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	<title>निवेश &amp;laquo; WordPress.com Tag Feed</title>
	<link>http://wordpress.com/tag/निवेश/</link>
	<description>Feed of posts on WordPress.com tagged "निवेश"</description>
	<pubDate>Sat, 06 Sep 2008 02:52:41 +0000</pubDate>

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	<language>en</language>

<item>
<title><![CDATA[सेंसैक्स में शामिल शेयर]]></title>
<link>http://poonji.wordpress.com/2007/08/18/sensex/</link>
<pubDate>Sat, 18 Aug 2007 13:11:11 +0000</pubDate>
<dc:creator>जगदीश भाटिया</dc:creator>
<guid>http://poonji.wordpress.com/2007/08/18/sensex/</guid>
<description><![CDATA[आज दिवाकर प्रताप सिंह ने पूछा:
 मुम्बई ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font size="3">आज <a target="_blank" href="http://poonji.wordpress.com/2006/08/04/aaiyejaanesharebazarko/#comments">दिवाकर प्रताप सिंह </a>ने पूछा:</font><font size="3"></p>
<blockquote><p> मुम्बई स्टाक एक्सचेंज का संवेदी सूचकांक जिसे संक्षेप में सेंसैक्स कहा जाता है, जो वहां के सर्वोच्च 30 शेयरों पर आधारित है। उन 30 शेयरों के नाम क्या है ?</p></blockquote>
<p>तो यह है सैंसेक्स में शामिल शेयरों की सूची:</p>
<p>१. ए सी सी</p>
<p>२. बजाज आटो</p>
<p>३ . भारती टेलिवेंचर</p>
<p>४. भेल</p>
<p>५. सिप्ला लिमिटेड</p>
<p>६. डाक्टर रेडी लैब</p>
<p>७. ग्रासिम लिमिटेड</p>
<p>८. गुजरात अंबुजा सीमेंट</p>
<p>९. एच डी एफ सी</p>
<p>१०. एच डी एफ सी बैंक</p>
<p>११. हिंडेलको</p>
<p>१२. हिंदुस्तान लिवर</p>
<p>१३.आइसीआइसीआइ बैंक</p>
<p>१४. इन्फोसिस टैक्नोलोजी</p>
<p>१५. आईटीसी लिमिटेड</p>
<p>१६. लार्सन एंड टुर्बो</p>
<p>१७. महिंद्रा एंड महिंद्रा</p>
<p>१८. मारुति उद्योग</p>
<p>१९. नैशनल थर्मल पावर</p>
<p>२०. ओएनजीसी</p>
<p>२१. रैन्बैक्सी लैब</p>
<p>२२. रिलांयस</p>
<p>२३. रिलांयस काम्युनिकेशन्स</p>
<p>२४. रिलांयस एनेर्जी</p>
<p>२५. सत्यम कंप्यूटर्स</p>
<p>२६. स्टेट बैंक आफ इंडिया</p>
<p>२७. टाटा कंसलटैंसी</p>
<p>२८. टाटा मोटर्स</p>
<p>२९. टाटा स्टील</p>
<p>३०. विप्रो</p>
<p>स्रोत <a href="http://www.bseindia.com/mktlive/indiceswatch_scrip.asp?iname=BSE30&#38;sensid=30&#38;type=sens&#38;total=18464896061&#38;dateheader=Thursday%2C+February+15%2C+2007">बीएसई</a></p>
<p>यहां आपको यह बता दें कि यह सूची समय समय पर बदलती रहती है तथा बीएसई आवश्यक्ता के अनुसार इस सूची में बदलाव करता रह्ता है मगर सूचकांक में कुल शेयरों की संख्या तीस ही रहती है।</p>
<p></font></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[कैसे बढ़ती शेयर मार्किट कर रही है गरीब के आटा और दाल महंगे]]></title>
<link>http://aaina2.wordpress.com/2007/06/02/inflation-and-share-market/</link>
<pubDate>Sat, 02 Jun 2007 13:14:31 +0000</pubDate>
<dc:creator>जगदीश भाटिया</dc:creator>
<guid>http://aaina2.wordpress.com/2007/06/02/inflation-and-share-market/</guid>
<description><![CDATA[एक ओर जहां शेयर बाजार के जानकार यहां न]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font size="3">एक ओर जहां शेयर बाजार के जानकार यहां निवेश करके मालामाल हो रहे हैं वहीं बेचारा आम आदमी जिसका इस शेयर बाजार से कुछ लेना देना नहीं है और जो कि अपनी दो जून की रोटी मुशकिलों से जुगाड़ पाता है उस पर इस सब का उल्टा असर हो रहा है और उस गरीब को अपने रोज के आटा दाल के लिये अधिक कीमतें देनी पड़ रही हैं। इस सब की वजह यह है कि अर्थव्यवस्था में बढ़ते मुद्रा विस्तार का प्रबंधन सरकार ठीक से नहीं कर पा रही है और साथ ही सराकार तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था में किसानों को (जो की देश की आबादी का साठ प्रतिशत हैं) शामिल नहीं कर पायी है। कृषी के विकास की निचली दर का सीधा असर खाद्य पदार्थों की पूर्ती पर पड़ा है जिससे खाद्य पदार्थों की कीमतों में बेतहाशा वृद्धी हुई है। गरीब अपनी आय का आधा खर्च अपने खान पान पर करता है जबकी अमीर अपनी आय का दस प्रतिशत से भी कम अपने खान पान पर खर्च करता है, इससे आप समझ सकते हैं कि बढ़ती महंगाई किस पर ज्यादा असर दिखाती है।</font><font size="3">यह सब कैसे होता है इसे समझने के लिये आईये देसी तथा विदेशी निवेश, मुद्रा के विस्तार, ब्याज की दर और मंहगाई के आपस में रिश्ते को जरा आसान भाषा में समझने की कोशिश करते हैं। जब अर्थव्यवस्था का विकास तेजी से होता है तो अर्थव्यवस्था में मुद्रा का विस्तार भी होने लगता है क्योंकि अर्थव्यवस्था का विस्तार होता है उद्योगों, <img align="left" src="http://aaina2.files.wordpress.com/2007/06/graph120.png" alt="graph120.png" />सेवाओं, नौकरियों और उत्पादों में विस्तार से। इस विस्तार से लोगों को अधिक धन मिलता है जो कि मांग को बढ़ाता है और फिर पूर्ती बढ़ाने के लिये और विस्तार होता है। इस विस्तार में सहयोगी होते है निवेश और ऋण। यहां ध्यान दें कि यह निवेश और ऋण देसी और विदेशी दोनो तरह के हो सकते हैं। इस सब के कारण अर्थव्यवस्था में जयादा लिक्विडिटी(तरलता) आ जाती है यानी मुद्रा का विस्तार अर्थात मुद्रास्फीति। लोगों के हाथ में ज्यादा पैसा अर्थात ज्यादा उत्पादों और सेवाओं की मांग। अब जब इस मांग के बराबर पूर्ती नहीं हो पाती है और बाकी सारे घटक नहीं बदलते हैं तो मंहगाई बढ़ती है। इस महंगाई की बढ़ती दर को रोकने के लिये हाल ही में सरकार नें <a href="http://www.moneycontrol.com/india/news/market-outlook/further-rate-hikes-by-rbi-not-ruled-out-experts/284582">CRR की दरें बढ़ाईं</a>। CRR यानी कैश रिजर्व रेशो, बैंकों को प्राप्त जमाओं का वह हिस्सा होता है जिसे बैंक, रिजर्व बैंक के पास रखते हैं। मान लीजिये यदि CRR की दर 7 % है और बैंको के पास 100 रुपये जमा हैं तो वे केवल 93 रु का ऋण ही दे पायेंगे। इस प्रकार सरकार मुद्रा के प्रसार में कमी करके अर्थव्यवस्था में मांग की कमी करती है। जब बैंकों के पास ऋण देने के लिये कम पैसा होगा तो बैंक ऋण पर ब्याज की दरें बढा देंगे और साथ ही बचत पर भी ब्याज की दरें बढ़ा देंगे। (जैसा की अभी हाल ही में दो बार हुआ।) इससे मंहगाई पर तो तत्कालीन असर हो जाता है मगर दीर्ध अवधी में मंहगे ऋणों के कारण उद्योगों के विस्तार पर असर पड़ता है जो कि अर्थव्यवस्था की तेजी को धीमा कर देता है।</font></p>
