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	<title>मुश्किल &amp;laquo; WordPress.com Tag Feed</title>
	<link>http://wordpress.com/tag/मुश्किल/</link>
	<description>Feed of posts on WordPress.com tagged "मुश्किल"</description>
	<pubDate>Sun, 12 Oct 2008 01:39:59 +0000</pubDate>

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	<language>en</language>

<item>
<title><![CDATA[तुम मेरे हो]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=961</link>
<pubDate>Mon, 07 Apr 2008 05:15:02 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2008/04/07/tum-mere-ho-2/</guid>
<description><![CDATA[तुम मेरे हो, मेरे ही मेरे हो
कितनी हों द]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">तुम मेरे हो, मेरे ही मेरे हो<br />
कितनी हों दूरियाँ, कितने हों फ़ासले<br />
तुम मेरे हो, तुम मेरे हो...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">दोनों हाथों की लकीरों में लिख लूँ<br />
मैं तुम्हें इस जहाँ से छीन लूँ<br />
तुम मेरे हो, तुम मेरे हो...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">पागल, शैदाई, क़ातिल हूँ तेरे लिए<br />
हाँ मेरी जान तुम्हें पाने के लिए<br />
तुम मेरे हो, तुम मेरे हो...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">मुश्किलों को आसाँ करना आता है<br />
मुझे हद से गुज़रना आता है<br />
तुम मेरे हो, तुम मेरे हो...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">जो तुम्हें देखे उसका अंजाम हूँ<br />
मैं और मैं ही तेरा मक़ाम हूँ<br />
तुम मेरे हो, तुम मेरे हो...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">लहू के क़तरे-क़तरे में तुम हो<br />
दिल में धड़कनों में तुम हो<br />
तुम मेरे हो, तुम मेरे हो...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">जान हो, ज़िन्दगी हो, तुम मेरी<br />
ख़ुदा से बन्दगी हो, तुम मेरी<br />
तुम मेरे हो, तुम मेरे हो...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">आओ तुमको अपना बना लूँ मैं<br />
दिल, जान, सीने से लगा लूँ मैं<br />
तुम मेरे हो, तुम मेरे हो...</span></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[राहे-इश्क़ में मुश्किल ही सही पार उतरना]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=960</link>
<pubDate>Sun, 06 Apr 2008 18:17:23 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2008/04/06/raahe-ishq-mein-mushkil-hii-sahii-paar-utarana/</guid>
<description><![CDATA[राहे-इश्क़ में मुश्किल ही सही पार उतरना]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">राहे-इश्क़ में मुश्किल ही सही पार उतरना<br />
मगर हम शोलों पर भी चलकर जायेंगे<br />
हमें तो चाह है तेरे इश्क़ की रोज़े-अव्वल से<br />
तुम नहीं जानते क्या कर गुज़र जायेंगे</span></p>
<p><span style="color:#000000;">है हर गुल को छूने से तेरा लम्स हासिल<br />
मगर यह चमन इक रोज़ बिखर जायेंगे<br />
लम्हे यह बहुत उदास-उदास हैं तुम बिन<br />
तुम आओगे रंगो-शाद से निखर जायेंगे</span></p>
<p><span style="color:#000000;">मेहरबानिए-इश्क़ कभी तुम हमसे निबाहो<br />
हम बिगड़ी क़िस्मत हैं सँवर जायेंगे<br />
मरना तो एक न एक दिन सबको है हमदम<br />
जान लो तेरे इश्क़ की ख़ातिर मर जायेंगे</span></p>
<p><span style="color:#000000;">सदफ़ में गौहर की तरह दिल में तुम रहते हो<br />
ज़ीस्त है तुमसे, तुम बिन ज़रर जायेंगे<br />
ख़ातिर से अपने तुम नवाज़ दो हमको मेहरबाँ<br />
तेरे दिल तक आँसुओं में बहकर जायेंगे</span></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[कोई तो तुम्हें पाने की राह मिले]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=951</link>
<pubDate>Fri, 28 Mar 2008 17:47:23 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2008/03/28/koii-to-tumhein-paane-kii-raah-mile/</guid>
<description><![CDATA[कोई तो तुम्हें पाने की राह मिले
कभी ते]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">कोई तो तुम्हें पाने की राह मिले<br />
कभी तेरे आगोश में पनाह मिले<br />
मैं शज़रे-धूप की छाँव में बैठा हूँ<br />
कभी तो इनायते-निगाह मिले</font></p>
<p><font color="#000000">तुम हाथ तो बढ़ा दो मेरे मसीहा<br />
ज़ख़्मों पे रख दो मरहम का फीहा<br />
बेबसी में मेरा दम घुटने लगा है<br />
फिर से सौंधी हुई सुबह मिले</font></p>
<p><font color="#000000">रुख़े-ख़ुशी मेरी तरफ़ मोड़ दो<br />
मेरे दर्द का हर तागा तोड़ दो<br />
एक ही ख़ाहिश है मेरी बरसों से<br />
तेरे दिल में मुझे जगह मिले</font></p>
<p><font color="#000000">मैं अपनी कोशिशों में रहूँ क़ाबिल<br />
इस दरिया को मिले तेरा साहिल<br />
