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	<title>निगाह &amp;laquo; WordPress.com Tag Feed</title>
	<link>http://wordpress.com/tag/निगाह/</link>
	<description>Feed of posts on WordPress.com tagged "निगाह"</description>
	<pubDate>Fri, 05 Sep 2008 07:06:13 +0000</pubDate>

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<item>
<title><![CDATA[मैंने अक्सर खोया है उसे]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=1089</link>
<pubDate>Thu, 04 Sep 2008 13:56:47 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=1089</guid>
<description><![CDATA[मैंने अक्सर खोया है उसे
जो मेरे दिल के ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">मैंने अक्सर खोया है उसे<br />
जो मेरे दिल के क़रीब आ जाता है<br />
जब किसी की चाह में भटकता हूँ<br />
यह दिल बहुत समझाता है</span></p>
<p><span style="color:#000000;">शायद इसी एक वजह से<br />
किसी की हसरत से जी डरता है<br />
बेपनाह प्यार करता है जिससे<br />
तिल-तिलकर उसके लिए मरता है</span></p>
<p><span style="color:#000000;">कई बार मातम में ख़ुद को<br />
सफ़ेद पोशाक पहने हुए  देखा है मैंने<br />
इसीलिए इक दीवार उठा रखी है<br />
निगाहो-निगाहे-पनाह के बीच मैंने</span></p>
<p><span style="color:#000000;">हर शाम ज़हन के दरवाज़े पर<br />
इक माज़ी की दस्तक होती है<br />
तेरा पुराना पता पूछती ज़िन्दगी<br />
मुझसे रोज़ ही रूब-रू होती है</span></p>
<p><span style="color:#000000;">वह यह बारहा कहती है मुझसे<br />
मुझे इश्क़ है तुझसे, तुझी से<br />
और मैं आँख चुराके कहता हूँ<br />
मुझे इश्क़ नहीं तुझसे, किसी से</span></p>
<p><span style="color:#000000;">क्यों चली आयी है इस राह<br />
ख़ुशबू के आवारा बादल की तरह<br />
कि नाचीज़ का दिल काला है<br />
तेरी आँखों के काजल की तरह</span></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[पहली नज़र उफ़ तौबा हाए]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=1079</link>
<pubDate>Tue, 26 Aug 2008 16:52:09 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=1079</guid>
<description><![CDATA[पहली नज़र उफ़ तौबा हाए
दिल कैसे ख़ुद को स]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">पहली नज़र उफ़ तौबा हाए<br />
दिल कैसे ख़ुद को समझाए<br />
दिवाने को आशिक़, आशिक़ को सौदाई, कर दिया है<br />
सौदाई परवाना, कैसे ना<br />
शमअ पर जान लुटाए...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">पहली नज़र उफ़ तौबा हाए...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">पागल यह पवन हो गयी है<br />
ख़ुशबू का चमन हो गयी है<br />
जादू तेरी निगाह चलाये, मेरे दिल को धड़काये<br />
जाये रे जाये, मेरी जान<br />
चली जाये, ना जाये...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">पहली नज़र उफ़ तौबा हाए<br />
पहली नज़र का असर हाए<br />
दिल कैसे ख़ुद को समझाये...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">शाम जैसा सुनहरा तेरा चेहरा<br />
आँखों का रंग काजल से गहरा<br />
चाँद जो आये, चाँदनी बिखर जाये, नूर ना पाये<br />
तू जो मुस्कुराये<br />
सूरज चमक जाये, नूर उठाये...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">पहली नज़र उफ़ तौबा हाए<br />
पहली नज़र का असर हाए<br />
दिल कैसे ख़ुद को समझाये...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">तू ख़ाबों में आने लगी है<br />
ख़्यालों को उलझाने लगी है<br />
आये, तू मेरी ज़िन्दगी में आये, कभी तो आये<br />
मेरी हर शाम, चमक जाये<br />
महक जाये, बहक जाये...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">पहली नज़र उफ़ तौबा हाए...</span></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[न कोई शिकायत है]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=987</link>
<pubDate>Sat, 14 Jun 2008 13:58:57 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=987</guid>
<description><![CDATA[न कोई शिकायत है तुझसे न कोई गिला है
तुम ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">न कोई शिकायत है तुझसे न कोई गिला है<br />
