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	<title>मेरा-गीत &amp;laquo; WordPress.com Tag Feed</title>
	<link>http://wordpress.com/tag/मेरा-गीत/</link>
	<description>Feed of posts on WordPress.com tagged "मेरा-गीत"</description>
	<pubDate>Fri, 18 Jul 2008 21:27:31 +0000</pubDate>

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<item>
<title><![CDATA[अजब-सी टीस लगी है]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=1028</link>
<pubDate>Thu, 17 Jul 2008 19:36:09 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=1028</guid>
<description><![CDATA[अजब-सी टीस लगी है
दस दूनी बीस लगी है,
आँ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">अजब-सी टीस लगी है<br />
दस दूनी बीस लगी है,<br />
आँखों में आँच भरी है<br />
उन्नीस की बीस लगी है</span></p>
<p><span style="color:#000000;">दिल में दर्द उगते हैं<br />
साँसें ठण्डी-ठण्डी हैं,<br />
मेरा हर ख़ाब टूटा है<br />
ख़ाहिश भीख लगी है</span></p>
<p><span style="color:#000000;">डालों से फूल गिर गये<br />
ख़ुशबू के मौसम गये,<br />
आइनों ने धोखा दिया<br />
ज़िन्दा तस्वीर लगी है</span></p>
<p><span style="color:#000000;">रोशनी का दरिया बहे<br />
मुझे कोई अपना कहे,<br />
वह ख़लिश बुझाये तो<br />
ज़िंदगी मरीज़ लगी है</span></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[ख़ुशबू बिछायी है राहों में]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=1020</link>
<pubDate>Wed, 16 Jul 2008 08:55:35 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=1020</guid>
<description><![CDATA[ख़ुशबू बिछायी है राहों में
तुम चले आओ, ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">ख़ुशबू बिछायी है राहों में<br />
तुम चले आओ, तुम चले आओ<br />
दिल बेक़रार है बहुत<br />
तुम चले आओ, तुम चले आओ</span></p>
<p><span style="color:#000000;">मौसम बड़ा गुलाबी है<br />
गुलाबी गुल हैं शाख़ों पर<br />
अब और न तरसाओ</span></p>
<p><span style="color:#000000;">ख़ुशबू बिछायी है राहों में<br />
तुम चले आओ...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">दिल धड़क रहा है<br />
धड़क रही है नब्ज़-नब्ज़<br />
धड़कनें और न बढ़ाओ</span></p>
<p><span style="color:#000000;">ख़ुशबू बिछायी है राहों में<br />
तुम चले आओ...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">बरखा बहार आयी है<br />
बरस रही है धरा पर<br />
अब और न तड़पाओ</span></p>
<p><span style="color:#000000;">ख़ुशबू बिछायी है राहों में<br />
तुम चले आओ...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">आँचल उड़ाकर अपना<br />
चेहरा दिखा दो<br />
न चुराओ नज़र, न चुराओ</span></p>
<p><span style="color:#000000;">ख़ुशबू बिछायी है राहों में<br />
तुम चले आओ...<br />
दिल बेक़रार है बहुत<br />
तुम चले आओ...</span></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[भीगी चाँदनी रातों में]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=1016</link>
<pubDate>Sat, 12 Jul 2008 13:50:28 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=1016</guid>
<description><![CDATA[भीगी चाँदनी रातों में
दिल से तेरी बातो]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">भीगी चाँदनी रातों में<br />
दिल से तेरी बातों में<br />
ऐसा लग रहा है<br />
तू मेरी बन गयी है<br />
मैं तेरा बन गया हूँ</span></p>
<p><span style="color:#000000;">ख़ाब बुनती हैं आँखें<br />
फूलों से लदी हैं शाख़ें<br />
ऐसा लग रहा है<br />
तू ख़ुशबू बन गयी है<br />
मैं गुल बन गया हूँ</span></p>
<p><span style="color:#000000;">हल्की-हल्की आँच है<br />
मेरी नब्ज़ में काँच है<br />
ऐसा लग रहा है<br />
तू लहू बन गयी है<br />
मैं जिस्म बन गया हूँ</span></p>
<p><span style="color:#000000;">तारे, चिंगारियाँ हैं<br />
चाँदनी, उजली बर्फ़ है<br />
ऐसा लग रहा है<br />
तू लौ बन गयी है<br />
मैं दीप बन गया हूँ</span></p>
<p><span style="color:#000000;">लफ़्ज़ मीठे-मीठे हैं<br />
ग़म फीके-फीके हैं<br />
ऐसा लग रहा है<br />
तू मिसरी बन गयी है<br />
मैं ज़बाँ बन गया हूँ</span></p>
<p><span style="color:#000000;">दिल ग़मख़्वार है<br />
मौसम ख़ुशगँवार है<br />
ऐसा लग रहा है<br />
तू दिल बन गयी है<br />
मैं जाँ बन गया हूँ</span></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[तुमको मैंने दिल दिया है]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=1015</link>
<pubDate>Wed, 09 Jul 2008 19:12:52 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=1015</guid>
<description><![CDATA[तुमको मैंने दिल दिया है
यह जाँ भी दे दे]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">तुमको मैंने दिल दिया है<br />
यह जाँ भी दे दें... कह दो...<br />
अरमानों के फूल खिले हैं<br />