तुम्हीं से ज़िन्दगी को मानी मिला है<br />
काश कि तेरी-मेरी हर राह मिले</font></p>
<p><font color="#000000">मुश्किलें सब यह आसाँ हो जायें<br />
जो हम दो जिस्म एक जाँ हो जायें<br />
लम्हों में सदियाँ तय कर चुका हूँ<br />
तेरा-मेरा दिल किसी तरह मिले</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[रदीफ़ का खेल.....]]></title>
<link>http://rohitler.wordpress.com/2008/03/25/%e0%a4%a4%e0%a5%8b-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%b2-%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%97%e0%a5%80/</link>
<pubDate>Tue, 25 Mar 2008 07:38:11 +0000</pubDate>
<dc:creator>Rohit Jain</dc:creator>
<guid>http://rohitler.hi.wordpress.com/2008/03/25/%e0%a4%a4%e0%a5%8b-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%b2-%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%97%e0%a5%80/</guid>
<description><![CDATA[पैमानेग़म बिखर गया तो मुश्किल होगी
ये द]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>पैमानेग़म बिखर गया तो मुश्किल होगी<br />
ये दिल से उतर गया तो मुश्किल होगी</p>
<p>उसे देखा है आज मुद्दतों के बाद कहीं<br />
ये दिन भी गुज़र गया तो मुश्किल होगी</p>
<p>बमुश्किल हुआ, खाली हुआ अश्कों से ये दिल<br />
ये फिर से जो भर गया तो मुश्किल होगी</p>
<p>हमको आता ही क्या है मोहब्बत के सिवा<br />
ये भी जो हुनर गया तो मुश्किल होगी</p>
<p>वो ख्वाब में आके मुझे हौंसला देता तो है<br />
ये सिलसिला ठहर गया तो मुश्किल होगी</p>
<p>अब और मत लीजिये दिल का इम्तिहान<br />
ये दिल कुछ कर गया तो मुश्किल होगी</p>
<p>आदत सी है इसको तो अब वीरानों की<br />
ये दिल जो संवर गया तो मुश्किल होगी</p>
<p>दिल पहले ही वहशतज़दा है, बस कीजिये<br />
ये ग़र और ड़र गया तो मुश्किल होगी</p>
<p>खुश है ये देखो तो आवारामिजाज़ी से<br />
ये लौट के घर गया तो मुश्किल होगी</p>
<p>वो समझता है मोहब्बत मेरी इबादत को<br />
ये इल्ज़ाम धर गया तो मुश्किल होगी</p>
<p>बस यादों की उड़ानों में ही मिलता हूँ उसे<br />
ये पर भी क़तर गया तो मुश्किल होगी</p>
<p>रोहित जैन<br />
25-03-2008</p>
<p>--------------------------------------------------------------------------</p>
<p>अब थोड़ा सा खेल रहा हूँ रदीफ़ के साथ, देखिये किस तरह ग़ज़ल का मूड़ बदलता है....</p>
<p>पैमानेग़म बिखर गया तो मज़ा<br />
ये दिल से उतर गया तो मज़ा</p>
<p>उसे देखा है आज मुद्दतों के बाद कहीं<br />
ये दिन भी गुज़र गया तो मज़ा</p>
<p>बमुश्किल हुआ, खाली हुआ अश्कों से ये दिल<br />
ये फिर से जो भर गया तो मज़ा</p>
<p>हमको आता ही क्या है मोहब्बत के सिवा<br />
ये भी जो हुनर गया तो मज़ा</p>
<p>वो ख्वाब में आके मुझे हौंसला देता तो है<br />
ये सिलसिला ठहर गया तो मज़ा</p>
<p>अब और मत लीजिये दिल का इम्तिहान<br />
ये दिल कुछ कर गया तो मज़ा</p>
<p>आदत सी है इसको तो अब वीरानों की<br />
ये दिल जो संवर गया तो मज़ा</p>
<p>दिल पहले ही वहशतज़दा है, बस कीजिये<br />
ये ग़र और ड़र गया तो मज़ा</p>
<p>खुश है ये देखो तो आवारामिजाज़ी से<br />
ये लौट के घर गया तो मज़ा</p>
<p>वो समझता है मोहब्बत मेरी इबादत को<br />
ये इल्ज़ाम धर गया तो मज़ा</p>
<p>बस यादों की उड़ानों में ही मिलता हूँ उसे<br />
ये पर भी क़तर गया तो मज़ा</p>
<p>रोहित जैन<br />
25-03-2008</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[दिल तोड़ना at first sight]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=896</link>
<pubDate>Wed, 12 Mar 2008 04:25:10 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2008/03/12/dil-torana-at-first-sight/</guid>
<description><![CDATA[दिल तोड़ना at first sight
झूठा गुस्सा उस पर झूठ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">दिल तोड़ना at first sight<br />
झूठा गुस्सा उस पर झूठी fight<br />
लड़की है दीवानी लड़का दीवाना<br />
अपनी दोनों की जमेगी, right!</font></p>
<p><font color="#000000">तुमको रोज़-रोज़ करता हूँ miss<br />
please करने दो न एक kiss<br />
तुमको बनाऊँगा अपनी जान<br />
चाहोगी लाऊँगा तुम्हारे लिए चाँद</font></p>
<p><font color="#000000">ऐसी अदा ऐसा नशा जो देखा<br />
तुझे देखते ही प्यार हो गया<br />
आँखें बंद करके लेट भी गया<br />
पर नींद न आयी सारी-सारी night</font></p>
<p><font color="#000000">लड़की है दीवानी लड़का दीवाना<br />
अपनी दोनों की जमेगी, right!<br />
दिल तोड़ना at first sight<br />
झूठा गुस्सा उस पर झूठी fight</font></p>
<p><font color="#000000">मेरे love का angle ज़रा टेढ़ा है<br />
इन रास्तों पर रोड़ा ही रोड़ा है<br />
पर मेरी बात न माना मेरा दिल<br />
ढूँढ़ता रहा एक नयी मुश्किल</font></p>
<p><font color="#000000">मैंने कितना अपनी बात समझायी<br />
