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	<title>बजट &amp;laquo; WordPress.com Tag Feed</title>
	<link>http://wordpress.com/tag/बजट/</link>
	<description>Feed of posts on WordPress.com tagged "बजट"</description>
	<pubDate>Mon, 07 Jul 2008 13:24:05 +0000</pubDate>

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	<language>en</language>

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<title><![CDATA[बजट अपडेट लाईव Budget live update]]></title>
<link>http://aaina2.wordpress.com/2007/02/28/%e0%a4%ac%e0%a4%9c%e0%a4%9f-%e0%a4%85%e0%a4%aa%e0%a4%a1%e0%a5%87%e0%a4%9f-%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%88%e0%a4%b5-budget-live-update/</link>
<pubDate>Wed, 28 Feb 2007 04:00:48 +0000</pubDate>
<dc:creator>जगदीश भाटिया</dc:creator>
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<description><![CDATA[	बजट पेश करने का आज से खराब दिन पी चिदंब]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>	<font size="3">बजट पेश करने का आज से खराब दिन पी चिदंबरम जी के लिये कोई नहीं हो सकता था। दुनिया भर के शेयर बाजार आज सुबह से धड़ा धड़ गिर रहे हैं। लग रहा है कि आज हमारे शेयर बाजारों पर भी खून बहेगा। :(<br />
एक दिन पहले कांग्रेस उत्तराखंड और पंजाब में हार गयी। मंहगाई से लोग त्रस्त हैं। वैसे जब सारे टी वी चैनल और समाचार पत्र कांग्रेस की हार के लिये मंहगाई को जिम्मेदार बता रहे हैं, शहरों में कांग्रेस की हार के पीछे आरक्षण और अर्जुन सिंह कितने जिम्मेदार हैं, यह भी सोचने की बात होगी।</p>
<p>आपको हिंदी में बजट के मुख्य बिंदू लगातार यहां बताये जायेंगे। उम्मीद है कि वित्तमंत्री जी महंगाई को काबू करने के उपाय करेंगे और कृषि क्षेत्र को बढ़ावा दिये जाने की कोशिश की जायेगी। यदि आपको इस विषय में रुचि है तो इस पेज को रिफ्रेश करते रहें।<br />
सेंसेक्स ४३३ प्वाईट नीचे खुला<br />
निफ्टी १५७ प्वाईंट नीचे खुला<br />
गैहूं और चावल की फ्यूचर ट्रेडिंग पर प्रतिबंध लगा।<br />
(मगर अफसोस दो राज्यों को खोने के बाद। लगता है दो राज्य खोने के बाद सरकार बदहवासी में कदम उठा रही है)<br />
<strong>बजट प्रावधान</strong><br />
शिक्षा बजट में ३५ % वृद्धी<br />
स्वास्थ्य के बजट में २२% वृद्धी<br />
आयुर्वेद पर खास ध्यान (आयुर्वेद FMCG के लिये अच्छा)<br />
कृषि को खास ध्यान<br />
अच्छे बीजों के लिये निजी कंपनियों से सहयोग लिया जायेगा<br />
खाद सब्सिडी सीधे किसानों को दिये जाने का तरीका खोजा जायेगा। सिंचाई पर खास ध्यान।<br />
गरीब ग्रामीन भूमीहीनों के लिये आम आदमी जीवन बीमा योजना, आधा प्रीमियम केंद्र सरकार देगी, बाकी आधा राज्य सरकारें।<br />
अनओर्गनाईज सेक्टर के लिये सामाजिक सुरक्षा योजना<br />
शेयर बाजार में ट्रेडिंग के लिये सभी को PAN  जरूरी<br />
रक्षा पर 96000 करोड़ की वृद्धी<br />
