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	<title>एनडीटीवी &amp;laquo; WordPress.com Tag Feed</title>
	<link>http://wordpress.com/tag/एनडीटीवी/</link>
	<description>Feed of posts on WordPress.com tagged "एनडीटीवी"</description>
	<pubDate>Fri, 18 Jul 2008 21:25:39 +0000</pubDate>

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	<language>en</language>

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<title><![CDATA[ब्लॉगर भेंटवार्ता टेलीविजन पर .....]]></title>
<link>http://itsme.wordpress.com/?p=232</link>
<pubDate>Thu, 07 Feb 2008 07:26:13 +0000</pubDate>
<dc:creator>Amit</dc:creator>
<guid>http://itsme.wordpress.com/?p=232</guid>
<description><![CDATA[पिछले माह, 12 जनवरी 2008, हुई दिल्ली ब्लॉग ए]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>पिछले माह, 12 जनवरी 2008, हुई दिल्ली ब्लॉग एण्ड न्यू मीडिया सोसायटी (Delhi Blog and New Media Society aka DBNMS) द्वारा आयोजित <a href="/2008/01/08/are-you-coming/">प्रथम ब्लॉगर भेंटवार्ता</a> काफ़ी सफ़ल रही। बहुत से साथी ब्लॉगरों और ब्लॉग इच्छुकों और उत्सुकों ने इसमें भाग लेकर इस भेंट को सफ़ल बनाया। अपने हिन्दी ब्लॉगजगत से भी कई बंधुओं ने शिरकत कर मेरी इस सोच को मज़बूत किया कि ब्लॉगर चाहे कैसा हो और चाहे किसी भी भाषा में लिखता हो परन्तु होता वह ब्लॉगर ही है इसलिए हम इस ब्लॉगजगत में क्षेत्र अथवा भाषा के मापदंड पर बंटवारा नहीं करेंगे। :)</p>
<p>मीडिया में भी इस ब्लॉगर भेंटवार्ता को काफ़ी कवरेज मिली और ब्लॉगजगत तथा ब्लॉगरों के बारे में खबर दूर-२ तक पहुँची। इससे अपेक्षित है कि ब्लॉगिंग का मर्ज़ बहुतों को अपनी चपेट में लेगा। :)</p>
<p>भेंटवार्ता से एक दिन पहले अंग्रेज़ी के हिन्दुस्तान टाइम्स की अनुपूरक पत्रिका एचटी सिटी(HT City) के मुख्यपृष्ठ पर भेंटवार्ता संबन्धित <a href="http://snipurl.com/dbnms_meet1_ht" target="_blank">यह लेख</a> छपा था। हालांकि इसमें पत्रकार/लेखिका से एक त्रुटि हो गई और अंत में वेबसाइट के पते में वो delhi लगाना भूल गई, असल वेबसाइट <a href="http://www.delhibloggers.in/" target="_blank">www.delhibloggers.in</a> है। एनडीटीवी (NDTV) ने इस पूरी भेंटवार्ता को कवर किया था और पत्रकार गरिमा दत्त ने एनडीटीवी (NDTV) की वेबसाइट पर भेंटवार्ता के अगले दिन <a href="http://snipurl.com/dbnms_meet1_ndtv" target="_blank">यह लेख</a> छापा। सिर्फ़ छापे वाले मीडिया में ही नहीं, टेलीविजन पर भी इसकी कवरेज दिखाई गई।</p>
<p>एनडीटीवी 24x7 (NDTV 24x7) पर दिखाई गई न्यूज़ बाइट<br />
<span style='text-align:center; display: block;'><object width='425' height='350'><param name='movie' value='http://www.youtube.com/v/NTAQYkbvhsI'></param><param name='wmode' value='transparent'></param><embed src='http://www.youtube.com/v/NTAQYkbvhsI&rel=0' type='application/x-shockwave-flash' wmode='transparent' width='425' height='350'></embed></object></span><br />
