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	<title>परिवार &amp;laquo; WordPress.com Tag Feed</title>
	<link>http://wordpress.com/tag/परिवार/</link>
	<description>Feed of posts on WordPress.com tagged "परिवार"</description>
	<pubDate>Sun, 20 Jul 2008 10:51:00 +0000</pubDate>

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<title><![CDATA[मनुस्मुतिःस्त्रियों का सम्मान न हो तो शुभकर्मों का फल भी नहीं मिलता ]]></title>
<link>http://rajdpk.wordpress.com/?p=130</link>
<pubDate>Tue, 22 Apr 2008 03:41:27 +0000</pubDate>
<dc:creator>दीपक भारतदीप</dc:creator>
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<description><![CDATA[ पिर्तभिभ्रौतृभिश्चैता पतिभिदैवरैस]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color:#003300;"> पिर्तभिभ्रौतृभिश्चैता पतिभिदैवरैस्तथा<br />
पूज्या भूषयितव्याश्च बहुकल्याणमीप्सुभिः</span></strong></p>
<p><span style="color:#003300;">विवाह के समय अपने कल्याण पिता, भाई, पति और देवर कन्या को वस्त्र और आभूषण से संसज्जित कर सकते हैं। कन्य इस तरह सुसज्जित करना पूजा करना कहलाता है।</span></p>
<p><strong><span style="color:#003300;">यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः<br />
यत्रेतास्तु न पूज्यन्त सर्वास्तात्राफलसः क्रियाः</span></strong></p>
<p><span style="color:#003300;">जहां नारियों का आदर सम्मान होता है वहां देवता भ्रमण करते है और जहां उनका इसके विपरीत होता   वहां शुभ प्रकार के कर्मों का भी कोई फल नहीं होता</span></p>
<p><span style="color:#003300;">वर्तमान संदर्भ में व्याख्या-वर्तमान समाज में दहेज एक विकट समस्या है और देखा जाये तो मनु जी के अनुसार उसका एक तरह से विरोध ही किया गया है। उनका कहना है कि विवाह के समय कन्या को पति और भाई के साथ पति और देवर भी वस्त्र और आभूषण दे सकते हैं। एक श्लोक में उन्होंने कन्या के पिता द्वारा अपनी कन्या के लिये वर पक्ष से धन लेना वर्जित बताया  है पर यह कहीं नहीं कहा कि कन्या को वह दहेज दें। हालांकि आजकल ससुराल वाले कन्या के लिये गहने और वस्त्र तो करते हैं पर पहले उसके लिये कन्या पक्ष वालों से भारी राशि वसूल करते हैं। यह अनुचित और मनु द्वारा स्थापित पंरपराओं के विपरीत है।</span></p>
<p><span style="color:#003300;">कभी कभी तो ऐसा लगता है कि जातिवाद को आधार मानकर मनु स्मृति को समाज से विस्मृत करने का प्रयास इसीलिये  किया गया है ताकि कर्मकांडों को समाज पर लादकर उसे बैल की तरह उसे ढोते रहने को बाध्य किया जाये। मनु जी का कहना है कि स्त्रियों का जहां सम्मान नहीं होता वहां शुभकर्मों का भी फल नहीं मिलता। जबकि अनेक धर्मकर्म करने वाले अपनी स्त्रियों को दासी की तरह समझते हैं। एक बात तय है कि मनु स्त्री और पुरुष का जीवन के एक सिक्के की तरह मानते हैं इसलिये वह स्त्री के सम्मान की बात करते हैं। मनु के समय में भी मनुष्य समाज पुरुष प्रधान समाज था और आज भी है और भले ही स्त्रियां आजकल नौकरी और व्यापार में काम कर रहीं है पर वह भी अपने पति और बच्चों को उतना ही प्यार करतीं हैं जितना मनु के समय में करतीं रहीं होंगी। इस प्यार के कारण वह पति का सहयोग नहीं  मिलने पर भी परिवार के कार्यों का समूचा बोझ अपने सिर पर ले लेतीं हैं। इसके बावजूद कई परिवारों में उनको सम्मान नहीं मिलता। जहां स्त्रियां कामकाजी नहीं है तो वहां तो उन्हें और भी परेशान होना पड़ता है। स्त्रियां बहुत सहनशील होतीं हैं और अपने घर की इज्जत को ढंकने के लिये बाहर अपनी घर-परिवार की व्यथाएं नहीं कहतीं पर मनु महाराज के अनुसार पुरुषों को यह समझना चाहिए कि उनके मन से उठी आह उनके शुभकर्मों-यज्ञ, हवन और मंत्रोच्चार से मिलने वाले लाभों से वंचित कर सकतीं है।</span></p>
<p> </p>
<p><span style="color:#003300;"><br />