म्यूचल फंड के जरिये आम आदमी विदेशों में निवेश कर सकेंगे ( कीमतों को कम करने में सहायक)<br />
मुंबई को विश्व स्तर की फाईनेंशल सिटी बनाया जायेगा<br />
विकलांगों को एक लाख सरकारी नौकरियां<br />
दिल्ली कामेनवेल्थ गेम के लिये ५०० करोड़<br />
बाजार कुछ संभले<br />
सेंसेक्स अब २५० प्वाईंट नीचे (१२.१० बजे)<br />
टैक्स क्लेक्शन २७ % बढ़ा<br />
कस्टम (गैर कृषी चीजों के लिये)ड्यूटी पीक रेट १२.५ से घटा कर १० % ( कीमतों को कम करने में सहायक)<br />
सर्विस टैक्स रेट में बदलाव नहीं<br />
कुत्ते बिल्लियों के खाने का सामान सस्ता (इन्सानो का भी ध्यान करें मंत्री जी) :(<br />
पोलियेस्टर, खाने का तेल, सिंचाई उपकरण और पाईप्स  सस्ते<br />
सर्विस टैक्स में और सेवाएं शामिल</p>
<p>निजी आयकर में कुछ राहत<br />
आयकर में छूट १०००० रु से बढ़ी (आम कर देने वालों को एक हजार रु की बचत)<br />
जम्मू कश्मीर में उद्योगों को और पांच वर्ष तक करों में छूट<br />
कार्पोरेट टैक्स रेट में बदलाव नहीं<br />
एजुकेशन सेस २% से बढ़ कर ३% हुआ<br />
डिविडेंड डिस्ट्रिब्यूशन टैक्स बढ़ कर १५%<br />
IT कंपनियों पर MAT लगा<br />
IT कंपनियों में ESOP पर FBT लगा<br />
एक करोड तक के लाभ कमाने वाले कार्पोरेट्स पर सरचार्ज नहीं<br />
(बजट फुस्स लग रहा है<br />
बाजार फिर फिसले)<br />
ना आम आदमी को कुछ मिला न ही खास आदमी को<br />
बाजार लुड़के<br />
आधा घंटा तक कृषि पर बोले पर कोई बड़ी घोषणा नहीं की। कृषि का योगदान जीडीपी में घट रहा है मगर इसे बढ़ाने के लिये कुछ नहीं क्या है।<br />
कंपनियों पर टैक्स का बोझ बढ़ेगा। कुछ रिफार्म्स नहीं किये। ज्यादा ले लिया पर दिया कुछ भी नहीं।</p>
<p><strong>मेरी राय</strong></p>
<p>यह एक दिशा हीन बजट है। उम्मीद थी कि कीमतें कम करने तथा कृषि के विकास के लिये कुछ क्रांतिकारी कदम उठाये जायेंगे मगर इस दिशा में साधारण कदम भी नहीं उठाये गये। एक मौका गंवा दिया। वित्त मंत्री दबाव में लग रहे हैं। दस साल पहले वाले चिदंबरम का जलवा नहीं दिखा सके।<br />
मुझे कभी कभी लगता है कि मैडम जी, प्र मं जी, वि मं जी तथा वाम पक्ष में जबर्दस्त संवाद हीनता है। ना कोई विजन है और न ही कोई दिशा। :(<br />
</font></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[जहां आम आदमी देते हैं टैक्स और अमीर बच कर निकलते हैं ]]></title>
<link>http://aaina2.wordpress.com/2007/01/27/budget-2/</link>
<pubDate>Sat, 27 Jan 2007 17:03:24 +0000</pubDate>
<dc:creator>जगदीश भाटिया</dc:creator>
<guid>http://aaina2.wordpress.com/2007/01/27/budget-2/</guid>
<description><![CDATA[हट सकती है करों में छूट - २हमारे देश में]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font size="3"><strong>हट सकती है करों में छूट - २</strong></font><font size="3">हमारे देश में यही होता है कि आम आदमी को तो टैक्स देने पड़ते है और अमीर कई तरह की छूटों का लाभ लेकर टैक्स देने से बच निकलते हैं।</p>