<p><font size="3">इसके अलावा विदेशों से अप्रवासियों तथा विदेशी संस्थानों द्वारा तेजी से बढ़ते निवेश का प्रबंधन भी रिजर्व बैंक को करना होता है क्योंकि अर्थव्यवस्था की तेजी के कारण इन विदेशी निवेशों में बेतहाशा वृद्धी हुई है। विदेशी निवेश अपने साथ विदेशी मुद्रा ले कर आते हैं। रिजर्व बैंक विदेशी मुद्रा को रुपयों के बदले खरीदता है जिससे और अधिक मुद्रा का विस्तार होता है। पिछले दो बार में CRR की बढ़ोत्तरी से जो मुद्रा के विस्तार में कमी की गयी उसका असर विदेशों से आते निवेश तथा ऋणों ने समाप्त कर दिया। जहां 0.5% की CRR दर में वृद्धी ने अर्थव्यवस्था से14000 करोड़ रु की मुद्रा को कम किया वहीं इस वर्ष के पहले चार महीनों में अर्थव्यवस्था में लगभग 46000 करोड़ रुपये विदेशी मुद्रा के रूप में आ गये। इसका असर यह हुआ कि रिजर्व बैंक ने विदेशी मुद्रा की खरीद में कमी कर दी <a href="http://www.hinduonnet.com/fline/stories/20070601001604500.htm">जिससे रुपया मजबूत होने</a> लगा। रुपये की कम समय में इतनी मजबूती निर्यातकों के लिये तो मारक होती ही है, सस्ते आयात घरेलू उद्योगों पर भी बुरा असर डालते हैं।</font></p>
<p><font size="3">आप यह जान कर हैरान न हों कि अब अर्थशास्त्र के ज्ञाता भी इस अर्थव्यवस्था की <a href="http://www.blonnet.com/2007/02/21/stories/2007022100050800.htm">इस तेजी से डरने लगे</a> हैं। जहां चीन कई वर्षों से लगातार 10% से अधिक की विकास दर होने पर भी मुद्रास्फीती को 2-2.5% के आसपास रखने में कामयाब रहा है वहीं खराब मुद्रा प्रबंधन के कारण हम 9.4% के विकास पर ही हांफने लगे हैं।</font></p>
<p><strong>भारतीय अर्थव्यवस्था और विकास पर अन्य लेख</strong><br />
<a href="http://aaina2.wordpress.com/2006/12/04/yahbhivikas/">यह भी रंग विकास के</a><br />
<a href="http://aaina2.wordpress.com/2006/12/01/gdp/">आम आदमी के साथ….?</a><br />
<a href="http://aaina2.wordpress.com/2006/11/28/vikas/">विकास के यह रंग</a><br />
<a href="http://aaina2.wordpress.com/2006/12/29/2007/">वर्ष 2007 होगा भारत का</a><br />
<a href="http://aaina2.wordpress.com/2007/01/10/india/">यह भी है हमारा भारत</a><br />
<a href="http://aaina2.wordpress.com/2007/01/09/economicreforms/">15 वर्षों के आर्थिक सुधार- कितने मोबाईल</a><br />
<a href="http://aaina2.wordpress.com/2007/01/14/budget/">हट सकती है करों में छूट</a><br />
<a href="http://aaina2.wordpress.com/2007/01/27/budget-2/">जहां आम आदमी देते हैं टैक्स और अमीर बच कर निकलते हैं</a></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[कैसा हो आपका बीमा एजेंट]]></title>
<link>http://poonji.wordpress.com/2007/04/29/how-to-select-insurance-agent/</link>
<pubDate>Sun, 29 Apr 2007 08:09:02 +0000</pubDate>
<dc:creator>जगदीश भाटिया</dc:creator>
<guid>http://poonji.wordpress.com/2007/04/29/how-to-select-insurance-agent/</guid>
<description><![CDATA[पिछली बार जब मैंने एक लेख लिख कर LIC के कु]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font size="3">पिछली बार जब मैंने एक लेख लिख कर LIC के कुछ एजेंटों द्वारा की जा रही <a href="http://poonji.wordpress.com/2007/03/02/lifeinsurance/">बदमाशी के बारे में चेताया था</a> तो वादा किया था कि आपको बताऊंगा कि किस तरह से अपना बीमा एजेंट चुनें। आज आपको इसी के बारे में बताता हूं। किसी भी नये बीमा एजेंट के साथ कोई निवेश करने से पहले उसके बारे में निम्न बातों का पता लगायें :</font></p>
<p><font size="3"><strong>1. क्या आप पड़ोस में रहते हैं?</strong> : यदि आपका एजेंट आपके क्षेत्र में ही कही रहता है तो आपको उस तक पहुंचने में आसानी होगी। एक बार उसके यहां जरूर हो कर आयें। आपको उसके बारे में सूचना प्राप्त करना आसान हो जायेगा। मगर उस ध्यान रखें कि आपको जरूरत होने पर ही प्लान लें, केवल पड़ोसी को खुश करने या पड़ोसी धर्म निभाने के लिये नहीं।</font><font size="3"> </font></p>
<p><font size="3"><strong>2. क्या वास्तव में आप यही काम करते हैं?</strong> : हैरान न हों। आप यह सवाल जरूर करें। अधिकतर बीमा एजेंट मुख्य रूप से कोई और काम करते हैं। यह उनका पार्ट टाईम जॉब ही होता है। थोड़ा सा अतिरिक्त पैसा कमाने के लिये। याद रखें, जिस काम से उसके घर की रोटी नहीं चलती वह उसे पूरे प्रोफेशनल तरीके से नहीं कर पायेगा। उतना समय भी नहीं दे पायेगा। फुलटाईम प्रोफेशनल एजेंट से ही हमेशा डील करें।</font><font size="3"> </font></p>
<p><font size="3"><strong>3. कितने साल का अनुभव है?:</strong> इस काम में लोग ज्यादा देर तक नहीं टिकते। एकदम नये एजेंट जो एक साल से भी कम समय से इस प्रोफेशन में आये हों से बचें। आप उनसे उनके ग्राहकों के बारे में जानें तथा यह भी पता लगायें कि उसने कितने नये ग्राहक पिछले एक साल में बनाये। यदि वह काफी लम्बी अवधी से लगातार अच्छा काम कर रहा है तो वह इस व्यवसाय में लम्बे समय तक टिकेगा। याद रखें कि बी्मा प्लान की अवधी हमेशा बहुत लम्बी होती है। आपका एजेंट लम्बी अवधी का खिलाड़ी होना चाहिये।</font><font size="3"> </font></p>
