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	<title>गुलशन &amp;laquo; WordPress.com Tag Feed</title>
	<link>http://wordpress.com/tag/गुलशन/</link>
	<description>Feed of posts on WordPress.com tagged "गुलशन"</description>
	<pubDate>Fri, 05 Sep 2008 07:00:31 +0000</pubDate>

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<title><![CDATA[हँसते है ज़माने मैं और भी कई...]]></title>
<link>http://meredilne.wordpress.com/?p=24</link>
<pubDate>Mon, 09 Jun 2008 14:53:55 +0000</pubDate>
<dc:creator>Amarjeet Singh</dc:creator>
<guid>http://meredilne.wordpress.com/?p=24</guid>
<description><![CDATA[हँसते है ज़माने मैं और भी कई,
दिल से हँस]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>हँसते है ज़माने मैं और भी कई,<br />
दिल से हँसते पहली बार देखा है,<br />
आज मैंने उनको हँसते हुए देखा है,<br />
उनकी हँसी दिल को छू जाती है,<br />
चुपके चुपके कुछ कह जाती है,<br />
कसम है उदास न होना तुम कभी,<br />
ये खूबसूरत हँसी न खोना कभी,<br />
तेरी हँसी से है गुलशन खिले,<br />
आता है सावन है फूल खिले,</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[तुम्हारी ख़ुशबू से महक उठा है मन]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=956</link>
<pubDate>Wed, 02 Apr 2008 17:03:18 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=956</guid>
<description><![CDATA[तुम्हारी ख़ुशबू से महक उठा है मन
तुम्ह]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">तुम्हारी ख़ुशबू से महक उठा है मन<br />
तुम्हारे तस्व्वुर से भर आये नयन<br />
बरखा की मखमली फुहार से जी तर है<br />
धीरे-धीरे बुझ रही है दर्द की सूजन</font></p>
<p><font color="#000000">लहू फिर ज़ख़्मे-जिगर से बहा है<br />
दर्द तुम्हारा दिल में मेहमान रहा है<br />
सर्द है बरसों से यह ख़िज़ाँ का मौसम<br />
ज़र्द पत्तों में खो गया है कहीं गुलशन</font></p>
<p><font color="#000000">बहार की नर्म धूप कहीं खो गयी है<br />
मानूस वह चाँदनी किसी छत पे सो गयी है<br />
यह उदास फ़ज़िर भी कितनी तवील है<br />
दिखता नहीं दूर तक उफ़क़ का रोगन</font></p>
<p><font color="#000000">तुमको पहली नज़र से चाहा दिलो-जाँ से<br />
हर दुआ में मैंने तुमको माँगा आसमाँ से<br />
मेरी मंज़िल मेरी मोहब्बत हो तुम<br />
कैसे भी तुम मेरी बनो, जुड़ जाये बन्धन</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[कोई आता है ज़िन्दगी में]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=792</link>
<pubDate>Sun, 17 Feb 2008 10:06:45 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=792</guid>
<description><![CDATA[कोई आता है ज़िन्दगी में, जैसे रोशनी
जज़्]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">कोई आता है ज़िन्दगी में, जैसे रोशनी<br />
जज़्बों का शौक़ के बाद क्यों कुछ कमी<br />
उसकी आँखें हमने देखी हैं नीली-नीली<br />
जिनसे मेरे ख़ाबों की दुनिया है उजली</font></p>
<p><font color="#000000">उसने आने से खिलते हैं गुलशन हज़ार<br />
जानता है हर कोई यहाँ जो है तलबगार<br />
लाखों-करोड़ों में उसके जैसा कोई नहीं<br />
वह यार बने मेरा इतना तन्हा वह नहीं</font></p>
<p><font color="#000000">उसे देखते हैं सभी रखते हैं दिल उधार<br />
उड़ें बादलों के टुकड़े आसमाँ में बेशुमार<br />
कोई आता है ज़िन्दगी में, जैसे रोशनी<br />
जज़्बों का शौक़ के बाद क्यों कुछ कमी</font></p>
<p><font color="#000000">मौसम लौटा आया, लौट आयी है बहार<br />
वह सूखे बाग़ीचे हमने देखे हैं गुलज़ार<br />
उसकी आँखें हमने देखी हैं नीली-नीली<br />
जिनसे मेरे ख़ाबों की दुनिया है उजली</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[चाँद गवाह है मेरे प्यार का ]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=772</link>
