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	<title>चाहत &amp;laquo; WordPress.com Tag Feed</title>
	<link>http://wordpress.com/tag/चाहत/</link>
	<description>Feed of posts on WordPress.com tagged "चाहत"</description>
	<pubDate>Mon, 07 Jul 2008 10:11:34 +0000</pubDate>

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<item>
<title><![CDATA[मस्तियाँ ही मस्तियाँ हैं]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=975</link>
<pubDate>Sun, 01 Jun 2008 13:55:32 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=975</guid>
<description><![CDATA[मस्तियाँ ही मस्तियाँ हैं
जब से मौसमे-ख]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">मस्तियाँ ही मस्तियाँ हैं<br />
जब से मौसमे-ख़िज़ाँ उतरा है<br />
शाख़ों पर हैं नयी कोंपलें<br />
जब से मौसमे-फ़ुर्क़त गुज़रा है</span></p>
<p><span style="color:#000000;">पुरवाइयाँ तन-बदन पे आग लगती हैं<br />
तन्हाइयाँ मेरे ज़हन से ख़ौफ़ रखती हैं<br />
निगाह में तस्वीरे-यार सजा ली जब से<br />
रंगीनियाँ दिल को ख़ुशगँवार लगती हैं...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">मस्तियाँ ही मस्तियाँ हैं<br />
जब से मौसमे-ख़िज़ाँ उतरा है<br />
बेलों पर महके गुच्छे<br />
जब से हुआ यह मौसम हरा है</span></p>
<p><span style="color:#000000;">मेरी बेक़रारियाँ आज क़रार पाने लगी हैं<br />
यह धड़कनें तेरा नाम गुनगुनाने लगी हैं<br />
इक अजब भँवर-सा उमड़ा है ख़्यालों का<br />
ख़ाबों ख़्यालों की भीड़ राह पाने लगी है...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">मस्तियाँ ही मस्तियाँ हैं<br />
जब से मौसमे-ख़िज़ाँ उतरा है<br />
पैमाने सारे भर गये हैं<br />
बादाख़ार हुआ यह दिल ज़रा है</span></p>
<p><span style="color:#000000;">सूरज है हुस्न उसका, जलाता है मुझको<br />
बदन रेशमी चाँद जैसा, लुभाता है मुझको<br />
तक़दीर जो उसने ' जोड़ ली है मुझसे<br />
आज मौसम बहार का, बुलाता है मुझको...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">मस्तियाँ ही मस्तियाँ हैं<br />
जब से मौसमे-ख़िज़ाँ उतरा है<br />
मेरे लिए उसकी चाहत<br />
आज तो उसका दिल भी ख़रा है</span></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[यह दिन प्यार का दिन है]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=963</link>
<pubDate>Sat, 12 Apr 2008 14:54:06 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=963</guid>
<description><![CDATA[बहुत ख़ूबसूरत प्यार का दिन है
जिसे चाह]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">बहुत ख़ूबसूरत प्यार का दिन है<br />
जिसे चाहो दिल से, उसे पाने का दिन है</span></p>
<p><span style="color:#000000;">रंग हैं चारों तरफ़, गुलाबों की ख़ुशबू है<br />
हर दिल में धड़कती है चाहत<br />
आज इश्क़ के इज़हार का दिन है</span></p>
<p><span style="color:#000000;">हर निगाह में है झिलमिलाहट प्यार की<br />
हर चेहरे पर हैं छायी ख़ुशियाँ<br />
माह है फागुन, आज बहार का दिन है</span></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[आहिस्ता-आहिस्ता नज़दीकियाँ बढ़ने लगीं]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2008/04/03/aahistaa-aahistaa-nazadiikiyaan-badhhane-lagiin-2/</link>
<pubDate>Wed, 02 Apr 2008 20:43:24 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/2008/04/03/aahistaa-aahistaa-nazadiikiyaan-badhhane-lagiin-2/</guid>
<description><![CDATA[आहिस्ता-आहिस्ता नज़दीकियाँ बढ़ने लगीं]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">आहिस्ता-आहिस्ता नज़दीकियाँ बढ़ने लगीं<br />
आहिस्ता-आहिस्ता तुमसे राहें जुड़ने लगीं<br />
आहिस्ता-आहिस्ता तुमसे प्यार हो गया<br />
आहिस्ता-आहिस्ता दोनों निगाहें लड़ने लगीं</span></p>
<p><span style="color:#000000;">तुमसे कहना था संग तेरे जीना है मुझको<br />
प्यार को तुम्हारी आँखों से पीना है मुझको<br />
ज़िन्दगी क्या है तुमसे मिलके जाना मैंने<br />
सिवा तुम्हारे दिल के' चैन कहीं न है मुझको</span></p>
<p><span style="color:#000000;">वह पहली नज़र और वह दिलकश समाँ<br />
वह हुस्नो-अदा और वह मौसम ख़ुशनुमा<br />
बदला-बदला है सब कुछ आज भी यहाँ<br />
यह दिल, यह धड़कन, यह नीला आसमाँ</span></p>
<p><span style="color:#000000;">तुमने दिल लेकर मेरा क्यों न अपना दिया<br />
हाँ मेरी ज़िन्दगी को इक नया सपना दिया<br />