तुम अपने हसीं लबों से हर्फ़ छुओ न छुओ</span></p>
<p><span style="color:#000000;">कम-स-कम बाहम निगाहों में गुफ़्त-गू है!</span></p>
<p>बाहम= आपस में</p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[मस्तियाँ ही मस्तियाँ हैं]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=975</link>
<pubDate>Sun, 01 Jun 2008 13:55:32 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=975</guid>
<description><![CDATA[मस्तियाँ ही मस्तियाँ हैं
जब से मौसमे-ख]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">मस्तियाँ ही मस्तियाँ हैं<br />
जब से मौसमे-ख़िज़ाँ उतरा है<br />
शाख़ों पर हैं नयी कोंपलें<br />
जब से मौसमे-फ़ुर्क़त गुज़रा है</span></p>
<p><span style="color:#000000;">पुरवाइयाँ तन-बदन पे आग लगती हैं<br />
तन्हाइयाँ मेरे ज़हन से ख़ौफ़ रखती हैं<br />
निगाह में तस्वीरे-यार सजा ली जब से<br />
रंगीनियाँ दिल को ख़ुशगँवार लगती हैं...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">मस्तियाँ ही मस्तियाँ हैं<br />
जब से मौसमे-ख़िज़ाँ उतरा है<br />
बेलों पर महके गुच्छे<br />
जब से हुआ यह मौसम हरा है</span></p>
<p><span style="color:#000000;">मेरी बेक़रारियाँ आज क़रार पाने लगी हैं<br />
यह धड़कनें तेरा नाम गुनगुनाने लगी हैं<br />
इक अजब भँवर-सा उमड़ा है ख़्यालों का<br />
ख़ाबों ख़्यालों की भीड़ राह पाने लगी है...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">मस्तियाँ ही मस्तियाँ हैं<br />
जब से मौसमे-ख़िज़ाँ उतरा है<br />
पैमाने सारे भर गये हैं<br />
बादाख़ार हुआ यह दिल ज़रा है</span></p>
<p><span style="color:#000000;">सूरज है हुस्न उसका, जलाता है मुझको<br />
बदन रेशमी चाँद जैसा, लुभाता है मुझको<br />
तक़दीर जो उसने ' जोड़ ली है मुझसे<br />
आज मौसम बहार का, बुलाता है मुझको...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">मस्तियाँ ही मस्तियाँ हैं<br />
जब से मौसमे-ख़िज़ाँ उतरा है<br />
मेरे लिए उसकी चाहत<br />
आज तो उसका दिल भी ख़रा है</span></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[चल पड़ा हूँ फिर उन्ही रास्तों पर...]]></title>
<link>http://meredilne.wordpress.com/?p=13</link>
<pubDate>Sat, 24 May 2008 08:45:24 +0000</pubDate>
<dc:creator>Amarjeet Singh</dc:creator>
<guid>http://meredilne.wordpress.com/?p=13</guid>
<description><![CDATA[चल पड़ा हूँ फिर उन्ही रास्तों पर,
मंजिल ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>चल पड़ा हूँ फिर उन्ही रास्तों पर,<br />
मंजिल का है पता मुझे, रास्ते का भी पता मुझे,<br />
पहुच जाऊंगा वक्त पर, है सबको ख़बर,<br />
फिर सोचता हूँ,<br />
कितना सफर और बाकि है, इस ज़िंदगी का,<br />
न जाने क्यों? साथी खोजती है ये निगाहे,<br />
जाना है अकेले फिर भी,<br />
न जाने क्यों? साथ खोजती है ये निगाहे,</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[यह दिन प्यार का दिन है]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=963</link>
<pubDate>Sat, 12 Apr 2008 14:54:06 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=963</guid>
<description><![CDATA[बहुत ख़ूबसूरत प्यार का दिन है
जिसे चाह]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">बहुत ख़ूबसूरत प्यार का दिन है<br />
जिसे चाहो दिल से, उसे पाने का दिन है</span></p>
<p><span style="color:#000000;">रंग हैं चारों तरफ़, गुलाबों की ख़ुशबू है<br />
हर दिल में धड़कती है चाहत<br />
आज इश्क़ के इज़हार का दिन है</span></p>
<p><span style="color:#000000;">हर निगाह में है झिलमिलाहट प्यार की<br />
हर चेहरे पर हैं छायी ख़ुशियाँ<br />
माह है फागुन, आज बहार का दिन है</span></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[आहिस्ता-आहिस्ता नज़दीकियाँ बढ़ने लगीं]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2008/04/03/aahistaa-aahistaa-nazadiikiyaan-badhhane-lagiin-2/</link>
<pubDate>Wed, 02 Apr 2008 20:43:24 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/2008/04/03/aahistaa-aahistaa-nazadiikiyaan-badhhane-lagiin-2/</guid>
