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	<title>मंज़िल &amp;laquo; WordPress.com Tag Feed</title>
	<link>http://wordpress.com/tag/मंज़िल/</link>
	<description>Feed of posts on WordPress.com tagged "मंज़िल"</description>
	<pubDate>Sat, 30 Aug 2008 09:45:58 +0000</pubDate>

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	<language>en</language>

<item>
<title><![CDATA[तुम्हारी ख़ुशबू से महक उठा है मन]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=956</link>
<pubDate>Wed, 02 Apr 2008 17:03:18 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=956</guid>
<description><![CDATA[तुम्हारी ख़ुशबू से महक उठा है मन
तुम्ह]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">तुम्हारी ख़ुशबू से महक उठा है मन<br />
तुम्हारे तस्व्वुर से भर आये नयन<br />
बरखा की मखमली फुहार से जी तर है<br />
धीरे-धीरे बुझ रही है दर्द की सूजन</font></p>
<p><font color="#000000">लहू फिर ज़ख़्मे-जिगर से बहा है<br />
दर्द तुम्हारा दिल में मेहमान रहा है<br />
सर्द है बरसों से यह ख़िज़ाँ का मौसम<br />
ज़र्द पत्तों में खो गया है कहीं गुलशन</font></p>
<p><font color="#000000">बहार की नर्म धूप कहीं खो गयी है<br />
मानूस वह चाँदनी किसी छत पे सो गयी है<br />
यह उदास फ़ज़िर भी कितनी तवील है<br />
दिखता नहीं दूर तक उफ़क़ का रोगन</font></p>
<p><font color="#000000">तुमको पहली नज़र से चाहा दिलो-जाँ से<br />
हर दुआ में मैंने तुमको माँगा आसमाँ से<br />
मेरी मंज़िल मेरी मोहब्बत हो तुम<br />
कैसे भी तुम मेरी बनो, जुड़ जाये बन्धन</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[ज़िन्दगी ढूँढ़ते-ढूँढ़ते मैं तुम तक आ गया]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=954</link>
<pubDate>Mon, 31 Mar 2008 11:45:52 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=954</guid>
<description><![CDATA[ज़िन्दगी ढूँढ़ते-ढूँढ़ते मैं तुम तक आ ग]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">ज़िन्दगी ढूँढ़ते-ढूँढ़ते मैं तुम तक आ गया<br />
सरे-राह मैं अपनी मंज़िल पा गया<br />
चराग़ों का नूर हो, चश्मे-बद्दूर हो<br />
तुम्हें देखकर दिल अँधेरों से दूर आ गया</font></p>
<p><font color="#000000">ख़ुशियों के दीप जल उठे, ग़म सारे बुझ गये<br />
पतझड़ उतरा, गुल शाख़-शाख़ खिल गये<br />
इक-इक धड़कन में नाम तुम्हारा है<br />
तुम्हारी मोहब्बत का जादू मुझपे छा गया</font></p>
<p><font color="#000000">ख़ुशबू-ख़ुशबू मैंने तुमको पाया सनम<br />
मोहब्बत में तेरी ख़ुद को मिटाया सनम<br />
तेरी पहली नज़र से क़त्ल हुआ था मैं<br />
लहू के हर क़तरे में तेरा प्यार समा गया</font></p>
<p><font color="#000000">राज़ दिल के सभी आँखों से बयाँ कर दो<br />
राहे-मुहब्बत मेरी तुम आसाँ कर दो<br />
नहीं कोई अरमाँ तेरी चाहत के सिवा<br />
बस तेरा ही चेहरा दिलो-दिमाग़ पे छा गया</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[पहली नज़र का पहला प्यार]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=859</link>
<pubDate>Thu, 28 Feb 2008 12:07:10 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=859</guid>
<description><![CDATA[पहली नज़र का पहला प्यार कर गया दीवाना
म]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">पहली नज़र का पहला प्यार कर गया दीवाना<br />
मेरा दिल यह बेचारा हो गया आशिक़ाना<br />
आँखों में बेताबी है, चैन कहाँ है<br />
डरता हूँ कहीं कोई बन जाये ना अफ़साना</font></p>
<p><font color="#000000">फूल हँसें हैं सारे, दिल धड़का है<br />
ठण्डी साँसों में जैसे शोला भड़का है<br />
उसका चेहरा चाँद है, नूर है<br />
लड़की नहीं वह इक हूर है<br />
थाम के दिल मैं राहों में खड़ा हूँ कि<br />
हो जाऊँ उसके तीरे-नज़र का निशाना</font></p>
<p><font color="#000000">पहली नज़र का पहला प्यार कर गया दीवाना<br />
अब मैं दिल में उसके बनाऊँगा आशियाना<br />
वह मेरी अब इक मंज़िल है<br />
उसकी बाँहो के सिवा कहाँ कोई मेरा ठिकाना</font></p>
<p><font color="#000000">उसको देखकर जी नहीं भरता है<br />
कैसे जताये उसे उस पर मरता है<br />
भोली-भाली वह सबसे जुदा है<br />
सबसे निराली उसकी अदा है<br />
आये वह कभी जो मेरी दुनिया में तो<br />
छोड़ दूँ उसके लिए मैं यह सारा ज़माना</font></p>
<p><font color="#000000">पहली नज़र का पहला प्यार कर गया दीवाना<br />