तेरी चाहत सनम मेरी क़िस्मत बन गयी<br />
जो आशिक़ तुमने मुझको अपना बना दिया</span></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[हर गली में ढूँढ़ा तेरा निशाँ]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=957</link>
<pubDate>Wed, 02 Apr 2008 20:21:33 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=957</guid>
<description><![CDATA[हर गली में ढूँढ़ा तेरा निशाँ
मैं भटकता]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">हर गली में ढूँढ़ा तेरा निशाँ<br />
मैं भटकता रहा यहाँ-वहाँ</font></p>
<p><font color="#000000">बेताब है हर लम्हा नज़र<br />
उतरे न इश्क़ का ज़हर</font></p>
<p><font color="#000000">प्यास है तेरे दीदार की<br />
चाहत है तेरे एतबार की</font></p>
<p><font color="#000000">रुख़ पे ज़ुल्फ़ परेशान है<br />
अधूरी तेरी-मेरी दास्तान है</font></p>
<p><font color="#000000">तस्वीरें तेरी चुनता रहा<br />
रोज़ नये ख़ाब बुनता रहा</font></p>
<p><font color="#000000">तस्वीरों से बात करता हूँ मैं<br />
प्यार तुमसे करता हूँ मैं</font></p>
<p><font color="#000000">संगदिल से इल्तिजा की<br />
ख़ुदा से तेरे लिए दुआ की</font></p>
<p><font color="#000000">किस दर पे न माँगा तुम्हें<br />
अब तक क्यों न पाया तुम्हें</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[ज़िन्दगी ढूँढ़ते-ढूँढ़ते मैं तुम तक आ गया]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=954</link>
<pubDate>Mon, 31 Mar 2008 11:45:52 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=954</guid>
<description><![CDATA[ज़िन्दगी ढूँढ़ते-ढूँढ़ते मैं तुम तक आ ग]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">ज़िन्दगी ढूँढ़ते-ढूँढ़ते मैं तुम तक आ गया<br />
सरे-राह मैं अपनी मंज़िल पा गया<br />
चराग़ों का नूर हो, चश्मे-बद्दूर हो<br />
तुम्हें देखकर दिल अँधेरों से दूर आ गया</font></p>
<p><font color="#000000">ख़ुशियों के दीप जल उठे, ग़म सारे बुझ गये<br />
पतझड़ उतरा, गुल शाख़-शाख़ खिल गये<br />
इक-इक धड़कन में नाम तुम्हारा है<br />
तुम्हारी मोहब्बत का जादू मुझपे छा गया</font></p>
<p><font color="#000000">ख़ुशबू-ख़ुशबू मैंने तुमको पाया सनम<br />
मोहब्बत में तेरी ख़ुद को मिटाया सनम<br />
तेरी पहली नज़र से क़त्ल हुआ था मैं<br />
लहू के हर क़तरे में तेरा प्यार समा गया</font></p>
<p><font color="#000000">राज़ दिल के सभी आँखों से बयाँ कर दो<br />
राहे-मुहब्बत मेरी तुम आसाँ कर दो<br />
नहीं कोई अरमाँ तेरी चाहत के सिवा<br />
बस तेरा ही चेहरा दिलो-दिमाग़ पे छा गया</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[इक दिन तू चली जायेगी ]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=931</link>
<pubDate>Sat, 15 Mar 2008 14:46:00 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=931</guid>
<description><![CDATA[मेरी जान न कर मुझसे मोहब्बत इतनी
कि इक ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">मेरी जान न कर मुझसे मोहब्बत इतनी<br />
कि इक दिन तू चली जायेगी<br />
एतबार मैं तेरा कर तो लूँगा<br />
मगर इक दिन तू चली जायेगी </font></p>
<p><font color="#000000">ख़ूबसूरत यह दिन, हसीन यह पल<br />
साथ जो तेरे मैंने गुज़ारे हैं<br />
सारे जहाँ की चाहत है इनमें<br />
और यह सब तुम्हारे हैं, सब तुम्हारे हैं</font></p>
<p><font color="#000000">मैं वही दरख़्त हूँ<br />
जिस पर मौसम आते रहे, जाते रहे<br />
इक बहार की तरह तू भी आयी है<br />
और इक दिन तू चली जायेगी</font></p>
<p><font color="#000000">कोई वादा न कर तू रुकेगी ज़हन में<br />
यादों की इक आँधी इक तूफ़ान की तरह<br />
चले जाना तेरी उल्फ़त की तक़दीर है<br />
माना मेरे साथ है तू हमसफ़र की तरह</font></p>
<p><font color="#000000">मैं वही बादल हूँ<br />
जिसकी बाँहों में छिपता है चाँद कभी-कभी<br />
बिल्कुल चाँद की तरह तू भी आयी है<br />
और इक दिन तू चली जायेगी</font></p>
<p><font color="#000000">मेरी जान न कर मुझसे मोहब्बत इतनी<br />
कि इक दिन तू चली जायेगी...</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[मेरी आँखों पर जो था]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=915</link>
<pubDate>Fri, 14 Mar 2008 11:29:57 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=915</guid>
<description><![CDATA[मेरी आँखों पर जो था तेरी ख़ुशबू का आँच]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">मेरी आँखों पर जो था तेरी ख़ुशबू का आँचल था<br />
