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	<title>जादू &amp;laquo; WordPress.com Tag Feed</title>
	<link>http://wordpress.com/tag/जादू/</link>
	<description>Feed of posts on WordPress.com tagged "जादू"</description>
	<pubDate>Mon, 08 Sep 2008 06:38:38 +0000</pubDate>

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<title><![CDATA[पहली नज़र उफ़ तौबा हाए]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=1079</link>
<pubDate>Tue, 26 Aug 2008 16:52:09 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=1079</guid>
<description><![CDATA[पहली नज़र उफ़ तौबा हाए
दिल कैसे ख़ुद को स]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">पहली नज़र उफ़ तौबा हाए<br />
दिल कैसे ख़ुद को समझाए<br />
दिवाने को आशिक़, आशिक़ को सौदाई, कर दिया है<br />
सौदाई परवाना, कैसे ना<br />
शमअ पर जान लुटाए...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">पहली नज़र उफ़ तौबा हाए...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">पागल यह पवन हो गयी है<br />
ख़ुशबू का चमन हो गयी है<br />
जादू तेरी निगाह चलाये, मेरे दिल को धड़काये<br />
जाये रे जाये, मेरी जान<br />
चली जाये, ना जाये...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">पहली नज़र उफ़ तौबा हाए<br />
पहली नज़र का असर हाए<br />
दिल कैसे ख़ुद को समझाये...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">शाम जैसा सुनहरा तेरा चेहरा<br />
आँखों का रंग काजल से गहरा<br />
चाँद जो आये, चाँदनी बिखर जाये, नूर ना पाये<br />
तू जो मुस्कुराये<br />
सूरज चमक जाये, नूर उठाये...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">पहली नज़र उफ़ तौबा हाए<br />
पहली नज़र का असर हाए<br />
दिल कैसे ख़ुद को समझाये...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">तू ख़ाबों में आने लगी है<br />
ख़्यालों को उलझाने लगी है<br />
आये, तू मेरी ज़िन्दगी में आये, कभी तो आये<br />
मेरी हर शाम, चमक जाये<br />
महक जाये, बहक जाये...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">पहली नज़र उफ़ तौबा हाए...</span></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[ज़िन्दगी ढूँढ़ते-ढूँढ़ते मैं तुम तक आ गया]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=954</link>
<pubDate>Mon, 31 Mar 2008 11:45:52 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=954</guid>
<description><![CDATA[ज़िन्दगी ढूँढ़ते-ढूँढ़ते मैं तुम तक आ ग]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">ज़िन्दगी ढूँढ़ते-ढूँढ़ते मैं तुम तक आ गया<br />
सरे-राह मैं अपनी मंज़िल पा गया<br />
चराग़ों का नूर हो, चश्मे-बद्दूर हो<br />
तुम्हें देखकर दिल अँधेरों से दूर आ गया</font></p>
<p><font color="#000000">ख़ुशियों के दीप जल उठे, ग़म सारे बुझ गये<br />
पतझड़ उतरा, गुल शाख़-शाख़ खिल गये<br />
इक-इक धड़कन में नाम तुम्हारा है<br />
तुम्हारी मोहब्बत का जादू मुझपे छा गया</font></p>
<p><font color="#000000">ख़ुशबू-ख़ुशबू मैंने तुमको पाया सनम<br />
मोहब्बत में तेरी ख़ुद को मिटाया सनम<br />
तेरी पहली नज़र से क़त्ल हुआ था मैं<br />
लहू के हर क़तरे में तेरा प्यार समा गया</font></p>
<p><font color="#000000">राज़ दिल के सभी आँखों से बयाँ कर दो<br />
राहे-मुहब्बत मेरी तुम आसाँ कर दो<br />
नहीं कोई अरमाँ तेरी चाहत के सिवा<br />
बस तेरा ही चेहरा दिलो-दिमाग़ पे छा गया</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[आँखों में आँसू नहीं आते]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=945</link>
