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	<title>ख़त &amp;laquo; WordPress.com Tag Feed</title>
	<link>http://wordpress.com/tag/ख़त/</link>
	<description>Feed of posts on WordPress.com tagged "ख़त"</description>
	<pubDate>Tue, 13 May 2008 04:38:13 +0000</pubDate>

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	<language>en</language>

<item>
<title><![CDATA[उम्मीद है हम तुम मिलेंगे]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=953</link>
<pubDate>Sun, 30 Mar 2008 14:10:22 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=953</guid>
<description><![CDATA[उम्मीद है हम तुम मिलेंगे
उम्मीद है नये]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">उम्मीद है हम तुम मिलेंगे<br />
उम्मीद है नये दीप जलेंगे<br />
जब बसंत की धूप महकेगी<br />
उम्मीद है दोनों दिल खिलेंगे</font></p>
<p><font color="#000000">उम्मीद है ख़ुशी घर आयेगी<br />
उम्मीद है तेरा ख़त लायेगी<br />
जब कली से भँवरा मिलेगा<br />
उम्मीद है ख़ुशबू बुलायेगी</font></p>
<p><font color="#000000">उम्मीद है बादल बरसेंगे<br />
उम्मीद है दो दिल तरसेंगे<br />
जब रिमझिम से मन भीगेगा<br />
उम्मीद है बदन महकेंगे</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[तेरे खुशबु मे बसे ख़त मैं जलाता कैसे]]></title>
<link>http://jagjitsingh.wordpress.com/2008/03/21/tere-khushbu-me-base-khat/</link>
<pubDate>Fri, 21 Mar 2008 08:04:14 +0000</pubDate>
<dc:creator>Amarjeet Singh</dc:creator>
<guid>http://jagjitsingh.wordpress.com/2008/03/21/tere-khushbu-me-base-khat/</guid>
<description><![CDATA[तेरे खुशबु मे बसे ख़त मैं जलाता कैसे,
ज]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>तेरे खुशबु मे बसे ख़त मैं जलाता कैसे,<br />
जिनको दुनिया की निगाहों से छुपाये रखा,<br />
जिनको इक उम्र कलेजे से लगाए रखा,</p>
<p>जिनका हर लफ्ज़ मुझे याद था पानी की तरह,<br />
याद थे मुझको जो पैगाम-ऐ-जुबानी की तरह,<br />
मुझ को प्यारे थे जो अनमोल निशानी की तरह,</p>
<p>तूने दुनिया की निगाहों से जो बचाकर लिखे,<br />
सालाहा-साल मेरे नाम बराबर लिखे,<br />
कभी दिन में तो कभी रात में उठकर लिखे,</p>
<p>तेरे खुशबु मे बसे ख़त मैं जलाता कैसे,<br />
प्यार मे डूबे हुए ख़त मैं जलाता कैसे,<br />
तेरे हाथों के लिखे ख़त मैं जलाता कैसे,</p>
<p>तेरे ख़त आज मैं गंगा में बहा आया हूँ,<br />
आग बहते हुए पानी में लगा आया हूँ,</p>
<p>Singer: Jagjit Singh</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[तुम न समझोगे]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=909</link>
<pubDate>Thu, 13 Mar 2008 06:10:04 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=909</guid>
<description><![CDATA[बिन तुम्हारे मैं क्या हूँ तुम न समझोगे]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">बिन तुम्हारे मैं क्या हूँ तुम न समझोगे<br />
आप तन्हाई की सदा हूँ तुम न समझोगे</font></p>
<p><font color="#000000">तुम्हारे ग़मे-इश्क़ में जो चाँद पिरोता रहा<br />
मैं साँस का वो टुकड़ा हूँ तुम न समझोगे</font></p>
<p><font color="#000000">तुम्हारे दिल में जो हर लम्हा बहता है<br />
मैं लहू का वही क़तरा हूँ तुम न समझोगे</font></p>