वह तेरी लटों का लहराना चाँद पे उड़ता बादल था<br />
मुहब्बत के ज़हरीले तीर जो तुमने चलाये<br />
तिश्ना लबों पर प्यास का क़तरा कितना बेकल था</font></p>
<p><font color="#000000">वह गीले गुलाबी लब तेरे कितने नशीले थे<br />
तेरी नख़्वत से हाए! हुए कितने रोबीले थे<br />
देखा तो देखता ही रह गया तेरे यह आशिक़<br />
तेरा चेहरा झील में खिलता हुआ ताज़ा कँवल था</font></p>
<p><font color="#000000">मेरी आँखों पर जो था तेरी ख़ुशबू का आँचल था<br />
वह तेरी लटों का लहराना चाँद पे उड़ता बादल था</font></p>
<p><font color="#000000">जब भी निकलती हो सामने से मुस्कुराके निकलती हो<br />
क्यों न हो दर्द मीठा-मीठा बर्क़ गिराती चलती हो<br />
तुमको कोई और चाहता है मेरी चाहत हुई बेअसर<br />
मेरे दर्दो-दिल का हर टुकड़ा एक नयी ग़ज़ल था</font></p>
<p><font color="#000000">मेरी आँखों पर जो था तेरी ख़ुशबू का आँचल था<br />
वह तेरी लटों का लहराना चाँद पे उड़ता बादल था</font></p>
<p>तिश्ना= प्यासा, नख़्वत= नखरा, नाराज़गी, बर्क़= बिजली</p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘वफ़ा’<br />
लेखन वर्ष: २००२</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[क्या वह तुम थे]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=882</link>
<pubDate>Fri, 07 Mar 2008 09:13:44 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=882</guid>
<description><![CDATA[क्या वह तुम थे
जो आँखों को महका गये
तमन]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">क्या वह तुम थे<br />
जो आँखों को महका गये<br />
तमन्ना दबी-सी<br />
मेरे दिल में सुलगा गये<br />
मैं कितना तन्हा फिर रहा था<br />
जी रहा था यों कि<br />
रोज़ मर रहा था<br />
तुमने जो धड़कनें जवाँ कीं<br />
मुझको ख़्यालों में उलझा गये</font></p>
<p><font color="#000000">शाम के साथ तुमको देखकर<br />
बेक़ाबू हो गया मैं<br />
क्या कहूँ ख़ुद को<br />
अन्जाम-ए-जुस्त-जू हो गया मैं<br />
दूरियों का यह परदा<br />
उठ जाये ज़रा<br />
तुम अरमान मेरे पिघला गये</font></p>
<p><font color="#000000">यह तस्वीरे-नशा<br />
मैं पलकों से उठाऊँ कैसे<br />
डर लगता है<br />
खो जाये न कहीं<br />
इक बार तो गुज़रो<br />
मेरे दर से कि मैं समझूँ<br />
तुम हो यहीं<br />
तुम ढलती शाम<br />
यह कैसे ख़ाब दिखला गये</font></p>
<p><font color="#000000">मेरी साँसों को यह ठण्डक<br />
कैसी पड़ गयी है<br />
एक चाहत के ख़ाब की<br />
शमअ जल गयी है<br />
मैं बदला कहाँ हूँ वही हूँ<br />
तुम जानम मुझे<br />
बीती गलियाँ लौटा गये</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[कभी वैसे होता है]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=878</link>
<pubDate>Wed, 05 Mar 2008 13:11:36 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=878</guid>
<description><![CDATA[कभी वैसे होता है,
कभी ऐसे होता है
यह प्य]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">कभी वैसे होता है,<br />
कभी ऐसे होता है<br />
यह प्यार जो होता है,<br />
प्यार ही  रहता  है...</font></p>
<p><font color="#000000">तुमको सब पता है<br />
हमको सब पता है<br />
तुम भी दीवाने हो<br />
हम भी दीवाने हैं<br />
यह सबको पता है<br />
कभी वैसे होता है,<br />
कभी ऐसे होता है</font></p>
<p><font color="#000000">मस्ती है तुमको भी<br />
मस्ती है हमको भी<br />
तुमको भी चाहत है<br />
हमको भी चाहत है<br />
यह किसकी ख़ता है<br />
कभी वैसे होता है,<br />
कभी ऐसे होता है</font></p>
<p><font color="#000000">नज़रों का चलना<br />
दिल का मचलना<br />
चलते-चलते फिसलना<br />
गिरते-गिरते संभलना<br />
ऐसा ही कुछ होता है<br />
कभी वैसे होता है,<br />
कभी ऐसे होता है</font></p>
<p><font color="#000000">जब भी मिलते हैं<br />
साथ-साथ चलते हैं<br />
क्या बातें करते हैं<br />
कहने से डरते हैं<br />
चैन कहाँ मिलता है<br />
कभी वैसे होता है,<br />
कभी ऐसे होता है</font></p>
<p><font color="#000000">इक़रार गर हो जाये<br />
इज़हार गर हो जाये<br />
हो जाये इक कमाल<br />
हो जाये इक वबाल<br />
ऐसा ही लगता है<br />
कभी वैसे होता है,<br />
कभी ऐसे होता है</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[मैं उससे मोहब्बत करता था]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=855</link>
