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	<title>काम-के-लिंक &amp;laquo; WordPress.com Tag Feed</title>
	<link>http://wordpress.com/tag/काम-के-लिंक/</link>
	<description>Feed of posts on WordPress.com tagged "काम-के-लिंक"</description>
	<pubDate>Wed, 14 May 2008 10:59:08 +0000</pubDate>

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<title><![CDATA[बातें करके रुला ना दीजिएगा...]]></title>
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<pubDate>Mon, 04 Feb 2008 14:04:17 +0000</pubDate>
<dc:creator>Rakesh</dc:creator>
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<description><![CDATA[बातें करके रुला ना दीजिएगा&#8230;
यू चुप र]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>बातें करके रुला ना दीजिएगा...<br />
यू चुप रहके सज़ा ना दीजिएगा...</p>
<p>ना दे सके ख़ुशी, तो ग़म ही सही...<br />
पर दोस्त बना के यूही भुला ना दीजिएगा...</p>
<p>खुदा ने दोस्त को दोस्त से मिलाया...<br />
दोस्तो के लिए दोस्ती का रिस्ता बनाया...</p>
<p>पर कहते है दोस्ती रहेगी उसकी क़ायम...<br />
जिसने दोस्ती को दिल से निभाया...</p>
<p>अब और मंज़िल पाने की हसरत नही...<br />
किसी की याद मे मर जाने की फ़ितरत नही...</p>
<p>आप जैसे दोस्त जबसे मिले...<br />
किसी और को दोस्त बनाने की ज़रूरत नही ***!</p>
]]></content:encoded>
</item>
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<title><![CDATA[हर पल आती रह तेरी याद]]></title>
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<pubDate>Sat, 05 Jan 2008 12:58:56 +0000</pubDate>
<dc:creator>Rakesh</dc:creator>
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<description><![CDATA[एक मुद्दत हुई दिल को सताती रही तेरी या]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p align="center"><font color="#000000"><font size="4"><span style="color:#ff99ff;">एक मुद्दत हुई दिल को सताती रही तेरी याद  </span><br />
</font><font size="4"><span style="color:#ff99ff;">आंसू बन लहू में घुल जाती रही तेरी  याद<br />
</span><br />
<span style="color:#ff99ff;">सुबह को लालिमअ बन छा  जाती रही तेरी याद</span><br />
<span style="color:#ff99ff;">धुप में साया  बन साथ चलती रहi तेरी याद </span><br />
<span style="color:#ff99ff;"></span><br />
<span style="color:#ff99ff;">दोपहर छाया बन तासीर दिलाती रही तेरी  याद</span><br />
<span style="color:#ff99ff;">शाम को हवा का झोन बन लुभाती  रही तेरी याद</span><br />
<span style="color:#ff99ff;"></span><br />
<span style="color:#ff99ff;">रात के अँधेरे में जुगनू बन चमकती रही तेरी  याद</span><br />
<span style="color:#ff99ff;">आसमान में तारों संग टीम टीम  आती रही तेरी याद</span><br />
<span style="color:#ff99ff;"></span><br />
<span style="color:#ff99ff;">चांदनी बन ज़मीं को नहलाती रही तेरी  याद</span><br />
<span style="color:#ff99ff;">रोज़ ख्वाब बन तेरी दीद कराती  रही तेरी याद</span><br />
<span style="color:#ff99ff;"></span><br />
<span style="color:#ff99ff;">गर्मी में हवा का झोंका बन आ जाती रही तेरी  याद</span><br />
<span style="color:#ff99ff;">इन्द्रधनुष के रंगों में रंग  जाती रही तेरी याद</span><br />
<span style="color:#ff99ff;"></span><br />