जो बीती वह कहानी दोहरायी<br />
पीछे-पीछे दौड़ता रहा मुझको खींचता रहा<br />
दिखाता रहा अंधेरे में light</font></p>
<p><font color="#000000">लड़की है दीवानी लड़का दीवाना<br />
अपनी दोनों की जमेगी, right!<br />
दिल तोड़ना at first sight<br />
झूठा गुस्सा उस पर झूठी fight</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २६ मई २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[मेरा दीवाना दिल धड़कता है]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=858</link>
<pubDate>Wed, 27 Feb 2008 19:31:54 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2008/02/28/meraa-deewaana-dil-dharakata-hai/</guid>
<description><![CDATA[मेरा दीवाना दिल धड़कता है, तेरे लिए
पल-]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">मेरा दीवाना दिल धड़कता है, तेरे लिए<br />
पल-पल चोरी-चोरी तड़पता है, तेरे लिए<br />
जीता है तेरे लिए, मरता है तेरे लिए</font></p>
<p><font color="#000000">सामने तेरा आना, शरमाना, नज़रें चुराना<br />
उफ़! तेरी हर तिरछी क़ातिल अदा पर<br />
मेरा फ़िदा हो जाना, कुछ न कह पाना</font></p>
<p><font color="#000000">इस तरह ऐसे हाल में कब तक जियूँगा<br />
तेरे क़रीब होकर भी दूर कब तक रहूँगा<br />
मेरा आँखों से कहना, तेरा आँखों से पढ़ना<br />
बड़ा मुश्किल है, दूर रहना, सब सहना</font></p>
<p><font color="#000000">मेरा दीवाना दिल धड़कता है, तेरे लिए<br />
पल-पल चोरी-चोरी तड़पता है, तेरे लिए<br />
जीता है तेरे लिए, मरता है तेरे लिए</font></p>
<p><font color="#000000">मेरी रूह को सुकूँ दे, जीने को कोई जुनूँ दे<br />
प्यार मुश्किल, तन्हाई हासिल न बना<br />
मेरा दिल चाँद है, चाँदनी की तलाश है<br />
हाँ कह भी दे तू दिल के आस-पास है</font></p>
<p><font color="#000000">सामने तेरा आना, शरमाना, नज़रें चुराना<br />
उफ़! तेरी हर तिरछी क़ातिल अदा पर<br />
मेरा फ़िदा हो जाना, कुछ न कह पाना</font></p>
<p><font color="#000000">मेरी आशिक़ी हद पार कर जायेगी<br />
यह जान जायेगी, गर तू मुझे आज़मायेगी<br />
सामने से गुज़रते हो, और सब जानते हो<br />
बता भी दो मेरी जान, तू कब चाहेगी</font></p>
<p><font color="#000000">मेरा दीवाना दिल धड़कता है, तेरे लिए<br />
पल-पल चोरी-चोरी तड़पता है, तेरे लिए<br />
जीता है तेरे लिए, मरता है तेरे लिए</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: ०६ मई २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[टूटे हुए चाँद को]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=827</link>
<pubDate>Mon, 25 Feb 2008 16:26:35 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2008/02/25/tuute-hue-chaand-ko/</guid>
<description><![CDATA[टूटे हुए चाँद को सादे काग़ज़ में लपेटा ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">टूटे हुए चाँद को सादे काग़ज़ में लपेटा मैंने<br />
भीगे हुए सूरज को हथेलियों में समेटा मैंने<br />
तारे बसरने लगे और आसमाँ ख़ाली हो गया<br />
उसने एक आइने की तरह मुझे तोड़ दिया है<br />
...तोड़ दिया है</font></p>
<p><font color="#000000">जला दिये दिल के जज़्बात उसने<br />
बढ़ा दिये मेरे मुश्किलात उसने<br />
जीना मेरा जीना बहुत मुश्किल है<br />
यह ज़हर पीना बहुत मुश्किल है</font></p>
<p><font color="#000000">बहार में भी शाख़ों पर ख़िज़ाँ थी<br />
सूखी-सूखी बंजर हर फ़िज़ा थी<br />
फ़िज़ाएँ रंग बदलने लगी हैं<br />
हवाओं के साथ चलने लगी हैं मगर<br />
उसने निगाहों में खिलना छोड़ दिया है<br />
...छोड़ दिया है</font></p>
<p><font color="#000000">फ़िज़ाएँ मौसम के साथ खिलती हैं<br />
और मौसम बदलते रहते हैं<br />
मौसम बदला है तो फ़िज़ा भी बदलेगी<br />
बदले हुए मौसम ने हज़ार रास्तों को<br />
मेरी तरफ़ मोड़ दिया है, मोड़ दिया है<br />
...मोड़ दिया है</font></p>
<p><font color="#000000">शब्दों की स्याही में रिश्ते हैं<br />
फूलों के अर्क़ में रिश्ते हैं<br />
हर शब्द हर फूल में मिलते हैं<br />
हर जिस्म की शाखों पर खिलते हैं<br />
मिलते हैं बिछुड़ते हैं,<br />
बिछुड़ते हैं मिलते हैं<br />
समंदर की लहर जैसे चलते रहते हैं<br />
खिलते हैं महकते हैं<br />
बनते हैं बुझते हैं<br />
यह धूप-छाँव के जैसे रंग बदलते हैं</font></p>
<p><font color="#000000">उसने एक रिश्ता तोड़ा है इक जोड़ दिया है<br />
जोड़कर उसने रिश्ते को फिर तोड़ दिया है<br />
...तोड़ दिया है</font></p>
<p><font color="#000000">जला दिये दिल के जज़्बात उसने<br />
बढ़ा दिये मेरे मुश्किलात उसने<br />
जीना मेरा जीना बहुत मुश्किल है<br />