<p><font size="3"><strong>4. आपके पास अपना ऑफिस है?</strong> : यदि उसके पास अपना ऑफिस तथा संपर्क के लिये लैंडलाइन नंबर है तो यह बेहतर है। हो सके तो एक बार उसके ऑफिस भी हो आयें।</font><font size="3"> </font></p>
<p><font size="3"><strong>5. आप किस ब्रांच के लिये काम करते हैं?</strong> : हो सके तो उसकी ब्रांच में होकर आयें तथा उसके सेल्स ऑफिसर/ डेवलपमेंट ऑफिसर से मिल कर आयें। पता करें कि कोई समस्या आने पर शिकायत कहां की जा सकती है।</font><font size="3"> </font></p>
<p><font size="3"><strong>6. आपने यही प्लान मेरे लिये क्यों चुना?:</strong> यह जानना बहुत जरूरी है। इस सवाल के जवाब से आप को अंदाजा हो जायेगा कि एजेंट कितना प्रोफेशनल है। ध्यान दें कि वह बीमा आपकी जरूरत के हिसाब से आपको दे रहा है या अपना कमीशन बनाने के लिये। यदि एक एजेंट एक ही योजना बता कर कहता है कि यह बहुत अच्छा प्लान है ले लीजिये तो इससे बचें।</font><font size="3"> </font><font size="3">वहीं यदि एजेंट पहले आपके परिवार के बारे में सारी जानकारी लेकर आपकी आयू, आपकी भविष्य की जरूरतों तथा जिम्मेदरियों के अनुसार ही कोई प्लान का सुझाव देता है तो यह ज्यादा प्रोफेशनल रवैया होगा।</font></p>
<p><font size="3"><strong>7. आपको इसमें कितना कमीशन मिलेगा?</strong> : पूछने से हिचकायें नहीं। हो सकता है कि वह छिपा जाये। यह भी हो सकता है कि फट से जवाब दे दे। इससे आपको अंदाज हो जायेगा कि वह केवल अपनी कमाई के लिये ही तो कोई प्लान आपके मत्थे नहीं मढ़ रहा।</font><font size="3"> </font></p>
<p><font size="3"><strong>8. प्लान का ब्रोशर कहां हैं?:</strong> "जी आज ही खत्म हो गया।" हो सकता है आपको यही जवाब मिले। ब्रोशर पूरी तरह पढ़े और समझे बिना कभी कोई प्लान न लें। यदि एजेंट आपको ब्रोशर नहीं देता तो हो सकता है वह उसमें आपसे कुछ छिपा रहा है। कंपनी की साईट पर जा कर प्लान के बारे में जानकारी हासिल करें।</font><font size="3"> </font></p>
<p align="left"><font size="3"><a href="http://www.outlookmoney.com/scripts/insufile.asp?file=HOWTO-agent.html">(आउटलूक मनी के एक लेख पर आधारित)</a></font></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[झा साहब ने खरीदा लैपटॉप]]></title>
<link>http://aaina2.wordpress.com/2007/03/28/sharemarket-2/</link>
<pubDate>Wed, 28 Mar 2007 17:10:19 +0000</pubDate>
<dc:creator>जगदीश भाटिया</dc:creator>
<guid>http://aaina2.wordpress.com/2007/03/28/sharemarket-2/</guid>
<description><![CDATA[झा साहब से परिचय करवाने से पहले अपको प]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font size="3">झा साहब से परिचय करवाने से पहले अपको पिछले सप्ताह की एक बात बताता हूं। मैं नोएडा में था। अपने एक सरदारजी दोस्त से काम के सिलसिले में मिलने गया था। बातों बातों में सरदारजी ने शेयर बाजार के बारे में एक सवाल पूछा। उन्होंने पूछा कि यह कैसे पता लगाया जाये कि शेयर बाजार कब अपनी पूरी ऊंचाई पर है और वो कौन सा समय हो जब शेयर बाजार से सब कुछ बेच कर बाहर आ जाना चाहिये। मैंने कहा कि इस बाजार में कभी बदहवास को कर माल न ही बेंचे तो अच्छा। अगर आपने अच्छी कंपनी का शेयर लिया है तो बाजार की चाल कैसी भी हो, आप घबरायें नहीं। सरदारजी मेरे जवाब से संतुष्ट नहीं हुए। उन्हें सीधा जवाब चाहिये था। "आप लक्षण बताईये जिन्हें पहचान कर इशारा मिल जाये कि अब बाजार गिरने वाला है" उन्होंने पूछा।<br />
अब बताइये, इस सवाल का जवाब कौन दे सकता है? फिर भी मैंने एक पुरानी मान्यता की बात उन्हें बताई। " जब हर कोई शेयरों की बात करने लगे तो समझो कि अब आपका समय यहां से निकलने का हो गया।"<br />
" हर कोई शेयरों की ही तो बात करता है।" वो भोलेपन से बोले। यह बात भी सही है कि समाज के जिस वर्ग में सरदार जी रहते हैं वहां ज्यादातर लोग शेयरों में निवेश करते हैं।<br />
"मगर जब आपका ड्राईवर भी शेयरों की बात करने लगे तो समझें समय आ गया है" मैंने मुस्कुराते हुए कहा। </font></p>
<p><font size="3">अब झा साहब की बात। बहुत मजेदार चरित्र है उनका। झा साहब खुद में मस्त रहते हैं। जब बोलना शुरू करते हैं तो रोकना मुश्किल हो जाता है। एक बार जो निर्णय ले लें तो किसी की नहीं सुनते बस कर गुजरते है। झा साहब कितना पढ़े लिखे हैं यह तो मैंने कभी पूछा नहीं मगर अंग्रेजी में "यू गो"," आई कम" से आगे पैदल हैं। आगे भी आपको उनके किस्से सुनाता रहुंगा। हम एक ही कालोनी में रहते हैं। झा साहब कुछ खास नहीं करते। दो बच्चे होने के बाद भी अपने परिवार का जिम्मा वो अपने पिता पर ही डाले हैं। कल अचानक आ धमके। बोले लैपटॉप लिया है। इंटेरनेट नहीं चल रहा, जरा सहायता कर दें।<br />
"अरे वाह! क्या कन्फिग्रेशन है?" मैंने उत्सुकता दिखाते हुए पूछा।<br />
झा साहब समझ नहीं पाये।<br />
"इसमें क्या क्या लगा है" मैंने फिर पूछा।<br />
अब झा साहब का चेहरा बता रहा था कि मैंने क्या अनाड़ियों वाला सवाल पूछ लिया है।<br />
"ये स्पीकर लगे हैं, यहां सीडी लगती है, ये फोन की लाईन है और यहां,  यह लगता है।" झा साहब ने मुझे यूएसबी पोर्ट और पेन ड्राईव दिखाते हुए कहा।<br />
आगे की बातों से पता चला कि झा साहब पचास हजार का लैपटॉप खरीद लाये हैं बिना यह जाने कि दो लैपटॉप के मॉडल्स में क्या क्या फर्क हो सकता है। हार्ड डिस्क, रैम और प्रोसेसर जैसे् शब्द उन्हों ने पहली बार मुझसे ही सुने। झा साहब ने लैपटॉप पर गाना बजाना सीख लिया था और इस बात से बार बार उत्तेजित हो जाते कि कैसे लैपटॉप पर अंगुली घुमाने से गाने की आवाज कम और ज्यादा हो जाती है।<br />
मैं यह जानने के लिये बहुत बेताब था कि झा साहब ने किस उद्देश्य के लिये लैपटॉप खरीदा था। कुछ देर में इसका भी खुलासा हो गया।<br />
"इंटेरनेट पर शेयर ट्रेडिंग करूंगा।" उन्होंने बताया।<br />
"आपको बाजार की जानकारी है?"<br />
"इसमें जानकारी क्या? सुबह खरीदा, शाम को बेचा। सौ रुपये भी बढ़ गये तो अपनी जेब में।" झा साहब ने बहुत ही लापरवाही से बताया।<br />
