मन पूर्ण संतुष्टि की अवस्था को नहीं जानता। यह केवल ‘चिंता और अनिश्चितता’ से बचने या उसको मिटाने का आराम ढूंढता रहता है। यह इसी आराम को स्थिर करने की आशा में रहता है और इसी भ्रम में उलझा रहता है जब तक… more →
fundamentalexpressionswrote 6 months ago: तुम थे कि भ्रम था भ्रम था कि तुम थे अब न तुम ,न भ्रम पर कुछ है जो अब भी है सत्य है यथार्थ है यही सोच … more →
wrote 9 months ago: मन पूर्ण संतुष्टि की अवस्था को नहीं जानता। यह केवल ‘चिंता और अनिश्चितता’ से बचने या उसको मिटाने का आ … more →
wrote 1 year ago: दुख और अनिश्चितता के प्रतिरोध को समाप्त नहीं किया जा सकता। इनको अपने अंदर सम्माहित करने में ही सारा … more →
wrote 1 year ago: प्यार एक मात्र भ्रम है इससे अधिक कुछ नहीं,हाँ सभी को इसका अलग-अलग ग़ुमां ज़रूर होता है। कोई प्यार मे … more →
wrote 1 year ago: हम अज़नबियॊं की उड़ानॊं से भ्रमित अपने धरातल से अनिभिज्ञ, अपनी आंखॊं पर रंगी पर्दे ड़ाले , अपने इन्द … more →
wrote 1 year ago: खुद से अनशन कर बैठा हूं, आखिर मैं चुप क्यों बैठा हूं ? दूर है मंजिल, राह कठिन है, फिर क्यों में थक … more →
wrote 1 year ago: मन इस भ्रम में रहता है कि वह कोई गलत फैसला ना कर ले। हम डरते हैं कि कुछ गलत ना हो जाए। हम (टैक्नीकल … more →
wrote 2 years ago: जो सींचा है अब तक वो शज़र दे रहा हूँ, मैं खुद को ग़ज़ल में शरण दे रहा हूँ। जो अब तक थी दिल में वो दि … more →
wrote 3 years ago: सफ़र है पर मंजिल नहीं, मोड़ आये तो क्या कीजेकामयाबी से क्या डरना, चलिए कुछ नया कीजे मुश्किल कुछ न … more →