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	<title>ग़म &amp;laquo; WordPress.com Tag Feed</title>
	<link>http://wordpress.com/tag/ग़म/</link>
	<description>Feed of posts on WordPress.com tagged "ग़म"</description>
	<pubDate>Mon, 08 Sep 2008 06:15:28 +0000</pubDate>

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	<language>en</language>

<item>
<title><![CDATA[न वह कभी आँखों से उतारा ही गया]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=1058</link>
<pubDate>Sat, 02 Aug 2008 19:35:28 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=1058</guid>
<description><![CDATA[न वह कभी आँखों से उतारा ही गया
और न कभी ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">न वह कभी आँखों से उतारा ही गया<br />
और न कभी लबों से पिया ही गया<br />
वह इक दर्द का बवण्डर था शायद<br />
न जिसे कभी दिल में सँभाला ही गया</span></p>
<p><span style="color:#000000;">इक कहकशाँ की रोशनी भी खप गयी<br />
न ज़रा पलकों को झपकाया ही गया<br />
आधे-आधे दिल से देखा था मैंने उसे<br />
न वह कभी पूरे दिल से देखा ही गया</span></p>
<p><span style="color:#000000;">तारीक़ी ने सिर्फ़ मेरे पाए ही चुने<br />
और न कभी मुझसे भागा ही गया<br />
टुकड़े कर दिये उसने मेरी आँखों के<br />
न यह ग़म मुझसे भिगोया ही गया</span></p>
<p><span style="color:#000000;">धीरे-धीरे वह मुझसे दूर चलता गया<br />
न मुझसे उसके क़रीब जाया ही गया<br />
बारिश ने खनका दीं शीशम की पत्तियाँ<br />
न रोकर इस दिल को बहलाया ही गया</span></p>
<p>पाए:feet,  तारीक़ी: darkness</p>
<hr /> शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[यह सावन मेरा मन पढ़-पढ़ रोया]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=1048</link>
<pubDate>Tue, 29 Jul 2008 08:18:00 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=1048</guid>
<description><![CDATA[यह सावन मेरा मन पढ़-पढ़ रोया अबकि बार
य]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">यह सावन मेरा मन पढ़-पढ़ रोया अबकि बार<br />
यह गरज मुझे डराती रही तेरे तेवर की तरह</span></p>
<p><span style="color:#000000;">बदलना था तुम्हें तो मुझको तुमने बदला क्यों<br />
हमने ग़म को पहना है दिल पे ज़ेवर की तरह</span></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[भीगी चाँदनी रातों में]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=1016</link>
<pubDate>Sat, 12 Jul 2008 13:50:28 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=1016</guid>
<description><![CDATA[भीगी चाँदनी रातों में
दिल से तेरी बातो]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">भीगी चाँदनी रातों में<br />
दिल से तेरी बातों में<br />
ऐसा लग रहा है<br />
तू मेरी बन गयी है<br />
मैं तेरा बन गया हूँ</span></p>
<p><span style="color:#000000;">ख़ाब बुनती हैं आँखें<br />
फूलों से लदी हैं शाख़ें<br />
ऐसा लग रहा है<br />
तू ख़ुशबू बन गयी है<br />
मैं गुल बन गया हूँ</span></p>
<p><span style="color:#000000;">हल्की-हल्की आँच है<br />
मेरी नब्ज़ में काँच है<br />
ऐसा लग रहा है<br />
तू लहू बन गयी है<br />
मैं जिस्म बन गया हूँ</span></p>
<p><span style="color:#000000;">तारे, चिंगारियाँ हैं<br />
चाँदनी, उजली बर्फ़ है<br />
ऐसा लग रहा है<br />
तू लौ बन गयी है<br />
मैं दीप बन गया हूँ</span></p>
<p><span style="color:#000000;">लफ़्ज़ मीठे-मीठे हैं<br />
ग़म फीके-फीके हैं<br />
ऐसा लग रहा है<br />
तू मिसरी बन गयी है<br />
मैं ज़बाँ बन गया हूँ</span></p>
<p><span style="color:#000000;">दिल ग़मख़्वार है<br />
मौसम ख़ुशगँवार है<br />
ऐसा लग रहा है<br />
तू दिल बन गयी है<br />
मैं जाँ बन गया हूँ</span></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[मेरी रूह को तख़लीक़ करके]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=1001</link>
<pubDate>Sat, 21 Jun 2008 17:24:32 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=1001</guid>
<description><![CDATA[मेरी रूह को तख़लीक़ करके
किस राह में खो ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">मेरी रूह को तख़लीक़ करके<br />
किस राह में खो गये हो तुम<br />
लफ़्ज़ मेरे अजनबी लगते हैं<br />
जाने किसके हो गये हो तुम </span></p>
<p><span style="color:#000000;">दिन की धूप की पीली चादर<br />
जला करती है सारा-सारा दिन<br />
रात की राख अंगारों के साथ<br />
सुलगा करती है तुम्हारे बिन</span></p>
<p><span style="color:#000000;">उलझे-उलझे ख़्याल आते हैं<br />
उलझे हुए ख़्वाब में डूबा हूँ<br />
ग़म पी रहा है घूट-घूट मुझे<br />
जीते-जी इस क़दर टूटा हूँ</span></p>
<p><span style="color:#000000;">मेरी रूह को तख़लीक़ करके<br />
किस राह में खो गये हो तुम<br />
लफ़्ज़ मेरे अजनबी लगते हैं<br />
जाने किसके हो गये हो तुम</span></p>
<p><span style="color:#000000;">जब भी रात में शग़ाफ़ आता है<br />
खिलती सहर के उफ़क़ दिखते हैं<br />
कितने ही ख़ूबसूरत क्यों न हो<br />
तेरे लबों से कम सुर्ख़ दिखते हैं</span></p>
<p><span style="color:#000000;">ज़हन की गलियों में ही खोया हूँ<br />
तेरे लिए भटकता हूँ दर-ब-दर<br />
तक़दीर के बे-रब्त टुकड़े हैं कुछ<br />