यह ज़हर पीना बहुत मुश्किल है</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९ अप्रैल २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[जो दिल से जाता नहीं है]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=813</link>
<pubDate>Mon, 18 Feb 2008 19:42:20 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2008/02/19/jo-dil-se-jaata-nahiin-hai/</guid>
<description><![CDATA[जो दिल से जाता नहीं है
तू वह गीत है
जो द]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">जो दिल से जाता नहीं है<br />
तू वह गीत है<br />
जो दिल में आकर बसा था<br />
तू वह मीत है</font></p>
<p><font color="#000000">साँसों की सरगम बस तुम ही तुम<br />
लफ़्ज़ों में जब हम बस तुम ही तुम</font></p>
<p><font color="#000000">कहना कितना मुश्किल था<br />
यह समझा न सके<br />
अपने दिल की बात हम<br />
तुम्हें बता न सके</font></p>
<p><font color="#000000">जो दिल से जाता नहीं है<br />
तू वह गीत है<br />
जो दिल में आकर बसा था<br />
तू वह मीत है</font></p>
<p><font color="#000000">प्यार क्या है सनम हमें कब पता था<br />
हमें जब तुम मिले तब पता चला था</font></p>
<p><font color="#000000">अकेले रहना मुमकिन नहीं<br />
यह कह न सके<br />
अपने दिल के जज़्बात हम<br />
तुम्हें जता न सके</font></p>
<p><font color="#000000">जो दिल से जाता नहीं है<br />
तू वह गीत है<br />
जो दिल में आकर बसा था<br />
तू वह मीत है</font></p>
<p><font color="#000000">अब तो ऐसा लगता है मुझको<br />
जैसे फूलों में ख़ुशबू नहीं है<br />
तुम जो नहीं यहाँ पर सनम<br />
जैसे यहाँ पर कुछ भी नहीं है</font></p>
<p><font color="#000000">बेचैन करती हैं यादें दिन-रात<br />
बुझती नहीं हैं साँसें<br />
हर लम्हा सोचता हूँ क्या मैं<br />
करूँ तो क्या करूँ</font></p>
<p><font color="#000000">जो दिल से जाता नहीं है<br />
तू वह गीत है<br />
जो दिल में आकर बसा था<br />
तू वह मीत है</font></p>
<p><font color="#000000">कुछ और अब बाक़ी नहीं<br />
बस मैं हूँ मेरा ख़ाब है<br />
ख़ामोश रहती हैं यह रातें<br />
बस मैं हूँ मेरा साथ है</font></p>
<p><font color="#000000">ज़िन्दगी मेरी तुम बदलकर चले गये<br />
तन्हा कर गये हमें तन्हा कर गये</font></p>
<p><font color="#000000">जो दिल से जाता नहीं है<br />
तू वह गीत है<br />
जो दिल में आकर बसा था<br />
तू वह मीत है</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[हाल दिल का बताना तुमसे]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=805</link>
<pubDate>Mon, 18 Feb 2008 15:05:28 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2008/02/18/haal-dil-ka-bataana-tum-se/</guid>
<description><![CDATA[हाल दिल का बताना तुमसे बहुत ही मुश्किल]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">हाल दिल का बताना तुमसे बहुत ही मुश्किल है<br />
न जाने कितना, बेशुमार दर्द इसमें शामिल है<br />
हर लम्हा ज़िन्दगी को ज़िन्दगी से दूर करता है<br />
जाने किस रफ़्तार दोनों का दिल शोर करता है</font></p>
<p><font color="#000000">जाने अन्जाने मुझसे कितनी गुस्ताखियाँ हो गयीं<br />
हम क्यों समझ न पाये और आप दूर होती गयीं <br />
थोड़ी-थोड़ी दोस्ती न जाने कब मोहब्बत बन गयी<br />
एक फूल खिला और सारी फ़िज़ा जन्नत हो गयी</font></p>
<p><font color="#000000">हाल दिल का बताना तुमसे बहुत ही मुश्किल है<br />
न जाने कितना, बेशुमार दर्द इसमें शामिल है</font></p>
<p><font color="#000000">वही समझता है यह इश्क़ जो इश्क़ का मारा है<br />
समझे पाये बहुत देर से हम, यह कच्चा सहारा है<br />
पलकें भारी हो जाती हैं कोशिश करते हैं जागने की<br />
कैसी ज़िन्दगी है ज़रूरत पड़ती है साँसें माँगने की</font></p>
<p><font color="#000000">हाल दिल का बताना तुमसे बहुत ही मुश्किल है<br />
न जाने कितना, बेशुमार दर्द इसमें शामिल है</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[हल्के-हल्के आँसू टूटे हैं]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=802</link>
<pubDate>Mon, 18 Feb 2008 13:01:32 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2008/02/18/halke-halke-aamsoon-toote-hain/</guid>
<description><![CDATA[हल्के-हल्के आँसू टूटे हैं मेरी आँखों स]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">हल्के-हल्के आँसू टूटे हैं मेरी आँखों से<br />
अब बात नहीं बनती है तेरी यादों से<br />
इतनी दूरी क्यों है, यह मजबूरी क्यों है<br />
इसका जवाब दो तुम इसका जवाब दो<br />
यह जुदाई क्यों है यह रुसवाई क्यों है<br />
इसका जवाब दो मुझे इसका जवाब दो</font></p>
<p><font color="#000000">यह दिल मेरा तेरी मोहब्बत चाहता है<br />
वह दिल तेरा मेरी मोहब्बत चाहता है<br />
इस मुश्किल से थोड़ी राहत चाहता है</font></p>
<p><font color="#000000">हल्के-हल्के आँसू टूटे हैं मेरी आँखों से<br />
