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	<title>गुल &amp;laquo; WordPress.com Tag Feed</title>
	<link>http://wordpress.com/tag/गुल/</link>
	<description>Feed of posts on WordPress.com tagged "गुल"</description>
	<pubDate>Mon, 08 Sep 2008 06:29:38 +0000</pubDate>

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<item>
<title><![CDATA[ख़ुशबू बिछायी है राहों में]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=1020</link>
<pubDate>Wed, 16 Jul 2008 08:55:35 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=1020</guid>
<description><![CDATA[ख़ुशबू बिछायी है राहों में
तुम चले आओ, ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">ख़ुशबू बिछायी है राहों में<br />
तुम चले आओ, तुम चले आओ<br />
दिल बेक़रार है बहुत<br />
तुम चले आओ, तुम चले आओ</span></p>
<p><span style="color:#000000;">मौसम बड़ा गुलाबी है<br />
गुलाबी गुल हैं शाख़ों पर<br />
अब और न तरसाओ</span></p>
<p><span style="color:#000000;">ख़ुशबू बिछायी है राहों में<br />
तुम चले आओ...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">दिल धड़क रहा है<br />
धड़क रही है नब्ज़-नब्ज़<br />
धड़कनें और न बढ़ाओ</span></p>
<p><span style="color:#000000;">ख़ुशबू बिछायी है राहों में<br />
तुम चले आओ...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">बरखा बहार आयी है<br />
बरस रही है धरा पर<br />
अब और न तड़पाओ</span></p>
<p><span style="color:#000000;">ख़ुशबू बिछायी है राहों में<br />
तुम चले आओ...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">आँचल उड़ाकर अपना<br />
चेहरा दिखा दो<br />
न चुराओ नज़र, न चुराओ</span></p>
<p><span style="color:#000000;">ख़ुशबू बिछायी है राहों में<br />
तुम चले आओ...<br />
दिल बेक़रार है बहुत<br />
तुम चले आओ...</span></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[भीगी चाँदनी रातों में]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=1016</link>
<pubDate>Sat, 12 Jul 2008 13:50:28 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=1016</guid>
<description><![CDATA[भीगी चाँदनी रातों में
दिल से तेरी बातो]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">भीगी चाँदनी रातों में<br />
दिल से तेरी बातों में<br />
ऐसा लग रहा है<br />
तू मेरी बन गयी है<br />
मैं तेरा बन गया हूँ</span></p>
<p><span style="color:#000000;">ख़ाब बुनती हैं आँखें<br />
फूलों से लदी हैं शाख़ें<br />
ऐसा लग रहा है<br />
तू ख़ुशबू बन गयी है<br />
मैं गुल बन गया हूँ</span></p>
<p><span style="color:#000000;">हल्की-हल्की आँच है<br />
मेरी नब्ज़ में काँच है<br />
ऐसा लग रहा है<br />
तू लहू बन गयी है<br />
मैं जिस्म बन गया हूँ</span></p>
<p><span style="color:#000000;">तारे, चिंगारियाँ हैं<br />
चाँदनी, उजली बर्फ़ है<br />
ऐसा लग रहा है<br />
तू लौ बन गयी है<br />
मैं दीप बन गया हूँ</span></p>
<p><span style="color:#000000;">लफ़्ज़ मीठे-मीठे हैं<br />
ग़म फीके-फीके हैं<br />
ऐसा लग रहा है<br />
तू मिसरी बन गयी है<br />
मैं ज़बाँ बन गया हूँ</span></p>
<p><span style="color:#000000;">दिल ग़मख़्वार है<br />
मौसम ख़ुशगँवार है<br />
ऐसा लग रहा है<br />
तू दिल बन गयी है<br />
मैं जाँ बन गया हूँ</span></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[एक लड़की ]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=980</link>
<pubDate>Wed, 11 Jun 2008 15:50:34 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=980</guid>
<description><![CDATA[एक लड़की मुझको सारा दिन परेशाँ किये घू]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">एक लड़की मुझको सारा दिन परेशाँ किये घूमती है<br />