जिनको समेटता हूँ आठों पहर</span></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४ </p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[एक लड़की ]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=980</link>
<pubDate>Wed, 11 Jun 2008 15:50:34 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=980</guid>
<description><![CDATA[एक लड़की मुझको सारा दिन परेशाँ किये घू]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">एक लड़की मुझको सारा दिन परेशाँ किये घूमती है<br />
ख़ाबों में भी आयी ख़्यालों को हैराँ किये रहती है</span></p>
<p><span style="color:#000000;">उसकी बातों में जाने कैसी ख़ुशबू है नाज़ुक मिज़ाज की<br />
अदाए-हरकत है कभी गुल तो कभी मिराज़ की</span></p>
<p><span style="color:#000000;">यूँ तो इस जा में मेरी शख़्सियत है खाकसार-सी<br />
लफ़्ज़ यूँ बुनती है' जैसे हूँ तबीयत ख़ाबे-ख़ुमार की</span></p>
<p><span style="color:#000000;">चाहती क्या है, बात क्या है, मैं पता करूँ तो कैसे?<br />
दर्दो-ग़म की बात छोड़, दिल का भेद तो कह दे!</span></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[ज़िन्दगी ढूँढ़ते-ढूँढ़ते मैं तुम तक आ गया]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=954</link>
<pubDate>Mon, 31 Mar 2008 11:45:52 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=954</guid>
<description><![CDATA[ज़िन्दगी ढूँढ़ते-ढूँढ़ते मैं तुम तक आ ग]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">ज़िन्दगी ढूँढ़ते-ढूँढ़ते मैं तुम तक आ गया<br />
सरे-राह मैं अपनी मंज़िल पा गया<br />
चराग़ों का नूर हो, चश्मे-बद्दूर हो<br />
तुम्हें देखकर दिल अँधेरों से दूर आ गया</font></p>
<p><font color="#000000">ख़ुशियों के दीप जल उठे, ग़म सारे बुझ गये<br />
पतझड़ उतरा, गुल शाख़-शाख़ खिल गये<br />
इक-इक धड़कन में नाम तुम्हारा है<br />
तुम्हारी मोहब्बत का जादू मुझपे छा गया</font></p>
<p><font color="#000000">ख़ुशबू-ख़ुशबू मैंने तुमको पाया सनम<br />
मोहब्बत में तेरी ख़ुद को मिटाया सनम<br />
तेरी पहली नज़र से क़त्ल हुआ था मैं<br />
लहू के हर क़तरे में तेरा प्यार समा गया</font></p>
<p><font color="#000000">राज़ दिल के सभी आँखों से बयाँ कर दो<br />
राहे-मुहब्बत मेरी तुम आसाँ कर दो<br />
नहीं कोई अरमाँ तेरी चाहत के सिवा<br />
बस तेरा ही चेहरा दिलो-दिमाग़ पे छा गया</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[आफ़ताबी मुस्कुराहट है माहताबी चेहरा]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=942</link>
<pubDate>Tue, 18 Mar 2008 17:07:53 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=942</guid>
<description><![CDATA[आफ़ताबी मुस्कुराहट है माहताबी चेहरा
च]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">आफ़ताबी मुस्कुराहट है माहताबी चेहरा<br />
चाँदनी छलकाता है तुम्हारा जिस्म सुनहरा</font></p>
<p><font color="#000000">क्योंकर प्यार न आये नरगिसी आँखों पर<br />
क्योंकर गुल न महकाये बहार शाखों पर</font></p>
<p><font color="#000000">इस दीवाने को दीवानगी सिखायी किसने<br />
दिल में उसके यह आग लगायी जिसने</font></p>
<p><font color="#000000">आफ़ताबी मुस्कुराहट है माहताबी चेहरा<br />
चाँदनी छलकाता है तुम्हारा जिस्म सुनहरा</font></p>
<p><font color="#000000">किस क़ातिल अदा से तुमने तीर चलाया है<br />
अपनी नज़रों से मेरा जिस्म महकाया है</font></p>
<p><font color="#000000">क्योंकर शोलों पर चलने का ग़म होगा<br />
जब तुम जैसा साथ कोई हमदम होगा</font></p>
<p><font color="#000000">आफ़ताबी मुस्कुराहट है माहताबी चेहरा<br />
चाँदनी छलकाता है तुम्हारा जिस्म सुनहरा</font></p>
<p><font color="#000000">इश्क़ की मय आँखों से पिला दी है तुमने<br />
और जन्नत की रहगुज़र पा ली है हमने</font></p>
<p><font color="#000000">वाक़िफ़ नहीं तू मेरी मोहब्बत से जाने-जाँ<br />
तेरे साथ जो न गुज़रा वो लम्हा' लम्हा कहाँ</font></p>
<p><font color="#000000">आफ़ताबी मुस्कुराहट है माहताबी चेहरा<br />
चाँदनी छलकाता है तुम्हारा जिस्म सुनहरा</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[किसी राह तुमसे मुलाक़ात होगी]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=917</link>
<pubDate>Fri, 14 Mar 2008 14:46:54 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=917</guid>
<description><![CDATA[किसी राह तुमसे मुलाक़ात होगी
फिर हल्की-]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">किसी राह तुमसे मुलाक़ात होगी<br />
फिर हल्की-हल्की बरसात होगी<br />
तुम मुझसे इक़रारे-प्यार करना<br />
ज़िन्दगी की नयी शुरुआत होगी</font></p>
<p><font color="#000000">तेरे पहलू में बैठेंगे दो बातें होंगी<br />
फिर ख़त्म दर्द की रातें होंगी<br />
ग़म भूल जायेंगे प्यार जवाँ होगा<br />
वस्ल की हर शब पहली रात होगी</font></p>
<p><font color="#000000">किसी राह तुमसे मुलाक़ात होगी<br />
फिर हल्की-हल्की बरसात होगी</font></p>
<p><font color="#000000">प्यार की दुनिया सजायेंगे प्यार से<br />
निखर जायेगा घर तेरे सिंगार से<br />
चाँदनी ओढ़ के बैठेंगे सर्द रातों में साथ<br />
कुछ तेरी कुछ मेरी बात होगी</font></p>
<p><font color="#000000">तुम मुझसे इक़रारे-प्यार करना<br />