अब बात नहीं बनती है तेरी यादों से</font></p>
<p><font color="#000000">ख़ाहिश है तू मेरी, जन्नत है तू मेरी<br />
इस दुनिया में सबसे सुन्दर है तू ही<br />
नीले आकाश में जैसे उड़ता बादल है<br />
नील आँखों में जैसे सजता काजल है<br />
कुछ यूँ मेरे दिल के अन्दर है तू ही<br />
मेरी सजनी तू नील समन्दर है तू ही</font></p>
<p><font color="#000000">हल्के-हल्के आँसू टूटे हैं मेरी आँखों से<br />
अब बात नहीं बनती है तेरी यादों से</font></p>
<p><font color="#000000">तुम मेरे जीवन में फिर आ जाओ<br />
तुम मुझे एक बार अपना कह जाओ<br />
फिर जो बोलोगे तुम हम कर जायेंगे<br />
फिर तुम बोलोगे तो हम मर जायेंगे<br />
पर ऐसी ज़िन्दगी हम न जी पायेंगे<br />
तन्हा साँसें ले‍गें हम तन्हा मर जायेंगे</font></p>
<p><font color="#000000">हल्के-हल्के आँसू टूटे हैं मेरी आँखों से<br />
अब बात नहीं बनती है तेरी यादों से<br />
इतनी दूरी क्यों है, यह मजबूरी क्यों है</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[आज वह हर शख़्स मुझे बेग़ाना लगता है]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/12/28/%e0%a4%b5%e0%a4%b9-%e0%a4%b9%e0%a4%b0-%e0%a4%b6%e0%a4%96%e0%a4%bc%e0%a5%8d%e0%a4%b8-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%9d%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a5%87%e0%a5%9a%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%b2%e0%a4%97/</link>
<pubDate>Fri, 28 Dec 2007 14:41:21 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2007/12/28/aaj-wah-har-shakhs-mujhe-beghaana-lagataa-hai/</guid>
<description><![CDATA[आज वह हर शख़्स मुझे बेग़ाना लगता है
कल त]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">आज वह हर शख़्स मुझे बेग़ाना लगता है<br />
कल तक जिसके लिए दिल दिवाना लगता है</font></p>
<p><font color="#000000">निगाहों में हैं सारे अंदाज़ आज भी वही<br />
मगर ख़ामोशी में नया अफ़साना लगता है</font></p>
<p><font color="#000000">हो मशरूफ़ वह अपने कामों में क्या पता<br />
बड़ा ख़राब उसका नज़रें चुराना लगता है</font></p>
<p><font color="#000000">न कुछ कहता है वह न कुछ करता है<br />
दूर-दूर रहता है मुझसे रोज़ाना लगता है</font></p>
<p><font color="#000000">वह कल तक सलाम 'विनय' को करता था<br />
आज उसको मुश्किल मुस्कुराना लगता है</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[नहीं आसाँ तो मुश्किल ही सही]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/12/25/%e0%a4%a8%e0%a4%b9%e0%a5%80%e0%a4%82-%e0%a4%86%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%81-%e0%a4%a4%e0%a5%8b-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%b2-%e0%a4%b9%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%b9/</link>
<pubDate>Tue, 25 Dec 2007 13:57:51 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2007/12/25/nahiin-aasaan-to-mushkil-hii-sahii/</guid>
<description><![CDATA[नहीं आसाँ तो मुश्किल ही सही
वह जो है मा]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">नहीं आसाँ तो मुश्किल ही सही<br />
वह जो है माहे-कामिल है वही</font></p>
<p><font color="#000000">मुझको तो इख़लास है उसी से<br />
ख़ुदा मुझसे संगदिल ही सही</font></p>
<p><font color="#000000">अजनबी है जी मेरा मुझसे ही<br />
वह दर्द से ग़ाफ़िल ही सही</font></p>
<p><font color="#000000">चश्मे-तर से न बुझी आतिश<br />
यह दाग़े-तहे-दिल ही सही</font></p>
<p><font color="#000000">मरहम न करो घाव पर मेरे<br />
चाहत मेरी नाक़ाबिल ही सही</font></p>
<p><font color="#000000">अंजाम की परवाह है किसको<br />
सीने में शीशाए-दिल ही सही</font></p>
<p><font color="#000000">उफ़ तक न की जाये तेरे ग़म में<br />
नालए-सोज़े-दिल है यही</font></p>
<p><font color="#000000">बोले है तेरा इश्क़ सर चढ़के<br />
ख़ुद में मुकम्मिल है यही</font></p>
<p><font color="#000000">चाँदनी रिदा है रोशनाई आज<br />
शाम को सुबह के साहिल ही सही</font></p>
<p><font color="#000000">अफ़सोस किस बात का नज़र<br />
तमाम उम्र का हासिल है यही</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[ख़ाली सीने में कुछ धुँआ-धुँआ-सा है]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/12/25/%e0%a4%96%e0%a4%bc%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a5%80%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%81%e0%a4%9b-%e0%a4%a7%e0%a5%81%e0%a4%81%e0%a4%86-%e0%a4%a7%e0%a5%81/</link>
<pubDate>Tue, 25 Dec 2007 13:10:16 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2007/12/25/khalii-seene-mein-kuchh-dhumaa-dhumaa-sa-hai/</guid>
