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	<title>बन्धन &amp;laquo; WordPress.com Tag Feed</title>
	<link>http://wordpress.com/tag/बन्धन/</link>
	<description>Feed of posts on WordPress.com tagged "बन्धन"</description>
	<pubDate>Sun, 12 Oct 2008 09:45:36 +0000</pubDate>

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	<language>en</language>

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<title><![CDATA[तुम्हारी ख़ुशबू से महक उठा है मन]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=956</link>
<pubDate>Wed, 02 Apr 2008 17:03:18 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2008/04/02/tumhaarii-khushboo-se-mahak-utha-hai-man/</guid>
<description><![CDATA[तुम्हारी ख़ुशबू से महक उठा है मन
तुम्ह]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">तुम्हारी ख़ुशबू से महक उठा है मन<br />
तुम्हारे तस्व्वुर से भर आये नयन<br />
बरखा की मखमली फुहार से जी तर है<br />
धीरे-धीरे बुझ रही है दर्द की सूजन</font></p>
<p><font color="#000000">लहू फिर ज़ख़्मे-जिगर से बहा है<br />
दर्द तुम्हारा दिल में मेहमान रहा है<br />
सर्द है बरसों से यह ख़िज़ाँ का मौसम<br />
ज़र्द पत्तों में खो गया है कहीं गुलशन</font></p>
<p><font color="#000000">बहार की नर्म धूप कहीं खो गयी है<br />
मानूस वह चाँदनी किसी छत पे सो गयी है<br />
यह उदास फ़ज़िर भी कितनी तवील है<br />
दिखता नहीं दूर तक उफ़क़ का रोगन</font></p>
<p><font color="#000000">तुमको पहली नज़र से चाहा दिलो-जाँ से<br />
हर दुआ में मैंने तुमको माँगा आसमाँ से<br />
मेरी मंज़िल मेरी मोहब्बत हो तुम<br />
कैसे भी तुम मेरी बनो, जुड़ जाये बन्धन</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[इक तरफ़ वह इक तरफ़ हम]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=759</link>
<pubDate>Tue, 12 Feb 2008 17:29:16 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2008/02/12/ik-taraf-wah-ik-taraf-ham/</guid>
<description><![CDATA[इक तरफ़ वह इक तरफ़ हम
बीच में यह फ़ासले
इश्]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">इक तरफ़ वह इक तरफ़ हम<br />
बीच में यह फ़ासले<br />
इश्क़ की डोर से<br />
हमने जो बाँधे बन्धन<br />
क्या ख़बर उन पर गींठ लगी भी</font></p>
<p><font color="#000000">इश्क़ के दायरे में खड़े<br />
मगर वह साथ नहीं<br />
पल-पल बन रहा है कल<br />
क्या ख़बर वह हमसे मिलेंगे भी</font></p>
<p><font color="#000000">इक तरफ़ वह इक तरफ़ हम<br />
बीच में यह फ़ासले<br />
इश्क़ का असर है इधर<br />
दिल हमारा गुमसुम है<br />
क्या ख़बर उन पर असर हुआ भी</font></p>
<p><font color="#000000">इश्क़ में न मिले मौत<br />
और हम ज़िन्दा भी नहीं<br />
आती-जाती है वह रोज़<br />
क्या ख़बर वह फ़िरोज़ मिलेगी भी</font></p>
<p><font color="#000000">इक तरफ़ वह इक तरफ़ हम<br />
बीच में यह फ़ासले<br />
इश्क़ में निभाते हैं हम<br />
रात का सुबह से जो बन्धन<br />
क्या ख़बर वह यह हालात जानते भी</font></p>
<p><font color="#000000">इश्क़ का है यह दस्तूर<br />
क्या वह यह समझते भी<br />
कुछ नहीं है इस बात का हल<br />
क्या ख़बर वह जो हल है मिलेगा भी</font></p>
<p><font color="#000000">इक तरफ़ वह इक तरफ़ हम<br />
बीच में यह फ़ासले...</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[राहों में ढूँढ़ता हूँ कभी]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=747</link>
<pubDate>Mon, 11 Feb 2008 15:24:44 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2008/02/11/raahon-mein-dhhoomdhhata-hoon-kabhii/</guid>
<description><![CDATA[राहों में ढूँढ़ता हूँ कभी
तुम मिलती नह]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">राहों में ढूँढ़ता हूँ कभी<br />
तुम मिलती नहीं यह भी सही<br />
जानो न जानो प्यार क्या<br />
है यह इक नशा-सा<br />
उतरता नहीं आँखों से पलकों पर भी</font></p>
<p><font color="#000000">चाहता है दिल यह, पास तुम रहो<br />
कोई तस्वीर जो आँखों में<br />
छुपाकर रखी थी<br />
समझता नहीं क्यों मैं<br />
कि वह हक़ीक़त हो नहीं सकती</font></p>
<p><font color="#000000">राहों में ढूँढ़ता हूँ कभी<br />
तुम मिलती नहीं यह भी सही</font></p>
<p><font color="#000000">इक़रार है ज़ुबाँ पर<br />
क्या करूँ दिल राज़ी नहीं<br />
हो रहा जो अभी<br />
पहले ऐसा कभी हुआ नहीं<br />
सपनों पर अपने अब यक़ीं रहा नहीं</font></p>
<p><font color="#000000">क्या करूँ अभी वह मैं जानता नहीं<br />
इक सवाल है दिल में मेरे<br />
जो कभी तुम मिलो<br />
तो पूछ लूँगा तुम्हीं से हमनशीं<br />
क्या तुम मिलोगी मुझसे कभी</font></p>
<p><font color="#000000">राहों में ढूँढ़ता हूँ कभी<br />
तुम मिलती नहीं यह भी सही</font></p>
<p><font color="#000000">आ जाओ यहाँ तुम तोड़कर बन्धन<br />
तेरा इन्तिज़ार करता हूँ<br />
समझता था जो पहले वह था ग़लत<br />
जब तुम नज़रों में समाये<br />
तब जाके जाना क्या ग़लत क्या सही</font></p>
<p><font color="#000000">राहों में ढूँढ़ता हूँ कभी<br />
तुम मिलती नहीं यह भी सही...</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
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