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	<title>दवा &amp;laquo; WordPress.com Tag Feed</title>
	<link>http://wordpress.com/tag/दवा/</link>
	<description>Feed of posts on WordPress.com tagged "दवा"</description>
	<pubDate>Wed, 08 Oct 2008 03:48:57 +0000</pubDate>

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	<language>en</language>

<item>
<title><![CDATA[जिसे दवा जाना वह भी ज़हर निकला]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=913</link>
<pubDate>Fri, 14 Mar 2008 09:34:29 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2008/03/14/jise-dawaa-jaana-wah-bhii-zahar-nikalaa/</guid>
<description><![CDATA[जिसे दवा जाना वह ज़हर निकला
वह कि मेरा क़]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">जिसे दवा जाना वह ज़हर निकला<br />
वह कि मेरा क़फ़न उड़ाकर निकला</font></p>
<p><font color="#000000">दो उंगलियों में मुझे यूँ मसला उसने<br />
मेरे दिल से फ़िराक़ का डर निकला</font></p>
<p><font color="#000000">जिस दिल को मैंने समन्दर जाना<br />
वह तो एक टूटी हुई लहर निकला</font></p>
<p><font color="#000000">तुम्हारे प्यार में जो मैंने गुज़ारा<br />
वह लम्हा कितना मुख़्तसर निकला</font></p>
<p>फ़िराक़= बिछोह, separation</p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[यह कैसा लम्हा है]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=881</link>
<pubDate>Thu, 06 Mar 2008 10:28:36 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2008/03/06/yah-kaisa-lamha-hai/</guid>
<description><![CDATA[यह कैसा लम्हा है
यह कैसा एहसास है
तू पल]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">यह कैसा लम्हा है<br />
यह कैसा एहसास है<br />
तू पलकों में क़ैद है<br />
दिल के पास है</font></p>
<p><font color="#000000">क्या देखूँ तेरे सिवा<br />
क्या चाहूँ तेरे सिवा<br />
मेरे दर्दे-दिल की<br />
तू ही तो है दवा</font></p>
<p><font color="#000000">खिलते हुए लम्हे सब<br />
खिल गये हैं अब<br />
मैं तुझको महसूस करूँ<br />
साँस लूँ जब</font></p>
<p><font color="#000000">आज जो देखा तुझे<br />
याद आया मुझे<br />
लोग दीवाना क्यों<br />
कहते है मुझे</font></p>
<p><font color="#000000">जब निगाहों ने छुआ<br />
यह एहसास हुआ<br />
तूने भी मुझको सनम<br />
प्यार है किया</font></p>
<p><font color="#000000">दुनिया बदल गयी है<br />
तू मुझे मिल गयी है<br />
ज़िन्दगी मेरी इक हसीन<br />
शाम हो गयी है</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[तेरा चेहरा मेरे प्यार की तस्वीर है]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=743</link>
<pubDate>Mon, 11 Feb 2008 12:22:31 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2008/02/11/tera-chehara-mere-pyaar-kii-tasweer-hai/</guid>
<description><![CDATA[तेरा चेहरा मेरे प्यार की तस्वीर है
तू ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">तेरा चेहरा मेरे प्यार की तस्वीर है<br />
तू मोहब्बत है मेरी<br />
या फिर साँसों की ज़ंजीर है</font></p>
<p><font color="#000000">जब तुझे देखा सनम मुझे ऐसा लगा<br />
जैसे मिली हर ख़ुशी<br />
मैंने पायी हर ग़म की दवा</font></p>
<p><font color="#000000">तेरा चेहरा मेरे प्यार की तस्वीर है<br />
तू मोहब्बत है मेरी<br />
या फिर साँसों की ज़ंजीर है</font></p>
<p><font color="#000000">वक़्त रुकता नहीं चलता नहीं<br />
यह नज़र क्या तुमसे मिली<br />
तब से तेरा दीवाना हुआ मैं<br />
सच है ख़ुद से बेग़ाना हुआ मैं<br />
तू चाहे न चाहे मुझको<br />
मैंने तुझे ही चाहा है...</font></p>
<p><font color="#000000">तेरा चेहरा मेरे प्यार की तस्वीर है<br />
तू मोहब्बत है मेरी<br />
या फिर साँसों की ज़ंजीर है</font></p>
<p><font color="#000000">तेरी ही चाहत है रग-रग में<br />
तेरा ही प्यार है नस-नस में<br />
तू चाहे तो मैं जाँ लुटा दूँ<br />
तू चाहे तो ख़ुद को मिटा दूँ<br />
यही है मेरी तमन्ना<br />
तुझको अपना बना लूँ...</font></p>
<p><font color="#000000">तेरा चेहरा मेरे प्यार की तस्वीर है<br />
तू मोहब्बत है मेरी<br />
या फिर साँसों की ज़ंजीर है</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[मक़सद है मेरे पास क्या जीने को]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/12/25/%e0%a4%ae%e0%a5%98%e0%a4%b8%e0%a4%a6-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%b8-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%9c%e0%a5%80%e0%a4%a8%e0%a5%87/</link>
<pubDate>Tue, 25 Dec 2007 13:25:21 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2007/12/25/maqasad-kya-hai-mere-paas-jeene-ko/</guid>
<description><![CDATA[मक़सद है मेरे पास क्या जीने को
कहाँ से ल]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">मक़सद है मेरे पास क्या जीने को<br />
कहाँ से लाऊँ तुम-सा बहाना जीने को</font></p>
<p><font color="#000000">साँस चलती है ज़ख़्म करते हुए<br />
कौन कब तक करेगा दवा जीने को</font></p>
<p><font color="#000000">तस्वीरे-सुखन आँखों में अयाँ है<br />
सुखनवर को देते हो दुआ जीने को</font></p>
<p><font color="#000000">रखे हैं सभी दाग़ जो तुमने दिये<br />
अब जलता है वह दिया जीने को</font></p>
<p><font color="#000000">नरमी बरतो ज़रा दिल से 'नज़र'<br />
