कुहरा जब घना होता है तो रोशनियां भी रंग बदल लेती हैं. कुहरे के टिड्डी दल ने धूप के खेतों को लगभग साफ कर दिया है और धूप के बचे खुचे पौधे ओस से गीले कपड़ों को सुखाने डरते-डरते आसमान की बालकनी में आते ह… more →
कांकड़wrote 1 year ago: कुहरा जब घना होता है तो रोशनियां भी रंग बदल लेती हैं. कुहरे के टिड्डी दल ने धूप के खेतों को लगभग सा … more →
wrote 1 year ago: सावनी हवाओं से खिलते-खूबसूरत होते मौसम में तुम्हारा इस तरह दबे पांव चले जाना जैसे रुकमा चली गईं मां … more →
wrote 2 years ago: वक्त का एक लम्हा संसद मार्ग पर संसदीय सौंध के सामने खड़ा नीम की पत्तियां चबा रहा था. जेठ का महीने … more →
wrote 2 years ago: …………………………………… … more →