ख़ाबों में भी आयी ख़्यालों को हैराँ किये रहती है</span></p>
<p><span style="color:#000000;">उसकी बातों में जाने कैसी ख़ुशबू है नाज़ुक मिज़ाज की<br />
अदाए-हरकत है कभी गुल तो कभी मिराज़ की</span></p>
<p><span style="color:#000000;">यूँ तो इस जा में मेरी शख़्सियत है खाकसार-सी<br />
लफ़्ज़ यूँ बुनती है' जैसे हूँ तबीयत ख़ाबे-ख़ुमार की</span></p>
<p><span style="color:#000000;">चाहती क्या है, बात क्या है, मैं पता करूँ तो कैसे?<br />
दर्दो-ग़म की बात छोड़, दिल का भेद तो कह दे!</span></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[इश्क़ सुना है हमने बहुत]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=972</link>
<pubDate>Sun, 11 May 2008 13:33:10 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=972</guid>
<description><![CDATA[इश्क़ सुना है हमने बहुत
ज़रा करके तो देख]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">इश्क़ सुना है हमने बहुत<br />
ज़रा करके तो देखें<br />
मिल जाये कोई कमसिन हसीना<br />
उसपे मरके तो देखें<br />
हाए रे हाए, हाए रे हाए<br />
इश्क़ करके तो देखें</span></p>
<p><span style="color:#000000;">सुना है हसीं होता है इश्क़<br />
इश्क़ में सभी मौसम हसीं हो जाते हैं<br />
ख़ुश्बू है कोई, हाथों से छुई<br />
मुरझाये गुल, ताज़ा-तरीं हो जाते हैं</span></p>
<p><span style="color:#000000;">मिल जाये कोई कमसिन हसीना<br />
उसपे मरके तो देखें<br />
हाए रे हाए, हाए रे हाए<br />
इश्क़ करके तो देखें</span></p>
<p><span style="color:#000000;">कोई फुलझड़ी, कोई रूबीना<br />
कभी तो पास आये, लौ से लौ लगाये<br />
आये ज़रा, लगके मेरे गले<br />
दिल की प्यास बुझाये, बे-तस्कीं मिटाये</span></p>
<p><span style="color:#000000;">अब तक हसीं, देखे कई<br />
वह तो इनमें नहीं हैं<br />
हाए रे हाए, हाए रे हाए<br />
वह तो और कहीं हैं</span></p>
<p><span style="color:#000000;">कमबख़्त यह दिल परेशाँ<br />
जलता है ख़ुद, मुझको जलाता भी है<br />
ऐ मेरे ख़ुदा क्या मुझसे गिला<br />
तू क्यों मुझको उससे मिलाता नहीं है<br />
</span></p>
<p><span style="color:#000000;">इश्क़ सुना है हमने बहुत<br />
ज़रा करके तो देखें...</span></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[राहे-इश्क़ में मुश्किल ही सही पार उतरना]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=960</link>
<pubDate>Sun, 06 Apr 2008 18:17:23 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=960</guid>
<description><![CDATA[राहे-इश्क़ में मुश्किल ही सही पार उतरना]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">राहे-इश्क़ में मुश्किल ही सही पार उतरना<br />
मगर हम शोलों पर भी चलकर जायेंगे<br />
हमें तो चाह है तेरे इश्क़ की रोज़े-अव्वल से<br />
तुम नहीं जानते क्या कर गुज़र जायेंगे</span></p>
<p><span style="color:#000000;">है हर गुल को छूने से तेरा लम्स हासिल<br />
मगर यह चमन इक रोज़ बिखर जायेंगे<br />
लम्हे यह बहुत उदास-उदास हैं तुम बिन<br />
तुम आओगे रंगो-शाद से निखर जायेंगे</span></p>
<p><span style="color:#000000;">मेहरबानिए-इश्क़ कभी तुम हमसे निबाहो<br />
हम बिगड़ी क़िस्मत हैं सँवर जायेंगे<br />
मरना तो एक न एक दिन सबको है हमदम<br />
जान लो तेरे इश्क़ की ख़ातिर मर जायेंगे</span></p>
<p><span style="color:#000000;">सदफ़ में गौहर की तरह दिल में तुम रहते हो<br />
ज़ीस्त है तुमसे, तुम बिन ज़रर जायेंगे<br />
ख़ातिर से अपने तुम नवाज़ दो हमको मेहरबाँ<br />
तेरे दिल तक आँसुओं में बहकर जायेंगे</span></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[तन्हाई मिटाने दो]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=870</link>