<pubDate>Fri, 21 Mar 2008 09:52:02 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=945</guid>
<description><![CDATA[आँखों में आँसू नहीं आते
क्योंकि मैं जा]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">आँखों में आँसू नहीं आते<br />
क्योंकि मैं जानता हूँ<br />
तुम लौटकर आओगी ज़रूर<br />
यह दिल तन्हा कहाँ है<br />
इसमें यादें हैं तुम्हारी<br />
तुम रहो कितने भी दूर</font></p>
<p><font color="#000000">देखता हूँ तुम्हें<br />
जब भी आँखें मूँद लेता हूँ<br />
और कोई कहाँ है इनमें हुज़ूर<br />
तुमसे प्यार किया है<br />
यह दिल का सौदा है तुम्हीं से<br />
क्यों न रहूँ थोड़ा मग़रूर</font></p>
<p><font color="#000000">पास आने के दिन आ गये<br />
धड़कनों में बेक़रारी है<br />
दिल में सुरूर ही सुरूर<br />
वादियों में चले मौसम हरे<br />
डालियों पर फूल गुलाबी हैं<br />
निगाह में भर गया है नूर</font></p>
<p><font color="#000000">जादू-सा है फ़िज़ाओं में<br />
खिल रहे हैं ख़्याल हर-सू<br />
क्यों न आये तुम्हारा मज़कूर<br />
दिल बहलता नहीं बातों से<br />
यह कैसा सिलसिला है<br />
चैन आये गर आये वह हूर</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[चुपके से दिल को दिया]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=876</link>
<pubDate>Wed, 05 Mar 2008 09:42:09 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=876</guid>
<description><![CDATA[चुपके से दिल को दिया
चुपके से दिल को लि]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">चुपके से दिल को दिया<br />
चुपके से दिल को लिया<br />
छल्ला बनाकर उँगली में पहन लिया</font></p>
<p><font color="#000000">रात-दिन चूमती हूँ इसे<br />
रात-दिन चाहता हूँ तुम्हें<br />
पास जो तुम आ गये सब मिल गया</font></p>
<p><font color="#000000">सब्ज़ मौसम हसीं आँखों में खिल गये<br />
प्यार में तुम हमें ऐसे जो मिल गये<br />
ख़ाब सारे अपने सच हो गये चुपके से</font></p>
<p><font color="#000000">नाज़ तुम्हारा एक अदा है<br />
दिल तुम पर फ़िदा है<br />
जादू यह तुम्हारे, सब हैं हुस्न के शरारे</font></p>
<p><font color="#000000">तुम्हारी आँखों के तीर<br />
मेरे दिल को जाते चीर<br />
हम मिट गये तुम्हें छू लिया चुपके से</font></p>
<p><font color="#000000">बहकी हुई हैं धड़कनें, बदली हैं ख़ाहिशें<br />
आरज़ू तुम्हारी थी, जुस्त-जू पूरी हो गयी<br />
हमें सब कुछ हासिल हो गया चुपके से</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति 'नज़र'<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[बाँसुरी वाला वह नंद गोपाला]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=820</link>
<pubDate>Sat, 23 Feb 2008 21:42:36 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=820</guid>
<description><![CDATA[बाँसुरी वाला वह नंद गोपाला
आया छोरा मो]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">बाँसुरी वाला वह नंद गोपाला<br />
आया छोरा मोर मुकुट वाला<br />
बजाये बाँसुरी श्रीकृष्ण हमारा<br />
नाचूँ मगन नाचे वृंदावन सारा<br />
राधा प्रेमी मीरा भी गोपाला<br />
गोपियाँ पुजारन तेरी गोपाला</font></p>
<p><font color="#000000">बाँसुरी वाला वह नंद गोपाला<br />
आया छोरा कमल नयन वाला<br />
कजरारी आँखें मधु का प्याला<br />
इनसे कैसा जादू छलका डाला<br />
सलोना रूप बरखा के घन-सा<br />
और दमकत मुख चंद्रमा-सा</font></p>
<p><font color="#000000">बाँसुरी वाला वह नंद गोपाला<br />
आया छोरा श्यामल तन वाला<br />
गले में पड़ी प्रेम सुमन माला<br />
प्रकृति का कण-कण मोह डाला<br />
वह महंत सुन्दर हृदय वाला<br />