ज़िन्दगी की नयी शुरुआत होगी</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००२</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[मैं ज़हर का असर ढूँढ़ता फिरा]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=911</link>
<pubDate>Fri, 14 Mar 2008 06:24:53 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=911</guid>
<description><![CDATA[मैं ज़हर का असर ढूँढ़ता फिरा
वह शामो-सह]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">मैं ज़हर का असर ढूँढ़ता फिरा<br />
वह शामो-सहर ढूँढ़ता फिरा</font></p>
<p><font color="#000000">जिस बाज़ार में ग़म बिकते हों<br />
उसे दिनो-दोपहर ढूँढ़ता फिरा</font></p>
<p><font color="#000000">आस एक बुझी-बुझी है दिल में<br />
मैं हर गली शरर ढूँढ़ता फिरा</font></p>
<p><font color="#000000">कोई खोदे वह यहीं दफ़्न है<br />
'नज़र' जिसे बेख़बर ढूँढ़ता फिरा</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३ </p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[तुम न समझोगे]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=909</link>
<pubDate>Thu, 13 Mar 2008 06:10:04 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=909</guid>
<description><![CDATA[बिन तुम्हारे मैं क्या हूँ तुम न समझोगे]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">बिन तुम्हारे मैं क्या हूँ तुम न समझोगे<br />
आप तन्हाई की सदा हूँ तुम न समझोगे</font></p>
<p><font color="#000000">तुम्हारे ग़मे-इश्क़ में जो चाँद पिरोता रहा<br />
मैं साँस का वो टुकड़ा हूँ तुम न समझोगे</font></p>
<p><font color="#000000">तुम्हारे दिल में जो हर लम्हा बहता है<br />
मैं लहू का वही क़तरा हूँ तुम न समझोगे</font></p>
<p><font color="#000000">तुमने जिसे बेकार समझकर फाड़ दिया<br />
मैं उसी ख़त का टुकड़ा हूँ तुम न समझोगे</font></p>
<p><font color="#000000">जब निगाहे-'नज़र' बेक़रार हो चली है<br />
मैं किस मोड़ पे आ गया हूँ तुम न समझोगे</font></p>
<p><font color="#000000">पुराना एक ख़तो-लिफ़ाफ़ा जलाकार आया<br />
'विनय' अब तुम्हारा हूँ तुम न समझोगे</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[एक तसल्ली ]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=897</link>
<pubDate>Wed, 12 Mar 2008 04:55:45 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=897</guid>
<description><![CDATA[एक तसल्ली मेरे पाँव के नीचे से गुज़रती ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">एक तसल्ली मेरे पाँव के नीचे से गुज़रती है<br />
कितनी पी है तूने जो मेरी आवाज़ लरज़ती है</font></p>
<p><font color="#000000">यह भी कोई ग़म है कि तेरा कोई यार नहीं<br />
मेरा तो उसके अफ़साने में कोई किरदार नहीं<br />
तू आज भी परछाइयाँ चुनता है दीवारो-दर<br />
आज भी नब्ज़ की चुभन मुझको अखरती है</font></p>
<p><font color="#000000">एक तसल्ली मेरे पाँव के नीचे से गुज़रती है...</font></p>
<p><font color="#000000">तेरी बाँहों में रेशमी रातों का रेशमी चाँद होगा<br />
मगर कौन दूसरा हमपे मेहरबान होगा<br />
तू आज और कल मेरा मुक़ाबिल नहीं है अगर<br />
फिर क्यों मेरी क़िस्मत मुझको परखती है</font></p>
<p><font color="#000000">एक तसल्ली मेरे पाँव के नीचे से गुज़रती है<br />
कितनी पी है तूने जो मेरी आवाज़ लरज़ती है</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति 'नज़र'<br />
लेखन वर्ष: २७ मई २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[वह शाम फिर आयी]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=883</link>
<pubDate>Sat, 08 Mar 2008 09:04:42 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=883</guid>
<description><![CDATA[वह शाम फिर आयी
वह गुलाबी चाँद फिर आया
व]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">वह शाम फिर आयी<br />
वह गुलाबी चाँद फिर आया<br />
वह फिर ढहीं बारिश की दीवारें<br />
इल्ज़ाम मुझपर आया</font></p>
<p><font color="#000000">कोई गुमाँ नहीं हुआ<br />
कोई ज़ख़्मे-निहाँ नहीं पिया<br />
सब बयाँ हैं<br />
किसलिए दर्द असर पाया</font></p>
<p><font color="#000000">वह शाम फिर आयी<br />
वह गुलाबी चाँद फिर आया</font></p>
<p><font color="#000000">मुझको यह नुमाया है<br />
ख़त किसलिए जलाया है<br />
शबो-रोज़ के पुरज़े क्यों किये<br />
क्यों यह ज़हर खाया</font></p>
<p><font color="#000000">वह शाम फिर आयी<br />
वह गुलाबी चाँद फिर आया</font></p>
<p><font color="#000000">इक उम्र दराज़ कर दो<br />
आँखों में मिराज़ भर दो<br />
यों भी जी लूँ कुछ देर तलक<br />
क्या दीवारो-दर, क्या साया</font></p>
<p><font color="#000000">वह फिर ढहीं बारिश की दीवारें<br />
इल्ज़ाम मुझपर आया</font></p>
<p><font color="#000000">दौरे-ग़म, यह तन्हाई रग-रग में<br />
यह ज़ख़्म के निशाँ<br />
और क्या मेरी...<br />
दुआ के हिस्से असर पाया</font></p>
<p><font color="#000000">वह फिर ढहीं बारिश की दीवारें<br />
इल्ज़ाम मुझपर आया</font></p>
<p><font color="#000000">जब विसाल लम्हा था<br />
तो फ़िराक़ उम्र क्यों है<br />
क्या कुसूर उसके सर<br />
क्यों जिये उम्रे-नज़र ज़ाया</font></p>
<p><font color="#000000">वह शाम फिर आयी<br />
वह गुलाबी चाँद फिर आया<br />
वह फिर ढहीं बारिश की दीवारें<br />
इल्ज़ाम मुझपर आया</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[तेरी तस्वीर से बातें करता]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=869</link>