<pubDate>Wed, 27 Feb 2008 17:10:57 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=855</guid>
<description><![CDATA[मैं उससे मोहब्बत करता था
आज भी करता हू]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">मैं उससे मोहब्बत करता था<br />
आज भी करता हूँ<br />
काँच के दिल में जान भरता हूँ</font></p>
<p><font color="#000000">मेरे ख़ाबों में मेरे सपनों में<br />
उसकी ही चाहत है<br />
वह जो है मेरी ज़िन्दगी है<br />
मुझे चैन है राहत है</font></p>
<p><font color="#000000">मैं तन्हा था अकेला था<br />
आज उसके लिए जीता हूँ<br />
आँखों से उसकी प्यार पीता हूँ</font></p>
<p><font color="#000000">सपने हक़ीक़त हो गये हैं<br />
दोनों इक जाँ हो गये हैं<br />
निगाहों से नज़रों तक हम<br />
एक-दूसरे में खो गये हैं</font></p>
<p><font color="#000000">लम्हा यह लम्हा जी लिया है<br />
जो दिल उसको दे दिया है</font></p>
<p><font color="#000000">मैं उससे मोहब्बत करता था<br />
आज भी करता हूँ...</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: ०२ मई २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[ना जीने को जी करता है]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=848</link>
<pubDate>Tue, 26 Feb 2008 15:29:58 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=848</guid>
<description><![CDATA[ना   जीने   को   जी  करता  है
ना   मरने   ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">ना   जीने   को   जी  करता  है<br />
ना   मरने   को  जी करता है<br />
तू   नहीं   है   जो   साथ   मेरे<br />
साथ रहने को जी करता है</font></p>
<p><font color="#000000">खो गया हूँ तन्हाइयों में कहीं<br />
न कोई शाद है न दर्द है कहीं<br />
बिछायी-बिछायी काँटों की तह है<br />
ख़ुद को पिरोने को जी करता है</font></p>
<p><font color="#000000">यह दिन के उजाले ख़ारे हैं<br />
धीरे-धीरे यादों में गुज़ारे हैं<br />
रात   मुट्ठी   में   रेत-सी   है<br />
रेत भिगोने को जी करता है</font></p>
<p><font color="#000000">ना   जीने   को   जी  करता  है<br />
ना   मरने   को  जी करता है</font></p>
<p><font color="#000000">अफ़साने में तू मेरा प्यार है<br />
चाहत में तेरी मेरा किरदार है<br />
तू रूठी जो झूठी-मूठी बहाने से<br />
तुझको मनाने को जी करता है</font></p>
<p><font color="#000000">यह सुबह जो थक जाती है<br />
दिन के काँधे पर शाम आती है<br />
मैं शाम के साथ बैठा रहूँ तो<br />
प्यार तेरा पाने को जी करता है</font></p>
<p><font color="#000000">तू   नहीं   है   जो   साथ   मेरे<br />
साथ रहने को जी करता है</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २९ अप्रैल २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[तुमको लौट के यहीं आना है]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=821</link>
<pubDate>Sat, 23 Feb 2008 22:22:05 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=821</guid>
<description><![CDATA[तुमको लौट के यहीं आना है (यहीं आना है)
त]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">तुमको लौट के यहीं आना है (यहीं आना है)<br />
तुम मानो या न मानो<br />
मेरा दिल तेरा आशियाना है (आशियाना है)<br />
तुम मानो या न मानो</font></p>
<p><font color="#000000">एक इल्ज़ाम देकर जा रहे हो ग़ैर की बाँहों में<br />
कभी तो तुम्हें उसको ठुकराना है<br />
तुम मानो या न मानो</font></p>
<p><font color="#000000">हम दोस्त थे तुमने अदू मान लिया जाने दो<br />
मुझे आज रब को भी आज़माना है<br />
तुम मानो या न मानो</font></p>
<p><font color="#000000">देखता हूँ यह रंग यह तेवर कब तलक हैं<br />
तुमको ख़ुद चलके मेरे पास आना है<br />
तुम मानो या न मानो</font></p>
<p><font color="#000000">जो गिरह तुमने ख़ुद डाली हमारे रिश्ते में<br />
उसको तुम्हें दुनिया से छुपाना है<br />
तुम मानो या न मानो</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति 'नज़र'<br />
लेखन वर्ष: १४ अप्रैल २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[रक़ाबी चाँद जला दो]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=816</link>
<pubDate>Tue, 19 Feb 2008 13:01:58 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=816</guid>
<description><![CDATA[रक़ाबी चाँद जला दो
यह रात चाँदनी हो जाय]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">रक़ाबी चाँद जला दो<br />
यह रात चाँदनी हो जाये<br />
कभी तो पास बुला लो<br />