छलका रहा करुणा का प्याला</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[माया यह तेरी कैसी माया है]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=807</link>
<pubDate>Mon, 18 Feb 2008 17:19:39 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=807</guid>
<description><![CDATA[शीतल जल में चंदन घुला हो
ऐसी थी काया
का]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">शीतल जल में चंदन घुला हो<br />
ऐसी थी काया<br />
काले-काले बादलों से घनी थी<br />
ज़ुल्फ़ों की छाया<br />
क्यों जचने लगी यह बेख़ुदी<br />
कैसी है माया</font></p>
<p><font color="#000000">माया यह तेरी कैसी माया है<br />
हर तरफ़ तेरा जादू छाया है<br />
जाने कैसा मौसम आया है<br />
दिल ने जाने क्या पाया है<br />
दिल में तुझको ही बसाया है<br />
नसों में तेरा इश्क़ समाया है</font></p>
<p><font color="#000000">ऐसे कोई छोड़ के जाता है<br />
यारों को रुलाता है<br />
कभी-कभी ऐसा हो जाता है<br />
कोई रह जाता है<br />
जो सपनों में रोज़ बुलाता है<br />
वादों को निभाता है</font></p>
<p><font color="#000000">इन राहों पर जब आती है<br />
इस दिल में तू समाती है<br />
ऐसे क्यों हुस्न दिखाती है<br />
ऐसे क्यों उन्स उठाती है<br />
काहे को नज़रें झुकाती है<br />
कहाँ दिल को ले जाती है</font></p>
<p><font color="#000000">माया यह तेरी कैसी माया है<br />
हर तरफ़ तेरा जादू छाया है<br />
जाने कैसा मौसम आया है<br />
दिल ने जाने क्या पाया है<br />
दिल में तुझको ही बसाया है<br />
नसों में तेरा इश्क़ समाया है</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[रोज़ सपनों में आता है]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=785</link>
<pubDate>Fri, 15 Feb 2008 14:36:33 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=785</guid>
<description><![CDATA[रोज़ सपनों में आता है
इन रातों में जगात]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">रोज़ सपनों में आता है<br />
इन रातों में जगाता है<br />
मैं क्यों न जानूँ उसको<br />
मैं न पहचानूँ उसको</font></p>
<p><font color="#000000">वह मुझसे अजनबी है<br />
लेकिन मेरा हमनशीं है<br />
मैं क्या नाम दूँ उसको<br />
यह दिल दिया जिसको<br />
उसके लिए दीवानी हूँ<br />
उस चाँद की चाँदनी हूँ<br />
जाने कब मिलूँगी उसे<br />
महसूस करती हूँ जिसे</font></p>
<p><font color="#000000">रोज़ सपनों में आता है<br />
इन रातों में जगाता है<br />
मैं क्यों न जानूँ उसको<br />
मैं न पहचानूँ उसको</font></p>
<p><font color="#000000">उसकी ख़ुशबू साँसों में<br />
उसका चेहरा आँखों में<br />
जाने कैसा नशा छाया<br />
जाने कैसा जादू चलाया<br />
वह हसरत बन गया<br />
वह मोहब्बत बन गया<br />
जाने कब मिलूँगी उसे<br />
महसूस करती हूँ जिसे</font></p>
<p><font color="#000000">रोज़ सपनों में आता है<br />
इन रातों में जगाता है<br />
मैं क्यों न जानूँ उसको<br />
मैं न पहचानूँ उसको</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[पहला-पहला नशा]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=784</link>
<pubDate>Fri, 15 Feb 2008 13:55:15 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=784</guid>
<description><![CDATA[जादू जैसा छाया पहला-पहला नशा
जी में आय]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">जादू जैसा छाया पहला-पहला नशा<br />
जी में आये पंख खोल उड़ जाऊँ मैं<br />
आस्माँ से आगे निकल जाऊँ मैं</font></p>
<p><font color="#000000">मस्ती दिल पर छायी अनजानी-सी<br />
उड़ती फिरे है जैसे फूलों पर तितली<br />
दिल में जाने कैसा तूफ़ान उठा है<br />
यूँ लगता है हर पल मुझसे रूठा है</font></p>