तुम पे बरसा दें... कह दो...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">तुमको अजनबी रास्तों में<br />
अपना हमसफ़र बना लें<br />
मेरा जीना मरना तुमसे<br />
ख़ुद को मिटा दें... कह दो...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">चेहरे पर हया रहने दो<br />
चाँद पे बादल उड़ने दो<br />
बेचैन धड़कनें रवाँ-रवाँ<br />
यह शाम बुझा दें... कह दो...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">लोगों के कहने पर मत जा<br />
मुझको और ना तड़पा<br />
यह प्यार ख़त्म न होगा<br />
ख़ुद को भुला दें... कह दो...</span></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[वक़्त का पहना उतार आये]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=1005</link>
<pubDate>Wed, 02 Jul 2008 08:16:04 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=1005</guid>
<description><![CDATA[वक़्त का पहना उतार आये
कुछ लम्हे मरके ग]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">वक़्त का पहना उतार आये<br />
कुछ लम्हे मरके गुज़ार आये</span></p>
<p><span style="color:#000000;">ख़ाबों में सही अपना तो माना<br />
दिल को मेरे अपना तो जाना</span></p>
<p><span style="color:#000000;">खट्टे-मीठे रिश्ते चख लिये हैं<br />
कुछ सच्चे पलकों पे रख लिये हैं</span></p>
<p><span style="color:#000000;">ख़ाहिशों का बवण्डर है दिल<br />
दिल को उसके दर पे छोड़ आये</span></p>
<p><span style="color:#000000;">तेरी रज़ा क्या मेरी रज़ा क्या<br />
वफ़ाई-बेवफ़ाई की वजह क्या</span></p>
<p><span style="color:#000000;">दस्तूर-ए-इश्क़ से रिश्ते हुए हैं<br />
दिलों में रहकर फ़रिश्ते हुए हैं</span></p>
<p><span style="color:#000000;">ख़ला-ख़ला सजायी एक महफ़िल<br />
महफ़िलों से उठके चले आये</span></p>
<p><span style="color:#000000;">वक़्त का पहना उतार आये<br />
कुछ लम्हे मरके गुज़ार आये</span></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४ </p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[मैं क्यों आज तक उसकी ख़ाहिश करता हूँ]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=1004</link>
<pubDate>Fri, 27 Jun 2008 08:14:00 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=1004</guid>
<description><![CDATA[मैं क्यों आज तक उसकी ख़ाहिश करता हूँ
ज]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">मैं क्यों आज तक उसकी ख़ाहिश करता हूँ<br />
जो मुझको भीड़ में अकेला छोड़कर गया है<br />
सुबह आज भी उसको आइनों में जोड़ता हूँ<br />
जो मेरे दिल को खिलौने-सा तोड़कर गया है...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">बे-तस्कीनियाँ उजले चेहरों से बढ़ती हैं<br />
हर पल मुझको अक्स की तरह पढ़ती हैं<br />
अंधेरी रात है मैं छत पर तन्हा बैठा हूँ<br />
एक-एक पल दोपहर-सा गुज़र रहा है...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">कोई उठाये मुझको या फिर बैठा रहने दे<br />
ख़ाबों के जंगल जलाये ना, धुँआ उड़ाये ना<br />
ख़ाहिशों का अम्बार है, दिल ज़ार-ज़ार है<br />
आँखों की नदिया सुखाये ना, चाँद जलाये ना</span></p>
<p><span style="color:#000000;">अजीब धुनकी में है दिल और कुछ नहीं है<br />
दर्द का ग़ुबार है दिल और कुछ नहीं है<br />
मुस्कुराहट जब खिली गुलाबी लबों पर<br />
एक हसीन ख़ाब सारी रात जागता रहा है...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">एक नयी परवाज़ दिखायी दी है आसमाँ में<br />
कुछ नये अन्दाज़ भी हैं उसकी ज़बाँ में<br />
बाँट नहीं सकता किसी से लम्हों के टुकड़े<br />
ख़ुदाया मेरा कोई नहीं इतने बड़े जहाँ में</span></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४ </p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[मुझे इक जुनूँ है तेरी मोहब्बत का]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=1002</link>
<pubDate>Wed, 25 Jun 2008 14:20:54 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=1002</guid>
<description><![CDATA[मुझको इक जुनूँ है तेरी मोहब्बत का
कि ड]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">मुझको इक जुनूँ है तेरी मोहब्बत का<br />
कि डर नहीं मुझे किसी की नफ़रत का</span></p>
<p><span style="color:#000000;">दिल में दर्द की आग है, चिंगारी है<br />
तेरी ही बे-इन्तिहाँ चाहत है ख़ुमारी है</span></p>
<p><span style="color:#000000;">तुझे देखता रहूँ मैं तुझे ही चाहता रहूँ<br />
कि इन्तिज़ार है मुझे तेरी सोहबत का</span></p>
<p><span style="color:#000000;">मुझे बाँहों का आशियाँ दे आवारा हूँ<br />
बे-दर्द तू कभी आवाज़ दे तुम्हारा हूँ</span></p>
<p><span style="color:#000000;">बता कैसे जियूँ इस सूरज की तरह<br />
मुझे चाँद बना ले अपनी जन्नत का</span></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४ </p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[मेरी रूह को तख़लीक़ करके]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=1001</link>