<description><![CDATA[आहिस्ता-आहिस्ता नज़दीकियाँ बढ़ने लगीं]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">आहिस्ता-आहिस्ता नज़दीकियाँ बढ़ने लगीं<br />
आहिस्ता-आहिस्ता तुमसे राहें जुड़ने लगीं<br />
आहिस्ता-आहिस्ता तुमसे प्यार हो गया<br />
आहिस्ता-आहिस्ता दोनों निगाहें लड़ने लगीं</span></p>
<p><span style="color:#000000;">तुमसे कहना था संग तेरे जीना है मुझको<br />
प्यार को तुम्हारी आँखों से पीना है मुझको<br />
ज़िन्दगी क्या है तुमसे मिलके जाना मैंने<br />
सिवा तुम्हारे दिल के' चैन कहीं न है मुझको</span></p>
<p><span style="color:#000000;">वह पहली नज़र और वह दिलकश समाँ<br />
वह हुस्नो-अदा और वह मौसम ख़ुशनुमा<br />
बदला-बदला है सब कुछ आज भी यहाँ<br />
यह दिल, यह धड़कन, यह नीला आसमाँ</span></p>
<p><span style="color:#000000;">तुमने दिल लेकर मेरा क्यों न अपना दिया<br />
हाँ मेरी ज़िन्दगी को इक नया सपना दिया<br />
तेरी चाहत सनम मेरी क़िस्मत बन गयी<br />
जो आशिक़ तुमने मुझको अपना बना दिया</span></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[कोई तो तुम्हें पाने की राह मिले]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=951</link>
<pubDate>Fri, 28 Mar 2008 17:47:23 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=951</guid>
<description><![CDATA[कोई तो तुम्हें पाने की राह मिले
कभी ते]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">कोई तो तुम्हें पाने की राह मिले<br />
कभी तेरे आगोश में पनाह मिले<br />
मैं शज़रे-धूप की छाँव में बैठा हूँ<br />
कभी तो इनायते-निगाह मिले</font></p>
<p><font color="#000000">तुम हाथ तो बढ़ा दो मेरे मसीहा<br />
ज़ख़्मों पे रख दो मरहम का फीहा<br />
बेबसी में मेरा दम घुटने लगा है<br />
फिर से सौंधी हुई सुबह मिले</font></p>
<p><font color="#000000">रुख़े-ख़ुशी मेरी तरफ़ मोड़ दो<br />
मेरे दर्द का हर तागा तोड़ दो<br />
एक ही ख़ाहिश है मेरी बरसों से<br />
तेरे दिल में मुझे जगह मिले</font></p>
<p><font color="#000000">मैं अपनी कोशिशों में रहूँ क़ाबिल<br />
इस दरिया को मिले तेरा साहिल<br />
तुम्हीं से ज़िन्दगी को मानी मिला है<br />
काश कि तेरी-मेरी हर राह मिले</font></p>
<p><font color="#000000">मुश्किलें सब यह आसाँ हो जायें<br />
जो हम दो जिस्म एक जाँ हो जायें<br />
लम्हों में सदियाँ तय कर चुका हूँ<br />
तेरा-मेरा दिल किसी तरह मिले</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[आँखों में आँसू नहीं आते]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=945</link>
<pubDate>Fri, 21 Mar 2008 09:52:02 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=945</guid>
<description><![CDATA[आँखों में आँसू नहीं आते
क्योंकि मैं जा]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">आँखों में आँसू नहीं आते<br />
क्योंकि मैं जानता हूँ<br />
तुम लौटकर आओगी ज़रूर<br />
यह दिल तन्हा कहाँ है<br />
इसमें यादें हैं तुम्हारी<br />
तुम रहो कितने भी दूर</font></p>
<p><font color="#000000">देखता हूँ तुम्हें<br />
जब भी आँखें मूँद लेता हूँ<br />
और कोई कहाँ है इनमें हुज़ूर<br />
तुमसे प्यार किया है<br />
यह दिल का सौदा है तुम्हीं से<br />
क्यों न रहूँ थोड़ा मग़रूर</font></p>
<p><font color="#000000">पास आने के दिन आ गये<br />
धड़कनों में बेक़रारी है<br />
दिल में सुरूर ही सुरूर<br />
वादियों में चले मौसम हरे<br />
डालियों पर फूल गुलाबी हैं<br />
निगाह में भर गया है नूर</font></p>
<p><font color="#000000">जादू-सा है फ़िज़ाओं में<br />
खिल रहे हैं ख़्याल हर-सू<br />
क्यों न आये तुम्हारा मज़कूर<br />
दिल बहलता नहीं बातों से<br />
यह कैसा सिलसिला है<br />
चैन आये गर आये वह हूर</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[तुम न समझोगे]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=909</link>
<pubDate>Thu, 13 Mar 2008 06:10:04 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=909</guid>
<description><![CDATA[बिन तुम्हारे मैं क्या हूँ तुम न समझोगे]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">बिन तुम्हारे मैं क्या हूँ तुम न समझोगे<br />