<pubDate>Fri, 29 Feb 2008 22:18:47 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=869</guid>
<description><![CDATA[तेरी तस्वीर से बातें करता रोज़ मैं
पास ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">तेरी तस्वीर से बातें करता रोज़ मैं<br />
पास मेरे जो तेरी कोई तस्वीर होती<br />
तुम्हें प्यार बेइंतिहाँ प्यार करता मैं<br />
पास जो जानाँ मेरे आज तुम होती</font></p>
<p><font color="#000000">देखो न! यह मेरी कैसी तक़दीर है<br />
न तुम हो न तुम्हारी कोई तस्वीर है<br />
दिन-रात तेरा ग़म ही ग़म है मुझे<br />
सीने में साँसों की टूटी हुई ज़ंजीर है</font></p>
<p><font color="#000000">तुमसे जुदा तो ख़ुद से जुदा रहता हूँ<br />
सच्चे दिल से तुम्हें प्यार करता हूँ<br />
न मर सकता हूँ मैं, न जी सकता हूँ<br />
मैं तो सिर्फ़ तुम्हें ही चाह सकता हूँ</font></p>
<p><font color="#000000">देखो न! यह कैसी मेरी तक़दीर है<br />
न तुम हो न तुम्हारी कोई तस्वीर है</font></p>
<p><font color="#000000">मैं तेरी चाहत रखता हूँ राहें तकता हूँ<br />
थोड़ा सौदाई, थोड़ा दीवाना लगता हूँ<br />
क़िस्मत की लकीरों में सिर्फ़ तुम हो<br />
मैं रात और दिन तेरा नाम रटता हूँ</font></p>
<p><font color="#000000">दिन-रात तेरा ग़म ही ग़म है मुझे<br />
सीने में साँसों की टूटी हुई ज़ंजीर है</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति 'नज़र'<br />
लेखन वर्ष: ०४ जून २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[मैं अगर एक तरफ़ा हूँ]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=832</link>
<pubDate>Tue, 26 Feb 2008 02:37:47 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=832</guid>
<description><![CDATA[मैं अगर एक तरफ़ा हूँ तो यह भी सही
इस बद्त]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">मैं अगर एक तरफ़ा हूँ तो यह भी सही<br />
इस बद्तर ज़िन्दगी में यह क्या कम है </font></p>
<p><font color="#000000">हर शय तेरे सिवा कुछ दिखता ही नहीं</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[आज फिर आसमाँ पे]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=824</link>
<pubDate>Mon, 25 Feb 2008 15:52:51 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=824</guid>
<description><![CDATA[आज फिर आसमाँ पे देखा चाँद, गुलाबी चाँद
]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">आज फिर आसमाँ पे देखा चाँद, गुलाबी चाँद<br />
आज फिर तेरी आँखों को देख्नने की ख़ाहिश हुई<br />
आज फिर सुलगने लगे मेरी आँखों के आँसू<br />
आज फिर बुझती हुई एक तमन्ना ने अँगड़ाई ली</font></p>
<p><font color="#000000">चाँद हसीन था तेरे जिस्म-सा शामीन था<br />
तेरे ग़म में यह कब मुझसे ग़मगीन था<br />
रोज़ महकता था मगर सुनहरा था<br />
आज कुछ ज़्यादा गुलाबी और गहरा था</font></p>
<p><font color="#000000">आज फिर दिल के जज़्बात बह निकले दिल से<br />
आज फिर उस मकान में तुम्हें देखने की ख़ाहिश हुई<br />
आज फिर कुछ अजीब भँवर थे मेरी धड़कनों में<br />
आज फिर नस-नस में लहू ने चिन्गारी जला दी</font></p>
<p><font color="#000000">तुमसे मेरी मुहब्बत बहुत याद आ रही है<br />
गुलाबी चाँद कह रहा है तू आ रही है<br />
आ लौट आ अब लौट भी आ तू कहाँ है<br />
तुमसे मेरे सपनों का यह हसीं जहाँ है</font></p>
<p><font color="#000000">आज फिर आसमाँ पे देखा चाँद, गुलाबी चाँद<br />
आज फिर तेरी आँखों को देखने की ख़ाहिश हुई<br />
आज फिर कुछ अजीब भँवर थे मेरी धड़कनों में<br />
आज फिर नस-नस में लहू ने चिन्गारी जला दी</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १६ अप्रैल २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[हज़ारों की भीड़ में हम अकेले ]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=812</link>
<pubDate>Mon, 18 Feb 2008 19:17:55 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=812</guid>
<description><![CDATA[हज़ारों की भीड़ में हम अकेले रह गये
जिस]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">हज़ारों की भीड़ में हम अकेले रह गये<br />
जिसके साथ की तमन्ना थी मेरे दिल को<br />
वह तो केवल अब मेरे ख़ाबों में रह गये<br />
वह तो केवल अब मेरे ख़ाबों में रह गये</font></p>
<p><font color="#000000">कि अब हम कहाँ कि अब तुम कहाँ<br />
यह दीवारें कैसी बन गयीं दोनों के दर्मियाँ<br />
तेरी इक नज़र पर यह दिल आहें भरता<br />
मगर यह टूटकर बिखरा है जाने कहाँ-कहाँ</font></p>
<p><font color="#000000">इंतिज़ार तब तक रहेगा तब तक है ज़िन्दगी<br />
उम्मीद है अंधेरों में भी मिलेगी हमें रोशनी</font></p>
<p><font color="#000000">आँखों का ग़म पलकों के किनारे टपकता है<br />
ढ़ूँढ़ता है नज़ारा जिसमें सजा हो वह समाँ<br />
राहों की मिट्टी पर क़दमों के निशाँ बाक़ी हैं<br />
उनको ही बैठकर पढ़ता हूँ सुबह-शाम यहाँ</font></p>
<p><font color="#000000">कि अब हम कहाँ कि अब तुम कहाँ<br />
यह दीवारें कैसी बन गयीं दोनों के दर्मियाँ</font></p>
<p><font color="#000000">कल और था, आज और है, बदल गया जहाँ<br />
एक बदला नहीं मैं और मेरा प्यार, हमनवाँ<br />
भूलना इतना आसाँ होता तो भूल चुके होते<br />
तेरे घर के दरवाज़े को देखना हम छोड़ देते</font></p>
<p><font color="#000000">कि अब हम कहाँ कि अब तुम कहाँ<br />