<p><font color="#000000">तुमने जिसे बेकार समझकर फाड़ दिया<br />
मैं उसी ख़त का टुकड़ा हूँ तुम न समझोगे</font></p>
<p><font color="#000000">जब निगाहे-'नज़र' बेक़रार हो चली है<br />
मैं किस मोड़ पे आ गया हूँ तुम न समझोगे</font></p>
<p><font color="#000000">पुराना एक ख़तो-लिफ़ाफ़ा जलाकार आया<br />
'विनय' अब तुम्हारा हूँ तुम न समझोगे</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[वह शाम फिर आयी]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=883</link>
<pubDate>Sat, 08 Mar 2008 09:04:42 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=883</guid>
<description><![CDATA[वह शाम फिर आयी
वह गुलाबी चाँद फिर आया
व]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">वह शाम फिर आयी<br />
वह गुलाबी चाँद फिर आया<br />
वह फिर ढहीं बारिश की दीवारें<br />
इल्ज़ाम मुझपर आया</font></p>
<p><font color="#000000">कोई गुमाँ नहीं हुआ<br />
कोई ज़ख़्मे-निहाँ नहीं पिया<br />
सब बयाँ हैं<br />
किसलिए दर्द असर पाया</font></p>
<p><font color="#000000">वह शाम फिर आयी<br />
वह गुलाबी चाँद फिर आया</font></p>
<p><font color="#000000">मुझको यह नुमाया है<br />
ख़त किसलिए जलाया है<br />
शबो-रोज़ के पुरज़े क्यों किये<br />
क्यों यह ज़हर खाया</font></p>
<p><font color="#000000">वह शाम फिर आयी<br />
वह गुलाबी चाँद फिर आया</font></p>
<p><font color="#000000">इक उम्र दराज़ कर दो<br />
आँखों में मिराज़ भर दो<br />
यों भी जी लूँ कुछ देर तलक<br />
क्या दीवारो-दर, क्या साया</font></p>
<p><font color="#000000">वह फिर ढहीं बारिश की दीवारें<br />
इल्ज़ाम मुझपर आया</font></p>
<p><font color="#000000">दौरे-ग़म, यह तन्हाई रग-रग में<br />
यह ज़ख़्म के निशाँ<br />
और क्या मेरी...<br />
दुआ के हिस्से असर पाया</font></p>
<p><font color="#000000">वह फिर ढहीं बारिश की दीवारें<br />
इल्ज़ाम मुझपर आया</font></p>
<p><font color="#000000">जब विसाल लम्हा था<br />
तो फ़िराक़ उम्र क्यों है<br />
क्या कुसूर उसके सर<br />
क्यों जिये उम्रे-नज़र ज़ाया</font></p>
<p><font color="#000000">वह शाम फिर आयी<br />
वह गुलाबी चाँद फिर आया<br />
वह फिर ढहीं बारिश की दीवारें<br />
इल्ज़ाम मुझपर आया</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[याद आती हैं फिर वह तारीख़ें ]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=796</link>
<pubDate>Sun, 17 Feb 2008 13:33:25 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=796</guid>
<description><![CDATA[याद आती हैं फिर वह तारीख़ें
मेरा करना ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">याद आती हैं फिर वह तारीख़ें<br />
मेरा करना तुम्हारी तारीफ़ें<br />
लिखना पुराने ख़तों को दोबारा<br />
पूछना क्या नाम है तुम्हारा</font></p>
<p><font color="#000000">कुछ न मिले ऐसी शाम के तले<br />
इतना मान ले इतना जान ले</font></p>
<p><font color="#000000">वह साँसों का साँसों तक जाना<br />
क़रीब आकर फिर मुड़ जाना<br />
लिखना पुराने ख़तों को दोबारा<br />
पूछना क्या नाम है तुम्हारा</font></p>
<p><font color="#000000">तेरा मुझे देखकर शरमाना<br />
यारों से दिल की बात छिपाना<br />
है प्यार तो क्यों न कह दो<br />
एक प्रेम-पत्र ही लिखकर दे दो</font></p>
<p><font color="#000000">कुछ न मिले ऐसी शाम के तले<br />
