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	<title>मुहब्बत &amp;laquo; WordPress.com Tag Feed</title>
	<link>http://wordpress.com/tag/मुहब्बत/</link>
	<description>Feed of posts on WordPress.com tagged "मुहब्बत"</description>
	<pubDate>Mon, 07 Jul 2008 10:21:42 +0000</pubDate>

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<item>
<title><![CDATA[ज़िन्दगी ढूँढ़ते-ढूँढ़ते मैं तुम तक आ गया]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=954</link>
<pubDate>Mon, 31 Mar 2008 11:45:52 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=954</guid>
<description><![CDATA[ज़िन्दगी ढूँढ़ते-ढूँढ़ते मैं तुम तक आ ग]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">ज़िन्दगी ढूँढ़ते-ढूँढ़ते मैं तुम तक आ गया<br />
सरे-राह मैं अपनी मंज़िल पा गया<br />
चराग़ों का नूर हो, चश्मे-बद्दूर हो<br />
तुम्हें देखकर दिल अँधेरों से दूर आ गया</font></p>
<p><font color="#000000">ख़ुशियों के दीप जल उठे, ग़म सारे बुझ गये<br />
पतझड़ उतरा, गुल शाख़-शाख़ खिल गये<br />
इक-इक धड़कन में नाम तुम्हारा है<br />
तुम्हारी मोहब्बत का जादू मुझपे छा गया</font></p>
<p><font color="#000000">ख़ुशबू-ख़ुशबू मैंने तुमको पाया सनम<br />
मोहब्बत में तेरी ख़ुद को मिटाया सनम<br />
तेरी पहली नज़र से क़त्ल हुआ था मैं<br />
लहू के हर क़तरे में तेरा प्यार समा गया</font></p>
<p><font color="#000000">राज़ दिल के सभी आँखों से बयाँ कर दो<br />
राहे-मुहब्बत मेरी तुम आसाँ कर दो<br />
नहीं कोई अरमाँ तेरी चाहत के सिवा<br />
बस तेरा ही चेहरा दिलो-दिमाग़ पे छा गया</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[मेरी आँखों पर जो था]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=915</link>
<pubDate>Fri, 14 Mar 2008 11:29:57 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=915</guid>
<description><![CDATA[मेरी आँखों पर जो था तेरी ख़ुशबू का आँच]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">मेरी आँखों पर जो था तेरी ख़ुशबू का आँचल था<br />
वह तेरी लटों का लहराना चाँद पे उड़ता बादल था<br />
मुहब्बत के ज़हरीले तीर जो तुमने चलाये<br />
तिश्ना लबों पर प्यास का क़तरा कितना बेकल था</font></p>
<p><font color="#000000">वह गीले गुलाबी लब तेरे कितने नशीले थे<br />
तेरी नख़्वत से हाए! हुए कितने रोबीले थे<br />
देखा तो देखता ही रह गया तेरे यह आशिक़<br />
तेरा चेहरा झील में खिलता हुआ ताज़ा कँवल था</font></p>
<p><font color="#000000">मेरी आँखों पर जो था तेरी ख़ुशबू का आँचल था<br />
वह तेरी लटों का लहराना चाँद पे उड़ता बादल था</font></p>
<p><font color="#000000">जब भी निकलती हो सामने से मुस्कुराके निकलती हो<br />
क्यों न हो दर्द मीठा-मीठा बर्क़ गिराती चलती हो<br />
तुमको कोई और चाहता है मेरी चाहत हुई बेअसर<br />
मेरे दर्दो-दिल का हर टुकड़ा एक नयी ग़ज़ल था</font></p>
<p><font color="#000000">मेरी आँखों पर जो था तेरी ख़ुशबू का आँचल था<br />
वह तेरी लटों का लहराना चाँद पे उड़ता बादल था</font></p>
<p>तिश्ना= प्यासा, नख़्वत= नखरा, नाराज़गी, बर्क़= बिजली</p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘वफ़ा’<br />
लेखन वर्ष: २००२</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[ख़ामोशी ही ख़ामोशी है]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=814</link>
<pubDate>Mon, 18 Feb 2008 20:16:17 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=814</guid>
<description><![CDATA[ख़ामोशी ही ख़ामोशी है अंधेरी रातों मे]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">ख़ामोशी ही ख़ामोशी है अंधेरी रातों में<br />
चाँद भी कहीं खो गया है तारों में</font></p>
<p><font color="#000000">तन्हाई है तन-मन में,<br />
ख़ाबों का आशियाँ बनाया था हमने<br />
वह बिखरा पड़ा है यहीं-कहीं पे,<br />
फूल-पत्तों का मौसम जा चुका है<br />
पतझड़ लगा है बरसने...<br />
पीले पत्ते लगे हैं गिरने...</font></p>