<p>सर्विस टैक्स एक ऐसा टैक्स है जो कि सरकार ने लगभग 95 प्रकार की सेवाओं पर लगाया हुआ है। इनमें कई सेवाएं जैसे कि मोबाईल तथा फिक्सड फोन, कुरियर, तार भेजना, केबल, स्कूटर का बीमा, रेल टिकट एजेंट, ड्राईक्लीनिंग जैसी अन्य कई सेवाएं ऐसी हैं जो कि आम आदमी के प्रयोग की हैं। यदि आप माह में पांच हजार रुपये इन 95 सेवाओं पर खर्चते हैं तो 12.24% की दर से 612 रु हर माह सरकार को सर्विस टैक्स देते हैं। यानि साल में 7344 रु। हैरानी की बात यह है कि जहां कम्पनियों और अमीरों पर लगने वाले टैक्स घट रहे हैं, सर्विस टैक्स जो कि 1994 में केवल 5% की दर से शुरू किया गया था, बढ़ कर 12.24% हो गया। यही नहीं लगातार कर योग्य सेवाओं का दायरा भी बढता जा रहा है। अब तो शायद ही कोई सेवा बची हो जो कि करों के दायरे में न आई हो।<br />
<img align="absMiddle" src="http://aaina2.wordpress.com/files/2007/01/india-economy1.jpg" /><br />
जैसा कि मैंने अपने पिछले लेख <a href="http://aaina2.wordpress.com/2007/01/14/budget/">हट सकती है करों में छूट</a> में लिखा था 2006-07 में सरकार को विभिन्न छूटों से राजस्व हानि हुई 1,58,661 करोड़ रुपये। इसमें से बहुत बड़ा भाग बचाया बड़ी कम्पनियों ने। निजी करदाताओं को दी जाने वाली छूट से हुई हानी केवल 11,695 करोड़ रुपये ही थी।</p>
<p>निजी करदाताओं को जो छूट मिलती हैं उनमें शामिल हैं गृह ऋण पर दी जाने वाली छूट, विभिन्न बचत योजनाओं में निवेश पर छूट तथा कृषि आय पर छूट।</p>
<p>कृषि आय पर दी जाने वाली छूट को शायद ही सरकार छेड़ पाये। आने वाले राज्यों के चुनावों को देखते हुए तो यह और भी कठिन लगता है। यह एक ऐसा विषय है जिस पर अलग से एक लेख लिखा जा सकता है, वैसे साथी चिट्ठाकर इस बारे में क्या सोचते हैं यह जानना रुचिकर होगा।</p>
<p>हाउसिंग लोन पर करों में छूट देने से हाउसिंग को बढ़ावा मिलता है। इससे अर्थव्यव्स्था के मूल घटकों जैसे कि सीमेंट तथा स्टील क्षेत्रों के साथ साथ बैंकिंग को भी बढ़ावा मिलता है। कुछ हजार करोड़ बचाने के लिये हाउसिंग बूम को रोकने का काम सरकार कर पाती है या नहीं आने वाले बजट में यह देखना रुचिकर होगा।</p>
<p>छोटे करदाताओं को बचत योजनाओं में निवेश पर दी जाने वाली छूट नौकरीपेशा लोगों के लिये परेशानी का कारण हो सकती है। हो सकता है कि अभी निवेश करने पर मिलने वाली छूट जारी रहे मगर इन निवेशों में मैच्योरिटी पर मिलने वाली रकम पर टैक्स लगना शुरू हो जाये।</p>
<p>यानि लगता है कि कुल मिला सरकार को अधिक से अधिक टैक्स जुटाने के लिये आम आदमी ही मिलेगा तथा बड़े लोग एवम कम्पनियां बचते ही रहेंगे।</p>
<p>दुनिया में कई देश हैं जहां टैक्स या तो हैं ही नहीं अथवा इतने कम हैं कि इन देशों को टैक्स हैवन कहा जाता है। इनके बारे में <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Tax_haven">अंग्रेजी विकीपीडिया पर यहां</a> पढ़ें।</p>
<p></font><strong>भारतीय अर्थव्यवस्था और विकास पर अन्य लेख</strong><br />
<a href="http://aaina2.wordpress.com/2006/12/04/yahbhivikas/">यह भी रंग विकास के</a><br />