इतना मान ले इतना जान ले</font></p>
<p><font color="#000000">याद आती हैं फिर वह तारीख़ें<br />
मेरा करना तुम्हारी तारीफ़ें<br />
लिखना पुराने ख़तों को दोबारा<br />
पूछना क्या नाम है तुम्हारा</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[यह कोरे काग़ज़]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=791</link>
<pubDate>Sat, 16 Feb 2008 17:43:21 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=791</guid>
<description><![CDATA[यह कोरे काग़ज़ करते हैं दिल की बात
जैसे य]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">यह कोरे काग़ज़ करते हैं दिल की बात<br />
जैसे यह कोरे हैं वैसे मेरे दिन-रात<br />
अपनी मुलाक़ात कब मुकम्मल हुई थी<br />
दर्द मेरे दिल में बढ़ते रहे इफ़रात...</font></p>
<p><font color="#000000">इन अफ़सानों में अपना एक किरदार है<br />
ज़ुबाँ से निकला हर लफ़्ज़ किरायेदार है<br />
गुज़रती तारीख़ों में तेरी राह तकते हैं<br />
यह फ़ैसला कैसे हो किस पे एतबार है</font></p>
<p><font color="#000000">यह कोरे काग़ज़ करते हैं दिल की बात<br />
जैसे यह कोरे हैं वैसे मेरे दिन-रात...</font></p>
<p><font color="#000000">बैठते हैं जब अकेले यूँ तन्हाई में हम<br />
एक ख़त लिखने की सोचते हैं तुम्हें हम<br />
तभी एक आहट-सी कानों में जाती है<br />
और फिर खिड़की से देखते हैं तुम्हें हम</font></p>
<p><font color="#000000">अपनी मुलाक़ात कब मुकम्मल हुई  थी<br />
दर्द मेरे दिल में बढ़ते रहे इफ़रात...</font></p>
<p>संवाद:<br />
<font color="#000000">हर कोरा काग़ज़ यूँ फड़फड़ाता है<br />
जैसे आवाज़ देकर हमें बुलाता है<br />
एक तकलीफ़ दिल में उठती है<br />
जब आपका ख़्याल हमें आता है</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[इल्तिहाबे-दर्द से जलता है कलेजा]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/11/30/%e0%a4%87%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%ac%e0%a5%87-%e0%a4%a6%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a6-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%9c%e0%a4%b2%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88/</link>
<pubDate>Fri, 30 Nov 2007 23:43:59 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
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<description><![CDATA[इल्तिहाबे-दर्द से जलता है कलेजा
कभी ते]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">इल्तिहाबे-दर्द से जलता है कलेजा<br />
कभी तेरी यादों को बिखराया कभी सहेजा</font></p>
<p><font color="#000000">बयाँ दास्ताने-सोज़े-फ़ुगाँ किससे करूँ<br />
सभी मेरे लफ़्ज़ देखते हैं न कि लहजा</font></p>
<p><font color="#000000">सुकूनो-क़रारो-सबात से क्या मुझे<br />
तू इस दिल के सौदे में मेरा सब कुछ ले जा</font></p>
<p><font color="#000000">सदाए-राहे-मुहब्बत बुलाती है मुझको<br />
दिमाग़ कुछ सोच के कहता है ठहर जा</font></p>
<p><font color="#000000">गर्मिए-हौसले-जुनूँ का असर है यह<br />
दिल करता है मुझपे नवाज़िशहाए-बेजा</font></p>
<p><font color="#000000">अब तक न मेरे सलाम का कोई जवाब आया<br />
तूने मुझको कोई ख़त भेजा कि न भेजा</font></p>
<p><font color="#000000">ख़्याले-सुम्बुल से बीमार की बेक़रारी है<br />