यह दीवारें कैसी बन गयीं दोनों के दर्मियाँ</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[तू एक बार देख ले पीछे मुड़के]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=808</link>
<pubDate>Mon, 18 Feb 2008 17:49:23 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=808</guid>
<description><![CDATA[तू एक बार देख ले पीछे मुड़के
हम हैं वही]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">तू एक बार देख ले पीछे मुड़के<br />
हम हैं वहीं जहाँ थे कभी अकेले<br />
ऐसा यह क्या हो गया अन्जाने<br />
दिल मेरा क्यों टूट गया रब जाने</font></p>
<p><font color="#000000">तुम गये तन्हा हो गयी ज़िन्दगी<br />
तुम गये दिल से गयी हर ख़ुशी<br />
हर लम्हा तू मुझे याद आ रही है<br />
याद आ के मुझे तड़पा रही है</font></p>
<p><font color="#000000">तू एक बार देख ले पीछे मुड़के<br />
हम हैं वहीं जहाँ थे कभी अकेले</font></p>
<p><font color="#000000">यारा, तेरे चाहने वाले हम हैं<br />
मेरे दामन में कितने ग़म हैं<br />
कैसे रहते हैं हम यहाँ ज़िन्दा<br />
जैसे साहिल पे मिट्टी का घरौंदा</font></p>
<p><font color="#000000">तू एक बार देख ले पीछे मुड़के<br />
हम हैं वहीं जहाँ थे कभी अकेले<br />
तू आ कभी देख ले मेरी बेख़ुदी<br />
तू आ कभी लौटा दे मेरी ज़िन्दगी</font></p>
<p><font color="#000000">यारा तू ज़िन्दगी, तू है ज़िन्दगी...</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[राहें क्या-क्या न आयेंगी इस दौरे-बदनामी में]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/12/28/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%a8-%e0%a4%86%e0%a4%af%e0%a5%87%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a5%80-%e0%a4%87/</link>
<pubDate>Fri, 28 Dec 2007 09:06:29 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
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<description><![CDATA[राहें क्या-क्या न आयेंगी इस दौरे-बदनाम]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">राहें क्या-क्या न आयेंगी इस दौरे-बदनामी में<br />
है अपना ही मज़ा घुटके मरने का ग़ुमनामी में</font></p>
<p><font color="#000000">मुझको गले से लगाया न फ़रहत न ग़मों ने<br />
शायद मिटना लिखा है इस तक़दीरे-नाकामी में</font></p>
<p><font color="#000000">तक़्क़लुफ़ फ़रमाती है रोज़ ज़ीस्त मुझसे<br />
तक़लीफ़ बहुत पेश आ रही है इस ग़ुलामी में</font></p>
<p><font color="#000000">मुद्दतों में ढूँढ़ पाया वह एक ख़ामी तो कहता है<br />
बहुत सारी अच्छाइयाँ हैं 'वफ़ा' की एक ख़ामी में</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘वफ़ा’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[नहीं आसाँ तो मुश्किल ही सही]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/12/25/%e0%a4%a8%e0%a4%b9%e0%a5%80%e0%a4%82-%e0%a4%86%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%81-%e0%a4%a4%e0%a5%8b-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%b2-%e0%a4%b9%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%b9/</link>
<pubDate>Tue, 25 Dec 2007 13:57:51 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
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<description><![CDATA[नहीं आसाँ तो मुश्किल ही सही
वह जो है मा]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">नहीं आसाँ तो मुश्किल ही सही<br />
वह जो है माहे-कामिल है वही</font></p>
<p><font color="#000000">मुझको तो इख़लास है उसी से<br />
ख़ुदा मुझसे संगदिल ही सही</font></p>
<p><font color="#000000">अजनबी है जी मेरा मुझसे ही<br />
वह दर्द से ग़ाफ़िल ही सही</font></p>
<p><font color="#000000">चश्मे-तर से न बुझी आतिश<br />
यह दाग़े-तहे-दिल ही सही</font></p>
<p><font color="#000000">मरहम न करो घाव पर मेरे<br />
चाहत मेरी नाक़ाबिल ही सही</font></p>
<p><font color="#000000">अंजाम की परवाह है किसको<br />
सीने में शीशाए-दिल ही सही</font></p>
<p><font color="#000000">उफ़ तक न की जाये तेरे ग़म में<br />
नालए-सोज़े-दिल है यही</font></p>
<p><font color="#000000">बोले है तेरा इश्क़ सर चढ़के<br />
ख़ुद में मुकम्मिल है यही</font></p>
<p><font color="#000000">चाँदनी रिदा है रोशनाई आज<br />
शाम को सुबह के साहिल ही सही</font></p>
<p><font color="#000000">अफ़सोस किस बात का नज़र<br />
तमाम उम्र का हासिल है यही</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[ख़ाब में लम्स था सुम्बुल का]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/11/30/%e0%a4%96%e0%a4%bc%e0%a4%be%e0%a4%ac-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b2%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%b8-%e0%a4%a5%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%ac%e0%a5%81%e0%a4%b2-%e0%a4%95/</link>
<pubDate>Fri, 30 Nov 2007 23:45:50 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/11/30/%e0%a4%96%e0%a4%bc%e0%a4%be%e0%a4%ac-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b2%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%b8-%e0%a4%a5%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%ac%e0%a5%81%e0%a4%b2-%e0%a4%95/</guid>
<description><![CDATA[ख़स्ताहाल है जो तेरा बीमार