<span style="color:#ff99ff;">सर्दी में खिली धुप सी चमकती रही तेरी  याद</span><br />
<span style="color:#ff99ff;">पहाडों पर बर्फ बन बिछ जाती  रही तेरी याद</span><br />
<span style="color:#ff99ff;"></span><br />
<span style="color:#ff99ff;">फूलों पर तितली बन मंडराती रही तेरी  याद</span><br />
<span style="color:#ff99ff;">हवा को खुशबू बन महकाती रही  तेरी याद</span><br />
<span style="color:#ff99ff;"></span><br />
<span style="color:#ff99ff;">बेलों को सहारा बन बढाती रही तेरी  याद</span><br />
<span style="color:#ff99ff;">बागों को बहार बन सजाती रही  तेरी याद</span><br />
<span style="color:#ff99ff;"></span><br />
<span style="color:#ff99ff;">होली में गुलाल बन रंग उडाती रही तेरी  याद</span><br />
</font><font size="4"><span style="color:#ff99ff;">दिवाली में चिराज बन उजाले फैलाती रही तेरी  याद<br />
</span><br />
<span style="color:#ff99ff;">ईद में चाँद बन खुशियाँ  लुटती रही तेरी याद</span><br />
<span style="color:#ff99ff;">च्रिस्त्मस  में संता बन तोहफे बांटी रही तेरी याद</span><br />
<span style="color:#ff99ff;"></span><br />
<span style="color:#ff99ff;">थक गया तो दिल बहलाने आ जाती रही तेरी  याद</span><br />
<span style="color:#ff99ff;">चोट खाई तो सहलाने आ जाती रही  तेरी याद</span><br />
<span style="color:#ff99ff;"></span><br />
<span style="color:#ff99ff;">रूठ गया तो मनाने आ जाती रही तेरी  याद</span><br />
<span style="color:#ff99ff;">गिर गया तो उठाने आ जाती रही  तेरी याद</span><br />
<span style="color:#ff99ff;"></span><br />
<span style="color:#ff99ff;">सोने चला तो लोरी सुनाने आ जाती रही तेरी  याद</span><br />
<span style="color:#ff99ff;">रोने लगा तो हँसाने आ जाती  रही तेरी याद</span><br />
<span style="color:#ff99ff;"></span><br />
<span style="color:#ff99ff;">जीत गया तो जश्न मनाने आ जाती रही तेरी  याद</span><br />
<span style="color:#ff99ff;">हार गया तो समझाने आ जाती रही  तेरी याद</span><br />
<span style="color:#ff99ff;"></span><br />
<span style="color:#ff99ff;">महफ़िल में रौनक बन छा जाती रही तेरी  याद</span><br />
</font><font size="4"><span style="color:#ff99ff;">तन्हाई में साथ निभाने आ जाती रही तेरी  याद<br />
</span><br />
<span style="color:#ff99ff;">मेरे हर ज़र्रा -ओ -कतरे  में बसी हुई हुई तेरी याद</span><br />
<span style="color:#ff99ff;">मेरी  ग़ज़ल से रूह तक उतर रही है तेरी याद</span><br />
<span style="color:#ff99ff;"></span><br />
<span style="color:#ff99ff;">मौत के बाद भी "खाक " से न जुदा होगी तेरी  याद</span><br />
<span style="color:#ff99ff;">ख्श्बू बन हर तरफ फिजा में  महका करेगी तेरी याद</span></font></font></p>
]]></content:encoded>
</item>
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<title><![CDATA[सर, हमें हंसाओ न]]></title>
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<pubDate>Sat, 05 Jan 2008 12:48:50 +0000</pubDate>
<dc:creator>Rakesh</dc:creator>
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<description><![CDATA[यह आदर्श वाक्य ठीक भी हो सकता है  कि आदम]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="font-size:130%;color:#000000;font-family:Webdunia;"><span style="font-family:Mangal;"><font color="#ffffff">यह आदर्श वाक्य ठीक भी हो सकता है  कि आदमी को ठोंक-ठांक कर ठीक-ठाक बनाने में इसी धरती के महापुरूषों का ब़डा योगदान  रहता आया है। परंतु इस आदर्श वाक्य का एक दूसरा पहलू भी है। यह पहलू सोचनीय है और  इस प्रश्न पर आकर अटक जाता है कि क्या इसी को ‘ठीक-ठाक’ करना कहते हैं? इस सन्दर्भ  का एक नमूना प्रस्तुत है।</font></span></span></p>
