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	<title>ख़ुशी &amp;laquo; WordPress.com Tag Feed</title>
	<link>http://wordpress.com/tag/ख़ुशी/</link>
	<description>Feed of posts on WordPress.com tagged "ख़ुशी"</description>
	<pubDate>Mon, 07 Jul 2008 10:21:02 +0000</pubDate>

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	<language>en</language>

<item>
<title><![CDATA[ख़ुशी]]></title>
<link>http://apurn.wordpress.com/?p=126</link>
<pubDate>Wed, 09 Apr 2008 15:17:20 +0000</pubDate>
<dc:creator>Shubhashish Pandey</dc:creator>
<guid>http://apurn.wordpress.com/?p=126</guid>
<description><![CDATA[ 
   
संसार के दुःख रूपी विष से हर किसी क]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p> </p>
<p>   <a href="http://apurn.files.wordpress.com/2008/04/baby_face_.jpg"><img class="alignnone size-medium wp-image-137" src="http://apurn.wordpress.com/files/2008/04/baby_face_.jpg" alt="" width="120" height="127" /></a></p>
<p>संसार के दुःख रूपी विष से हर किसी को है आघात यहाँ,<br />
इस विषरूपी दुःख दैत्य की क्या कोई नहीं है काट यहाँ ?</p>
<p>क्या कुछ भी नहीं है ऐसा जो हर किसी को खुशियाँ दे पाए ?<br />
एक पल के लिए तो कम से कम हर बात भुला के हँस पाए,</p>
<p>आनंद निहित हो उसमे इतना, स्वयं अनंदास्वरुपा हो , <br />
कोई न वंचित हो जिससे वो सुख-सागर कुछ ऐसा हो,</p>
<p>इन्ही ख्यालो में खोया कुछ उलझा अपनी उलझन में,<br />
हो के मानव चरित्र के अधीन त्रुटी ढूढ़ रहा था भगवन में,</p>
<p>ये सोच ही रहा था की तभी नन्हीं ख़ुशी वहाँ आई,<br />
होठो पर अपने हसीं लिए खिल-खिला कर मुस्काई,</p>
<p>जाने क्या जादू था उसकी हर प्यारी मुस्कान में,<br />
एक बार जो हँस दे फिर से वार दूं अपने प्राण मैं,</p>
<p>उसके होठो की एक हसीं जीवन में उमंग भर देतीं,<br />
नन्हें दातों की श्वेत पंक्तियाँ मन को प्रकाशित कर देतीं,</p>
<p>ले के उसे आलिंगन में माथे पर दिया स्नेह चुम्बन,<br />
खुशिया इतनी मिल गयी मानो नीचे हो गया नील-गगन,</p>
<p>ईश्वर के इस सुख रूपी रस से तृप्त हो गया मेरा मन,<br />
बन कर क्षमाप्रार्थी स्वयं ईश्वर को किया शतबार नमन </p>
<p>.............................. Shubhashish(2004)</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[जब कभी मैंने साँस ली]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=962</link>
<pubDate>Wed, 09 Apr 2008 10:31:54 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=962</guid>
<description><![CDATA[जब कभी मैंने साँस ली
साथ तेरे नाम की फा]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">जब कभी मैंने साँस ली<br />
साथ तेरे नाम की फाँस ली</span></p>
<p><span style="color:#000000;">पहरों नाराज़ थे ख़ुद से<br />
आज गुज़रे हैं हद से<br />
बेताब हैं तेरे प्यार में<br />
फिर जायें कैसे ज़िद से</span></p>
<p><span style="color:#000000;">जब कभी मैंने साँस ली...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">शहद जैसी शाम घुल गयी<br />
हमको ज़िन्दगी मिल गयी<br />
मोगरे के फूल जब खिले<br />
उनमें तेरी हँसी मिल गयी</span></p>
<p><span style="color:#000000;">जब कभी मैंने साँस ली...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">आँखों में तेरे ख़ाबों की रिदा है<br />
धड़कनों की तुझको सदा है<br />
छम-छम छनकेगी ख़ुशी<br />
महकी-महकी तेरे अदा है</span></p>
<p><span style="color:#000000;">जब कभी मैंने साँस ली...</span></p>