<p><font color="#000000">तेरा ग़म पाया ख़ुशी मुझको मिली<br />
लगता है खिल रही दिल की कली<br />
जादू जैसा छाया पहला-पहला नशा</font></p>
<p><font color="#000000">तेरे ख़ाब आते रहे मुझको रातभर<br />
मैं कहाँ जाऊँगा दूर तुमसे बिछड़कर<br />
अफ़साना बन चुका खो गया दिल<br />
इल्तिजा सुन ले मुझसे आकर मिल</font></p>
<p><font color="#000000">यह जादू प्यार है मैंने अब जाना<br />
जिसको ढूँढ़ रहा था वह मुझे मिला<br />
जादू जैसा छाया पहला-पहला नशा</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[है दिल मेरा दीवाना तेरा]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=778</link>
<pubDate>Fri, 15 Feb 2008 06:26:33 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=778</guid>
<description><![CDATA[है दिल मेरा दीवाना तेरा
तू शमअ मेरी मै]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">है दिल मेरा दीवाना तेरा<br />
तू शमअ मेरी मैं परवाना तेरा<br />
झूमती हवाएँ नशीली फ़िज़ाएँ<br />
हाँ यह झूमती हवाएँ<br />
और यह नशीली फ़िज़ाएँ<br />
गीत गाकर यह कहती हैं<br />
है दिल मेरा दीवाना तेरा</font></p>
<p><font color="#000000">सच्ची है मोहब्बत मेरी<br />
तुम मुझे आज़माकर देख लो<br />
मंज़ूर हो अगर तुमको<br />
मेरे सनम हाँ बोल दो<br />
है दिल मेरा दीवाना तेरा<br />
तू शमअ मेरी मैं परवाना तेरा</font></p>
<p><font color="#000000">मौसम प्यार का आया है<br />
यह जादू तूने चलाया है<br />
मौसम प्यार का आया है<br />
यह जादू तूने चलाया है<br />
दिल के आसमाँ पर चाँद-सा<br />
चेहरा तेरा नज़र आया है</font></p>
<p><font color="#000000">है दिल मेरा दीवाना तेरा<br />
तू शमअ मेरी मैं परवाना तेरा<br />
झूमती हवाएँ नशीली फ़िज़ाएँ<br />
हाँ यह झूमती हवाएँ<br />
और यह नशीली फ़िज़ाएँ<br />
गीत गाकर यह कहती हैं<br />
है दिल मेरा दीवाना तेरा</font></p>
<p><font color="#000000">सच्ची है मोहब्बत मेरी<br />
तुम मुझे आज़माकर देख लो<br />
मंज़ूर हो अगर तुमको<br />
मेरे सनम हाँ बोल दो<br />
है दिल मेरा दीवाना तेरा<br />
तू शमअ मेरी मैं परवाना तेरा</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[पहली बार देखा तुमको]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=768</link>
<pubDate>Wed, 13 Feb 2008 18:15:14 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=768</guid>
<description><![CDATA[पहली बार देखा तुमको
जाने क्या हुआ
दिल ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">पहली बार देखा तुमको<br />
जाने क्या हुआ<br />
दिल की धड़कनों का<br />
हल्का-हल्का एहसास हुआ</font></p>
<p><font color="#000000">डूब गया मैं तेरी आँखों में<br />
जाने-मन जाने-जानाँ<br />
तुमने मेरा चैन ले लिया<br />
वह तेरी पहली नज़र<br />
जाने-मन जाने-जानाँ<br />
यह दिल मेरा खो गया</font></p>
<p><font color="#000000">पहली बार देखा तुमको<br />
जाने क्या हुआ<br />
दिल की धड़कनों का<br />
हल्का-हल्का एहसास हुआ</font></p>
<p><font color="#000000">जब तक देखूँ न तुमको<br />
दिल क़रार पाता नहीं<br />
जाने कैसा तुमने जादू किया<br />
जाने कैसा तुमने दर्द दिया</font></p>
<p><font color="#000000">पहली बार देखा तुमको<br />
जाने क्या हुआ<br />
दिल की धड़कनों का<br />
हल्का-हल्का एहसास हुआ</font></p>
<p><font color="#000000">ढूँढ़ रहा था मैं गली-गली<br />
जिसको बरसों से<br />
आज मिली हो तुम<br />
एक तस्वीर बनायी थी<br />
मैंने अपने दिल में<br />
आज मिली हो तुम</font></p>
<p><font color="#000000">पहली बार देखा तुमको<br />
जाने क्या हुआ<br />
दिल की धड़कनों का<br />