<pubDate>Thu, 14 Feb 2008 08:15:01 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=772</guid>
<description><![CDATA[चाँद गवाह है मेरे प्यार का
क्या यही ख़]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">चाँद गवाह है मेरे प्यार का<br />
क्या यही ख़्याल है, मेरे यार का<br />
कुछ न ख़बर हुई उस पल की<br />
कुछ न पता चला उस पल का<br />
उसके चेहरे पर नज़र रुकी<br />
क्या ख़बर क्या गया, क्या मिला </font></p>
<p><font color="#000000">हर लम्हा इन्तज़ार नये ख़ाब का<br />
क्या ऐसा ही हाल है मेरे यार का<br />
जाने ना मिलें या न मिलें<br />
उनसे हम कभी दोबारा<br />
जाने फिर खिले या न खिले<br />
वह गुलशन देखा हुआ नज़ारा</font></p>
<p><font color="#000000">चाँद गवाह है मेरे प्यार का<br />
क्या यही ख़्याल है, मेरे यार का </font></p>
<p><font color="#000000">मैंने जिसे चाहा उसने मुझे चाहा<br />
इस बात की ख़बर नहीं<br />
बहती हवा भी मुँहज़ोर नहीं<br />
तन में तपिश करती है चाँदनी<br />
यह असर है पहले प्यार का<br />
क्या ऐसा ही हाल है मेरे यार का</font></p>
<p><font color="#000000">चाँद गवाह है मेरे प्यार का<br />
क्या यही ख़्याल है, मेरे यार का </font></p>
<p><font color="#000000">दिल में दर्द की आतिश जल रही है<br />
तुम्हें पाने की चाहत बढ़ रही है<br />
दिल मेरा बेताब है<br />
जाने कहाँ दमका माहताब है<br />
ऐसा रूप-रंग है मेरे यार का<br />
रोशन कर दे दिल जाँनिसार का</font></p>
<p><font color="#000000">चाँद गवाह है मेरे प्यार का<br />
क्या यही ख़्याल है, मेरे यार का</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[तू संग न होगा]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/12/28/%e0%a4%a4%e0%a5%82-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%97-%e0%a4%a8-%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%97%e0%a4%be/</link>
<pubDate>Fri, 28 Dec 2007 08:45:59 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/12/28/%e0%a4%a4%e0%a5%82-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%97-%e0%a4%a8-%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%97%e0%a4%be/</guid>
<description><![CDATA[तू कर यह वादा भी मेरे अल्लाह तू संग न हो]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">तू कर यह वादा भी मेरे अल्लाह तू संग न होगा<br />
तू है भी अगर किसी बुते-संग में तू संग न होगा</font></p>
<p><font color="#000000">तेरी मर्ज़ी से यह गुलशन वीरानो-गुल्ज़ार हैं<br />
मैं दुआ करूँगा दमे-आख़िर तक तू संग न होगा</font></p>
<p><font color="#000000">मेरी क़िस्मत में क्या बदा है एक तू ही जानता है<br />
गर हुआ कभी मेरी दुआ का हश्र तू संग न होगा</font></p>
<p><font color="#000000">जुज़ मेरे हर मुक़ाम पर इक मुक़ीम दिखता  है<br />
मैं तन्हा खड़ा हूँ कब से राह में तू संग न होगा</font></p>
<p><font color="#000000">मत कर फ़िक्र मेरे 'वफ़ा' यह तेरा अंजाम नहीं<br />
दिल दुखते-दुखते भी कहता रहा तू संग न होगा</font></p>
<p><font color="#333399">इस ग़ज़ल में संग एक उर्दू अल्फ़ाज़ है जिसका अर्थ पत्थर होता है&#124;</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘वफ़ा’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[आदाब तुझे ऐ मेरे वतन लखनऊ]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/12/25/%e0%a4%86%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%ac-%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%9d%e0%a5%87-%e0%a4%90-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a5%87-%e0%a4%b5%e0%a4%a4%e0%a4%a8-%e0%a4%b2%e0%a4%96%e0%a4%a8%e0%a4%8a/</link>
<pubDate>Tue, 25 Dec 2007 14:41:41 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