मेरा दिल यह बेचारा हो गया आशिक़ाना</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: ०८ मई २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[हूँ चल रहा उस राह पर जिसकी कोई मंज़िल नहीं]]></title>
<link>http://rohitler.wordpress.com/2008/02/20/%e0%a4%b9%e0%a5%82%e0%a4%81-%e0%a4%9a%e0%a4%b2-%e0%a4%b0%e0%a4%b9%e0%a4%be-%e0%a4%89%e0%a4%b8-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b9-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%95/</link>
<pubDate>Wed, 20 Feb 2008 06:37:01 +0000</pubDate>
<dc:creator>Rohit Jain</dc:creator>
<guid>http://rohitler.wordpress.com/2008/02/20/%e0%a4%b9%e0%a5%82%e0%a4%81-%e0%a4%9a%e0%a4%b2-%e0%a4%b0%e0%a4%b9%e0%a4%be-%e0%a4%89%e0%a4%b8-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b9-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%95/</guid>
<description><![CDATA[हूँ चल रहा उस राह पर जिसकी कोई मंज़िल नह]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="font-size:10pt;color:#62686f;font-family:Mangal;">हूँ चल रहा उस राह पर जिसकी कोई मंज़िल नहीं</span><span style="font-size:10pt;color:#62686f;font-family:Verdana;"><br />
</span><span style="font-size:10pt;color:#62686f;font-family:Mangal;">है</span><span style="font-size:10pt;color:#62686f;font-family:Verdana;"> </span><span style="font-size:10pt;color:#62686f;font-family:Mangal;">जुस्तजू उस शख़्स की जो कभी हासिल नहीं</span><span style="font-size:10pt;color:#62686f;font-family:Verdana;"></p>
<p></span><span style="font-size:10pt;color:#62686f;font-family:Mangal;">वहम जाने ये मेरे इस दिल को क्योंकर</span><span style="font-size:10pt;color:#62686f;font-family:Verdana;"> </span><span style="font-size:10pt;color:#62686f;font-family:Mangal;">हो गया</span><span style="font-size:10pt;color:#62686f;font-family:Verdana;"><br />
</span><span style="font-size:10pt;color:#62686f;font-family:Mangal;">कुछ भी कर लूं मै मगर मै जीत के काबिल नहीं</span><span style="font-size:10pt;color:#62686f;font-family:Verdana;"></p>
<p></span><span style="font-size:10pt;color:#62686f;font-family:Mangal;">मै खड़ा हूँ आज देखो</span><span style="font-size:10pt;color:#62686f;font-family:Verdana;"> </span><span style="font-size:10pt;color:#62686f;font-family:Mangal;">इश्क़ की दहलीज़ पर</span><span style="font-size:10pt;color:#62686f;font-family:Verdana;"><br />
</span><span style="font-size:10pt;color:#62686f;font-family:Mangal;">पार निकलूं या रुकूं इस से बड़ी मुश्किल नहीं</span><span style="font-size:10pt;color:#62686f;font-family:Verdana;"></p>
<p></span><span style="font-size:10pt;color:#62686f;font-family:Mangal;">एक महफ़िल</span><span style="font-size:10pt;color:#62686f;font-family:Verdana;"> </span><span style="font-size:10pt;color:#62686f;font-family:Mangal;">में हज़ारों महफ़िलें हैं हर तरफ़</span><span style="font-size:10pt;color:#62686f;font-family:Verdana;"><br />
</span><span style="font-size:10pt;color:#62686f;font-family:Mangal;">दिल में तन्हाई की महफ़िल क्या कोई महफ़िल</span><span style="font-size:10pt;color:#62686f;font-family:Verdana;"> </span><span style="font-size:10pt;color:#62686f;font-family:Mangal;">नहीं</span><span style="font-size:10pt;color:#62686f;font-family:Verdana;"></p>
<p></span><span style="font-size:10pt;color:#62686f;font-family:Mangal;">ज़िंदगी बेमक़सदी का दूसरा इक नाम है</span><span style="font-size:10pt;color:#62686f;font-family:Verdana;"><br />
</span><span style="font-size:10pt;color:#62686f;font-family:Mangal;">कह दो किस की ज़िंदगी में दर्द ये</span><span style="font-size:10pt;color:#62686f;font-family:Verdana;"> </span><span style="font-size:10pt;color:#62686f;font-family:Mangal;">शामिल नहीं</span><span style="font-size:10pt;color:#62686f;font-family:Verdana;"></p>
<p></span><span style="font-size:10pt;color:#62686f;font-family:Mangal;">रोहित जैन</span><span style="font-size:10pt;color:#62686f;font-family:Verdana;"><br />
19-11-2007</span></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[ख़ामोशी ही ख़ामोशी है]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=814</link>
<pubDate>Mon, 18 Feb 2008 20:16:17 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=814</guid>