"मगर झा साहब शेयरों में वही पैसा लगाइये जो डूब भी जाये तो गम न हो" मैंने चिंतित होते हुए कहा।<br />
"ज्यादा नहीं, एक लाख से ही शुरू करुंगा, आप चिंता न करें, पिता जी पिछले महीने ही रिटायर्ड हुए हैं, पैसों की कमी नहीं।" जाते जाते झा साहब ने कहा।<br />
झा साहब के जाने के बाद थोड़ी देर तक मैं खुद ही हंसता रहा। मगर अचानक मुझे पिछले सप्ताह सरदारजी से हुई बातें याद आ गयीं।</font><font size="3"> </font><font size="3">मेरा दिल धक से रह गया।</font></p>
<p><font size="3">क्या वाकई यह बात कोई संकेत देती है?</font></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[शेयरबाजार और बैल]]></title>
<link>http://poonji.wordpress.com/2007/03/08/sharemarket/</link>
<pubDate>Thu, 08 Mar 2007 08:45:22 +0000</pubDate>
<dc:creator>जगदीश भाटिया</dc:creator>
<guid>http://poonji.wordpress.com/2007/03/08/sharemarket/</guid>
<description><![CDATA[
महाश्क्ति के प्रमेंद्र प्रताप सिंह न]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><img src='http://aaina2.files.wordpress.com/2007/03/ist2_1809786_bulls_n_bears1.jpg' alt='ist2_1809786_bulls_n_bears1.jpg' /></p>
<p><font size="3"><a href="http://pramendra.blogspot.com/">महाश्क्ति के प्रमेंद्र प्रताप सिंह</a> ने यह सवाल मुझसे दो तीन बार पूछा था। हर बार यही सोचता कि अगले किसी लेख में इस बारे में लिखूंगा। आज फिर जब उन्हों ने यही प्रश्न उठाया तो ज्यादा इंतजार न करवाकर टाईम निकाल उनका जवाब दे रहा हूं। उनका प्रश्न था कि </p>
<p><strong><br />
<blockquote>शेयर बाजार और बैल मे क्‍या सम्‍बन्‍ध ? क्यों शेयर बाजार के समाचारों के साथ बैल को भी चित्रित किया जाता है। </p></blockquote>
<p></strong></p>
<p>शेयर बाजार की अपनी एक भाषा होती है। जो लोग यह सोचते हैं कि बाजार तेजी के रुख में रहेगा तो लाभ की आशा में वे और शेयर खरीदना चाहते हैं इसीलिये उन्हें तेजड़िये कहते हैं। जो सोचते हैं कि बाजार में कीमतें गिरेंगी वे शेयरों को बेचना चाहते हैं तो उन्हें कहते हैं मदड़िये। इन्ही तेजड़ियों को बाजार में बुल्स यानी बैल  कहा जाता है तथा मंदड़ियों को बियर यानी भालू। इसी लिये जब भी बाजार में तेजी आती है तो अगले दिन सेंसेक्स के ग्राफ के साथ बैल को चित्रित किया जाता है और जब बाजार तेजी से गिरते हैं तो भालू का चित्र दिखाया जाता है।<br />
मान्यता है कि यह नाम इस जानवरों के हमला करने के तरीके से पड़ा। जब भी बैल हमला करता है तो अपने शिकार को नीचे से उठा कर उछाल देता है जबकि भालू अपने शिकार को हमेशा पंजों से नीचे की ओर दबाता है। </p>
<p></font></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[शेयरबाजार और बैल]]></title>
<link>http://aaina2.wordpress.com/2007/03/08/sharemarket/</link>
<pubDate>Thu, 08 Mar 2007 08:12:40 +0000</pubDate>
<dc:creator>जगदीश भाटिया</dc:creator>
<guid>http://aaina2.wordpress.com/2007/03/08/sharemarket/</guid>
<description><![CDATA[
महाशक्ति के प्रमेंद्र प्रताप सिंह ने ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><img src='http://aaina2.files.wordpress.com/2007/03/ist2_1809786_bulls_n_bears1.jpg' alt='ist2_1809786_bulls_n_bears1.jpg' /></p>
<p><font size="3"><a href="http://pramendra.blogspot.com/">महाशक्ति के प्रमेंद्र प्रताप सिंह</a> ने यह सवाल मुझसे दो तीन बार पूछा था। हर बार यही सोचता कि अगले किसी लेख में इस बारे में लिखूंगा। आज फिर जब उन्हों ने यही प्रश्न उठाया तो ज्यादा इंतजार न करवाकर टाईम निकाल उनका जवाब दे रहा हूं। उनका प्रश्न था कि </p>
<p><strong><br />
<blockquote>शेयर बाजार और बैल मे क्‍या सम्‍बन्‍ध? क्यों शेयर बाजार के समाचारों के साथ बैल को भी चित्रित किया जाता है। </p></blockquote>
<p></strong></p>
<p>शेयर बाजार की अपनी एक भाषा होती है। जो लोग यह सोचते हैं कि बाजार तेजी के रुख में रहेगा तो लाभ की आशा में वे और शेयर खरीदना चाहते हैं इसीलिये उन्हें तेजड़िये कहते हैं। जो सोचते हैं कि बाजार में कीमतें गिरेंगी वे शेयरों को बेचना चाहते हैं तो उन्हें कहते हैं मंदड़िये। इन्ही तेजड़ियों को बाजार में बुल्स यानी बैल  कहा जाता है तथा मंदड़ियों को बियर्स यानी भालू। इसी लिये जब भी बाजार में तेजी आती है तो अगले दिन सेंसेक्स के ग्राफ के साथ बैल को चित्रित किया जाता है और जब बाजार तेजी से गिरते हैं तो भालू का चित्र दिखाया जाता है।<br />
मान्यता है कि यह नाम इस जानवरों के हमला करने के तरीके से पड़ा। जब भी बैल हमला करता है तो अपने शिकार को नीचे से उठा कर उछाल देता है जबकि भालू अपने शिकार को हमेशा पंजों से नीचे की ओर दबाता है। </p>
<p></font></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[सावधान! यह आपके साथ भी हो सकता है]]></title>
<link>http://poonji.wordpress.com/2007/03/02/lifeinsurance/</link>
<pubDate>Fri, 02 Mar 2007 04:34:00 +0000</pubDate>
<dc:creator>जगदीश भाटिया</dc:creator>
<guid>http://poonji.wordpress.com/2007/03/02/lifeinsurance/</guid>
<description><![CDATA[
एल आई सी के कुछ एजेंट आजकल कुछ इस तरह क]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><img src='http://aaina2.files.wordpress.com/2007/02/licsmall.JPG' alt='licsmall.JPG' /><font size="3"><br />
एल आई सी के कुछ एजेंट आजकल कुछ इस तरह के पर्चे बांट कर लोगों को गुमराह कर रहे हैं जिसमें कहा गया है कि 30000 रु जमा करवा कर 16 लाख रु लें। आप सब से अनुरोध है कि इस तरह के किसी बहकावे में न आयें। यह पूरी तरह झूठ और फरेब पर आधारित है।</p>
<p>एल आई सी के उच्च अधिकारियों ने इसके लिये एक सर्कुलर भी निकाला है जिसका एक हिस्सा यहां दिया जा रहा है। इसमें लिखा है कि इस पर्चे की वजह से कार्पोरेशन को शर्मिंदा होना पड़ रहा है तथा यह लोगों के कार्पोरेशन पर 50 साल के विश्वास के साथ धोखा है।  पूरे सर्कुलर की कापी मेरे पास है। आप भी अपने चारों ओर इस बारे में जागरुकता फैलायें जिस से लोग इस धोखे से बच सकें।</p>
