विनय प्रजापति wrote 11 months ago: कभी तू आये ख़ाब में मेरे हाथ पकड़ के ये … more →
विनय प्रजापति wrote 11 months ago: चेहरों की भीड़ में रहता हूँ इसलिए कि त … more →
विनय प्रजापति wrote 11 months ago: मेरे ज़हन से बुरा और क्या होगा शायद मेर … more →
विनय प्रजापति wrote 11 months ago: ये बादलों के घट रिस रहे हैं भीग रही है ह … more →
विनय प्रजापति wrote 11 months ago: क़तरे हुए कुछ लफ़्ज़ अटके हुए हैं ज़बाँ के … more →
विनय प्रजापति wrote 11 months ago: हमने बड़े हौसले से यह दीवारें खड़ी की … more →
विनय प्रजापति wrote 11 months ago: ग़मज़दा, सहमी हुई रात के हाथों में मेंहद … more →
विनय प्रजापति wrote 11 months ago: जाफ़रानी आस्माँ में जब चाँद गुलाबी बाद … more →
विनय प्रजापति wrote 11 months ago: बीते दिनों की गलियों में जब पाँव पड़ते … more →
विनय प्रजापति wrote 11 months ago: ख़ुदा तुमको मुझसे न छीने है क़सम वरना म … more →
विनय प्रजापति wrote 11 months ago: अनछुआ-सा इक दिन गुज़र गया अनछुई-सी एक रा … more →
विनय प्रजापति wrote 11 months ago: सर्दियाँ हैं छत पर लेटी हुई है, कोहरे स … more →
विनय प्रजापति wrote 11 months ago: ज़िन्दगी अजब मोड़ पर आकर थम-सी गयी है रु … more →
विनय प्रजापति wrote 11 months ago: शाम आती है तो धड़कनें वज़नी होकर टूटने … more →
विनय प्रजापति wrote 11 months ago: इक किताब हूँ मैं जिसे खु़द लिखा करता ह … more →
विनय प्रजापति wrote 11 months ago: ये जो कोरा काग़ज़ है मेरी ज़िन्दगी-सा है क … more →
विनय प्रजापति wrote 11 months ago: गुलाबी बादलों के साये चाँद पर हैं छाये … more →
विनय प्रजापति wrote 11 months ago: तुम गये हो इस तरह से कि मुझे यक़ीन नहीं ह … more →
विनय प्रजापति wrote 11 months ago: एक मौसम जो खु़शबू लाया था एक वह जो कभी आ … more →