<p>मोगरा: Jasmine Sambac Florapleno, रिदा: coversheet</p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[ज़िन्दगी ढूँढ़ते-ढूँढ़ते मैं तुम तक आ गया]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=954</link>
<pubDate>Mon, 31 Mar 2008 11:45:52 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=954</guid>
<description><![CDATA[ज़िन्दगी ढूँढ़ते-ढूँढ़ते मैं तुम तक आ ग]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">ज़िन्दगी ढूँढ़ते-ढूँढ़ते मैं तुम तक आ गया<br />
सरे-राह मैं अपनी मंज़िल पा गया<br />
चराग़ों का नूर हो, चश्मे-बद्दूर हो<br />
तुम्हें देखकर दिल अँधेरों से दूर आ गया</font></p>
<p><font color="#000000">ख़ुशियों के दीप जल उठे, ग़म सारे बुझ गये<br />
पतझड़ उतरा, गुल शाख़-शाख़ खिल गये<br />
इक-इक धड़कन में नाम तुम्हारा है<br />
तुम्हारी मोहब्बत का जादू मुझपे छा गया</font></p>
<p><font color="#000000">ख़ुशबू-ख़ुशबू मैंने तुमको पाया सनम<br />
मोहब्बत में तेरी ख़ुद को मिटाया सनम<br />
तेरी पहली नज़र से क़त्ल हुआ था मैं<br />
लहू के हर क़तरे में तेरा प्यार समा गया</font></p>
<p><font color="#000000">राज़ दिल के सभी आँखों से बयाँ कर दो<br />
राहे-मुहब्बत मेरी तुम आसाँ कर दो<br />
नहीं कोई अरमाँ तेरी चाहत के सिवा<br />
बस तेरा ही चेहरा दिलो-दिमाग़ पे छा गया</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[कोई तो तुम्हें पाने की राह मिले]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=951</link>
<pubDate>Fri, 28 Mar 2008 17:47:23 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=951</guid>
<description><![CDATA[कोई तो तुम्हें पाने की राह मिले
कभी ते]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">कोई तो तुम्हें पाने की राह मिले<br />
कभी तेरे आगोश में पनाह मिले<br />
मैं शज़रे-धूप की छाँव में बैठा हूँ<br />
कभी तो इनायते-निगाह मिले</font></p>
<p><font color="#000000">तुम हाथ तो बढ़ा दो मेरे मसीहा<br />
ज़ख़्मों पे रख दो मरहम का फीहा<br />
बेबसी में मेरा दम घुटने लगा है<br />
फिर से सौंधी हुई सुबह मिले</font></p>
<p><font color="#000000">रुख़े-ख़ुशी मेरी तरफ़ मोड़ दो<br />
मेरे दर्द का हर तागा तोड़ दो<br />
एक ही ख़ाहिश है मेरी बरसों से<br />
तेरे दिल में मुझे जगह मिले</font></p>
<p><font color="#000000">मैं अपनी कोशिशों में रहूँ क़ाबिल<br />
इस दरिया को मिले तेरा साहिल<br />
तुम्हीं से ज़िन्दगी को मानी मिला है<br />
काश कि तेरी-मेरी हर राह मिले</font></p>
<p><font color="#000000">मुश्किलें सब यह आसाँ हो जायें<br />
जो हम दो जिस्म एक जाँ हो जायें<br />
लम्हों में सदियाँ तय कर चुका हूँ<br />
तेरा-मेरा दिल किसी तरह मिले</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[यह रात पहाड़ जैसी है कैसे काटे कोई]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=914</link>
<pubDate>Fri, 14 Mar 2008 11:03:00 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=914</guid>
<description><![CDATA[यह रात पहाड़ जैसी है कैसे काटे कोई
यह फ़]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">यह रात पहाड़ जैसी है कैसे काटे कोई<br />
यह फ़ासले मीलों-से कैसे तय करे कोई<br />
दो पल में बिछड़ जाना ख़ाब जैसा है<br />
इश्क़ आग का दरया है कैसे बुझाये कोई</font></p>
<p><font color="#000000">इस टूटे हुए दिल में वही दर्द पुराने हैं<br />
आँखों में सिमटे हुए गुज़रे ज़माने हैं<br />
तेरी यादों को सीने से लगाके अपना बनाके<br />
यह दूरी दिल से दिल की कैसे मिटाये कोई</font></p>
<p><font color="#000000">यह वीराना तेरे बिना आबाद कैसे होगा<br />
दिल को भी ख़ुशियों का एहसास कैसे होगा<br />
पानी होके लहू आँखों से बहने लगा है<br />