<pubDate>Sat, 21 Jun 2008 17:24:32 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=1001</guid>
<description><![CDATA[मेरी रूह को तख़लीक़ करके
किस राह में खो ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">मेरी रूह को तख़लीक़ करके<br />
किस राह में खो गये हो तुम<br />
लफ़्ज़ मेरे अजनबी लगते हैं<br />
जाने किसके हो गये हो तुम </span></p>
<p><span style="color:#000000;">दिन की धूप की पीली चादर<br />
जला करती है सारा-सारा दिन<br />
रात की राख अंगारों के साथ<br />
सुलगा करती है तुम्हारे बिन</span></p>
<p><span style="color:#000000;">उलझे-उलझे ख़्याल आते हैं<br />
उलझे हुए ख़्वाब में डूबा हूँ<br />
ग़म पी रहा है घूट-घूट मुझे<br />
जीते-जी इस क़दर टूटा हूँ</span></p>
<p><span style="color:#000000;">मेरी रूह को तख़लीक़ करके<br />
किस राह में खो गये हो तुम<br />
लफ़्ज़ मेरे अजनबी लगते हैं<br />
जाने किसके हो गये हो तुम</span></p>
<p><span style="color:#000000;">जब भी रात में शग़ाफ़ आता है<br />
खिलती सहर के उफ़क़ दिखते हैं<br />
कितने ही ख़ूबसूरत क्यों न हो<br />
तेरे लबों से कम सुर्ख़ दिखते हैं</span></p>
<p><span style="color:#000000;">ज़हन की गलियों में ही खोया हूँ<br />
तेरे लिए भटकता हूँ दर-ब-दर<br />
तक़दीर के बे-रब्त टुकड़े हैं कुछ<br />
जिनको समेटता हूँ आठों पहर</span></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४ </p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[हमने तुमको तुमसे चुराया]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=999</link>
<pubDate>Thu, 19 Jun 2008 19:55:44 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=999</guid>
<description><![CDATA[हमने तुमको तुमसे चुराया
दिल में अपने त]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">हमने तुमको तुमसे चुराया<br />
दिल में अपने तुमको बसाया<br />
तुम भी दीवाने हो गये हो<br />
दूर जो ख़ुद से हो गये हो<br />
आओ अपनी बाँहों में तुमको छुपा लें सनम<br />
आओ अपनी बाँहों में तुमको छुपा लें सनम</span></p>
<p><span style="color:#000000;">क़रीब आ तेरा दिल धड़का दें<br />
दिल में कोई शोला भड़का दें<br />
तुमको दोनों बाँहों में भरकर<br />
सनम प्यार करना सिखा दें</span></p>
<p><span style="color:#000000;">तुम यह दिल तो धड़का दो<br />
हमको प्यार तो सिखा दो<br />
पर वादा करके ओ जानम<br />
हमको छोड़ न जाना तुम...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">ज़रा करके तो देखो हमपे भरोसा<br />
मैं नहीं कर सकता तुमसे धोखा<br />
आओ अपनी बाँहों में तुमको छुपा लें सनम<br />
आओ अपनी बाँहों में तुमको छुपा लें सनम</span></p>
<p><span style="color:#000000;">दिल की ख़ाहिश तेरी ज़ुल्फ़ों में<br />
आज हम ख़ुद को उलझा दें<br />
तेरे गले लगके मेरे सनम<br />
आज तुमको अपना बना लें</span></p>
<p><span style="color:#000000;">ज़ुल्फ़ों में उलझ तो जाओगे<br />
मुझको अपना तो बनाओगे<br />
पर क्या हम मिल पायेंगे<br />
प्यार को सच कर पायेंगे...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">दिल से दिल जब मिल जाये<br />
यह प्यार भी सच हो जाये<br />
आओ अपनी बाँहों में तुमको छुपा लें सनम<br />
आओ अपनी बाँहों में तुमको छुपा लें सनम</span></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४ </p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[आइने-आइने ख़ुद को ढूँढ़ा]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=998</link>
<pubDate>Thu, 19 Jun 2008 09:29:56 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=998</guid>
<description><![CDATA[आइने-आइने ख़ुद को ढूँढ़ा
उनमें उतर के ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">आइने-आइने ख़ुद को ढूँढ़ा<br />
उनमें उतर के ख़ुद को ढूँढ़ा</span></p>
<p><span style="color:#000000;">कहीं भी पूरा नहीं था,<br />
मेरे जिस्म पे इश्क़ का चीरा नहीं था<br />
ख़ाली-ख़ाली था सूना-सूना था<br />
दिल मेरा, यह दिल मेरा...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">आइने-आइने ख़ुद को ढूँढ़ा<br />
उनमें उतर के ख़ुद को ढूँढ़ा</span></p>
<p><span style="color:#000000;">क़तरा-क़तरा हर एक क़तरा<br />
ज़हन से कोई न उतरा,<br />
मीठे-मीठे ज़हर के प्याले<br />
मैं भी एक उम्र से गुज़रा...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">आइने-आइने ख़ुद को ढूँढ़ा<br />
उनमें उतर के ख़ुद को ढूँढ़ा</span></p>
<p><span style="color:#000000;">मैंने पहल नहीं की थी<br />
मैं इस सब से परहेज़ रखता हूँ<br />
कितने मीठे होते हैं अय्यार<br />
मैं यह कब चखता हूँ...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">आइने-आइने ख़ुद को ढूँढ़ा<br />
उनमें उतर के ख़ुद को ढूँढ़ा</span></p>
<p><span style="color:#000000;">ऐसे अर्श पे कब था डेरा<br />
उगता है जहाँ, चटखा सवेरा<br />
तकलीफ़ तख़लीक़ होती रही<br />