<description><![CDATA[ख़ामोशी ही ख़ामोशी है अंधेरी रातों मे]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">ख़ामोशी ही ख़ामोशी है अंधेरी रातों में<br />
चाँद भी कहीं खो गया है तारों में</font></p>
<p><font color="#000000">तन्हाई है तन-मन में,<br />
ख़ाबों का आशियाँ बनाया था हमने<br />
वह बिखरा पड़ा है यहीं-कहीं पे,<br />
फूल-पत्तों का मौसम जा चुका है<br />
पतझड़ लगा है बरसने...<br />
पीले पत्ते लगे हैं गिरने...</font></p>
<p><font color="#000000">ख़ामोशी ही ख़ामोशी है अंधेरी रातों में<br />
चाँद भी कहीं खो गया है तारों में</font></p>
<p><font color="#000000">मौसम के फूलों में जो ख़ुशबू थी<br />
वह अब नहीं है उनमें,<br />
कैसे बेरंग हुए सब यहाँ पर<br />
कोई अपना नहीं है इनमें,<br />
बादलों का मौसम आ रहा है<br />
सावन लगा है तरसने...</font></p>
<p><font color="#000000">ख़ामोशी ही ख़ामोशी है अंधेरी रातों में<br />
चाँद भी कहीं खो गया है तारों में</font></p>
<p><font color="#000000">अब कहाँ है रोशनी मैं हूँ बेख़बर,<br />
जाने कब होगा ख़त्म<br />
मंज़िलों का यह तन्हा सफ़र,<br />
जाने कब आयेगा वह मेरा हमसफ़र<br />
दिल बेख़बर, दिल बेसबर...<br />
दिल बेसबर, दिल बेख़बर...</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[जब प्यार किसी से होता है]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=804</link>
<pubDate>Mon, 18 Feb 2008 14:34:56 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=804</guid>
<description><![CDATA[एक ख़ुशबू जाने कहाँ से आयी है
कुछ दिनो]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">एक ख़ुशबू जाने कहाँ से आयी है<br />
कुछ दिनों से दिल पर छायी है<br />
शायद, शायद ऐसा तब लगता है<br />
जब प्यार किसी से होता है</font></p>
<p><font color="#000000">ख़ाबों में जाने कौन आने लगा है<br />
रातों को नींदें चुराने लगा है<br />
शायद, शायद ऐसा तब होता है<br />
जब प्यार किसी से होता है</font></p>
<p><font color="#000000">जब से वह ख़ाबों में आया है<br />
दिल बेचैन रहने लगा है<br />
उसको सामने हर पल देखने को<br />
दिल बेताब रहने लगा है</font></p>
<p><font color="#000000">शायद, शायद ऐसा तब लगता है<br />
जब प्यार किसी से होता है </font></p>
<p><font color="#000000">अन्जाना नहीं जाना-पहचाना है<br />
सपना है उसको अपना बनाना है<br />
शायद, शायद ऐसा तब होता है<br />
जब प्यार किसी से होता है</font></p>
<p><font color="#000000">अब वह मेरी मंज़िल बन गयी<br />
अब वह मेरा सपना है<br />
वह दिल की धड़कन बन गयी<br />
अब वह मेरी तमन्ना है</font></p>
<p><font color="#000000">शायद, शायद ऐसा तब लगता है<br />
जब प्यार किसी से होता है</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[यह दिल क्यूँ किसी का होना चाहे]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=794</link>
<pubDate>Sun, 17 Feb 2008 10:52:29 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=794</guid>
<description><![CDATA[यह दिल क्यूँ किसी का होना चाहे
जाये जा]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">यह दिल क्यूँ किसी का होना चाहे<br />
जाये जाँ, जाये क्यों न जान ही<br />
मगर यह दिल किसी का होना चाहे</font></p>
<p><font color="#000000">जबसे मेरी उनसे नज़र मिली है<br />
दिल को जैसे नयी मंज़िल मिली है<br />
पहली बारिश में दिल भीगना चाहे</font></p>
<p><font color="#000000">यह दिल क्यूँ किसी का होना चाहे<br />
जाये जाँ, जाये क्यों न जान ही<br />
मगर यह दिल किसी का होना चाहे</font></p>
<p><font color="#000000">देखते रहना जी भरकर देखते रहना<br />
जायें न जब तक उन्हें ताकते रहना<br />
डूबना निगाहों में उनकी मेरा डूबना</font></p>
<p><font color="#000000">चाहना उनको मौत आने तक चाहना<br />
मौसम खिल जाये रंग जब घुल जाये<br />
इन रंगों में दिल मेरा घुलना चाहे</font></p>
<p><font color="#000000">यह दिल क्यूँ किसी का होना चाहे<br />
जाये जाँ, जाये क्यों न जान ही<br />
मगर यह दिल किसी का होना चाहे</font></p>
<p><font color="#000000"></font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[कब कहाँ रुकें, कब तक चलें]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=762</link>
<pubDate>Wed, 13 Feb 2008 07:12:45 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=762</guid>
<description><![CDATA[कब कहाँ रुकें, कब तक चलें