यूट्यूब पर इस वीडियो को <a href="http://www.youtube.com/watch?v=NTAQYkbvhsI" target="_blank">यहाँ देखें</a>। वीडियो को FLV रूप में <a href="http://www.videodownloadx.com/misc/download-video/id/7214" target="_blank">यहाँ डाउनलोड करें</a>।</p>
<p>एनडीटीवी मेट्रोनेशन (NDTV Metronation) पर दिखाई गई न्यूज़ बाइट<br />
<span style='text-align:center; display: block;'><object width='425' height='350'><param name='movie' value='http://www.youtube.com/v/ky4ewGi8-mQ'></param><param name='wmode' value='transparent'></param><embed src='http://www.youtube.com/v/ky4ewGi8-mQ&rel=0' type='application/x-shockwave-flash' wmode='transparent' width='425' height='350'></embed></object></span><br />
यूट्यूब पर इस वीडियो को <a href="http://www.youtube.com/watch?v=ky4ewGi8-mQ" target="_blank">यहाँ देखें</a>। वीडियो को FLV रूप में <a href="http://www.videodownloadx.com/misc/download-video/id/7219" target="_blank">यहाँ डाउनलोड करें</a>।</p>
<p>एनडीटीवी मेट्रोनेशन (NDTV Metronation) पर दिखाई गई विस्तृत कवरेज<br />
<span style='text-align:center; display: block;'><object width='425' height='350'><param name='movie' value='http://www.youtube.com/v/XjvzL7180ws'></param><param name='wmode' value='transparent'></param><embed src='http://www.youtube.com/v/XjvzL7180ws&rel=0' type='application/x-shockwave-flash' wmode='transparent' width='425' height='350'></embed></object></span><br />
यूट्यूब पर इस वीडियो को <a href="http://www.youtube.com/watch?v=XjvzL7180ws" target="_blank">यहाँ देखें</a>। वीडियो को FLV रूप में <a href="http://www.videodownloadx.com/misc/download-video/id/7221" target="_blank">यहाँ डाउनलोड करें</a>।</p>
<p>मीडिया में इस कवरेज का लाभ सीधे ही दिखा। जहाँ कई लोग हिन्दुस्तान टाइम्स में पहले दिन छपे लेख के कारण भेंटवार्ता में आए वहीं कुछ लोग बाद में एनडीटीवी (NDTV) पर इसकी कवरेज देख कर समूह से जुड़े और अपने ब्लॉग बनाए। भेंटवार्ता के अगले ही दिन एनडीटीवी (NDTV) पर प्रसारित <a href="/2008/01/18/should-blogs-be-regulated/">बर्खा दत्त के We The People कार्यक्रम</a> का मुद्दा भी ब्लॉग ही थे। मतलब साफ़ है, मीडिया भी अब खुले रूप से ब्लॉगों पर ध्यान दे रहा है, और यह अच्छा भी है क्योंकि इससे जल्द ही यह भ्रम(जो कि बहुत लोग पाले हुए हैं) टूटेगा कि ब्लॉग मुख्यधारा मीडिया की जगह ले सकते हैं, दोनों एक दूसरे के सहायक/पूरक हो सकते हैं लेकिन दोनों की अपनी-२ पहचान और स्थान है।</p>
]]></content:encoded>
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<title><![CDATA[ख़बरदार या झंडाबरदार ]]></title>
<link>http://khabariya.wordpress.com/2007/09/18/vinoddua/</link>
<pubDate>Tue, 18 Sep 2007 13:13:36 +0000</pubDate>
<dc:creator>khabariya</dc:creator>
<guid>http://khabariya.wordpress.com/2007/09/18/vinoddua/</guid>
