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	<title>पूंजि-बाज़ार &amp;laquo; WordPress.com Tag Feed</title>
	<link>http://wordpress.com/tag/पूंजि-बाज़ार/</link>
	<description>Feed of posts on WordPress.com tagged "पूंजि-बाज़ार"</description>
	<pubDate>Mon, 07 Jul 2008 13:24:13 +0000</pubDate>

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<title><![CDATA[कुछ "Options" के बारे में]]></title>
<link>http://thodaaur.wordpress.com/?p=13</link>
<pubDate>Sun, 16 Mar 2008 04:01:02 +0000</pubDate>
<dc:creator>नितिन पारीक</dc:creator>
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<description><![CDATA[हिन्दी ब्लाग्स में  शेयर बाज़ार पर बहु]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>हिन्दी ब्लाग्स में  शेयर बाज़ार पर बहुतु कुछ है परंतु वायदा बाज़ार पर बहुत कम. क्युं ना ज़रा कोशिश की जाये वायदा बाज़ार को साधारण भाषा में समझने की !</p>
<p> वायदा बाज़ार यानि कि "Financial Derivative Markets".  इनमें सबसे ज्यादा ताकतवर डैरेवेटिव है आप्शन. औप्शन एक agreement है. पहले देखें इसकि टेक्निकल परिभाषा.</p>
<p>The right, but not the obligation, to buy (for a call option) or sell (for a put option) a specific amount of a given stock, commodity, currency, index, or debt, at a specified price (the strike price) during a specified period of time. </p>
<p>अगर आप इस  शेत्र में नये हैं तो काफ़ी हद तक ये ऊपर से गया होगा. इसलेये इसे एक उदाहरण से समझते हैं. </p>
<p> मान लिजिये आपकी किसि मकान पर नज़र है जिसे आप खरीदना चाहते हैं. उस मकान की कीमत दस लाख है. वहिं आपके दूर के एक रिश्तेदार हैं जो अपनि आखरी सांसें गिन रहे हैं और आप उनके अकेले वारिस हैं. उनके स्वर्गवास होते हि आपके पास दस लाख रूपये आ जायेंगे और आप अपना चहेता मकान खरीद सकते हैं. समस्या है की उन छ महिनों में मकान की कीमत बढ़ गई तो. </p>
<p>समस्या का हल है औप्शन. आप उस मकान के मालिक से एक एग्रिमेंट साइन करते हैं कि वो आपको ये मकान छ महिने बाद दस लाख में बेचेगा. वो आपको ये अधिकार बेच रहा है. "There is no free lunch" के सिध्धांत के अनुसार ये अधिकार आप्को यूं हि नहिं दिया जा सकता. इसके लिये मान लिजिये आप उसे पचास रुपये देते हैं जिसे की औप्शन प्रिमियम कहा जाता है.</p>
<p>अब छ महिने बाद क्या हो सकता है. मान लिजिये उस मकान की कीमत बढ्के बारह लाख हो गई. आपको डेढ़ लाख का सीधा फ़ायदा है. यानि कि कीमतों के फ़र्क में से प्रिमियम घटा दिजिये. १५ लाख हो गई तो ४.५ लाख का फ़ायदा. यानि की आपको असिमित फ़ायदा होने कि गुंजाइश है.</p>
<p>लेकिन अगर उस मकान की कीमत आठ लाख रह गयी तो ? फ़िर आप अपना अधिकार अमल में नहिं लायेगे यानि की औप्शन को जाया (expire) होने देंगे. आपका नुक्सान हुआ सिर्फ़ प्रिमियम का यानि पचास हजार का. लेकिन फ़िर भी आप खुश हैं कि आपको मकान दस कि बजाय आठ लाख में हि मिल गया. ये है आप्शन क चमत्कार.</p>
<p> एक चीज़ पर ध्यान दें. मकान मालिक इस एग्रिमेंट पर बाध्य (obliged)  है परंतु आप नहिं. इसिलिये परिभाषा में कहा गया है "Right but not the obligation".</p>
<p>कुछ डेरिवेटिव jargon सीखें इसि उदाहरण से:-</p>
<p>K= Strike Price =10 lac</p>
<p>T= Time to expiry = 6 months</p>
<p>Initiall Spot = S0 = 10 lac</p>
<p>Option Buyer = Person paying premium and buying the right</p>
<p>Option seller= Person receiving the premium and selling the right</p>
<p>देखूं तो दुनिया में कितनि चीज़ें औप्शन ही हैं.  बीमा एक औप्शन है.  मां बाप बच्चों की पढ़ाई पर पैसा लगाके एक औप्शन हि तो खरीद रहे हैं. नुक्सान पढ़ाई के खर्च तक सिमित है और फ़ायदा कितना भी हो सकता है.</p>
<p> इसे जारी रखते हैं अगले ब्लाग तक......</p>
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