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	<title>बेज़ार &amp;laquo; WordPress.com Tag Feed</title>
	<link>http://wordpress.com/tag/बेज़ार/</link>
	<description>Feed of posts on WordPress.com tagged "बेज़ार"</description>
	<pubDate>Sat, 17 May 2008 02:47:56 +0000</pubDate>

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	<language>en</language>

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<title><![CDATA[खिली-खिली महकी बहारें हैं]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=971</link>
<pubDate>Wed, 07 May 2008 02:35:50 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
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<description><![CDATA[खिली-खिली महकी बहारें हैं
झीलों पर बहत]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">खिली-खिली महकी बहारें हैं<br />
झीलों पर बहते शिकारें हैं<br />
ठण्डी-ठण्डी सौंधी हवाएँ हैं<br />
गीले पत्तों को खनकाएँ हैं</span></p>
<p><span style="color:#000000;">जाने कैसी तलब जागी है<br />
जाने किसका इन्तिज़ार है<br />
बेज़ार-सा यह दिल मेरा<br />
किसके लिए गुलज़ार है</span></p>
<p><span style="color:#000000;">आज ऐसा क्यों लग रहा है<br />
नये-नये सब नज़ारें हैं<br />
खिली-खिली महकी बहारें हैं<br />
झीलों पर बहते शिकारें हैं</span></p>
<p><span style="color:#000000;">शबनमी रातों का यह चाँद<br />
और उजली-उजली चाँदनी<br />
आइनाए-दिल में कौन यार है<br />
इश्क़ जिससे वजहसार है</span></p>
<p><span style="color:#000000;">बंजर ज़मीने-दिल से आज<br />
उलझे हुए मखमली धारे हैं<br />
खिली-खिली महकी बहारें हैं<br />
झीलों पर बहते शिकारें हैं</span></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति 'नज़र'<br />
लेखन वर्ष: २००४</p>
]]></content:encoded>
</item>
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<title><![CDATA[एक मेरा सपना तू ही तो थी]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=810</link>
<pubDate>Mon, 18 Feb 2008 18:25:39 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=810</guid>
<description><![CDATA[एक मेरा सपना तू ही तो थी जाना
दूर जो गयी]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">एक मेरा सपना तू ही तो थी जाना<br />
दूर जो गयी तू हो गया वह बेग़ाना<br />
इंतिज़ार तेरा करता हूँ तेरी क़सम<br />
हर लम्हा तेरा नाम जपता हूँ सनम<br />
हाल मेरा बद से बद्तर हो गया है<br />
ज़िंदगी का हर पल बेज़ार हो गया है</font></p>
<p><font color="#000000">एक मेरा सपना तू ही तो थी जाना<br />
दूर जो गयी तू हो गया वह बेग़ाना<br />
अब तेरी राहों में रहता हूँ यार मेरे<br />
कर दिये नाम तेरे मैंने दिन-रात मेरे<br />
तेरी साँसों की ख़ुशबू, बसी है मन मे‍<br />
खिलते हैं जो गुल यार तू है उनमें</font></p>
<p><font color="#000000">एक मेरा सपना तू ही तो थी जाना<br />
दूर जो गयी तू हो गया वह बेग़ाना<br />
सीख रहा हूँ मैं, तन्हा कैसे रहते हैं<br />
तन्हा रहकर, कैसे हर पल जीते हैं</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
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<title><![CDATA[ख़ाली सीने में कुछ धुँआ-धुँआ-सा है]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/12/25/%e0%a4%96%e0%a4%bc%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a5%80%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%81%e0%a4%9b-%e0%a4%a7%e0%a5%81%e0%a4%81%e0%a4%86-%e0%a4%a7%e0%a5%81/</link>
<pubDate>Tue, 25 Dec 2007 13:10:16 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
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<description><![CDATA[ख़ाली सीने में कुछ धुँआ-धुँआ-सा है
जिस ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">ख़ाली सीने में कुछ धुँआ-धुँआ-सा है<br />
जिस सिम्त देखता हूँ दिल बदगुमाँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">दर्द को दर्द हो ऐसा होता नहीं<br />
इसीलिए ख़ातिर में यह नौ-जवाँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">ख़ुदा ही मेहर से मैं रहा सदियों के फ़ासले पे<br />
आज भी वह ना-मेहरबाँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">ढूँढ़ता हूँ मैं ख़ुद को उस गली में<br />
जिसमें मुझे ज़िन्दगी होने का नुमाया-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">रोशनी में भिगो दिया शबे-महफ़िल को जिसने<br />
तेरी रंगत का शुआ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">एहसासात दफ़्न हैं किसी कब्र में<br />
दर्द दिल का आज कुछ बे-ज़ुबाँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">खींच लिया जिगर को दाँतों से लब तक<br />
आज महफ़िल में यह कमनुमा-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">तेरी दीद से बादशाहत मिली थी मुझे<br />
ज़ख़्म कहता है तेरा साया हुमा-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">बदनसीबी गर्दिशे-अय्याम है बस<br />
वक़्त यह एक इम्तिहाँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">तमाशा बहुत हुआ तेरे जाने के बाद<br />
जो कुछ भी हुआ ज़ख़्मे-निहाँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">शज़र बेसमर हैं नकहते-गुल भी नहीं<br />
मौसम यह ज़र्द ख़िज़ाँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">ज़ीस्त नवाज़ी गयी सो जी रहे हैं<br />
मगर जीना मुश्किल मरना आसाँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">मैं गर तेरा तस्व्वुर करूँ<br />
बूँद-बूँद शबनम का गिरना भी गिरियाँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">तुम नहीं गुज़रते इस राह से<br />
मेरी गली का हर पत्थर रेगिस्ताँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">वह उजाले जिनसे चौंक गयीं थीं मेरी आँखें<br />
मंज़र वह भी कहकशाँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">ना पूछ कब से तेरे दीवानों में शामिल हूँ<br />
हाल मेरा भी कुछ-कुछ बियाबाँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">नीली शाल में लिपटी देखा था तुझे<br />
तब से जाना कि चाँद किसी माहलक़ा-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">तुम आये घर मेरे आस्ताने तक<br />
कि अब का'बा ही मेरे सँगे-आस्ताँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">इश्क़ में हमसा न पायेगा कोई<br />
न होना मेरा उनकी बज़्म में हरमाँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">हम वस्ल की तमन्ना में मुए जाते हैं<br />
ज़ुज तेरे सभी से वस्ल हिज्राँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">शगून तेरे देखने भर से होता था<br />
आज इन आँखों में हर क़तरा टूटा-टूटा-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">बेज़ार है चमन तितली ज़र कैसे पिये<br />
अब कि मौसम भी कुछ बेईमाँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">ज़हर हमको दिया दवा बता के ख़ुदा ने<br />
ज़ीस्त जो बख़्शी यह भी सौदा-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">'नज़र' बातें हैं बहुत उसके इश्क़ो-ग़म में<br />
जिसका दिल पर निशाँ-सा है</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
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