Blogs about: ग़ज़ल

Featured Blog

एक गीला दिन टंगा था तार पर- स्वप्निल तिवारी 'आतिश'13 comments

swapnil tiwari 'aatish' wrote 1 month ago: एक गीला दिन टंगा था तार पर धूप होने के न थे आसार पर धीरे धीरे सो गयी हर इक सदा रह गयी इक ख़ामुशी बेद … more →

टैग: Swapnil Tiwari 'Aatish', स्वप्निल तिवारी 'आति, Ghazal, swapnil tiwari 'aatish

मेरी नई ग़ज़लें

drsudhesh wrote 2 months ago: मेरी कुछ ग़ज़लें ज़बां लफ्ज़े मुहब्बत है दिलों में पर अदावत है । न कोई रूठना मनना यही तुम से शिकायत … more →

टैग: कविता

ग़ज़ल 7 comments

Personal Concerns wrote 3 months ago: कैसा हो तसव्वुर तेरा इन लफ़्ज़ों में जो ढल जाए कल शाम तुझे पढ़ लूँ के तू फिर यूँही तडपाये बोलूं इन्ह … more →

टैग: Ghazal, Personal, Love, Poetry, Urdu, शायरी, شیری

हर दुआ हो गई बेअसर1 comment

Devi Nangrani wrote 4 months ago: गज़लः बददुआओं का है ये असर हर दुआ हो गई बेअसर. ज़ख्म अब तक हरे है मिरे सूख कर रह गए क्यों शजर. यूं न … more →

टैग: चराग़े-दिल संग्रह

रंजिशें1 comment

Maheep Saraf wrote 12 months ago: वक़्त गुज़रता गया दूरियाँ बढ़ती गयी जिंदगी यू हीं हर शाम ढलती रही हर रोज़ मुझसे रूठ जाते थे किसी बात … more →

टैग: कविता, शायरी, साहित्य, हिन्दी, Gazal, Hindi Poems, Hindi Poems: Romantic, Life, Romantic

तजुर्बा

Captain Awesome wrote 1 year ago: तेरा मेरा किसका था बीत गया गया वो जिसका था. अब वो किसका किस्सा है कल जो मेरा हिस्सा था दरिया को पार … more →

टैग: ग़ज़ल, यादें, तजुर्बा, कल

आंखें तुम्हारी ...

Captain Awesome wrote 1 year ago: ज़रा नींद में थोड़ी जागी हुई सी अजब शायराना हैं आंखें तुम्हारी … शब्द: पीयूष स्वर और संगीत: डॉ … more →

टैग: ग़ज़ल, गीत, आंखें, नींद

फिर उन्हीं हालात से सामना होगा3 comments

स्वप्नेश चौहान wrote 1 year ago: बाहर निकलूँगा तो फिर उन्हीं हालात से सामना होगाधूप में नहाई हुई रात से सामना होगाखुद में दबाए हुए जज … more →

टैग: कविता

जो उलझ कर रह गई है फाइलों के जाल में2 comments

jpdubey wrote 1 year ago: जो उलझ कर रह गई है फाइलों के जाल में गाँव तक वो रोशनी आएगी कितने साल में बूढ़ा बरगद साक्षी है किस तर … more →

टैग: ग़ज़ल का सफ़र, अदम गोंडवी, काव्य

जाने-जहाँ हमारा1 comment

Devi Nangrani wrote 1 year ago: ग़ज़लः वो ही चला मिटाने नामो-निशाँ हमारा जो आज तक रहा था जाने-जहाँ हमारा दुशमन से जा मिला है अब बागब … more →

चहरा छुपाए बैठे हैं1 comment

Devi Nangrani wrote 1 year ago: ग़ज़लः वो फ़स्ले-गुल की उमीदें लगाए बैठे हैं जो अपने ज़हन में सहरा तपाए बैठे हैं ज़रूरत उनको अब है आ … more →

Dhadkan jõ abhï abhï aayï धड़कन जो अभी अभी आयी2 comments

bharattiwari wrote 1 year ago: O S N … more →

टैग: शायद कविता;त्योहार;द, Ghazal

जहाँ मेरे शब्द नहीं जाते...12 comments

स्वप्नेश चौहान wrote 1 year ago: ऐसी कौन सी जगह जहाँ मेरे शब्द नहीं जाते, जहाँ-जहाँ जाता हूँ मैं बस वहीं नहीं जाते। मुझे भी आदमियों क … more →

टैग: कविता, उसूल, करीब, ता-उम्र, दर, फितरत, मंजिल, शब्द, समझ

बुरा मान गए !25 comments

संतोष त्रिवेदी wrote 1 year ago: हर हाल में हमने तुम्हारा साथ दिया, थोड़ा सच बोला तो बुरा मान गए !१! तुम्हें  उम्मीद किस बात की थ … more →

टैग: प्रेम

रात अभी बाक़ी है9 comments

SatyaVrat wrote 1 year ago: आँखें न बंद करो, के रात अभी बाक़ी है, मुद्दत से कह रहा जिसे वो बात अभी बाक़ी है. लहू हमारा भी कभी आँ … more →

टैग: प्रारम्भिक, शेर, शायरी, Ghazal

हाथ का ख़ंज़र नजर आने लगा है...19 comments

स्वप्नेश चौहान wrote 1 year ago: अच्छा हुआ कि तेरा बुरा वक्त अब जाने लगा है, कम से कम तेरा असली चेहरा नजर आने लगा है… इस सफर के … more →

टैग: कविता, ख़ंज़र, फैसला, सफ़र, Gazal, Kavita

है हमसफ़र ग़रीब मेरा, बेवफ़ा नहीं4 comments

Devi Nangrani wrote 1 year ago: गज़लः मिट्टी का मेरा घर अभी पूरा बना नहीं है हमसफ़र ग़रीब मेरा, बेवफ़ा नहीं. माना कि मेरे दिल में ज़ … more →

टैग: चराग़े-दिल संग्रह

ज़रा सा दम तो लेने दे

arvindwithu wrote 1 year ago: संवारूँगा तेरे जुल्फों के ख़म, ज़रा सा दम तो लेने दे, मैं हँस के छीन लूँगा सारे ग़म, ज़रा सा दम तो ल … more →

टैग: अवर्गीकृत

जीने वालों के लिए नज़ीर हो गया हूँ...3 comments

स्वप्नेश चौहान wrote 1 year ago: तुमसे जितना ज़्यादा मैं दूर हो गया हूँ, खुद के नशे में उतना ही चूर हो गया हूँ…। तुम साथ होते त … more →

टैग: कविता, नज़ीर, पीर, सम्पूर्ण, Gazal, Kavita


Related Tags
All →

Follow this tag via RSS