क्यों नहीं ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">ख़स्ताहाल है जो तेरा बीमार<br />
क्यों नहीं हो तुम बेक़रार</font></p>
<p><font color="#000000">तुमने मुझसे बात नहीं की<br />
जला गयी मुझे आहे-शोलाबार</font></p>
<p><font color="#000000">शामे-ग़म मुझे दर्द थे<br />
और तुम आये गोया बहार</font></p>
<p><font color="#000000">पैराहन भीग जाता है लहू से<br />
यूँ बहते हैं दीदाए-फ़िगार</font></p>
<p><font color="#000000">देखना' न छूना मेरे ज़ख़्म<br />
जला न दे तुझे यह शरार</font></p>
<p><font color="#000000">दाइम मशगूले-हक़ हूँ मैं<br />
फिर भी आश्ना है अग़ियार</font></p>
<p><font color="#000000">कोई हसरत से देखे मुझे<br />
मैं उसे बना लूँ अपना प्यार</font></p>
<p><font color="#000000">तुमसे दोस्ती का बहाना मिले<br />
बन जाओ मेरे ग़मख़्वार</font></p>
<p><font color="#000000">ख़ाब में लम्स था सुम्बुल का<br />
वो क्या लम्हा था यादगार</font></p>
<p><font color="#000000">'नज़र' को न भाये कुछ अगर<br />
तो दिल में हो तुम बरक़रार</font></p>
<p>ख़स्ताहाल= abandon, बीमार= ill, बेक़रार= curious, आह= ah!, woe, शोला= fire, spark, गोया= like that, पैराहन= cloth, लहू= blood, दीदा= eyes, फ़िगार= afflicted, sore, ज़ख़्म= scar, wound, शरार= fire, spark, दाइम= always, मशगूल= busy, हक़= truth, आश्ना= friend, अग़ियार= enemy, ग़मख़्वार= who share sorrow, लम्स= touch, सुम्बुल= sumbul</p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र'<br />
लेखन वर्ष: २००५</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[अब 'विनय' तेरे ग़म से ग़ाफ़िल नहीं रहा]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/09/19/%e0%a4%85%e0%a4%ac-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a4%af-%e0%a4%a4%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a5%87-%e0%a5%9a%e0%a4%ae-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a5%9a%e0%a4%be%e0%a5%9e%e0%a4%bf%e0%a4%b2-%e0%a4%a8%e0%a4%b9/</link>
<pubDate>Wed, 19 Sep 2007 19:45:51 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/09/19/%e0%a4%85%e0%a4%ac-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a4%af-%e0%a4%a4%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a5%87-%e0%a5%9a%e0%a4%ae-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a5%9a%e0%a4%be%e0%a5%9e%e0%a4%bf%e0%a4%b2-%e0%a4%a8%e0%a4%b9/</guid>
<description><![CDATA[अब ‘विनय’ तेरे ग़म से ग़ाफ़िल नहीं रहा
दे]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">अब ‘विनय’ तेरे ग़म से ग़ाफ़िल नहीं रहा<br />
देख तो वो मग़रूर वो संगदिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">हमें कोई शिबासी दे हमने तेरा राज़ न खोला<br />
पर जानाँ ये जान लो मैं बातिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">तेरी कही सुनी सब मुझे वक़्त ने भुला दी<br />
ये ग़ैर तेरी दुश्मनी के क़ाबिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">हमें जब नाज़ थे तो ये दर्द किसलिए हैं<br />
तेरे बाद कोई चेहरा मुस्तक़िल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">तुम हमसे पूछो वह शामे-माज़ी की तन्हाई<br />
कभी कोई इतना दिल में दाख़िल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">तुमने ख़ुद मुझे अपना दोस्त बनाया होता<br />
तुम्हें तो कोई काम कभी मुश्किल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">हमसे एक-एक कर सब हाथ छूटते गये<br />
मेरे कूचे में वो माहे-कामिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">सद्-हैफ़ो-अफ़सोस से कलेजा भर आया<br />
हाए मुझे सिवा ग़म कुछ हासिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">हमें कोई देता ताक़ते-नज़्ज़ाराए-हुस्न<br />
सुना  है मेरी राह में कोई हाइल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">साँसों का धुँआ दिल को दर्द देता है बहुत<br />
ज़िन्दगी में बाइसे-मसाइल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">वो गुफ़्त-गू वो मशविरे वो बयान अपने<br />
ख़ुदा के ज़ख़्म देखे तो मैं बिस्मिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">गर्दिशे-अय्याम की रवानी देखकर<br />
मेरा दिले-सौदा मुज़महिल</font><font color="#c0c0c0">1</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">अब इस चमन में फिरती है खुश्क सबा<br />
मस्जूदा कोई जल्वाए-गुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">किसके दिन उम्रभर एक से रहते हैं<br />
मुझमें तो वो हुस्ने-अमल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">मेरी काविश</font><font color="#c0c0c0">2</font> का किसी राह तो हासिल होगा<br />
हैफ़ मेरे ग़म की कोई मंज़िल नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">मैं अहदे-ज़ीस्त करके किससे तोड़ूँ<br />
मुझे तफ़रकाए-नाक़िसो-कामिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">मुझे तुम छोड़कर गये लेकिन क्या बताऊँ<br />
एक अरसा बर्क़े-सोज़े-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">तुमको जाना है तो जाओ कब हमने रोका है<br />
किसी के जाने का ग़म हमें बिल्कुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">इस दरया को ख़्वाहिश है समंदर की<br />
और सहाब का बरसना मुसलसल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">सू-ए-शिर्क सजदे-मस्जूद किये मैंने<br />
