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	<title>टीवी-चैनल-वाले &amp;laquo; WordPress.com Tag Feed</title>
	<link>http://wordpress.com/tag/टीवी-चैनल-वाले/</link>
	<description>Feed of posts on WordPress.com tagged "टीवी-चैनल-वाले"</description>
	<pubDate>Mon, 13 Oct 2008 14:36:56 +0000</pubDate>

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<title><![CDATA[ख़बरदार या झंडाबरदार ]]></title>
<link>http://khabariya.wordpress.com/2007/09/18/vinoddua/</link>
<pubDate>Tue, 18 Sep 2007 13:13:36 +0000</pubDate>
<dc:creator>khabariya</dc:creator>
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<description><![CDATA[क्या कहे भई&#8230; पिछली बार जब विनोद दुआ क]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>क्या कहे भई... पिछली बार जब विनोद दुआ का जिकर हुआ था तो लोगों को बुरा लगा कि ऐसी महान विभूति के लिए इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल मानसिक दिवालियापन है। हम भी सोचे यार कि गलती हो गई। किसी दिन सामना हो गया तो हम ही झेंप जाएंगे कि ऐसा हमने क्यों किया। अब जो हुआ सो हुआ। हो सकता है कि ऊपरवाला ही हमरे मुंह से उनके लिए उल्टा-सीधा बुलवाना चाह रहा हो। जो होता है अच्छा होता है। हम मिलकर माफी मांग लेंगे। खामाखां बीच में कोई गुरू-घंटाली दिखाने की कुचेष्टा ना करे तो ही अच्छा। नौकरी थोड़ी छीन लेंगे। बड़े लोग छोटी बातों का बुरा नहीं माना करते। </p>
<p>अपनी खबर नहीं है इस बार.. इस बार दुआ साहब की एक बात लेकर हम आ गए हैं। हुआ यों कि कल विनोद दुआ जी ने खबरदार में कहा कि करुणानिधि के बयान पर बीजेपी वाले कुछ नहीं बोले। और इस पर पोल भी चला लिया। आपको तो पता है पोल का तीसरा विकल्प दुआ साहब के मन का होता है। जिसे प्रोग्राम के अंत में सबसे ज्यादा वोट मिल जाते हैं और हो जाता है फैसला राष्ट्रीय नाड़ी का। नाड़ी धड़क रही है दुआ साहब की नाड़ी के साथ.. कदमताल मिलाते हुए।</p>
<p>भई, हमने माना कि बीजेपी वाले निरा मूर्ख है। खुरापाती हैं। राम के नाम पर देश की धर्मनिरपेक्षता की लुटिया डुबाने का मंसूबा पाले हुए हैं लेकिन भैये खबरदार तैयार करते समय ये तो देख लिया करो कि पीटीआई यूएनआई आईएएनएस वगैरह वगैरह क्या कह रहे हैं। हुआ यह कि करुणानिधि ने बयान दिया.. कुछ लोग कहते हैं कि 17 लाख साल पहले एक व्यक्ति हुआ जिसका नाम राम था। उनके द्वारा निर्मित सेतु को नहीं छुएं, कौन हैं यह राम, किस इंजीनियरिंग कालेज से उन्होंने पढ़ाई की, क्या इसका कोई सबूत है? कुछ भेड़िए द्रविड़ आंदोलन को खत्म करना चाहते हैं।</p>
<p>कल जब अन्नादुरै की 99वे जन्मदिवस समारोह वाला यह बयान आया। उसके कुछ ही घंटों में बीजेपी की तरफ़ से बयान आ चुका था। प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद और मुरली मनोहर के बयान रात तक पीटीआई पर भी आ चुके थे। अरे भई.. इतनी जल्दी क्या थी दुआ साहब को।<br />
<a href="http://khabariya.wordpress.com/2007/09/18/vinoddua/vinod-dua/" rel="attachment wp-att-21"><img src="http://www.wordpressproxy.com/index.php?c=aHR0cDovL2toYWJhcml5YS53b3JkcHJlc3MuY29tL2ZpbGVzLzIwMDcvMDkva2hhYmFyZGFyLnRodW1ibmFpbC5qcGc%3D" alt="vinod dua " /></a><br />