ठहर जायें जहा]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">कब कहाँ रुकें, कब तक चलें<br />
ठहर जायें जहाँ दो पल के लिए<br />
वह मंज़िल है कहाँ? तुम जहाँ<br />
कहानियाँ कहती हों वादियाँ<br />
हर लम्हा रोशन हो प्यार से<br />
जिसको चाहें उसका दीदार मिले</font></p>
<p><font color="#000000">कब कहाँ रुकें, कब तक चलें<br />
ठहर जायें जहाँ दो पल के लिए<br />
वह मंज़िल है कहाँ? तुम जहाँ<br />
ख़ुशियाँ हो दिल में सारे जहाँ की<br />
चाहें जो दिल से वह हमें मिले<br />
पूरे हों सभी अरमान दिल के...</font></p>
<p><font color="#000000">कब कहाँ रुकें, कब तक चलें<br />
ठहर जायें जहाँ दो पल के लिए<br />
वह मंज़िल है कहाँ? तुम जहाँ<br />
जैसे वादे हैं वैसे ही इरादे हैं<br />
यही दुआ है दर्दे-दिल की<br />
जहाँ भी रुकें हम, वहाँ तू मिले</font></p>
<p><font color="#000000">आमीन, आमीन, आमीन, आमीन</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[जिसकी यादों में गुज़ारता हूँ सुबह-शाम]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=750</link>
<pubDate>Tue, 12 Feb 2008 09:50:50 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=750</guid>
<description><![CDATA[जिसकी यादों में गुज़ारता हूँ मैं सुबह-श]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">जिसकी यादों में गुज़ारता हूँ मैं सुबह-शाम<br />
मंज़िल वह मेरी वह मेरा आख़िरी मुक़ाम</font></p>
<p><font color="#000000">वह रंगीन शाम थी शाम वह गुमनाम थी<br />
नज़रों में नज़ारों में वह वफ़ा बेनाम थी<br />
हूर थी वह किसी चिराग़ का नूर थी<br />
किसी किनारे से जैसे कोई कश्ती दूर थी<br />
देखा जब हमने नज़रें थम ही गयीं<br />
हमें जैसे मंज़िलों की राहें मिल ही गयीं</font></p>
<p><font color="#000000">जिसकी यादों में गुज़ारता हूँ मैं सुबह-शाम<br />
मंज़िल वह मेरी वह मेरा आख़िरी मुक़ाम</font></p>
<p><font color="#000000">महफ़िल हसीन थी या ख़ूबसूरत समा था<br />
उस पल के लिए जाने दिल मैं कहाँ था<br />
आँखों की गहरी झील जिसकी नहीं तफ़सील<br />
तोड़ दी पतंग किसी ने जब हमने दी ढील<br />
उसका चेहरा जैसे शाम की गहराई में सवेरा<br />
वह सवेरा जिसने किया मेरे दिल में बसेरा</font></p>
<p><font color="#000000">जिसकी यादों में गुज़ारता हूँ मैं सुबह-शाम<br />
मंज़िल वह मेरी वह मेरा आख़िरी मुक़ाम</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[ऐ दिल वहाँ चल जहाँ रहते हैं वह]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=741</link>
<pubDate>Sun, 10 Feb 2008 05:21:05 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=741</guid>
<description><![CDATA[ऐ दिल वहाँ चल जहाँ रहते हैं वह
उनके बिन]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">ऐ दिल वहाँ चल जहाँ रहते हैं वह<br />
उनके बिना कितने पल गुज़ारे हैं<br />
खोये-खोये सारे वह बीते नज़ारें हैं</font></p>
<p><font color="#000000">हाथों की लकीरों में उनका नाम है<br />
कहाँ मुझसे दूर खोये हुए हैं वह<br />
कुछ भी नहीं है उनकी यादों के सिवा<br />
किसी से न गिला मेरा न शिकवा</font></p>
<p><font color="#000000">तू प्यासा रेगिस्तान है बारिश वह<br />
ऐ दिल वहाँ चल जहाँ रहते हैं वह</font></p>
<p><font color="#000000">लम्बा सफ़र है राहें हैं सूखी-सूखी<br />
फिर भी राहों के किनारे ताड़ हैं उगी<br />
बरसों का सफ़र दिल में उनका बसर<br />
उनको ही ढूँढ़ती है नज़र हर नज़र</font></p>
<p><font color="#000000">ऐ दिल वहाँ चल जहाँ रहते हैं वह<br />
उनकी यादों में खोये हुए हैं हम<br />
थोड़े जागे थोड़े सोये हुए हैं हम</font></p>
<p><font color="#000000">तू प्यासा रेगिस्तान है बारिश वह<br />
ऐ दिल वहाँ चल जहाँ रहते हैं वह</font></p>
<p><font color="#000000">खिलेंगे गुल हज़ार रंग के नये-नये<br />
मिल गये जो इन्हीं रास्तों पर वह<br />
गुलों की वादियाँ अगर चाहिए तुझे<br />
काँटों की तहों पर चल मिलेंगे वह</font></p>
<p><font color="#000000">ऐ दिल वहाँ चल जहाँ रहते हैं वह<br />
किसी मोड़ के बाद आयेगी मंज़िल<br />
चलता चल राह नयी ऐ मेरे दिल</font></p>
<p><font color="#000000">तू प्यासा रेगिस्तान है बारिश वह<br />
ऐ दिल वहाँ चल जहाँ रहते हैं वह</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[मैं सबसे जुदा-जुदा रहने लगा हूँ]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=736</link>
<pubDate>Sun, 10 Feb 2008 02:04:28 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=736</guid>
<description><![CDATA[मैं सबसे जुदा-जुदा रहने लगा हूँ