तेरी नज़दीकियों का<br />
मुझे एहसास हो जाये</font></p>
<p><font color="#000000">गुलाबी शाम ढलती है<br />
रोज़ गुज़रती हो<br />
मेरे घर के सामने से<br />
मैं दिल थाम के बैठा रहता हूँ<br />
आइना जब भी हो हाथों में<br />
उससे तेरी बातें करता हूँ...</font></p>
<p><font color="#000000">रक़ाबी चाँद जला दो<br />
यह रात चाँदनी हो जाये<br />
एक रिश्ता बना लो<br />
मुलाक़ात लाज़मी हो जाये</font></p>
<p><font color="#000000">तेरे सिले हुए लबों पर<br />
क्या इक़रार होगा<br />
मेरा ख़्याल है कि इज़हार होगा<br />
बात कोई नही, बात तुम में है<br />
मैं न हूँ शायद तुझमें<br />
पर तू मुझमें है...</font></p>
<p><font color="#000000">रक़ाबी चाँद जला दो<br />
यह रात चाँदनी हो जाये</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[दिल से पूछो]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=801</link>
<pubDate>Mon, 18 Feb 2008 12:12:17 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=801</guid>
<description><![CDATA[दिल से पूछो, इसकी मोहब्बत क्या है
दिल ब]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">दिल से पूछो, इसकी मोहब्बत क्या है<br />
दिल बतायेगा इसकी चाहत क्या है<br />
बस तुम हो बस तुम हो सिर्फ़ तुम हो</font></p>
<p><font color="#000000">जैसे लहरों को साहिल से प्यार हुआ<br />
जैसे अम्बर को बादल से प्यार हुआ<br />
ऐसे ही मुझको तुमसे प्यार हो गया<br />
मैं‍ दीवाना हो गया मैं दीवाना हो गया<br />
मैं तेरे प्यार में जान दीवाना हो गया</font></p>
<p><font color="#000000">दिल से पूछो, इसकी मोहब्बत क्या है<br />
दिल बतायेगा इसकी चाहत क्या है<br />
बस तुम हो बस तुम हो सिर्फ़ तुम हो</font></p>
<p><font color="#000000">मुझसे कहते रहे इस जग के लोग<br />
बचना तुम देखो न लेना यह रोग<br />
जाने कब तुम मेरे दिल में बस गयी<br />
जाने कब तुम मुझे मुहब्बत दे गयी<br />
चाहत की नदिया रुकी नहीं बह गयी</font></p>
<p><font color="#000000">दिल से पूछो, इसकी मोहब्बत क्या है<br />
दिल बतायेगा इसकी चाहत क्या है<br />
बस तुम हो बस तुम हो सिर्फ़ तुम हो</font></p>
<p><font color="#000000">अब चाहे जो हो जाये चाहे तूफ़ाँ आये<br />
मुझे तेरी मुहब्बत का इंतिज़ार रहेगा<br />
दिल तेरे लिए धड़कता है यह धड़केगा</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[पहला-पहला नशा]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=784</link>
<pubDate>Fri, 15 Feb 2008 13:55:15 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=784</guid>
<description><![CDATA[जादू जैसा छाया पहला-पहला नशा
जी में आय]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">जादू जैसा छाया पहला-पहला नशा<br />
जी में आये पंख खोल उड़ जाऊँ मैं<br />
आस्माँ से आगे निकल जाऊँ मैं</font></p>
<p><font color="#000000">मस्ती दिल पर छायी अनजानी-सी<br />
उड़ती फिरे है जैसे फूलों पर तितली<br />
दिल में जाने कैसा तूफ़ान उठा है<br />
यूँ लगता है हर पल मुझसे रूठा है</font></p>
<p><font color="#000000">तेरा ग़म पाया ख़ुशी मुझको मिली<br />
लगता है खिल रही दिल की कली<br />
जादू जैसा छाया पहला-पहला नशा</font></p>
<p><font color="#000000">तेरे ख़ाब आते रहे मुझको रातभर<br />
मैं कहाँ जाऊँगा दूर तुमसे बिछड़कर<br />
अफ़साना बन चुका खो गया दिल<br />
इल्तिजा सुन ले मुझसे आकर मिल</font></p>
<p><font color="#000000">यह जादू प्यार है मैंने अब जाना<br />
जिसको ढूँढ़ रहा था वह मुझे मिला<br />
जादू जैसा छाया पहला-पहला नशा</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[अकेले हम हों कभी]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=776</link>
<pubDate>Thu, 14 Feb 2008 16:24:24 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=776</guid>
<description><![CDATA[अकेले हम हों कभी, अकेले तुम हो
और समन्द]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">अकेले हम हों कभी, अकेले तुम हो<br />
और समन्दर का गुलाबी किनारा हो<br />
तन्हाई में हम हों रुसवाई में तुम हो<br />
तुमको मनाने का कोई बहाना हो</font></p>
<p><font color="#000000">कुछ तुम कहो फिर कुछ हम कहें<br />
दिल की धड़कनों का कहा दोनों सुनें<br />
चाहे लम्हे रुकें चाहे लम्हे बहते रहें<br />
मगर हम-तुम साथ हमेशा दोनों रहें</font></p>
<p><font color="#000000">अकेले हम हों कभी, अकेले तुम हो<br />
और समन्दर का गुलाबी किनारा हो<br />
