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	<title>ओस &amp;laquo; WordPress.com Tag Feed</title>
	<link>http://wordpress.com/tag/ओस/</link>
	<description>Feed of posts on WordPress.com tagged "ओस"</description>
	<pubDate>Sun, 12 Oct 2008 15:42:06 +0000</pubDate>

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	<language>en</language>

<item>
<title><![CDATA[तेरा बस इक ख्याल है]]></title>
<link>http://pryas.wordpress.com/?p=309</link>
<pubDate>Tue, 16 Sep 2008 08:23:28 +0000</pubDate>
<dc:creator>pryas</dc:creator>
<guid>http://pryas.hi.wordpress.com/2008/09/16/215/</guid>
<description><![CDATA[कुछ और लिखने का प्रयास किया है. कृपया म]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>कुछ और लिखने का प्रयास किया है. कृपया मेरी गलतियाँ सुधारें.</p>
<p>~-~-~-~-~-~-~-~-~-~-~-~-~-~-~-~-~-~-~-~-~-~-~-~-~~</p>
<p>चौथा पहर है रात अब कुछ मंद पडी है,<br />
सूरज की किरण घर से कुछ ही दूर खडी है.</p>
<p>मोती की तरह बिखरी हैं ये ओस की बूंदें,<br />
जैसे की रात भर तू यहाँ खुल के हँसी है.</p>
<p>हर मोड पर हर रोज़ हम किस वक्त मिलते हैं,<br />
सूनी पडी हैं गलियाँ फिर भी उसको खबर है.</p>
<p>हो बेअदब सा कब्र पर ये कौन चल रहा,<br />
सीने में बसीं यादें को वो रौंद रहा है.</p>
<p>बिस्तर के आस पास जो रातों को घुमता,<br />
वो कुछ नहीं, यूं ही, तेरा बस इक ख्याल है.</p>
<p>~-~-~-~-~-~-~-~-~-~-~-~-~-~-~-~-~-~-~-~-~-~-~-~-~~</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[तन्हाई यूँ ढूँढ़ती है मुझे]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=874</link>
<pubDate>Tue, 04 Mar 2008 03:39:27 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2008/03/04/tanhaii-yoon-dhhoomdhhatii-hai-mujhe/</guid>
<description><![CDATA[तन्हाई यूँ ढूँढ़ती है मुझे
जैसे मेरी स]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">तन्हाई यूँ ढूँढ़ती है मुझे<br />
जैसे मेरी सदा तुम्हें<br />
जो दीवारें ख़ुद-ब-ख़ुद गिरती हैं<br />
मैं कैसे चुनावाऊँ उन्हें</font></p>
<p><font color="#000000">मैं बद से बदतर हुआ जाता हूँ<br />
याद कर-करके तुम्हें<br />
ख़िज़ाँ भी ख़ुशरंग हुई जाती है<br />
खुष्क पत्ते पहने-पहने</font></p>
<p><font color="#000000">शाम कितनी हसीन हो जाती है<br />
पहने के रात के गहने<br />
ऐसी शाम भी सादी लगती है मुझे<br />
यह दर्द क्या पता तुम्हें</font></p>
<p><font color="#000000">अब तो खुष्क पत्तों पर<br />
ओस की तरह जीता हूँ...</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति 'नज़र'<br />
लेखन वर्ष: ०८ जून २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
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<title><![CDATA[उन ओस की बूँदो का आना]]></title>
<link>http://mehhekk.wordpress.com/2007/12/29/%e0%a4%89%e0%a4%a8-%e0%a4%93%e0%a4%b8-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%ac%e0%a5%82%e0%a4%81%e0%a4%a6%e0%a5%8b-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%86%e0%a4%a8%e0%a4%be/</link>
<pubDate>Sat, 29 Dec 2007 08:08:28 +0000</pubDate>
<dc:creator>mehhekk</dc:creator>