बिगड़ी क़िस्मत अपनी कैसे बनाये कोई</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००२</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[आसमाँ को आज उसका हक़ पहुँचा]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=905</link>
<pubDate>Thu, 13 Mar 2008 05:04:37 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=905</guid>
<description><![CDATA[आसमाँ को आज उसका हक़ पहुँचा
यह तीर जो मे]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">आसमाँ को आज उसका हक़ पहुँचा<br />
यह तीर जो मेरे दिल तक पहुँचा</font></p>
<p><font color="#000000">ज़ख़्म देकर जो उसका जी न भरा<br />
दिल उसका मेरे दिल तक पहुँचा</font></p>
<p><font color="#000000">ख़ुशी की प्यास बढ़ती गयी जब<br />
मैं भी दर्द के हासिल तक पहुँचा</font></p>
<p><font color="#000000">धुँआ-धुँआ है आँख मेरी अब रोज़<br />
कि मैं अपने ही साहिल तक पहुँचा</font></p>
<p>हक़= truth, righteousness</p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[प्यार से मुझे प्यार चाहिए]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=863</link>
<pubDate>Fri, 29 Feb 2008 14:22:27 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=863</guid>
<description><![CDATA[प्यार से मुझको प्यार चाहिए
गुलाबी लबो]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">प्यार से मुझको प्यार चाहिए<br />
गुलाबी लबों से इज़हार चाहिए<br />
उसके हसीं चेहरे पे हँसी चाहिए<br />
उसके लिए हर ख़ुशी चाहिए</font></p>
<p><font color="#000000">उसने मुझको दीवाना बनाया है<br />
मेरी आँखों को आशिक़ाना बनाया है<br />
अब हर शै में वही दिखती है<br />
आँखों में उसका ख़ाब चाहिए<br />
मुझको मेरा माहताब चाहिए</font></p>
<p><font color="#000000">प्यार से मुझको प्यार चाहिए<br />
गुलाबी लबों से इज़हार चाहिए</font></p>
<p><font color="#000000">मेरी धड़कनों में वह धड़कती है<br />
उसके बिना सीने में जान तड़पती है<br />
मुझको उसे अपना बनाना है<br />
मुझको वही एक यार चाहिए<br />
दिल में उसका ख़ुमार चाहिए</font></p>
<p><font color="#000000">उसके हसीं चेहरे पे हँसी चाहिए<br />
उसके लिए हर ख़ुशी चाहिए</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति 'नज़र'<br />
लेखन वर्ष: १८ मई २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[तू एक बार देख ले पीछे मुड़के]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=808</link>
<pubDate>Mon, 18 Feb 2008 17:49:23 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=808</guid>
<description><![CDATA[तू एक बार देख ले पीछे मुड़के
हम हैं वही]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">तू एक बार देख ले पीछे मुड़के<br />
हम हैं वहीं जहाँ थे कभी अकेले<br />
ऐसा यह क्या हो गया अन्जाने<br />
दिल मेरा क्यों टूट गया रब जाने</font></p>
<p><font color="#000000">तुम गये तन्हा हो गयी ज़िन्दगी<br />
तुम गये दिल से गयी हर ख़ुशी<br />
हर लम्हा तू मुझे याद आ रही है<br />
याद आ के मुझे तड़पा रही है</font></p>
<p><font color="#000000">तू एक बार देख ले पीछे मुड़के<br />
हम हैं वहीं जहाँ थे कभी अकेले</font></p>
<p><font color="#000000">यारा, तेरे चाहने वाले हम हैं<br />
मेरे दामन में कितने ग़म हैं<br />
कैसे रहते हैं हम यहाँ ज़िन्दा<br />
जैसे साहिल पे मिट्टी का घरौंदा</font></p>
<p><font color="#000000">तू एक बार देख ले पीछे मुड़के<br />
हम हैं वहीं जहाँ थे कभी अकेले<br />
तू आ कभी देख ले मेरी बेख़ुदी<br />
तू आ कभी लौटा दे मेरी ज़िन्दगी</font></p>