लहरें आती हों साहिल से मिल जाती हों<br />
तुम पर लिखने का लिए अफ़साना हो</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[चाँद गवाह है मेरे प्यार का ]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=772</link>
<pubDate>Thu, 14 Feb 2008 08:15:01 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=772</guid>
<description><![CDATA[चाँद गवाह है मेरे प्यार का
क्या यही ख़]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">चाँद गवाह है मेरे प्यार का<br />
क्या यही ख़्याल है, मेरे यार का<br />
कुछ न ख़बर हुई उस पल की<br />
कुछ न पता चला उस पल का<br />
उसके चेहरे पर नज़र रुकी<br />
क्या ख़बर क्या गया, क्या मिला </font></p>
<p><font color="#000000">हर लम्हा इन्तज़ार नये ख़ाब का<br />
क्या ऐसा ही हाल है मेरे यार का<br />
जाने ना मिलें या न मिलें<br />
उनसे हम कभी दोबारा<br />
जाने फिर खिले या न खिले<br />
वह गुलशन देखा हुआ नज़ारा</font></p>
<p><font color="#000000">चाँद गवाह है मेरे प्यार का<br />
क्या यही ख़्याल है, मेरे यार का </font></p>
<p><font color="#000000">मैंने जिसे चाहा उसने मुझे चाहा<br />
इस बात की ख़बर नहीं<br />
बहती हवा भी मुँहज़ोर नहीं<br />
तन में तपिश करती है चाँदनी<br />
यह असर है पहले प्यार का<br />
क्या ऐसा ही हाल है मेरे यार का</font></p>
<p><font color="#000000">चाँद गवाह है मेरे प्यार का<br />
क्या यही ख़्याल है, मेरे यार का </font></p>
<p><font color="#000000">दिल में दर्द की आतिश जल रही है<br />
तुम्हें पाने की चाहत बढ़ रही है<br />
दिल मेरा बेताब है<br />
जाने कहाँ दमका माहताब है<br />
ऐसा रूप-रंग है मेरे यार का<br />
रोशन कर दे दिल जाँनिसार का</font></p>
<p><font color="#000000">चाँद गवाह है मेरे प्यार का<br />
क्या यही ख़्याल है, मेरे यार का</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[इक तरफ़ वह इक तरफ़ हम]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=759</link>
<pubDate>Tue, 12 Feb 2008 17:29:16 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=759</guid>
<description><![CDATA[इक तरफ़ वह इक तरफ़ हम
बीच में यह फ़ासले
इश्]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">इक तरफ़ वह इक तरफ़ हम<br />
बीच में यह फ़ासले<br />
इश्क़ की डोर से<br />
हमने जो बाँधे बन्धन<br />
क्या ख़बर उन पर गींठ लगी भी</font></p>
<p><font color="#000000">इश्क़ के दायरे में खड़े<br />
मगर वह साथ नहीं<br />
पल-पल बन रहा है कल<br />
क्या ख़बर वह हमसे मिलेंगे भी</font></p>
<p><font color="#000000">इक तरफ़ वह इक तरफ़ हम<br />
बीच में यह फ़ासले<br />
इश्क़ का असर है इधर<br />
दिल हमारा गुमसुम है<br />
क्या ख़बर उन पर असर हुआ भी</font></p>
<p><font color="#000000">इश्क़ में न मिले मौत<br />
और हम ज़िन्दा भी नहीं<br />
आती-जाती है वह रोज़<br />
क्या ख़बर वह फ़िरोज़ मिलेगी भी</font></p>
<p><font color="#000000">इक तरफ़ वह इक तरफ़ हम<br />
बीच में यह फ़ासले<br />
इश्क़ में निभाते हैं हम<br />
रात का सुबह से जो बन्धन<br />
क्या ख़बर वह यह हालात जानते भी</font></p>
<p><font color="#000000">इश्क़ का है यह दस्तूर<br />
क्या वह यह समझते भी<br />
कुछ नहीं है इस बात का हल<br />
क्या ख़बर वह जो हल है मिलेगा भी</font></p>
<p><font color="#000000">इक तरफ़ वह इक तरफ़ हम<br />
बीच में यह फ़ासले...</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[दरिया किनारे वह लड़की बाल सँवारे]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=748</link>
<pubDate>Tue, 12 Feb 2008 05:15:17 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=748</guid>
<description><![CDATA[दरिया किनारे वह लड़की बाल सँवारे
क़दमो]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">दरिया किनारे वह लड़की बाल सँवारे<br />
क़दमों के निशाँ पर बहते हैं पानी के धारे<br />
दिल की ज़ुबाँ तो दीवाना दिल ही जाने<br />
सभी तो मरते हैं उस पर यह सारे</font></p>
<p><font color="#000000">रह-रहकर आसमानों में उड़ती है चाहत<br />
देखकर उसे दिल को मिलती है राहत<br />
दरिया किनारे वह लड़की बाल सँवारे<br />
क़दमों के निशाँ पर बहते हैं पानी के धारे</font></p>
<p><font color="#000000">जादू है इन फ़िज़ाओं में शबनमी हैं रातें<br />
होती कहाँ है अपनी मुलाक़ातें दो चार बातें<br />
दरिया किनारे वह लड़की बाल सँवारे<br />
क़दमों के निशाँ पर बहते हैं पानी के धारे</font></p>