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<description><![CDATA[आदाब तुझे ऐ मेरे वतन लखनऊ
आदाब तुझे मे]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">आदाब तुझे ऐ मेरे वतन लखनऊ<br />
आदाब तुझे मेरे जानो-तन लखनऊ</font></p>
<p><font color="#000000">है कभी आईना कभी शराब-सा तू<br />
है मेरी शोख़ी मेरा बाँकपन लखनऊ</font></p>
<p><font color="#000000">है तू ही मुस्लमाँ और तू ही है हिन्दू<br />
निकहते रहे तेरे गुलशन लखनऊ</font></p>
<p><font color="#000000">लहज़ा लुत्फ़ ज़ुबाँ और मेरी यह ख़ू<br />
हर चीज़ है जैसे मेरा चमन लखनऊ</font></p>
<p><font color="#000000">है जन्नतो-इरम इसमें हर कू<br />
लहू में दौड़ता है जाने-मन लखनऊ</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[अब 'विनय' तेरे ग़म से ग़ाफ़िल नहीं रहा]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/09/19/%e0%a4%85%e0%a4%ac-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a4%af-%e0%a4%a4%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a5%87-%e0%a5%9a%e0%a4%ae-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a5%9a%e0%a4%be%e0%a5%9e%e0%a4%bf%e0%a4%b2-%e0%a4%a8%e0%a4%b9/</link>
<pubDate>Wed, 19 Sep 2007 19:45:51 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
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<description><![CDATA[अब ‘विनय’ तेरे ग़म से ग़ाफ़िल नहीं रहा
दे]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">अब ‘विनय’ तेरे ग़म से ग़ाफ़िल नहीं रहा<br />
देख तो वो मग़रूर वो संगदिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">हमें कोई शिबासी दे हमने तेरा राज़ न खोला<br />
पर जानाँ ये जान लो मैं बातिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">तेरी कही सुनी सब मुझे वक़्त ने भुला दी<br />
ये ग़ैर तेरी दुश्मनी के क़ाबिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">हमें जब नाज़ थे तो ये दर्द किसलिए हैं<br />
तेरे बाद कोई चेहरा मुस्तक़िल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">तुम हमसे पूछो वह शामे-माज़ी की तन्हाई<br />
कभी कोई इतना दिल में दाख़िल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">तुमने ख़ुद मुझे अपना दोस्त बनाया होता<br />
तुम्हें तो कोई काम कभी मुश्किल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">हमसे एक-एक कर सब हाथ छूटते गये<br />
मेरे कूचे में वो माहे-कामिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">सद्-हैफ़ो-अफ़सोस से कलेजा भर आया<br />
हाए मुझे सिवा ग़म कुछ हासिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">हमें कोई देता ताक़ते-नज़्ज़ाराए-हुस्न<br />
सुना  है मेरी राह में कोई हाइल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">साँसों का धुँआ दिल को दर्द देता है बहुत<br />
ज़िन्दगी में बाइसे-मसाइल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">वो गुफ़्त-गू वो मशविरे वो बयान अपने<br />
ख़ुदा के ज़ख़्म देखे तो मैं बिस्मिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">गर्दिशे-अय्याम की रवानी देखकर<br />
मेरा दिले-सौदा मुज़महिल</font><font color="#c0c0c0">1</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">अब इस चमन में फिरती है खुश्क सबा<br />
मस्जूदा कोई जल्वाए-गुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">किसके दिन उम्रभर एक से रहते हैं<br />
मुझमें तो वो हुस्ने-अमल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">मेरी काविश</font><font color="#c0c0c0">2</font> का किसी राह तो हासिल होगा<br />
हैफ़ मेरे ग़म की कोई मंज़िल नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">मैं अहदे-ज़ीस्त करके किससे तोड़ूँ<br />
