गोरी, आज यह सिंगार किसके लिए है गुलाबी अंगों में निखार किसके लिए है क्या सजन जी से मिलने का कोई वादा है कहो ना हमसे आज क्या इरादा है…! लटों की’ यह शरारत किसके लिए है दिन-रात इतनी चाहत किसक… more →
चाँद, बादल और शामwrote 2 months ago: यूं करके हमेँ तन्हां तुम चल दिए कहाँ। धड़कन ठहर चुकी है अब मेरी जाने-जां।। ईसरार न करुँगा रुकने को मै … more →
wrote 12 months ago: कल तुमने कहा था मुझसे बात न करना आज कहती हो गली से न गुजरना कल कहोगी सपनो में मुखबिरी क्यूँ करते हो … more →
wrote 1 year ago: वो रात थी ? या तुम्हारे आँखों से छिटका काजल ? सरकती पवन थी? या तुम्हारा लहराता आँचल ? लबों की फड़फड़ य … more →
wrote 1 year ago: जमाने भर की खुशी तेरे दामन में सजाना चाहूं, ऐ सनम तुझको मैं चाहत से भी ज्यादा चाहूं।। मुझे गम है कि … more →
wrote 1 year ago: कहीं दूर एक पल को, धडकन थमी थी | कहीं रात सूरज की, किरणें जगीं थी | | कहीं दूर चिड़ियों ने, छोड़ा बसेर … more →
wrote 1 year ago: कल मेरे आँगन में पूरा, चाँद अचानक आया था | तारों के उस बड़े झुण्ड पर, थोड़ा सा इठलाया था | | मैंने कान … more →
wrote 1 year ago: तुम भावों का उगता सूरज, जन मानस पर छा जाती हो | मैं खंडित मन का कवि मेरी, पंक्ति बन तुम आ जाती हो | … more →
wrote 1 year ago: एकाकी , तुम मेरे साथी, बस यूँ ही बन कर रहना | चलूँ छोड़ जब अपनी माटी, हाथ पकड़ कर तुम चलना | | एकाकी , … more →
wrote 1 year ago: “तन्हाइयों की आदत अब हो गई हमें तुम्हारा पास आना,अब भाता नहीं यूं फैले हमारी चाहतों के फासले, … more →
wrote 1 year ago: घरबार छुडा़ देती हैं चाहतें, संबंध टूट जाते हैं सारे, डर को भी मिटा देती हैं चाहतें, मर्यादाओं को तो … more →
wrote 2 years ago: गिन रहा हूँ क्षत चिह्नजो तुमने दिए -मन था जबचरम प्रसन्नऔर थी आस हुलास । तुमनेफुफकार दिए अव … more →
wrote 3 years ago: हुई सुबह तो उनकी आँखों में इक सरूर था , आँखों की लाली थी कह रही थी ,कुछ हुआ जरूर था । उलझी हुई लटों … more →
wrote 3 years ago: कुछ अरमान इस दिल के, तन्हा जीवन से तन्हाई मिटाने के ख़्वाब, कुछ चाहत उसे पाने की, थोड़ी आरज़ू उसमे ख … more →
wrote 3 years ago: कुछ अरमान इस दिल के, तन्हा जीवन से तन्हाई मिटाने के ख़्वाब, कुछ चाहत उसे पाने की, थोड़ी आरज़ू उसमे ख … more →
wrote 4 years ago: मजबूरी और बेबसी का जो है आलम, निजात उससे पाने की चाहत है, इंसानों को अब इंसानियत की है ज़रुरत, बस उन … more →
wrote 4 years ago: गोरी, आज यह सिंगार किसके लिए है गुलाबी अंगों में निखार किसके लिए है क्या सजन जी से मिलने का कोई वादा … more →
wrote 4 years ago: गोरी, आज यह सिंगार किसके लिए है गुलाबी अंगों में निखार किसके लिए है क्या सजन जी से मिलने का कोई वादा … more →
wrote 4 years ago: मैं तुम्हें चाहता हूँ यह इक़रार कर पाना बहुत मुश्किल है आकर तुम्हीं मुझसे इज़हारे-इश्क़ का कोई वादा ले … more →
wrote 4 years ago: मैं तुम्हें चाहता हूँ यह इक़रार कर पाना बहुत मुश्किल है आकर तुम्हीं मुझसे इज़हारे-इश्क़ का कोई वादा ले … more →