मेरी सज़दाए-जबीं, है तेरे क़दमों पे निसार, तू ही रौनक मेरे दिन का, तू ही शब का है निखार। जब सुनी आमद कि तेरी, कुछ तो है ऐसा हुआ, जैसे कि बीमार को मिल जाये इक वजहे-करार। मेरे सारे अश्क ले कर, छुप के खु… more →
दिल से दिल तकwrote 1 month ago: एक गीला दिन टंगा था तार पर धूप होने के न थे आसार पर धीरे धीरे सो गयी हर इक सदा रह गयी इक ख़ामुशी बेद … more →
wrote 2 months ago: मेरी कुछ ग़ज़लें ज़बां लफ्ज़े मुहब्बत है दिलों में पर अदावत है । न कोई रूठना मनना यही तुम से शिकायत … more →
wrote 3 months ago: कैसा हो तसव्वुर तेरा इन लफ़्ज़ों में जो ढल जाए कल शाम तुझे पढ़ लूँ के तू फिर यूँही तडपाये बोलूं इन्ह … more →
wrote 4 months ago: गज़लः बददुआओं का है ये असर हर दुआ हो गई बेअसर. ज़ख्म अब तक हरे है मिरे सूख कर रह गए क्यों शजर. यूं न … more →
wrote 12 months ago: वक़्त गुज़रता गया दूरियाँ बढ़ती गयी जिंदगी यू हीं हर शाम ढलती रही हर रोज़ मुझसे रूठ जाते थे किसी बात … more →
wrote 1 year ago: तेरा मेरा किसका था बीत गया गया वो जिसका था. अब वो किसका किस्सा है कल जो मेरा हिस्सा था दरिया को पार … more →
wrote 1 year ago: ज़रा नींद में थोड़ी जागी हुई सी अजब शायराना हैं आंखें तुम्हारी … शब्द: पीयूष स्वर और संगीत: डॉ … more →
wrote 1 year ago: बाहर निकलूँगा तो फिर उन्हीं हालात से सामना होगाधूप में नहाई हुई रात से सामना होगाखुद में दबाए हुए जज … more →
wrote 1 year ago: जो उलझ कर रह गई है फाइलों के जाल में गाँव तक वो रोशनी आएगी कितने साल में बूढ़ा बरगद साक्षी है किस तर … more →
wrote 1 year ago: ग़ज़लः वो ही चला मिटाने नामो-निशाँ हमारा जो आज तक रहा था जाने-जहाँ हमारा दुशमन से जा मिला है अब बागब … more →
wrote 1 year ago: ग़ज़लः वो फ़स्ले-गुल की उमीदें लगाए बैठे हैं जो अपने ज़हन में सहरा तपाए बैठे हैं ज़रूरत उनको अब है आ … more →
wrote 1 year ago: O S N … more →
wrote 1 year ago: ऐसी कौन सी जगह जहाँ मेरे शब्द नहीं जाते, जहाँ-जहाँ जाता हूँ मैं बस वहीं नहीं जाते। मुझे भी आदमियों क … more →
wrote 1 year ago: हर हाल में हमने तुम्हारा साथ दिया, थोड़ा सच बोला तो बुरा मान गए !१! तुम्हें उम्मीद किस बात की थ … more →
wrote 1 year ago: आँखें न बंद करो, के रात अभी बाक़ी है, मुद्दत से कह रहा जिसे वो बात अभी बाक़ी है. लहू हमारा भी कभी आँ … more →
wrote 1 year ago: अच्छा हुआ कि तेरा बुरा वक्त अब जाने लगा है, कम से कम तेरा असली चेहरा नजर आने लगा है… इस सफर के … more →
wrote 1 year ago: गज़लः मिट्टी का मेरा घर अभी पूरा बना नहीं है हमसफ़र ग़रीब मेरा, बेवफ़ा नहीं. माना कि मेरे दिल में ज़ … more →
wrote 1 year ago: संवारूँगा तेरे जुल्फों के ख़म, ज़रा सा दम तो लेने दे, मैं हँस के छीन लूँगा सारे ग़म, ज़रा सा दम तो ल … more →
wrote 1 year ago: तुमसे जितना ज़्यादा मैं दूर हो गया हूँ, खुद के नशे में उतना ही चूर हो गया हूँ…। तुम साथ होते त … more →