<p><font color="#000000">ख़ामोशी ही ख़ामोशी है अंधेरी रातों में<br />
चाँद भी कहीं खो गया है तारों में</font></p>
<p><font color="#000000">मौसम के फूलों में जो ख़ुशबू थी<br />
वह अब नहीं है उनमें,<br />
कैसे बेरंग हुए सब यहाँ पर<br />
कोई अपना नहीं है इनमें,<br />
बादलों का मौसम आ रहा है<br />
सावन लगा है तरसने...</font></p>
<p><font color="#000000">ख़ामोशी ही ख़ामोशी है अंधेरी रातों में<br />
चाँद भी कहीं खो गया है तारों में</font></p>
<p><font color="#000000">अब कहाँ है रोशनी मैं हूँ बेख़बर,<br />
जाने कब होगा ख़त्म<br />
मंज़िलों का यह तन्हा सफ़र,<br />
जाने कब आयेगा वह मेरा हमसफ़र<br />
दिल बेख़बर, दिल बेसबर...<br />
दिल बेसबर, दिल बेख़बर...</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[जो दिल से जाता नहीं है]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=813</link>
<pubDate>Mon, 18 Feb 2008 19:42:20 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=813</guid>
<description><![CDATA[जो दिल से जाता नहीं है
तू वह गीत है
जो द]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">जो दिल से जाता नहीं है<br />
तू वह गीत है<br />
जो दिल में आकर बसा था<br />
तू वह मीत है</font></p>
<p><font color="#000000">साँसों की सरगम बस तुम ही तुम<br />
लफ़्ज़ों में जब हम बस तुम ही तुम</font></p>
<p><font color="#000000">कहना कितना मुश्किल था<br />
यह समझा न सके<br />
अपने दिल की बात हम<br />
तुम्हें बता न सके</font></p>
<p><font color="#000000">जो दिल से जाता नहीं है<br />
तू वह गीत है<br />
जो दिल में आकर बसा था<br />
तू वह मीत है</font></p>
<p><font color="#000000">प्यार क्या है सनम हमें कब पता था<br />
हमें जब तुम मिले तब पता चला था</font></p>
<p><font color="#000000">अकेले रहना मुमकिन नहीं<br />
यह कह न सके<br />
अपने दिल के जज़्बात हम<br />
तुम्हें जता न सके</font></p>
<p><font color="#000000">जो दिल से जाता नहीं है<br />
तू वह गीत है<br />
जो दिल में आकर बसा था<br />
तू वह मीत है</font></p>
<p><font color="#000000">अब तो ऐसा लगता है मुझको<br />
जैसे फूलों में ख़ुशबू नहीं है<br />
तुम जो नहीं यहाँ पर सनम<br />
जैसे यहाँ पर कुछ भी नहीं है</font></p>
<p><font color="#000000">बेचैन करती हैं यादें दिन-रात<br />
बुझती नहीं हैं साँसें<br />
हर लम्हा सोचता हूँ क्या मैं<br />
करूँ तो क्या करूँ</font></p>
<p><font color="#000000">जो दिल से जाता नहीं है<br />
तू वह गीत है<br />
जो दिल में आकर बसा था<br />
तू वह मीत है</font></p>
<p><font color="#000000">कुछ और अब बाक़ी नहीं<br />
बस मैं हूँ मेरा ख़ाब है<br />
ख़ामोश रहती हैं यह रातें<br />
बस मैं हूँ मेरा साथ है</font></p>
<p><font color="#000000">ज़िन्दगी मेरी तुम बदलकर चले गये<br />
तन्हा कर गये हमें तन्हा कर गये</font></p>
<p><font color="#000000">जो दिल से जाता नहीं है<br />
तू वह गीत है<br />
जो दिल में आकर बसा था<br />
तू वह मीत है</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[हज़ारों की भीड़ में हम अकेले ]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=812</link>
<pubDate>Mon, 18 Feb 2008 19:17:55 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=812</guid>
<description><![CDATA[हज़ारों की भीड़ में हम अकेले रह गये
जिस]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">हज़ारों की भीड़ में हम अकेले रह गये<br />
जिसके साथ की तमन्ना थी मेरे दिल को<br />
वह तो केवल अब मेरे ख़ाबों में रह गये<br />
वह तो केवल अब मेरे ख़ाबों में रह गये</font></p>
<p><font color="#000000">कि अब हम कहाँ कि अब तुम कहाँ<br />
यह दीवारें कैसी बन गयीं दोनों के दर्मियाँ<br />
तेरी इक नज़र पर यह दिल आहें भरता<br />
मगर यह टूटकर बिखरा है जाने कहाँ-कहाँ</font></p>
<p><font color="#000000">इंतिज़ार तब तक रहेगा तब तक है ज़िन्दगी<br />
उम्मीद है अंधेरों में भी मिलेगी हमें रोशनी</font></p>