कर न बैठे वह कोई ख़ता जीने को</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[ख़ाली सीने में कुछ धुँआ-धुँआ-सा है]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/12/25/%e0%a4%96%e0%a4%bc%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a5%80%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%81%e0%a4%9b-%e0%a4%a7%e0%a5%81%e0%a4%81%e0%a4%86-%e0%a4%a7%e0%a5%81/</link>
<pubDate>Tue, 25 Dec 2007 13:10:16 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2007/12/25/khalii-seene-mein-kuchh-dhumaa-dhumaa-sa-hai/</guid>
<description><![CDATA[ख़ाली सीने में कुछ धुँआ-धुँआ-सा है
जिस ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">ख़ाली सीने में कुछ धुँआ-धुँआ-सा है<br />
जिस सिम्त देखता हूँ दिल बदगुमाँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">दर्द को दर्द हो ऐसा होता नहीं<br />
इसीलिए ख़ातिर में यह नौ-जवाँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">ख़ुदा ही मेहर से मैं रहा सदियों के फ़ासले पे<br />
आज भी वह ना-मेहरबाँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">ढूँढ़ता हूँ मैं ख़ुद को उस गली में<br />
जिसमें मुझे ज़िन्दगी होने का नुमाया-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">रोशनी में भिगो दिया शबे-महफ़िल को जिसने<br />
तेरी रंगत का शुआ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">एहसासात दफ़्न हैं किसी कब्र में<br />
दर्द दिल का आज कुछ बे-ज़ुबाँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">खींच लिया जिगर को दाँतों से लब तक<br />
आज महफ़िल में यह कमनुमा-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">तेरी दीद से बादशाहत मिली थी मुझे<br />
ज़ख़्म कहता है तेरा साया हुमा-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">बदनसीबी गर्दिशे-अय्याम है बस<br />
वक़्त यह एक इम्तिहाँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">तमाशा बहुत हुआ तेरे जाने के बाद<br />
जो कुछ भी हुआ ज़ख़्मे-निहाँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">शज़र बेसमर हैं नकहते-गुल भी नहीं<br />
मौसम यह ज़र्द ख़िज़ाँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">ज़ीस्त नवाज़ी गयी सो जी रहे हैं<br />
मगर जीना मुश्किल मरना आसाँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">मैं गर तेरा तस्व्वुर करूँ<br />
बूँद-बूँद शबनम का गिरना भी गिरियाँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">तुम नहीं गुज़रते इस राह से<br />
मेरी गली का हर पत्थर रेगिस्ताँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">वह उजाले जिनसे चौंक गयीं थीं मेरी आँखें<br />
मंज़र वह भी कहकशाँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">ना पूछ कब से तेरे दीवानों में शामिल हूँ<br />
हाल मेरा भी कुछ-कुछ बियाबाँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">नीली शाल में लिपटी देखा था तुझे<br />
तब से जाना कि चाँद किसी माहलक़ा-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">तुम आये घर मेरे आस्ताने तक<br />
कि अब का'बा ही मेरे सँगे-आस्ताँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">इश्क़ में हमसा न पायेगा कोई<br />
न होना मेरा उनकी बज़्म में हरमाँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">हम वस्ल की तमन्ना में मुए जाते हैं<br />
ज़ुज तेरे सभी से वस्ल हिज्राँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">शगून तेरे देखने भर से होता था<br />
आज इन आँखों में हर क़तरा टूटा-टूटा-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">बेज़ार है चमन तितली ज़र कैसे पिये<br />
अब कि मौसम भी कुछ बेईमाँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">ज़हर हमको दिया दवा बता के ख़ुदा ने<br />
ज़ीस्त जो बख़्शी यह भी सौदा-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">'नज़र' बातें हैं बहुत उसके इश्क़ो-ग़म में<br />
जिसका दिल पर निशाँ-सा है</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[ज़िन्दगी माने हो तुम]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/09/15/%e0%a5%9b%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a4%97%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%b9%e0%a5%8b-%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%ae/</link>
<pubDate>Sat, 15 Sep 2007 11:27:07 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2007/09/15/zindagii-maane-ho-tum/</guid>
<description><![CDATA[ज़िन्दगी माने हो तुम
साँसें तुम्हारा ए]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">ज़िन्दगी माने हो तुम<br />
साँसें तुम्हारा एहसास हैं<br />
यादें बाइस हैं ज़ीस्त को<br />
तेरी तमन्ना है खु़शी<br />
ग़म है तेरी जुदाई<br />
ज़ख़्मे-दिल ही मरहम<br />
ज़ख़्मे-दिल ही दवा<br />
और चारागर हो तुम...</font></p>
<p><font color="#000000">आप ही हँसना है<br />
आप ही रोना है<br />
दिन-रात ख़्यालों में<br />
तुमसे बातें करना<br />
सब जीने का मतलब है<br />
खा़ली सीने में दिल कहाँ है<br />
वह तो तुम्हारे पास है<br />
जो सीने में धड़कता है<br />
महज़ तुम्हारा एहसास है</font></p>
<p><font color="#000000">जब भी बेले की कली खुलती है<br />
और गुलाब महकता है<br />
यूँ एहसास होता है उसे छूकर<br />
जैसे तुमको छू लिया है<br />
तुम मुझसे नाआश्ना हो<br />
मगर मैं तुमसे दूर नहीं<br />
यह दूरियाँ यह फ़ासले<br />
सब कम हो जायेंगे<br />
बस तुम्हारे घर का पता मिले</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४ </p>
]]></content:encoded>
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