<a href="http://aaina2.wordpress.com/2006/12/01/gdp/">आम आदमी के साथ….?</a><br />
<a href="http://aaina2.wordpress.com/2006/11/28/vikas/">विकास के यह रंग</a><br />
<a href="http://aaina2.wordpress.com/2006/12/29/2007/">वर्ष 2007 होगा भारत का</a><br />
<a href="http://aaina2.wordpress.com/2007/01/10/india/">यह भी है हमारा भारत</a><br />
<a href="http://aaina2.wordpress.com/2007/01/09/economicreforms/">15 वर्षों के आर्थिक सुधार- कितने मोबाईल</a><br />
<a href="http://aaina2.wordpress.com/2007/01/14/budget/">हट सकती है करों में छूट</a></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[हट सकती है करों में छूट]]></title>
<link>http://aaina2.wordpress.com/2007/01/14/budget/</link>
<pubDate>Sun, 14 Jan 2007 14:17:19 +0000</pubDate>
<dc:creator>जगदीश भाटिया</dc:creator>
<guid>http://aaina2.wordpress.com/2007/01/14/budget/</guid>
<description><![CDATA[
जल्द ही बजट आने वाला है। बजट के आने तक ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><img src="http://aaina2.wordpress.com/files/2007/01/india-economy1.jpg" alt="" /></ol>
<p><font size="3">जल्द ही बजट आने वाला है। बजट के आने तक हम चर्चा करेंगे कि बजट में क्या होने की संभावना है और यह समझने की कोशिश करेंगे कि इसका हमारे ऊपर क्या असर हो सकता है एक निवेशक के रूप में, एक करदाता के रूप में तथा एक उपभोक्ता के रूप में। 'आईना' के इन पन्नों पर हम बजट तक इस सब की चर्चा करेंगे तथा बजट के बाद कोशिश करेंगे वास्तविक बजट प्रस्तावों को समझने की। बजट में क्या होगा इसका पहले से अनुमान लगाना बहुत कठिन होता है मगर प्रधान मंत्री तथा वित्त मंत्री के होंठों को पढ़ कर संभावित बदलावों के अनुमान लगाये जा सकते हैं।</p>
<p>प्रधान मंत्री जी ने हाल ही में कहा कि करों को तर्क संगत बनाने के लिये करों में दी जाने वाली छूटों को हटाने का समय आ गया है। इससे हम यह अंदाजा लगा सकते हैं कि करों में दी जाने वाली  भिन्न प्रकार की कर रियायतें बजट में हट सकती हैं। बजट से पहले दिये जाने वाले एस प्रकार के बयानों के केवल शाब्दिक अर्थों को ही नहीं समझना चाहिये अपितु इससे जुड़े अन्य पहलूओं पर भी विचार किया जाना चाहिये। जबकी बजट को पूर्णयता गोपनीय रखा जाता है, बजट पूर्व इस प्रकार की इशारेबाजी के कई अर्थ निकाले जा सकते हैं। हो सकता है कि सरकार कुछ बड़े परिवर्तन करना चाहती है और अचानक हुई घोषणा से लोगों को अप्रत्याशित झटका न लगे इसलियये यह इशारा किया गया। कई बार इस प्रकार के बयान लोगों कि राय जानने के लिये भी दिये जाते हैं जिससे अंतिम फैसला लेने में लोगों कि राय को भी शामिल किया जा सके। (वैसे सरकारें तब तक आमराय को इतना महत्व नहीं देतीं जबतक कि इससे उन्हें कोई राजनैतिक लाभ न हो) । क्योंकि आम चुनाव अभी दो वर्ष दूर हैं, तो किसी लोक लुभावन बजट की उम्मीद वित्त मंत्री जी से न करें। इसके विपरीत सरकार के पास यह आखिरी मौका होगा कुछ कड़वे निर्णय लेने का। </p>