<description><![CDATA[ख़ाली सीने में कुछ धुँआ-धुँआ-सा है
जिस ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">ख़ाली सीने में कुछ धुँआ-धुँआ-सा है<br />
जिस सिम्त देखता हूँ दिल बदगुमाँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">दर्द को दर्द हो ऐसा होता नहीं<br />
इसीलिए ख़ातिर में यह नौ-जवाँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">ख़ुदा ही मेहर से मैं रहा सदियों के फ़ासले पे<br />
आज भी वह ना-मेहरबाँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">ढूँढ़ता हूँ मैं ख़ुद को उस गली में<br />
जिसमें मुझे ज़िन्दगी होने का नुमाया-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">रोशनी में भिगो दिया शबे-महफ़िल को जिसने<br />
तेरी रंगत का शुआ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">एहसासात दफ़्न हैं किसी कब्र में<br />
दर्द दिल का आज कुछ बे-ज़ुबाँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">खींच लिया जिगर को दाँतों से लब तक<br />
आज महफ़िल में यह कमनुमा-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">तेरी दीद से बादशाहत मिली थी मुझे<br />
ज़ख़्म कहता है तेरा साया हुमा-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">बदनसीबी गर्दिशे-अय्याम है बस<br />
वक़्त यह एक इम्तिहाँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">तमाशा बहुत हुआ तेरे जाने के बाद<br />
जो कुछ भी हुआ ज़ख़्मे-निहाँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">शज़र बेसमर हैं नकहते-गुल भी नहीं<br />
मौसम यह ज़र्द ख़िज़ाँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">ज़ीस्त नवाज़ी गयी सो जी रहे हैं<br />
मगर जीना मुश्किल मरना आसाँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">मैं गर तेरा तस्व्वुर करूँ<br />
बूँद-बूँद शबनम का गिरना भी गिरियाँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">तुम नहीं गुज़रते इस राह से<br />
मेरी गली का हर पत्थर रेगिस्ताँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">वह उजाले जिनसे चौंक गयीं थीं मेरी आँखें<br />
मंज़र वह भी कहकशाँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">ना पूछ कब से तेरे दीवानों में शामिल हूँ<br />
हाल मेरा भी कुछ-कुछ बियाबाँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">नीली शाल में लिपटी देखा था तुझे<br />
तब से जाना कि चाँद किसी माहलक़ा-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">तुम आये घर मेरे आस्ताने तक<br />
कि अब का'बा ही मेरे सँगे-आस्ताँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">इश्क़ में हमसा न पायेगा कोई<br />
न होना मेरा उनकी बज़्म में हरमाँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">हम वस्ल की तमन्ना में मुए जाते हैं<br />
ज़ुज तेरे सभी से वस्ल हिज्राँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">शगून तेरे देखने भर से होता था<br />
आज इन आँखों में हर क़तरा टूटा-टूटा-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">बेज़ार है चमन तितली ज़र कैसे पिये<br />
अब कि मौसम भी कुछ बेईमाँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">ज़हर हमको दिया दवा बता के ख़ुदा ने<br />
ज़ीस्त जो बख़्शी यह भी सौदा-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">'नज़र' बातें हैं बहुत उसके इश्क़ो-ग़म में<br />
जिसका दिल पर निशाँ-सा है</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[अब 'विनय' तेरे ग़म से ग़ाफ़िल नहीं रहा]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/09/19/%e0%a4%85%e0%a4%ac-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a4%af-%e0%a4%a4%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a5%87-%e0%a5%9a%e0%a4%ae-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a5%9a%e0%a4%be%e0%a5%9e%e0%a4%bf%e0%a4%b2-%e0%a4%a8%e0%a4%b9/</link>
<pubDate>Wed, 19 Sep 2007 19:45:51 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2007/09/19/ab-vinay-tere-gham-se-ghafil-nahiin-raha/</guid>
<description><![CDATA[अब ‘विनय’ तेरे ग़म से ग़ाफ़िल नहीं रहा
दे]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">अब ‘विनय’ तेरे ग़म से ग़ाफ़िल नहीं रहा<br />
देख तो वो मग़रूर वो संगदिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">हमें कोई शिबासी दे हमने तेरा राज़ न खोला<br />
पर जानाँ ये जान लो मैं बातिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">तेरी कही सुनी सब मुझे वक़्त ने भुला दी<br />
ये ग़ैर तेरी दुश्मनी के क़ाबिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">हमें जब नाज़ थे तो ये दर्द किसलिए हैं<br />
