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=816</link>
<pubDate>Tue, 19 Feb 2008 13:01:58 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2008/02/19/raqaabii-chaand-jalaa-do/</guid>
<description><![CDATA[रक़ाबी चाँद जला दो
यह रात चाँदनी हो जाय]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">रक़ाबी चाँद जला दो<br />
यह रात चाँदनी हो जाये<br />
कभी तो पास बुला लो<br />
तेरी नज़दीकियों का<br />
मुझे एहसास हो जाये</font></p>
<p><font color="#000000">गुलाबी शाम ढलती है<br />
रोज़ गुज़रती हो<br />
मेरे घर के सामने से<br />
मैं दिल थाम के बैठा रहता हूँ<br />
आइना जब भी हो हाथों में<br />
उससे तेरी बातें करता हूँ...</font></p>
<p><font color="#000000">रक़ाबी चाँद जला दो<br />
यह रात चाँदनी हो जाये<br />
एक रिश्ता बना लो<br />
मुलाक़ात लाज़मी हो जाये</font></p>
<p><font color="#000000">तेरे सिले हुए लबों पर<br />
क्या इक़रार होगा<br />
मेरा ख़्याल है कि इज़हार होगा<br />
बात कोई नही, बात तुम में है<br />
मैं न हूँ शायद तुझमें<br />
पर तू मुझमें है...</font></p>
<p><font color="#000000">रक़ाबी चाँद जला दो<br />
यह रात चाँदनी हो जाये</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[दो लफ़्ज़ों में बयाँ कर सकते थे]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=758</link>
<pubDate>Tue, 12 Feb 2008 16:47:12 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2008/02/12/do-lafzon-mein-bayaan-kar-sakate-the/</guid>
<description><![CDATA[दो लफ़्ज़ों में बयाँ कर सकते थे
हम अपने द]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">दो लफ़्ज़ों में बयाँ कर सकते थे<br />
हम अपने दिल की बात<br />
गुज़र गये वह सारे लम्हे<br />
बिताये थे जो हमने साथ</font></p>
<p><font color="#000000">पास तो बहुत थे वह<br />
फिर भी न कर पाये दिल की बात<br />
वह दिन थे कितने हसीं<br />
जब गुज़र रही थी उजालों से रात</font></p>
<p><font color="#000000">दो लफ़्ज़ों में बयाँ कर सकते थे<br />
हम अपने दिल की बात<br />
जाने वह कौन घड़ी थी<br />
जब वह छोड़ गये साथ</font></p>
<p><font color="#000000">निगाहों में थे सारे इशारे<br />
इशारों में थी अपने दिल की बात<br />
कहने को बहुत था<br />
न कह पाये हम दिल के जज़्बात</font></p>
<p><font color="#000000">दो लफ़्ज़ों में बयाँ कर सकते थे<br />
हम अपने दिल की बात<br />
मिले कहाँ हम कभी फिर<br />
जो कर पाते दिल की बात</font></p>
<p><font color="#000000">चले गये वापस हसीन मौसम<br />
गिर गये पेड़ों से सारे पात<br />
जाने कब वह आयेंगे वापस फिर<br />
जाने कहाँ होगी उनसे मुलाक़ात</font></p>
<p><font color="#000000">दो लफ़्ज़ों में बयाँ कर सकते थे<br />
हम अपने दिल की बात...</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[मेरी सोफिया...]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=753</link>
<pubDate>Tue, 12 Feb 2008 11:45:45 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2008/02/12/merii-sophia/</guid>
<description><![CDATA[जिसका इन्तिज़ार था वह आ ही गयी
जिसको ढू]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">जिसका इन्तिज़ार था वह आ ही गयी<br />
जिसको ढूँढ रहा था मैं मिल भी गयी<br />
करता क्या क़दमों में दिल रख दिया<br />
और कोई नहीं वह है वह है मेरी सोफिया<br />
मिल ही गयी मुझको मेरी सोफिया...</font></p>
<p><font color="#000000">पहली बार जिसके लिए दिल धड़का<br />
जिससे नज़रें मिलाते ही चैन खो गया<br />
करता क्या क़दमों में दिल रख दिया<br />
और कोई नहीं वह है वह है मेरी सोफिया<br />
मिल ही गयी मुझको मेरी सोफिया...</font></p>
<p><font color="#000000">मैं आया हूँ जिसके लिए इस दुनिया में<br />
चाहा मैंने जिसको बढ़कर दिलो-जाँ से<br />
जिसका नाम अपने दिल पर लिख लिया<br />
और कोई नहीं वह है वह है मेरी सोफिया<br />
मिल ही गयी मुझको मेरी सोफिया...</font></p>
<p><font color="#000000">क्या कब हुआ था अब क्या हो गया<br />
मैंने न समझा यह मैंने न जाना<br />