<pubDate>Sun, 02 Mar 2008 12:55:18 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=870</guid>
<description><![CDATA[तन्हाई मिटाने दो
किस्से सुनाने दो
सुब]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">तन्हाई मिटाने दो<br />
किस्से सुनाने दो<br />
सुबह बह जायेगी<br />
रोशनी उगाने दो</font></p>
<p><font color="#000000">तितलियों के परों-सी<br />
बारिश के घरों-सी<br />
छोटी-सी ज़िन्दगी यह<br />
किताब के हर्फ़ों-सी</font></p>
<p><font color="#000000">आइने में अक्स है<br />
वहाँ कौन शख़्स है<br />
मेंहदी धुल गयी सब<br />
मुझमें नक़्स है</font></p>
<p><font color="#000000">बदली और पवन ने<br />
गुल और चमन ने<br />
मुझको बहकाया है<br />
शिकारी और हरन ने</font></p>
<p><font color="#000000">फ़ुर्क़त में क़ुर्बत जैसे<br />
दर्द में मोहब्बत जैसे<br />
वह याद आये मुदाम<br />
दोस्ती में उल्फ़त जैसे</font></p>
<p><font color="#000000">नाराज़ है कौन यहाँ<br />
हमसे यह सारा जहाँ<br />
किस-किसको मनाऊँ<br />
इक यहाँ, इक वहाँ</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: ०५ जून २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[इक चाँद है आसमाँ में]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=817</link>
<pubDate>Tue, 19 Feb 2008 13:39:57 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=817</guid>
<description><![CDATA[इक चाँद है आसमाँ में रोशन-रोशन
दिल में ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">इक चाँद है आसमाँ में रोशन-रोशन<br />
दिल में है हर पल इक तड़पन<br />
सुन रहा हूँ दीवाने दिल की धड़कन</font></p>
<p><font color="#000000">चाँद जो वह आसमाँ पर है<br />
ख़ाब जो वह ज़मीं पर है<br />
उसकी रोशनी फैली है हर कहीं<br />
लेकिन नज़र में तुम नहीं</font></p>
<p><font color="#000000">तेरी झलक पर यूँ कोहरे क्यों छा गये<br />
तुम नहीं जब तो यह गुल मुरझा गये</font></p>
<p><font color="#000000">इक चाँद है आसमाँ में रोशन-रोशन<br />
दिल में है हर पल इक तड़पन<br />
सुन रहा हूँ दीवाने दिल की धड़कन</font></p>
<p><font color="#000000">नग़मा जो वह ज़ुबाँ पर है<br />
कलमा जो वह दिलो-जाँ पर है<br />
बेवफ़ा, सुनो मेरे दिल की सदा<br />
तेरे लिए ही है मेरी वफ़ा</font></p>
<p><font color="#000000">तुमसे ही मेरा जहाँ, तुम मेरी हमनवाँ<br />
एतबार मेरा कर ले मुझे बाँहों में भर ले</font></p>
<p><font color="#000000">इक चाँद है आसमाँ में रोशन-रोशन<br />
दिल में है हर पल इक तड़पन<br />
सुन रहा हूँ दीवाने दिल की धड़कन</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[एक मेरा सपना तू ही तो थी]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=810</link>
<pubDate>Mon, 18 Feb 2008 18:25:39 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=810</guid>
<description><![CDATA[एक मेरा सपना तू ही तो थी जाना
दूर जो गयी]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">एक मेरा सपना तू ही तो थी जाना<br />
दूर जो गयी तू हो गया वह बेग़ाना<br />
इंतिज़ार तेरा करता हूँ तेरी क़सम<br />
हर लम्हा तेरा नाम जपता हूँ सनम<br />
हाल मेरा बद से बद्तर हो गया है<br />
ज़िंदगी का हर पल बेज़ार हो गया है</font></p>
<p><font color="#000000">एक मेरा सपना तू ही तो थी जाना<br />
दूर जो गयी तू हो गया वह बेग़ाना<br />
अब तेरी राहों में रहता हूँ यार मेरे<br />
कर दिये नाम तेरे मैंने दिन-रात मेरे<br />
तेरी साँसों की ख़ुशबू, बसी है मन मे‍<br />
खिलते हैं जो गुल यार तू है उनमें</font></p>
<p><font color="#000000">एक मेरा सपना तू ही तो थी जाना<br />
दूर जो गयी तू हो गया वह बेग़ाना<br />
सीख रहा हूँ मैं, तन्हा कैसे रहते हैं<br />
