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	<title>माहताब &amp;laquo; WordPress.com Tag Feed</title>
	<link>http://wordpress.com/tag/माहताब/</link>
	<description>Feed of posts on WordPress.com tagged "माहताब"</description>
	<pubDate>Sun, 12 Oct 2008 09:25:34 +0000</pubDate>

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	<language>en</language>

<item>
<title><![CDATA[प्यार से मुझे प्यार चाहिए]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=863</link>
<pubDate>Fri, 29 Feb 2008 14:22:27 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2008/02/29/pyaar-se-mujhe-pyaar-chaahiye/</guid>
<description><![CDATA[प्यार से मुझको प्यार चाहिए
गुलाबी लबो]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">प्यार से मुझको प्यार चाहिए<br />
गुलाबी लबों से इज़हार चाहिए<br />
उसके हसीं चेहरे पे हँसी चाहिए<br />
उसके लिए हर ख़ुशी चाहिए</font></p>
<p><font color="#000000">उसने मुझको दीवाना बनाया है<br />
मेरी आँखों को आशिक़ाना बनाया है<br />
अब हर शै में वही दिखती है<br />
आँखों में उसका ख़ाब चाहिए<br />
मुझको मेरा माहताब चाहिए</font></p>
<p><font color="#000000">प्यार से मुझको प्यार चाहिए<br />
गुलाबी लबों से इज़हार चाहिए</font></p>
<p><font color="#000000">मेरी धड़कनों में वह धड़कती है<br />
उसके बिना सीने में जान तड़पती है<br />
मुझको उसे अपना बनाना है<br />
मुझको वही एक यार चाहिए<br />
दिल में उसका ख़ुमार चाहिए</font></p>
<p><font color="#000000">उसके हसीं चेहरे पे हँसी चाहिए<br />
उसके लिए हर ख़ुशी चाहिए</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति 'नज़र'<br />
लेखन वर्ष: १८ मई २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[तेरी चुप निगाहें]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=806</link>
<pubDate>Mon, 18 Feb 2008 16:03:34 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2008/02/18/terii-chup-nigaahein/</guid>
<description><![CDATA[तेरी चुप निगाहें व शर्मायी नज़रें
तेरे ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">तेरी चुप निगाहें व शर्मायी नज़रें<br />
तेरे प्यार का तोहफ़ा हैं, मेरे लिए<br />
एक बार तो कुछ कह दे सनम<br />
तू एक बार तो हाँ कर दे मुझसे<br />
ज़िन्दगी एक झमेला है मेरे लिए</font></p>
<p><font color="#000000">तेरी मुस्कुराहटें तेरी सादी अदाएँ<br />
तेरे प्यार का तोहफ़ा हैं मेरे लिए<br />
परियों से भी कहीं ज़्यादा हसीं<br />
खिलती कलियों-सी तू माहजबीं<br />
ख़ुदा ने तुझे बनाया है मेरे लिए</font></p>
<p><font color="#000000">तेरे सारे शिकवे वह सभी यादें<br />
तेरे प्यार का तोहफ़ा हैं मेरे लिए<br />
मुझे तेरा इन्तिज़ार था बरसों से<br />
हम एक-दूजे के बने जनमों से<br />
तुमने जनम लिया है मेरे लिए</font></p>
<p><font color="#000000">आँखों में माहताब-सा चमकता है<br />
तेरा चेहरा, तेरा चेहरा, तेरा चेहरा<br />
मैं सहराँ-सहराँ भटकता हूँ तेरे लिए<br />
तू एक बार तो हाँ कर दे मुझसे<br />
ज़िन्दगी एक झमेला है मेरे लिए</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[चाँद गवाह है मेरे प्यार का ]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=772</link>
<pubDate>Thu, 14 Feb 2008 08:15:01 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2008/02/14/chaand-gawaah-hai-mere-pyaar-ka/</guid>
<description><![CDATA[चाँद गवाह है मेरे प्यार का
क्या यही ख़]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">चाँद गवाह है मेरे प्यार का<br />
क्या यही ख़्याल है, मेरे यार का<br />
कुछ न ख़बर हुई उस पल की<br />
कुछ न पता चला उस पल का<br />