क्योंकि मैं तेरे कूचे का माइल</font><font color="#c0c0c0">3</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">अब किससे करूँगा उसकी जफ़ा का शिकवा<br />
आज से कोई दराज़ दस्तिए-क़ातिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">इस ज़र्फ़ कोई आये तो देखे हाल बीमार का<br />
वो पुरसिशे-जराहते-दिल</font><font color="#c0c0c0">4</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">अच्छा हुआ तुमने रोज़े-आख़िर न बोला<br />
रोज़े-विदा से कोई उक़्दाए-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">दु:ख गिनते-गिनते उम्र कट जायेगी<br />
किसी की इनायत किसी का तग़ाफ़ुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">फ़िज़ा क्यों इतनी ख़ामोश है गुलशन में<br />
क्या आशियाँ में नालाए-बुलबुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">था तब मिला नहीं, खोकर मिलता है कौन<br />
दिल मुझे ख़्याले-यारे-वस्ल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">मैं जिसको दोस्त कह नहीं सकता अब<br />
मुझे उसके लिए जज़्बाए-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">किसको खरोंचे हो अपने नाख़ून से तुम<br />
इस सीने में कोई जराहते-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">उर्दी-ओ-दै का अब मैं क्या ख़्याल रखूँ<br />
ये कैसी जलन, मुझे तपिशे-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">अपनी यकताई पर बेहद नाज़ था हमको<br />
आज भी है लेकिन वो मुतक़ाबिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">अब भी खिलती है शुआहाए-ख़ुर-फ़ज़िर <br />
मगर फ़िज़ा में शाहिद-ए-गुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">बहुत ढूँढ़ा हमने उसके जैसा, न पाया एक<br />
वो नमकपाशे-ख़राशे-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">अब ख़ुल्द में रहें या दोज़ख में रहें हम<br />
ऐ सनम मेरा तो आबो-गिल</font><font color="#c0c0c0">5</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">उस फ़ितनाख़ेज़ का नहीं अब डर मुझको<br />
कि मेरे दिल में स’इ-ए-बेहासिल</font><font color="#c0c0c0">6</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">आँखों से निक़ाब उठाओ कि वहम खुल जाये<br />
कि तुझमें वो तर्ज़े-तग़ाफ़ुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">कहने को तो ज़ामिन नहीं मुझसा ज़माने में<br />
पर जाने क्यों मुझे तहम्मुल</font><font color="#c0c0c0">7</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">वो जिसकी चाप से धड़कनें रुक जायें थीं<br />
ज़िन्दगी में वो हौले-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">ऐ लोगों मैं ख़ुद को किस ज़ात का बताऊँ<br />
सुना है तुममें ज़रा भी दीनो-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">दायम अपने बग़ल में पाओगे तुम हमको<br />
चाहो तो कह लो मैं तुझमें मुश्तमिल</font><font color="#c0c0c0">8</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">क्यों है मुझको तेरे रूठ कर जाने का ग़म<br />
जबकि जानते हो मैं कभी तेरा काइल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">कहता तो हूँ बात दिल की मगर क्या करूँ<br />
मेरा कोई भी ख़्याल मानिन्दे-गुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">उसकी ख़ामोश आँखों में अयाँ थीं बातें दिल की<br />
वो चाहकर भी कभी सू-ए-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">किया जो मैंने तुम्हें अपना समझकर किया<br />
ये दिल तेरी जफ़ा से मुनफ़’इल</font><font color="#c0c0c0">9</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">मैंने देखा था उसे जाते ख़ुल्द की ओर<br />
वो हलाके-फ़रेब-वफ़ा-ए-गुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">जो कभी साहिल पर था कभी समंदर में<br />
उसको दाग़े-हसरते-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">जिसपे लिखा करते थे तुम अपना नाम<br />
शख़्स वो आज गर्दे-साहिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">आज फ़ारिग</font><font color="#c0c0c0">10</font> हूँ कि तुम हो मेरे ग़मख़्वार<br />
मैं हरीफ़े-मतलबे-मुश्किल<font color="#c0c0c0">11</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">था तो थोड़ा बहुत मैं ये मानता हूँ लेकिन<br />
आज उतना भी तो सोज़िशे-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">मैं दर्द को दिल से जुदा कर सकता हूँ<br />
पर फ़ुसूने-ख़्वाहिशे-सैक़ल</font><font color="#c0c0c0">12</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">अब मैं किस मुँह से जाऊँ बज़्म में उसकी<br />
ये दिल दरख़ुर-ए-महफ़िल</font><font color="#c0c0c0">13</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">देखिए शाइबाए-ख़ूबिए-तक़दीर</font><font color="#c0c0c0">14</font> उसमें<br />
वो दिन गया कि रोज़े-अजल नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">इश्क़ फिरता था उस रोज़ गलियों-गलियों<br />
आज किसी में इतना भी ख़लल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">बढ़के आया तो लगा तेरा तीर इस दिल में<br />
चारासाज़ न हुआ पर जाँगुसिल</font><font color="#c0c0c0">15</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">किसपे लिखके भेजूँ मैं तुझे पयाम अपना<br />