मुझे तफ़रकाए-नाक़िसो-कामिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">मुझे तुम छोड़कर गये लेकिन क्या बताऊँ<br />
एक अरसा बर्क़े-सोज़े-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">तुमको जाना है तो जाओ कब हमने रोका है<br />
किसी के जाने का ग़म हमें बिल्कुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">इस दरया को ख़्वाहिश है समंदर की<br />
और सहाब का बरसना मुसलसल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">सू-ए-शिर्क सजदे-मस्जूद किये मैंने<br />
क्योंकि मैं तेरे कूचे का माइल</font><font color="#c0c0c0">3</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">अब किससे करूँगा उसकी जफ़ा का शिकवा<br />
आज से कोई दराज़ दस्तिए-क़ातिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">इस ज़र्फ़ कोई आये तो देखे हाल बीमार का<br />
वो पुरसिशे-जराहते-दिल</font><font color="#c0c0c0">4</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">अच्छा हुआ तुमने रोज़े-आख़िर न बोला<br />
रोज़े-विदा से कोई उक़्दाए-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">दु:ख गिनते-गिनते उम्र कट जायेगी<br />
किसी की इनायत किसी का तग़ाफ़ुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">फ़िज़ा क्यों इतनी ख़ामोश है गुलशन में<br />
क्या आशियाँ में नालाए-बुलबुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">था तब मिला नहीं, खोकर मिलता है कौन<br />
दिल मुझे ख़्याले-यारे-वस्ल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">मैं जिसको दोस्त कह नहीं सकता अब<br />
मुझे उसके लिए जज़्बाए-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">किसको खरोंचे हो अपने नाख़ून से तुम<br />
इस सीने में कोई जराहते-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">उर्दी-ओ-दै का अब मैं क्या ख़्याल रखूँ<br />
ये कैसी जलन, मुझे तपिशे-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">अपनी यकताई पर बेहद नाज़ था हमको<br />
आज भी है लेकिन वो मुतक़ाबिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">अब भी खिलती है शुआहाए-ख़ुर-फ़ज़िर <br />
मगर फ़िज़ा में शाहिद-ए-गुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">बहुत ढूँढ़ा हमने उसके जैसा, न पाया एक<br />
वो नमकपाशे-ख़राशे-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">अब ख़ुल्द में रहें या दोज़ख में रहें हम<br />
ऐ सनम मेरा तो आबो-गिल</font><font color="#c0c0c0">5</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">उस फ़ितनाख़ेज़ का नहीं अब डर मुझको<br />
कि मेरे दिल में स’इ-ए-बेहासिल</font><font color="#c0c0c0">6</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">आँखों से निक़ाब उठाओ कि वहम खुल जाये<br />
कि तुझमें वो तर्ज़े-तग़ाफ़ुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">कहने को तो ज़ामिन नहीं मुझसा ज़माने में<br />
पर जाने क्यों मुझे तहम्मुल</font><font color="#c0c0c0">7</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">वो जिसकी चाप से धड़कनें रुक जायें थीं<br />
ज़िन्दगी में वो हौले-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">ऐ लोगों मैं ख़ुद को किस ज़ात का बताऊँ<br />
सुना है तुममें ज़रा भी दीनो-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">दायम अपने बग़ल में पाओगे तुम हमको<br />
चाहो तो कह लो मैं तुझमें मुश्तमिल</font><font color="#c0c0c0">8</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">क्यों है मुझको तेरे रूठ कर जाने का ग़म<br />
जबकि जानते हो मैं कभी तेरा काइल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">कहता तो हूँ बात दिल की मगर क्या करूँ<br />
मेरा कोई भी ख़्याल मानिन्दे-गुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">उसकी ख़ामोश आँखों में अयाँ थीं बातें दिल की<br />
