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	<title>गूगल &amp;laquo; WordPress.com Tag Feed</title>
	<link>http://wordpress.com/tag/गूगल/</link>
	<description>Feed of posts on WordPress.com tagged "गूगल"</description>
	<pubDate>Sun, 12 Oct 2008 15:53:30 +0000</pubDate>

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	<language>en</language>

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<title><![CDATA[गूगलनॉल बनाम विकीपीडिया]]></title>
<link>http://kashivishvavidyalay.wordpress.com/?p=215</link>
<pubDate>Tue, 05 Aug 2008 14:40:11 +0000</pubDate>
<dc:creator>अफ़लातून</dc:creator>
<guid>http://kashivishvavidyalay.hi.wordpress.com/2008/08/05/googleknol_wikipedia/</guid>
<description><![CDATA[गूगल ने दिसम्बर २००७ में ऐलान किया था ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align:left;">गूगल ने दिसम्बर २००७ में ऐलान किया था कि वह नेट उपयोगकर्ताओं द्वारा लिखे गए एनसाइक्लोपीडिया की शुरुआत करने जा रहा है । २३ जुलाई को <a href="http://knol.google.com" target="_blank">इसकी</a> शुरुआत हो गयी है। आप किसी विषय पर लिखेंगे और उस पृष्ट के मालिक होंगे , <a href="http://en.wikipedia.org/" target="_blank">विकीपीडिया</a> की भांति कोई दूसरा उस पृष्ट का सम्पादन नहीं कर सकेगा । पाठक उस पृष्ट को सुधारने के सुझाव जरूर दे सकेंगे लेकिन आप पर होगा कि उन्हें आप मंजूर करते हैं या नहीं । कई माएने में यह विकीपीडिया से अलग है लेकिन  इन्टरनेट पर अपना स्वायत्त,स्वतंत्र पृष्ट बनाने का दर्शन भी तो मूलत: यही है ! </p>
<p style="text-align:left;">   मानिए कि अभय तिवारी इस्राईल के इतिहास के बारे में 'नॉल' लिखते हैं । उसी विषय पर २३३५ और लोग लेख लिख सकते हैं । इस प्रक्रिया में भारी मात्रा में दोहराव होगा। सिद्धान्तत: यह माना जा रहा है कि स्पर्धा होगी तो सब से अच्छी सामग्री वाला पृष्ट टिकेगा ।</p>
<p style="text-align:left;">    यह बताया जा रहा है कि विकीपीडिया से विपरीत 'नॉल' से धन कमाया जा सकेगा । दरअसल एडसेन्स जैसे विज्ञापनों द्वारा गूगल की जो कमायी होगी उसमें से कुछ टुकड़ा लेखक को फेंक दिया जाएगा।</p>
<p style="text-align:left;">   विकीपीडिया की तरह नॉल में विषय सूची या वर्गीकरण नहीं है । गूगल को शायद अखर रहा है कि लाखों विषयों को सर्च इंजनों से खोजते वक्त मुनाफ़ा न कमाने वाली संस्था ( विकीमीडिया फाउन्डेशन ) द्वारा संचालित विकीपीडिया की प्रविष्टी सब से ऊपर आती है । <strong>यह मुमकिन है कि नॉल के पृष्टों को गूगल के सर्च इंजनों पर प्राथमिकता और वरीयता मिले इसकी पूरी संभावना है ।</strong></p>
<p style="text-align:left;">   'नॉल' गूगल के उपाध्यक्ष यूडी मैनबर के दिमाग की पैदाइश माना जा रहा है । फिलहाल इस पर कुछ सौ लेख हैं जिनमें से ज्यादातर स्वास्थ्य एवं आयुर्विज्ञान पर हैं । विकीपीडिया में सिर्फ़ अंग्रेजी में २१ लाख लेख है तथा इसके द्वारा अन्य भाषाओं में लिखने को भी प्रोत्साहित किया जाता है । <strong>गूगल ने ज्ञान की इकाई के रूप में नॉल को परिभाषित किया है । </strong></p>
<p style="text-align:left;"><strong>   </strong> कुछ वर्ष पहले गूगल ने किसी प्रश्न का उत्तर देने और उसकी कीमत देने का एक चोंचला चलाया था।  लगता है कि यह विफल हो चुका है ।</p>
