उलझे हुए दिल में तेरी कमी-सी क्यों है क्या बात है आँखों में नमी-सी क्यों है तेरी किस बात से यह दिल थम गया दिल में हर धड़कन सहमी-सी क्यों है क्या हुआ किस बात से ये दिल टूट गया टूटे हुए दिल में ये नरमी-स… more →
चाँद, बादल और शामwrote 4 years ago: नहीं आसाँ तो मुश्किल ही सही मुझको मोहब्बत है’ तुम से ही नाज़ है तुम्हें’ थोड़ा ग़ुरूर मुझ … more →
wrote 4 years ago: नहीं आसाँ तो मुश्किल ही सही मुझको मोहब्बत है’ तुम से ही नाज़ है तुम्हें’ थोड़ा ग़ुरूर मुझ … more →
wrote 4 years ago: हुआ है आज उनका फ़ैसला मेरे ख़िलाफ़ सुनने में आया है न करेंगे मुझे मुआफ़ उस ने एक भी मौक़ा न दिया मुझ को … more →
wrote 4 years ago: हुआ है आज उनका फ़ैसला मेरे ख़िलाफ़ सुनने में आया है न करेंगे मुझे मुआफ़ उस ने एक भी मौक़ा न दिया मुझ को … more →
wrote 4 years ago: वह मुस्कुराया और रूठा भी वह सच्चा है और झूठा भी दूर था तो क़रीब था दिल के उसकी बात से दिल टूटा भी इक … more →
wrote 4 years ago: वह मुस्कुराया और रूठा भी वह सच्चा है और झूठा भी दूर था तो क़रीब था दिल के उसकी बात से दिल टूटा भी इक … more →
wrote 4 years ago: सहर-ब-सहर1 मैं ढूँढ़ता रहा शुआएँ2 कहाँ छिप गयीं नूर-सी रोशन निगाहें न कोई घर रहा मेरा न कोई ठिकाना म … more →
wrote 4 years ago: सहर-ब-सहर1 मैं ढूँढ़ता रहा शुआएँ2 कहाँ छिप गयीं नूर-सी रोशन निगाहें न कोई घर रहा मेरा न कोई ठिकाना म … more →
wrote 4 years ago: कैसे मिलूँ तुमसे जो न मिलना चाहो चला चलूँ अगर साथ चलना चाहो नहीं कहते हो मुझ से हर बार तुम करूँ क्या … more →
wrote 4 years ago: कैसे मिलूँ तुमसे जो न मिलना चाहो चला चलूँ अगर साथ चलना चाहो नहीं कहते हो मुझ से हर बार तुम करूँ क्या … more →
wrote 4 years ago: तेरी तीरे-नज़र किस अदा से यार उठती है रह-रहकर रुक-रुककर बार-बार उठती है हम बीमारि-ए-इश्क़ के मारे हुए … more →
wrote 4 years ago: तेरी तीरे-नज़र किस अदा से यार उठती है रह-रहकर रुक-रुककर बार-बार उठती है हम बीमारि-ए-इश्क़ के मारे हुए … more →
wrote 4 years ago: दाग़े-शबे-हिज्राँ बुझाये नहीं बुझते आँसू बहते हैं इतना छुपाये नहीं छिपते होता है कभी, शाम आती है चाँ … more →
wrote 4 years ago: दाग़े-शबे-हिज्राँ बुझाये नहीं बुझते आँसू बहते हैं इतना छुपाये नहीं छिपते होता है कभी, शाम आती है चाँ … more →
wrote 4 years ago: वह मुझसे बहुत नफ़रत करता है जाने सही करता है या ग़लत करता है वह मुझे नहीं चाहता, जानता हूँ मैं दिल फि … more →
wrote 4 years ago: वह मुझसे बहुत नफ़रत करता है जाने सही करता है या ग़लत करता है वह मुझे नहीं चाहता, जानता हूँ मैं दिल फि … more →
wrote 4 years ago: यह सोज़गाह1 है कि मेरा दिल है मुझको जलाने वाला मेरा क़ातिल है जिसे देखकर उसे रश्क़2 आता है वह कोई और नह … more →
wrote 4 years ago: यह सोज़गाह1 है कि मेरा दिल है मुझको जलाने वाला मेरा क़ातिल है जिसे देखकर उसे रश्क़2 आता है वह कोई और नह … more →
wrote 4 years ago: मेरी मोहब्बत को समझते हो तुम ग़लत, ग़लत नहीं है तुमको चाहा है मैंने अगर इसमें कुछ ग़लत नहीं है दिखा … more →