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	<title>गढ़वाल &amp;laquo; WordPress.com Tag Feed</title>
	<link>http://wordpress.com/tag/गढ़वाल/</link>
	<description>Feed of posts on WordPress.com tagged "गढ़वाल"</description>
	<pubDate>Sun, 06 Jul 2008 16:49:06 +0000</pubDate>

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<title><![CDATA[तुन्गनाथ - भाग २]]></title>
<link>http://itsme.wordpress.com/2007/06/22/tungnath-2/</link>
<pubDate>Fri, 22 Jun 2007 00:38:38 +0000</pubDate>
<dc:creator>Amit</dc:creator>
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<description><![CDATA[पिछले भाग से आगे &#8230;..
समीर जी ने पूछा कि ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><em><a href="/2007/06/21/tungnath-1/">पिछले भाग</a> से आगे .....</em></p>
<p><a href="http://udantashtari.blogspot.com/" target="_blank">समीर</a> जी ने <a href="/2007/06/21/tungnath-1/#comment-2327">पूछा</a> कि नए स्लीपिंग बैग में ठंड झेल पाए कि नहीं, तो उसके संबन्ध में भी एक रोचक वाक्या हुआ। अब हुआ यूँ कि अपन नए स्लीपिंग बैग का कुछ अधिक ही भाव खा गए, और शुक्रवार की रात को केवल एक पतली सी टी-शर्ट और ट्रैक पैन्ट पहने ही घुस गए उसमें। थोड़ी देर बाद शरीर के ऊपरी भाग में ठंड सी लगने लगी, क्योंकि ऊपर से स्लीपिंग बैग खुला था!! जैकेट आदि पहन इसलिए नहीं सोया था कि सोचा स्लीपिंग बैग ही काफ़ी रहेगा!! ;) तो गलती में कुछ सुधार करते हुए जैकेट को ओढ़ लिया और उसके बाद ठंड नहीं लगी!! :) शनिवार की रात जो ऊपर तुन्गनाथ पर बिताई, तब तक समझ आ गई थी, इसलिए जैकेट और जुराब पहन के सोया था, बहुत गर्म सा रहा और अच्छी नींद आई, रविवार सुबह जल्दी ही उठ गया(बाकी सब मेरे से पहले उठ चुके थे) और अपने को बहुत तरोताज़ा महसूस किया। :D</p>
<p><a href="http://www.flickr.com/photos/amit_gupta/499368688/in/set-72157600217042527" target="_blank" title="बड़े चित्र के लिए क्लिक करें"><img src="http://farm1.static.flickr.com/231/499368688_a2548c6507.jpg" border="0" /></a><br />
( <em>हमारे दो तंबुओं के सामने प्रसन्नचित माइक।</em> )<br />
चोपता में शुक्रवार की रात को एक अजब वाक्या हुआ था। हम तकरीबन दस बजे अपने-२ तंबुओ में अपने स्लीपिंग बैग बिछा सो गए थे। ग्यारह-बारह के आसपास रमित अचानक उठ गया, पूछने पर बोला कि बाहर तंबू के पास कोई घूम रहा है। ध्यान से सुनने पर कदमों की आहट सुनाई दी, टॉर्च आदि जला के ऊँची आवाज़ में पूछा भी गया कि कौन है लेकिन कोई उत्तर नहीं मिला और आवाज़ आनी बन्द हो गई। हम सो गए, थोड़ी देर बाद पुनः आवाज़ आने लगी और रमित फिर जाग गया और साथ ही मैं भी। बाहर झांक के भी देख लिया लेकिन कोई दिखाई नहीं दिया, बड़ी टॉर्च की रोशनी भी किसी काम की नहीं थी, घुप्प अंधेरा था। अंदर आकर पुनः सो गए, मन में अजीब से ख्याल आ रहे थे कि कोई वाकई में तो नहीं है, यदि है तो अगर कोई चोर हुआ तो तम्बू को चाकू आदि से काट सामान लेकर चलता बनेगा!! किसी तरह सुबह हुई, साढ़े चार के करीब रोशनी हुई और रमित चिल्ला पड़ा कि किस पागल ने टॉर्च जलाई है, उसको सोने दिया जाए!! ;) बहरहाल, सुबह उठ हम लोगों को पता चला कि रात कोई नहीं था, हवा वेग से चल रही थी और तम्बू से तकराने के कारण आवाज़ हो रही थी!! ;)</p>
<p><a href="http://www.flickr.com/photos/amit_gupta/499419965/in/set-72157600217042527" target="_blank" title="बड़े चित्र के लिए क्लिक करें"><img src="http://farm1.static.flickr.com/209/499419965_e474b187fe.jpg" border="0" /></a><br />
( <em>सुबह इतना बढ़िया नज़ारा दिखाई दिया, मन प्रसन्न हो गया।</em> )</p>