दुआ साहब ही क्या एनडीटीवी वालों की आदत है कि वे बीजेपी के साथ छुआछूत का व्यवहार करते रहते हैं। भई सीधा उसूल अपनाओ.. रिपोर्ट निष्पक्षता से लिखो... संपादकीय में अपना ज्ञान बखारो। यह संतुलन साधा करो- खबरिया छोटा मुंह बड़ी बात क्या कहे। मान भी लें कि उस वक्त बीजेपी का बयान नहीं आया था..तो भी फुनवा घुमा लेते और ले लेते बयान। कभी कभी तो लगता है कि ग़ैरबीजेपीवाद के झंडाबरदार बन जाते हैं खबरदार वाले। आदत सुधारो दद्दा इस कदर दुश्मनी ठीक नही लगती। या हमहुं साहिर का शेर मारे.. पीकर?</p>
]]></content:encoded>
</item>
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<title><![CDATA[सहारा प्रणाम को नमस्ते ]]></title>
<link>http://khabariya.wordpress.com/2007/09/12/%e0%a4%b8%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a3%e0%a4%be%e0%a4%ae-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%a8%e0%a4%ae%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a5%87/</link>
<pubDate>Wed, 12 Sep 2007 16:22:47 +0000</pubDate>
<dc:creator>khabariya</dc:creator>
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<description><![CDATA[ख़बर है कि &#8216;जिस तर्ज पर&#8217;, &#8216;उस तर्ज ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>ख़बर है कि 'जिस तर्ज पर', 'उस तर्ज पर' तर्जबंदी करने वाले दढ़ियल पुण्य प्रसून वाजपेयी जो कि अब तक ''आजतक'' को अपनी सेवाएं दे रहे थे- ने चैनल को अलविदा कहते हुए राष्ट्रीय सहारा चैनल ज्वाइन किया है.. ये तो आपको पहले ही किसी न किसी ने बता दिया होगा। <b>टीवी जनर्लिज़्म के एंकर-रिपोर्टर समेत तमाम कर्मचारी तराज़ू के मेढक होते हैं। कौन-कब-कहां ज्वाइन कर लेता है- ये वो खुद नहीं जानता। खुद बेचारों को बाद में भान होता है तो कहते हैं- 'ये कहां फंस गए यार'। </b> वैसे ये तो परमसत्य है कि चैनल वाले जितनी नौकरी छोड़ते हैं तनख्वाह में गुणात्मक बढ़ोतरी होती जाती है। यदि आप चैनल में नौकरी कर रहे हैं तो फ़ौरन स्वामीभक्ति छोड़ नोटभक्ति में रम जाइए, फिर ना कहना कि ख़बरिया ने बताया नहीं। </p>
<p>कुछ ही हफ्तों पहले पुण्य प्रसून त्रिवेणी चैनल ज्वाइन कर चुके थे। चार दिन में ही वहां के हेड रामकृपाल जी से मतभेद हो गए और पुण्य प्रसून बाजपेयी वापस 'आजतक' चले गए। विदित हो कि त्रिवेणी चैनल अभी लॉच नहीं हुआ है। आप कहोगे कि रामकृपाल जी और बाजपेयी जी के बीच लेफ्टिस्ट और राइटिस्ट वाला झगड़ा हुआ होगा। ना ना.. ऐसा अब थोड़ी होता है। कौन राइटिस्ट और कौन लेफ्टिस्ट अपने जॉब को लात मारेगा? उदारीकरण में झगड़े तो अब तेरी कार का मॉडल, मेरे मॉडल से नया कैसे-वाली तर्ज पर होता है भैये। नोट करो <b> ''ज्ञान बांटने से बढ़ता है..'' ये पहले की सूक्ति थी। अब कहा जाता है- ''औरों को ज्ञान बांटने से तनख्वाह कम हो जाती है'' </b></p>
