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	<title>दूर &amp;laquo; WordPress.com Tag Feed</title>
	<link>http://wordpress.com/tag/दूर/</link>
	<description>Feed of posts on WordPress.com tagged "दूर"</description>
	<pubDate>Sun, 12 Oct 2008 09:17:41 +0000</pubDate>

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	<language>en</language>

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<title><![CDATA[यह मुनासिब नहीं मैं भुला दूँ तुझको]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=1116</link>
<pubDate>Sat, 13 Sep 2008 14:55:15 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2008/09/13/yah-munaasib-nahiin-main-bhulaa-doom-tujh-ko/</guid>
<description><![CDATA[यह मुनासिब नहीं मैं भुला दूँ तुझको
तेर]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">यह मुनासिब नहीं मैं भुला दूँ तुझको<br />
तेरे सिवा कुछ होश नहीं है मुझको</span></p>
<p><span style="color:#000000;">ना जाने कितने अजनबी गुज़रे हैं<br />
मेरे इस जिस्म की गीली मिट्टी से<br />
किसी ने कभी न छुआ ऐसे मुझे<br />
जिस तरह से छुआ है तूने मुझको</span></p>
<p><span style="color:#000000;">मैं बहुत भटका हूँ चेहरे-चेहरे<br />
और हर दिल को झाँककर देखा है<br />
तेरे दिल-सा नादाँ और मासूम<br />
कोई दूसरा दिल न मिला है मुझको</span></p>
<p><span style="color:#000000;">तू मुझसे दूर बहुत दूर सही लेकिन<br />
बहुत पास है धड़कते हुए दिल के<br />
यह वही शाम है याद तो होगा<br />
जब आँखों में लिया था मैंने तुझको</span></p>
<p><span style="color:#000000;">मेरे नाम से रोशन जलता हुआ शायद<br />
कोई चराग़ तो होगा तेरे दिल में<br />
क्या तूने तन्हाई से मज़बूर होके<br />
आज फिर से याद किया है मुझको</span></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[न वह कभी आँखों से उतारा ही गया]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=1058</link>
<pubDate>Sat, 02 Aug 2008 19:35:28 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2008/08/03/na-wah-kabhii-aamkhon-se-utaara-hii-gaya/</guid>
<description><![CDATA[न वह कभी आँखों से उतारा ही गया
और न कभी ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">न वह कभी आँखों से उतारा ही गया<br />
और न कभी लबों से पिया ही गया<br />
वह इक दर्द का बवण्डर था शायद<br />
न जिसे कभी दिल में सँभाला ही गया</span></p>
<p><span style="color:#000000;">इक कहकशाँ की रोशनी भी खप गयी<br />
न ज़रा पलकों को झपकाया ही गया<br />
आधे-आधे दिल से देखा था मैंने उसे<br />
न वह कभी पूरे दिल से देखा ही गया</span></p>
<p><span style="color:#000000;">तारीक़ी ने सिर्फ़ मेरे पाए ही चुने<br />
और न कभी मुझसे भागा ही गया<br />
टुकड़े कर दिये उसने मेरी आँखों के<br />
न यह ग़म मुझसे भिगोया ही गया</span></p>
<p><span style="color:#000000;">धीरे-धीरे वह मुझसे दूर चलता गया<br />
न मुझसे उसके क़रीब जाया ही गया<br />
बारिश ने खनका दीं शीशम की पत्तियाँ<br />
न रोकर इस दिल को बहलाया ही गया</span></p>
<p>पाए:feet,  तारीक़ी: darkness</p>
<hr /> शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[हमने तुमको तुमसे चुराया]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=999</link>
