<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><!-- generator="wordpress.com" -->
<rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	>

<channel>
	<title>धुँआ &amp;laquo; WordPress.com Tag Feed</title>
	<link>http://wordpress.com/tag/धुँआ/</link>
	<description>Feed of posts on WordPress.com tagged "धुँआ"</description>
	<pubDate>Sun, 07 Sep 2008 04:00:06 +0000</pubDate>

	<generator>http://wordpress.com/tags/</generator>
	<language>en</language>

<item>
<title><![CDATA[मैं क्यों आज तक उसकी ख़ाहिश करता हूँ]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=1004</link>
<pubDate>Fri, 27 Jun 2008 08:14:00 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=1004</guid>
<description><![CDATA[मैं क्यों आज तक उसकी ख़ाहिश करता हूँ
ज]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">मैं क्यों आज तक उसकी ख़ाहिश करता हूँ<br />
जो मुझको भीड़ में अकेला छोड़कर गया है<br />
सुबह आज भी उसको आइनों में जोड़ता हूँ<br />
जो मेरे दिल को खिलौने-सा तोड़कर गया है...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">बे-तस्कीनियाँ उजले चेहरों से बढ़ती हैं<br />
हर पल मुझको अक्स की तरह पढ़ती हैं<br />
अंधेरी रात है मैं छत पर तन्हा बैठा हूँ<br />
एक-एक पल दोपहर-सा गुज़र रहा है...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">कोई उठाये मुझको या फिर बैठा रहने दे<br />
ख़ाबों के जंगल जलाये ना, धुँआ उड़ाये ना<br />
ख़ाहिशों का अम्बार है, दिल ज़ार-ज़ार है<br />
आँखों की नदिया सुखाये ना, चाँद जलाये ना</span></p>
<p><span style="color:#000000;">अजीब धुनकी में है दिल और कुछ नहीं है<br />
दर्द का ग़ुबार है दिल और कुछ नहीं है<br />
मुस्कुराहट जब खिली गुलाबी लबों पर<br />
एक हसीन ख़ाब सारी रात जागता रहा है...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">एक नयी परवाज़ दिखायी दी है आसमाँ में<br />
कुछ नये अन्दाज़ भी हैं उसकी ज़बाँ में<br />
बाँट नहीं सकता किसी से लम्हों के टुकड़े<br />
ख़ुदाया मेरा कोई नहीं इतने बड़े जहाँ में</span></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४ </p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[आसमाँ को आज उसका हक़ पहुँचा]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=905</link>
<pubDate>Thu, 13 Mar 2008 05:04:37 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=905</guid>
<description><![CDATA[आसमाँ को आज उसका हक़ पहुँचा
यह तीर जो मे]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">आसमाँ को आज उसका हक़ पहुँचा<br />
यह तीर जो मेरे दिल तक पहुँचा</font></p>
<p><font color="#000000">ज़ख़्म देकर जो उसका जी न भरा<br />
दिल उसका मेरे दिल तक पहुँचा</font></p>
<p><font color="#000000">ख़ुशी की प्यास बढ़ती गयी जब<br />
मैं भी दर्द के हासिल तक पहुँचा</font></p>
<p><font color="#000000">धुँआ-धुँआ है आँख मेरी अब रोज़<br />
कि मैं अपने ही साहिल तक पहुँचा</font></p>
<p>हक़= truth, righteousness</p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[अंगीठी में सुलगता कोयला]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=841</link>
<pubDate>Tue, 26 Feb 2008 04:11:21 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=841</guid>
<description><![CDATA[अंगीठी में सुलगता कोयला झलोगे
तब जाकर ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">अंगीठी में सुलगता कोयला झलोगे<br />
तब जाकर धुँआ ज़रा कम उठेगा</font></p>
<p><font color="#000000">आँसू अपनी आँख के सब पोंछ दो</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[दिल में दुआ दिल में पिया]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=722</link>
<pubDate>Thu, 07 Feb 2008 15:30:46 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=722</guid>
<description><![CDATA[दिल में दुआ दिल में पिया
दिल ने चाहा दि]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">दिल में दुआ दिल में पिया<br />
दिल ने चाहा दिल ने किया</font></p>
<p><font color="#000000">इश्क़ पर किसका ज़ोर है<br />
बहती हवाओं में शोर है<br />
दिल में दरकती हैं आहें<br />
उनके बिना सूनी हैं बाँहें<br />
चले आओ, चले आओ<br />
ठहर गयीं हैं सब राहें</font></p>
<p><font color="#000000">दिल में दुआ दिल में पिया<br />
दिल ने चाहा दिल ने किया</font></p>
<p><font color="#000000">दिल की कहानियाँ पुरानी हैं<br />
फिर भी उनको सुनानी हैं<br />
दिल में दर्द जलते-बुझते हैं<br />
यह किस्से कहते न बनते हैं<br />
साँसों में फिर उठा धुँआ<br />
कुछ अरमान सुलगते हैं</font></p>
<p><font color="#000000">दिल में दुआ दिल में पिया<br />
दिल ने चाहा दिल ने किया</font></p>
<p><font color="#000000">उगती बेलें तो दीवानी है<br />
जाने कहाँ-कहाँ उगती है<br />
