विनय wrote 7 months ago: यह कोरे काग़ज़ करते हैं दिल की बात जैसे य … more →
विनय wrote 7 months ago: यह बीते हुए लम्हों का शोर है या तन्हाई … more →
विनय wrote 8 months ago: अकेले हम हों कभी, अकेले तुम हो और समन्द … more →
विनय wrote 8 months ago: कोई आया है जाने के बाद क़ब्र पर वह गया है … more →
विनय wrote 8 months ago: दूदे - तन्हाई के उस पार क्या है … more →
विनय wrote 8 months ago: तन्हाई में गोता लगाना मेरा एक शौक़ है ज़ … more →
विनय wrote 1 year ago: शाम गहरी हो रही थी सुनहरा चाँद बादलों … more →
विनय wrote 1 year ago: एक अधूरी ख़ाहिश लिए मैं भटक रहा हूँ दर- … more →