<pubDate>Thu, 19 Jun 2008 19:55:44 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2008/06/20/ham-ne-tum-ko-tum-se-churaaya/</guid>
<description><![CDATA[हमने तुमको तुमसे चुराया
दिल में अपने त]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">हमने तुमको तुमसे चुराया<br />
दिल में अपने तुमको बसाया<br />
तुम भी दीवाने हो गये हो<br />
दूर जो ख़ुद से हो गये हो<br />
आओ अपनी बाँहों में तुमको छुपा लें सनम<br />
आओ अपनी बाँहों में तुमको छुपा लें सनम</span></p>
<p><span style="color:#000000;">क़रीब आ तेरा दिल धड़का दें<br />
दिल में कोई शोला भड़का दें<br />
तुमको दोनों बाँहों में भरकर<br />
सनम प्यार करना सिखा दें</span></p>
<p><span style="color:#000000;">तुम यह दिल तो धड़का दो<br />
हमको प्यार तो सिखा दो<br />
पर वादा करके ओ जानम<br />
हमको छोड़ न जाना तुम...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">ज़रा करके तो देखो हमपे भरोसा<br />
मैं नहीं कर सकता तुमसे धोखा<br />
आओ अपनी बाँहों में तुमको छुपा लें सनम<br />
आओ अपनी बाँहों में तुमको छुपा लें सनम</span></p>
<p><span style="color:#000000;">दिल की ख़ाहिश तेरी ज़ुल्फ़ों में<br />
आज हम ख़ुद को उलझा दें<br />
तेरे गले लगके मेरे सनम<br />
आज तुमको अपना बना लें</span></p>
<p><span style="color:#000000;">ज़ुल्फ़ों में उलझ तो जाओगे<br />
मुझको अपना तो बनाओगे<br />
पर क्या हम मिल पायेंगे<br />
प्यार को सच कर पायेंगे...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">दिल से दिल जब मिल जाये<br />
यह प्यार भी सच हो जाये<br />
आओ अपनी बाँहों में तुमको छुपा लें सनम<br />
आओ अपनी बाँहों में तुमको छुपा लें सनम</span></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४ </p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[दूर रह कर भी...]]></title>
<link>http://meredilne.wordpress.com/?p=18</link>
<pubDate>Thu, 29 May 2008 15:43:54 +0000</pubDate>
<dc:creator>Amarjeet Singh</dc:creator>
<guid>http://meredilne.hi.wordpress.com/2008/05/29/dur-reh-kar-bhi/</guid>
<description><![CDATA[दूर रह कर भी,
कितने करीब हो तुम,
आज ये जा]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>दूर रह कर भी,<br />
कितने करीब हो तुम,<br />
आज ये जान पता हूँ,<br />
जब तेरी यादों को,<br />
सीने से लगाता हूँ,<br />
करीब रह के भी,<br />
न जान पाया तुझे,<br />
आज ये सोच कर,<br />
सिर्फ़ पछताता हूँ,</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[यह बता मुझको! तुझको मुझसे क्या गिला]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=952</link>
<pubDate>Sat, 29 Mar 2008 15:44:03 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2008/03/29/yah-bataa-mujhako-tujhako-mujh-se-kyaa-gilaa/</guid>
<description><![CDATA[यह बता मुझको! तुझको मुझसे क्या गिला
मु]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">यह बता मुझको! तुझको मुझसे क्या गिला<br />
मुझको हर गाम नीचा दिखाके क्या मिला<br />
हर वक़्त इम्तिहान और बस इम्तिहान<br />
मुझको राहे-ख़ुदा में और कुछ भी न मिला</font></p>
<p><font color="#000000">ख़ाली सीने में दर्द ही ज़मीं दर्द ही आसमाँ<br />
दूर तक राहों में दर्द के निशाँ बस निशाँ<br />
बाहर आ गया जिगर फाड़ के क़तराए-लहू<br />