हल्का-हल्का एहसास हुआ</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[दरिया किनारे वह लड़की बाल सँवारे]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=748</link>
<pubDate>Tue, 12 Feb 2008 05:15:17 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=748</guid>
<description><![CDATA[दरिया किनारे वह लड़की बाल सँवारे
क़दमो]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">दरिया किनारे वह लड़की बाल सँवारे<br />
क़दमों के निशाँ पर बहते हैं पानी के धारे<br />
दिल की ज़ुबाँ तो दीवाना दिल ही जाने<br />
सभी तो मरते हैं उस पर यह सारे</font></p>
<p><font color="#000000">रह-रहकर आसमानों में उड़ती है चाहत<br />
देखकर उसे दिल को मिलती है राहत<br />
दरिया किनारे वह लड़की बाल सँवारे<br />
क़दमों के निशाँ पर बहते हैं पानी के धारे</font></p>
<p><font color="#000000">जादू है इन फ़िज़ाओं में शबनमी हैं रातें<br />
होती कहाँ है अपनी मुलाक़ातें दो चार बातें<br />
दरिया किनारे वह लड़की बाल सँवारे<br />
क़दमों के निशाँ पर बहते हैं पानी के धारे</font></p>
<p><font color="#000000">दिल की हर धड़कन उसका ही नाम पुकारे<br />
वह आगे-आगे है पीछे हैं उसके सारे<br />
दरिया किनारे वह लड़की बाल सँवारे<br />
क़दमों के निशाँ पर बहते हैं पानी के धारे</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[मैंने प्यार किया]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=732</link>
<pubDate>Sat, 09 Feb 2008 09:53:54 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=732</guid>
<description><![CDATA[मैंने प्यार किया
तुमसे प्यार किया
तुम ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">मैंने प्यार किया<br />
तुमसे प्यार किया<br />
तुम भी कह दो<br />
तुमने प्यार किया<br />
तुमसे प्यार किया<br />
तुम हो वही जिससे<br />
मैंने प्यार किया...</font></p>
<p><font color="#000000">तुम हो मेरी<br />
यह जाना मैंने<br />
तुम हो मेरी<br />
यह माना मैंने<br />
इसलिए तो<br />
तुमसे प्यार किया<br />
मैंने प्यार किया<br />
तुमसे प्यार किया</font></p>
<p><font color="#000000">दिल की बात<br />
दिल में थी<br />
वह अब ज़ुबाँ पर<br />
भी आ गयी<br />
तुम भी तो<br />
कहना चाहती थी<br />
फिर किसलिए<br />
तुम घबरा गयी</font></p>
<p><font color="#000000">दिल की बात<br />
ज़ुबाँ पर आ गयी<br />
मैंने प्यार किया<br />
तुमसे प्यार किया<br />
मैंने तुमको देखा<br />
अपना दिल दिया<br />
अब तक डरता था<br />
आज कह दिया...</font></p>
<p><font color="#000000">तुम हो ज़िन्दगी<br />
तुम हो बन्दगी<br />
सबके सामने<br />
मैंने कह दिया<br />
ऐसा क्या किया<br />
जादू चल गया<br />
मैंने प्यार किया<br />
तुमसे प्यार किया</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[मेरा दर्द मेरा दु:ख मेरा अपना है]]></title>
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<pubDate>Fri, 28 Dec 2007 16:48:54 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
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<description><![CDATA[मेरा   दर्द    मेरा   दु:ख   मेरा  अपना    ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">मेरा   दर्द    मेरा   दु:ख   मेरा  अपना    है<br />
बाक़ी   सब   झूठ   है  यह सच्चा सपना है</font></p>
<p><font color="#000000">कल तक लबों पर उसके लिए दुआ थी<br />
आज दुआ में थोड़ा कुछ हिस्सा अपना है</font></p>
<p><font color="#000000">मैं आज चली हूँ नयी मंज़िल की तरफ़<br />
आज मेरी आँखों में एक नया सपना है</font></p>
<p><font color="#000000">बीते   हुए   लम्हों   को   कैसे   भूलेगा कोई<br />
उसमें   तो एक  अधूरा   रिश्ता   अपना  है</font></p>