वो चाहकर भी कभी सू-ए-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">किया जो मैंने तुम्हें अपना समझकर किया<br />
ये दिल तेरी जफ़ा से मुनफ़’इल</font><font color="#c0c0c0">9</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">मैंने देखा था उसे जाते ख़ुल्द की ओर<br />
वो हलाके-फ़रेब-वफ़ा-ए-गुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">जो कभी साहिल पर था कभी समंदर में<br />
उसको दाग़े-हसरते-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">जिसपे लिखा करते थे तुम अपना नाम<br />
शख़्स वो आज गर्दे-साहिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">आज फ़ारिग</font><font color="#c0c0c0">10</font> हूँ कि तुम हो मेरे ग़मख़्वार<br />
मैं हरीफ़े-मतलबे-मुश्किल<font color="#c0c0c0">11</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">था तो थोड़ा बहुत मैं ये मानता हूँ लेकिन<br />
आज उतना भी तो सोज़िशे-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">मैं दर्द को दिल से जुदा कर सकता हूँ<br />
पर फ़ुसूने-ख़्वाहिशे-सैक़ल</font><font color="#c0c0c0">12</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">अब मैं किस मुँह से जाऊँ बज़्म में उसकी<br />
ये दिल दरख़ुर-ए-महफ़िल</font><font color="#c0c0c0">13</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">देखिए शाइबाए-ख़ूबिए-तक़दीर</font><font color="#c0c0c0">14</font> उसमें<br />
वो दिन गया कि रोज़े-अजल नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">इश्क़ फिरता था उस रोज़ गलियों-गलियों<br />
आज किसी में इतना भी ख़लल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">बढ़के आया तो लगा तेरा तीर इस दिल में<br />
चारासाज़ न हुआ पर जाँगुसिल</font><font color="#c0c0c0">15</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">किसपे लिखके भेजूँ मैं तुझे पयाम अपना<br />
पास औराक़े-लख़्ते-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">आस्माँ के पार जाने की तमन्ना थी उसको<br />
पर आइना-ए-बेमेहरि-ए-क़ातिल</font><font color="#c0c0c0">16</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">मेरे मुँह से न सुनो वज्हे-सुखन ईसा<br />
ख़ुद गुलों में रंगे-अदा-ए-गुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">मगर टूटा है किसी का नाज़ुक दिल मुझसे<br />
ये डर कि मैं क़ाबिले-सुम्बुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">अब कोई रहनुमा नहीं रहे-इश्क़ में<br />
तुम ख़ुश रहो तेरी राह में साइल</font><font color="#c0c0c0">17</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#999999">१. </font><font color="#000000">निष्तेज</font> २. <font color="#000000">कोशिश, द्वेष</font> ३. <font color="#000000">अनुरक्त, आसक्त</font> ४. <font color="#000000">दिल के ज़ख़्म का हाल पूछने वाला<br />
</font>५. <font color="#000000">शरीर और आकार</font> ६. <font color="#000000">निष्फल प्रयत्न</font> ७. <font color="#000000">दिल की घबराहट, सहनशक्ति</font> ८.<font color="#000000"> शामिल</font><br />
९. <font color="#000000">लज्जित</font> १०. <font color="#000000">निश्चिंत</font> ११. <font color="#000000">कठिन काम कर लेने वाला</font> १२. <font color="#000000">परिष्कृति की अभिलाषा का जादू</font><br />
१३. <font color="#000000">महफ़िल के योग्य</font> १४. <font color="#000000">सौभाग्य की झलक</font> १५. <font color="#000000">जानलेवा, दुखदायी</font><br />
१६. <font color="#000000">माशूक़ की बेरहमी का सुबूत</font> १७. <font color="#000000">उम्मीदवार, प्रश्नकर्ता</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति 'नज़र'<br />
लेखन वर्ष: २००५</p>
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