समन्दर किनारों की<br />
चट्टानों-सी यह दुनिया है<br />
फिर भी यहाँ पर जाने<br />
कितनों ने इश्क़ किया है</font></p>
<p><font color="#000000">दिल में दुआ दिल में पिया<br />
दिल ने चाहा दिल ने किया</font></p>
<p><font color="#000000">आग में जलता सूरज रोज़<br />
तपिश देने निकलता है<br />
लेकिन फिर भी यहाँ<br />
चाँद का ही ज़ोर चलता है<br />
इश्क़ में जो मुक़ाम बनते हैं<br />
यहाँ कितनों को मिलते हैं?</font></p>
<p><font color="#000000">दिल में दुआ दिल में किया<br />
दिल ने चाहा दिल ने किया</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[ख़ाली सीने में कुछ धुँआ-धुँआ-सा है]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/12/25/%e0%a4%96%e0%a4%bc%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a5%80%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%81%e0%a4%9b-%e0%a4%a7%e0%a5%81%e0%a4%81%e0%a4%86-%e0%a4%a7%e0%a5%81/</link>
<pubDate>Tue, 25 Dec 2007 13:10:16 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/12/25/%e0%a4%96%e0%a4%bc%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a5%80%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%81%e0%a4%9b-%e0%a4%a7%e0%a5%81%e0%a4%81%e0%a4%86-%e0%a4%a7%e0%a5%81/</guid>
<description><![CDATA[ख़ाली सीने में कुछ धुँआ-धुँआ-सा है
जिस ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">ख़ाली सीने में कुछ धुँआ-धुँआ-सा है<br />
जिस सिम्त देखता हूँ दिल बदगुमाँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">दर्द को दर्द हो ऐसा होता नहीं<br />
इसीलिए ख़ातिर में यह नौ-जवाँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">ख़ुदा ही मेहर से मैं रहा सदियों के फ़ासले पे<br />
आज भी वह ना-मेहरबाँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">ढूँढ़ता हूँ मैं ख़ुद को उस गली में<br />
जिसमें मुझे ज़िन्दगी होने का नुमाया-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">रोशनी में भिगो दिया शबे-महफ़िल को जिसने<br />
तेरी रंगत का शुआ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">एहसासात दफ़्न हैं किसी कब्र में<br />
दर्द दिल का आज कुछ बे-ज़ुबाँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">खींच लिया जिगर को दाँतों से लब तक<br />
आज महफ़िल में यह कमनुमा-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">तेरी दीद से बादशाहत मिली थी मुझे<br />
ज़ख़्म कहता है तेरा साया हुमा-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">बदनसीबी गर्दिशे-अय्याम है बस<br />
वक़्त यह एक इम्तिहाँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">तमाशा बहुत हुआ तेरे जाने के बाद<br />
जो कुछ भी हुआ ज़ख़्मे-निहाँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">शज़र बेसमर हैं नकहते-गुल भी नहीं<br />
मौसम यह ज़र्द ख़िज़ाँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">ज़ीस्त नवाज़ी गयी सो जी रहे हैं<br />
मगर जीना मुश्किल मरना आसाँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">मैं गर तेरा तस्व्वुर करूँ<br />
बूँद-बूँद शबनम का गिरना भी गिरियाँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">तुम नहीं गुज़रते इस राह से<br />
मेरी गली का हर पत्थर रेगिस्ताँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">वह उजाले जिनसे चौंक गयीं थीं मेरी आँखें<br />
मंज़र वह भी कहकशाँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">ना पूछ कब से तेरे दीवानों में शामिल हूँ<br />
हाल मेरा भी कुछ-कुछ बियाबाँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">नीली शाल में लिपटी देखा था तुझे<br />
तब से जाना कि चाँद किसी माहलक़ा-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">तुम आये घर मेरे आस्ताने तक<br />
कि अब का'बा ही मेरे सँगे-आस्ताँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">इश्क़ में हमसा न पायेगा कोई<br />
न होना मेरा उनकी बज़्म में हरमाँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">हम वस्ल की तमन्ना में मुए जाते हैं<br />
ज़ुज तेरे सभी से वस्ल हिज्राँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">शगून तेरे देखने भर से होता था<br />
आज इन आँखों में हर क़तरा टूटा-टूटा-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">बेज़ार है चमन तितली ज़र कैसे पिये<br />
अब कि मौसम भी कुछ बेईमाँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">ज़हर हमको दिया दवा बता के ख़ुदा ने<br />
ज़ीस्त जो बख़्शी यह भी सौदा-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">'नज़र' बातें हैं बहुत उसके इश्क़ो-ग़म में<br />
जिसका दिल पर निशाँ-सा है</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[दिल की बस्तियाँ जलीं]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/09/20/%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b2-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%ac%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%81-%e0%a4%9c%e0%a4%b2%e0%a5%80%e0%a4%82/</link>