ऐ ख़ुदा तूने दिया मुझको किस बात का सिला</font></p>
<p><font color="#000000">हँसना मुझे रक़ीब का' तीर-सा लगता है<br />
रखे अगर वह बैर मुझसे रखता है<br />
जाने उसकी आँखों में मैं खटकता हूँ कि नहीं<br />
ऐ ख़ुदा हर बार मैं ही क्यों मूँग-सा दला</font></p>
<p><font color="#000000">राहे-इश्क़ में मुझे पत्थर का दिल नहीं<br />
ज़ीस्त यह गँवारा मुझे बिल्कुल नहीं<br />
मैं ख़ुदा को किसका वास्ता देकर कहूँ कि बस!<br />
ख़ुदा-ख़ुदा कहने से हासिल कुछ भी न मिला</font></p>
<p><font color="#000000">अपने ज़ख़्मों पे ख़ुद आप मरहम रखूँ<br />
यह दर्द अगर कहूँ तो आख़िर किससे कहूँ<br />
बात-बात पे ख़ुद से बिगड़ना आदत बन गयी<br />
दरबारे-ख़ुदा से मुझको कुछ भी न मिला</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[आँखों में आँसू नहीं आते]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=945</link>
<pubDate>Fri, 21 Mar 2008 09:52:02 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2008/03/21/aamkhon-mein-aamsoon-nahiin-aate/</guid>
<description><![CDATA[आँखों में आँसू नहीं आते
क्योंकि मैं जा]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">आँखों में आँसू नहीं आते<br />
क्योंकि मैं जानता हूँ<br />
तुम लौटकर आओगी ज़रूर<br />
यह दिल तन्हा कहाँ है<br />
इसमें यादें हैं तुम्हारी<br />
तुम रहो कितने भी दूर</font></p>
<p><font color="#000000">देखता हूँ तुम्हें<br />
जब भी आँखें मूँद लेता हूँ<br />
और कोई कहाँ है इनमें हुज़ूर<br />
तुमसे प्यार किया है<br />
यह दिल का सौदा है तुम्हीं से<br />
क्यों न रहूँ थोड़ा मग़रूर</font></p>
<p><font color="#000000">पास आने के दिन आ गये<br />
धड़कनों में बेक़रारी है<br />
दिल में सुरूर ही सुरूर<br />
वादियों में चले मौसम हरे<br />
डालियों पर फूल गुलाबी हैं<br />
निगाह में भर गया है नूर</font></p>
<p><font color="#000000">जादू-सा है फ़िज़ाओं में<br />
खिल रहे हैं ख़्याल हर-सू<br />
क्यों न आये तुम्हारा मज़कूर<br />
दिल बहलता नहीं बातों से<br />
यह कैसा सिलसिला है<br />
चैन आये गर आये वह हूर</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[साहिबा ज़ुलेख़ा सोफ़िया ]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=871</link>
<pubDate>Tue, 04 Mar 2008 02:24:18 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2008/03/04/saahibaa-zuleikha-sophia/</guid>
<description><![CDATA[साहिबा ज़ुलेख़ा सोफ़िया आँखों में तू
ख़]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">साहिबा ज़ुलेख़ा सोफ़िया आँखों में तू<br />
ख़ाबों में ख़्यालों में मेरी साँसों में तू</font></p>
<p><font color="#000000">जानाँ मैं तेरे हुस्न का ख़्वार हूँ<br />
तेरी इक झलक को बेक़रार हूँ<br />
तेरे लिए दर-ब-दर भटकता रहा<br />
रात-दिन तेरा नाम रटता रहा</font></p>
<p><font color="#000000">मेरे दिल के अँधेरों में उजालों में तू<br />
ख़ाबों में ख़्यालों में मेरी साँसों में तू</font></p>
<p><font color="#000000">यूँ ही दूर से देखूँ कब तलक तुझे<br />
अपनी आँखों में बाँहों में छुपा ले मुझे<br />
तेरे प्यार को ज़रा प्यार करने दे<br />
इक़रार करके इज़हार करने दे</font></p>
<p><font color="#000000">ज़हन के तस्व्वुर में सवालों में तू<br />
ख़ाबों में ख़्यालों में मेरी साँसों में तू</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति 'नज़र'<br />