दिल में नहीं होता बसेरा...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">आइने-आइने ख़ुद को ढूँढ़ा<br />
उनमें उतर के ख़ुद को ढूँढ़ा</span></p>
<p>अय्यार= चालाक, clever; अर्श= आसमाँ, sky; तख़लीक़= उद्भव, creation</p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४ </p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[तुमने हमसे हमको चुराया]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=989</link>
<pubDate>Sun, 15 Jun 2008 19:13:05 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=989</guid>
<description><![CDATA[तुमने हमसे हमको चुराया
दिल में अपने हम]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">तुमने हमसे हमको चुराया<br />
दिल में अपने हमको बसाया<br />
हम कुछ दीवाने हो गये हैं<br />
हाँ, दूर ख़ुद से हो गये हैं<br />
अपनी बाँहों में हमको छुपा लो सनम<br />
अपनी बाँहों में हमको छुपा लो सनम</span></p>
<p><span style="color:#000000;">यह उड़ते बादल घिर जायें<br />
बिजली ज़रा कड़क जाये<br />
तू मेरी बाँहों में आकर के<br />
मेरे सीने से सिमट जाये</span></p>
<p><span style="color:#000000;">यह बादल क्यूँ घिर आयें<br />
और बिजली क्यूँ गिर जाये<br />
हम तेरे ही तो हैं आख़िर<br />
आके ख़ुद ही लिपट जायें</span></p>
<p><span style="color:#000000;">यह सच भी सच कर दो<br />
दिल में है जो कुछ कर दो<br />
अपनी बाँहों में हमको छुपा लो सनम<br />
अपनी बाँहों में हमको छुपा लो सनम</span></p>
<p><span style="color:#000000;">क्यूँ इस तरह मुस्कुराती हो<br />
क्यूँ तुम मुझसे शरमाती हो<br />
क्यूँ एक झलक देकर कहीं<br />
आँखों से ओझल हो जाती हो</span></p>
<p><span style="color:#000000;">हम सामने जो आ जायें<br />
दिल बेक़ाबू न हो जाये<br />
इश्क़ में यह डर है हमको<br />
हमसे भूल न हो जाये...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">दिल को बेक़ाबू हो जाने दो<br />
यह भूल भी हो जाने दो<br />
अपनी बाँहों में हमको छुपा लो सनम<br />
अपनी बाँहों में हमको छुपा लो सनम</span></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४ </p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[एक दोस्त मेरा भी हो]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=985</link>
<pubDate>Sat, 14 Jun 2008 13:13:53 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=985</guid>
<description><![CDATA[एक दोस्त मेरा भी हो
एक यार मेरा भी हो
जि]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">एक दोस्त मेरा भी हो<br />
एक यार मेरा भी हो<br />
जिसकी बाँहों में मुझे<br />
मिल जाये ज़िन्दगी<br />
जो झूठ-मूठ रूठ के<br />
सताये, करे दिल्लगी</span></p>
<p><span style="color:#000000;">देखे हमने कई हसीं<br />
लेकिन वह मिला नहीं<br />
जो पहली नज़र में<br />
दिल में उतर जाये<br />
जो गहने उतारे गर<br />
तो और सँवर जाये</span></p>
<p><span style="color:#000000;">दिल की दोस्ती के लिए<br />
एक दोस्त मेरा भी हो<br />
एक यार मेरा भी हो</span></p>
<p><span style="color:#000000;">ख़ुशबू हसीनों की मुझे<br />
हमेशा बुलाती रही है<br />
जो अभी देखी नहीं वह<br />
शमअ, जलाती रही है<br />
उसकी सादगी, नयी<br />
सुबह दिखाती रही है</span></p>
<p><span style="color:#000000;">सदा मुस्कुराने के लिए<br />
एक दोस्त मेरा भी हो<br />
एक यार मेरा भी हो</span></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४ </p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[सुनो! एक शिकायत है तुमसे]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=982</link>
<pubDate>Wed, 11 Jun 2008 19:14:59 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=982</guid>
<description><![CDATA[सुनो! एक शिकायत है तुमसे
तुम क्यों आती ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">सुनो! एक शिकायत है तुमसे<br />
तुम क्यों आती नहीं ख़ाबों में<br />
ख़ुशबू छूता हूँ जब साँसों में<br />
दिखती हो तुम बंद आँखों में</span></p>
<p><span style="color:#000000;">सुनो! एक शिकायत है तुमसे<br />
तुम क्यों आती नहीं ख़ाबों में</span></p>
<p><span style="color:#000000;">यह दुनिया जन्नत हो जाये<br />
जो मिला करो तुम ख़ाबों में<br />
मखमली लब जब हिलते हैं<br />
खिलता है बसंत शाख़ों में</span></p>
<p><span style="color:#000000;">सुनो! एक शिकायत है तुमसे<br />
तुम क्यों आती नहीं ख़ाबों में </span></p>
<p><span style="color:#000000;">तेरे जिस्म की महक जुदा है<br />
चाहे तुम चाँद बनो बादलों में<br />
रंग तेरे मेरी आँखों की चमक<br />
तुम तितली दिल के बाग़ों में</span></p>
<p><span style="color:#000000;">सुनो! एक शिकायत है तुमसे<br />
तुम क्यों आती नहीं ख़ाबों में</span></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४ </p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[छताँ लगा जाके मैं रोज़ चाँद तकियाँ]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=981</link>