उसके चेहरे पर नज़र रुकी<br />
क्या ख़बर क्या गया, क्या मिला </font></p>
<p><font color="#000000">हर लम्हा इन्तज़ार नये ख़ाब का<br />
क्या ऐसा ही हाल है मेरे यार का<br />
जाने ना मिलें या न मिलें<br />
उनसे हम कभी दोबारा<br />
जाने फिर खिले या न खिले<br />
वह गुलशन देखा हुआ नज़ारा</font></p>
<p><font color="#000000">चाँद गवाह है मेरे प्यार का<br />
क्या यही ख़्याल है, मेरे यार का </font></p>
<p><font color="#000000">मैंने जिसे चाहा उसने मुझे चाहा<br />
इस बात की ख़बर नहीं<br />
बहती हवा भी मुँहज़ोर नहीं<br />
तन में तपिश करती है चाँदनी<br />
यह असर है पहले प्यार का<br />
क्या ऐसा ही हाल है मेरे यार का</font></p>
<p><font color="#000000">चाँद गवाह है मेरे प्यार का<br />
क्या यही ख़्याल है, मेरे यार का </font></p>
<p><font color="#000000">दिल में दर्द की आतिश जल रही है<br />
तुम्हें पाने की चाहत बढ़ रही है<br />
दिल मेरा बेताब है<br />
जाने कहाँ दमका माहताब है<br />
ऐसा रूप-रंग है मेरे यार का<br />
रोशन कर दे दिल जाँनिसार का</font></p>
<p><font color="#000000">चाँद गवाह है मेरे प्यार का<br />
क्या यही ख़्याल है, मेरे यार का</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[तुम हो मेरी चंद्रकला]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=767</link>
<pubDate>Wed, 13 Feb 2008 17:41:50 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2008/02/13/tum-ho-merii-chandrakalaa/</guid>
<description><![CDATA[अम्बर में जब चाँद खिला
उस पल से चला जान]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">अम्बर में जब चाँद खिला<br />
उस पल से चला जानाँ<br />
एक नया सिलसिला<br />
मुहब्बत भरी वादियों में<br />
इक नया गुल खिला<br />
तुम एक नया सिलसिला</font></p>
<p><font color="#000000">तुम जान मेरी अजंता<br />
जिस पर यह दिल मचला<br />
वह तुम हो मेरी चंद्रकला<br />
फ़िज़ाओं में जादू घुला<br />
जब तुमको देखा ऐसा लगा<br />
मेरा जीवन जैसे शिला</font></p>
<p><font color="#000000">अम्बर में जब चाँद खिला<br />
उस पल से चला जानाँ<br />
एक नया सिलसिला<br />
तुम मेरा माहताब<br />
तुम पानी में जलता चराग़<br />
तुम एक नया सिलसिला</font></p>
<p><font color="#000000">तेरी शमा से रोशन हुआ<br />
पहले था यह दिया बुझा-बुझा<br />
तेरी हर अदा, तू इक नशा<br />
तुमसा हसीन पहले न मिला<br />
मेरे ख़ुदा से मुझको<br />
कभी रहा नहीं कोई गिला</font></p>
<p><font color="#000000">अम्बर में जब चाँद खिला<br />
उस पल से चला जानाँ<br />
एक नया सिलसिला<br />
उसकी रहमत है जो<br />
उसने बनायी ऐसी कला<br />
तुम एक नया सिलसिला</font></p>
<p><font color="#000000">तुम हो मेरी चंद्रकला,<br />
तुम जान मेरी अजंता<br />
तुम एक नया सिलसिला</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[मेरा माहताब...]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=757</link>
<pubDate>Tue, 12 Feb 2008 14:15:28 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2008/02/12/meraa-mahtaab/</guid>
<description><![CDATA[मेरा माहताब जिसे देखा दिल हुआ बेताब
मे]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">मेरा माहताब जिसे देखा दिल हुआ बेताब<br />
मेरा मेरा मेरा मेरा माहताब<br />
जिसे देखा दिल हुआ बेताब<br />
जिसे देखा दिल हुआ बेताब<br />
जिसे देखा देखा देखा दिल हुआ बेताब<br />
मेरा मेरा मेरा मेरा माहताब<br />
सुलगता सुलगता हुआ ख़ाब<br />
खिला खिला महकता हुआ गुलाब</font></p>
<p><font color="#000000">मेरा माहताब जिसे देखा दिल हुआ बेताब<br />
मेरा मेरा मेरा मेरा माहताब<br />
शुक्रगुज़ार है दिल और मैं<br />
शुक्रगुज़ार है दिल और मैं<br />