तन्हा रहकर, कैसे हर पल जीते हैं</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[जानते हैं दर्द बुझते हुए चाँद का]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=790</link>
<pubDate>Sat, 16 Feb 2008 12:18:08 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=790</guid>
<description><![CDATA[जानते हैं दर्द बुझते हुए चाँद का
जब बढ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">जानते हैं दर्द बुझते हुए चाँद का<br />
जब बढ़ते आते हैं सुबह के क़दम<br />
जुस्त-जू की छाया खो जाती है कहीं<br />
चाँद से बिछड़कर तन्हा हुए हम</font></p>
<p><font color="#000000">तेरा एहसास था कभी दिल के पास<br />
तू क्यूँ तोड़ गया जीने की हर आस<br />
नहीं थी उन गुलों में ख़ुशबू ज़रा भी<br />
वह भीगे हुए गुल थे जैसे पलाश</font></p>
<p><font color="#000000">जुस्त-जू की छाया खो जाती है कहीं<br />
चाँद से बिछड़कर तन्हा हुए हम</font></p>
<p><font color="#000000">तन पर मद्धम-मद्धम धूप गिरती है<br />
लॉन में कुर्सी डालकर बैठे हैं हम<br />
याद आते हैं सुस्त दिन सर्दियों के<br />
जब तुझे हँसते देखा करते थे हम</font></p>
<p><font color="#000000">जुस्त-जू की छाया खो जाती है कहीं<br />
चाँद से बिछड़कर तन्हा हुए हम</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[जब पतझड़ के मौसम आते हैं]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=780</link>
<pubDate>Fri, 15 Feb 2008 08:14:35 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=780</guid>
<description><![CDATA[तुझे देखा तू ही मेरी हमनशीं
तुझे चाहा ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">तुझे देखा तू ही मेरी हमनशीं<br />
तुझे चाहा तू ही मेरी जान-सी<br />
तुझे देखा मैंने तुझे चाहा तुझे<br />
सिर्फ़ तू ही मेरी सखी, सखी...</font></p>
<p><font color="#000000">जब पतझड़ के मौसम आते हैं<br />
पेड़ों से पत्ते पीले झड़ जाते हैं<br />
जब पतझड़ के मौसम आते हैं<br />
पेड़ों से पत्ते पीले गिर जाते हैं<br />
पत्ते वह फिर से वापस आते हैं<br />
पेड़ों पर फिर से वापस आते हैं<br />
फूलों के गुच्छे हवा में लहराते हैं<br />
आते-आते दिल क़रीब आते हैं</font></p>
<p><font color="#000000">तुझे देखा तू ही मेरी हमनशीं<br />
तुझे चाहा तू ही मेरी जान-सी<br />
तुझे देखा मैंने तुझे चाहा तुझे<br />
सिर्फ़ तू ही मेरी सखी, सखी...</font></p>
<p><font color="#000000">परवाने शमअ पर मर मिटते हैं<br />
आशिक़ ऐसे कहाँ कब मिलते हैं<br />
दीवाने शमअ पर मर मिटते हैं<br />
साहिब, ऐसे कहाँ अब मिलते हैं<br />
होते हैं उजाले मिटते जाते अँधेरे<br />
दो दिल मिल जायें होते हैं सवेरे<br />
दिए जलते हैं व गुल खिलते हैं<br />
लम्हे रुकते हैं, ख़्याल बहते हैं</font></p>
<p><font color="#000000">तुझे देखा तू ही मेरी हमनशीं<br />
तुझे चाहा तू ही मेरी जान-सी<br />
तुझे देखा मैंने तुझे चाहा तुझे<br />
सिर्फ़ तू ही मेरी सखी, सखी...</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[जब से भूल जाना चाहा तुमको ]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=771</link>
<pubDate>Thu, 14 Feb 2008 06:32:16 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=771</guid>
<description><![CDATA[जब से भूल जाना चाहा तुमको
तेरी याद और भ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">जब से भूल जाना चाहा तुमको<br />
तेरी याद और भी आती है<br />
सपना क्या कभी कोई ऐसा हुआ<br />
जो बिखरा नहीं<br />
बची राख को आँधी<br />
मेरी कब्र तक उड़ा ले जाती है</font></p>
<p><font color="#000000">तुम फिर क्यों मेरी निगाहों में<br />
भर आये आँसू<br />
क्या कोई दर्द हुआ दिल में<br />
या फिर वह तस्वीर मिल गयी<br />
यह तो बताये कोई<br />
मुझे तू क्यों याद आती है?</font></p>
<p><font color="#000000">जब से भूल जाना चाहा तुमको<br />