ख़ुद स]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">मैं सबसे जुदा-जुदा रहने लगा हूँ<br />
ख़ुद से यारों ख़फ़ा रहने लगा हूँ<br />
कभी दिल कहे उसे अपना बना लूँ<br />
कभी दिल कहता है उसे भुला दूँ</font></p>
<p><font color="#000000">क्या करूँ दिल दो तरफ़ा हो गया है<br />
हर पल मुझसे ख़फ़ा हो गया है<br />
दिल सोच रहा है क्या मेरा फैसला है<br />
हर वक़्त दिल में ख़्याल उसका है</font></p>
<p><font color="#000000">मैं सबसे जुदा-जुदा रहने लगा हूँ<br />
ख़ुद से यारों ख़फ़ा रहने लगा हूँ<br />
यह प्यार है पहले क्यों न जाना<br />
बेकार है इस दिल को समझाना</font></p>
<p><font color="#000000">देखूँ जिस तरफ़ वही नज़र आता है<br />
अब यह दीवाना कहीं चैन न पाता है<br />
एक वह ही मेरी आख़िरी मंज़िल है<br />
उस पर ही आया मेरा आवारा दिल है </font></p>
<p><font color="#000000">मैं सबसे जुदा-जुदा रहने लगा हूँ<br />
ख़ुद से यारों ख़फ़ा रहने लगा हूँ...</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[दिल में तू नहीं तो क्या है सखी]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=719</link>
<pubDate>Thu, 07 Feb 2008 13:01:51 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
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<description><![CDATA[दिल में तू नहीं तो क्या है सखी
मान ले तू]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">दिल में तू नहीं तो क्या है सखी<br />
मान ले तू, हम तेरे हैं हमनशीं<br />
चाँदनी और सितारों की सरज़मीं<br />
महकती हवा और तेरी ख़ूबसूरती</font></p>
<p><font color="#000000">सब कुछ इन रोशन राहों में है<br />
सब कुछ मेरी इन निगाहों में है<br />
यह दूरी हमें तेरे क़रीब लाती है<br />
हवा दिल की डाली कुम्हलाती है</font></p>
<p><font color="#000000">दिल में तू नहीं तो क्या है सखी<br />
मान ले तू, हम तेरे हैं हमनशीं</font></p>
<p><font color="#000000">कल जब हमने तुझे देखा था<br />
तब तू हमारी इन निगाहों में थी<br />
जिस पर दिल दीवाना हुआ था<br />
वह मदभरी ख़ुशबू तुम्हारी थी</font></p>
<p><font color="#000000">हम तेरे सिवा कुछ न चाहें सनम<br />
हम तेरे सिवा कुछ न देखें सनम<br />
मंज़िल है तू हमारे ख़ाबों की<br />
बस तुझे ही हमेशा सोचा करें</font></p>
<p><font color="#000000">दिल में तू नहीं तो क्या है सखी<br />
मान ले तू, हम तेरे हैं हमनशीं</font></p>
<p><font color="#000000">पल-पल यह दिल धड़कता है<br />
साँसों में बे-वजह सुलगता है<br />
जलता है कुछ बुझता है कुछ<br />
ख़ाबों का साया उलझता है कुछ</font></p>
<p><font color="#000000">बनते-बनते बनता है यह इश्क़<br />
लगते-लगते लगता है यह इश्क़<br />
हम कल कहाँ तुम कल कहाँ<br />
हमें कुछ पता न तुम्हें कुछ पता</font></p>
<p><font color="#000000">दिल में तू नहीं तो क्या है सखी<br />
मान ले तू, हम तेरे हैं हमनशीं</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[सफ़र बहुत तवील है]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=709</link>
<pubDate>Tue, 05 Feb 2008 21:42:31 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
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<description><![CDATA[बहारों का मौसम
शाख़ों पर खिलने लगा है
]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">बहारों का मौसम<br />
शाख़ों पर खिलने लगा है<br />
मज़िलों की बेताबी का<br />
चाँद अब दिखने लगा है</span></p>
<p><span style="color:#000000;">सफ़र बहुत तवील है<br />
और लम्हें मुख़्तसर...</span></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २०००-२००१</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[मैं मंज़िल से दूर सही]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=703</link>
<pubDate>Tue, 05 Feb 2008 19:10:15 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=703</guid>
<description><![CDATA[मैं मंज़िल से दूर सही
ख़ाबों का एक घरौं]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">मैं मंज़िल से दूर सही<br />
ख़ाबों का एक घरौंदा रखता हूँ<br />
बेवजह ही सही लेकिन<br />
किसी से मुहब्बत करता हूँ</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २०००-२००१</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[मेरा दर्द मेरा दु:ख मेरा अपना है]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/12/28/%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a4%be-%e0%a4%a6%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a6-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a4%be-%e0%a4%a6%e0%a5%81%e0%a4%96-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a4%be-%e0%a4%85%e0%a4%aa/</link>