<p><a href="http://www.flickr.com/photos/amit_gupta/499373836/in/set-72157600217042527" target="_blank" title="बड़े चित्र के लिए क्लिक करें"><img src="http://farm1.static.flickr.com/210/499373836_96f8129ec6.jpg" border="0" /></a><br />
( <em>ऊपर तुन्गनाथ तक पहुँचते ही ओलों की बरसात हो गई, इतने ओले गिरे कि बरसात थमने के बाद ऐसा लग रहा था कि बर्फ़ गिरी हो। ओले पड़ने के कारण हमारा कार्यक्रम बिगड़ गया, तुन्गनाथ पर अब तम्बू नहीं लगा सकते थे, इसलिए एक धर्मशाला में दो बड़े कमरे लिए।</em> )</p>
<p><a href="http://www.flickr.com/photos/amit_gupta/499423111/in/set-72157600217042527" target="_blank" title="बड़े चित्र के लिए क्लिक करें"><img src="http://farm1.static.flickr.com/193/499423111_a5f4990b5b.jpg" border="0" /></a><br />
( <em>रविवार की सुबह, जिस दिन हमको वापस लौटना था।</em> )</p>
<p><a href="http://www.flickr.com/photos/amit_gupta/499425741/in/set-72157600217042527" target="_blank" title="बड़े चित्र के लिए क्लिक करें"><img src="http://farm1.static.flickr.com/190/499425741_d4987f074f.jpg" border="0" /></a></p>
<p><a href="http://www.flickr.com/photos/amit_gupta/499427797/in/set-72157600217042527" target="_blank" title="बड़े चित्र के लिए क्लिक करें"><img src="http://farm1.static.flickr.com/219/499427797_efd72b7eea.jpg" border="0" /></a></p>
<p><a href="http://www.flickr.com/photos/amit_gupta/499429481/in/set-72157600217042527" target="_blank" title="बड़े चित्र के लिए क्लिक करें"><img src="http://farm1.static.flickr.com/224/499429481_b7ae7e32b8.jpg" border="0" /></a></p>
<p>इस बार तुन्गनाथ की चढ़ाई में मेरा उतना बुरा हाल नहीं हुआ जितना पिछली बार हुआ था। इस बार स्निग्धा साथ नहीं थी कि हौसला दे साथ चले, इस बार अपने आप करना था और किया। पिछली बार के मुकाबले इस बार चढ़ने में एक घंटा कम लिया, उतना कठिन नहीं लगा जितना पिछली बार लगा था(क्योंकि इस बार शर्मा जी और वनराज भाटिया साहब को सुनते हुए चढ़ाई की)। उतरते समय भी पिछली बार के मुकाबले एक घंटा कम लिया, आधा रास्ता सुबोश्री से बात करते हुए कटा और आधा रास्ता शर्मा जी को सुनते और खूबसूरत नज़ारों को निहारते हुए। :)</p>
<p>इस यात्रा के दौरान लिए गए सभी चित्र <a href="http://www.flickr.com/photos/amit_gupta/sets/72157600217042527/" target="_blank">यहाँ</a> देख सकते हैं।</p>
]]></content:encoded>
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<title><![CDATA[तुन्गनाथ - भाग १]]></title>
<link>http://itsme.wordpress.com/2007/06/21/tungnath-1/</link>
<pubDate>Thu, 21 Jun 2007 00:21:46 +0000</pubDate>
<dc:creator>Amit</dc:creator>
<guid>http://itsme.wordpress.com/2007/06/21/tungnath-1/</guid>
<description><![CDATA[मई 2007 के दूसरे सप्ताहांत पर पुनः तुन्ग]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>मई 2007 के दूसरे सप्ताहांत पर पुनः तुन्गनाथ जाने का कार्यक्रम बना। <a href="/2006/08/23/beyond-the-clouds-1/">पिछली बार</a> का <a href="/2006/09/01/beyond-the-clouds-3/">हादसा</a> याद था, लेकिन जोश बरकरार था और मन में नई उमंग थी। इस बार की अपनी यात्रा भी अलग होनी थी, इस बार तम्बू वगैरह लेकर चल रहे थे, पैक्ड रेडी-टू-ईट(ready-to-eat) खाना साथ था जो कि तुरन्त बनने वाली किस्म का था। तुन्गनाथ पर पिछली बार की ठंड का अनुभव होने के कारण मैंने यात्रा पर निकलने से पहले <a href="http://www.lafuma.com/index.php?id=catalog_list&#38;L=6&#38;cPath=3_38&#38;products_id=143&#38;typo_prod=1:int">ला-फूमा का नया स्लीपिंग बैग</a> खरीदा जो कि 5 डिग्री सेल्सियस से 0  डिग्री सेल्सियस तक का तापमान आराम से झेल लेता है; पहली रात तम्बू चोपता में