<p><img src='http://aaina2.files.wordpress.com/2007/02/circuler.JPG' alt='circuler.JPG' /></p>
<p>जल्द ही एक लेख लिख कर आपको बताऊंगा कि निवेश संबंधी फैसले लेते समय किस तरह के एजेंटों से व्यवहार करना ठीक रहेगा जिससे आपको कभी इस तरह का धोखा न हो।</p>
<p>(नोट : कल वित्त बजट पेश किया जायेगा। संभव है कि निजी करों के ढांचे तथा दरों में कुछ परिवर्तन किया जाये। यदि इससे संबधित कोई जानकारी चाहते हों या बजट के किसी भी पहलू पर कोई जिज्ञासा हो तो आप मुझे mailjpb at gmail dot com पर मेल कर सकते हैं। मैं कोशिश करुंगा कि आपको जवाब दे सकूं। बजट के दौरान तथा बाद में जीमेल चैट पर भी रहने की कोशिश करुंगा।)<br />
</font></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[बजट अपडेट लाईव Budget live update]]></title>
<link>http://aaina2.wordpress.com/2007/02/28/%e0%a4%ac%e0%a4%9c%e0%a4%9f-%e0%a4%85%e0%a4%aa%e0%a4%a1%e0%a5%87%e0%a4%9f-%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%88%e0%a4%b5-budget-live-update/</link>
<pubDate>Wed, 28 Feb 2007 04:00:48 +0000</pubDate>
<dc:creator>जगदीश भाटिया</dc:creator>
<guid>http://aaina2.wordpress.com/2007/02/28/%e0%a4%ac%e0%a4%9c%e0%a4%9f-%e0%a4%85%e0%a4%aa%e0%a4%a1%e0%a5%87%e0%a4%9f-%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%88%e0%a4%b5-budget-live-update/</guid>
<description><![CDATA[	बजट पेश करने का आज से खराब दिन पी चिदंब]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>	<font size="3">बजट पेश करने का आज से खराब दिन पी चिदंबरम जी के लिये कोई नहीं हो सकता था। दुनिया भर के शेयर बाजार आज सुबह से धड़ा धड़ गिर रहे हैं। लग रहा है कि आज हमारे शेयर बाजारों पर भी खून बहेगा। :(<br />
एक दिन पहले कांग्रेस उत्तराखंड और पंजाब में हार गयी। मंहगाई से लोग त्रस्त हैं। वैसे जब सारे टी वी चैनल और समाचार पत्र कांग्रेस की हार के लिये मंहगाई को जिम्मेदार बता रहे हैं, शहरों में कांग्रेस की हार के पीछे आरक्षण और अर्जुन सिंह कितने जिम्मेदार हैं, यह भी सोचने की बात होगी।</p>
<p>आपको हिंदी में बजट के मुख्य बिंदू लगातार यहां बताये जायेंगे। उम्मीद है कि वित्तमंत्री जी महंगाई को काबू करने के उपाय करेंगे और कृषि क्षेत्र को बढ़ावा दिये जाने की कोशिश की जायेगी। यदि आपको इस विषय में रुचि है तो इस पेज को रिफ्रेश करते रहें।<br />
सेंसेक्स ४३३ प्वाईट नीचे खुला<br />
निफ्टी १५७ प्वाईंट नीचे खुला<br />
गैहूं और चावल की फ्यूचर ट्रेडिंग पर प्रतिबंध लगा।<br />
(मगर अफसोस दो राज्यों को खोने के बाद। लगता है दो राज्य खोने के बाद सरकार बदहवासी में कदम उठा रही है)<br />
<strong>बजट प्रावधान</strong><br />
शिक्षा बजट में ३५ % वृद्धी<br />
स्वास्थ्य के बजट में २२% वृद्धी<br />
आयुर्वेद पर खास ध्यान (आयुर्वेद FMCG के लिये अच्छा)<br />
कृषि को खास ध्यान<br />
अच्छे बीजों के लिये निजी कंपनियों से सहयोग लिया जायेगा<br />
खाद सब्सिडी सीधे किसानों को दिये जाने का तरीका खोजा जायेगा। सिंचाई पर खास ध्यान।<br />
गरीब ग्रामीन भूमीहीनों के लिये आम आदमी जीवन बीमा योजना, आधा प्रीमियम केंद्र सरकार देगी, बाकी आधा राज्य सरकारें।<br />
अनओर्गनाईज सेक्टर के लिये सामाजिक सुरक्षा योजना<br />
शेयर बाजार में ट्रेडिंग के लिये सभी को PAN  जरूरी<br />
रक्षा पर 96000 करोड़ की वृद्धी<br />
म्यूचल फंड के जरिये आम आदमी विदेशों में निवेश कर सकेंगे ( कीमतों को कम करने में सहायक)<br />
मुंबई को विश्व स्तर की फाईनेंशल सिटी बनाया जायेगा<br />
विकलांगों को एक लाख सरकारी नौकरियां<br />
दिल्ली कामेनवेल्थ गेम के लिये ५०० करोड़<br />
बाजार कुछ संभले<br />
सेंसेक्स अब २५० प्वाईंट नीचे (१२.१० बजे)<br />
टैक्स क्लेक्शन २७ % बढ़ा<br />
कस्टम (गैर कृषी चीजों के लिये)ड्यूटी पीक रेट १२.५ से घटा कर १० % ( कीमतों को कम करने में सहायक)<br />
सर्विस टैक्स रेट में बदलाव नहीं<br />
कुत्ते बिल्लियों के खाने का सामान सस्ता (इन्सानो का भी ध्यान करें मंत्री जी) :(<br />
पोलियेस्टर, खाने का तेल, सिंचाई उपकरण और पाईप्स  सस्ते<br />
सर्विस टैक्स में और सेवाएं शामिल</p>
<p>निजी आयकर में कुछ राहत<br />
आयकर में छूट १०००० रु से बढ़ी (आम कर देने वालों को एक हजार रु की बचत)<br />
जम्मू कश्मीर में उद्योगों को और पांच वर्ष तक करों में छूट<br />
कार्पोरेट टैक्स रेट में बदलाव नहीं<br />
एजुकेशन सेस २% से बढ़ कर ३% हुआ<br />
डिविडेंड डिस्ट्रिब्यूशन टैक्स बढ़ कर १५%<br />
IT कंपनियों पर MAT लगा<br />
IT कंपनियों में ESOP पर FBT लगा<br />
एक करोड तक के लाभ कमाने वाले कार्पोरेट्स पर सरचार्ज नहीं<br />
(बजट फुस्स लग रहा है<br />
बाजार फिर फिसले)<br />
ना आम आदमी को कुछ मिला न ही खास आदमी को<br />
बाजार लुड़के<br />
आधा घंटा तक कृषि पर बोले पर कोई बड़ी घोषणा नहीं की। कृषि का योगदान जीडीपी में घट रहा है मगर इसे बढ़ाने के लिये कुछ नहीं क्या है।<br />
कंपनियों पर टैक्स का बोझ बढ़ेगा। कुछ रिफार्म्स नहीं किये। ज्यादा ले लिया पर दिया कुछ भी नहीं।</p>
<p><strong>मेरी राय</strong></p>
<p>यह एक दिशा हीन बजट है। उम्मीद थी कि कीमतें कम करने तथा कृषि के विकास के लिये कुछ क्रांतिकारी कदम उठाये जायेंगे मगर इस दिशा में साधारण कदम भी नहीं उठाये गये। एक मौका गंवा दिया। वित्त मंत्री दबाव में लग रहे हैं। दस साल पहले वाले चिदंबरम का जलवा नहीं दिखा सके।<br />
मुझे कभी कभी लगता है कि मैडम जी, प्र मं जी, वि मं जी तथा वाम पक्ष में जबर्दस्त संवाद हीनता है। ना कोई विजन है और न ही कोई दिशा। :(<br />
