प्रेमलता पांडे wrote 2 years ago: चाँदनी रात हरेक को प्रभावित करती है। … more →
प्रेमलता पांडे wrote 2 years ago: दया धर्म की मूल है, आज हो गयी फिजूल है, द … more →
प्रेमलता पांडे wrote 2 years ago: देश प्रेम की बात करो मत, देश प्रेम करके … more →
प्रेमलता पांडे wrote 2 years ago: यह भारत भूमि की कहानी है, जिसकी मिसाल … more →
प्रेमलता पांडे wrote 2 years ago: हम बड़े भक्त हैं, रहते सदा संत हैं, पर जब … more →
प्रेमलता पांडे wrote 2 years ago: संवेदना चाहे प्राकृतिक आपदा आएँ या फि … more →
प्रेमलता पांडे wrote 2 years ago: कबूतर के अंडों को देखकर कौआ यूँ ताकता … more →
प्रेमलता पांडे wrote 2 years ago: क्रोध मनुष्य का शत्रु क्रोध है, जो जीव … more →
प्रेमलता पांडे wrote 2 years ago: आँसू एक द्रव पदार्थ होता है, जिसका संब … more →
प्रेमलता पांडे wrote 2 years ago: सुख की परिभाषा भिन्न-भिन्न हैं, किसी क … more →
प्रेमलता पांडे wrote 2 years ago: भूख भूख तो सभी को लगती है, पर सहनी सबसे … more →
प्रेमलता पांडे wrote 2 years ago: कल्पना करो कल्पना की, उसके भावों की अल … more →
प्रेमलता पांडे wrote 2 years ago: मेरा तुमसे क्या संबंध है? जिसमें ना को … more →
प्रेमलता पांडे wrote 2 years ago: मेरे घर एक कबूतर और उसकी रानी हैं, बिन क … more →
प्रेमलता पांडे wrote 2 years ago: १ राह चलते चलते पत्थर से जो टकराया, बड़ी … more →
प्रेमलता पांडे wrote 2 years ago: हमें तो सच बोलना सिखाया, झूठ के ख़िलाफ ल … more →
प्रेमलता पांडे wrote 2 years ago: समय के साथ चलो नयी नयी बात करो नयी सुबह … more →
प्रेमलता पांडे wrote 2 years ago: (नागफनी का तर्क) मैं कांटों की झाड़ हूं, … more →
प्रेमलता पांडे wrote 2 years ago: तुम! मां हो मेरा पूरा जहां हो। संसार मे … more →