<p><font color="#000000">दिल की हर धड़कन उसका ही नाम पुकारे<br />
वह आगे-आगे है पीछे हैं उसके सारे<br />
दरिया किनारे वह लड़की बाल सँवारे<br />
क़दमों के निशाँ पर बहते हैं पानी के धारे</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[मुझसे वह अक्सर मिला करती है]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2008/02/07/mujh-se-wah-aksar-mila-karatii-hai/</link>
<pubDate>Thu, 07 Feb 2008 09:44:49 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/2008/02/07/mujh-se-wah-aksar-mila-karatii-hai/</guid>
<description><![CDATA[इक लड़की है मुझसे वह अक्सर मिला करती ह]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">इक लड़की है मुझसे वह अक्सर मिला करती है<br />
खिलती कलियों-सी मुस्कुराती है परी लगती है<br />
कहती है वह, एक लड़के से प्यार करती है<br />
क्या मुझे भी किसी से प्यार है पूछा करती है<br />
लगता है वह मुझसे इशारों में बातें करती है<br />
जहाँ भी जाऊँ मेरे पीछे-पीछे वह आया करती है<br />
इक लड़की है वह मुझसे अक्सर मिला करती है...</font></p>
<p><font color="#000000">जब मैं नहीं मिलता हूँ मेरा इंतज़ार करती है<br />
जब मैं आता हूँ तितलियों-सी मचलने लगती है<br />
जब मैं उसके साथ होता हूँ मुझसे पूछती है<br />
उससे कैसे कहे जिससे वह मोहब्बत करती है<br />
इक लड़की है मुझसे वह अक्सर मिला करती है<br />
खिलती कलियों-सी मुस्कुराती है परी लगती है<br />
इक लड़की है वह मुझसे अक्सर मिला करती है...</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[आरज़ू तुम हो मेरी]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=714</link>
<pubDate>Thu, 07 Feb 2008 09:19:12 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=714</guid>
<description><![CDATA[आरज़ू तुम हो मेरी मुझको है पता
मैं तो तु]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">आरज़ू तुम हो मेरी मुझको है पता<br />
मैं तो तुमसे मोहब्बत करता हूँ<br />
तुम करती हो या नहीं, नहीं हैं पता</font></p>
<p><font color="#000000">मिलते हो तुम यह दिल धड़कता है<br />
कहते नहीं जो तुम यह दिल सुनता है</font></p>
<p><font color="#000000">आरज़ू तुम हो मेरी मुझको है पता<br />
मैं तो तुमसे मोहब्बत करता हूँ<br />
तुम करती हो या नहीं, नहीं हैं पता</font></p>
<p><font color="#000000">तुमसे कहने को बहुत कुछ है मगर<br />
मैं कुछ सोचकर रह जाता हूँ फिर<br />
जाने क्यों दिल में छुपा है यह डर<br />
क्या होगा जो तुम ना मिले अगर</font></p>
<p><font color="#000000">आरज़ू तुम हो मेरी मुझको है पता<br />
मैं तो तुमसे मोहब्बत करता हूँ<br />
तुम करती हो या नहीं, नहीं हैं पता</font></p>
<p><font color="#000000">तू दिल के क़रीब है फिर भी दूर बहुत<br />
पर ना जाने क्यों बढ़ती जाती है चाहत<br />
तेरे दिल में है क्या, यह नहीं है पता<br />
तुम मेरे क़रीब आओगे मुझको है पता</font></p>
<p><font color="#000000">मैं तो तुमसे मोहब्बत करता हूँ<br />
तुम करती हो या नहीं, नहीं हैं पता</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[तुमने केवल वही देखा]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=713</link>
<pubDate>Thu, 07 Feb 2008 07:27:01 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=713</guid>
<description><![CDATA[तुमने केवल वही देखा
जो तुम्हारी आँखों ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">तुमने केवल वही देखा<br />
जो तुम्हारी आँखों ने देखना चाहा<br />
तुमने यह ना देखा, जाने-जाँ<br />
मैंने तुम्हें कितना चाहा</font></p>
<p><font color="#000000">रात हो या दिन हो<br />
मेरी यादों में रहते तुम हो<br />
मेरे पास तेरी तस्वीर है<br />
यह तस्वीर मेरे लिए तुम हो</font></p>
<p><font color="#000000">दिल में तू बस गया<br />
ख़ाबों का नया गुल खिल गया<br />
आयी मौसम में फिर बहार है<br />
दिल कहता है तू मेरा यार है</font></p>
<p><font color="#000000">तुमने केवल वही देखा<br />
जो तुम्हारी आँखों ने देखना चाहा<br />
तुमने यह ना देखा, जाने-जाँ<br />
मैंने तुम्हें कितना चाहा</font></p>
<p><font color="#000000">तेरी बे-रुख़ी तेरे चेहरे पर थी<br />
जब-जब मैंने इक़रार करना चाहा<br />
दिल के सौ टुकड़े हो गये<br />
जब तुमने किसी और को चाहा</font></p>
<p><font color="#000000">तू माने न मुझे अपना<br />
पर मैं तुझे अपना मानती हूँ<br />
तू जाने कहाँ खो गया<br />