<description><![CDATA[क्या कहे भई&#8230; पिछली बार जब विनोद दुआ क]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>क्या कहे भई... पिछली बार जब विनोद दुआ का जिकर हुआ था तो लोगों को बुरा लगा कि ऐसी महान विभूति के लिए इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल मानसिक दिवालियापन है। हम भी सोचे यार कि गलती हो गई। किसी दिन सामना हो गया तो हम ही झेंप जाएंगे कि ऐसा हमने क्यों किया। अब जो हुआ सो हुआ। हो सकता है कि ऊपरवाला ही हमरे मुंह से उनके लिए उल्टा-सीधा बुलवाना चाह रहा हो। जो होता है अच्छा होता है। हम मिलकर माफी मांग लेंगे। खामाखां बीच में कोई गुरू-घंटाली दिखाने की कुचेष्टा ना करे तो ही अच्छा। नौकरी थोड़ी छीन लेंगे। बड़े लोग छोटी बातों का बुरा नहीं माना करते। </p>
<p>अपनी खबर नहीं है इस बार.. इस बार दुआ साहब की एक बात लेकर हम आ गए हैं। हुआ यों कि कल विनोद दुआ जी ने खबरदार में कहा कि करुणानिधि के बयान पर बीजेपी वाले कुछ नहीं बोले। और इस पर पोल भी चला लिया। आपको तो पता है पोल का तीसरा विकल्प दुआ साहब के मन का होता है। जिसे प्रोग्राम के अंत में सबसे ज्यादा वोट मिल जाते हैं और हो जाता है फैसला राष्ट्रीय नाड़ी का। नाड़ी धड़क रही है दुआ साहब की नाड़ी के साथ.. कदमताल मिलाते हुए।</p>
<p>भई, हमने माना कि बीजेपी वाले निरा मूर्ख है। खुरापाती हैं। राम के नाम पर देश की धर्मनिरपेक्षता की लुटिया डुबाने का मंसूबा पाले हुए हैं लेकिन भैये खबरदार तैयार करते समय ये तो देख लिया करो कि पीटीआई यूएनआई आईएएनएस वगैरह वगैरह क्या कह रहे हैं। हुआ यह कि करुणानिधि ने बयान दिया.. कुछ लोग कहते हैं कि 17 लाख साल पहले एक व्यक्ति हुआ जिसका नाम राम था। उनके द्वारा निर्मित सेतु को नहीं छुएं, कौन हैं यह राम, किस इंजीनियरिंग कालेज से उन्होंने पढ़ाई की, क्या इसका कोई सबूत है? कुछ भेड़िए द्रविड़ आंदोलन को खत्म करना चाहते हैं।</p>
<p>कल जब अन्नादुरै की 99वे जन्मदिवस समारोह वाला यह बयान आया। उसके कुछ ही घंटों में बीजेपी की तरफ़ से बयान आ चुका था। प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद और मुरली मनोहर के बयान रात तक पीटीआई पर भी आ चुके थे। अरे भई.. इतनी जल्दी क्या थी दुआ साहब को।<br />
<a href="http://khabariya.wordpress.com/2007/09/18/vinoddua/vinod-dua/" rel="attachment wp-att-21"><img src="http://www.wordpressproxy.com/index.php?c=aHR0cDovL2toYWJhcml5YS53b3JkcHJlc3MuY29tL2ZpbGVzLzIwMDcvMDkva2hhYmFyZGFyLnRodW1ibmFpbC5qcGc%3D" alt="vinod dua " /></a><br />
दुआ साहब ही क्या एनडीटीवी वालों की आदत है कि वे बीजेपी के साथ छुआछूत का व्यवहार करते रहते हैं। भई सीधा उसूल अपनाओ.. रिपोर्ट निष्पक्षता से लिखो... संपादकीय में अपना ज्ञान बखारो। यह संतुलन साधा करो- खबरिया छोटा मुंह बड़ी बात क्या कहे। मान भी लें कि उस वक्त बीजेपी का बयान नहीं आया था..तो भी फुनवा घुमा लेते और ले लेते बयान। कभी कभी तो लगता है कि ग़ैरबीजेपीवाद के झंडाबरदार बन जाते हैं खबरदार वाले। आदत सुधारो दद्दा इस कदर दुश्मनी ठीक नही लगती। या हमहुं साहिर का शेर मारे.. पीकर?</p>
]]></content:encoded>
</item>
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<title><![CDATA[एनडीटीवी - दिल में सच और जुबां पर?]]></title>