<p><font color="#000000">यारा तू ज़िन्दगी, तू है ज़िन्दगी...</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[पहला-पहला नशा]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=784</link>
<pubDate>Fri, 15 Feb 2008 13:55:15 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=784</guid>
<description><![CDATA[जादू जैसा छाया पहला-पहला नशा
जी में आय]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">जादू जैसा छाया पहला-पहला नशा<br />
जी में आये पंख खोल उड़ जाऊँ मैं<br />
आस्माँ से आगे निकल जाऊँ मैं</font></p>
<p><font color="#000000">मस्ती दिल पर छायी अनजानी-सी<br />
उड़ती फिरे है जैसे फूलों पर तितली<br />
दिल में जाने कैसा तूफ़ान उठा है<br />
यूँ लगता है हर पल मुझसे रूठा है</font></p>
<p><font color="#000000">तेरा ग़म पाया ख़ुशी मुझको मिली<br />
लगता है खिल रही दिल की कली<br />
जादू जैसा छाया पहला-पहला नशा</font></p>
<p><font color="#000000">तेरे ख़ाब आते रहे मुझको रातभर<br />
मैं कहाँ जाऊँगा दूर तुमसे बिछड़कर<br />
अफ़साना बन चुका खो गया दिल<br />
इल्तिजा सुन ले मुझसे आकर मिल</font></p>
<p><font color="#000000">यह जादू प्यार है मैंने अब जाना<br />
जिसको ढूँढ़ रहा था वह मुझे मिला<br />
जादू जैसा छाया पहला-पहला नशा</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[तेरा चेहरा मेरे प्यार की तस्वीर है]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=743</link>
<pubDate>Mon, 11 Feb 2008 12:22:31 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=743</guid>
<description><![CDATA[तेरा चेहरा मेरे प्यार की तस्वीर है
तू ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">तेरा चेहरा मेरे प्यार की तस्वीर है<br />
तू मोहब्बत है मेरी<br />
या फिर साँसों की ज़ंजीर है</font></p>
<p><font color="#000000">जब तुझे देखा सनम मुझे ऐसा लगा<br />
जैसे मिली हर ख़ुशी<br />
मैंने पायी हर ग़म की दवा</font></p>
<p><font color="#000000">तेरा चेहरा मेरे प्यार की तस्वीर है<br />
तू मोहब्बत है मेरी<br />
या फिर साँसों की ज़ंजीर है</font></p>
<p><font color="#000000">वक़्त रुकता नहीं चलता नहीं<br />
यह नज़र क्या तुमसे मिली<br />
तब से तेरा दीवाना हुआ मैं<br />
सच है ख़ुद से बेग़ाना हुआ मैं<br />
तू चाहे न चाहे मुझको<br />
मैंने तुझे ही चाहा है...</font></p>
<p><font color="#000000">तेरा चेहरा मेरे प्यार की तस्वीर है<br />
तू मोहब्बत है मेरी<br />
या फिर साँसों की ज़ंजीर है</font></p>
<p><font color="#000000">तेरी ही चाहत है रग-रग में<br />
तेरा ही प्यार है नस-नस में<br />
तू चाहे तो मैं जाँ लुटा दूँ<br />
तू चाहे तो ख़ुद को मिटा दूँ<br />
यही है मेरी तमन्ना<br />
तुझको अपना बना लूँ...</font></p>
<p><font color="#000000">तेरा चेहरा मेरे प्यार की तस्वीर है<br />
तू मोहब्बत है मेरी<br />
या फिर साँसों की ज़ंजीर है</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[खोया-खोया फिरता हूँ]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=733</link>
<pubDate>Sat, 09 Feb 2008 10:26:30 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=733</guid>
<description><![CDATA[खोया-खोया फिरता हूँ
तेरे बिना ज़िन्दगी
]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">खोया-खोया फिरता हूँ<br />
तेरे बिना ज़िन्दगी<br />
तू जो मिल जाये मुझे<br />
सँवर जाये ज़िन्दगी</font></p>
<p><font color="#000000">तू नहीं तो कुछ नहीं<br />
कुछ भी नहीं<br />
क़सम है तुझे मेरी<br />
अब आ भी जा</font></p>
<p><font color="#000000">तू गयी इतनी दूर<br />
मैं रहा तुझको ढूँढ़<br />
प्यार का है असर<br />