<pubDate>Wed, 11 Jun 2008 18:00:12 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=981</guid>
<description><![CDATA[छताँ लगा जाके मैं रोज़ चाँद तकियाँ यार ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">छताँ लगा जाके मैं रोज़ चाँद तकियाँ यार वास्ते<br />
कि मेरा भी होवे यार चाँद जैसा दीदार वास्ते<br />
कहाँ मिलेगा वह कब मिलेगा मुझको यार मेरा<br />
हर गली घूमाँ हर सड़क फिरा दिलदार वास्ते</span></p>
<p><span style="color:#000000;">रब्बा मेरे, मुझसे मेरा यार मिला दे, मिला दे<br />
सोणे यार दी मेरे तन्हा दिल से तड़प घटा दे<br />
यार मिला दे, रब्बा मुझसे मेरा यार मिला दे</span></p>
<p><span style="color:#000000;">दोस्ताँ से मैं इश्क़ की रोज़-रोज़ बाताँ सुनियाँ<br />
रब्बा मेरे, मैं भी चाहाँ इश्क़ में डूबाँ-उबरियाँ<br />
कहाँ मिलेगा वह कब मिलेगा मुझको यार मेरा<br />
हर गली घूमाँ हर सड़क फिरा दिलदार वास्ते</span></p>
<p><span style="color:#000000;">रब्बा मेरे, मुझसे मेरा यार मिला दे, मिला दे<br />
सोणे यार दी मेरे तन्हा दिल से तड़प घटा दे<br />
यार मिला दे, रब्बा मुझसे मेरा यार मिला दे</span></p>
<p><span style="color:#000000;">सौंधी-सौंधी रोज़ चाँद संग यह काली राताँ चुभियाँ<br />
निम्मी-निम्मी तन में अनजानी आगाँ जलियाँ<br />
दिल को मेरे किसी घड़ी किसी पल चैन न आवे<br />
रब्बा मेरे, यार मेरा अब मुझको दरस दिखावे</span></p>
<p><span style="color:#000000;">जाने कौन राताँ विच मेरा वह सोणा चाँद खिलियाँ<br />
ख़ुमारियाँ चढ़ियाँ, आँखाँ उससे किस राह मिलियाँ<br />
कहाँ मिलेगा वह कब मिलेगा मुझको यार मेरा<br />
हर गली घूमाँ हर सड़क फिरा दिलदार वास्ते</span></p>
<p><span style="color:#000000;">रब्बा मेरे, मुझसे मेरा यार मिला दे, मिला दे<br />
सोणे यार दी मेरे तन्हा दिल से तड़प घटा दे<br />
यार मिला दे, रब्बा मुझसे मेरा यार मिला दे</span></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[यादों की मद्धम आँच में]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=979</link>
<pubDate>Sat, 07 Jun 2008 09:43:05 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=979</guid>
<description><![CDATA[यादों की मद्धम आँच में
ज़हनी जज़्बात पिघ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">यादों की मद्धम आँच में<br />
ज़हनी जज़्बात पिघलते जा रहे हैं<br />
मेरे दिल में आ रहे हैं<br />
ख़ुद काग़ज़ पर उतरते जा रहे हैं</span></p>
<p><span style="color:#000000;">अकेला मैं चीज़ क्या हूँ? कुछ नहीं!<br />
तेरा साथ पाकर पूरा हो जाता हूँ<br />
इस ज़िन्दगी को समझने लगता हूँ<br />
तेरे एतबार से नया हासिल पाता हूँ</span></p>
<p><span style="color:#000000;">तेरे साथ बीते हर सुबह हर शाम<br />
मैं तेरे क़रीब आ रहा हूँ<br />
नग़मए-नाम तेरा गुनगुना रहा हूँ<br />
दर्मियाँ फ़ासले मिटा रहा हूँ</span></p>
<p><span style="color:#000000;">इरादा कर लो मेरे साथ तुम रहोगे<br />
हर ख़ाब पूरा करूँगा जो देखोगे<br />
सुनो धड़कन, इस दिल की सदा तुम<br />
क्यों यक़ीं है मुझे अपना कहोगे</span></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[वह इक पल संजो लिया है]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=977</link>
<pubDate>Sun, 01 Jun 2008 17:40:32 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=977</guid>
<description><![CDATA[वह इक पल संजो लिया है
आँख में रखके भिगो ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">वह इक पल संजो लिया है<br />
आँख में रखके भिगो दिया है<br />
महक रहे हैं वह सारे लम्हे<br />
ख़ुद को उनमें डबो दिया है</span></p>
<p><span style="color:#000000;">ख़ुश-रू तेरी मीठी-मीठी बातें<br />
उफ़ तौबा यह हिज्र की रातें<br />
धुँधले-धुँधले चाँद के चेहरे<br />
गुज़र रही हैं मिसरी जैसी रातें</span></p>
<p><span style="color:#000000;">सोया जाऊँ यह रात तो गुज़रे<br />
सुबह आयें तेरे ख़ाब सुनहरे<br />
मुझको जगा दे उससे मिला दे<br />
यार से मिलके यह ख़िज़ाँ उतरे</span></p>
<p><span style="color:#000000;">महक रहे हैं जो फूल गुलाबी<br />
मद्धम धूप इनपे बिछा दी<br />
अपने दिन यूँ ही गुज़रते हैं<br />
किसकी आँखों ने शाम दिखा दी</span></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[मस्तियाँ ही मस्तियाँ हैं]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=975</link>
<pubDate>Sun, 01 Jun 2008 13:55:32 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=975</guid>
<description><![CDATA[मस्तियाँ ही मस्तियाँ हैं
जब से मौसमे-ख]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">मस्तियाँ ही मस्तियाँ हैं<br />
जब से मौसमे-ख़िज़ाँ उतरा है<br />
शाख़ों पर हैं नयी कोंपलें<br />
जब से मौसमे-फ़ुर्क़त गुज़रा है</span></p>
<p><span style="color:#000000;">पुरवाइयाँ तन-बदन पे आग लगती हैं<br />