</span></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[विदुर नीति:अधर्म से प्राप्त धन छिपाने से अन्य दोष भी प्रकट होते हैं ]]></title>
<link>http://rajdpk.wordpress.com/?p=121</link>
<pubDate>Fri, 28 Mar 2008 03:37:52 +0000</pubDate>
<dc:creator>दीपक भारतदीप</dc:creator>
<guid>http://rajdpk.wordpress.com/?p=121</guid>
<description><![CDATA[१. अधर्म से प्राप्त हुए धन के द्वारा जो ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>१. अधर्म से प्राप्त हुए धन के द्वारा जो दोष छिपाया जाता है वह तो छिपता नहीं, उससे भिन्न और नया दोष प्रकट हो जाता है.<br />
२. अपने मन और इन्द्रियों को वश में करने वाले शिष्यों के शासक गुरु हैं. दुष्टों के शासक राजा हैं और छिपकर अधर्म और पाप कार्य करने वालों के शासक यमराज हैं.<br />
३.सज्जन पुरुष पच जाने पर अन्न की, निष्कलंक युवावस्था  बीत जाने पर स्त्री की, संग्राम जीत लेने पर शूर की और तत्व ज्ञान प्राप्त हो जाने पर तपस्वी की प्रशंसा करते हैं.<br />
४.पहली  अवस्था  में वह काम करें जो वृद्धावस्था में सुखपूर्वक रह सकें और जीवन भर वह कार्य करें जिसको मरने पर भी लोग याद करें.</p>
]]></content:encoded>
</item>
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<title><![CDATA[रामजी लगायेंगे बेडा पार]]></title>
<link>http://rajdpk.wordpress.com/2007/09/21/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%9c%e0%a5%80-%e0%a4%b2%e0%a4%97%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a5%87%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a5%87%e0%a4%a1%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%b0/</link>
<pubDate>Fri, 21 Sep 2007 03:50:23 +0000</pubDate>
<dc:creator>दीपक भारतदीप</dc:creator>
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<description><![CDATA[विश्वास धारण कर हृदय में
रामजी करेंगे ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>विश्वास धारण कर हृदय में<br />
रामजी करेंगे बेड़ा पार<br />
जलमार्ग हो या थल मार्ग या<br />
करना हो आकाश में<br />
बिना पंख विचरण<br />
कोई अगर बाधा होगी तो<br />
हृदय से स्मरण कर नाम का<br />
हो जाओगे उसके पार<br />
उनकी भक्ति में शक्ति अपार<br />
पर आएगा आड़े तुम्हारा अंहकार</p>
<p>तुम चाहोगे कि<br />
काम सब रामजी करें<br />
नाम तुम्हारा हो<br />
दूसरों के यकीन और भक्ति की<br />
परवाह नहीं<br />
बढाना चाहते अपना व्यापार<br />
दिखाते है लोगों को सपने<br />
लक्ष्य का पता नहीं अपने<br />
रामजी के नाम से बड़ा नामा<br />
क्या करेंगे लोगों का भला<br />
उनकी नजर में है बसता है अपना ही परिवार</p>
<p>रामजी ने कहा<br />
'मुझसे बडे हैं भक्त मेरे<br />
बिना लालच और लोभ<br />
मेरी भक्ति के भाव में पडे'<br />
ऐसे भक्तों की शक्ति अपार<br />
जिनका कुछ लोग भी करते व्यापार<br />
जो अभक्ति में देखते फ़ायदा<br />
वह भी लेते रामजी का नाम कई बार</p>
<p>कहैं दीपक बापू<br />
सच और झूठ का पता तो रामजी जाने<br />
पर हम तो उनकी शक्ति को माने<br />
भक्त तो नाम लेते हैं<br />
अभक्त भी लगाते पुकार<br />
पर उनसे भी क्या कहें<br />
कहीं एक क्षण भी हृदय से याद किया<br />
तो हो जाएगा उनका बेड़ा पार<br />
रामजी की माया है अपरंपार<br />
अपने भक्तों के दें भक्ति<br />
और अभक्तों को माया के चक्कर में<br />
ऐसा फंसायें कि घूमें बेकार<br />
इस धरती पर ही स्वर्ग बसाने के चाह<br />
अपनी देह के अमर होने का भ्रम<br />
व्यापार ही जिनका धर्म<br />
भक्तों की भावनाओं बेखबर<br />
जिन्होंने तय कर लिया है कि<br />
अपनी दैहिक शक्ति का प्रदर्शन दिखाएँगे<br />
रामजी के अलावा उन्हें<br />
कौन समझा सकता है कि<br />
यकीन कर लो<br />
कुछ पल हृदय से भक्ति कर लो<br />
रामजी तुम्हारा भी बेड़ा पार लगाएंगे</p>
<p>----------------------</p>
]]></content:encoded>
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