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	<title>मस्ती &amp;laquo; WordPress.com Tag Feed</title>
	<link>http://wordpress.com/tag/मस्ती/</link>
	<description>Feed of posts on WordPress.com tagged "मस्ती"</description>
	<pubDate>Fri, 18 Jul 2008 21:23:42 +0000</pubDate>

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	<language>en</language>

<item>
<title><![CDATA[मस्तियाँ ही मस्तियाँ हैं]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=975</link>
<pubDate>Sun, 01 Jun 2008 13:55:32 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
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<description><![CDATA[मस्तियाँ ही मस्तियाँ हैं
जब से मौसमे-ख]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">मस्तियाँ ही मस्तियाँ हैं<br />
जब से मौसमे-ख़िज़ाँ उतरा है<br />
शाख़ों पर हैं नयी कोंपलें<br />
जब से मौसमे-फ़ुर्क़त गुज़रा है</span></p>
<p><span style="color:#000000;">पुरवाइयाँ तन-बदन पे आग लगती हैं<br />
तन्हाइयाँ मेरे ज़हन से ख़ौफ़ रखती हैं<br />
निगाह में तस्वीरे-यार सजा ली जब से<br />
रंगीनियाँ दिल को ख़ुशगँवार लगती हैं...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">मस्तियाँ ही मस्तियाँ हैं<br />
जब से मौसमे-ख़िज़ाँ उतरा है<br />
बेलों पर महके गुच्छे<br />
जब से हुआ यह मौसम हरा है</span></p>
<p><span style="color:#000000;">मेरी बेक़रारियाँ आज क़रार पाने लगी हैं<br />
यह धड़कनें तेरा नाम गुनगुनाने लगी हैं<br />
इक अजब भँवर-सा उमड़ा है ख़्यालों का<br />
ख़ाबों ख़्यालों की भीड़ राह पाने लगी है...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">मस्तियाँ ही मस्तियाँ हैं<br />
जब से मौसमे-ख़िज़ाँ उतरा है<br />
पैमाने सारे भर गये हैं<br />
बादाख़ार हुआ यह दिल ज़रा है</span></p>
<p><span style="color:#000000;">सूरज है हुस्न उसका, जलाता है मुझको<br />
बदन रेशमी चाँद जैसा, लुभाता है मुझको<br />
तक़दीर जो उसने ' जोड़ ली है मुझसे<br />
आज मौसम बहार का, बुलाता है मुझको...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">मस्तियाँ ही मस्तियाँ हैं<br />
जब से मौसमे-ख़िज़ाँ उतरा है<br />
मेरे लिए उसकी चाहत<br />
आज तो उसका दिल भी ख़रा है</span></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[एक लड़की और लड़के की कहानी ]]></title>
<link>http://ramlovestory.wordpress.com/?p=13</link>
<pubDate>Tue, 11 Mar 2008 02:08:43 +0000</pubDate>
<dc:creator>ramjokes</dc:creator>
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<description><![CDATA[आज में आपको एक सचाही कहानी बताना चाहता]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<h3>आज में आपको एक सचाही कहानी बताना चाहता हू</h3>
<h3>
में कई महीनों से एक लड़की जो मेरे ऑफिस में काम कराती थी और में उससे धीरे-धीरे</h3>
<h3>
प्यार कराने लगा</h3>
<h3>
और बात में पता चला की वह ऑफिस छोड़ कर जाने लगी तो मुझे बहुत घ्राब लगा</h3>
<h3>
मेने सोचा की मेरा प्यार घतम हो गया</h3>
<h3>
और बात में यही हुआ वह कही और चली गई</h3>
<h3>~~~~~~~~~~~~~~</h3>
<h3>मगर फिर भी मेने कई बार उससे मिलाने की कोसीसी की मगर में मिल नही पाया</h3>
<h3></h3>
<h3><font color="#9400d3">तो एक दिन मेने उससे चेट पर ई ल</font><font color="#ff1493">व यू बोले दिया तो वह नाराज हो कर उसने मुझे ब्लाक कर दिया इस तरह मेरे प्यार का अंत हो गया</font></h3>
<h3></h3>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[लव लव लव मत करो ]]></title>
<link>http://ramlovestory.wordpress.com/?p=12</link>
<pubDate>Sun, 09 Mar 2008 11:51:44 +0000</pubDate>
<dc:creator>ramjokes</dc:creator>
<guid>http://ramlovestory.wordpress.com/?p=12</guid>
<description><![CDATA[मेने बहुत बार अपने दोस्त को समझाया की ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<h3>मेने बहुत बार अपने दोस्त को समझाया की लड़की की चक्कर में मत पड़ मगर वह नही<br />
मन वह लड़की के चक्कर में लगा रहा और उसका बात में जाकर बुरा अंजाम हुआ<br />
