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	<title>पूजा &amp;laquo; WordPress.com Tag Feed</title>
	<link>http://wordpress.com/tag/पूजा/</link>
	<description>Feed of posts on WordPress.com tagged "पूजा"</description>
	<pubDate>Sun, 07 Sep 2008 10:13:42 +0000</pubDate>

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	<language>en</language>

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<title><![CDATA[आमजीवन के हीरे-१]]></title>
<link>http://pasand.wordpress.com/?p=286</link>
<pubDate>Sat, 31 May 2008 18:52:58 +0000</pubDate>
<dc:creator>प्रेमलता पांडे</dc:creator>
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<description><![CDATA[हमारे आसपास कुछ ऐसे लोग होते हैं जो दे]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><a href="http://pasand.wordpress.com/files/2008/06/pupa.jpg"><img class="alignnone size-medium wp-image-288" src="http://pasand.wordpress.com/files/2008/06/pupa.jpg?w=211" alt="" width="211" height="300" /></a>हमारे आसपास कुछ ऐसे लोग होते हैं जो देखने में अति साधारण होते हैं पर उनके अंदर अनेक कौशल और गुण भरे होते हैं। ऐसे ’आमजीवन के हीरे’ दिखाने की एक कोशिश है यह वर्ग कड़ी।</p>
<p>जब मेहनत और इच्छा दोनों साथ-साथ चलें तो अपार सफलताओं की संभावना रहती है। यह बात सिद्ध कर दी है बिहार के छोटे से गाँव ’अमहा’ जिला सुपौल से आयी पूजा पाठक ने ।<br />
केंद्र सरकार के कर्मचारी राजेश पाठक की बेटी ने उन्हें अपने नाम की पहचान दिला दी है। आजकल उनका परिचय पूजा के पिता के रुप में हो रहा है।<br />
जब दसवीं कक्षा का रिज़ल्ट आया तो उम्मीद के अनुसार पूजा ने ही ९२% अंक प्राप्त करके अपने संतएकनाथ सर्वोदय कन्या विद्यालय दि०गा०में सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया। फिर क्या था सभी लोग उसका नाम जान गए।<br />
प्राथमिक-शिक्षा अमहा में प्राप्त करने के बाद छ्ठवीं और सातवीं कक्षा पिपराबाज़ार ब्लॉक हैड्क्वार्टर के स्कूल में पढ़कर आठवीं में पूजा दिल्ली आगयी और पास के सरकारी स्कूल में दाखिला ले लिया।<br />
सोच-समझ कर घुलने-मिलने वाली पूजा को शहर की तेज-तर्रार सहपाठिनों ने कई बार हूट करने की कोशिश की, परंतु अपने गुणों और व्यवहार से उसने सभी को अपने साथ कर लिया। यूँ हंसी उड़ाई जाने पर खिसियाकर रो जाने वाली पूजा अध्यापिकाओं की चहेती हमेशा रही। धीरे-धीरे वह विद्यालय की सबसे प्रखर छात्रा बन गयी।<br />
मेहनत को सफलता की कुंजी मानने वाली पूजा मृदुभाषी और मिलनसार है। देखने में सीधी-सादी पर गुणों की खान है। मेंटल मेथ्स और विज्ञान की प्रतियोगिताओं में इनाम पाने वाली पूजा चुनौती स्वीकार करने में कभी भी हिचकिचाती नहीं है।<br />
पूजा की माँ एक साधारण,समझदार और घरेलू महिला हैं; वह अपनी बेटी को पढ़ा लिखाकर अपने पैरों पर खड़ा करना चाहती हैं। पूजा के पिता उसे एक बड़ी डॉक्टर के रुप में देखना चाहते हैं, जबकि पूजा स्वयं कॉमर्स वर्ग से पढ़्कर एमबीए करना चहती है। सभी ने उसके पिता को  पूजा की रुचि के अनुसार ही पढ़ाने की सलाह दी है। देखिए पूजा क्या बनती है। हम उसके सफल भविष्य की कामना करते हैं।</p>
]]></content:encoded>
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<title><![CDATA[वह दिल में एक मस्जिद है]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=968</link>
<pubDate>Mon, 21 Apr 2008 18:12:31 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