<p>रामकृपाल जी ने पत्रकारिता की शुरूआत कानपुर से 1971 में अपनी टूटी साइकिल पर शुरू की थी। आज त्रिवेणी चैनल की कृपा रामकृपाल जी पर बरस रही है सो वे चालीस लाख की कार में बैठकर रिपोर्टिंग कर रहे हैं। उधर, वाजपेयी जी हर महीने आठ लाख रुपए की तनख्वाह पर सहारा में गए हैं। सहारा श्री जिन दिनों दिल्ली प्रवास पर थे और वे चैनल के गिरते ग्राफ़ से परेशान हैं। राष्ट्रीय सहारा न्यूज़ चैनल दूरदर्शन के बाद ऐसा चैनल है जिसके पास सबसे ज़्यादा रिसोर्सेस हैं लेकिन सबसे आलसी प्राणी यहीं मिल जाएंगे। चैनल का इन मायनों में सरकारीकरण हो चुका है। सहारा श्री कुछ नयी नियुक्तियो के सिलसिले में दिल्ली आए हुए थे औऱ चैनल को टॉप टू बॉटम चकमक कर देने की चाह रखते हैं। संजय बरागटा ने भी सहारा ज्वाइन कर लिया है.</p>
<p>सहारा प्रणाम को नमस्ते करना होगाः पुण्य प्रसून ने आते सहारा ग्रुप की हेल हिटलर तर्ज वाली परंपरा – सहारा प्रणाम- को तिलांजली देने का फ़रमान जारी कर दिया है। कहा जा रहा है कि पूरा चैनल ही नए कलेवर में जब रंग जाएगा तभी पुण्य परदे पर दिखाई देंगे। छिंदवाड़ा, नागपुर के क़स्बाई इलाक़ो में अस्सी के दशक की पत्रकारिता करने वाले पुण्य अब दिल्ली के नामी पत्रकार हो गए हैं। चैनल वाले नामी एंकरों की तर्ज पर उन्हें सहारा में हर महीने सात लाख रुपया दिया जाएगा जो अब तक की सबसे बड़ी रकम मानी जा रही है।</p>
<p><b>एक और ख़बर </b>- दिवंगत उदयन शर्मा के पुत्र कार्तिकेय शर्मा जो कि अब तक आजतक में न्यूज़ एंकर थे, ने बीएजी चैनल में छलांग लगा दी है। अजय सिंह जो स्टार न्यूज़ में नज़र आते थे ने भी सहारा चैनल ज्वाइन कर लिया है। सईद अंसारी स्टार से बीएजी आ गए हैं। ख़बर यह भी है कि आज तक की श्वेता सिंह जो हाल ही में चक दे इंडिया में दिखाई थीं, ने भी बीएजी में छलांग लगा दी है। नए रिपोर्टरों को आजतक के दफ़्तर का चक्कर रोज़ लगाते रहना चाहिए.. अच्छा अवसर है। बस इतना ध्यान रहे.. प्रतिभा नहीं पौवा लगाना पड़ेगा।</p>
]]></content:encoded>
</item>
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<title><![CDATA[देहदर्शनाओं का जलवा ]]></title>
<link>http://khabariya.wordpress.com/2007/08/20/prabhu-aajtak/</link>
<pubDate>Mon, 20 Aug 2007 10:41:03 +0000</pubDate>
<dc:creator>khabariya</dc:creator>
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<description><![CDATA[चित्र में यह तो दिख ही रहा है कि कितना त]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>चित्र में यह तो दिख ही रहा है कि कितना तेज़ चैनल है ये आजतक। देहदर्शना बालाओं का जलवा चैनलों पर इस कदर हावी हो चुका है कि इसके लिए वे कुछ भी कर गुज़रने को तैयार हैं। खींसे निपोरने वाले और खुद ज्यादा औरों को कम बकबकाने का मौका देने वाले प्रभु चावला ने हाल ही में रामगोपाल वर्मा की आग निशा कोठारी से सीधी बात की। पिछली बार राखी सावंत से सीधी बात की थी। दोनों देहदर्शनाएं हैं और यौवन का उभार दिखाने को हरदम तैयार। खबरिया ने सुना है कि पिछली बार राखी सावंत के साथ सीधी बात को जो टीआरपी मिली उससे उत्साहित होकर दोबारा उन्हें बुलाया गया था। और दूसरी बार पहले से ज़्यादा बदनखोलू पोज़ में। खास हिदायत ये दी जाती है कि इन बालाओं के आते ही.. स्क्रीन पर तैरती खबरिया लाइन्स (टिकर) हटा दी जाती है। 'लोगो' ऊपर खिसक जाता है और सुपर्स नहीं चलता। ताकि यौवन की घाटियां दर्शकों को दिख सकें।<br />