लेखन वर्ष: १२ मई २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[हाल दिल का बताना तुमसे]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=805</link>
<pubDate>Mon, 18 Feb 2008 15:05:28 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2008/02/18/haal-dil-ka-bataana-tum-se/</guid>
<description><![CDATA[हाल दिल का बताना तुमसे बहुत ही मुश्किल]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">हाल दिल का बताना तुमसे बहुत ही मुश्किल है<br />
न जाने कितना, बेशुमार दर्द इसमें शामिल है<br />
हर लम्हा ज़िन्दगी को ज़िन्दगी से दूर करता है<br />
जाने किस रफ़्तार दोनों का दिल शोर करता है</font></p>
<p><font color="#000000">जाने अन्जाने मुझसे कितनी गुस्ताखियाँ हो गयीं<br />
हम क्यों समझ न पाये और आप दूर होती गयीं <br />
थोड़ी-थोड़ी दोस्ती न जाने कब मोहब्बत बन गयी<br />
एक फूल खिला और सारी फ़िज़ा जन्नत हो गयी</font></p>
<p><font color="#000000">हाल दिल का बताना तुमसे बहुत ही मुश्किल है<br />
न जाने कितना, बेशुमार दर्द इसमें शामिल है</font></p>
<p><font color="#000000">वही समझता है यह इश्क़ जो इश्क़ का मारा है<br />
समझे पाये बहुत देर से हम, यह कच्चा सहारा है<br />
पलकें भारी हो जाती हैं कोशिश करते हैं जागने की<br />
कैसी ज़िन्दगी है ज़रूरत पड़ती है साँसें माँगने की</font></p>
<p><font color="#000000">हाल दिल का बताना तुमसे बहुत ही मुश्किल है<br />
न जाने कितना, बेशुमार दर्द इसमें शामिल है</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[पहला-पहला नशा]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=784</link>
<pubDate>Fri, 15 Feb 2008 13:55:15 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2008/02/15/pahalaa-pahalaa-nashaa/</guid>
<description><![CDATA[जादू जैसा छाया पहला-पहला नशा
जी में आय]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">जादू जैसा छाया पहला-पहला नशा<br />
जी में आये पंख खोल उड़ जाऊँ मैं<br />
आस्माँ से आगे निकल जाऊँ मैं</font></p>
<p><font color="#000000">मस्ती दिल पर छायी अनजानी-सी<br />
उड़ती फिरे है जैसे फूलों पर तितली<br />
दिल में जाने कैसा तूफ़ान उठा है<br />
यूँ लगता है हर पल मुझसे रूठा है</font></p>
<p><font color="#000000">तेरा ग़म पाया ख़ुशी मुझको मिली<br />
लगता है खिल रही दिल की कली<br />
जादू जैसा छाया पहला-पहला नशा</font></p>
<p><font color="#000000">तेरे ख़ाब आते रहे मुझको रातभर<br />
मैं कहाँ जाऊँगा दूर तुमसे बिछड़कर<br />
अफ़साना बन चुका खो गया दिल<br />
इल्तिजा सुन ले मुझसे आकर मिल</font></p>
<p><font color="#000000">यह जादू प्यार है मैंने अब जाना<br />
जिसको ढूँढ़ रहा था वह मुझे मिला<br />
जादू जैसा छाया पहला-पहला नशा</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[जैसे ज़िन्दगी वीरान है]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=744</link>
<pubDate>Mon, 11 Feb 2008 13:14:08 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2008/02/11/jaise-zindagii-veeraan-hai/</guid>
<description><![CDATA[जैसे ज़िन्दगी वीरान है
जैसे ज़िन्दगी बे]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">जैसे ज़िन्दगी वीरान है<br />
जैसे ज़िन्दगी बेनाम है<br />
तू मेरी बाँहों से दूर है<br />