तेरी याद और भी आती है</font></p>
<p><font color="#000000">चाँद है आसमाँ पर, ज़मीं पर नहीं<br />
बस बात इतनी है जो मुझे तुमसे<br />
दूर नहीं जाने देती है आँसू,<br />
क्या हुआ ऐसा? गुल खिल गये<br />
जो दिए जल गये<br />
क्या यह सब ख़ाब है?<br />
मुझे तू नज़र आती हैं...</font></p>
<p><font color="#000000">जब से भूल जाना चाहा तुमको<br />
तेरी याद और भी आती है</font></p>
<p><font color="#000000">निगाहों में, नज़ारों में, तू बेवफ़ा<br />
सपनों से दूर जा, न याद आ </font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[ऐ दिल वहाँ चल जहाँ रहते हैं वह]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=741</link>
<pubDate>Sun, 10 Feb 2008 05:21:05 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=741</guid>
<description><![CDATA[ऐ दिल वहाँ चल जहाँ रहते हैं वह
उनके बिन]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">ऐ दिल वहाँ चल जहाँ रहते हैं वह<br />
उनके बिना कितने पल गुज़ारे हैं<br />
खोये-खोये सारे वह बीते नज़ारें हैं</font></p>
<p><font color="#000000">हाथों की लकीरों में उनका नाम है<br />
कहाँ मुझसे दूर खोये हुए हैं वह<br />
कुछ भी नहीं है उनकी यादों के सिवा<br />
किसी से न गिला मेरा न शिकवा</font></p>
<p><font color="#000000">तू प्यासा रेगिस्तान है बारिश वह<br />
ऐ दिल वहाँ चल जहाँ रहते हैं वह</font></p>
<p><font color="#000000">लम्बा सफ़र है राहें हैं सूखी-सूखी<br />
फिर भी राहों के किनारे ताड़ हैं उगी<br />
बरसों का सफ़र दिल में उनका बसर<br />
उनको ही ढूँढ़ती है नज़र हर नज़र</font></p>
<p><font color="#000000">ऐ दिल वहाँ चल जहाँ रहते हैं वह<br />
उनकी यादों में खोये हुए हैं हम<br />
थोड़े जागे थोड़े सोये हुए हैं हम</font></p>
<p><font color="#000000">तू प्यासा रेगिस्तान है बारिश वह<br />
ऐ दिल वहाँ चल जहाँ रहते हैं वह</font></p>
<p><font color="#000000">खिलेंगे गुल हज़ार रंग के नये-नये<br />
मिल गये जो इन्हीं रास्तों पर वह<br />
गुलों की वादियाँ अगर चाहिए तुझे<br />
काँटों की तहों पर चल मिलेंगे वह</font></p>
<p><font color="#000000">ऐ दिल वहाँ चल जहाँ रहते हैं वह<br />
किसी मोड़ के बाद आयेगी मंज़िल<br />
चलता चल राह नयी ऐ मेरे दिल</font></p>
<p><font color="#000000">तू प्यासा रेगिस्तान है बारिश वह<br />
ऐ दिल वहाँ चल जहाँ रहते हैं वह</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[दिल के ख़ाब दिल में ही सुलगते हैं]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=734</link>
<pubDate>Sat, 09 Feb 2008 11:04:38 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=734</guid>
<description><![CDATA[दिल के ख़ाब दिल में ही सुलगते हैं
हक़ीक़]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">दिल के ख़ाब दिल में ही सुलगते हैं<br />
हक़ीक़त के निशाँ अभी दूर लगते हैं<br />
हल्की-हल्की आवाज़ें कानों में गुनगुनाती हैं<br />
लगता है कहीं दूर हवाएँ गीत गाती हैं</font></p>
<p><font color="#000000">देखो न कितनी भोली-भाली सूरतें हैं<br />
हवा के संग फूलों के गुच्छे झूलते हैं<br />
दिल के ख़ाब दिल में ही सुलगते हैं<br />
हक़ीक़त के दर्मियाँ अभी फासलें लगते हैं</font></p>
<p><font color="#000000">रातों में सितारों की बारातों आती हैं<br />
लहू से मुहब्बत की कुरानें लिखी जाती हैं<br />
गुलों से ही सारे चमन महकते हैं<br />
पत्थरों से नहीं मुहब्बत भरे दिल टूटते हैं</font></p>
<p><font color="#000000">दिल के ख़ाब दिल में ही सुलगते हैं<br />
हक़ीक़त के निशाँ अभी दूर लगते हैं<br />
दिल के ख़ाब दिल में ही सुलगते हैं<br />
हक़ीक़त के दर्मियाँ अभी फासले लगते हैं</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[मेरे दिल की पगडंडियों से]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=726</link>