<p><font color="#000000">आँखों का ग़म पलकों के किनारे टपकता है<br />
ढ़ूँढ़ता है नज़ारा जिसमें सजा हो वह समाँ<br />
राहों की मिट्टी पर क़दमों के निशाँ बाक़ी हैं<br />
उनको ही बैठकर पढ़ता हूँ सुबह-शाम यहाँ</font></p>
<p><font color="#000000">कि अब हम कहाँ कि अब तुम कहाँ<br />
यह दीवारें कैसी बन गयीं दोनों के दर्मियाँ</font></p>
<p><font color="#000000">कल और था, आज और है, बदल गया जहाँ<br />
एक बदला नहीं मैं और मेरा प्यार, हमनवाँ<br />
भूलना इतना आसाँ होता तो भूल चुके होते<br />
तेरे घर के दरवाज़े को देखना हम छोड़ देते</font></p>
<p><font color="#000000">कि अब हम कहाँ कि अब तुम कहाँ<br />
यह दीवारें कैसी बन गयीं दोनों के दर्मियाँ</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[दिल से पूछो]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=801</link>
<pubDate>Mon, 18 Feb 2008 12:12:17 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=801</guid>
<description><![CDATA[दिल से पूछो, इसकी मोहब्बत क्या है
दिल ब]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">दिल से पूछो, इसकी मोहब्बत क्या है<br />
दिल बतायेगा इसकी चाहत क्या है<br />
बस तुम हो बस तुम हो सिर्फ़ तुम हो</font></p>
<p><font color="#000000">जैसे लहरों को साहिल से प्यार हुआ<br />
जैसे अम्बर को बादल से प्यार हुआ<br />
ऐसे ही मुझको तुमसे प्यार हो गया<br />
मैं‍ दीवाना हो गया मैं दीवाना हो गया<br />
मैं तेरे प्यार में जान दीवाना हो गया</font></p>
<p><font color="#000000">दिल से पूछो, इसकी मोहब्बत क्या है<br />
दिल बतायेगा इसकी चाहत क्या है<br />
बस तुम हो बस तुम हो सिर्फ़ तुम हो</font></p>
<p><font color="#000000">मुझसे कहते रहे इस जग के लोग<br />
बचना तुम देखो न लेना यह रोग<br />
जाने कब तुम मेरे दिल में बस गयी<br />
जाने कब तुम मुझे मुहब्बत दे गयी<br />
चाहत की नदिया रुकी नहीं बह गयी</font></p>
<p><font color="#000000">दिल से पूछो, इसकी मोहब्बत क्या है<br />
दिल बतायेगा इसकी चाहत क्या है<br />
बस तुम हो बस तुम हो सिर्फ़ तुम हो</font></p>
<p><font color="#000000">अब चाहे जो हो जाये चाहे तूफ़ाँ आये<br />
मुझे तेरी मुहब्बत का इंतिज़ार रहेगा<br />
दिल तेरे लिए धड़कता है यह धड़केगा</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[मेरी राह के मुसाफ़िर]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=782</link>
<pubDate>Fri, 15 Feb 2008 12:51:12 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=782</guid>
<description><![CDATA[मेरी राह के मुसाफ़िर तू कहाँ खो गया है
ज]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">मेरी राह के मुसाफ़िर तू कहाँ खो गया है<br />
जबसे तुझे देखा दिल बेग़ाना हो गया है<br />
मेरी राह के मुसाफ़िर तू कहाँ खो गया है</font></p>
<p><font color="#000000">कब आयेगा तू इन राहों पर मुझको बता<br />
यह दीवाना दिल तेरा हुआ मुझे न सता<br />
मेरी राह के मुसाफ़िर तू कहाँ खो गया है</font></p>
<p><font color="#000000">सूनी-सूनी राहों का इन्तिज़ार बढ़ गया है<br />
आया था कोई तूफ़ाँ दिल से गुज़र गया है<br />
मेरी राह के मुसाफ़िर तू कहाँ खो गया है</font></p>
<p><font color="#000000">है नहीं कोई रास्ता पास तुझसे मिलने का<br />
है नहीं कोई सबब इस तरह छिपने का<br />
मेरी राह के मुसाफ़िर तू कहाँ खो गया है</font></p>
<p><font color="#000000">जबसे तुझे देखा दिल बेग़ाना हो गया है<br />
आया था कोई तूफ़ाँ दिल से गुज़र गया है<br />
मेरी राह के मुसाफ़िर तू कहाँ खो गया है</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[दिल की लगी दिल को दिल से लगी]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=781</link>
<pubDate>Fri, 15 Feb 2008 12:34:00 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=781</guid>
<description><![CDATA[दिल की लगी दिल को दिल से लगी
जब लगी यह आ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">दिल की लगी दिल को दिल से लगी<br />
जब लगी यह आग फिर न बुझी<br />