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<description><![CDATA[वह दिल में एक मस्जिद है
जिसमें रोज़ नमा]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">वह दिल में एक मस्जिद है<br />
जिसमें रोज़ नमाज़ अदा करता हूँ<br />
वह मन मन्दिर की देवी है<br />
जिसकी साँझ-सवेरे पूजा करता हूँ</span></p>
<p><span style="color:#000000;">मैं ख़तावार हूँ गुनाहे-इश्क़ का<br />
उसके दर पे रोज़ सजदे करता हूँ<br />
वह संगदिल है नरम दिल भी<br />
अपनी जान उसके सदक़े करता हूँ</span></p>
<p><span style="color:#000000;">मैंने उसके नाम से जीना जाना है<br />
मैं बेपनाह उससे मोहब्बत करता हूँ<br />
सारे जहाँ में वह ख़ुदा है मेरा<br />
मैं सिर्फ़ उसकी अक़ीदत करता हूँ</span></p>
<p><span style="color:#000000;">मैं तलबगार हूँ उसके दिल का<br />
अपना यह दिल उसके नाम करता हूँ<br />
वह सिर्फ़ो-सिर्फ़ मेरा है बस<br />
मैं हर मुक़ाबिल को पैग़ाम करता हूँ</span></p>
<p><span style="color:#000000;">" कोई एक भी नहीं मुझसा ज़माने में<br />
  एक दौर गुज़ार दोगे आज़माने में<br />
  हर हाल में जीतना मेरी फ़ितरत है<br />
  सौ उम्र लगा दोगे मुझको मिटाने में "</span></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति 'नज़र'<br />
लेखन वर्ष: २००४</p>
]]></content:encoded>
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<title><![CDATA[सच्ची इबादत]]></title>
<link>http://pasand.wordpress.com/2006/04/07/%e0%a4%b8%e0%a4%9a%e0%a5%8d%e0%a4%9a%e0%a5%80-%e0%a4%87%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a4%a4/</link>
<pubDate>Fri, 07 Apr 2006 11:15:00 +0000</pubDate>
<dc:creator>प्रेमलता पांडे</dc:creator>
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<description><![CDATA[सिर्फ मंदिर में जाकर ही पूजा नहीं होती]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>सिर्फ मंदिर में जाकर ही पूजा नहीं होती,<br />
सच तो यह है कि पूजा कि कोई जगह नहीं होती।<br />
इबादत नहीं है सिर्फ मस्ज़िद में जाकर सर झुकाना,<br />
एक और इबादत है परोपकार के काम में मन लगाना।<br />
गुरुद्वारे में मत्था टेकने से सब कुछ होगा,<br />
अगर गुरुओं की सीख को मन में भरा होगा।<br />
गिरिजाघर में सच्ची प्रार्थना कैसे होगी?<br />
अगर हमारी आत्मा जाग्रत नहीं होगी।<br />
ना समझ बनकर समय ना गवांओ,<br />
सबसे पहले अपने मन को समझाओ।<br />
पृथ्वी पर ही स्वर्ग और नरक है,<br />
इस पर ही समस्त दुर्गंध और महक़ है।<br />
जिसे मानते हो भगवान या ख़ुदा,<br />
वो ही तुम्हारी आत्मा में है नहीं तुमसे ज़ुदा।<br />
सच्ची इबादत है पृथ्वी पर प्रेम बरसाना,<br />
हिंसा और नफ़रत को जड़ से मिटाना।<br />
करनी है सेवा तो करो नदियों की,<br />
बनाए रखो पवित्रता उनकी सदियों की।<br />
रक्षा हो उन वृक्ष देवताओं की,<br />
जो रक्षा करते हैं हमारी सांसारिक वेदनाओं की।<br />
झुकाओ सिर आराध्य सूर्य के भी आगे,<br />
ब्रह्मांड का पिता है जो सृष्टि का आधार लागे।<br />
पवित्र रखो पवन को भाव-भक्ति से,<br />
कभी जीवन नहीं होगा बिन उसकी शक्ति के।<br />
करनी है पूजा अगर भगवान की,<br />
तो बढ़ाओ सामंजस्य और इज़्ज़त इंसान की।<br />
सब प्राणियों में ही ख़ुदा का वास है,<br />
जो करता है प्यार जीवों से वही उसके पास है।</p>
]]></content:encoded>
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