<pubDate>Fri, 08 Feb 2008 15:44:36 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=726</guid>
<description><![CDATA[मेरे दिल की पगडंडियों से
रोज़ाना कितने ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">मेरे दिल की पगडंडियों से<br />
रोज़ाना कितने गुज़रते हैं<br />
कितने क़दमों के निशाँ बनते हैं<br />
कितने मिटते हैं...</font></p>
<p><font color="#000000">तू जिस दिन से गुज़री है<br />
किसी से कहते नहीं बनता<br />
हमारे सीने में<br />
इक ऐसी आँधी उबरी है</font></p>
<p><font color="#000000">सबसे यूँ ही मिल लेता हूँ<br />
लेकिन तुम वही हो<br />
जिसको दिल से चाहता हूँ</font></p>
<p><font color="#000000">कोशिश की थी मैंने पहले<br />
न याद आये मुझको तू<br />
लेकिन तुझको चाहता हूँ</font></p>
<p><font color="#000000">मेरे दिल की पगडंडियों से<br />
रोज़ाना कितने गुज़रते हैं<br />
कितने क़दमों के निशाँ बनते हैं<br />
कितने मिटते हैं...</font></p>
<p><font color="#000000">तेरा चेहरा नज़र में हर वक़्त है<br />
जिसपे ख़ुशनुमा गुल खिलें<br />
वह कौन-सा दरख़्त है</font></p>
<p><font color="#000000">यह दिल की सदा है<br />
बहारों का नज़ारा सजा है<br />
आ दिलो-जाँ थोड़ा क़रीब कभी</font></p>
<p><font color="#000000">मेरे दिल की पगडंडियों से<br />
रोज़ाना कितने गुज़रते हैं<br />
कितने क़दमों के निशाँ बनते हैं<br />
कितने मिटते हैं...</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[काश वह कोई गुल होती ]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=698</link>
<pubDate>Tue, 05 Feb 2008 03:29:36 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=698</guid>
<description><![CDATA[काश वह कोई गुल होती
मैं उसे अपने लबों स]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">काश वह कोई गुल होती<br />
मैं उसे अपने लबों से चूम लेता<br />
गर वह कोई आइना होती<br />
मैं ख़ुद को उसमें उतार देता</font></p>
<p><font color="#000000">इश्क़ जला है कितनी रातों तक<br />
कोई समझता दर्द मैं बता देता</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २०००-२००१</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[ख़ाली सीने में कुछ धुँआ-धुँआ-सा है]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/12/25/%e0%a4%96%e0%a4%bc%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a5%80%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%81%e0%a4%9b-%e0%a4%a7%e0%a5%81%e0%a4%81%e0%a4%86-%e0%a4%a7%e0%a5%81/</link>
<pubDate>Tue, 25 Dec 2007 13:10:16 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/12/25/%e0%a4%96%e0%a4%bc%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a5%80%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%81%e0%a4%9b-%e0%a4%a7%e0%a5%81%e0%a4%81%e0%a4%86-%e0%a4%a7%e0%a5%81/</guid>
<description><![CDATA[ख़ाली सीने में कुछ धुँआ-धुँआ-सा है
जिस ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">ख़ाली सीने में कुछ धुँआ-धुँआ-सा है<br />
जिस सिम्त देखता हूँ दिल बदगुमाँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">दर्द को दर्द हो ऐसा होता नहीं<br />
इसीलिए ख़ातिर में यह नौ-जवाँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">ख़ुदा ही मेहर से मैं रहा सदियों के फ़ासले पे<br />
आज भी वह ना-मेहरबाँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">ढूँढ़ता हूँ मैं ख़ुद को उस गली में<br />
जिसमें मुझे ज़िन्दगी होने का नुमाया-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">रोशनी में भिगो दिया शबे-महफ़िल को जिसने<br />