<a href="http://img184.imagevenue.com/img.php?image=th_04656_rakhi11gb_th_122_381lo.jpg" target="_blank"><img src="http://img184.imagevenue.com/loc381/th_04656_rakhi11gb_th_122_381lo.jpg" border="0" height="139" width="183" /></a><a href="http://img137.imagevenue.com/img.php?image=th_04656_rakhi27jc_th_122_147lo.jpg" target="_blank"><img src="http://img137.imagevenue.com/loc147/th_04656_rakhi27jc_th_122_147lo.jpg" border="0" height="140" width="184" /></a><a href="http://img124.imagevenue.com/img.php?image=th_04657_rakhi33zz_th_122_1052lo.jpg" target="_blank"><img src="http://img124.imagevenue.com/loc1052/th_04657_rakhi33zz_th_122_1052lo.jpg" border="0" height="138" width="184" /></a></p>
<p>खबरिया को पता चला था कि आईबीएन-7 पर जब पहली बार राखी सावंत का इंटरव्यू दिखाया गया था तब राजदीप ने लताड़ा था.. यह कहकर कि यहीं सब दिखाने के लिए चैनल नहीं लिया है। अब आईबीएन-7 ठहरा बिका हुआ चैनल जो जागरण के लिए घाटे का सौदा बन चुका था। पत्रकारिता के ज़रिए क्रांति करने के मंसूबे लेकर कई नामी-गिरामी लोगों की टीम राजदीप ने बना दी मगर हिन्दी की बदकिस्मती कहो कि यहां भी बिजनेस नहीं चला। लेकिन जैसे ही देहदर्शनाएं दिखानी शुरू की, चैनल ने रफ्तार पकड़ ली। ग़ुस्सा आए या रोएं हम.. जब हिन्दी चैनल देहदर्शन कराते हैं तब उसी वक़्त इंग्लिश चैनल Indo-US nuclear deal पर चर्चा कर रहे होते हैं।</p>
<p>प्रिंट वाले कौन से दूध के धुले हैं। इंडिया टुडे ने 1990 में दक्षिण भारतीय सिनेमा की सेक्स बम शकीला पर कवर स्टोरी की थी। ये अपने पल्ले नहीं पड़ा कि हिन्दी के पाठकों को साउथ की यौवना से क्या लेना-देना है। पंजाब केसरी में सुंदरियों की बहार छायी होती है। खबरिया की नज़र टीवी के अलावा पत्रिकाओं पर भी होती है। हिन्दी दर्शक-पाठक यह देखकर शर्मिन्दा ना हों कि मानसिक स्तर पर कितना उथला समझा जाता है हिन्दी को। अब इसमें समझने की बात क्या है। जो है तो है... क्या औकात है हिन्दी पाठकों की? इसकी एक बानगी देखो.. एक ही तारीख़ में निकले आउटलुक के हिन्दी और इंग्लिश अंक.. ज़रा नज़र डालिए।</p>
<p><a href="http://img14.imagevenue.com/img.php?image=06102_Outlooke_122_738lo.jpg" target="_blank"><img src="http://img14.imagevenue.com/loc738/th_06102_Outlooke_122_738lo.jpg" border="0" height="195" width="143" /></a><a href="http://img146.imagevenue.com/img.php?image=06107_Sherlyn_Chopra_122_1055lo.jpg" target="_blank"><img src="http://img146.imagevenue.com/loc1055/th_06107_Sherlyn_Chopra_122_1055lo.jpg" border="0" height="196" width="139" /></a><br />
राखी के बाद इन दिनों दूसरी बाला शर्लिन चोपड़ा की डिमांड चैनलों पर बढ़ गई है। एक मज़ेदार वाक्या हुआ। आजतक मे दढ़ियल पुण्यप्रसून का सामना इन शर्लिन से हो गया। पुण्यप्रसून कुछ कह रहे थे और शर्लिन कुछ समझ रही थी। अब पुण्यप्रसून खुद नहीं जानते कि वे ''किस तर्ज पर'', ''जिस तर्ज पर'' और ''उस तर्ज पर'' क्या-क्या कहते रहते हैं। उनके सवाल किस तर्ज पर होंगे ये तर्ज वो ही जानते हैं। उनके पास तर्ज, दशा, मिजाज जैसे चार-पांच शब्द हैं, जिन्हें लेकर वे अपना सवाल बुनते हैं। शर्लिन को भला वे कहां से समझ आते।</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[लड़की से गई 'दंबगई']]></title>