</font></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[सावधान! यह आपके साथ भी हो सकता है]]></title>
<link>http://aaina2.wordpress.com/2007/02/27/lic/</link>
<pubDate>Tue, 27 Feb 2007 14:54:31 +0000</pubDate>
<dc:creator>जगदीश भाटिया</dc:creator>
<guid>http://aaina2.wordpress.com/2007/02/27/lic/</guid>
<description><![CDATA[
एल आई सी के कुछ एजेंट आजकल कुछ इस तरह क]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><img src='http://aaina2.files.wordpress.com/2007/02/licsmall.JPG' alt='licsmall.JPG' /><font size="3"><br />
एल आई सी के कुछ एजेंट आजकल कुछ इस तरह के पर्चे बांट कर लोगों को गुमराह कर रहे हैं जिसमें कहा गया है कि 30000 रु जमा करवा कर 16 लाख रु लें। आप सब से अनुरोध है कि इस तरह के किसी बहकावे में न आयें। यह पूरी तरह झूठ और फरेब पर आधारित है।</p>
<p>एल आई सी के उच्च अधिकारियों ने इसके लिये एक सर्कुलर भी निकाला है जिसका एक हिस्सा यहां दिया जा रहा है। इसमें लिखा है कि इस पर्चे की वजह से कार्पोरेशन को शर्मिंदा होना पड़ रहा है तथा यह लोगों के कार्पोरेशन पर 50 साल के विश्वास के साथ धोखा है।  पूरे सर्कुलर की कापी मेरे पास है। आप भी अपने चारों ओर इस बारे में जागरुकता फैलायें जिस से लोग इस धोखे से बच सकें।</p>
<p><img src='http://aaina2.files.wordpress.com/2007/02/circuler.JPG' alt='circuler.JPG' /></p>
<p>जल्द ही एक लेख लिख कर आपको बताऊंगा कि निवेश संबंधी फैसले लेते समय किस तरह के एजेंटों से व्यवहार करना ठीक रहेगा जिससे आपको कभी इस तरह का धोखा न हो।</p>
<p>(नोट : कल वित्त बजट पेश किया जायेगा। संभव है कि निजी करों के ढांचे तथा दरों में कुछ परिवर्तन किया जाये। यदि इससे संबधित कोई जानकारी चाहते हों या बजट के किसी भी पहलू पर कोई जिज्ञासा हो तो आप मुझे mailjpb at gmail dot com पर मेल कर सकते हैं। मैं कोशिश करुंगा कि आपको जवाब दे सकूं। बजट के दौरान तथा बाद में जीमेल चैट पर भी रहने की कोशिश करुंगा।)<br />
</font></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[निवेश के लिये पसन्दीदा शब्द है - यूलिप]]></title>
<link>http://poonji.wordpress.com/2006/11/16/ulip/</link>
<pubDate>Thu, 16 Nov 2006 11:51:06 +0000</pubDate>
<dc:creator>जगदीश भाटिया</dc:creator>
<guid>http://poonji.wordpress.com/2006/11/16/ulip/</guid>
<description><![CDATA[
 
आजकल लम्बी अवधि के लिये निवेश करने वा]]></description>
<content:encoded><![CDATA[
<p> <a href='http://poonji.wordpress.com/files/2006/11/_39121986_rupee203.jpg' title='_39121986_rupee203.jpg'><img src='http://poonji.wordpress.com/files/2006/11/_39121986_rupee203.jpg' align="centre" alt='_39121986_rupee203.jpg' /></a></p>
<p align="left"><font face="Arial" size="3">आजकल लम्बी अवधि के लिये निवेश करने वालों के लिये यूलिप ULIP (Unit-Linked Insurance Plan) एक पसन्दीदा शब्द है। इसके उचित कारण भी हैं।</font></p>
<p align="left">&#160;</p>
<p align="left"><font face="Arial" size="3">यूलिप निवेश का एक बहुत अच्छा जरिया है यदि आप लम्बी अवधि के लिये निवेशित रहना चहते हैं यानि 10 से 20  वर्षों के लिये । यदि आप कम अवधि के लिये निवेश करना चाहते हैं तो बेहतर है कि किसी कंसल्टेंट की सहायता से म्यूचल फंड में निवेश करें। </font></p>
<p align="left">&#160;</p>
<p align="left"><font face="Arial" size="3">यूलिप और म्यूचल फंड में मुख्य अंतर है अधिभरों (charges) का ढांचा। यूलिप और म्यूचल फंड में   बाकी सब समान होते हुए भी यूलिप में निवेश बेहतर हो सकता है अधिभारों में कमी के कारण । FMC फंड मेनेजमेंट चार्ज (इसकी हिंदी शायद होगी कोष प्रबंधन अधिभार) आमतौर पर यूलिप में 1.5% (किसी किसी कम्पनी में यह 0.8% तक कम होता है)  होता है जबकी   म्यूचल फंड में आमतौर पर  FMC 2.5% के आसपास होता है। </font></p>
<p align="left">&#160;</p>
<p align="left"><font face="Arial" size="3">इसीलिये लम्बी अवधि में जब आपका फंड बहुत बड़ा हो  जाता है तो 1% का अंतर भी बहुत मायने रखता है और इससे यूलिप के शुरुआती खर्चों की भी आपूर्ती हो जाती है।</font></p>
<p align="left">&#160;</p>
<p align="left"><font face="Arial" size="3"> यूलिप और म्यूचल फंड में निवेश के दो उदाहरण लेते हैं जो कि 10% की समान दर  से बढ़ रहे हैं। </font></p>
<p align="left">&#160;</p>
<p align="left"><font face="Arial" size="3">एक आदमी 20 वर्ष के लिये 5 लाख रु के बीमा के साथ यूलिप प्लान लेता है जिसमें वह 1 लाख रु प्रति वर्ष निवेश करता है यदि उसका निवेश 10% की दर से बढ़ता है तो मियाद खत्म होने पर उसे रु 52,21,205/-  मिलेंगे &#124;</font></p>
<p align="left">&#160;</p>
<p align="left"><font face="Arial" size="3">यही निवेश यदि  म्यूचल फंड में किया जाता है और साथ में समान राशि की   टर्म इंशोरेंस भी ली जाती है तो 10% की वृद्धी दर पर सभी समयोजनों के बाद मियाद खत्म होने पर रु 48,25,785/- मिलेंगे। </font></p>
<p align="left">&#160;</p>
<p align="left"><font face="Arial" size="3">इस प्रकार आप देख सकते हैं कि 1% का अधिभारों में छोटा सा अंतर  आपके धन को कितना अधिक बढ़ा सकता है। </font></p>
<p align="left">&#160;</p>
<p align="left"><font face="Arial" size="3">यूलिप में आपको बीमा प्लान, बच्चों के प्लान तथा पेंशन प्लान भी मिल जायेंगे। आप इनमें रु 1500/- प्रति माह के न्यूनतम निवेश से भी शुरुआत कर सकते हैं। अधिकतर कम्पनियां ECS की सुविधा भी प्रदान करती हैं।</font></p>
<p align="left">&#160;</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[कैसे समझें तिमाही नतीजे]]></title>
<link>http://poonji.wordpress.com/2006/10/11/%e0%a4%95%e0%a5%88%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a4%9d%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a5%80-%e0%a4%a8%e0%a4%a4%e0%a5%80%e0%a4%9c%e0%a5%87/</link>