तन्हाइयाँ मेरे ज़हन से ख़ौफ़ रखती हैं<br />
निगाह में तस्वीरे-यार सजा ली जब से<br />
रंगीनियाँ दिल को ख़ुशगँवार लगती हैं...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">मस्तियाँ ही मस्तियाँ हैं<br />
जब से मौसमे-ख़िज़ाँ उतरा है<br />
बेलों पर महके गुच्छे<br />
जब से हुआ यह मौसम हरा है</span></p>
<p><span style="color:#000000;">मेरी बेक़रारियाँ आज क़रार पाने लगी हैं<br />
यह धड़कनें तेरा नाम गुनगुनाने लगी हैं<br />
इक अजब भँवर-सा उमड़ा है ख़्यालों का<br />
ख़ाबों ख़्यालों की भीड़ राह पाने लगी है...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">मस्तियाँ ही मस्तियाँ हैं<br />
जब से मौसमे-ख़िज़ाँ उतरा है<br />
पैमाने सारे भर गये हैं<br />
बादाख़ार हुआ यह दिल ज़रा है</span></p>
<p><span style="color:#000000;">सूरज है हुस्न उसका, जलाता है मुझको<br />
बदन रेशमी चाँद जैसा, लुभाता है मुझको<br />
तक़दीर जो उसने ' जोड़ ली है मुझसे<br />
आज मौसम बहार का, बुलाता है मुझको...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">मस्तियाँ ही मस्तियाँ हैं<br />
जब से मौसमे-ख़िज़ाँ उतरा है<br />
मेरे लिए उसकी चाहत<br />
आज तो उसका दिल भी ख़रा है</span></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[मुझसे कोई प्यार कर ले]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=974</link>
<pubDate>Fri, 30 May 2008 07:51:24 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=974</guid>
<description><![CDATA[मुझसे कोई प्यार कर ले
दिल अपना देकर, दि]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">मुझसे कोई प्यार कर ले<br />
दिल अपना देकर, दिल मेरा ले ले<br />
मुझसे कोई प्यार कर ले...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">तन्हाइयों का दर्द छुपा रखा है<br />
इसे कोई कभी दो आँखों से चुरा ले<br />
मुझसे कोई प्यार कर ले...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">यह हसीं जज़्बात टिके हुए हैं लबों पे<br />
इन्हें कोई अपने लबों से चख ले<br />
दिल अपना देकर, दिल मेरा ले ले<br />
मुझसे कोई प्यार कर ले...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">दु:ख यह मेरा दु:ख कब चुकेगा<br />
तूफ़ान यह दिल में कब रुकेगा<br />
मुझपे कोई एतबार कर ले<br />
मुझसे कोई प्यार कर ले...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">चेहरा जो दिल को अपना लगेगा<br />
समा जो बस इक सपना लगेगा<br />
वह उस ख़ाब में मुझको बुला ले<br />
मुझसे कोई प्यार कर ले...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">वह हुस्न की जादूगरी हो न हो<br />
वह महजबीं या परी हो न हो<br />
बस मुझे अपनी तक़दीर बना ले<br />
मुझपे कोई एतबार कर ले...</span></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[मैं सबसे बुरा था ]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=973</link>
<pubDate>Wed, 21 May 2008 17:46:54 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=973</guid>
<description><![CDATA[मैं सबसे बुरा था
सबसे बुरा हूँ
सबसे बु]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">मैं सबसे बुरा था<br />
सबसे बुरा हूँ<br />
सबसे बुरा ही रहूँगा<br />
मैं जी रहा था<br />
जी रहा हूँ<br />
ऐसे ही जीता रहूँगा</span></p>
<p><span style="color:#000000;">उसने मुझको सदा ख़ुशबू के<br />
इक बादल के पार देखा<br />
और मैं चाह कर भी कभी<br />
उसको इस तरह न देखूँगा</span></p>
<p><span style="color:#000000;">मैं सबसे बुरा था<br />
सबसे बुरा हूँ<br />
सबसे बुरा ही रहूँगा</span></p>
<p><span style="color:#000000;">आईने उसकी आँखों के<br />
मुझको ढूँढ़ते रहे, जाने क्यों?<br />
और मैं अक्स उन आईनों का<br />
कभी भी न बनूँगा...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">मैं जी रहा था<br />
जी रहा हूँ<br />
ऐसे ही जीता रहूँगा</span></p>
<p><span style="color:#000000;">इक मतलब ही तो है<br />
मुझसे जुड़ता हर नया रिश्ता<br />
और मैं ऐसे रिश्तों से कभी<br />
कोई जज़्बात न रखूँगा...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">मैं सबसे बुरा था<br />
सबसे बुरा हूँ<br />
सबसे बुरा ही रहूँगा</span></p>
<p><span style="color:#000000;">हर शै पर हुक़ूमत करना<br />
मेरी सबसे बुरी आदत है<br />
और मैं अपनी यह आदत<br />
जानकर भी न बदलूँगा...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">मैं जी रहा था<br />
जी रहा हूँ<br />
ऐसे ही जीता रहूँगा</span></p>
<p><span style="color:#000000;">अच्छा या बुरा जो भी समझो<br />
यह तुम्हारी अपनी सोच है<br />
और मैं किसी के लिए<br />
ख़ुद को कभी न बदलूँगा...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">मैं सबसे बुरा था<br />
सबसे बुरा हूँ<br />
सबसे बुरा ही रहूँगा</span></p>
<p><span style="color:#000000;">वह किसी ग़ैर के पास जाता है<br />
तो चला जाये, बेपरवाह!<br />
और मैं उसके बेवफ़ा रुख़ का<br />