ऐ तबीब 'नज़र' को इसका इलाज दे जा</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र'<br />
लेखन वर्ष: २००५</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[पिछला कुछ भी बदला नहीं जा सकता]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/09/15/%e0%a4%aa%e0%a4%bf%e0%a4%9b%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%81%e0%a4%9b-%e0%a4%ad%e0%a5%80-%e0%a4%ac%e0%a4%a6%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%a8%e0%a4%b9%e0%a5%80%e0%a4%82-%e0%a4%9c%e0%a4%be-%e0%a4%b8/</link>
<pubDate>Sat, 15 Sep 2007 18:31:28 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/09/15/%e0%a4%aa%e0%a4%bf%e0%a4%9b%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%81%e0%a4%9b-%e0%a4%ad%e0%a5%80-%e0%a4%ac%e0%a4%a6%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%a8%e0%a4%b9%e0%a5%80%e0%a4%82-%e0%a4%9c%e0%a4%be-%e0%a4%b8/</guid>
<description><![CDATA[बीते दिनों की गलियों में जब पाँव पड़ते]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">बीते दिनों की गलियों में जब पाँव पड़ते हैं तो<br />
अपने आपको तुझमें ढूँढ़ने लगता हूँ मैं<br />
दिल के ज़ख़्म बर्फ़ की तरह जमने लगते हैं<br />
और उदासियों की नज़्म उन्हें गरमाती रहती है...</font></p>
<p><font color="#000000">मैं जानता हूँ पिछला कुछ भी बदला नहीं जा सकता<br />
फिर भी 'काश!' की परछाईं मेरा पीछा करती है<br />
काश यूँ न होता, काश वैसा न किया होता, काश!<br />
बस यही आवाज़ें मन में गूँजती रहती हैं...</font></p>
<p><font color="#000000">सन्नाटों में झींगुर जाने किसको सदा देते हैं<br />
चाँदनी ज़मीन पर जाने क्या तलाश करती है<br />
मैं बंद कमरे में बैठा खिड़की से बाहर देखता हूँ<br />
तेरी यादें गली में टहलती नज़र आती हैं मुझे...</font></p>
<p><font color="#000000">मेरा उसी राह से आना-जाना है जहाँ तुम्हें देखा था<br />
आज भी नम आँखों में माज़ी की हरी काई जमी है<br />
वहम ही सही मगर दो पल को तेरा साथ मिल जाता है<br />
और तन्हाई के पन्नों पर तेरी तस्वीरें बन जाती हैं...</font></p>
<p><font color="#000000">मेरी ज़िन्दगी में जितने भी सफ़्हे तुमने लिखे थे<br />
उनके हर्फ़ आज भी मैं तन्हाई के साथ चुनता हूँ<br />
कच्ची स्याही से लिखे वह लम्हों में बुने हर्फ़,<br />
लाख कोशिशों के बाद भी मैं भूल नहीं पाया हूँ...</font></p>
<p><font color="#000000">मेरा नाम भूल जाओगी, मेरे ख़त खो जायेंगे तुमसे<br />
शक़्ल तक न याद आयेगी, न मेरी कोई बात<br />
वक़्त की गर्द में तुम मेरे लिए आँखें मूँद लोगी<br />
शायद कभी फ़लाँ कहकर भी न याद करो मुझको...</font></p>
<p><font color="#000000">मुझको भूल जाने वाले लोगों को मैं भूल जाता हूँ<br />
भीड़ में उनके चेहरे तक नहीं याद रखता मैं<br />
तेरा चेहरा ही जानता था, नाम क्या होगा? परवाह न थी<br />
तेरा नाम भूल जाऊँ शायद पर तुझे कैसे भूलूँगा...</font></p>
<p><font color="#000000">मैं हसीन नहीं मगर वह तो फ़िल-हक़ीक़त हसीन होगा<br />
जिसे तुम चाहती हो, जिसके लिए साँस लेती हो तुम<br />
गो मैं यकता हूँ, ज़माने में मुझसा कोई दूसरा नहीं<br />
फिर क्यों लगता है मुझे वह मुझसे बेहतर होगा...</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००५</p>
]]></content:encoded>
</item>

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