<p><span style="font-size:130%;color:#000000;font-family:Webdunia;"><font color="#ffffff"><span style="font-family:Mangal;">भाई चिमनलाल ने एम.ए. की डिग्री  कमा रखी है।</span><span style="font-family:Mangal;">भगवान करे, उसकी डिग्री सलामत  रहे। इसी डिग्री के बूते वह टीचर है। उसके हिसाब से तनख्वाह अच्छी नहीं है और  इर्द-गिर्द और भी बहुत कुछ अच्छा नहीं है। मसलन, चांद का मुंह टेढ़ा है, सूरज फीका  है, धरती दोगली है, राजनीति खोखली है, आदि-आदि। विद्यार्थियों के सामने ख़डा होकर  पढ़ाना उसका काम है, इसलिए यह दुनिया उसके लिए और भी अच्छी नहीं है। परन्तु क्या  करे, तनख्वाह के लिए इस दुनिया का सामना तो करना ही प़डता है। उसका दावा है कि  विद्यार्थियों को पढ़ाना सहज नहीं है। गंभीर शिक्षण पद्धति से विद्यार्थियों को  पढ़ाना सहज नहीं है। गंभीर शिक्षण पद्धति से विद्यार्थियों के साथ जु़डना चाहते तो  वे कुछ ग्रहण नहीं कर पाऍंगे और टीचर ने नाते अपनी हालत पागल से भी बदतर होती  जाएगी।</span></font></span></p>
]]></content:encoded>
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<title><![CDATA[एक बार जीने के लिए सौ बार मरे है हम]]></title>
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<pubDate>Thu, 06 Dec 2007 11:16:48 +0000</pubDate>
<dc:creator>Rakesh</dc:creator>
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<description><![CDATA[एक बार जीने के लिए सौ बार मरे है हम
एक म]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p align="center"><font color="#ffffff">एक बार जीने के लिए सौ बार मरे है हम<br />
एक मुसकुराहट के लिए कितना सिसका यह गम<br />
यह जीवन जलता जलता भी नहीं<br />
कितना जलया इसने हर दम<br />
एक लमहा जो छुप गया आसमान तले<br />
ढूँढते फिर रहे हैं बस उमर भर से हम<br />
मेरी खामोशियाँ बन गई मेरे  गुनाह<br />
हर पल नया गुनाह करता रहा यह मन<br />
उम्मीद की यह लौ क्यों नहीं बुझती<br />
थम गयी जब यह सासों की सरगम<br />
किस तरफ़ जा रहा हूँ ,क्यों जा रहा हूँ<br />
कोइ बता दे मुझे कहाँ ले जायेंगे यह कदम<br />
अपनी मजबूरिओं से नराज़ है यह दिल<br />
मजबूरियों के लिए उठाये गए ज़िंदगी तेरे सितम<br />
आँसू में भीगा यह मन यह आँचल<br />
इक हँसी की चाह मैं अब तक आंखें हैं यह नम !!!!!!!!!!!!</font></p>
]]></content:encoded>
</item>
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<title><![CDATA[मोहब्बतें - उनकी मोहब्बत बढ़ी और दुनिया से खुशी कम होती रही]]></title>
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<pubDate>Thu, 29 Nov 2007 12:31:05 +0000</pubDate>
<dc:creator>Rakesh</dc:creator>