वह एक दिन अपनी बंदी दी आई लव यू कहने गया तो उसने उसके गाल पर ऐसा<br />
चपेट मारी की की वह बाद में मेरे पास आया और कहने लगा यार तू सही कहा रहा था की लड़की की पाछे मत पड़ क्यौकी वह लास्ट में वह धोखा देती हैं :)</h3>
<h3></h3>
<h3>
<span style="color:#ff6600;">इ<span style="color:#20b2aa;">सलिए मेरी राय से</span></span></h3>
<h3></h3>
<h3>इसलिए जो लड़किया लोड्को को मतलब के लिए फसाती हैं उनके साथ हमे भी उनके तरह ही समझदार होना चाहिए और <span style="color:#0000ff;"><font color="#ff7f50">use ए</font>ं<font color="#40e0d0">ड throw</font></span> की तरह इस्तमाल करना चाहिए :)</h3>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[लव लव लव करो]]></title>
<link>http://ramlovestory.wordpress.com/2008/03/09/%e0%a4%b2%e0%a4%b5-%e0%a4%b2%e0%a4%b5-%e0%a4%b2%e0%a4%b5-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a5%8b/</link>
<pubDate>Sun, 09 Mar 2008 11:14:42 +0000</pubDate>
<dc:creator>ramjokes</dc:creator>
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<description><![CDATA[लव करो क्योकी लव कराने से आदमी हर दम खु]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<h3>लव करो क्योकी लव कराने से आदमी हर दम खुस रहता है &#60;3</h3>
<h3>
लव से कभी भी मत डरो</h3>
<h3>
दुनिया में लव से बढ़ कर और कुछ नही है न ही पैसा और न ही गमंद &#60;3</h3>
<h3>
इस लिए राम लव की बात मानो और लव करो</h3>
<h3>
इस लिए कहा गया है</h3>
<h3></h3>
<h3>
लव इस लाइफ :)</h3>
]]></content:encoded>
</item>
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<title><![CDATA[राम लव स्टोरी ]]></title>
<link>http://ramlovestory.wordpress.com/2008/03/09/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%ae-%e0%a4%b2%e0%a4%b5-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%8b%e0%a4%b0%e0%a5%80/</link>
<pubDate>Sun, 09 Mar 2008 10:48:33 +0000</pubDate>
<dc:creator>ramjokes</dc:creator>
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<description><![CDATA[राम की लव स्टोरी बहुत अजीब और गरीब है इ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<h3>राम की लव स्टोरी बहुत अजीब और गरीब है इसका कारण है उसका दो-दो लड़कियों से</h3>
<h3>प्यार करना इस लिए वह एक दिन दोनों लड़कियों को पता चल गया की यह मेरे से प्यार नही करता उसके थो कोई और हैं</h3>
<h3>यही मतलब दूसरी लड़की ने भी कहा इस तरह राम की लव स्टोरी एक जगह से नही दोनों जगह से घतम हो गई</h3>
<h3></h3>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[शायरी प्यार की]]></title>
<link>http://ramlovestory.wordpress.com/?p=3</link>
<pubDate>Sun, 09 Mar 2008 10:31:43 +0000</pubDate>
<dc:creator>ramjokes</dc:creator>
<guid>http://ramlovestory.wordpress.com/?p=3</guid>
<description><![CDATA[उनकी हर बात दिल लुभाती  है ,
हर अदा, हर ख]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<h3>उनकी हर बात दिल लुभाती  है ,</h3>
<h3>हर अदा, हर खता  भी  बहती  है .</h3>
<h3>
दिल मैं मेरे ख़याल  आए तो,</h3>
<h3>बात उनकी ज़ुबान  पे आती है.</h3>
<h3>
सब मेरे हाल पर परेशान  है.न</h3>
<h3>एक वह  हैं की मुस्कुराती  है.न.</h3>
<h3>
गीत मेरा लिखा  ही है शायद,</h3>
<h3>वह जो हौले  से गुन गुनाती  है.न</h3>
<h3>
हाथ दीवाने  के दे अल्लाह कुछ ऐसी कलम,</h3>
<h3>आस्मान  पर लीख के जाऊं  है उन्ही  से प्यार है!</h3>
<h3>
ख़ास लिखा है ख़त मैं, ज़रा आहिस्ता  बोलियेगा</h3>
<h3>भेज  रहा हूँ दिल अपना, ज़रा आहिस्ता खोलियेगा</h3>
<h3>
तू इस तरह से मेरे दिल मैं शामिल  है</h3>
<h3>जहाँ  भी जाऊं लगता है तेरी महफ़िल  है</h3>
<h3>
रस्ते  मैं गीरे हैं फूल, उठता है कोई कोई</h3>
<h3>मुहब्बत करते हैं सभी, निभाता  है कोई कोई</h3>
<h3>
ज़िंदगी एक  फूल  है  और  मोहब्बत  उस  का  शेहेद</h3>
<h3>प्यार  एक  दरिया  है , और  मेहमूब  उसकी  सरहद</h3>
<h3>
जुखा  कर  उठा  न  सके  सर  मेरे  सवाल  पर,</h3>
<h3>जुल्फों  का  नकाब  गिरा  है , मेरे  दिल  का  राज़  ले  कर</h3>