<link>http://khabariya.wordpress.com/2007/08/15/debangai/</link>
<pubDate>Wed, 15 Aug 2007 16:51:59 +0000</pubDate>
<dc:creator>khabariya</dc:creator>
<guid>http://khabariya.hi.wordpress.com/2007/08/15/debangai/</guid>
<description><![CDATA[ख़बरिया के हाथ ख़बर लगने में देर हो गई ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p style="margin:0;" class="MsoNormal"><span style="font-size:13pt;font-family:Mangal;">ख़बरिया के हाथ ख़बर लगने में देर हो गई लेकिन जो तपास हुई उसके चलते ख़बर के अंदर की ख़बर हाथ लग गई। हुआ यूं है कि पिछले दिनों एक हिन्दी ख़बरिया चैनल से एक दिग्गज एंकर को निकाले जाने की ख़बर किसी ब्लॉगिए ने छाप दी। जल्दबाज़ी का चस्का ख़बरिया चैनलों का दिया हुआ है। ब्लॉगिओं की अघोषित लड़ाई भी चैनलों के साथ चल रही है लिहाज़ा अच्छाई-बुराई का आदान-प्रदान होता ही है। भैये.. ख़बर ब्लॉग पर इस तरह छपी कि एक चैनल के एक एंकर को वहां से हटा दिया गया। दरअसल, बाद में कन्फ़र्म हुआ कि उस एंकर की दंबगई गई यानी पर कतर दिए गए। </span></p>
<p><span style="font-size:13pt;font-family:Mangal;"></span><span style="font-size:13pt;"></span></p>
<p style="margin:0;" class="MsoNormal"><span style="font-size:13pt;font-family:Mangal;">ख़बरिया से आप कहोगे कि ये तो पुरानी बात है.. नया क्या है तो भैये ख़बरिया को यह पता चला है कि मामला कास्टिंग काउच का था। दरअसल, इस शख़्स के वूमनाइज़र होने की बात हवा में कई महीनों से तैरती रही है। जब से कमान संभाली थी कई का भविष्य संवार दिया तो कुछ को किनारे कर दिया। ताज़ा घटना यूं थी कि चैनल के पितामह को एक लड़की की शिकायत आई कि ये शख़्स इन्हें भी ऑफ़र किए थे, अब परेशान कर रहे हैं। अब क्या था, पितामह एक तो वैसे ही गिरते चैनल ग्राफ़ से परेशान है। ऊपर से जिनके हाथों में कमान दे रखी है उनकी करतूतों ने बंटाधार कर रखा है। उठाया की-बोर्ड और धड़ल्ले से टकाटक लिखा कि अपना `मुक़ाबला` ख़ुद करो और बाक़िया औरों को खेलने दो। यह मेल संस्थान में सभी को भेजी गई थी। </span></p>
<p style="margin:0;" class="MsoNormal"><span style="font-size:13pt;font-family:Mangal;"></span></p>
<p><span style="font-size:13pt;font-family:Mangal;"></span><span style="font-size:13pt;"></span></p>
<p style="margin:0;" class="MsoNormal"><span style="font-size:13pt;font-family:Mangal;">पाठकों को शायद यह पता नहीं होगा कि पिछले दिनों `सबसे तेज़` होने का दावा करने वाले एक ख़बरिया चैनल के आउटपुट के तीसमार ख़ां को भी इसी वजह से संस्थान से निकाल बाहर किया गया था। ये तुर्रमखां अब आने वाले नए चैनल में ऊंची पोस्ट पर नियुक्त किए गए हैं। </span></p>
<p><span style="font-size:13pt;font-family:Mangal;"></span><span style="font-size:13pt;"></span> <span style="font-size:13pt;"><font face="Arial"> </font></span></p>