यह दिल की लगी है दिल से लगी है<br />
जब यह लगी है फिर कहाँ बुझी है</font></p>
<p><font color="#000000">उठता है तूफ़ाँ दिल में बनते हैं निशाँ<br />
फैला हर दिशा यह यहाँ से वहाँ<br />
बसा है दो दिलों में ख़ुशबू की तरह<br />
नाम मुहब्बत है ख़ुदा की तरह<br />
पतझड़ जाता है और सावन आता है<br />
जब दिल में कोई उन्स जगाता है</font></p>
<p><font color="#000000">दिल की लगी दिल को दिल से लगी<br />
जब लगी यह आग फिर न बुझी<br />
यह दिल की लगी है दिल से लगी है<br />
जब यह लगी है फिर कहाँ बुझी है</font></p>
<p><font color="#000000">चेहरे पर नज़रें रुकीं फिर पलकें झुकीं<br />
होंठों पर नाम है आँखें सपने बुनती हैं<br />
अफ़साने बनते हैं पन्ने भी खुलते हैं<br />
मिटता है सब-कुछ ज़माने से सुनते हैं<br />
कोहरे-से बिछते हैं दो दिल मिटते हैं<br />
मोहब्बत के निशाँ बनते न मिटते हैं</font></p>
<p><font color="#000000">दिल की लगी दिल को दिल से लगी<br />
जब लगी यह आग फिर न बुझी<br />
यह दिल की लगी है दिल से लगी है<br />
जब यह लगी है फिर कहाँ बुझी है</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[तुम हो मेरी चंद्रकला]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=767</link>
<pubDate>Wed, 13 Feb 2008 17:41:50 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=767</guid>
<description><![CDATA[अम्बर में जब चाँद खिला
उस पल से चला जान]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">अम्बर में जब चाँद खिला<br />
उस पल से चला जानाँ<br />
एक नया सिलसिला<br />
मुहब्बत भरी वादियों में<br />
इक नया गुल खिला<br />
तुम एक नया सिलसिला</font></p>
<p><font color="#000000">तुम जान मेरी अजंता<br />
जिस पर यह दिल मचला<br />
वह तुम हो मेरी चंद्रकला<br />
फ़िज़ाओं में जादू घुला<br />
जब तुमको देखा ऐसा लगा<br />
मेरा जीवन जैसे शिला</font></p>
<p><font color="#000000">अम्बर में जब चाँद खिला<br />
उस पल से चला जानाँ<br />
एक नया सिलसिला<br />
तुम मेरा माहताब<br />
तुम पानी में जलता चराग़<br />
तुम एक नया सिलसिला</font></p>
<p><font color="#000000">तेरी शमा से रोशन हुआ<br />
पहले था यह दिया बुझा-बुझा<br />
तेरी हर अदा, तू इक नशा<br />
तुमसा हसीन पहले न मिला<br />
मेरे ख़ुदा से मुझको<br />
कभी रहा नहीं कोई गिला</font></p>
<p><font color="#000000">अम्बर में जब चाँद खिला<br />
उस पल से चला जानाँ<br />
एक नया सिलसिला<br />
उसकी रहमत है जो<br />
उसने बनायी ऐसी कला<br />
तुम एक नया सिलसिला</font></p>
<p><font color="#000000">तुम हो मेरी चंद्रकला,<br />
तुम जान मेरी अजंता<br />
तुम एक नया सिलसिला</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[दिल से दिल मिले दिल से दिल ]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=725</link>
<pubDate>Fri, 08 Feb 2008 15:09:19 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=725</guid>
<description><![CDATA[दिल से दिल मिले दिल से दिल
ख़ाबों के गु]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">दिल से दिल मिले दिल से दिल<br />
ख़ाबों के गुल खिले ख़ाबों के गुल</font></p>
<p><font color="#000000">क़दमों के नीचे से सरकी ज़मीं<br />
मुहब्बत की ज़मीं पर रखे क़दम<br />
बढ़ते रहेंगे आग के तूफ़ाँ में भी<br />
जब तक है अपने जिस्मों में दम</font></p>
<p><font color="#000000">खोती हैं निगाहें ख़ाबों की बाँहों में<br />
धड़कता है दिल तेरी यादों में<br />
दिल में नग़मों की बरातें आयी हैं<br />
साथ मुहब्बत का तूफ़ाँ लायी हैं</font></p>
<p><font color="#000000">दिल से दिल मिले दिल से दिल<br />
ख़ाबों के गुल खिले ख़ाबों के गुल</font></p>
<p><font color="#000000">हम ख़ाहिश में तपते हैं जलते हैं<br />
कहीं दो जिस्मो-जाँ मिलते हैं<br />
दिलों की दूरी मिटती है बनती है<br />
तेरी यादों की गहराई सिमटती है</font></p>
<p><font color="#000000">दिल से दिल मिले दिल से दिल<br />