तेरी रंगत का शुआ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">एहसासात दफ़्न हैं किसी कब्र में<br />
दर्द दिल का आज कुछ बे-ज़ुबाँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">खींच लिया जिगर को दाँतों से लब तक<br />
आज महफ़िल में यह कमनुमा-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">तेरी दीद से बादशाहत मिली थी मुझे<br />
ज़ख़्म कहता है तेरा साया हुमा-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">बदनसीबी गर्दिशे-अय्याम है बस<br />
वक़्त यह एक इम्तिहाँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">तमाशा बहुत हुआ तेरे जाने के बाद<br />
जो कुछ भी हुआ ज़ख़्मे-निहाँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">शज़र बेसमर हैं नकहते-गुल भी नहीं<br />
मौसम यह ज़र्द ख़िज़ाँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">ज़ीस्त नवाज़ी गयी सो जी रहे हैं<br />
मगर जीना मुश्किल मरना आसाँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">मैं गर तेरा तस्व्वुर करूँ<br />
बूँद-बूँद शबनम का गिरना भी गिरियाँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">तुम नहीं गुज़रते इस राह से<br />
मेरी गली का हर पत्थर रेगिस्ताँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">वह उजाले जिनसे चौंक गयीं थीं मेरी आँखें<br />
मंज़र वह भी कहकशाँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">ना पूछ कब से तेरे दीवानों में शामिल हूँ<br />
हाल मेरा भी कुछ-कुछ बियाबाँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">नीली शाल में लिपटी देखा था तुझे<br />
तब से जाना कि चाँद किसी माहलक़ा-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">तुम आये घर मेरे आस्ताने तक<br />
कि अब का'बा ही मेरे सँगे-आस्ताँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">इश्क़ में हमसा न पायेगा कोई<br />
न होना मेरा उनकी बज़्म में हरमाँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">हम वस्ल की तमन्ना में मुए जाते हैं<br />
ज़ुज तेरे सभी से वस्ल हिज्राँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">शगून तेरे देखने भर से होता था<br />
आज इन आँखों में हर क़तरा टूटा-टूटा-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">बेज़ार है चमन तितली ज़र कैसे पिये<br />
अब कि मौसम भी कुछ बेईमाँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">ज़हर हमको दिया दवा बता के ख़ुदा ने<br />
ज़ीस्त जो बख़्शी यह भी सौदा-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">'नज़र' बातें हैं बहुत उसके इश्क़ो-ग़म में<br />
जिसका दिल पर निशाँ-सा है</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[दिल में तेरे लिए सच्ची अक़ीदत है]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/09/20/%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%9c%e0%a5%8b-%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%b9%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%a4%e0%a5%8b-%e0%a4%97%e0%a5%81/</link>
<pubDate>Thu, 20 Sep 2007 06:37:12 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
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<description><![CDATA[है जो किसी से तुम्हें तो गुल से निस्बत ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">है जो किसी से तुम्हें तो गुल से निस्बत है<br />
तुम मुझको मिले हो ये मेरी क़िस्मत है</font></p>
<p><font color="#000000">तेरे तब्बसुम से ही है ये रंगे-बहार<br />
लगता है अब जैसे सारी फ़िज़ा जन्नत है</font></p>
<p><font color="#000000">तेरी आँखों की गुलाबी डोरियाँ जैसे नश्शा-ए-मै<br />
तिश्ना-लब हूँ मुझे पीने की हसरत है</font></p>
<p><font color="#000000">तेरी ज़ुल्फ़ों से गुज़रते देखी है मैंने सबा<br />