ओ मेरी जाने-जिगर</font></p>
<p><font color="#000000">बस मेरी है तू<br />
प्यार है इक इम्तिहाँ<br />
खो गयी है तू<br />
जान हो गयी इन्तिहाँ</font></p>
<p><font color="#000000">खोया-खोया फिरता हूँ<br />
तेरे बिना ज़िन्दगी</font></p>
<p><font color="#000000">तू कहाँ है बता<br />
ओ मेरी दिलरुबा<br />
तेरे बिना रूठ गयी<br />
मुझसे हर ख़ुशी</font></p>
<p><font color="#000000">ओ चाँदनी मेरी<br />
तुझसे ही मेरी ख़ुशी<br />
अब आ भी जा<br />
ओ मेरे हमनशीं</font></p>
<p><font color="#000000">खोया-खोया फिरता हूँ<br />
तेरे बिना ज़िन्दगी<br />
तू जो मिल जाये मुझे<br />
सँवर जाये ज़िन्दगी</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[ख़ामोश सदाओं से कोई बुलाये मुझको]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=729</link>
<pubDate>Sat, 09 Feb 2008 07:46:35 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=729</guid>
<description><![CDATA[ख़ामोश सदाओं से कोई बुलाये मुझको
बड़े ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">ख़ामोश सदाओं से कोई बुलाये मुझको<br />
बड़े दिन हुए कोई रुलाये मुझको</font></p>
<p><font color="#000000">अपना अब कहूँ किसे कोई नहीं मेरा<br />
ख़ुशी न सही दर्द ही अपनाये मुझको</font></p>
<p><font color="#000000">मेरा वुजूद कुछ नहीं है यार के बिना<br />
उससे मसीहा कोई मिलाये मुझको</font></p>
<p><font color="#000000">जवानी में है दिल को बचपन-सी ज़िद<br />
यह बात दोस्त कोई समझाये मुझको</font></p>
<p><font color="#000000">मैंने कर ली है शराबो-साक़ी से तौबा<br />
अब निगाहों से कोई पिलाये मुझको</font></p>
<p><font color="#000000">वह रुसवा हुआ ऐसा कि फिर लौटा नहीं<br />
इसका सबब कोई समझाये मुझको</font></p>
<p><font color="#000000">उठ रहा है तूफ़ान बेहिस होकर<br />
क्यों न तमन्ना कोई सताये मुझको</font></p>
<p><font color="#000000">कहा तो था और कैसे कहूँ कि प्यार है<br />
क़रीब वह कैसे आये कोई बताये मुझको</font></p>
<p><font color="#000000">बारहा वह खींचता है अपनी जानिब<br />
इस कशिश से कोई बचाये मुझको</font></p>
<p><font color="#000000">मुझे उसका ग़म उम्रभर रहेगा<br />
दूसरे दर्द भी कोई पिलाये मुझको</font></p>
<p><font color="#000000">वह कहता है हर हर्फ़ का अक्स हो<br />
क्या ज़रूरत है कोई समझाये मुझको</font></p>
<p><font color="#000000">वह ख़ुद कभी कुछ कहता नहीं है<br />
ख़ुदा की मर्ज़ी कोई सुनाये मुझको</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००६-२००७</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[चंद अशआर और...]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/12/16/%e0%a4%9a%e0%a4%82%e0%a4%a6-%e0%a4%85%e0%a4%b6%e0%a4%86%e0%a4%b0-%e0%a4%94%e0%a4%b0/</link>
<pubDate>Sun, 16 Dec 2007 23:47:55 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
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<description><![CDATA[मुझे तुमसे मिलके मुकम्मिल होने का वक़्]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">मुझे तुमसे मिलके मुकम्मिल होने का वक़्त है<br />
एक सूखा हुआ दरया हूँ जिसको घटा की प्यास है<br />
--x--<br />
मेरे दामन में खु़शियाँ समेट के रख दे वह<br />
मैं उसे अपना चारागर इब्ने-मरियम कहूँ<br />
--x--<br />
वक़्ते-मुराद हासिल हो तमन्ना खा़ली ना जाये<br />
मैं हूँ अपने बोझ तले असरे-दुआ खा़ली ना जाये<br />
--x--<br />
अभी हुआ क्या यह तो इब्तदा है<br />
इन्तहाँ के मज़े आइन्दा लूटिएगा<br />
--x--<br />
जला दूँ शमाओ-इश्क़ दिले-ख़ाराबाँ में<br />
कि वह बदनाम होती है तो होवे<br />