<pubDate>Fri, 28 Dec 2007 16:48:54 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
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<description><![CDATA[मेरा   दर्द    मेरा   दु:ख   मेरा  अपना    ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">मेरा   दर्द    मेरा   दु:ख   मेरा  अपना    है<br />
बाक़ी   सब   झूठ   है  यह सच्चा सपना है</font></p>
<p><font color="#000000">कल तक लबों पर उसके लिए दुआ थी<br />
आज दुआ में थोड़ा कुछ हिस्सा अपना है</font></p>
<p><font color="#000000">मैं आज चली हूँ नयी मंज़िल की तरफ़<br />
आज मेरी आँखों में एक नया सपना है</font></p>
<p><font color="#000000">बीते   हुए   लम्हों   को   कैसे   भूलेगा कोई<br />
उसमें   तो एक  अधूरा   रिश्ता   अपना  है</font></p>
<p><font color="#000000">जादू   का   खेल   है   महब्बत   कैसे बचते<br />
क्या   करें   अब   यह टूटा हुआ सपना है</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[तेरे चेहरे पर अपनी नज़र ढूँढ़ते हैं]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/09/20/%e0%a4%a4%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a5%87-%e0%a4%9a%e0%a5%87%e0%a4%b9%e0%a4%b0%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%85%e0%a4%aa%e0%a4%a8%e0%a5%80-%e0%a4%a8%e0%a5%9b%e0%a4%b0-%e0%a4%a2%e0%a5%82%e0%a4%81/</link>
<pubDate>Thu, 20 Sep 2007 06:35:50 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
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<description><![CDATA[हर गली हर कूचा दर-ब-दर ढूँढ़ते हैं
हम अप]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">हर गली हर कूचा दर-ब-दर ढूँढ़ते हैं<br />
हम अपनी दुआ में असर ढूँढ़ते हैं</font></p>
<p><font color="#000000">तुम देखकर हँसते हो मुझे और हम<br />
तेरे चेहरे पर अपनी नज़र ढूँढ़ते हैं</font></p>
<p><font color="#000000">कौन दूसरा होगा हम-सा सितम-परस्त<br />
हम अपना-सा कोई जिगर ढूँढ़ते हैं</font></p>
<p><font color="#000000">जो राह मंज़िल तक पँहुचती होगी<br />
तेरी चाहत में ऐसी रहगुज़र ढूँढ़ते हैं</font></p>
<p><font color="#000000">धूप छुप गयी है कोहरे से भरी वादियों में<br />
और हम हैं कि तेरा नगर ढूँढ़ते हैं</font></p>
<p><font color="#000000">तुमने कहा नहीं कि कब आओगे तुम<br />
हम तुझे अपनी राह में मगर ढूँढ़ते हैं</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति 'नज़र'<br />
लेखन वर्ष: २६ जुलाई २००४<a href="http://vinayprajapati.iblog.com/post/222399/416167"></a></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[अब 'विनय' तेरे ग़म से ग़ाफ़िल नहीं रहा]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/09/19/%e0%a4%85%e0%a4%ac-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a4%af-%e0%a4%a4%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a5%87-%e0%a5%9a%e0%a4%ae-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a5%9a%e0%a4%be%e0%a5%9e%e0%a4%bf%e0%a4%b2-%e0%a4%a8%e0%a4%b9/</link>
<pubDate>Wed, 19 Sep 2007 19:45:51 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
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<description><![CDATA[अब ‘विनय’ तेरे ग़म से ग़ाफ़िल नहीं रहा
दे]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">अब ‘विनय’ तेरे ग़म से ग़ाफ़िल नहीं रहा<br />
देख तो वो मग़रूर वो संगदिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">हमें कोई शिबासी दे हमने तेरा राज़ न खोला<br />
पर जानाँ ये जान लो मैं बातिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">तेरी कही सुनी सब मुझे वक़्त ने भुला दी<br />
ये ग़ैर तेरी दुश्मनी के क़ाबिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">हमें जब नाज़ थे तो ये दर्द किसलिए हैं<br />
तेरे बाद कोई चेहरा मुस्तक़िल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">तुम हमसे पूछो वह शामे-माज़ी की तन्हाई<br />
कभी कोई इतना दिल में दाख़िल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">तुमने ख़ुद मुझे अपना दोस्त बनाया होता<br />
तुम्हें तो कोई काम कभी मुश्किल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">हमसे एक-एक कर सब हाथ छूटते गये<br />