निगाहों में भर आये अपने सारे ख़ाब नये<br />
निगाहों में भर आये आये आये आये<br />
अपने सारे ख़ाब नये</font></p>
<p><font color="#000000">रंग भर गये ज़िन्दगी के गुलों में गुलों में<br />
ऐ दिल मिल के सोचे क्या हैं अपनी ख़ाहिशें<br />
ज़रा-ज़रा-सी दिक़्क़तें आती हैं<br />
हर किसी के रास्ते, हर किसी के रास्ते </font></p>
<p><font color="#000000">मेरा माहताब मेरा मेरा मेरा मेरा माहताब<br />
जिसे देखा दिल हुआ बेताब<br />
मेरा माहताब, मेरा मेरा मेरा मेरा माहताब<br />
जिसे देखा देखा देखा दिल हुआ बेताब<br />
सुलगता सुलगता हुआ ख़ाब<br />
खिला खिला महकता हुआ गुलाब<br />
मेरा माहताब, मेरा मेरा मेरा मेरा माहताब</font></p>
<p><font color="#000000">मिलता नहीं क्या नाम है<br />
मिलता नहीं क्या नाम है<br />
खोंदी हमने कितनी परतें कितनी पत्थरें<br />
मिल जायें तो पूछें उनसे<br />
मिल जायें तो पूछें उनसे क्या नाम है?<br />
मिलता नहीं मिलता नहीं क्या नाम है?<br />
आते-जाते जाते-आते<br />
आते-आते जाते-जाते<br />
दिन कितने बीते, बीते...<br />
उसके बिना ज़िन्दगी आये  न मौताँ</font></p>
<p><font color="#000000">मेरा माहताब जिसे देखा दिल हुआ बेताब<br />
मेरा मेरा मेरा मेरा माहताब<br />
जिसे देखा दिल हुआ बेताब<br />
सुलगता सुलगता हुआ ख़ाब<br />
खिला खिला महकता हुआ गुलाब<br />
मेरा माहताब...</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[क़िस्मत की लकीरें]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=701</link>
<pubDate>Tue, 05 Feb 2008 04:47:51 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2008/02/05/kismat-kii-lakeerein/</guid>
<description><![CDATA[क़िस्मत की लकीरें
मुझे तुझसे दूर रखती ह]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">क़िस्मत की लकीरें<br />
मुझे तुझसे दूर रखती हैं<br />
यह नम आँखें<br />
तेरी याद में चाँद तकती हैं<br />
आँखें जब बंद करता हूँ<br />
मैं तेरा चेहरा देखता हूँ<br />
गुलों की तरह<br />
यह साँसों में महकता है<br />
माहताब की तरह<br />
ख़ाबों में दमकता है<br />
भूलता नहीं कुछ भी<br />
सिलसिला चला करता है</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २०००-२००१</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[दिल में फिर वही दर्द उठा है]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/12/16/%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b2-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%ab%e0%a4%bf%e0%a4%b0-%e0%a4%b5%e0%a4%b9%e0%a5%80-%e0%a4%a6%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a6-%e0%a4%89%e0%a4%a0%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88/</link>
<pubDate>Sun, 16 Dec 2007 22:05:39 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2007/12/16/dil-mein-fir-wahii-dard-uthaa-hai/</guid>
<description><![CDATA[दिल में फिर वही दर्द उठा है
तेरा हिज्र ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">दिल में फिर वही दर्द उठा है<br />
तेरा हिज्र मौत से बड़ी सज़ा है</font></p>
<p><font color="#000000">ये रक़ाबी माहताब की सर्द पेशानी<br />
जैसे साँसों में बर्फ़ का टुकड़ा है</font></p>
<p><font color="#000000">इक ख़ार चुभा है कब से सीने में<br />
वो संगदिल आज मेरा ख़ुदा है</font></p>
<p><font color="#000000">गुले-पलाश की तरह मेरा जीवन<br />
जुदा ख़ुशबू से ताउम्र जुदा है</font></p>
<p><font color="#000000">'नज़र' को जहाँ तुम छोड़ गये थे<br />
वह आज भी उसी मोड़ पे खड़ा है</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र'<br />
लेखन वर्ष: २००२</p>
]]></content:encoded>
</item>

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