आप तन्हाई की सदा हूँ तुम न समझोगे</font></p>
<p><font color="#000000">तुम्हारे ग़मे-इश्क़ में जो चाँद पिरोता रहा<br />
मैं साँस का वो टुकड़ा हूँ तुम न समझोगे</font></p>
<p><font color="#000000">तुम्हारे दिल में जो हर लम्हा बहता है<br />
मैं लहू का वही क़तरा हूँ तुम न समझोगे</font></p>
<p><font color="#000000">तुमने जिसे बेकार समझकर फाड़ दिया<br />
मैं उसी ख़त का टुकड़ा हूँ तुम न समझोगे</font></p>
<p><font color="#000000">जब निगाहे-'नज़र' बेक़रार हो चली है<br />
मैं किस मोड़ पे आ गया हूँ तुम न समझोगे</font></p>
<p><font color="#000000">पुराना एक ख़तो-लिफ़ाफ़ा जलाकार आया<br />
'विनय' अब तुम्हारा हूँ तुम न समझोगे</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[यह कैसा लम्हा है]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=881</link>
<pubDate>Thu, 06 Mar 2008 10:28:36 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=881</guid>
<description><![CDATA[यह कैसा लम्हा है
यह कैसा एहसास है
तू पल]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">यह कैसा लम्हा है<br />
यह कैसा एहसास है<br />
तू पलकों में क़ैद है<br />
दिल के पास है</font></p>
<p><font color="#000000">क्या देखूँ तेरे सिवा<br />
क्या चाहूँ तेरे सिवा<br />
मेरे दर्दे-दिल की<br />
तू ही तो है दवा</font></p>
<p><font color="#000000">खिलते हुए लम्हे सब<br />
खिल गये हैं अब<br />
मैं तुझको महसूस करूँ<br />
साँस लूँ जब</font></p>
<p><font color="#000000">आज जो देखा तुझे<br />
याद आया मुझे<br />
लोग दीवाना क्यों<br />
कहते है मुझे</font></p>
<p><font color="#000000">जब निगाहों ने छुआ<br />
यह एहसास हुआ<br />
तूने भी मुझको सनम<br />
प्यार है किया</font></p>
<p><font color="#000000">दुनिया बदल गयी है<br />
तू मुझे मिल गयी है<br />
ज़िन्दगी मेरी इक हसीन<br />
शाम हो गयी है</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[मुझको यूँ प्यार कैसे हो गया]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=862</link>
<pubDate>Thu, 28 Feb 2008 17:16:59 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=862</guid>
<description><![CDATA[मुझको यूँ प्यार कैसे हो गया
उफ़! यह दिल स]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">मुझको यूँ प्यार कैसे हो गया<br />
उफ़! यह दिल सौदाई हो गया<br />
मुझको कुछ पता ही न चला<br />
इक दम में यह सब हो गया</font></p>
<p><font color="#000000">रोज़ तेरे ख़्यालों में डूबा रहा<br />
शब तेरे ख़ाब में मैं खो गया<br />
जिस शै पर मैंने निगाह की<br />
वह हर शै तेरा चेहरा हो गया</font></p>
<p><font color="#000000">दर्द की तस्कीं थोड़ी अजीब है<br />
तू मुदाम मेरे दिल के क़रीब है<br />
उसपे ये जुनूँ भी मेरा हरीफ़ है<br />
बुत की अदा पे दिल आ गया</font></p>
<p><font color="#000000">मुझको यूँ प्यार कैसे हो गया<br />
उफ़! यह दिल सौदाई हो गया</font></p>
<p><font color="#000000">ख़ुद से बयानबाज़ी करते रहे<br />
हम तो यारों ख़ुद से लड़ते रहे<br />
दिल पे ज़रा भी ज़ोर न चला<br />
बराबर उसके आस्ताँ को गया</font></p>
<p><font color="#000000">मुझको यूँ प्यार कैसे हो गया<br />
उफ़! यह दिल सौदाई हो गया<br />
मुझको कुछ पता ही न चला<br />
इक दम में यह सब हो गया</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १३ मई २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[ख़ामोश निगाह तेरी]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=850</link>
<pubDate>Tue, 26 Feb 2008 17:00:42 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=850</guid>
<description><![CDATA[ख़ामोश निगाह तेरी
क्या बातें करती है
आ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">ख़ामोश निगाह तेरी<br />
क्या बातें करती है<br />
आँखों में रहती है<br />
व नींदों में बहती है</font></p>
<p><font color="#000000">दिल की बात करें क्या<br />
एक सपने का बंजारा है<br />
भटक रहा है सदियों से<br />
तेरे प्यार का मारा है</font></p>