पास औराक़े-लख़्ते-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">आस्माँ के पार जाने की तमन्ना थी उसको<br />
पर आइना-ए-बेमेहरि-ए-क़ातिल</font><font color="#c0c0c0">16</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">मेरे मुँह से न सुनो वज्हे-सुखन ईसा<br />
ख़ुद गुलों में रंगे-अदा-ए-गुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">मगर टूटा है किसी का नाज़ुक दिल मुझसे<br />
ये डर कि मैं क़ाबिले-सुम्बुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">अब कोई रहनुमा नहीं रहे-इश्क़ में<br />
तुम ख़ुश रहो तेरी राह में साइल</font><font color="#c0c0c0">17</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#999999">१. </font><font color="#000000">निष्तेज</font> २. <font color="#000000">कोशिश, द्वेष</font> ३. <font color="#000000">अनुरक्त, आसक्त</font> ४. <font color="#000000">दिल के ज़ख़्म का हाल पूछने वाला<br />
</font>५. <font color="#000000">शरीर और आकार</font> ६. <font color="#000000">निष्फल प्रयत्न</font> ७. <font color="#000000">दिल की घबराहट, सहनशक्ति</font> ८.<font color="#000000"> शामिल</font><br />
९. <font color="#000000">लज्जित</font> १०. <font color="#000000">निश्चिंत</font> ११. <font color="#000000">कठिन काम कर लेने वाला</font> १२. <font color="#000000">परिष्कृति की अभिलाषा का जादू</font><br />
१३. <font color="#000000">महफ़िल के योग्य</font> १४. <font color="#000000">सौभाग्य की झलक</font> १५. <font color="#000000">जानलेवा, दुखदायी</font><br />
१६. <font color="#000000">माशूक़ की बेरहमी का सुबूत</font> १७. <font color="#000000">उम्मीदवार, प्रश्नकर्ता</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति 'नज़र'<br />
लेखन वर्ष: २००५</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[ज़िन्दगी माने हो तुम]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/09/15/%e0%a5%9b%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a4%97%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%b9%e0%a5%8b-%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%ae/</link>
<pubDate>Sat, 15 Sep 2007 11:27:07 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
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<description><![CDATA[ज़िन्दगी माने हो तुम
साँसें तुम्हारा ए]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">ज़िन्दगी माने हो तुम<br />
साँसें तुम्हारा एहसास हैं<br />
यादें बाइस हैं ज़ीस्त को<br />
तेरी तमन्ना है खु़शी<br />
ग़म है तेरी जुदाई<br />
ज़ख़्मे-दिल ही मरहम<br />
ज़ख़्मे-दिल ही दवा<br />
और चारागर हो तुम...</font></p>
<p><font color="#000000">आप ही हँसना है<br />
आप ही रोना है<br />
दिन-रात ख़्यालों में<br />
तुमसे बातें करना<br />
सब जीने का मतलब है<br />
खा़ली सीने में दिल कहाँ है<br />
वह तो तुम्हारे पास है<br />
जो सीने में धड़कता है<br />
महज़ तुम्हारा एहसास है</font></p>
<p><font color="#000000">जब भी बेले की कली खुलती है<br />
और गुलाब महकता है<br />
यूँ एहसास होता है उसे छूकर<br />
जैसे तुमको छू लिया है<br />
तुम मुझसे नाआश्ना हो<br />
मगर मैं तुमसे दूर नहीं<br />
यह दूरियाँ यह फ़ासले<br />
सब कम हो जायेंगे<br />
बस तुम्हारे घर का पता मिले</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४ </p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[जब बात करते हुए देखता हूँ]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/08/27/%e0%a4%9c%e0%a4%ac-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a5%87-%e0%a4%b9%e0%a5%81%e0%a4%8f-%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%96%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%82%e0%a4%81/</link>
<pubDate>Mon, 27 Aug 2007 21:31:01 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
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<description><![CDATA[तमन्ना बेताब रहती है
और खा़हिश परेशाँ
]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">तमन्ना बेताब रहती है<br />
और खा़हिश परेशाँ<br />
उदास आईने-<br />
खु़द-ब-खु़द टूटते रहते हैं<br />
राह चलती रहती है<br />
पाँव थक जाते हैं<br />
उम्र कम होती रहती है<br />
साल बढ़ते रहते हैं</span></p>
<p><span style="color:#000000;">रात जागती है आँखों में<br />
दिन वीरान उजाड़ गुज़रता है<br />
उँगलियों में उँगलियों से<br />
और निगाहों को बदन से<br />
जब बात करते हुए देखता हूँ<br />
तेरी याद खा़मोश रह जाती है<br />
कुछ सुलगता रहता है सीने में</span></p>
<p><span style="color:#000000;">तन्हाई का साया न टलता है<br />
दिल की ख़ला न घटती है<br />
अरमान सूखे हुए पत्तों की तरह<br />
ज़मीन पर पडे़ रहते हैं<br />
आँसुओं में भीगते-भीगते<br />
ज़मीन में जज़्ब हो जाते हैं<br />
दफ़्न हो जाते हैं</span></p>
<p><span style="color:#000000;">दिल के टूटने से<br />
फ़र्क साँस लेने लग जाता है<br />
फ़ज़ा तो नहीं बदलती<br />
लेकिन उसकी छुअन<br />
और एहसास के ज़ख़्म हरे हो जाते हैं<br />
लम्हा-लम्हा मन ग़म में डूबता जाता है<br />
और गीला-गीला जलता रहता है<br />
</span> </p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति 'नज़र'</p>
]]></content:encoded>
</item>

</channel>
</rss>