<pubDate>Wed, 11 Oct 2006 16:14:03 +0000</pubDate>
<dc:creator>जगदीश भाटिया</dc:creator>
<guid>http://poonji.wordpress.com/2006/10/11/%e0%a4%95%e0%a5%88%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a4%9d%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a5%80-%e0%a4%a8%e0%a4%a4%e0%a5%80%e0%a4%9c%e0%a5%87/</guid>
<description><![CDATA[
&nbsp;आज आईटी यानी सूचना तकनीक की विशाल क]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><img src='http://poonji.wordpress.com/files/2006/10/infosysresults.JPG' alt='infosysresults.JPG' /></p>
<p align="left"><font face="Arial" size="3">&#160;आज आईटी यानी सूचना तकनीक की विशाल कम्पनी इन्फोसिस ने अपने &#160;तिमाही <a href="http://www.infosys.com/investor/reports/quarterly/2006-2007/Q2/Standalone/SA-Q2-07-Fin-Stmt.pdf" target="_blank">नतीजे</a>&#160;पेश किये। आइये जाने कि इन नतीजों को कैसे समझा जाये।</font></p>
<p align="left"><font face="Arial" size="3">जहां बैलेंस शीट (आपको जानकर हैरानी होगी कि बैलेंश शीट को हिंदी में चिट्ठा भी कहा जाता है)&#160; कम्पनी की सेहत का आईना होती है वहीं प्रॉफिट एण्ड लॉस एकाऊंट (लाभ हानि&#160;खाता) &#160;कम्पनी की प्रगति का मापक होता है। उपर दिये लिंक से आप इन्फोसिस के तिमाही नतीजे विस्तार से पीडीएफ फाईल में डाऊनलोड कर सकते हैं अथवा यहां दी हुई इमेज फाईल से इसे समझ सकते हैं। </font></p>
<p align="left">&#160;</p>
<p align="left"><font face="Arial" size="3">हम यहां आज केवल प्रॉफिट एण्ड लॉस एकाऊंट&#160;(लाभ हानि खाता) की बात करेंगे।</font></p>
<p align="left"><font face="Arial" size="3">सबसे पहला मद है - </font></p>
<p align="left"><font face="Arial" size="3">1.Income from Software services and &#160;products ( सॉफ्टवेयर सेवाओं एवं उत्पादों से आय)अधिकतर इस जगह मद होती है कुल बिक्री से आय (Income from Total Sale)&#160;: यहां आपको मिलेगी कम्पनी द्वारा दी गई तिमाही में की गई माल अथवा सेवाओं की बिक्री की रकम। कम्पनी कितनी गति से बढ़ (Growth&#160;कर) &#160;रही है यह इसी का सूचक है। यहां आप देखेंगे कि पिछले साल की इसी तिमाही के मुकाबले इन्फोसिस लगभग 51%&#160; बढ़ी है।</font></p>
<p align="left"><font face="Arial" size="3">2. Software development Expenses (सॉफ्टवेयर संवर्धन लागत) अधिकतर इस जगह मद होती है कुल क्रय लागत: यहां आपको मिलेगी कच्चे माल अथवा सेवाओं की आपूर्ति पर&#160;खर्च&#160;की&#160;गयी रकम। यहां ध्यान देने योग्य बात यह है कि लागत की रकम यदि बिक्री की रकम के मुकाबले कम अनुपात में बढ़ती है तो यह कम्पनी के सेहत के लिये अच्छा है। यहां इन्फोसिस की लागत 53.89% से बढ़ी है। </font></p>
<p align="left"><font face="Arial" size="3">3. Gross Profit (कुल लाभ) : कुल लाभ बिक्री और क्रय का अन्तर है। यहां कुल लाभ 47%&#160; बढ़ा है। </font></p>
<p align="left"><font face="Arial" size="3">4. Operating Expenses (प्रभावित खर्चे): यहां कच्चे माल के अलावा माल अथवा सेवाओं के उत्पादन पर&#160;किये गये अन्य सभी खर्चे लिये जाते हैं। ध्यान रहे कि यह खर्चे जरूरी नहीं कि माल के उत्पाद के अनुपात में ही बढ़ें। क्योंकि कुछ खर्चे जैसे कि बिलडिंग का किराया या स्टाफ की तन्ख्वाह का माल के उत्पाद से कोई सीधा संबंध नहीं होता है। यहां आने वाले मद इस पर भी निर्भर करते हैं कि कम्पनी किस क्षेत्र में कार्यरत है। इन्फोसिस के खर्चे 42% से बढ़े हैं।</font></p>
<p align="left"><font face="Arial" size="3">5. Interest and Depreciation (ब्याज एवं अवमूल्यन):&#160; इन खर्चों का उत्पादन प्रक्रिया से कोई संबंध नहीं होता इसलिये इन्हे अलग से गिना जाता है। आयकर की गणना में भी इनका अलग से महत्व है। ब्याज उधार ली गई पूजी पर दिया जाता है। बड़ी पूंजीगत कम्पनियां&#160;जहां बड़ी रकम उधार की पूंजी से लगी होती है वहां इस मद का मह्त्व बढ़ जाता है और ब्याज की दरों में परिवर्तन कम्पनी के लाभ पर असरकारक हो सकता है। यहीं यह भी देखने वाली बात है कि जैसे जैसे कम्पनी अधिक लाभ कमा कर उधार चुकता करती जाती है ब्याज की रकम कम होती जाती है और लाभ बढ़ते जाते हैं। अवमूल्यन वास्तव में एक काल्पनिक खर्चा है और कम्पनी इसकी अदायगी नहीं करती। </font></p>
<p align="left"><font face="Arial" size="3">6. Other Income (अन्य आय) : ध्यान रहे की छोटी और महत्वहीन सी यह रकम आपको बहुत बड़ा धोखा दे सकती है। कभी कभी कम्पनी अपने किसी पुराने निवेश, प्लांट अथवा सम्पत्ती को बेच कर मोटी रकम इस मद में कमा लेती है मगर इस मद में आई बढ़ोतरी वास्तव में कम्पनी की आय में स्थायी बढ़ोतरी नहीं करती। कई बार शुद्ध आय में असाधारण बढ़ोतरी देख कर आनन फानन में कोई शेयर खरीद लिया जाता है मगर यह जरूर जांच लेना चाहिये कि आय में यह बढ़ोतरी कम्पनी के वास्तविक कर्यकलापों के कारण हुई है या अन्य आय के द्वारा। </font></p>
<p align="left"><font face="Arial" size="3">7. Net Profit (शुद्ध आय) : यह वो रकम है जो करों को चुकाने के बाद कम्पनी के पास बचती है। हर निवेशक का वास्ता इस रकम से होता है। इस रकम का एक हिस्सा निवेशक को लाभांश के रूप मे मिलता है और शेष कम्पनी की पूंजी में जमा हो जाता है यानी इसे कम्पनी के विस्तार, उधार चुकाने अथवा दूसरी कम्पनियों का अधिग्रहण करने के लिये प्रयोग किया जा सकता है। यहां इन्फोसिस के शुद्ध लाभ में 51% की वृद्धि हुई है।</font></p>
<p align="left">&#160;</p>
<p align="left"><font face="Arial" size="3">अगली बार देखेंगे EPS (प्रति शेयर आय), P/E ratio ( कोई सुझाये कि इसे हिंदी में क्या कहेंगे?) और इनका शेयरों की कीमत से संबंध।</font></p>
<p align="left">&#160;</p>