ख़ाबों के गुल खिले ख़ाबों के गुल</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[यह कारवाँ किस जगह आ रुका है]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=708</link>
<pubDate>Tue, 05 Feb 2008 21:28:51 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=708</guid>
<description><![CDATA[यह कारवाँ किस जगह आ रुका है
ज़िन्दगी को ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">यह कारवाँ किस जगह आ रुका है<br />
ज़िन्दगी को हासिल नहीं मिल रहा है<br />
हमने अब तक ऐसी मुहब्बत की है<br />
शायद जिसमें शामिल नहीं दिल रहा है</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २०००-२००१</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[ग़म देना उनकी फ़ितरत]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=704</link>
<pubDate>Tue, 05 Feb 2008 19:28:26 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=704</guid>
<description><![CDATA[ग़म देना उनकी फ़ितरत में शामिल होगा
मेरी]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">ग़म देना उनकी फ़ितरत में शामिल होगा<br />
मेरी फ़ितरत तो मुहब्बत देने की रही है</font></p>
<p><font color="#000000">दूर रहना उनकी आदत में शामिल होगा<br />
मेरी आदत तो ख़ुशबू लुटाने की रही है</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २०००-२००१</p>
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<title><![CDATA[मैं मंज़िल से दूर सही]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=703</link>
<pubDate>Tue, 05 Feb 2008 19:10:15 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
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<description><![CDATA[मैं मंज़िल से दूर सही
ख़ाबों का एक घरौं]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">मैं मंज़िल से दूर सही<br />
ख़ाबों का एक घरौंदा रखता हूँ<br />
बेवजह ही सही लेकिन<br />
किसी से मुहब्बत करता हूँ</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २०००-२००१</p>
]]></content:encoded>
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<title><![CDATA[मेरी मुहब्बत तो झूठी नहीं]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=702</link>
<pubDate>Tue, 05 Feb 2008 04:58:51 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
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<description><![CDATA[मेरी मुहब्बत तो झूठी नहीं
अगर मैं झूठा]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">मेरी मुहब्बत तो झूठी नहीं<br />
अगर मैं झूठा हूँ<br />
तुम जो गये हो यहाँ से<br />
पल-पल मैं टूटा हूँ<br />
किसी का एतबार नहीं करता<br />
किसी को देखकर नहीं मरता<br />
एक फ़ितरत-सी बन गयी है<br />
हर पल तुम्हें याद करने की<br />
तुम्हें भूलने की कोशिश में<br />
हर पल तुम्हें क़रीब रखता हूँ</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २०००-२००१</p>
]]></content:encoded>
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<title><![CDATA[किसी आस्माँ के परे तो]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=690</link>
<pubDate>Mon, 04 Feb 2008 19:39:26 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=690</guid>
<description><![CDATA[किसी आस्माँ के परे तो
तेरी मुहब्बत का ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">किसी आस्माँ के परे तो<br />
तेरी मुहब्बत का हासिल मिलेगा<br />
कितनी तन्हाइयाँ तय करें<br />
कब हमें इनका हासिल मिलेगा</font></p>
<p><font color="#000000">तुम मीलों दूर हो सकती हो<br />
तुम किसी और को चाह सकती हो<br />
मेरा क्या, मैं तुमको चाहूँगा<br />
तेरी उम्मीद में जानम मर जाऊँगा</font></p>
<p><font color="#000000">चाँद ने परदा किया<br />
जब-जब तेरा हुस्न सामने आया<br />
उफ़ वह बे-तस्कीनियाँ<br />
कि चाँद तुझसे हुस्न माँगने आया</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००२</p>
]]></content:encoded>
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