<guid>http://mehhekk.hi.wordpress.com/2007/12/29/%e0%a4%89%e0%a4%a8-%e0%a4%93%e0%a4%b8-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%ac%e0%a5%82%e0%a4%81%e0%a4%a6%e0%a5%8b-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%86%e0%a4%a8%e0%a4%be/</guid>
<description><![CDATA[उन ओस की बूँदो का आना
लालिमा की चुनर पू]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>उन ओस की बूँदो का आना</p>
<p>लालिमा की चुनर पूरब पर लहराए<br />
मंद मंद बहती ये शीतल हवाए<br />
खिली कुसुमीता मध्यम मुस्कुराए<br />
फ़िज़ाए जब उसे छूकर गुजरती<br />
अपनी महक हर दिशा में बिखराए<br />
छम छम करती किरनो की पायल<br />
रौशन करती जीवन का हर पल<br />
कही दूर से आए बासूरी की गूंजन<br />
उल्हासित,प्रफूल्लित होता ये मन<br />
कही पंछीयो का किलबिल चहकना<br />
पन्नो का सरस्वति के राग छेड़ना<br />
नाज़ुक , तरल , हसती , दर्पणसी<br />
उन ओस की बूँदो का आना<br />
अपना प्यार पंखुड़ियो पर जताना<br />
ओस की दर्पण में तुम नज़र आते हो<br />
हर बूँद के साथ अपना प्यार दे जाते हो<br />
तुम्ही हो मेरे इस जीवन की आकांक्षा<br />
इसलिए हर सुबह सिर्फ़ तुम्हे देखने<br />
करती हूँ ओस की बूँदो की प्रतीक्षा.</p>
<p>top post</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[तन्हाई के साये मुझे घेर कर बैठ जाते हैं]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/08/27/%e0%a4%a4%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%88-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%8f-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%9d%e0%a5%87-%e0%a4%98%e0%a5%87%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%b0-%e0%a4%ac/</link>
<pubDate>Mon, 27 Aug 2007 21:11:55 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2007/08/27/tanhaaii-ke-saaye-mujhe-gher-kar-baith-jaate-hain/</guid>
<description><![CDATA[हल्के गुलाबी फूलों पर ओस की बूँदों को
]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">हल्के गुलाबी फूलों पर ओस की बूँदों को<br />
सूरज की किरनें छूती हैं तो...<br />
बदन में तेरी यादों के दर्द अचानक उठने लगते हैं<br />
तेरी तस्वीर बनने लगती है<br />
दिल तो सुकूत पाता है मगर<br />
मन खा़ली-खा़ली और उदास हो जाता है</span></p>
<p><span style="color:#000000;">सबा के परों पर तैरती हुई खु़शबू<br />
मेरे बेजान खा़बों की जान बन जाती है<br />
फिर कौन बुला रहा है मुझे<br />
मैं कहाँ हूँ, कौन देख रहा है मुझको<br />
सब भूल जाता हूँ, कुछ याद नहीं रहता<br />
साँसों में धड़कनों में तेरा नाम घुल जाता है</span></p>
<p><span style="color:#000000;">आँखों को सिवा तेरे चेहरे के कुछ भी नहीं दिखता<br />
हर शै में बस तू ही तू नज़र आने लगती है मुझको<br />
दिल फिर तेरे क़रीब आने के बहाने ढूँढ़ने लगता है<br />
तुझे पाने के खा़ब संजोने लगता है<br />
और बेताब धड़कनों को<br />
खा़मोश ज़ुबाँ की खा़मोशी चुभने लगती है</span></p>
<p><span style="color:#000000;">सहमे हुए-से हर्फ़ फिर टूटने लगते हैं<br />
बिखरने लगते हैं<br />
और ऐसे में जब किसी सदा के हाथ<br />
मुझे छू देते हैं तो<br />
तन्हाई के साये मुझे घेर कर बैठ जाते हैं<br />
</span> </p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति 'नज़र'</p>
]]></content:encoded>
</item>

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