<p style="text-align:left;">  हिन्दी चिट्ठालोक के कई वरिष्ट सदस्य हिन्दी विकीपीडिया को समृद्ध करने में मेहनत करते आए हैं । अनुनाद सिंह और अनूप शुक्ला हिन्दी विकीपीडिया को समृद्ध करने के प्रति गंभीर रहे हैं । इस दानवाकार कम्पनी द्वारा ज्ञान को कमाई का सस्ता जरिया बनाने के प्रति हिन्दी चिट्ठालोक की प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा है ।</p>
<p style="text-align:left;"> </p>
]]></content:encoded>
</item>
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<title><![CDATA[New Linux Ubuntu in just 15 Days]]></title>
<link>http://ubuntukanpur.wordpress.com/?p=20</link>
<pubDate>Wed, 09 Apr 2008 11:20:01 +0000</pubDate>
<dc:creator>oskanpur</dc:creator>
<guid>http://ubuntukanpur.hi.wordpress.com/2008/04/09/new-linux-ubuntu-in-just-15-days/</guid>
<description><![CDATA[लाइनक्स उबुँटू के सबसे आधुनिक संसकरण ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>लाइनक्स उबुँटू के सबसे आधुनिक संसकरण में अब मात्र १५ दिन बाकी - २४ अप्रैल को स्वयं <a title="लाइनक्स उबुँटू - डाउनलोड करें" href="http://www.ubuntu.com/getubuntu/download" target="_blank">डाउनलोड करें</a> और अपने नवीन अथवा खटारा कम्प्यूटर में नया जीवन फूँक दें &#124;</p>
]]></content:encoded>
</item>
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<title><![CDATA[Open Source Software Education in India]]></title>
<link>http://oskanpur.wordpress.com/2008/03/28/open-source-software-education-in-india/</link>
<pubDate>Fri, 28 Mar 2008 10:26:25 +0000</pubDate>
<dc:creator>oskanpur</dc:creator>
<guid>http://oskanpur.hi.wordpress.com/2008/03/28/open-source-software-education-in-india/</guid>
<description><![CDATA[भारत मे सार्वजनिक वित्त पर चलने वाली श]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>भारत मे सार्वजनिक वित्त पर चलने वाली शिक्षण सँसथाएं व खुला सोर्स कोड / <a title="अपने कम्प्यूटर के लिए आाधुनिक व मुफ्त लाइनक्स उबुँटू डाउन लोड करें" href="http://www.ubuntu.com/getubuntu/download" target="_blank">लाइनक्स उबुँटू शिक्षा</a> - किसकी जिम्मेदारी ?</p>
]]></content:encoded>
</item>
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<title><![CDATA[तेरा क्या होगा रे याहू??]]></title>
<link>http://itsme.wordpress.com/?p=231</link>
<pubDate>Sat, 02 Feb 2008 01:37:11 +0000</pubDate>
<dc:creator>Amit</dc:creator>
<guid>http://itsme.hi.wordpress.com/2008/02/02/what-will-happen-to-yahoo/</guid>
<description><![CDATA[भईये टैम बोत खराब है! हाँ यदि आपने याहू ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>भईये टैम बोत खराब है! हाँ यदि आपने <a href="http://www.yahoo.com/" target="_blank">याहू</a> (Yahoo!) के शेयर खरीद रखे हैं या फिर आप याहू के कर्मचारी हैं तो वाकई आपके लिए खराब टैम है। क्यों? अरे भांग खा के कहीं सो रहे थे का भई? याहू अपनी विश्वव्यापी 14300 कर्मचारियों की फौज में से लगभग 1000 कर्मचारियों को सेवा-निवृत्त करने की सोच रिया है ताकि अपने घटते मुनाफ़े में कुछ जोड़ सके। कैसे? अरे इस तरह इतनी बड़ी सेवा-निवृत्ति से याहू के सालाना खर्च में 10 करोड़ अमेरिकी डॉलर तक की कमी आएगी और इस समय तो एक-एक डॉलर उसके लिए कीमती है क्योंकि मुनाफ़ा लगातार नीचे जाने वाली लिफ्ट पर सवार है। (अंग्रेज़ी में खबर <a href="http://news.yahoo.com/s/ap/20080130/ap_on_hi_te/earns_yahoo" target="_blank">यहाँ</a> पढ़ें)</p>