तेरे बाद कोई चेहरा मुस्तक़िल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">तुम हमसे पूछो वह शामे-माज़ी की तन्हाई<br />
कभी कोई इतना दिल में दाख़िल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">तुमने ख़ुद मुझे अपना दोस्त बनाया होता<br />
तुम्हें तो कोई काम कभी मुश्किल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">हमसे एक-एक कर सब हाथ छूटते गये<br />
मेरे कूचे में वो माहे-कामिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">सद्-हैफ़ो-अफ़सोस से कलेजा भर आया<br />
हाए मुझे सिवा ग़म कुछ हासिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">हमें कोई देता ताक़ते-नज़्ज़ाराए-हुस्न<br />
सुना  है मेरी राह में कोई हाइल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">साँसों का धुँआ दिल को दर्द देता है बहुत<br />
ज़िन्दगी में बाइसे-मसाइल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">वो गुफ़्त-गू वो मशविरे वो बयान अपने<br />
ख़ुदा के ज़ख़्म देखे तो मैं बिस्मिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">गर्दिशे-अय्याम की रवानी देखकर<br />
मेरा दिले-सौदा मुज़महिल</font><font color="#c0c0c0">1</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">अब इस चमन में फिरती है खुश्क सबा<br />
मस्जूदा कोई जल्वाए-गुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">किसके दिन उम्रभर एक से रहते हैं<br />
मुझमें तो वो हुस्ने-अमल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">मेरी काविश</font><font color="#c0c0c0">2</font> का किसी राह तो हासिल होगा<br />
हैफ़ मेरे ग़म की कोई मंज़िल नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">मैं अहदे-ज़ीस्त करके किससे तोड़ूँ<br />
मुझे तफ़रकाए-नाक़िसो-कामिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">मुझे तुम छोड़कर गये लेकिन क्या बताऊँ<br />
एक अरसा बर्क़े-सोज़े-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">तुमको जाना है तो जाओ कब हमने रोका है<br />
किसी के जाने का ग़म हमें बिल्कुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">इस दरया को ख़्वाहिश है समंदर की<br />
और सहाब का बरसना मुसलसल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">सू-ए-शिर्क सजदे-मस्जूद किये मैंने<br />
क्योंकि मैं तेरे कूचे का माइल</font><font color="#c0c0c0">3</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">अब किससे करूँगा उसकी जफ़ा का शिकवा<br />
आज से कोई दराज़ दस्तिए-क़ातिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">इस ज़र्फ़ कोई आये तो देखे हाल बीमार का<br />
वो पुरसिशे-जराहते-दिल</font><font color="#c0c0c0">4</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">अच्छा हुआ तुमने रोज़े-आख़िर न बोला<br />
रोज़े-विदा से कोई उक़्दाए-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">दु:ख गिनते-गिनते उम्र कट जायेगी<br />
किसी की इनायत किसी का तग़ाफ़ुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">फ़िज़ा क्यों इतनी ख़ामोश है गुलशन में<br />
क्या आशियाँ में नालाए-बुलबुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">था तब मिला नहीं, खोकर मिलता है कौन<br />
दिल मुझे ख़्याले-यारे-वस्ल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">मैं जिसको दोस्त कह नहीं सकता अब<br />
मुझे उसके लिए जज़्बाए-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">किसको खरोंचे हो अपने नाख़ून से तुम<br />
इस सीने में कोई जराहते-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">उर्दी-ओ-दै का अब मैं क्या ख़्याल रखूँ<br />
ये कैसी जलन, मुझे तपिशे-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">अपनी यकताई पर बेहद नाज़ था हमको<br />
आज भी है लेकिन वो मुतक़ाबिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">अब भी खिलती है शुआहाए-ख़ुर-फ़ज़िर <br />
मगर फ़िज़ा में शाहिद-ए-गुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">बहुत ढूँढ़ा हमने उसके जैसा, न पाया एक<br />
वो नमकपाशे-ख़राशे-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">अब ख़ुल्द में रहें या दोज़ख में रहें हम<br />
ऐ सनम मेरा तो आबो-गिल</font><font color="#c0c0c0">5</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">उस फ़ितनाख़ेज़ का नहीं अब डर मुझको<br />
कि मेरे दिल में स’इ-ए-बेहासिल</font><font color="#c0c0c0">6</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">आँखों से निक़ाब उठाओ कि वहम खुल जाये<br />
कि तुझमें वो तर्ज़े-तग़ाफ़ुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">कहने को तो ज़ामिन नहीं मुझसा ज़माने में<br />