बस मैंने उसको अपना यह दिल दे दिया<br />
और कोई नहीं वह है वह है मेरी सोफिया<br />
मिल ही गयी मुझको मेरी सोफिया...</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[राहों में ढूँढ़ता हूँ कभी]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=747</link>
<pubDate>Mon, 11 Feb 2008 15:24:44 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2008/02/11/raahon-mein-dhhoomdhhata-hoon-kabhii/</guid>
<description><![CDATA[राहों में ढूँढ़ता हूँ कभी
तुम मिलती नह]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">राहों में ढूँढ़ता हूँ कभी<br />
तुम मिलती नहीं यह भी सही<br />
जानो न जानो प्यार क्या<br />
है यह इक नशा-सा<br />
उतरता नहीं आँखों से पलकों पर भी</font></p>
<p><font color="#000000">चाहता है दिल यह, पास तुम रहो<br />
कोई तस्वीर जो आँखों में<br />
छुपाकर रखी थी<br />
समझता नहीं क्यों मैं<br />
कि वह हक़ीक़त हो नहीं सकती</font></p>
<p><font color="#000000">राहों में ढूँढ़ता हूँ कभी<br />
तुम मिलती नहीं यह भी सही</font></p>
<p><font color="#000000">इक़रार है ज़ुबाँ पर<br />
क्या करूँ दिल राज़ी नहीं<br />
हो रहा जो अभी<br />
पहले ऐसा कभी हुआ नहीं<br />
सपनों पर अपने अब यक़ीं रहा नहीं</font></p>
<p><font color="#000000">क्या करूँ अभी वह मैं जानता नहीं<br />
इक सवाल है दिल में मेरे<br />
जो कभी तुम मिलो<br />
तो पूछ लूँगा तुम्हीं से हमनशीं<br />
क्या तुम मिलोगी मुझसे कभी</font></p>
<p><font color="#000000">राहों में ढूँढ़ता हूँ कभी<br />
तुम मिलती नहीं यह भी सही</font></p>
<p><font color="#000000">आ जाओ यहाँ तुम तोड़कर बन्धन<br />
तेरा इन्तिज़ार करता हूँ<br />
समझता था जो पहले वह था ग़लत<br />
जब तुम नज़रों में समाये<br />
तब जाके जाना क्या ग़लत क्या सही</font></p>
<p><font color="#000000">राहों में ढूँढ़ता हूँ कभी<br />
तुम मिलती नहीं यह भी सही...</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[मैं सबसे जुदा-जुदा रहने लगा हूँ]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=736</link>
<pubDate>Sun, 10 Feb 2008 02:04:28 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2008/02/10/main-sab-se-juda-juda-rahane-laga-hoon/</guid>
<description><![CDATA[मैं सबसे जुदा-जुदा रहने लगा हूँ
ख़ुद स]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">मैं सबसे जुदा-जुदा रहने लगा हूँ<br />
ख़ुद से यारों ख़फ़ा रहने लगा हूँ<br />
कभी दिल कहे उसे अपना बना लूँ<br />
कभी दिल कहता है उसे भुला दूँ</font></p>
<p><font color="#000000">क्या करूँ दिल दो तरफ़ा हो गया है<br />
हर पल मुझसे ख़फ़ा हो गया है<br />
दिल सोच रहा है क्या मेरा फैसला है<br />
हर वक़्त दिल में ख़्याल उसका है</font></p>
<p><font color="#000000">मैं सबसे जुदा-जुदा रहने लगा हूँ<br />
ख़ुद से यारों ख़फ़ा रहने लगा हूँ<br />
यह प्यार है पहले क्यों न जाना<br />
बेकार है इस दिल को समझाना</font></p>
<p><font color="#000000">देखूँ जिस तरफ़ वही नज़र आता है<br />
अब यह दीवाना कहीं चैन न पाता है<br />
एक वह ही मेरी आख़िरी मंज़िल है<br />
उस पर ही आया मेरा आवारा दिल है </font></p>
<p><font color="#000000">मैं सबसे जुदा-जुदा रहने लगा हूँ<br />
ख़ुद से यारों ख़फ़ा रहने लगा हूँ...</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[धीरे-धीरे प्यार होता है]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=735</link>
<pubDate>Sat, 09 Feb 2008 11:23:40 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2008/02/09/dheere-dheere-pyaar-hota-hai/</guid>
<description><![CDATA[धीरे-धीरे प्यार होता है
होते-होते इक़रा]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">धीरे-धीरे प्यार होता है<br />
होते-होते इक़रार होता है<br />
जब हम भी हैं यहाँ तो<br />
जब वह भी हैं यहाँ तो<br />
जब हम भी हैं जवाँ तो<br />
जब वह भी हैं जवाँ तो<br />
भला प्यार कैसे न होगा,<br />
इक़रार कैसे न होगा...</font></p>
<p><font color="#000000">इस उमर में हर कोई<br />