<p><font color="#000000">जादू   का   खेल   है   महब्बत   कैसे बचते<br />
क्या   करें   अब   यह टूटा हुआ सपना है</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[वह तेरी पहली नज़र का निशाना याद है]]></title>
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<pubDate>Fri, 28 Dec 2007 14:24:47 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
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<description><![CDATA[वह तेरी पहली नज़र का निशाना याद है
हमको ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">वह तेरी पहली नज़र का निशाना याद है<br />
हमको आज भी तुमसे दिल का लगाना याद है</font></p>
<p><font color="#000000">दोस्तों में कहते थे किसी से प्यार हमें<br />
वह पूछें अगर तो नाम तेरा छुपाना याद है</font></p>
<p><font color="#000000">गरचे तुमने कभी हमको अपना न कहा<br />
मगर तुमसे मिलने का झूठा बहाना याद है</font></p>
<p><font color="#000000">सबब वह जिससे धड़कनें तेज़ हो जाएँ थीं<br />
वह इसी दरवाज़े से तेरा आना-जाना याद है</font></p>
<p><font color="#000000">कुछ कहकर फिर चुप हो जाना यकायक<br />
निगाहें फेर के हमको तेरा उकसाना याद है</font></p>
<p><font color="#000000">न कह पाये हम कभी कि प्यार है तुमसे<br />
पर इज़हार के लिए हौसला जुटाना याद है</font></p>
<p><font color="#000000">किस पल तुम छोड़कर गये मालूम न हुआ<br />
हमको आज भी ज़िन्दगी का अफ़साना याद है</font></p>
<p><font color="#000000">तेरे इन्तिज़ार में जो न कटा एक लम्हा<br />
हमको उस लम्हें का क़िस्सा पुराना याद है</font></p>
<p><font color="#000000">हमको उनका जादू खैंचता रहा बार-बार<br />
तेरी आँखों का सितारों जैसा झिलमिलाना याद है</font></p>
<p><font color="#000000">जब भी कोई पूछता था कैसी दिखती हो तुम<br />
वह सभी से चाँद को तेरे जैसा बताना याद है</font></p>
<p>गरचे= although, सबब= reason</p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[मैं खु़द को दो बाँहों में भरकर]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/09/15/%e0%a4%ae%e0%a5%88%e0%a4%82-%e0%a4%96%e0%a5%81%e0%a4%bc%e0%a4%a6-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%a6%e0%a5%8b-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%81%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%ad/</link>
<pubDate>Sat, 15 Sep 2007 13:46:32 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
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<description><![CDATA[तुम्हें देखता हूँ तो
तुम्हारी मासूम ह]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">तुम्हें देखता हूँ तो<br />
तुम्हारी मासूम हँसी से यूँ लगता है कि<br />
तुम मुझे चाहती हो<br />
इन चंद लम्हों में मुझे<br />
यह महसूस होता है शायद<br />
तुम मेरे लिए बनी हो</font></p>
<p><font color="#000000">तुम्हारे रूप का जादू मुझे<br />
तुम्हारी तरफ़ खींचने लगता है<br />
दुनिया थम-सी जाती है<br />
मन बहकने लगता है<br />
जिस्म की सौंधी मिट्टी महक उठती है<br />
तुम्हारी खु़श्बू के साथ...</font></p>
<p><font color="#000000">तुम्हारी अदा तुम्हारा तस्व्वुर<br />
मेरे मन से जाता ही नहीं<br />
मैं खु़द को दो बाँहों में भरकर<br />
बैठा रहता हूँ देर तलक<br />
तुम्हारी याद दिल में पाज़ेब छमकाती रहती है...</font></p>
<p><font color="#000000">तुम्हारा नाम चाँदनी है ना!<br />
मुझे अपनी बाँहों में भर लो तुम<br />
यह उदासी के अँधेरे छँटते नहीं अब...</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४</p>
]]></content:encoded>
</item>

</channel>
</rss>
