सच्ची इबादत सिर्फ मंदिर में जाकर ही पूजा नहीं होती, सच तो यह है कि पूजा कि कोई जगह नहीं होती। इबादत नहीं है सिर्फ मस्ज़िद में जाकर सर झुकाना, एक और इबादत है परोपकार के काम में मन लगाना। गुरुद्वारे में… more →
पसंदwrote 1 month ago: आज मेरी जन्मदाती माँ “”स्वर्गीय श्रीमती कमला देवी”" की “”पंचम पुण्यतिथ … more →
wrote 3 years ago: सच्ची इबादत सिर्फ मंदिर में जाकर ही पूजा नहीं होती, सच तो यह है कि पूजा कि कोई जगह नहीं होती। इबादत … more →
wrote 3 years ago: कन्हैया पर पुरानी पोस्ट पुनर्प्रकाशित है। एक बार कुछ और भी लिखा था। कन्हैया जन्मे त्रिभुवन हरषे पुष् … more →
wrote 4 years ago: ओ मुनिया! अरी ओ मुनिया! जल्दी से उठ जा! सुनती है न? सुनती? उठ जा! सवेरो ह्वै गयो है, लाला उठ गयो है, … more →
wrote 4 years ago: धरती से है दिन और रात, फिर कैसी यह बात? झेंप मिटाने की साजिश , या बाज़ार की है ख़ारिश? … more →
wrote 4 years ago: देश-प्रेम की बात करो मत, देश-प्रेम करके दिखलाओ! वीर वो ही नहीं जो आजादी के लिए लड़े, वीर वो भी हैं जो … more →
wrote 4 years ago: जब टूटी सड़कें बनने लगें, जब नेता परेशानी सुनने लगें, जब हर दुकान और दफ़्तर में, ज़ोर-ज़ोर से बहसें होने … more →
wrote 4 years ago: हमेशा कौन जिया है? किसने अमरता का घूँट पिया है? यह तो एक पहेली है, जीवन की परम सहेली है। नक्षत्र, ता … more →
wrote 4 years ago: होली का बहाना हमें प्यार है उड़ाना पहल कर दिखाना। ये रंगी हवाएं फूलों को झुलाएं हमें पास बुलाएं लेतीं … more →
wrote 4 years ago: १ धरातल सपाट हो गया है गेंद घूमती ही जा रही है! पानी रुक नहीं पा रहा है, अरे! ब्रेक कब लगाऊँ? ढ़लान … more →
wrote 4 years ago: ’प्यार की बात न हो तो अच्छा है, बिन बात ही प्यार होतो सच्चा है। प्यार की बात का तो अर्थ होता है, प्य … more →
wrote 4 years ago: रात और सन्नाटा! तब चुपचाप! आ ना! अतिरेक और अतिरेक! हसाना-रुलाना! और घुमाना! होश संहालने से अबतक, सबक … more →
wrote 4 years ago: क्या कहा? तुम प्यार करते हो ? नहीं। तुम दिखावा करते हो। तुम इन्टरफ़ियर करते हो। क्या कहा? तुम मदद करत … more →
wrote 4 years ago: फूल तो खिल रहे हैं बाग़ में, पर मुझे उनका सौंदर्य रिझाता नहीं, चाँद की चाँदनी में लगे है तपिश, तारों … more →
wrote 5 years ago: ठंड न जाए, बादल भी छाए , हवा हि सताए, तो क्या बसंत है? पतझड़ बहारें, सूखी हैं डालें, पंछी न गावें, तो … more →
wrote 5 years ago: नारी तुम तो आराध्य हो, पर पुरुष कहता असाध्य हो! यह कैसी विडंबना है? पुरुष की कुरंगना है? पर तुम तो स … more →
wrote 5 years ago: स्त्री ने आवाज उठायी है, उसने पुनः ऊँचाई पायी है, पर उससे पहले पार की एक खाई है। पहले भी वह ऊँची थी, … more →
wrote 5 years ago: भारतवर्ष, नायाब जनतंत्र, एकता मंत्र। जाने जहान, जगत अभिमान, हिंद महान। सुयोग्य हर, हिं … more →
wrote 5 years ago: ओ दुनिया के ठेकेदारों! अपनी-अपनी कहने वालों! सबकी बात सुनो! वरना चुप रहो। आज क्लांत वसुंधरा है, भ्र … more →