Blogs about: मानव व्यवहार

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कुछ लोग ऐसे भी होते हैं!1 comment

योगेन्द्र जोशी wrote 1 week ago: राह चलते यदाकदा ऐसा कुछ अनुभव में आ जाता है जो मेरे सामने मानव व्यवहार से जुड़े तमाम सवाल खड़े कर दे … more →

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सौ मीटर दूर चलना भी गवारा नहीं

योगेन्द्र जोशी wrote 1 month ago:           आज के औद्योगिक युग में मनुष्य बेहद आराम-तलब हो चुका है । मुझे लगता है कि कभी-कभी यह आराम-त … more →

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पैसे की अहमियत - एक आवश्यकता, और उसके आगे एक नशा4 comments

योगेन्द्र जोशी wrote 11 months ago: मनुष्य के ऐहिक जीवन में धनसंपदा की अहमियत सदा से ही स्वीकारी जाती रही है । जीवन की प्रायः तमाम आवश्य … more →

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“भ्रष्ट आचरण का वाइरस तो हमारे खून में है, सर!”1 comment

योगेन्द्र जोशी wrote 1 year ago: मैं अपने कंप्यूटर डीलर के आफिस में बैठा हूं । उसके साथ मेरा संबंध कोई अढाई दशक पुराना है – उस … more →

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“भैयाजी, आप साइकिल से चलते हैं ये अच्छा नहीं लगता है!”3 comments

योगेन्द्र जोशी wrote 1 year ago: मेरे पड़ोस में मेरे हमउम्र एक सज्जन रहते हैं । वे समाज के तथाकथित पिछड़े वर्ग से संबंध रखते हैं । वे … more →

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न जाने उसके क्या हाल होंगे!2 comments

योगेन्द्र जोशी wrote 1 year ago: हाल ही में मुझे अपने घर के दरवाजों-पल्लों की मरम्मत संबंधी छोटे-मोटे काम करवाने थे । मैंने अपनी कालो … more →

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“आज के जमाने में किसी प्यासे को पानी पिलाने से भी कतराते हैं लोग”4 comments

योगेन्द्र जोशी wrote 1 year ago: वाकया पांच-छः हफ्तों पहले का है । गर्मियों के दिन, दोपहर का वक्त और ऊपर से तेज धूप । मेरे मकान के गे … more →

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सिगरेट का धुआं न उड़ा सके तो जिंदगी का मजा क्या? (विश्व धूम्रपान निषेध दिवस - 31 मई)

योगेन्द्र जोशी wrote 1 year ago: आज विश्व तंबाकू निषेध दिवस (World no Tobacco Day) – 31 मई – है । आम जनों से अपेक्षा की ज … more →

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सहज नहीं सहज बुद्धि का होना3 comments

योगेन्द्र जोशी wrote 2 years ago: अंग्रेजी में एक शब्द (असल में पदबंध या फ्रेज) है ‘कॉमन सेंस’, जिसका मतलब है वह बौद्धिक क्षमता जिसके … more →

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पंचतंत्र नीति वचन: विश्वसनीय पर भी पूर्ण विश्वास घातक हो सकता है1 comment

योगेन्द्र जोशी wrote 3 years ago: पंडित विष्णुशर्मा प्रणीत पंचतंत्र में व्यावहारिक जीवन से संबंधित सार्थक नीति की तमाम बातें कथाओं के … more →

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जातीय अभिमान का एक उदाहरण1 comment

योगेन्द्र जोशी wrote 3 years ago: जातीय मानसिकता हमारे हिंदू समाज की विशेषता कही जाती है, एक ऐसी विशेषता जिस पर गर्व नहीं किया जा सकता … more →

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नस्ली भेदभाव का एक छोटा-सा अनुभव1 comment

योगेन्द्र जोशी wrote 3 years ago: मानव समाज में भेदभाव की भावना सर्वव्यापी है । भेदभाव का आधार सभी समाजों में एक ही हो ऐसा नहीं है । अ … more →

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आत्महत्या क्यों की होगी उस छात्रा ने?

योगेन्द्र जोशी wrote 4 years ago: जिजीविषा प्राणीमात्र की सहज वृत्ति है, किंतु आत्महत्या कदाचित् मनुष्य की विशिष्टता है । आत्महत्या दी … more →

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जातिबोध: समाज का एक सच यह भी

योगेन्द्र जोशी wrote 4 years ago: एक बार अपने प्रातःकालीन वार्तापत्र में मुझे बुद्धिजीवियों की किसी गोष्ठी के बारे में समाचार पढ़ने को … more →

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चेन्नै में मदद मांगता मिला एक परिवार3 comments

योगेन्द्र जोशी wrote 4 years ago: मेरा एक सवाल है: अगर आपको राह चलते कोई व्यक्ति मिल जाये जो आपसे किसी प्रकार की मदद मांगने लगे, तब आप … more →

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पशु-पक्षियों की बोली: शिक्षाप्रद एक कथा

योगेन्द्र जोशी wrote 4 years ago: मैंने बहुत पहले कभी शिक्षाप्रद एक लघुकथा पढ़ी थी । अब उस कथा का अक्षरशः उल्लेख नहीं कर सकता, किंतु उस … more →

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बैंक अधिकारी का कुतर्क: विलंब का औचित्य

योगेन्द्र जोशी wrote 4 years ago: अपने देशवासियों की एक विचित्र आदत मुझे सदैव से ही विचलित करती रही है । यह आदत है अपने अनुचित कार्यों … more →

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अपनाओ भ्रष्ट तरीका और कमाओ पैसा1 comment

योगेन्द्र जोशी wrote 4 years ago: मेरा एक दांत कीड़ा लगने से खराब हो रहा था । मैं उसके इलाज के लिए पास के दंत-चिकित्सक के पास गया । मुझ … more →

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गतानुगतिको ... : लकीर का फकीर यह संसार

योगेन्द्र जोशी wrote 4 years ago: अपने छात्रजीवन में मैंने एक नीतिश्लोक पढ़ा था जो मुझे अपनी कमजोर स्मरणशक्ति के बावजूद आज भी याद है, श … more →

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