Blogs about: भ्रम

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यथार्थ या भ्रम !12 comments

induravisinghj wrote 6 months ago: तुम थे कि भ्रम था भ्रम था कि तुम थे अब न तुम ,न भ्रम पर कुछ है जो अब भी है सत्य है यथार्थ है यही सोच … more →

टैग: कविता, जीवन, यथार्थ

चिंता और अनिश्चितता को मिटाने का भ्रम

yvchawla wrote 9 months ago: मन पूर्ण संतुष्टि की अवस्था को नहीं जानता। यह केवल ‘चिंता और अनिश्चितता’ से बचने या उसको मिटाने का आ … more →

टैग: psycho-spiritual, अनिश्चितता, मूल, चिंता, आशा

दुख और अनिश्चितता का प्रतिरोध

yvchawla wrote 1 year ago: दुख और अनिश्चितता के प्रतिरोध को समाप्त नहीं किया जा सकता। इनको अपने अंदर सम्माहित करने में ही सारा … more →

टैग: psycho-spiritual, दुख, अनिश्चितता, प्रतिरोध

प्यार एक भ्रम है35 comments

induravisinghj wrote 1 year ago: प्यार एक मात्र भ्रम है इससे अधिक कुछ नहीं,हाँ सभी को इसका अलग-अलग ग़ुमां ज़रूर होता है। कोई प्यार मे … more →

टैग: अभिलेख, प्यार, यथार्थ, बावरा

कौन सी उड़ानें !

agyatmitra wrote 1 year ago: हम अज़नबियॊं की उड़ानॊं से भ्रमित अपने धरातल से अनिभिज्ञ, अपनी आंखॊं पर रंगी पर्दे ड़ाले , अपने इन्द … more →

टैग: Illusion, पहचान, identity, Science, विज्ञान

हां खुद से अनशन करता हूं...

कुमार आदित्‍य wrote 1 year ago: खुद से अनशन कर बैठा हूं, आखिर मैं चुप क्‍यों बैठा हूं ? दूर है मंजिल, राह कठिन है, फिर क्‍यों में थक … more →

टैग: कविता, कहानी, अनशन, मंजिल, राह, थककर, जन्‍म, चाल, संकल्‍प

गलती करने का भय2 comments

yvchawla wrote 1 year ago: मन इस भ्रम में रहता है कि वह कोई गलत फैसला ना कर ले। हम डरते हैं कि कुछ गलत ना हो जाए। हम (टैक्नीकल … more →

टैग: psycho-spiritual, मन, मूल ऊर्जा

खुद को ग़ज़ल में शरण दे रहा हूँ...

स्वप्नेश चौहान wrote 2 years ago: जो सींचा है अब तक वो शज़र दे रहा हूँ, मैं खुद को ग़ज़ल में शरण दे रहा हूँ। जो अब तक थी दिल में वो दि … more →

टैग: ग़ज़ल, सींचा, शज़र, शरण, दिल, खलल, निशानी

3 comments

agyatmitra wrote 3 years ago: सफ़र है पर मंजिल नहीं, मोड़ आये तो क्या कीजेकामयाबी से क्या डरना, चलिए कुछ नया कीजे  मुश्किल  कुछ  न … more →

टैग: आसमान, कामयाबी, फकीरी, काफिले, दिशा


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