<p>तो अब ऐसी हालत होने पर अनुमान लगाया जा रहा है कि याहू के पास दो ही रास्ते बचते हैं; या तो बिक जाए या फिर अपनी सर्च सुविधा को किनारे लगा गूगल की सर्च का हाथ थामे और उसके ज़रिए विज्ञापनों द्वारा डॉलर कमाए तथा अपनी हाल ही में खरीदी जायदादों को डॉलर बनाने की मशीनों में कन्वर्ट करे। अब पहले रास्ते को अपनाने से याहू के बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स की सिरदर्दी तो खत्म हो जाएगी(खरीदने वाली कंपनी को बतौर बोनस में दे देंगे ना) और यदि दूसरे रास्ते को अपनाता है तो काफ़ी मेहनत करनी होगी, बहुत ज़्यादा मेहनत!!</p>
<p>खैर, ऐसे माहौल में अटकलों का बाज़ार पुनः गर्म हो गया है। यह मान के चला जा रहा है कि याहू तो बिकेगा ही बिकेगा, उसके पास और कोई रास्ता नहीं। ऐसे में अनुमान लगाए जा रहे हैं कि कौन आखिरकार बोलेगा या ऽऽऽऽ हू ऽऽऽऽऽ (शम्मी कपूर साहब नहीं, उनका तो टैम निकल गया, जब बोलना था तब बोल लिए, आजकल तो ईश्वर भजन में लगे रहते हैं, टैम जो आ रहा है मीटिंग का)। माइक्रोसॉफ़्ट को सबसे बड़ा दावेदार माना जा रहा है, बल्कि खबर यहाँ तक है कि माइक्रोसॉफ़्ट की ओर से 44.6 अरब अमेरिकी डॉलर में याहू को खरीदने की पेशकश हुई है। (अंग्रेज़ी में खबर <a href="http://money.cnn.com/2008/02/01/technology/microsoft_yahoo/index.htm?cnn=yes" target="_blank">यहाँ</a> पढ़ें)</p>
<p>गौरतलब है कि कुछ समय पहले माइक्रोसॉफ़्ट ने याहू को 40 अरब अमेरिकी डॉलर में खरीदने की पेशकश की थी जिस पर याहू के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने 80 अरब अमेरिकी डॉलर की माँग की थी, यानि कि अन्य शब्दों में बिकने से मना कर दिया था। वैसे कुछ लोग गूगल को भी याहू की खरीद का एक प्रबल दावेदार मान रहे हैं। वैसे भी मुख्य दो खिलाड़ी यही दोनों हैं, तीसरा तो कोई दिखाई नहीं देता जिसकी इतने डॉलर अदा कर खरीदने की औकात हो!! गूगल के हाल भी कोई बहुत ज़्यादा अच्छे नहीं हैं, इसलिए हो सकता है कि वो याहू की खरीद में उस कारण या किसी अन्य कारण रुचि न दिखाए। परन्तु यदि माइक्रोसॉफ़्ट याहू को खरीदने में सफ़ल होता है तो यह माइक्रोसॉफ़्ट के लिए अभी तक का सबसे बड़ा मील का पत्थर साबित हो सकता है क्योंकि माइक्रोसॉफ़्ट की भी इंटरनेट के बाज़ार में बैन्ड बजी हुई है और वह येन-केन-प्रकारेण अरबों डॉलर के इस केक में अपना बड़ा सा हिस्सा पाने की यथा संभव कोशिश में है। तकनीकी के बाज़ार में भी यह अभी तक की सबसे बड़ी बिक्री होगी, इससे पहले अभी तक की सबसे बड़ी बिक्री सन्‌ 2002 में हुई थी जब हेवलेट्ट पैकर्ड ने कंप्यूटर बनाने वाली कंपनी कॉम्पैक को 25 अरब अमेरिकी डॉलर में खरीदा था।</p>
<p>तो अब देखना यह है कि याहू इस संकट से पहले की भांति येन-केन-प्रकारेण बच निकलता है या इस बार वाकई कोई उसकी गिल्ली खरीद लेगा। ;)</p>
]]></content:encoded>
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