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<description><![CDATA[अलबामा में 53 साल पहले पैदा हुई थी, इसी म]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#ffffff">अलबामा में 53 साल पहले पैदा हुई थी, इसी माह की किसी तारीख को। उत्तरी अमेरिका के इस हिस्से में आज भी जातीय भावनाएं कायम हैं, तब तो वहां काले लोग अछूत ही माने जाते थे। वे बसों में पीछे ही बैठ सकते थे, उनके रेस्टोरेंट्स अलग थे। उसने भी सहा। सर्कस देखने गई तो बाहर कर दी गई, होटल में रूम नहीं मिला, यही नहीं, डिपार्टमेंटल स्टोर में कपड़े खरीदे तो उसे फिटिंग चेक करने के लिए ट्रायल रूम में नहीं स्टोररूम में जगह मिली (ट्रायलरूम में सिर्फ गोरे जा सकते थे)। 1963 में उसके साथ जो घटना हुई, आज तक नहीं भूली वह। कालों को निशाना बनाकर बमिंघम चर्च में हुए बम विस्फोट में उसकी दोस्त समेत चार काली लड़कियां मारी गईं। उसने भी धमाके देखे और सुने। वह कहती है, उस दृश्य और आवाज को मैं कभी न भूल पाऊंगी। लेकिन वह नागरिक अधिकारों के लिए लड़ने वाली इंसान न बन सकी। उसका पारिवारिक बैकग्राउंड कानफर्मिस्ट नेचर का था। उसने अपना ध्येय बनाया खूब मेहनत करना और गोरों से दोगुना बेहतर बनना। पिता ने मंत्र दिया कि व्यवस्था से टकराओ नहीं, मेहनत करो, आगे बढ़ो और व्यवस्था का फायदा उठाओ।<br />
उसने यही किया। तीन साल की उम्र से फ्रेंच सीखना शुरू किया। स्केटिंग उसका पसंदीदा गेम था और बैले अपनी भावनाओं को विस्तार देने का साधन। वायलिन बजाना उसे अच्छा लगता था और वह चाहती थी अच्छी वायलिनवादक बने लेकिन इससे जीवनयापन मुश्किल था सो उसने इरादा बदला। जब यूनिवसिर्टी पहुंची, कोल्ड वार में रुचि बढ़ी और फिर सोवियत संघ पर एक लेक्चर सुना तो राह ही बदल गई। उसने मिलिटरी डाक्टराइन और चेकोस्लोवाकिया पर पीएचडी की और पहुंच गई स्टैनफोर्ड यूनिवसिर्टी में पढ़ाने। वहां वह रिपब्लिकन हो गई और मौका मिला अमेरिकी राष्ट्रपति को सोवियत मामलों पर सलाह देने का।<br />
उसकी मुलाकात राष्ट्रपति के बेटे से हुई। दिन निकलते रहे। राष्ट्रपति के बेटे के सितारे बुलंद हुए और साथ ही उसके भी। उसने न शादी की और न मोहब्बत का इजहार (शायद)। हां एक बार गलती से राष्ट्रपति के बेटे को अपना हसबैंड जरूर बोल गई, जाने कैसे। लेकिन बुलंद सितारों के साथ ही शुरू हुई असफलताओं की कहानी। 9/11 से शुरू होकर यह सफर आज भी जारी है। अफगानिस्तान, इराक और अब ईरान इसी मोहब्बत की गर्माहट में झुलस रहे हैं और साथ में पूरी दुनिया।<br />
वह बताती है कि जब मैं चार साल की थी, मेरे पिता ने मेरी एक फोटो ली थी जिसमें मैं सांताक्लाज की गोद में थी और यकीन करिए फोटो में मेरे चेहरे के भाव दूरियों वाले थे क्योंकि मैं कभी किसी गोरे के इतने करीब पहले कभी नहीं गई थी। लेकिन अब उसके चेहरे पर आश्वस्ति के भाव दिखाई देते हैं। आज भी वह अच्छी वायलिन बजाती है।</font></p>
]]></content:encoded>
</item>
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<title><![CDATA[तुम्हारी इस अदा का क्या जवाब दूँ]]></title>
<link>http://webmsony.wordpress.com/2007/10/26/%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%87%e0%a4%b8-%e0%a4%85%e0%a4%a6%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%9c%e0%a4%b5/</link>
<pubDate>Fri, 26 Oct 2007 09:26:47 +0000</pubDate>
<dc:creator>Rakesh</dc:creator>
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<description><![CDATA[तुम्हारी इस अदा का क्या जवाब दूँ ,
अपने ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p align="center"><font color="#ffffff" face="Arial" size="2">तुम्हारी इस अदा का क्या जवाब दूँ ,<br />
अपने दोस्त को  क्या उपहार दूँ ,<br />
कोई अच सा फूल होता तो माली से मंगवाते ,<br />
जो ख़ुद गुलाब है  उनको क्या गुलाब दूँ !</font></p>
]]></content:encoded>
</item>

</channel>
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