तू निगाहों का नूर है, मेरे लिए</font></p>
<p><font color="#000000">जैसे चलती है धड़कन<br />
जैसे होती है कम्पन<br />
जैसे आती है यह सुबह<br />
जैसे जाती है हर शाम, मेरे लिए</font></p>
<p><font color="#000000">घड़ी-घड़ी तेरा इन्तिज़ार<br />
घड़ी-घड़ी मैं तेरा राहदार<br />
साँसें ढूँढ़ती हैं तेरी ख़ुशबू<br />
आँखें ढूँढ़ती हैं तेरा ख़ाब, मेरे लिए</font></p>
<p><font color="#000000">आ जाओ तुम या फिर<br />
आने दो अपने पास मुझे<br />
यह दूरियाँ सिमटने दो<br />
यह डोरियाँ उलझने दो, मेरे लिए</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[किसी आस्माँ के परे तो]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=690</link>
<pubDate>Mon, 04 Feb 2008 19:39:26 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2008/02/05/kisii-aasamaan-ke-pare-to/</guid>
<description><![CDATA[किसी आस्माँ के परे तो
तेरी मुहब्बत का ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">किसी आस्माँ के परे तो<br />
तेरी मुहब्बत का हासिल मिलेगा<br />
कितनी तन्हाइयाँ तय करें<br />
कब हमें इनका हासिल मिलेगा</font></p>
<p><font color="#000000">तुम मीलों दूर हो सकती हो<br />
तुम किसी और को चाह सकती हो<br />
मेरा क्या, मैं तुमको चाहूँगा<br />
तेरी उम्मीद में जानम मर जाऊँगा</font></p>
<p><font color="#000000">चाँद ने परदा किया<br />
जब-जब तेरा हुस्न सामने आया<br />
उफ़ वह बे-तस्कीनियाँ<br />
कि चाँद तुझसे हुस्न माँगने आया</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००२</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[तक़रीब कोई बाक़ी नहीं अब...]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/08/27/%e0%a4%a4%e0%a5%98%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%ac-%e0%a4%95%e0%a5%8b%e0%a4%88-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a5%98%e0%a5%80-%e0%a4%a8%e0%a4%b9%e0%a5%80%e0%a4%82-%e0%a4%85%e0%a4%ac/</link>
<pubDate>Mon, 27 Aug 2007 20:55:17 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2007/08/27/taqareeb-koii-baaqii-nahiin-ab/</guid>
<description><![CDATA[आँखों में नींद नहीं रहती
वीरान रातें ज]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">आँखों में नींद नहीं रहती<br />
वीरान रातें जागता हूँ<br />
दर्द से दर्द को चैन है<br />
दूर-दूर तक ख़ामोशी बिखरी है</span></p>
<p><span style="color:#000000;">साँस लेने की वजह नहीं है<br />
ख़ला बसी है हर धड़कन दिल में<br />
मुतमइन-सा हर पल क़रीब आता है<br />
और आँखों में जलता रहता है</span></p>
<p><span style="color:#000000;">खु़द से जो सवाल करता हूँ<br />
उनके जवाब ही नहीं हैं<br />
इक ख़फ़ा और खा़ली शाम<br />
बाक़ी रह गयी है मेरी ज़िन्दगी में</span></p>
<p><span style="color:#000000;">आँसू खुष्क पड़ गए हैं<br />
आँख रोती है गर तो जलती है<br />
बुझाने का कोई सबब नहीं<br />
बहाने के सौ बहाने हैं</span></p>
<p><span style="color:#000000;">तक़रीब* कोई बाक़ी नहीं अब<br />
लफ़्ज़ ज़ुबाँ से सिल गये हैं<br />
कौन समझे आधी-अधूरी बातें<br />
जो बीते लम्हों में साँस लेती हैं</span></p>
<p>* reason</p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति 'नज़र'</p>
]]></content:encoded>
</item>

</channel>
</rss>