इसका जानकार होता है<br />
धीरे-धीरे प्यार होता है<br />
होते-होते इक़रार होता है</font></p>
<p><font color="#000000">आमना-सामना यार होता है<br />
निगाहें गुणा चार होता है<br />
कभी तो वह हमसे कहेंगे<br />
कभी वह बातें हमसे करेंगे</font></p>
<p><font color="#000000">कभी बातों ही बातों में<br />
हमारी जान पहचान होगी<br />
कभी तो वह हसीना<br />
हम पर मेहरबान होगी</font></p>
<p><font color="#000000">इस उमर में हर कोई<br />
इसका शिकार होता है<br />
धीरे-धीरे प्यार होता है<br />
होते-होते इक़रार होता है</font></p>
<p><font color="#000000">वह बहुत हसीं है<br />
हम क्या सभी कहते हैं<br />
हम भी कम नहीं<br />
यह भी वह जानते हैं</font></p>
<p><font color="#000000">जब ऐसा हैं यारों<br />
वह दूर कैसे रहेंगे<br />
हमसे दिल की बात<br />
कभी तो वह कहेंगे</font></p>
<p><font color="#000000">इस उमर में हर किसी का<br />
अपना दिलदार होता है<br />
धीरे-धीरे प्यार होता है<br />
होते-होते इक़रार होता है</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[मैंने प्यार किया]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=732</link>
<pubDate>Sat, 09 Feb 2008 09:53:54 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2008/02/09/maine-pyaar-kiya/</guid>
<description><![CDATA[मैंने प्यार किया
तुमसे प्यार किया
तुम ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">मैंने प्यार किया<br />
तुमसे प्यार किया<br />
तुम भी कह दो<br />
तुमने प्यार किया<br />
तुमसे प्यार किया<br />
तुम हो वही जिससे<br />
मैंने प्यार किया...</font></p>
<p><font color="#000000">तुम हो मेरी<br />
यह जाना मैंने<br />
तुम हो मेरी<br />
यह माना मैंने<br />
इसलिए तो<br />
तुमसे प्यार किया<br />
मैंने प्यार किया<br />
तुमसे प्यार किया</font></p>
<p><font color="#000000">दिल की बात<br />
दिल में थी<br />
वह अब ज़ुबाँ पर<br />
भी आ गयी<br />
तुम भी तो<br />
कहना चाहती थी<br />
फिर किसलिए<br />
तुम घबरा गयी</font></p>
<p><font color="#000000">दिल की बात<br />
ज़ुबाँ पर आ गयी<br />
मैंने प्यार किया<br />
तुमसे प्यार किया<br />
मैंने तुमको देखा<br />
अपना दिल दिया<br />
अब तक डरता था<br />
आज कह दिया...</font></p>
<p><font color="#000000">तुम हो ज़िन्दगी<br />
तुम हो बन्दगी<br />
सबके सामने<br />
मैंने कह दिया<br />
ऐसा क्या किया<br />
जादू चल गया<br />
मैंने प्यार किया<br />
तुमसे प्यार किया</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[ओ मेरी जूलियट]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=731</link>
<pubDate>Sat, 09 Feb 2008 09:15:23 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2008/02/09/oo-merii-juliet/</guid>
<description><![CDATA[ओ मेरी जूलियट
मैं तेरा रोमियो
मैंने प्]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">ओ मेरी जूलियट<br />
मैं तेरा रोमियो<br />
मैंने प्यार किया<br />
तुमसे प्यार किया</font></p>
<p><font color="#000000">दुनिया से नहीं मैं<br />
ख़ुद से डरता हूँ<br />
पर कैसे कहूँ मैं<br />
तुम पे मरता हूँ</font></p>
<p><font color="#000000">यह कैसे हो गया<br />
दिल मेरा खो गया<br />
ओ मेरी जूलियट<br />
तू मुझको बता...</font></p>
<p><font color="#000000">ओ मेरी जूलियट<br />
मैं तेरा रोमियो<br />
मैंने प्यार किया<br />
तुमसे प्यार किया</font></p>
<p><font color="#000000">क्या तूने<br />
मेरे दिल को चुराया<br />
दिल खो गया<br />
दिल कहाँ गया</font></p>
<p><font color="#000000">ओ मेरी जूलियट<br />
मैं तेरा रोमियो<br />
मैंने प्यार किया<br />
तुमसे प्यार किया</font></p>
<p><font color="#000000">मेरे दिल ने<br />
तेरे दिल से कह दिया<br />
मैंने प्यार किया<br />
यह इक़रार किया</font></p>
<p><font color="#000000">ओ मेरी जूलियट<br />
मैं तेरा रोमियो<br />
मैंने प्यार किया<br />
तुमसे प्यार किया</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
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