हाए ये सबा भी कितनी खु़श-क़िस्मत है</font></p>
<p><font color="#000000">तेरे अबरू मानिन्दे-कमान उठते हैं<br />
मुझको तेरे आगोश में मरने की चाहत है</font></p>
<p><font color="#000000">तेरे लब हैं की पंखुड़ियाँ गुलाब की हैं<br />
इक बोसा पाने को शबो-रोज़ की मिन्नत है</font></p>
<p><font color="#000000">सुना है जन्नत की हूरों के बारे में बहुत<br />
मगर उनमें कहाँ ये कशिशे-क़ामत है</font></p>
<p><font color="#000000">देखा है तुमने कभी चाँद को सरे-शाम<br />
एक वही है जो तेरी तरह खू़बसूरत है</font></p>
<p><font color="#000000">हो तुम ही मानिन्दे-खु़दा मेरे लिए<br />
दिल में तेरे लिए सच्ची अक़ीदत है</font></p>
<p><font color="#000000">तुम क़रीब होते हो दर्द मिट जाते हैं<br />
तुमसे ही मुझको होती नसीब फ़रहत है</font></p>
<p><font color="#000000">तुम्हें देखा तो मैंने अपनी ज़िन्दगी देखी<br />
तुमको चाहना ही खु़दा की इबादत है</font></p>
<p><font color="#000000">मेरा दिल जितना चाहता है तुमको सनम<br />
तुम्हें भी मुझसे उतनी ही मोहब्बत है</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति 'नज़र'<br />
लेखन वर्ष: २६/०७/२००४ <a href="http://vinayprajapati.iblog.com/post/222399/416165"></a></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[यादों का सागर]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/09/15/%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%97%e0%a4%b0/</link>
<pubDate>Sat, 15 Sep 2007 19:32:08 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/09/15/%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%97%e0%a4%b0/</guid>
<description><![CDATA[यादों का सागर
गहरा है
उसमें डूब जाऊँ त]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">यादों का सागर<br />
गहरा है<br />
उसमें डूब जाऊँ तो<br />
वक़्त का हर लम्हा<br />
ठहरा है<br />
कोई काँटा-सा है<br />
जो लग गया है<br />
इक फाँस-सा है<br />
और फँस गया है<br />
कोई आवाज़<br />
हमें देता नहीं<br />
क्या वो मकान<br />
वीराँ हो गया है<br />
क्या शाखों पर<br />
गुल खिलते नहीं<br />
या हवाओं का<br />
रुख़ बदल गया है</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००२</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[एक मुलाक़ात की इल्तजा है]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/09/15/%e0%a4%8f%e0%a4%95-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a5%98%e0%a4%be%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%87%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%9c%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88/</link>
<pubDate>Sat, 15 Sep 2007 18:04:47 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/09/15/%e0%a4%8f%e0%a4%95-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a5%98%e0%a4%be%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%87%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%9c%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88/</guid>
<description><![CDATA[एक मुलाक़ात की इल्तजा है
उससे दुआ है
वह ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">एक मुलाक़ात की इल्तजा है<br />
उससे दुआ है<br />
वह क्यों नहीं मिलता मुझसे<br />
उसे क्या शुबा है<br />
मुझ मुरीद को न क़रार है<br />
यह क्या धुँआ है<br />
साँस बदन से जुदा-जुदा है<br />
मुझे क्या हुआ है<br />
मैं जिसके लिए मरना चाहता हूँ<br />
वो मेरा खु़दा है<br />
सनम मेरा गुले-सुम्बुल है<br />
वो दिलरुबा है</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००५</p>
]]></content:encoded>
</item>

</channel>
</rss>