<p style="margin:0;" class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:13pt;font-family:Mangal;">चलते चलते </span><span style="font-size:13pt;"><font face="Arial">–</font></span></strong><span style="font-size:13pt;font-family:Mangal;"> </span></p>
<p><span style="font-size:13pt;font-family:Mangal;"><strong>इंडिया टीवी</strong> छोड़कर जाने वाले रिपोर्टरों से कारण पूछे जाने पर पता चला है कि वे सभी नाग-नागिनों से परेशान थे। चैनल के स्टूडियो में नाग-नागिन ने बसेरा बना लिया है और सुबह से रात तक रिपोर्टरों को फुफकारते रहते थे। कुछ नाग तो रजत शर्मा के पास ही कुंडली मारकर बैठे हैं। कुछ चिपके है तो कुछ स्टार से आए हैं। ज़्यादातर रिपोर्टरों ने सुधीर चौधरी का लाइव इंडिया चैनल ज्वाइन कर लिया है। सुधीर चौधरी छह महीने पहले तक खुद इंडिया टीवी मे थे। सुधीर इन दिनों रजत शर्मा बनने की तर्ज पर समाचारों का लीड आउट (पुछल्ला, उपसंहार) देना नहीं भूलते। </span><span style="font-size:13pt;"></span><span style="font-size:13pt;"><font face="Arial"> </font></span></p>
<p style="margin:0;" class="MsoNormal"><span style="font-size:13pt;font-family:Mangal;"><strong>एक और ख़बर-</strong> </span></p>
<p style="margin:0;" class="MsoNormal"><span style="font-size:13pt;font-family:Mangal;">सोनिया गांधी जल्द ही दिल्ली से <strong>जयहिंद टीवी</strong> का लोकार्पण करने वाली है। दक्षिण भारत में राजनीतिक पार्टियों के कई चैनल है। जयहिंद टीवी कॉग्रेस का मलयाली चैनल होगा जो कम्युनिस्ट चैनल कैराली टीवी को टक्कर देगा। ख़बरिया सोच रहा है कि उत्तर भारत में ऐसा ट्रेंड कब आएगा जब पार्टियों के अपने चैनल हिन्दी मे होंगे। अब भी है..लेकिन खुले तौर पर पीठ पर ठप्पा लगवाने में शरम आती है। </span></p>
<p><span style="font-size:13pt;font-family:Mangal;">पाठक ही बताएं कि कौन-सा चैनल किसके राग गाता है। </span><span style="font-size:13pt;"></span></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[बुरा जो देखन मैं चला]]></title>
<link>http://khabariya.wordpress.com/2006/12/11/%e0%a4%ac%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a4%be-%e0%a4%9c%e0%a5%8b-%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%96%e0%a4%a8-%e0%a4%ae%e0%a5%88%e0%a4%82-%e0%a4%9a%e0%a4%b2%e0%a4%be/</link>
<pubDate>Mon, 11 Dec 2006 11:25:32 +0000</pubDate>
<dc:creator>khabariya</dc:creator>
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<description><![CDATA[ये लो कल्लो बात!! हम सोच रहे थे कि इस हफ़]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>ये लो कल्लो बात!! हम सोच रहे थे कि इस हफ़्ते आप को अख़बार जगत की अंदरूनी ख़बरें बताएंगे लेकिन अख़बार वालों से ही चैनल वालों के बारे में कुछ ख़तरनाक टाइप का मामला पता चल गया। ख़बर पर तुरंत भरोसा हो गया क्योंकि चैनलवालों के अंदरखाने में ऐसी ख़बरें हमेशा तैरती रहती हैं। कोने-कोने में छिपे हैं केसानोवा. पॉवर, पैसा और पाप का सीधा नाता है। ख़बरिया किसी को नैतिकता का पाठ क्या पढ़ाए लेकिन जब मीडिया वाले दर्शकों के सामने भ्रष्ट नेताओं और बेइमानों को नैतिकता और ईमानदारी का पाठ पढ़ाते हैं तब वे भूल जाते हैं कि किसी के ऊपर उंगली उठाने के दौरान तीन उंगली उन पर भी उठती है।</p>