--x--<br />
तूने कुछ ऐसा किया हो मैं हो जाऊँ शर्मिन्दा<br />
मेरे हिसाब में ऐसी शर्मिन्दगी लाज़मी नहीं<br />
--x--<br />
तेरे ही नूर से रोशन हुई थी निगाह मेरी<br />
और आज मैं तुझसे निगाह चुरा रहा हूँ<br />
--x--<br />
जानता नहीं जाने क्यों मुझे यह यक़ीन है<br />
मासूमियत का नक़ाब न होगा तेरे चेहरे पर</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००२-२००४</p>
]]></content:encoded>
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<title><![CDATA[तुमको सबसे सच्ची दोस्ती मिले]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/11/30/%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%ae%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%b8%e0%a4%ac%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a4%9a%e0%a5%8d%e0%a4%9a%e0%a5%80-%e0%a4%a6%e0%a5%8b%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a5%80-%e0%a4%ae/</link>
<pubDate>Fri, 30 Nov 2007 23:47:04 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
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<description><![CDATA[तुमको ज़िन्दगी की हर ख़ुशी मिले
तेरे लब]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">तुमको ज़िन्दगी की हर ख़ुशी मिले<br />
तेरे लबों को मीठी-मीठी हँसी मिले</font></p>
<p><font color="#000000">हर दिन तुम्हें बहार का दिन हो<br />
न तेरी आँखों को कभी नमी मिले</font></p>
<p><font color="#000000">तुम जो हो जैसी हो सबसे अच्छी हो<br />
तुमको सबसे सच्ची दोस्ती मिले</font></p>
<p><font color="#000000">फूल का खिलना है तुम्हारा हँसना<br />
तुम्हें सदा सहर की ताज़गी मिले</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र'<br />
लेखन वर्ष: २००५</p>
]]></content:encoded>
</item>
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<title><![CDATA[शब हुई चाँद आया]]></title>
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<pubDate>Fri, 30 Nov 2007 23:23:27 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
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<description><![CDATA[शब हुई चाँद आया तेरे ग़म ने अँगड़ाई ली
क़]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font size="2" color="#000000">शब हुई चाँद आया तेरे ग़म ने अँगड़ाई ली<br />
क़यामत है क़ज़ा है यह शब जुदाई की</font></p>
<p><font size="2" color="#000000">छुपाया न कुछ हमने तुमसे सब कह दिया<br />
तुम्हें मेरे प्यार में क्या कमी दिखायी दी</font></p>
<p><font size="2" color="#000000">मान जाओ निबाहेंगे मोहब्बत को ताउम्र<br />
तुम्हें चाहकर क्या मैंने कोई बुराई की</font></p>
<p><font size="2" color="#000000">मेरे ख़ुदा अगर न मिला मेरा प्यार मुझको<br />
झुठला दी जायेगी बात तेरी ख़ुदाई की</font></p>
<p><font size="2" color="#000000">तन्हा जी रहा हूँ और तेरा तस्व्वुर है<br />
दिल में चुभती है फ़िक्र तेरी तन्हाई की</font></p>
<p><font size="2" color="#000000">हमको देखा न देखा हाले-दिल मेरा तुमने<br />
ऐ क़ातिल ख़ुशी ने हमसे यूँ बेवफ़ाई की</font></p>
<p><font size="2" color="#000000">तुमको देखा तब जाना मैंने क़िस्मत क्या है<br />
तुमने प्यार में मेरी यूँ रहनुमाई की</font></p>
<hr /><font size="2" color="#333333">शायिर: विनय प्रजापति 'नज़र'</font><font size="2"><br />
</font><font color="#333333">लेखन वर्ष: २००५</font></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[ज़िन्दगी माने हो तुम]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/09/15/%e0%a5%9b%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a4%97%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%b9%e0%a5%8b-%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%ae/</link>