<p align="left">&#160;</p>
<p align="left">&#160;</p>
<p align="left">&#160;</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[जीवन बीमा जीवन का बीमा नहीं होता]]></title>
<link>http://poonji.wordpress.com/2006/08/31/insurance/</link>
<pubDate>Thu, 31 Aug 2006 10:30:32 +0000</pubDate>
<dc:creator>जगदीश भाटिया</dc:creator>
<guid>http://poonji.wordpress.com/2006/08/31/insurance/</guid>
<description><![CDATA[बहुत ही अजीब सा फतवा निकाला है उलेमाओं]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font face="Arial">बहुत ही अजीब सा फतवा निकाला है उलेमाओं ने कल। मुसलमान अपने  जीवन का बीमा नहीं करवा सकता। क्यों? क्योंकि जीवन तो खुदा का दिया है और खुदा जब  चाहे उसे वापिस ले सकता है। इंसान कौन होता है अपने जीवन का बीमा करवाने वाला। अब  इस तरह के फतवे निकलते रहे तो हमारे जैसे लोगों का काम धंधा चौपट ही समझो। तो हमने  अपना फर्ज समझा कि सबसे पहले इस गलत फहमी को दूर किया जाये।</font></p>
<p><font face="Arial">जीवन बीमा नाम हो जाने से जीवन का बीमा नहीं होता। दुनिया की  कोई कंपनी किसी के जीवन का बीमा नहीं कर सकती। जब कोई कंपनी किसी व्यक्ति  का बीमा  करती है तो यह नही होता कि उसे कुछ हो जाये तो उस में फिर से जान डाल दी जायेगी।  </font></p>
<p><font face="Arial">जीवन बीमा केवल बीमित व्यक्ति की मृत्यू की अवस्था में उसकी आय  से होने वाली हानि  से परिवार को सुरक्षा प्रदान करता है। (A protection against the  loss of income that would result if the insured passed away)। आज के दौर में जब  शहरों में हर दूसरा व्यक्ति कर्ज लिये मकान में रहता है तो इस अवस्था में जीवन बीमा  की अवश्यक्ता और भी बढ़ जाती है।</font></p>
<p><font face="Arial">यूं तो बीमा कितना होना चाहिये यह  हर व्यक्ति के अपने हालात  पर निर्भर करता है फिर भी एक साधारण समीकरण के अनुसार आप एक वर्ष में जितना कमाते  हैं उस का आठ गुना राशि निकाल लें।  इस में आप अपनी तरल संपत्तियां (<span>Liquid  assets) जैसे नकदी, बैंक जमा और म्यूचव्ल फंड आदि  को घटा दें और अपनी देनदारियां  जैसे लोन, बच्चों की जिम्मेदारी, अन्य कोई जिम्मेदारी(जैसे छोटी बहन की शादी का  खर्चा या घर का कोई अपंग सदस्य जो आप पर निर्भर हो) को इस में जोड़ लें।  इस प्रकार  जो राशि आयेगी उतनी राशि का बीमा आपको अवश्य लेना चाहिये। याद रहे कि मुद्रास्फीति  का असर क्या होगा यह भी समायोजित(Adjust) कर लें। इसके लिये मेरा पिछला लेख <a href="http://poonji.wordpress.com/2006/08/20/ritired/" target="_blank">क्या आप  जल्द रिटायर्ड होना चाहते हैं</a> देखें।</span></font></p>
<p><font face="Arial"><span>यदि  आप चाहते हैं कि आप का परिवार किसी भी अनहोनी की अवस्था में इसी रहन  सहन (</span><span> <span>Living  Standard ) को हमेशा के लिये कायम रख सके तो गिन कर देखिये आपको कितने बीमा की  आवश्यक्ता है। </span></span></font></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[क्या आप जल्द रिटायर्ड होना चाहते हैं]]></title>
<link>http://poonji.wordpress.com/2006/08/20/ritired/</link>
<pubDate>Sun, 20 Aug 2006 13:42:01 +0000</pubDate>
<dc:creator>जगदीश भाटिया</dc:creator>
<guid>http://poonji.wordpress.com/2006/08/20/ritired/</guid>
<description><![CDATA[&nbsp;
इंन्फोसिस के चेयरमैन नारायनमूर्ती]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p class="storycontent">&#160;</p>
<p align="left"><font face="Arial" size="3">इंन्फोसिस के चेयरमैन नारायनमूर्ती आज साठ साल की उम्र में रिटायर्ड हो रहे हैं। नारायनमूर्ती इस देश के हीरो हैं, बहुतों के आदर्श हैं मगर उनके जैसी सफलता हर कोई नहीं पा सकता।</font></p>
<p align="left"><font face="Arial" size="3">मगर फिर भी हर किसी का एक सपना होता है कि एक उम्र तक इतना कमा और बचा लिया जाये कि उसके बाद रिटायर्मेंट के सुनहरे दिनों की जिंदगी को जी भर के जिया जाये। </font></p>
<p align="left"><font face="Arial" size="3">पिछले सौ सालों में एक क्रान्ती हुई है, अनसुनी, अनदेखी, चुपचाप मगर हमारे बिल्कुल पास। शताब्दी की सबसे बड़ी उपलब्धी है दीर्घायू। दुनिया भर में लंबी आयू की वजह से बुजुर्गों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धी हुई है। केवल भारत में ही 2001 में 7.70 करोड़ बुजुर्ग थे जो कि बढ़ कर 2025 में 17.70 करोड़ हो जायेंगे। हमारी औसत आयू अगले दस वर्षों में 85 हो जायेगी और आबादी का दस प्रतिशत 60 से उपर की उम्र का होगा।</font></p>
<p align="left"><font face="Arial" size="3">एक और जहां उम्र बढ़ रही है वहीं खर्चे बढ़ रहे हैं।घटती ब्याज दरें और बढती मुद्रास्फीति आपकी जमा पूंजी पर दोधारी तलवार सा असर करती हैं। आप भी अगर कम उम्र में योजनाबद्ध तरीके से अपनी रिटायर्मैंट की योजना अपने कैरियर की शुरुआत में ही बना लेते हैं तो इस सब से बच सकते हैं। उदाहरण के लिये आजके एक करोड़ रुपये की वास्तविक कीमत 5% मुद्रास्फीती के चलते 15 सालों में केवल 48 लाख ही रह जायेगी। आज जिस चीज की लागत 100 रुपये है वो 15 सालों में लगभग 210 रुपये में मिलेगी।</font></p>
<p align="left"><font face="Arial" size="3">अगर आप युवा हैं तो यह मत समझिये कि अभी तो बहुत टाईम है, बचा लेंगे। आप जितनी जल्दी शुरुआत करेंगे उतना आपको कम बचाना पड़ेगा क्योंकि बाकी काम चक्रवृद्धी की शक्ती करेगी। जैसेकि एक पच्चिस वर्षिय युवा को केवल हर माह 5000/- रुपये ही बचाने होंगे जिससे उसे साठ की आयू में एक करोड़ की पूंजी मिल सके, मगर 35 वर्षिय व्यक्ती को इसके लिये हर माह 11000/- रुपये बचाने होंगे।</font></p>
<p align="left"><img src="http://poonji.wordpress.com/files/2006/08/saving1.JPG" alt="saving1.JPG" /></p>
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