<p>याद कीजिये जब शक्ति कपूर को अपने स्टिंग ऑपरेशन में इंडिया टीवी ने बेआबरू किया था। जब अमन वर्मा को भी इसी कास्टिंग काउच के झमेले में फांसने की असफल कोशिश की गई थी। तब सारा देश बॉलीवुड के इस घिनौने सच से रूबरू हुआ था और गुमनामी के अंधेरे में डूबा इंडिया टीवी न्यूज़ चैनल एकाएक लाइमलाइट में आ गया। चैनल ने पूरी ताक़त झोंककर यह साबित करने की कोशिश की थी कि फ़िल्मी परदे पर चमकती रुपहली दुनिया का काला सच देखकर जनता को असलियत का अंदाज़ा हो जाएगा। लोगों पर पता नहीं कि क्या असर हुआ लेकिन जिसने देखा उसने मज़े लिए।</p>
<p>अब चैनल के एक रिपोर्टर पर बलात्कार का इल्ज़ाम लगा है। देश के तमाम अख़बारों ने इस ख़बर को प्रकाशित कर दिया है। लेकिन कुनबे की इज़्ज़त सरेआम नीलाम ना हो इसलिए चैनल का नाम दबा दिया। कोई नेता होता या आम आदमी होता तो आरोपी का तो छोड़िये उसके पूरे घर परिवार और दोस्त यारों को लपेटे में लेते। माइक मुंह में घुसेड़ घुसेड़कर बाइट के लिए उछलते-कूदते रहते।</p>
<p>ख़बरिया इन ख़बरों को छापने के लिए बदनाम है जो मीडिया वालों को पसंद नहीं आती। कोई अपनी गिरेबान में झांकता नहीं और आईना दिखा दो तो समझो सात जनम माफ़ न करने वाला गुनाह कर डाला हो।</p>
<p>एनडीटीवी और इंडिया टीवी में वूमेनाइज़र की ख़बरें पिछले दिनों टीवीपत्रकार ब्लॉगस्पॉट ने छापी तो उस बेचारे को लोगों ने टारगेट में डाल दिया। वो अपनी लंगोटी बचाकर जैसे-तैसे भागा। मीडिया में ये बीमारी अब जड़ तक फैल चुकी है। पहले बॉलीवुड इस कास्टिंग काउच के लिए बदनाम था। आज मीडिया में यह बुराई घर कर चुकी है। ख़बरिया को नैतिकता का पाठ किसी को पढ़ाना नहीं है लेकिन चैनल वाले दूसरों को लपेटे में ले लेकर नैतिकता का पाठ पढ़ाएं और सीना ठोककर ईमानदारी का प्रवचन हमको पिलाएं ये तो बर्दाश्त होने से रहा।</p>
<p>चलो अब ख़बर सुनो। थाने में दर्ज रिपोर्ट के अनुसार इंडिया टीवी के रिपोर्टर जगदीप सिंह ने ज़ी टीवी की एक रिपोर्टर शुभा (बदला हुआ नाम) का बलात्कार किया। रिपोर्टर शुभा ने थाने में रिपोर्ट दर्ज करायी और जगदीप सिंह को ग़िरफ़्तार कर लिया गया है। उसे रविवार रात चौदह दिन की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया गया है। कैसा ज़माना आ गया है, इंडिया टीवी का रिपोर्टर जगदीप सिंह तिहाड़ जेल ले जाया जा रहा है और सोमवार को इंडिया टीवी पर जिगोलो की स्टोरी का ऐलान किया जा रहा है। यहां भी नैतिकता का पाठ पढ़ाने की कोशिश!!</p>
<p>किसी ने कहा है कि बैलगाड़ी के नीचे चलने वाले कुत्ते को अकसर यह गुमान हो जाता है कि सारा बोझ उसी के कंधों पर है। चैनल वालों को भी यह गुमान हो गया है कि सारी ईमानदारी और नैतिकता का ठेका उन्हीं के कंधौं पर है। सच यह है कि हमाम में सब नंगे हैं। पढ़ लो और जाग जाओ दर्शकों।</p>
<p>"जब किसी को कोई गिला रखना... सामने अपने आईना रखना"</p>
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