<p>यहां यह भी स्पष्ट कर दूं कि सरकारें यदि कोई अच्छी घॊषणा करनी हो तो छिपा कर रखती हैं तथा बजट से पहले हमेशा इस प्रकार के बयान देने से बचतीं हैं जिनसे आम लोगों को अथवा उद्योगों या पूंजी बाजारों को बजट से बहुत अधिक सकरात्मक उम्मीदें हो जायें, क्यों कि अगर बजट इन सब की उम्मीदों पर खरा न उतरे (और ऐसा हमेशा होता है) तो इसकी नकरात्मक प्रतिक्रिया (जैसे शेयर बाजार में गिरावट) भी हो सकती है।</p>
<p>तो आइये प्रधानमंत्री जी कि इस बात को समझें और यदि ऐसा हुआ तो इसका क्या असर होगा इसे भी समझने की कोशिश करें। सबसे पहले उद्योगों द्वारा दिये जाने वाले करों की बात करते हैं। पिछले वर्ष वित्तमंत्री जी ने बजट पेश करते हुए करों में 19.3%  की वृद्धी का अनुमान लगाया था। आगामी 28 फरवरी को जब वित्तमंत्री जी बजट पेश करेंगे तो अपने ही अनुमानों से 20.000 करोड़ रु अघिक एकत्र कर चुके होंगे। यह सब संभव होगा  अर्थवयवस्था में होते तेज विकास के कारण। अब यदि सरकार इतना अधिक धन इकट्ठा कर रही है तो करों में छूट वापिस क्यों ली जा रही है। ऐसा लगता है कि सरकार छूटों को हटा कर करों की दरों को भी कम करना चाहती है जिससे करों की गणना आसान हो जाये तथा दरें तर्कसंगत और इसके साथ ही कंपनियां करों मे छूट की आड़ में टैक्स देने से बचती न रहें। </p>
<p>2006-07 में करों से राजस्व आय थी 3,17,733 करोड़ रुपये तथा विभिन्न छूटों से राजस्व हानि थी 1,58,661 करोड़ रुपये। यानि लगभग 50%&#124;<br />
करों से छूट हटा लेने का अर्थ होगा कंपनियां  अपने लाभ से सरकार को अधिक कर देंगी जिससे उनके पास शेयरधरकों को दिये जाने वाले लभांश में  कमी होगी। इसका अधिक असर बड़ी कंपनियों पर पड़ेगा।</p>
<p>करों की दरों में कमी का अर्थ होगा कंपनियों के पास लभांश देने के लिये तथा विस्तार करने के लिये अधिक धन। इसका व्यापक सकरात्मक असर होगा तथा  उम्मीद है कि बाजार हर्ष के साथ इसका स्वागत करेंगे।<br />
इससे उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों में भी कमी आने की संभावना है। </p>
<p>अगले लेख में हम चर्चा करेंगे निजी आयकर में छूट के हटने से होने वाले प्रभावों की ।</font><br />
(आंकड़े आज की टाइम्स ऑफ ईंडिया से)</p>
<p><strong>भारतीय अर्थव्यवस्था और विकास पर अन्य लेख</strong><br />
<a href="http://aaina2.wordpress.com/2006/12/04/yahbhivikas/">यह भी रंग विकास के</a><br />
<a href="http://aaina2.wordpress.com/2006/12/01/gdp/">आम आदमी के साथ….?</a><br />
<a href="http://aaina2.wordpress.com/2006/11/28/vikas/">विकास के यह रंग</a><br />
<a href="http://aaina2.wordpress.com/2006/12/29/2007/">वर्ष 2007 होगा भारत का</a><br />
<a href="http://aaina2.wordpress.com/2007/01/10/india/">यह भी है हमारा भारत</a><br />
<a href="http://aaina2.wordpress.com/2007/01/09/economicreforms/">15 वर्षों के आर्थिक सुधार- कितने मोबाईल</a></p>
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