<h3></h3>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[कभी वैसे होता है]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=878</link>
<pubDate>Wed, 05 Mar 2008 13:11:36 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=878</guid>
<description><![CDATA[कभी वैसे होता है,
कभी ऐसे होता है
यह प्य]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">कभी वैसे होता है,<br />
कभी ऐसे होता है<br />
यह प्यार जो होता है,<br />
प्यार ही  रहता  है...</font></p>
<p><font color="#000000">तुमको सब पता है<br />
हमको सब पता है<br />
तुम भी दीवाने हो<br />
हम भी दीवाने हैं<br />
यह सबको पता है<br />
कभी वैसे होता है,<br />
कभी ऐसे होता है</font></p>
<p><font color="#000000">मस्ती है तुमको भी<br />
मस्ती है हमको भी<br />
तुमको भी चाहत है<br />
हमको भी चाहत है<br />
यह किसकी ख़ता है<br />
कभी वैसे होता है,<br />
कभी ऐसे होता है</font></p>
<p><font color="#000000">नज़रों का चलना<br />
दिल का मचलना<br />
चलते-चलते फिसलना<br />
गिरते-गिरते संभलना<br />
ऐसा ही कुछ होता है<br />
कभी वैसे होता है,<br />
कभी ऐसे होता है</font></p>
<p><font color="#000000">जब भी मिलते हैं<br />
साथ-साथ चलते हैं<br />
क्या बातें करते हैं<br />
कहने से डरते हैं<br />
चैन कहाँ मिलता है<br />
कभी वैसे होता है,<br />
कभी ऐसे होता है</font></p>
<p><font color="#000000">इक़रार गर हो जाये<br />
इज़हार गर हो जाये<br />
हो जाये इक कमाल<br />
हो जाये इक वबाल<br />
ऐसा ही लगता है<br />
कभी वैसे होता है,<br />
कभी ऐसे होता है</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[चढ़ गयी रे मस्ती]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2008/02/18/chadhh-gayii-re-mastii/</link>
<pubDate>Mon, 18 Feb 2008 11:33:05 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/2008/02/18/chadhh-gayii-re-mastii/</guid>
<description><![CDATA[चढ़ गयी रे मस्ती चढ़ गयी रे
चढ़ गयी रे त]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">चढ़ गयी रे मस्ती चढ़ गयी रे<br />
चढ़ गयी रे तेरे हुस्न की मस्ती<br />
चढ़ गयी रे मस्ती चढ़ गयी रे<br />
तेरे हुस्न की मस्ती चढ़ गयी रे</font></p>
<p><font color="#000000">लग गया काँटा फँस गया बाँका<br />
बन्धु बात तेरी तो बन गयी रे<br />
चढ़ गयी रे मस्ती चढ़ गयी रे<br />
तेरे हुस्न की मस्ती चढ़ गयी रे</font></p>
<p><font color="#000000">तन गयी रे, देख तो तन गयी रे<br />
पंतग उड़ी थी ओह कट गयी रे<br />
चढ़ गयी रे मस्ती चढ़ गयी रे<br />
तेरे हुस्न की मस्ती चढ़ गयी रे</font></p>
<p><font color="#000000">मिली हज़ारों में चाँद-सितारों में<br />
देख के उसे धड़कन बढ़ गयी रे<br />
चढ़ गयी रे मस्ती चढ़ गयी रे<br />
तेरे हुस्न की मस्ती चढ़ गयी रे</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[पहला-पहला नशा]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=784</link>
<pubDate>Fri, 15 Feb 2008 13:55:15 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=784</guid>
<description><![CDATA[जादू जैसा छाया पहला-पहला नशा
जी में आय]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">जादू जैसा छाया पहला-पहला नशा<br />
जी में आये पंख खोल उड़ जाऊँ मैं<br />
आस्माँ से आगे निकल जाऊँ मैं</font></p>
<p><font color="#000000">मस्ती दिल पर छायी अनजानी-सी<br />
उड़ती फिरे है जैसे फूलों पर तितली<br />
दिल में जाने कैसा तूफ़ान उठा है<br />
यूँ लगता है हर पल मुझसे रूठा है</font></p>
<p><font color="#000000">तेरा ग़म पाया ख़ुशी मुझको मिली<br />
लगता है खिल रही दिल की कली<br />
जादू जैसा छाया पहला-पहला नशा</font></p>
<p><font color="#000000">तेरे ख़ाब आते रहे मुझको रातभर<br />
मैं कहाँ जाऊँगा दूर तुमसे बिछड़कर<br />
अफ़साना बन चुका खो गया दिल<br />
इल्तिजा सुन ले मुझसे आकर मिल</font></p>
<p><font color="#000000">यह जादू प्यार है मैंने अब जाना<br />
जिसको ढूँढ़ रहा था वह मुझे मिला<br />
जादू जैसा छाया पहला-पहला नशा</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>

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