मेरे कूचे में वो माहे-कामिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">सद्-हैफ़ो-अफ़सोस से कलेजा भर आया<br />
हाए मुझे सिवा ग़म कुछ हासिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">हमें कोई देता ताक़ते-नज़्ज़ाराए-हुस्न<br />
सुना  है मेरी राह में कोई हाइल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">साँसों का धुँआ दिल को दर्द देता है बहुत<br />
ज़िन्दगी में बाइसे-मसाइल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">वो गुफ़्त-गू वो मशविरे वो बयान अपने<br />
ख़ुदा के ज़ख़्म देखे तो मैं बिस्मिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">गर्दिशे-अय्याम की रवानी देखकर<br />
मेरा दिले-सौदा मुज़महिल</font><font color="#c0c0c0">1</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">अब इस चमन में फिरती है खुश्क सबा<br />
मस्जूदा कोई जल्वाए-गुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">किसके दिन उम्रभर एक से रहते हैं<br />
मुझमें तो वो हुस्ने-अमल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">मेरी काविश</font><font color="#c0c0c0">2</font> का किसी राह तो हासिल होगा<br />
हैफ़ मेरे ग़म की कोई मंज़िल नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">मैं अहदे-ज़ीस्त करके किससे तोड़ूँ<br />
मुझे तफ़रकाए-नाक़िसो-कामिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">मुझे तुम छोड़कर गये लेकिन क्या बताऊँ<br />
एक अरसा बर्क़े-सोज़े-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">तुमको जाना है तो जाओ कब हमने रोका है<br />
किसी के जाने का ग़म हमें बिल्कुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">इस दरया को ख़्वाहिश है समंदर की<br />
और सहाब का बरसना मुसलसल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">सू-ए-शिर्क सजदे-मस्जूद किये मैंने<br />
क्योंकि मैं तेरे कूचे का माइल</font><font color="#c0c0c0">3</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">अब किससे करूँगा उसकी जफ़ा का शिकवा<br />
आज से कोई दराज़ दस्तिए-क़ातिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">इस ज़र्फ़ कोई आये तो देखे हाल बीमार का<br />
वो पुरसिशे-जराहते-दिल</font><font color="#c0c0c0">4</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">अच्छा हुआ तुमने रोज़े-आख़िर न बोला<br />
रोज़े-विदा से कोई उक़्दाए-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">दु:ख गिनते-गिनते उम्र कट जायेगी<br />
किसी की इनायत किसी का तग़ाफ़ुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">फ़िज़ा क्यों इतनी ख़ामोश है गुलशन में<br />
क्या आशियाँ में नालाए-बुलबुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">था तब मिला नहीं, खोकर मिलता है कौन<br />
दिल मुझे ख़्याले-यारे-वस्ल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">मैं जिसको दोस्त कह नहीं सकता अब<br />
मुझे उसके लिए जज़्बाए-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">किसको खरोंचे हो अपने नाख़ून से तुम<br />
इस सीने में कोई जराहते-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">उर्दी-ओ-दै का अब मैं क्या ख़्याल रखूँ<br />
ये कैसी जलन, मुझे तपिशे-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">अपनी यकताई पर बेहद नाज़ था हमको<br />
आज भी है लेकिन वो मुतक़ाबिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">अब भी खिलती है शुआहाए-ख़ुर-फ़ज़िर <br />
मगर फ़िज़ा में शाहिद-ए-गुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">बहुत ढूँढ़ा हमने उसके जैसा, न पाया एक<br />
वो नमकपाशे-ख़राशे-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">अब ख़ुल्द में रहें या दोज़ख में रहें हम<br />
ऐ सनम मेरा तो आबो-गिल</font><font color="#c0c0c0">5</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">उस फ़ितनाख़ेज़ का नहीं अब डर मुझको<br />
कि मेरे दिल में स’इ-ए-बेहासिल</font><font color="#c0c0c0">6</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">आँखों से निक़ाब उठाओ कि वहम खुल जाये<br />
कि तुझमें वो तर्ज़े-तग़ाफ़ुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">कहने को तो ज़ामिन नहीं मुझसा ज़माने में<br />
पर जाने क्यों मुझे तहम्मुल</font><font color="#c0c0c0">7</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">वो जिसकी चाप से धड़कनें रुक जायें थीं<br />
