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	<title>काजल &amp;laquo; WordPress.com Tag Feed</title>
	<link>http://wordpress.com/tag/काजल/</link>
	<description>Feed of posts on WordPress.com tagged "काजल"</description>
	<pubDate>Wed, 14 May 2008 09:37:30 +0000</pubDate>

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	<language>en</language>

<item>
<title><![CDATA[बातों ही बातों में कोई बात हो]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=950</link>
<pubDate>Thu, 27 Mar 2008 10:30:55 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
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<description><![CDATA[बातों ही बातों में कोई बात हो
दिल से दि]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">बातों ही बातों में कोई बात हो<br />
दिल से दिल की मुलाक़ात हो<br />
नज़रों से नज़रें कहें कुछ<br />
इनायत-ओ-इल्तफ़ात हो</font></p>
<p><font color="#000000">आज की रात जो चाँदनी है<br />
यह तेरे रूप की रोशनी है<br />
संदली यह बदन तेरा<br />
मुक़द्दस-ओ-कायनात हो</font></p>
<p><font color="#000000">हैं झीलें दोनों आँखें तुम्हारी<br />
सादा-सादा हैं प्यारी-प्यारी<br />
हुईं काजल से ख़ुशरंग यूँ<br />
जैसे सूरज ढले तो रात हो</font></p>
<p><font color="#000000">बख़्त है सबा तुमको छुए<br />
तेरी ज़ुल्फ़ से खेले, मचले<br />
ख़ुशबाश में है गुंचाए-दिल<br />
तुम जन्नत-ओ-हयात हो</font></p>
<p><font color="#000000">गुलाबी पैमाने छलकते हैं<br />
लबों पर अंगारे सुलगते हैं<br />
पतंगा करे तेरी लब-बोसी<br />
गर इख़लास-ओ-सबात हो</font></p>
<p><font color="#000000">क़ुर्बां तेरे शोख़ी-ओ-नाज़ पे<br />
मुआ जाऊँ तेरे एतराज़ पे<br />
फ़साने में जाँ भर दी तुमने<br />
यह कि अब इख़्तिलात हो</font></p>
<p>इल्तफ़ात= favour, friendship; मुक़द्दस= clean, pious; बख़्त= lucky; गुंचाए-दिल= bud of heart; लब-बोसी= kiss on lips; इख़लास= love, worship; सबात= constancy, endurance; मुआ= sacrifice; इख़्तिलात= love</p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[ऐसी आंखें नही देखी]]></title>
<link>http://jagjitsingh.wordpress.com/?p=326</link>
<pubDate>Fri, 21 Mar 2008 07:47:50 +0000</pubDate>
<dc:creator>Amarjeet Singh</dc:creator>
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<description><![CDATA[ऐसी आंखें नही देखी, ऐसा काजल नही देखा,
ऐ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>ऐसी आंखें नही देखी, ऐसा काजल नही देखा,<br />
ऐसा जलवा नही देखा, ऐसा चेहरा नही देखा,</p>
<p>जब ये दामन की हवा ने, आग जंगल में लगा दे,<br />
जब ये शहरो में जाए, रेत में फूल खिलाये,</p>
<p>ऐसी दुनिया नही देखी, ऐसा मंजर नही देखा,<br />
ऐसा आलम नही देखा, ऐसा दिलबर नही देखा,</p>
<p>उस के कंगन का खड़कना, जैसा बुल-बुल का चहकना,<br />
उस की पाजेब की छम-छम, जैसे बरसात का मौसम,</p>
<p>ऐसा सावन नही देखा, ऐसी बारिश नही देखी,<br />
ऐसी रिम-झिम नही देखी, ऐसी खवाइश नही देखी,</p>
<p>उस की बेवक्त की बाते, जैसे सर्दी की हो राते,<br />
उफ़ ये तन्हाई, ये मस्ती, जैसे तूफान में कश्ती,</p>
<p>मीठी कोयल सी है बोली, जैसे गीतों की रंगोली,<br />
सुर्ख गालों पर पसीना, जैसे फागुन का महीना,</p>