<p><font color="#000000">ख़ामोश निगाह तेरी<br />
क्या बातें करती है...</font></p>
<p><font color="#000000">नाम लिया है तुमने<br />
किसका अनजाने में<br />
जान छलक उठी है<br />
मेरे दिल के पैमाने में</font></p>
<p><font color="#000000">ख़ामोश निगाह तेरी<br />
क्या बातें करती है...</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[तेरी चुप निगाहें]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=806</link>
<pubDate>Mon, 18 Feb 2008 16:03:34 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=806</guid>
<description><![CDATA[तेरी चुप निगाहें व शर्मायी नज़रें
तेरे ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">तेरी चुप निगाहें व शर्मायी नज़रें<br />
तेरे प्यार का तोहफ़ा हैं, मेरे लिए<br />
एक बार तो कुछ कह दे सनम<br />
तू एक बार तो हाँ कर दे मुझसे<br />
ज़िन्दगी एक झमेला है मेरे लिए</font></p>
<p><font color="#000000">तेरी मुस्कुराहटें तेरी सादी अदाएँ<br />
तेरे प्यार का तोहफ़ा हैं मेरे लिए<br />
परियों से भी कहीं ज़्यादा हसीं<br />
खिलती कलियों-सी तू माहजबीं<br />
ख़ुदा ने तुझे बनाया है मेरे लिए</font></p>
<p><font color="#000000">तेरे सारे शिकवे वह सभी यादें<br />
तेरे प्यार का तोहफ़ा हैं मेरे लिए<br />
मुझे तेरा इन्तिज़ार था बरसों से<br />
हम एक-दूजे के बने जनमों से<br />
तुमने जनम लिया है मेरे लिए</font></p>
<p><font color="#000000">आँखों में माहताब-सा चमकता है<br />
तेरा चेहरा, तेरा चेहरा, तेरा चेहरा<br />
मैं सहराँ-सहराँ भटकता हूँ तेरे लिए<br />
तू एक बार तो हाँ कर दे मुझसे<br />
ज़िन्दगी एक झमेला है मेरे लिए</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[जीज़स से पूछेंगे तुमको बनाया कैसे]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=803</link>
<pubDate>Mon, 18 Feb 2008 13:34:57 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=803</guid>
<description><![CDATA[जीज़स से पूछेंगे तुमको बनाया कैसे
कम्प]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">जीज़स से पूछेंगे तुमको बनाया कैसे<br />
कम्प्यूटर से रचा या बनाया हाथ से<br />
कुछ न कुछ बात तो सभी में थी<br />
पर हसीना तेरी कुछ और ही बात है</font></p>
<p><font color="#000000">ख़ुदाया यह कितना हसीन इत्तिफ़ाक़ है<br />
तेरे जैसी ख़ूब-रू हसीना मेरे साथ है<br />
गोरा-गोरा रंग तेरा क़ातिल हैं निगाहें<br />
जबसे देखा तुझे चाहा थामूँ तेरी बाँहें</font></p>
<p><font color="#000000">जीज़स से पूछेंगे तुमको बनाया कैसे<br />
कम्प्यूटर से रचा या बनाया हाथ से</font></p>
<p><font color="#000000">रूप तुम्हारा ऐसा हम फ़िदा हो गये<br />
जबसे देखा तुम्हें हम दिलरुबा खो गये<br />
सुर्ख़-गीले होंठ तेरे, जैसे गुलाब खिले<br />
दिल गया मेरा काम से तुम ऐसे मिले</font></p>
<p><font color="#000000">जीज़स से पूछेंगे तुमको बनाया कैसे<br />
कम्प्यूटर से रचा या बनाया हाथ से</font></p>
<p><font color="#000000">सुन नौ-जवाँ प्यार का इश्क़ नाम है<br />
डूबें तुझमें हमें और क्या काम है<br />
ख़ुदा ने नवाज़ा तुझे बेपनाह हुस्न से<br />
कैसे न हम तेरा हर पल दीदार करें</font></p>
<p><font color="#000000">जीज़स से पूछेंगे तुमको बनाया कैसे<br />
कम्प्यूटर से रचा या बनाया हाथ से</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[यह दिल क्यूँ किसी का होना चाहे]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=794</link>
<pubDate>Sun, 17 Feb 2008 10:52:29 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=794</guid>
<description><![CDATA[यह दिल क्यूँ किसी का होना चाहे
जाये जा]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">यह दिल क्यूँ किसी का होना चाहे<br />
जाये जाँ, जाये क्यों न जान ही<br />
मगर यह दिल किसी का होना चाहे</font></p>
<p><font color="#000000">जबसे मेरी उनसे नज़र मिली है<br />
दिल को जैसे नयी मंज़िल मिली है<br />
पहली बारिश में दिल भीगना चाहे</font></p>
<p><font color="#000000">यह दिल क्यूँ किसी का होना चाहे<br />
जाये जाँ, जाये क्यों न जान ही<br />
मगर यह दिल किसी का होना चाहे</font></p>