पर मैं तुझे आज भी ढूँढ़ती हूँ</font></p>
<p><font color="#000000">तुमने केवल वही देखा<br />
जो तुम्हारी आँखों ने देखना चाहा<br />
तुमने यह ना देखा, जाने-जाँ<br />
मैंने तुम्हें कितना चाहा</font></p>
<p>Inspired by Madonna (Song: Frozen, Album: Ray of light, 1998)</p>
<p>You only see what your eyes want to see<br />
How can life be what you want it to be...</p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[आ तेरी आँखों के नीलम से]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2008/01/10/aa-terii-aamkhon-ke-neelam-se/</link>
<pubDate>Wed, 09 Jan 2008 18:30:15 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/2008/01/10/aa-terii-aamkhon-ke-neelam-se/</guid>
<description><![CDATA[आ तेरी आँखों के नीलम से
यह चाँद-रात नील]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">आ तेरी आँखों के नीलम से<br />
यह चाँद-रात नीली कर दूँ<br />
पलकों पे रख लूँ कुछ ख़ाब तेरे<br />
अपने कर लूँ...</font></p>
<p><font color="#000000">खोने लगें तो खोने देना<br />
डूब जाना मुझको डबोना<br />
बोझल-बोझल शाम है<br />
मत पूछना क्या नाम है</font></p>
<p><font color="#000000">आ तेरी आँखों के नीलम से<br />
यह चाँद-रात नीली कर दूँ</font></p>
<p><font color="#000000">बढ़ने दे रात की ख़ाहिश<br />
होने दे ख़ाब की बारिश<br />
उलझने दे जितना उलझते जायें<br />
ऐसा उलझें कि सुलझ न पायें</font></p>
<p><font color="#000000">आ तेरी आँखों के नीलम से<br />
यह चाँद-रात नीली कर दूँ</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००१-२००२</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[दीप जलाओ रात को पूनम कर दो]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/12/28/%e0%a4%a6%e0%a5%80%e0%a4%aa-%e0%a4%9c%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%93-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%a8%e0%a4%ae-%e0%a4%95%e0%a4%b0-%e0%a4%a6%e0%a5%8b/</link>
<pubDate>Fri, 28 Dec 2007 09:28:06 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/12/28/%e0%a4%a6%e0%a5%80%e0%a4%aa-%e0%a4%9c%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%93-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%a8%e0%a4%ae-%e0%a4%95%e0%a4%b0-%e0%a4%a6%e0%a5%8b/</guid>
<description><![CDATA[दीप जलाओ रात को पूनम कर दो
मेहबूब की या]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">दीप जलाओ रात को पूनम कर दो<br />
मेहबूब की यादों से आँखें नम कर दो</font></p>
<p><font color="#000000">तमन्ना को हसरते-विसाल है<br />
ज़हर दे दो मुझे यह करम कर दो</font></p>
<p><font color="#000000">शाम की ख़ाक गिरने लगी है आसमाँ से<br />
मेरे ख़ातिर में सहरे-ग़म कर दो</font></p>
<p><font color="#000000">बर्फ़ की गरमी से आजिज़ आ चुका मैं<br />
बे-तस्कीनियों की धूप गरम कर दो</font></p>
<p><font color="#000000">चाँद के छुपने का बाइस मैं कैसे कहूँ<br />
'वफ़ा' आज बरसात का मौसम कर दो</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘वफ़ा’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
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<title><![CDATA[ज़बीने-माह पर गेसू की लहर याद आती है]]></title>
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<pubDate>Fri, 28 Dec 2007 08:58:41 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
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<description><![CDATA[ज़बीने-माह पर गेसू की लहर याद आती है
वह ग]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">ज़बीने-माह पर गेसू की लहर याद आती है<br />
वह गुलाबी ख़ुशरंग शामो-सहर याद आती है</font></p>
<p><font color="#000000">जिसने हमें ज़िन्दगी का दीवाना कर दिया<br />
वह उसकी क़ातिल तीरे-नज़र याद आती है</font></p>
<p><font color="#000000">एक शाल में लिपटी बैठी रहती थी जब तुम<br />
वह सर्दियों की गर्म दोपहर याद आती है</font></p>
<p><font color="#000000">जिसे तुमने घर आके भी न पढ़ा मेरी आँखों में<br />
वह फ़ुग़ाँ वह आहे-कम-असर याद आती है</font></p>
<p><font color="#000000">बाइस नहीं खुलता तुम से बिछड़ जाने का<br />
आज वह पहला प्यार वह उमर याद आती है</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
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