<p><i>Singer: Jagjit Singh</i></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[हल्के-हल्के आँसू टूटे हैं]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=802</link>
<pubDate>Mon, 18 Feb 2008 13:01:32 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=802</guid>
<description><![CDATA[हल्के-हल्के आँसू टूटे हैं मेरी आँखों स]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">हल्के-हल्के आँसू टूटे हैं मेरी आँखों से<br />
अब बात नहीं बनती है तेरी यादों से<br />
इतनी दूरी क्यों है, यह मजबूरी क्यों है<br />
इसका जवाब दो तुम इसका जवाब दो<br />
यह जुदाई क्यों है यह रुसवाई क्यों है<br />
इसका जवाब दो मुझे इसका जवाब दो</font></p>
<p><font color="#000000">यह दिल मेरा तेरी मोहब्बत चाहता है<br />
वह दिल तेरा मेरी मोहब्बत चाहता है<br />
इस मुश्किल से थोड़ी राहत चाहता है</font></p>
<p><font color="#000000">हल्के-हल्के आँसू टूटे हैं मेरी आँखों से<br />
अब बात नहीं बनती है तेरी यादों से</font></p>
<p><font color="#000000">ख़ाहिश है तू मेरी, जन्नत है तू मेरी<br />
इस दुनिया में सबसे सुन्दर है तू ही<br />
नीले आकाश में जैसे उड़ता बादल है<br />
नील आँखों में जैसे सजता काजल है<br />
कुछ यूँ मेरे दिल के अन्दर है तू ही<br />
मेरी सजनी तू नील समन्दर है तू ही</font></p>
<p><font color="#000000">हल्के-हल्के आँसू टूटे हैं मेरी आँखों से<br />
अब बात नहीं बनती है तेरी यादों से</font></p>
<p><font color="#000000">तुम मेरे जीवन में फिर आ जाओ<br />
तुम मुझे एक बार अपना कह जाओ<br />
फिर जो बोलोगे तुम हम कर जायेंगे<br />
फिर तुम बोलोगे तो हम मर जायेंगे<br />
पर ऐसी ज़िन्दगी हम न जी पायेंगे<br />
तन्हा साँसें ले‍गें हम तन्हा मर जायेंगे</font></p>
<p><font color="#000000">हल्के-हल्के आँसू टूटे हैं मेरी आँखों से<br />
अब बात नहीं बनती है तेरी यादों से<br />
इतनी दूरी क्यों है, यह मजबूरी क्यों है</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[काजल]]></title>
<link>http://mehhekk.wordpress.com/2007/12/22/%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%b2/</link>
<pubDate>Sat, 22 Dec 2007 06:19:49 +0000</pubDate>
<dc:creator>mehhekk</dc:creator>
<guid>http://mehhekk.wordpress.com/2007/12/22/%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%b2/</guid>
<description><![CDATA[काजल
दीपक की बाती पर जल कर
आग की तपिश मे]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>काजल</p>
<p>दीपक की बाती पर जल कर<br />
आग की तपिश में पीघल कर<br />
खुदको बनाया और सवारा हमने<br />
काला रंग है कह कह कर<br />
हमे मिटाया ,दर्द दिया सबने<br />
मायूस हो गये हम फिर<br />
ये हमे कैसा बनाया रबने<br />
सबने हमे ठुकराया<br />
अपने हाथ सफेद करने<br />
हमे जगह जगह फैलाया<br />
एक दिन नसीब ने बताया<br />
तुमने हमे आँखों मे बसाया<br />
एहसानमंद है तुम्हारे<br />
हमारा इतना रुतबा बढाया<br />
हम भी वादा करते है<br />
तेरी आँखों में सदा रहेंगे<br />
तेरे असुअन में हम भी बहेंगे<br />
जब तू सजेगी सवरेगी<br />
तेरी खूबसूरती को और निखारेंगे<br />
जनमानस जब तुझे निहारेंगे<br />
हम इतनी एहतियात लेंगे<br />
किसी की तुम्हे नज़र ना लगने देंगे.</p>
]]></content:encoded>
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