लगाना था और समुद्र स्तर से लगभग साढ़े बारह हज़ार फीट की ऊँचाई पर रात को तापमान कम होने की पूरी आशा थी, मई में भी, क्योंकि इतनी उँचाई पर सारा साल ही ठंड रहती है। एक और खास बात यह थी कि यह व्हर्लविन्ड(whirlwind) यात्रा होनी थी क्योंकि यदि इसको आराम से करना हो तो चार दिन लगते हैं और हमे इसको तीन दिन में निपटाना था। ;) इस बार दिल्ली से गाड़ी ले जाने की जगह हम हरिद्वार तक ट्रेन से गए और वहाँ से आगे जाने के लिए टाटा सूमो ली। केवल योगेश और मेरी ही यह तुन्गनाथ की दूसरी यात्रा थी, बाकी के पाँचों साथी पहली बार जा रहे थे।</p>
<p>चूँकि इस यात्रा के फोटो मैंने <a href="http://www.flickr.com/photos/amit_gupta/sets/72157594240409556/" target="_blank">पिछली बार</a> लिए थे, इसलिए लेने के लिए इस बार कुछ खास नहीं था।</p>
<p><a href="http://www.flickr.com/photos/amit_gupta/499377661/in/set-72157600217042527/" target="_blank" title="देवप्रयाग में ठ??ीरथी और अलकनंदा का संगम - बड़े चित्र के लिए क्लिक करें"><img src="http://farm1.static.flickr.com/213/499377661_bcfa36172a.jpg" border="0" /></a><br />
( <em>देवप्रयाग में भगीरथी और अलकनंदा का संगम</em> )</p>
<p><a href="http://www.flickr.com/photos/amit_gupta/499381831/in/set-72157600217042527/" target="_blank" title="ऋषिकेश की ओर जाती गंगा - बड़े चित्र के लिए क्लिक करें"><img src="http://farm1.static.flickr.com/232/499381831_d94891653b.jpg" border="0" /></a><br />
( <em>ऋषिकेश की ओर जाती गंगा</em> )</p>
<p><a href="http://www.flickr.com/photos/amit_gupta/499337366/in/set-72157600217042527/" target="_blank" title="मंदाकिनी - बड़े चित्र के लिए क्लिक करें"><img src="http://farm1.static.flickr.com/212/499337366_dc62d9d8ec.jpg" border="0" /></a><br />
( <em>सियालसौर पर सड़क किनारे एक रेस्तरां में दोपहर भोजन के लिए रूके थे। वहीं बगल में ऊपर से बह कर आ रही थी मंदाकिनी।</em> )</p>
<p><a href="http://www.flickr.com/photos/amit_gupta/499389401/in/set-72157600217042527/" target="_blank" title="बड़े चित्र के लिए क्लिक करें"><img src="http://farm1.static.flickr.com/223/499389401_cea26bcd15.jpg" border="0" /></a><br />
( <em>चोपता पहुँच हमारी कैम्पसाइट से दिखाई देती हिम से ढकी पर्वत शृंखला</em> )</p>
<p><a href="http://www.flickr.com/photos/amit_gupta/499342708/in/set-72157600217042527/" target="_blank" title="बड़े चित्र के लिए क्लिक करें"><img src="http://farm1.static.flickr.com/231/499342708_ab605e5ecb.jpg" border="0" /></a><br />
( <em>दो-तीन सप्ताह पूर्व तक तो तुन्गनाथ पर भी बर्फ़ थी जो कि पिघली नहीं थी, यानि कि अप्रैल के महीने में जब हम <a href="/2007/04/25/mukteshwar-1/">मुक्तेश्वर की यात्रा</a> पर थे।</em> )</p>
<p><a href="http://www.flickr.com/photos/amit_gupta/499412483/in/set-72157600217042527/" target="_blank" title="बड़े चित्र के लिए क्लिक करें"><img src="http://farm1.static.flickr.com/210/499412483_8917eb72df.jpg" border="0" /></a><br />
( <em>यदि मेरा कैमरे पर पोलराइज़र लगा होता तो यह फोटो और बढ़िया आता</em> )</p>
<p><a href="http://www.flickr.com/photos/amit_gupta/499413589/in/set-72157600217042527" target="_blank" title="बड़े चित्र के लिए क्लिक करें"><img src="http://farm1.static.flickr.com/227/499413589_db4f1c9726.jpg" border="0" /></a><br />
( <em>इस पर्वत ने और दृश्य ने तो मेरा मन मोह लिया था</em> )</p>
<p><em><a href="/2007/06/22/tungnath-2/">अगले भाग</a> में जारी .....</em></p>
]]></content:encoded>
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