<pubDate>Thu, 20 Sep 2007 06:27:13 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/09/20/%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b2-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%ac%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%81-%e0%a4%9c%e0%a4%b2%e0%a5%80%e0%a4%82/</guid>
<description><![CDATA[दिल की बस्तियाँ जलीं पर उठा नहीं धुँआ
]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">दिल की बस्तियाँ जलीं पर उठा नहीं धुँआ<br />
बुझाया आँखों से मैंने पर बुझा नहीं धुँआ</font></p>
<p><font color="#000000">बहुत देर टीस दबाये बैठा रहा मैं<br />
चंद अश्क जो आये फिर चुभा नहीं धुँआ</font></p>
<p><font color="#000000">दर्द पर्त-दर-पर्त जमता ही रहा<br />
बुझाया बहुत मैंने पर हुआ नहीं धुँआ</font></p>
<p><font color="#000000">कुछ उम्मीदें अश्कों के साथ बह गयीं<br />
अश्क जो आँखों में आये फिर रहा नहीं धुँआ</font></p>
<p><font color="#000000">पलकें बंद करता था पर होती न थीं<br />
बहुत बाँधा किनारों से पर बँधा नहीं धुँआ</font></p>
<p><font color="#000000">हम क्या-क्या कहें 'नज़र' तुम ही कह दो<br />
मैंने आँखों में छुपाया पर छुपा नहीं धुँआ</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति 'नज़र'<br />
लेखन वर्ष: १७ अगस्त २००४</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[एक मुलाक़ात की इल्तजा है]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/09/15/%e0%a4%8f%e0%a4%95-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a5%98%e0%a4%be%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%87%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%9c%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88/</link>
<pubDate>Sat, 15 Sep 2007 18:04:47 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/09/15/%e0%a4%8f%e0%a4%95-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a5%98%e0%a4%be%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%87%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%9c%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88/</guid>
<description><![CDATA[एक मुलाक़ात की इल्तजा है
उससे दुआ है
वह ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">एक मुलाक़ात की इल्तजा है<br />
उससे दुआ है<br />
वह क्यों नहीं मिलता मुझसे<br />
उसे क्या शुबा है<br />
मुझ मुरीद को न क़रार है<br />
यह क्या धुँआ है<br />
साँस बदन से जुदा-जुदा है<br />
मुझे क्या हुआ है<br />
मैं जिसके लिए मरना चाहता हूँ<br />
वो मेरा खु़दा है<br />
सनम मेरा गुले-सुम्बुल है<br />
वो दिलरुबा है</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००५</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[फिर आज किसलिए...]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/08/27/%e0%a4%ab%e0%a4%bf%e0%a4%b0-%e0%a4%86%e0%a4%9c-%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%8f/</link>
<pubDate>Mon, 27 Aug 2007 21:57:57 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/08/27/%e0%a4%ab%e0%a4%bf%e0%a4%b0-%e0%a4%86%e0%a4%9c-%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%8f/</guid>
<description><![CDATA[वक़्त की इक और गिरह खुल गयी
रूह में इक और]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">वक़्त की इक और गिरह खुल गयी<br />
रूह में इक और शिगा़फ़ आ गया<br />
बदन की हर साँस दर्द बन गयी<br />
कि रोशनी को फिर अँधेरा खा गया</span></p>
<p><span style="color:#000000;">वक़्त छोटी-छोटी उम्मीदें<br />
हर वो सपना जो आपकी आँखों ने देखा है<br />
कैसे छीन लेता है<br />
मुझसे बेहतर कोई नहीं जानता</span></p>
<p><span style="color:#000000;">जो रिश्ता मैंने बोया था<br />
उसे अपने हाथों से तुमने खु़द सींचा था<br />
फिर आज किसलिए<br />
ज़ीस्त तेरी उसकी खु़शबू से जुदा है</span></p>
<p><span style="color:#000000;">आँसू आँखों की आँच में<br />
किनारे तक आते-आते धुँआ हो रहे हैं<br />
गीली पुरनम आँखों में<br />
दिल का टुकड़ा-टुकड़ा जल रहा है</span></p>
<p><span style="color:#000000;">मैं बूँद-बूँद वक़्त को<br />
तेरी खा़हिश के लिए जमा करता रहा<br />
आज ऐसा लगता है कि<br />
मैं दरम्याँ कोई दीवार चुन रहा था</span></p>
<p><span style="color:#000000;">मुझे तेरी जुस्तजू अब भी है<br />
पर शायद तू आज भी खु़दग़रज़ है<br />
वरना क्यों खा़मोश है<br />
पहले की तरह कुछ कहता क्यों नहीं</span><br />
 </p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति 'नज़र'</p>
]]></content:encoded>
</item>

</channel>
</rss>