<link>http://khabariya.wordpress.com/2006/08/29/ndtvindia/</link>
<pubDate>Tue, 29 Aug 2006 05:40:45 +0000</pubDate>
<dc:creator>khabariya</dc:creator>
<guid>http://khabariya.wordpress.com/2006/08/29/ndtvindia/</guid>
<description><![CDATA[पिछली दफ़ा जब हमने आजतक की ख़बर ली थी त]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span>पिछली दफ़ा जब हमने आजतक की ख़बर ली थी तो दर्द किन्ही औरों को उठा था। हम जब नेताओं को गालियां देते हैं तो सभी तारीफ़ करते हैं। लेकिन जब लोकतंत्र के डगमगाते चौथे स्तंभ पर उंगलियां उठाते हैं तो आलोचना क्यों की जाती है? रहा सवाल अपनी पहचान ज़ाहिर करने का तो यही कहना चाहेंगे कि हमारी रोज़ी-रोटी का सवाल है बाबा। हम इतनी ही पगार पा रहे हैं कि ज़िंदगी की रोजमर्रा की ज़रूरतें पूरी कर लें। अब हम कोई लखपति पत्रकार तो नहीं जो आलीशान कोठियों में रहकर समाजवाद के नारे देता हो और ना ही इतने बड़े दलाल कि हमारी कलम में किसी नेता की दी हुई दारू बहती हो। जो दिखता है वही लिख मारते हैं। सविनय निवेदन है कि ब्लॉग तो विचार है, अगर उसपर भी आपको आपत्ति है तो मत पढो  भई,  लेकिन हमारी जुबान पर ताला लगाओगे तो ब्लोगस्पाट बन्द कराने वाली सरकार और आप में क्या फर्क रह जाएगा?  हमें तो अपनी बात कहने की आदत है और यह जारी रहेगी। पिछली दफ़ा आपने देखा था कि कैसे आजतक को हमने बिनपेंदिया साबित किया था। उस लेख के बाद हमें अंतरंग मेल आए हैं जिनको सही वक्त आने पर पाठकों के सामने ज़ाहिर किया जाएगा। इस बार आप एनडीटीवी की सुनिए। </span><span></span><span> </span></p>
<p><img src="http://khabariya.wordpress.com/files/2006/08/ndtv_india.thumbnail.jpg" alt="ndtv" align="left" /><span>एनडीटीवी - दिल में सच, ज़ुबां में आधा सच</span><span>। आजतक में जिन पुन्यात्मा प्रसून का ज़िक्र किया गया था वैसे लोगों का एनडीटीवी में जमावडा है। डॉक्टर प्रणव राय का नाम भारतीय ब्राडकास्ट मीडिया के पुरोधा मरहूम सुरेंद्र प्रताप सिंह के बाद आता है। द वर्ल्ड दिस वीक से अपना मीडिया हाउस शुरू करने वाले डॉक्टर साहब अपने यहां बंगाली बनाम बिहारी लड़ाई से अक्सर परेशान रहते हैं। एनडीटीवी को क्लास का चैनल कहा जाता है- यही सुनकर यह डॉक्टर साहब रेटिंग देखकर भी परेशान नहीं होते हैं। हाल ही में इन्होंने अपने यहां के कर्मचारियों को मेल करके बताया है कि टीआरपी रेटिंग पर ना जाओ लेकिन विश्वसनीयता बनाए रखो। वे कहते हैं- टीआरपी रेटिंग के चक्कर में पड़ोगे तो हाल इंडिया टीवी जैसा होगा जो साल में दो-तीन दिन का राजा बन जाता है। यानी दिल बहलाने को ग़ालिब ख्याल अच्छा है। डॉक्टर साहब का चैनल तीसरे-चौथी पायदान के लिए लड़ता रहता है। हिन्दी फ़िल्मों में जिन्हें समानांतर सिनेमा का शौकीन कहा जा सकता है उनके लिए यह चैनल क्लास चैनल है जिसे मनमोहन देसाई की पिक्चर की बजाय रितुपर्णो घोष का सिनेमा ज़्यादा पसंद आता है। भले ही जनता के मगज में घुसे या ना घुसे। </span></p>