ज़िन्दगी में वो हौले-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">ऐ लोगों मैं ख़ुद को किस ज़ात का बताऊँ<br />
सुना है तुममें ज़रा भी दीनो-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">दायम अपने बग़ल में पाओगे तुम हमको<br />
चाहो तो कह लो मैं तुझमें मुश्तमिल</font><font color="#c0c0c0">8</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">क्यों है मुझको तेरे रूठ कर जाने का ग़म<br />
जबकि जानते हो मैं कभी तेरा काइल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">कहता तो हूँ बात दिल की मगर क्या करूँ<br />
मेरा कोई भी ख़्याल मानिन्दे-गुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">उसकी ख़ामोश आँखों में अयाँ थीं बातें दिल की<br />
वो चाहकर भी कभी सू-ए-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">किया जो मैंने तुम्हें अपना समझकर किया<br />
ये दिल तेरी जफ़ा से मुनफ़’इल</font><font color="#c0c0c0">9</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">मैंने देखा था उसे जाते ख़ुल्द की ओर<br />
वो हलाके-फ़रेब-वफ़ा-ए-गुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">जो कभी साहिल पर था कभी समंदर में<br />
उसको दाग़े-हसरते-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">जिसपे लिखा करते थे तुम अपना नाम<br />
शख़्स वो आज गर्दे-साहिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">आज फ़ारिग</font><font color="#c0c0c0">10</font> हूँ कि तुम हो मेरे ग़मख़्वार<br />
मैं हरीफ़े-मतलबे-मुश्किल<font color="#c0c0c0">11</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">था तो थोड़ा बहुत मैं ये मानता हूँ लेकिन<br />
आज उतना भी तो सोज़िशे-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">मैं दर्द को दिल से जुदा कर सकता हूँ<br />
पर फ़ुसूने-ख़्वाहिशे-सैक़ल</font><font color="#c0c0c0">12</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">अब मैं किस मुँह से जाऊँ बज़्म में उसकी<br />
ये दिल दरख़ुर-ए-महफ़िल</font><font color="#c0c0c0">13</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">देखिए शाइबाए-ख़ूबिए-तक़दीर</font><font color="#c0c0c0">14</font> उसमें<br />
वो दिन गया कि रोज़े-अजल नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">इश्क़ फिरता था उस रोज़ गलियों-गलियों<br />
आज किसी में इतना भी ख़लल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">बढ़के आया तो लगा तेरा तीर इस दिल में<br />
चारासाज़ न हुआ पर जाँगुसिल</font><font color="#c0c0c0">15</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">किसपे लिखके भेजूँ मैं तुझे पयाम अपना<br />
पास औराक़े-लख़्ते-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">आस्माँ के पार जाने की तमन्ना थी उसको<br />
पर आइना-ए-बेमेहरि-ए-क़ातिल</font><font color="#c0c0c0">16</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">मेरे मुँह से न सुनो वज्हे-सुखन ईसा<br />
ख़ुद गुलों में रंगे-अदा-ए-गुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">मगर टूटा है किसी का नाज़ुक दिल मुझसे<br />
ये डर कि मैं क़ाबिले-सुम्बुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">अब कोई रहनुमा नहीं रहे-इश्क़ में<br />
तुम ख़ुश रहो तेरी राह में साइल</font><font color="#c0c0c0">17</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#999999">१. </font><font color="#000000">निष्तेज</font> २. <font color="#000000">कोशिश, द्वेष</font> ३. <font color="#000000">अनुरक्त, आसक्त</font> ४. <font color="#000000">दिल के ज़ख़्म का हाल पूछने वाला<br />
</font>५. <font color="#000000">शरीर और आकार</font> ६. <font color="#000000">निष्फल प्रयत्न</font> ७. <font color="#000000">दिल की घबराहट, सहनशक्ति</font> ८.<font color="#000000"> शामिल</font><br />
९. <font color="#000000">लज्जित</font> १०. <font color="#000000">निश्चिंत</font> ११. <font color="#000000">कठिन काम कर लेने वाला</font> १२. <font color="#000000">परिष्कृति की अभिलाषा का जादू</font><br />
१३. <font color="#000000">महफ़िल के योग्य</font> १४. <font color="#000000">सौभाग्य की झलक</font> १५. <font color="#000000">जानलेवा, दुखदायी</font><br />
१६. <font color="#000000">माशूक़ की बेरहमी का सुबूत</font> १७. <font color="#000000">उम्मीदवार, प्रश्नकर्ता</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति 'नज़र'<br />
लेखन वर्ष: २००५</p>
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