पर जाने क्यों मुझे तहम्मुल</font><font color="#c0c0c0">7</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">वो जिसकी चाप से धड़कनें रुक जायें थीं<br />
ज़िन्दगी में वो हौले-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">ऐ लोगों मैं ख़ुद को किस ज़ात का बताऊँ<br />
सुना है तुममें ज़रा भी दीनो-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">दायम अपने बग़ल में पाओगे तुम हमको<br />
चाहो तो कह लो मैं तुझमें मुश्तमिल</font><font color="#c0c0c0">8</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">क्यों है मुझको तेरे रूठ कर जाने का ग़म<br />
जबकि जानते हो मैं कभी तेरा काइल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">कहता तो हूँ बात दिल की मगर क्या करूँ<br />
मेरा कोई भी ख़्याल मानिन्दे-गुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">उसकी ख़ामोश आँखों में अयाँ थीं बातें दिल की<br />
वो चाहकर भी कभी सू-ए-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">किया जो मैंने तुम्हें अपना समझकर किया<br />
ये दिल तेरी जफ़ा से मुनफ़’इल</font><font color="#c0c0c0">9</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">मैंने देखा था उसे जाते ख़ुल्द की ओर<br />
वो हलाके-फ़रेब-वफ़ा-ए-गुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">जो कभी साहिल पर था कभी समंदर में<br />
उसको दाग़े-हसरते-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">जिसपे लिखा करते थे तुम अपना नाम<br />
शख़्स वो आज गर्दे-साहिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">आज फ़ारिग</font><font color="#c0c0c0">10</font> हूँ कि तुम हो मेरे ग़मख़्वार<br />
मैं हरीफ़े-मतलबे-मुश्किल<font color="#c0c0c0">11</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">था तो थोड़ा बहुत मैं ये मानता हूँ लेकिन<br />
आज उतना भी तो सोज़िशे-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">मैं दर्द को दिल से जुदा कर सकता हूँ<br />
पर फ़ुसूने-ख़्वाहिशे-सैक़ल</font><font color="#c0c0c0">12</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">अब मैं किस मुँह से जाऊँ बज़्म में उसकी<br />
ये दिल दरख़ुर-ए-महफ़िल</font><font color="#c0c0c0">13</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">देखिए शाइबाए-ख़ूबिए-तक़दीर</font><font color="#c0c0c0">14</font> उसमें<br />
वो दिन गया कि रोज़े-अजल नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">इश्क़ फिरता था उस रोज़ गलियों-गलियों<br />
आज किसी में इतना भी ख़लल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">बढ़के आया तो लगा तेरा तीर इस दिल में<br />
चारासाज़ न हुआ पर जाँगुसिल</font><font color="#c0c0c0">15</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">किसपे लिखके भेजूँ मैं तुझे पयाम अपना<br />
पास औराक़े-लख़्ते-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">आस्माँ के पार जाने की तमन्ना थी उसको<br />
पर आइना-ए-बेमेहरि-ए-क़ातिल</font><font color="#c0c0c0">16</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">मेरे मुँह से न सुनो वज्हे-सुखन ईसा<br />
ख़ुद गुलों में रंगे-अदा-ए-गुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">मगर टूटा है किसी का नाज़ुक दिल मुझसे<br />
ये डर कि मैं क़ाबिले-सुम्बुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">अब कोई रहनुमा नहीं रहे-इश्क़ में<br />
तुम ख़ुश रहो तेरी राह में साइल</font><font color="#c0c0c0">17</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#999999">१. </font><font color="#000000">निष्तेज</font> २. <font color="#000000">कोशिश, द्वेष</font> ३. <font color="#000000">अनुरक्त, आसक्त</font> ४. <font color="#000000">दिल के ज़ख़्म का हाल पूछने वाला<br />
</font>५. <font color="#000000">शरीर और आकार</font> ६. <font color="#000000">निष्फल प्रयत्न</font> ७. <font color="#000000">दिल की घबराहट, सहनशक्ति</font> ८.<font color="#000000"> शामिल</font><br />
९. <font color="#000000">लज्जित</font> १०. <font color="#000000">निश्चिंत</font> ११. <font color="#000000">कठिन काम कर लेने वाला</font> १२. <font color="#000000">परिष्कृति की अभिलाषा का जादू</font><br />
१३. <font color="#000000">महफ़िल के योग्य</font> १४. <font color="#000000">सौभाग्य की झलक</font> १५. <font color="#000000">जानलेवा, दुखदायी</font><br />
१६. <font color="#000000">माशूक़ की बेरहमी का सुबूत</font> १७. <font color="#000000">उम्मीदवार, प्रश्नकर्ता</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति 'नज़र'<br />
लेखन वर्ष: २००५</p>
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