कभी अफ़सोस न करूँगा...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">मैं जी रहा था<br />
जी रहा हूँ<br />
ऐसे ही जीता रहूँगा</span></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[इश्क़ सुना है हमने बहुत]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=972</link>
<pubDate>Sun, 11 May 2008 13:33:10 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=972</guid>
<description><![CDATA[इश्क़ सुना है हमने बहुत
ज़रा करके तो देख]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">इश्क़ सुना है हमने बहुत<br />
ज़रा करके तो देखें<br />
मिल जाये कोई कमसिन हसीना<br />
उसपे मरके तो देखें<br />
हाए रे हाए, हाए रे हाए<br />
इश्क़ करके तो देखें</span></p>
<p><span style="color:#000000;">सुना है हसीं होता है इश्क़<br />
इश्क़ में सभी मौसम हसीं हो जाते हैं<br />
ख़ुश्बू है कोई, हाथों से छुई<br />
मुरझाये गुल, ताज़ा-तरीं हो जाते हैं</span></p>
<p><span style="color:#000000;">मिल जाये कोई कमसिन हसीना<br />
उसपे मरके तो देखें<br />
हाए रे हाए, हाए रे हाए<br />
इश्क़ करके तो देखें</span></p>
<p><span style="color:#000000;">कोई फुलझड़ी, कोई रूबीना<br />
कभी तो पास आये, लौ से लौ लगाये<br />
आये ज़रा, लगके मेरे गले<br />
दिल की प्यास बुझाये, बे-तस्कीं मिटाये</span></p>
<p><span style="color:#000000;">अब तक हसीं, देखे कई<br />
वह तो इनमें नहीं हैं<br />
हाए रे हाए, हाए रे हाए<br />
वह तो और कहीं हैं</span></p>
<p><span style="color:#000000;">कमबख़्त यह दिल परेशाँ<br />
जलता है ख़ुद, मुझको जलाता भी है<br />
ऐ मेरे ख़ुदा क्या मुझसे गिला<br />
तू क्यों मुझको उससे मिलाता नहीं है<br />
</span></p>
<p><span style="color:#000000;">इश्क़ सुना है हमने बहुत<br />
ज़रा करके तो देखें...</span></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[खिली-खिली महकी बहारें हैं]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=971</link>
<pubDate>Wed, 07 May 2008 02:35:50 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=971</guid>
<description><![CDATA[खिली-खिली महकी बहारें हैं
झीलों पर बहत]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">खिली-खिली महकी बहारें हैं<br />
झीलों पर बहते शिकारें हैं<br />
ठण्डी-ठण्डी सौंधी हवाएँ हैं<br />
गीले पत्तों को खनकाएँ हैं</span></p>
<p><span style="color:#000000;">जाने कैसी तलब जागी है<br />
जाने किसका इन्तिज़ार है<br />
बेज़ार-सा यह दिल मेरा<br />
किसके लिए गुलज़ार है</span></p>
<p><span style="color:#000000;">आज ऐसा क्यों लग रहा है<br />
नये-नये सब नज़ारें हैं<br />
खिली-खिली महकी बहारें हैं<br />
झीलों पर बहते शिकारें हैं</span></p>
<p><span style="color:#000000;">शबनमी रातों का यह चाँद<br />
और उजली-उजली चाँदनी<br />
आइनाए-दिल में कौन यार है<br />
इश्क़ जिससे वजहसार है</span></p>
<p><span style="color:#000000;">बंजर ज़मीने-दिल से आज<br />
उलझे हुए मखमली धारे हैं<br />
खिली-खिली महकी बहारें हैं<br />
झीलों पर बहते शिकारें हैं</span></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति 'नज़र'<br />
लेखन वर्ष: २००४</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[धुँधलियाँ]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=970</link>
<pubDate>Mon, 28 Apr 2008 18:02:06 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=970</guid>
<description><![CDATA[धुँधलियाँ-धुँधलियाँ
तेरी यादों की धु]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">धुँधलियाँ-धुँधलियाँ<br />
तेरी यादों की धुँधलियाँ<br />
छायी हैं ज़हन पर<br />
तेरी बातों की बदलियाँ</span></p>
<p><span style="color:#000000;">नज़दीकियाँ नज़दीकियाँ<br />
तेरी मुझसे नज़दीकियाँ</span></p>
<p><span style="color:#000000;">अहसास हो क़रीबी का<br />
मिज़ाज हो ख़ुशनसीबी का<br />
बदले हैं रंग फ़िज़ाओं ने<br />
नूर हो माह रकाबी का</span></p>
<p><span style="color:#000000;">धुँधलियाँ धुँधलियाँ<br />
तेरी यादों की धुँधलियाँ<br />
छायी हैं ज़हन पर<br />
तेरी बातों की बदलियाँ</span></p>
<p><span style="color:#000000;">बिजलियाँ बिजलियाँ<br />
तेरे रूप की बिजलियाँ</span></p>
<p><span style="color:#000000;">जिस्म रेशमी आग का<br />
चिकने मखमली आफ़ताब का<br />
ख़ुशरू पे बैठी हैं मुस्कियाँ<br />
उतरा है रंग हिजाब का</span></p>
<p><span style="color:#000000;">धुँधलियाँ धुँधलियाँ<br />
तेरी यादों की धुँधलियाँ<br />
छायी हैं ज़हन पर<br />
तेरी बातों की बदलियाँ</span></p>
<p><span style="color:#000000;">तब्दीलियाँ तब्दीलियाँ<br />
मुझमें इतनी तब्दीलियाँ</span></p>
<p><span style="color:#000000;">भूल गया सारी मजबूरियाँ<br />
दूर हो गयीं सब दूरियाँ</span></p>
<p><span style="color:#000000;">तब्दीलियाँ तब्दीलियाँ<br />
मुझमें इतनी तब्दीलियाँ<br />
छायी हैं ज़हन पर<br />