<p><font color="#000000">देखते रहना जी भरकर देखते रहना<br />
जायें न जब तक उन्हें ताकते रहना<br />
डूबना निगाहों में उनकी मेरा डूबना</font></p>
<p><font color="#000000">चाहना उनको मौत आने तक चाहना<br />
मौसम खिल जाये रंग जब घुल जाये<br />
इन रंगों में दिल मेरा घुलना चाहे</font></p>
<p><font color="#000000">यह दिल क्यूँ किसी का होना चाहे<br />
जाये जाँ, जाये क्यों न जान ही<br />
मगर यह दिल किसी का होना चाहे</font></p>
<p><font color="#000000"></font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[तेरी अदाओं पर मैं फ़िदा]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=787</link>
<pubDate>Sat, 16 Feb 2008 05:48:36 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=787</guid>
<description><![CDATA[साहिबा, साहिबा, साहिबा
तेरी अदाओं पर म]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">साहिबा, साहिबा, साहिबा<br />
तेरी अदाओं पर मैं फ़िदा<br />
साहिबा, साहिबा, साहिबा</font></p>
<p><font color="#000000">तू मेरे प्यार की सुबह<br />
तुझको ढूँढ़ती मेरी निगाह<br />
क़ातिलाना तेरी हर अदा<br />
मार न डाले कहीं दिलरुबा</font></p>
<p><font color="#000000">साहिबा, साहिबा, साहिबा<br />
साहिबा, साहिबा, साहिबा</font></p>
<p><font color="#000000">जवानी के जोश में जवाँ<br />
हो न जाये कोई ख़ता<br />
वाक़िफ़ नहीं तू मेरे इश्क़ से<br />
हमनज़र बचके जायेगी कहाँ</font></p>
<p><font color="#000000">साहिबा, साहिबा, साहिबा<br />
साहिबा, साहिबा, साहिबा</font></p>
<p><font color="#000000">तू जान है मेरे जिस्म की<br />
कैसे रहेगी मुझसे जुदा<br />
देख हाल मेरा बेहाल है<br />
दूर कैसे तू मेरी जाने-वफ़ा</font></p>
<p><font color="#000000">साहिबा, साहिबा, साहिबा<br />
साहिबा, साहिबा, साहिबा</font></p>
<p><font color="#000000">उड़ती-उड़ती तू चली कहाँ<br />
तू पतंग है मेरी मैं हवा<br />
तू किस सोच में डूबी है<br />
सुन तो बात मेरी ज़रा</font></p>
<p><font color="#000000">साहिबा, साहिबा, साहिबा<br />
साहिबा, साहिबा, साहिबा</font></p>
<p><font color="#000000">हसीना तुझको देखकर<br />
हवाओं में कैसा शोर मचा<br />
रुबा से दिलरुबा बनाया<br />
देख तू न होना कभी ख़फ़ा</font></p>
<p><font color="#000000">साहिबा, साहिबा, साहिबा<br />
साहिबा, साहिबा, साहिबा</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[आज वह हर शख़्स मुझे बेग़ाना लगता है]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/12/28/%e0%a4%b5%e0%a4%b9-%e0%a4%b9%e0%a4%b0-%e0%a4%b6%e0%a4%96%e0%a4%bc%e0%a5%8d%e0%a4%b8-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%9d%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a5%87%e0%a5%9a%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%b2%e0%a4%97/</link>
<pubDate>Fri, 28 Dec 2007 14:41:21 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
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<description><![CDATA[आज वह हर शख़्स मुझे बेग़ाना लगता है
कल त]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">आज वह हर शख़्स मुझे बेग़ाना लगता है<br />
कल तक जिसके लिए दिल दिवाना लगता है</font></p>
<p><font color="#000000">निगाहों में हैं सारे अंदाज़ आज भी वही<br />
मगर ख़ामोशी में नया अफ़साना लगता है</font></p>
<p><font color="#000000">हो मशरूफ़ वह अपने कामों में क्या पता<br />
बड़ा ख़राब उसका नज़रें चुराना लगता है</font></p>
<p><font color="#000000">न कुछ कहता है वह न कुछ करता है<br />
दूर-दूर रहता है मुझसे रोज़ाना लगता है</font></p>
<p><font color="#000000">वह कल तक सलाम 'विनय' को करता था<br />
आज उसको मुश्किल मुस्कुराना लगता है</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[वह तेरी पहली नज़र का निशाना याद है]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/12/28/%e0%a4%b5%e0%a4%b9-%e0%a4%a4%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a4%b9%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%a8%e0%a5%9b%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%be/</link>