<p><span>राजनीतिक अखाड़े की ख़बरों के शौकीनों के लिए इसे सेक्यूलर चैनल कहा जाए तो ग़लत नहीं होगा। पहले बीजेपी की भड़काउ हरकतों वाली खबर उछालो, फिर उस पर वामनेताओं के विचार टीवी पर दिखाओ और फिर अपनी संपादकीय घुसेड़ो। यदि चैनल को निष्पक्ष दिखाना भी पड़ जाए तो बीजेपी या वीएचपी के बीपी सिंघल या प्रकाश जावड़ेकर सरीखे ढीले नेताओं से पार्टी को बचाते दिखवाओ। हो गया मकसद हल। बीजेपी को गाली भी दे दी और उसका पक्ष (ढीला) दिखा दिया। यहां सेक्यूलरिज़्म के सबसे बड़े झंडाबरदार हैं ख़बरदार वाले विनोद दुआ। सुबह पीयो, शाम पीयो और रात में सारा ग़ुस्सा संघ परिवार पर निकालो । यही इनका मोटो है। विनोद दुआ का नाम विनोद दुआ ना होकर विनोद पिया रख दिया जाए तो कोई पत्रकार बन्धु असहमत नही होगा। दुआ का दुराग्रह उनके इस कार्यक्रम ख़बरदार की संपादकीय में दिखाई देता है। पुरुषोत्तम अग्रवाल, प्रभाष जोशी सरीखे दोस्तों को दुआ साहब अपने प्रोग्राम में बुलाकर आए दिन काम देते हैं। बीजेपी वाले भी इतने ढी़ठ हैं कि रुसवां हो-होकर भी यहां आना नहीं भूलते। देबांग का नाम लिए बिना तो क़िस्सा पूरा कैसे होगा? आखिर सारी ज़िम्मेदारी ले देकर इन्हीं के कन्धों पर ही तो आती है। चैनल को पिछड़ता देख डॉक्टर साहब इन्हें पिछवाड़े का रास्ता दिखाने ही वाले थे कि मन बदल गया और साहब ने इन्हें दोबारा ज़िम्मेदारी दे दी। पिछले दिनों ब्लॉगस्पॉट वाले टीवी पत्रकार ने वूमनाइज़र की बात उठाई थी। एनडीटीवी का मुक़ाबला कराने वाले इन्हीं शख्स पर जमकर लोग बरसे थे वहां। </span></p>
<p><span>पुण्य प्रसून भी कभी यहीं आए थे लेकिन एक गली मे दो कैसे रह सकते है की तर्ज पर वे पुरानी गली में निकल लिए। </span><span></span><span>चैनल की लाइन-लैंथ में ज़रा भी डगमगाहट नहीं आई है। जब से शुरू किया था तभी से सोनिया जी का गुणगान करने में रमा हुआ है। एनडीए के दौरान भी इसे ही सबसे ज़्यादा फ़ायदा हुआ। निंदक नियरे राखिए की तर्ज पर अशोक रोड के ऑफ़िस में इनको स्पेशल कैबिन खोलने की अनुमति भी मिल गई। चैनलवालों को विजय त्रिवेदी को धन्यवाद देना चाहिए। जिनके और दीनानाथ मिश्र जी के सौजन्य से बीजेपी के अंदर की ख़बरे मिलती रहती है। स्पेशल कैबिन मिला सो अलग।</span></p>
<p><span> </span><span></span><span>हिन्दी का इंडिया तो ठीक है लेकिन इंग्लिश वाले चैनल की चौबीस घंटे और सातों दिन हालत खराब हो गई है। वजह है राजदीप के अलग होने से चैनल में उदासी छा गई है। खुद तो गए लेकिन पूरी फौज संग ले गए। अब मांगे एंकर मिलते नहीं। स्टार एंकर बरखा दत्त मैनेजमेंट करती है, उनका मैनेजमेंट तो हमेशा से ही बढ़िया रहा है। बस एक चीज है, अगर बरखा अपने गुस्से पर काबू रखे तो अच्छी मैनेजर बनने के बाकी गुण है उसमे। एनडीटीवी कर्मियों मे इनके मैनेजमेन्ट की बहुत चर्चा रहती है और वे तरह तरह की खबरें बाजार मे भेजते रहते है, </span>लेकिन हम उन गन्दी बातों की चर्चा यहाँ नही करेंगे। <span>चैनलों में लड़कियां वैसे भी ख़राब नहीं होती। या तो अच्छी होती हैं या फिर बहुत अच्छी। इसलिए एनडीटीवी भी या तो आपको अच्छा लगता होगा या फिर बहुत अच्छा.. बुरे की गुंजाइश के लिए आगे पढ़ते रहिएगा। और कहिए दिल में सच और ज़ुबां में आधा सच </span><span>!!</span></p>
<p><span> </span></p>
<p><span> </span></p>
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