<pubDate>Sat, 15 Sep 2007 11:27:07 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
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<description><![CDATA[ज़िन्दगी माने हो तुम
साँसें तुम्हारा ए]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">ज़िन्दगी माने हो तुम<br />
साँसें तुम्हारा एहसास हैं<br />
यादें बाइस हैं ज़ीस्त को<br />
तेरी तमन्ना है खु़शी<br />
ग़म है तेरी जुदाई<br />
ज़ख़्मे-दिल ही मरहम<br />
ज़ख़्मे-दिल ही दवा<br />
और चारागर हो तुम...</font></p>
<p><font color="#000000">आप ही हँसना है<br />
आप ही रोना है<br />
दिन-रात ख़्यालों में<br />
तुमसे बातें करना<br />
सब जीने का मतलब है<br />
खा़ली सीने में दिल कहाँ है<br />
वह तो तुम्हारे पास है<br />
जो सीने में धड़कता है<br />
महज़ तुम्हारा एहसास है</font></p>
<p><font color="#000000">जब भी बेले की कली खुलती है<br />
और गुलाब महकता है<br />
यूँ एहसास होता है उसे छूकर<br />
जैसे तुमको छू लिया है<br />
तुम मुझसे नाआश्ना हो<br />
मगर मैं तुमसे दूर नहीं<br />
यह दूरियाँ यह फ़ासले<br />
सब कम हो जायेंगे<br />
बस तुम्हारे घर का पता मिले</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४ </p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[ज़िन्दगी के हर्फ़ बदल गये हैं]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/08/27/%e0%a5%9b%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a4%97%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b9%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a5%9e-%e0%a4%ac%e0%a4%a6%e0%a4%b2-%e0%a4%97%e0%a4%af%e0%a5%87-%e0%a4%b9%e0%a5%88/</link>
<pubDate>Mon, 27 Aug 2007 18:32:46 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
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<description><![CDATA[आइने रातभर रोते रहे
तस्वीरें रातभर जा]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">आइने रातभर रोते रहे<br />
तस्वीरें रातभर जागती रहीं<br />
लम्हे उम्रभर सिसकते रहे<br />
ख़ामोशियाँ उम्रभर ख़ाक फाँकती रहीं</span></p>
<p><span style="color:#000000;">यादें धूप में सूख रही हैं<br />
बातें सब मुरझा गयी हैं<br />
आँखों में दरार पड़ रही है<br />
सपने बंजर हो गये हैं</span></p>
<p><span style="color:#000000;">आँसू बर्फ़ बन गये हैं<br />
ख़ाहिशें तिनके चुन रही हैं<br />
आरज़ू के पाँव थक चुके हैं<br />
ख़्याल ज़मीन में दफ़्न हो गये हैं</span></p>
<p><span style="color:#000000;">साँसें सीने में भीग गयी हैं<br />
उदास सावन टपक रहा है<br />
जंगल तन्हाई में सुलगता है<br />
फूल पलकें झुकाये हुए हैं</span></p>
<p><span style="color:#000000;">ख़ुशबू बे-सदा गल रही है<br />
पलाश के फूल हँस रहे हैं<br />
जड़ें मिट्टी सोख रही हैं<br />
पत्ते सूखी बेलों ने डस लिये हैं</span></p>
<p><span style="color:#000000;">उजाले पत्थरों में जज़्ब हो गये हैं<br />
चाँद धुँध हो रहा है<br />
रात रेत हो गयी है<br />
सितारे रेत के दरया में बह रहे हैं</span></p>
<p><span style="color:#000000;">दर्द तेज़ाब हो गया है<br />
और खु़शी मग़रूर रहती है<br />
मैं शब्द उगलता रहता हूँ<br />
ज़िन्दगी के हर्फ़ बदल गये हैं</span></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’</p>
]]></content:encoded>
</item>

</channel>
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