तेरी बातों की बदलियाँ</span></p>
<p><span style="color:#000000;">नज़दीकियाँ नज़दीकियाँ<br />
तेरी मुझसे नज़दीकियाँ</span></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[वह कब आयेगी]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=969</link>
<pubDate>Sat, 26 Apr 2008 10:43:40 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=969</guid>
<description><![CDATA[वह कब आयेगी जो मुझे चाहेगी
जिसका इ‍ंति]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">वह कब आयेगी जो मुझे चाहेगी<br />
जिसका इ‍ंतिज़ार करता हूँ यारा<br />
जिसके लिए फिरता हूँ मारा-मारा<br />
वह कब आयेगी जो मुझे चाहेगी<br />
वह कब आयेगी जो मुझे चाहेगी</span></p>
<p><span style="color:#000000;">हमने राहों में लाखों हसीं देखे हैं<br />
उनकी बाँहों में हमनशीं देखे हैं<br />
मेरी कब कोई हमनशीं होगी<br />
हाँ, मेरी कब कोई हमनशीं होगी<br />
वह जो मेरी जान जाँनशीं होगी</span></p>
<p><span style="color:#000000;">वह कब आयेगी जो मुझे चाहेगी<br />
अपना बनाके मुझे इश्क़ सिखायेगी<br />
वह कब आयेगी जो मुझे चाहेगी</span></p>
<p><span style="color:#000000;">सोचो बीस बरस गुज़रे तन्हा-तन्हा<br />
अब न रहना मुझे तन्हा-तन्हा<br />
कह दो उसे जाकर मुझे दरस दे<br />
न मुझे दूरी का इक और बरस दे<br />
मेरी जान में जान कब आयेगी</span></p>
<p><span style="color:#000000;">वह कब आयेगी जो मुझे चाहेगी<br />
जिसका इ‍ंतिज़ार करता हूँ यारा<br />
जिसके लिए फिरता हूँ मारा-मारा</span></p>
<p><span style="color:#000000;">उससे कहो अपनी इक झलक दे<br />
ज़मीं तो मिली है थोड़ा फ़लक़ दे<br />
अब जिस्म से जान, अब जायेगी<br />
वह मुझे और कितना तड़पायेगी<br />
विरह की सूनी रतियाँ सुलगायेगी</span></p>
<p><span style="color:#000000;">वह अब आयेगी जो मुझे चाहेगी<br />
जिसका इंतिज़ार करता हूँ यारा<br />
जिसके लिए फिरता हूँ मारा-मारा</span></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४</p>
]]></content:encoded>
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<item>
<title><![CDATA[वह दिल में एक मस्जिद है]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=968</link>
<pubDate>Mon, 21 Apr 2008 18:12:31 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=968</guid>
<description><![CDATA[वह दिल में एक मस्जिद है
जिसमें रोज़ नमा]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">वह दिल में एक मस्जिद है<br />
जिसमें रोज़ नमाज़ अदा करता हूँ<br />
वह मन मन्दिर की देवी है<br />
जिसकी साँझ-सवेरे पूजा करता हूँ</span></p>
<p><span style="color:#000000;">मैं ख़तावार हूँ गुनाहे-इश्क़ का<br />
उसके दर पे रोज़ सजदे करता हूँ<br />
वह संगदिल है नरम दिल भी<br />
अपनी जान उसके सदक़े करता हूँ</span></p>
<p><span style="color:#000000;">मैंने उसके नाम से जीना जाना है<br />
मैं बेपनाह उससे मोहब्बत करता हूँ<br />
सारे जहाँ में वह ख़ुदा है मेरा<br />
मैं सिर्फ़ उसकी अक़ीदत करता हूँ</span></p>
<p><span style="color:#000000;">मैं तलबगार हूँ उसके दिल का<br />
अपना यह दिल उसके नाम करता हूँ<br />
वह सिर्फ़ो-सिर्फ़ मेरा है बस<br />
मैं हर मुक़ाबिल को पैग़ाम करता हूँ</span></p>
<p><span style="color:#000000;">" कोई एक भी नहीं मुझसा ज़माने में<br />
  एक दौर गुज़ार दोगे आज़माने में<br />
  हर हाल में जीतना मेरी फ़ितरत है<br />
  सौ उम्र लगा दोगे मुझको मिटाने में "</span></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति 'नज़र'<br />
लेखन वर्ष: २००४</p>
]]></content:encoded>
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<item>
<title><![CDATA[रात चाँदनी का दरया हुई]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=967</link>
<pubDate>Fri, 18 Apr 2008 08:10:08 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=967</guid>
<description><![CDATA[रात चाँदनी का दरया हुई
चल चाँद की कश्त]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">रात चाँदनी का दरया हुई<br />
चल चाँद की कश्ती में दूर चलें<br />
बादलों के पीछे,<br />
तारों की छाँव में...<br />
प्यार का हसीन कसूर करें</span></p>
<p><span style="color:#000000;">आज दिल दिल के क़रीब है<br />
आज मोहब्बत ख़ुशनसीब है<br />
तेरा मुझसे मिलना,<br />
इत्तिफ़ाक़ नहीं...<br />
क्यों हम एक-दूसरे से दूर रहें</span></p>
<p><span style="color:#000000;">रात चाँदनी का दरया हुई<br />
चल चाँद की कश्ती में दूर चलें</span></p>
<p><span style="color:#000000;">गुलाबी फूल दिलों में खिले हैं<br />
नयी ख़ुशबू जिस्मों में घुले है<br />
और कोई हुस्न नहीं,<br />
शाम-सी रस्म नहीं...<br />
हम निभाते इश्क़ के दस्तूर रहें</span></p>
<p><span style="color:#000000;">रात चाँदनी का दरया हुई<br />
चल चाँद की कश्ती में दूर चलें</span></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>

</channel>
</rss>