<pubDate>Fri, 28 Dec 2007 14:24:47 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
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<description><![CDATA[वह तेरी पहली नज़र का निशाना याद है
हमको ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">वह तेरी पहली नज़र का निशाना याद है<br />
हमको आज भी तुमसे दिल का लगाना याद है</font></p>
<p><font color="#000000">दोस्तों में कहते थे किसी से प्यार हमें<br />
वह पूछें अगर तो नाम तेरा छुपाना याद है</font></p>
<p><font color="#000000">गरचे तुमने कभी हमको अपना न कहा<br />
मगर तुमसे मिलने का झूठा बहाना याद है</font></p>
<p><font color="#000000">सबब वह जिससे धड़कनें तेज़ हो जाएँ थीं<br />
वह इसी दरवाज़े से तेरा आना-जाना याद है</font></p>
<p><font color="#000000">कुछ कहकर फिर चुप हो जाना यकायक<br />
निगाहें फेर के हमको तेरा उकसाना याद है</font></p>
<p><font color="#000000">न कह पाये हम कभी कि प्यार है तुमसे<br />
पर इज़हार के लिए हौसला जुटाना याद है</font></p>
<p><font color="#000000">किस पल तुम छोड़कर गये मालूम न हुआ<br />
हमको आज भी ज़िन्दगी का अफ़साना याद है</font></p>
<p><font color="#000000">तेरे इन्तिज़ार में जो न कटा एक लम्हा<br />
हमको उस लम्हें का क़िस्सा पुराना याद है</font></p>
<p><font color="#000000">हमको उनका जादू खैंचता रहा बार-बार<br />
तेरी आँखों का सितारों जैसा झिलमिलाना याद है</font></p>
<p><font color="#000000">जब भी कोई पूछता था कैसी दिखती हो तुम<br />
वह सभी से चाँद को तेरे जैसा बताना याद है</font></p>
<p>गरचे= although, सबब= reason</p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[दोस्त, माफ़ कर देना मुझे]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/09/15/%e0%a4%a6%e0%a5%8b%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a5%9e-%e0%a4%95%e0%a4%b0-%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%9d%e0%a5%87/</link>
<pubDate>Sat, 15 Sep 2007 20:20:11 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/09/15/%e0%a4%a6%e0%a5%8b%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a5%9e-%e0%a4%95%e0%a4%b0-%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%9d%e0%a5%87/</guid>
<description><![CDATA[तुमने पुकारा था जब
मैंने सुना तो था
मग]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">तुमने पुकारा था जब<br />
मैंने सुना तो था<br />
मगर मेरा ग़ुरूर<br />
मेरे ज़हन पे यूँ चढ़के बैठा था<br />
कि मैंने देखा भी न तेरे जानिब</font></p>
<p><font color="#000000">जाने किस मशक़्कत में<br />
रहा होगा तेरा दिमाग़<br />
जाने तुमने क्या-क्या न सोचा होगा<br />
दुबारा जब तुमने<br />
निगाह चुराके देखा था<br />
उस वक़्त भी तो मैं<br />
ग़ुरूर को आगोश में लिए गुज़रा था</font></p>
<p><font color="#000000">वक़्त की नब्ज़ तो<br />
बहुत भारी लग रही थी<br />
उस पहर मुझे...<br />
जाने किस ख़्याल को<br />
बाँहों में भरकर<br />
तुम घर जा रहे थे</font></p>
<p><font color="#000000">पहुँचा तो था मैं<br />
मगर देर से पहुँचा था<br />
वो दिन का चाँद<br />
मेरी हथेली से फिसल चुका था,<br />
जा चुका था...</font></p>
<p><font color="#000000">"कल फिर मिलना होगा<br />
कल फिर नये बहाने होंगे<br />
कोई इशारा बयाँ होगा<br />
लफ़्ज़ तुम्हें नये बनाने होंगे"</font></p>
<p><font color="#000000">दोस्त, माफ़ कर देना मुझे<br />
जो ज़रा भी ग़ुबार हो मन में...</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००२</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[अनिग्मा [Enigma]]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/09/15/%e0%a4%85%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%be-enigma/</link>
<pubDate>Sat, 15 Sep 2007 15:29:41 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/09/15/%e0%a4%85%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%be-enigma/</guid>
<description><![CDATA[वो क्यों देखता है मुझे?
उसे क्या चाहिए ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">वो क्यों देखता है मुझे?<br />
उसे क्या चाहिए मुझसे?<br />
न रब्त कोई रखा मैंने उससे<br />
न ही उसने मुझसे<br />
फिर क्यों देखता है वो -<br />
बार-बार दूर से ही मुझे</font></p>
<p><font color="#000000">पास आता है तो<br />
नज़रें फिरने लगती हैं उसकी<br />
झुकने लगती हैं,<br />
क्या चाहता है मुझसे?<br />
क्या ढूँढ़ता है मुझमें?</font></p>
<p><font color="#000000">बेवज़ह यह सिलसिले होते नहीं<br />
बार-बार किसी को निगाह में पिरोते नहीं<br />
वो क्यों देखता है मुझे?<br />
उसे क्या चाहिए मुझसे?</font></p>
<p><font color="#000000">वो तन्हा तो नहीं<br />
उसका मुझसे कोई रिश्ता तो नहीं<br />
बात क्या आख़िर कहे ना<br />
या कहलवा ही दे किसी से<br />
वो क्यों देखता है मुझे?<br />
उसे क्या चाहिए मुझसे?</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[मरासिम लफ़्ज़ों से नहीं होते]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/09/15/%e0%a4%ae%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%ae-%e0%a4%b2%e0%a5%9e%e0%a5%8d%e0%a5%9b%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%a8%e0%a4%b9%e0%a5%80%e0%a4%82-%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%a4/</link>
<pubDate>Sat, 15 Sep 2007 14:33:55 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/09/15/%e0%a4%ae%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%ae-%e0%a4%b2%e0%a5%9e%e0%a5%8d%e0%a5%9b%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%a8%e0%a4%b9%e0%a5%80%e0%a4%82-%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%a4/</guid>
<description><![CDATA[बारिश, बूँदें, पत्ते, मिट्टी -सौंधी
रात,]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">बारिश, बूँदें, पत्ते, मिट्टी -सौंधी<br />
रात, चाँद, तारे, निगाह -मेरी</font></p>
<p><font color="#000000">मरासिम लफ़्ज़ों से नहीं होते<br />
एहसास से होते हैं,<br />
अश्क जो आँखों में उतर आयें<br />
फिर पलकें भिगोते हैं...</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[जब बात करते हुए देखता हूँ]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/08/27/%e0%a4%9c%e0%a4%ac-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a5%87-%e0%a4%b9%e0%a5%81%e0%a4%8f-%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%96%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%82%e0%a4%81/</link>
<pubDate>Mon, 27 Aug 2007 21:31:01 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/08/27/%e0%a4%9c%e0%a4%ac-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a5%87-%e0%a4%b9%e0%a5%81%e0%a4%8f-%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%96%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%82%e0%a4%81/</guid>
<description><![CDATA[तमन्ना बेताब रहती है
और खा़हिश परेशाँ
]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">तमन्ना बेताब रहती है<br />
और खा़हिश परेशाँ<br />
उदास आईने-<br />
खु़द-ब-खु़द टूटते रहते हैं<br />
राह चलती रहती है<br />
पाँव थक जाते हैं<br />
उम्र कम होती रहती है<br />
साल बढ़ते रहते हैं</span></p>
<p><span style="color:#000000;">रात जागती है आँखों में<br />
दिन वीरान उजाड़ गुज़रता है<br />
उँगलियों में उँगलियों से<br />
और निगाहों को बदन से<br />
जब बात करते हुए देखता हूँ<br />
तेरी याद खा़मोश रह जाती है<br />
कुछ सुलगता रहता है सीने में</span></p>
<p><span style="color:#000000;">तन्हाई का साया न टलता है<br />
दिल की ख़ला न घटती है<br />
अरमान सूखे हुए पत्तों की तरह<br />
ज़मीन पर पडे़ रहते हैं<br />
आँसुओं में भीगते-भीगते<br />
ज़मीन में जज़्ब हो जाते हैं<br />
दफ़्न हो जाते हैं</span></p>
<p><span style="color:#000000;">दिल के टूटने से<br />
फ़र्क साँस लेने लग जाता है<br />
फ़ज़ा तो नहीं बदलती<br />
लेकिन उसकी छुअन<br />
और एहसास के ज़ख़्म हरे हो जाते हैं<br />
लम्हा-लम्हा मन ग़म में डूबता जाता है<br />
और गीला-गीला जलता रहता है<br />
</span> </p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति 'नज़र'</p>
]]></content:encoded>
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